Infosys का निवेशकों को तोहफा, तिमाही नतीजों के साथ की डिविडेंड की घोषणा!

गुरुवार को आईटी कंपनी Infosys ने अपने चौथी तिमाही के नतीजों की घोषणा की है. इसमें कंपनी का मुनाफा घटा, लेकिन रेवेन्यू में 8% की ग्रोथ दर्ज हुई है.

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Thursday, 17 April, 2025
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देश की दूसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी इन्फोसिस लिमिटेड (Infosys) ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए 22 रुपये प्रति शेयर के अंतिम डिविडेंड की घोषणा की है. यह डिविडेंड लगभग 10 सालों में सबसे अधिक है. कंपनी ने डिविडेंड के लिए रिकॉर्ड डेट तय कर दी है और भुगतान 30 जून 2025 को किया जाएगा. यह डिविडेंड उन शेयरों पर मिलेगा जिनकी फेस वैल्यू 5 रुपये है. आइए कंपनी के तिमाही नतीजे पर एक नजर डालते हैं.

चौथी तिमाही के नतीजे

चौथी तिमाही में इन्फोसिस का शुद्ध मुनाफा 12% घटकर 7,033 करोड़ रुपये रहा. हालांकि, इसी अवधि में कंपनी का रेवेन्यू 8% बढ़कर 40,925 करोड़ रुपये पहुंच गया. स्थिर मुद्रा (Constant Currency) में रेवेन्यू में 5% की वृद्धि हुई, जबकि तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) इसमें 3.5% की गिरावट आई. डॉलर टर्म्स में रेवेन्यू $4,730 मिलियन रहा, जो सालाना आधार पर 4.8% की ग्रोथ को दर्शाता है.

इतना मिलेगा डिविडेंड 

इन्फोसिस के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 440% डिविडेंड की सिफारिश की है, जिसका मतलब है कि हर शेयरधारक को 22 रुपये प्रति शेयर मिलेंगे. यह डिविडेंड 31 मार्च 2025 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के लिए है. इससे पहले कंपनी ने 21 रुपये प्रति शेयर का अंतरिम डिविडेंड भी घोषित किया था. अब तक इन्फोसिस कुल 48 बार डिविडेंड दे चुकी है और पिछले 12 महीनों में निवेशकों को 49 रुपये प्रति शेयर का कुल डिविडेंड मिल चुका है, जिससे डिविडेंड यील्ड 3.45% रही.

मार्जिन और कैश फ्लो में मजबूती

वित्तीय वर्ष 2024-25 में कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन 21% रहा, जो साल-दर-साल 0.9% बढ़ा. पूरे साल की बात करें तो इन्फोसिस का रेवेन्यू CC में 4.2% बढ़ा और रिपोर्ट किया गया रेवेन्यू 1.63 लाख करोड़ रुपये रहा, जिसमें 6.1% की सालाना बढ़त देखने को मिली. सीईओ और एमडी सलिल पारेख ने कहा कि कंपनी ग्राहकों और कर्मचारियों के भरोसे पर टिकी है, और यही भरोसा उनकी मार्केट-सेंसिटिव रणनीति और बेहतर कैश जेनरेशन की कुंजी है. वित्त वर्ष 2025-26 के लिए इन्फोसिस को उम्मीद है कि उसका रेवेन्यू 0 से 3% के बीच बढ़ेगा, जबकि ऑपरेटिंग मार्जिन 20 से 22% के दायरे में रहने की संभावना है. 

शेयर का प्रदर्शन
गुरुवार को एनएसई पर इन्फोसिस के शेयर 1.03% की बढ़त के साथ 1,427 रुपये पर बंद हुए. हालांकि, पिछले एक महीने में शेयर की कीमत में लगभग 8.84% की गिरावट आई है. इसके बावजूद, एक साल की अवधि में इसमें लगभग 7.65% की वृद्धि देखी गई है. इन्फोसिस का 52-सप्ताह का उच्चतम मूल्य 2,006.45 रुपये और न्यूनतम मूल्य 1,358.35 रुपये रहा है. 

 


महिला आरक्षण विधेयक में झटके के बाद राष्ट्र को संबोधित करेंगे पीएम मोदी

प्रधानमंत्री रात 8:30 बजे संबोधित करेंगे क्योंकि सीमांकन और महिलाओं के कोटे से जुड़े संविधान (131वां संशोधन) विधेयक की हार पर राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है.

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Saturday, 18 April, 2026
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शनिवार को रात 8:30 बजे राष्ट्र को संबोधित करेंगे, मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह उस दिन के बाद हो रहा है जब महिलाओं के आरक्षण पर एक महत्वपूर्ण विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो सका.

इस संबोधन में विधायिकाओं में महिलाओं के आरक्षण के प्रस्तावित कार्यान्वयन पर ध्यान केंद्रित होने की उम्मीद है, साथ ही संसद में हुए घटनाक्रम पर भी, जहां संविधान (131वां संशोधन) विधेयक को शुक्रवार को विपक्षी दलों ने खारिज कर दिया. उल्लेखनीय है कि मोदी का राष्ट्र के नाम आखिरी संबोधन 21 सितंबर को था, जब उन्होंने जीएसटी सुधारों पर बात की थी.

इस विधेयक में 2029 के आम चुनावों से पहले महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने के लिए लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव था. यह विस्तार 2011 की जनगणना के आधार पर सीमांकन अभ्यास से जुड़ा था. सरकार ने यह भी संकेत दिया था कि कोटा लागू करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी इसी तरह सीटों में वृद्धि की आवश्यकता होगी.

हालांकि, यह विधेयक आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में विफल रहा. मतदान करने वाले 528 सांसदों में से 298 ने विधेयक का समर्थन किया जबकि 230 ने इसका विरोध किया, जो पारित होने के लिए आवश्यक 352 मतों से कम था.

इस परिणाम ने राजनीतिक टकराव को जन्म दिया है, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर महिलाओं के आरक्षण को रोकने का आरोप लगाया. विपक्षी नेताओं, जिनमें राहुल गांधी भी शामिल हैं, ने तर्क दिया कि वे आरक्षण के विचार का समर्थन करते हैं, लेकिन इसे सीमांकन से जोड़ने का विरोध करते हैं.

"कल संसद में वे एक नया विधेयक लेकर आए. उन्होंने कहा कि यह महिला विधेयक है, लेकिन वह पहले ही 2023 में पारित हो चुका था. उस विधेयक के पीछे छिपा एजेंडा सीमांकन था. विचार यह था कि संसद में तमिलनाडु के प्रतिनिधित्व को कम किया जाए और दक्षिणी तथा छोटे राज्यों को कमजोर किया जाए. हमने कल संसद में उस विधेयक को हरा दिया," गांधी ने शनिवार को तमिलनाडु के पोन्नेरी में एक रैली में कहा.

उन्होंने संघवाद पर अपने व्यापक रुख को दोहराते हुए भारत को "राज्यों का संघ" बताया, जहां प्रत्येक राज्य को समान प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए. “हर राज्य की संघ में एक आवाज होनी चाहिए और उसे अपनी भाषा व्यक्त करने और अपनी परंपरा की रक्षा करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए.”

 

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700 अरब डॉलर के पार फिर पहुंचा भारत का विदेशी मुद्रा भंडार, अप्रैल में तेज रिकवरी

देश के गोल्ड रिजर्व में भी वृद्धि दर्ज की गई है. बीते सप्ताह इसकी वैल्यू 601 मिलियन डॉलर बढ़कर 121.343 अरब डॉलर हो गई.

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Saturday, 18 April, 2026
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मार्च में भारी गिरावट के बाद भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) ने अप्रैल में दमदार वापसी की है. लगातार दो हफ्तों की बढ़ोतरी के साथ देश का भंडार फिर से 700 अरब डॉलर के पार पहुंच गया है. अप्रैल के शुरुआती दो हफ्तों में ही इसमें 12 अरब डॉलर से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई है, जो वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.

लगातार दूसरे हफ्ते बढ़ा भंडार

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक 10 अप्रैल 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 3.825 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई. इससे पहले वाले सप्ताह में भी 9.063 अरब डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई थी. इन बढ़ोतरी के साथ कुल विदेशी मुद्रा भंडार 700.946 अरब डॉलर तक पहुंच गया है. इससे पहले 27 फरवरी 2026 को यह 728.494 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर था.

मार्च में आई थी बड़ी गिरावट

मार्च 2026 भारत के विदेशी मुद्रा भंडार के लिए चुनौतीपूर्ण रहा. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक अस्थिरता के चलते पूरे महीने में भंडार से 40 अरब डॉलर से ज्यादा की निकासी हुई थी. हालांकि, अप्रैल में बाजार की स्थिति सुधरने के साथ भंडार में फिर से मजबूती देखने को मिल रही है.

विदेशी मुद्रा आस्तियों (FCA) में उछाल

विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा मानी जाने वाली फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA) में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. समीक्षाधीन सप्ताह में FCA में 3.127 अरब डॉलर की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसके बाद यह बढ़कर 555.983 अरब डॉलर हो गया. इसमें यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं के उतार-चढ़ाव का भी असर शामिल होता है.

सोने के भंडार में भी इजाफा

देश के गोल्ड रिजर्व में भी वृद्धि दर्ज की गई है. बीते सप्ताह इसकी वैल्यू 601 मिलियन डॉलर बढ़कर 121.343 अरब डॉलर हो गई. वर्तमान में भारत के पास 880 टन से अधिक सोना है, जो कुल विदेशी मुद्रा भंडार का करीब 15% हिस्सा है. सोने की कीमतों में बदलाव का सीधा असर कुल भंडार पर पड़ता है.

SDR और IMF रिजर्व में हल्की बढ़त

स्पेशल ड्रॉइंग राइट (SDR) में 56 मिलियन डॉलर की मामूली बढ़ोतरी के साथ यह 18.763 अरब डॉलर पर पहुंच गया है. वहीं, International Monetary Fund के पास रखे भारत के रिजर्व में भी 41 मिलियन डॉलर की वृद्धि हुई है, जो अब 4.857 अरब डॉलर हो गया है.

क्या संकेत देता है यह ट्रेंड

अप्रैल में विदेशी मुद्रा भंडार की तेज रिकवरी यह दर्शाती है कि भारत की बाहरी आर्थिक स्थिति फिर से मजबूत हो रही है. इससे रुपये को स्थिरता मिल सकती है और वैश्विक आर्थिक दबावों से निपटने की क्षमता भी बढ़ती है. कुल मिलाकर, मार्च की गिरावट के बाद अप्रैल में आई यह तेजी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरी खबर है.


गोल्ड बॉन्ड ने मचाया धमाका: 5 साल में 205% रिटर्न, ₹1 लाख बने ₹3.05 लाख

2020 में जारी इस SGB सीरीज ने साबित कर दिया है कि सोने में सही समय पर किया गया निवेश लंबी अवधि में बेहद शानदार रिटर्न दे सकता है. 5 साल में 205% का रिटर्न और अतिरिक्त ब्याज इसे एक मजबूत और भरोसेमंद निवेश विकल्प बनाते हैं.

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Saturday, 18 April, 2026
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सोने में निवेश हमेशा से सुरक्षित और भरोसेमंद माना जाता रहा है, लेकिन जब बात सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) की आती है तो यह सिर्फ सुरक्षा ही नहीं बल्कि शानदार रिटर्न का भी उदाहरण बन जाता है. इसका ताजा सबूत RBI द्वारा घोषित 2020-21 सीरीज-VII का रिडेम्पशन है, जिसने निवेशकों को करीब 205% का भारी-भरकम रिटर्न दिया है.

RBI ने तय की ₹15,254 प्रति यूनिट रिडेम्पशन कीमत

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड 2020-21 सीरीज-VII के लिए समय से पहले रिडेम्पशन कीमत ₹15,254 प्रति यूनिट तय की है. यह बॉन्ड 20 अक्टूबर 2020 को जारी हुआ था और निवेशक इसे 20 अप्रैल 2026 से भुना सकते हैं. नियमों के मुताबिक, SGB को जारी होने के 5 साल बाद ब्याज भुगतान की तारीख पर समय से पहले रिडीम करने की सुविधा मिलती है.

कैसे तय होती है SGB की कीमत?

RBI के अनुसार, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की रिडेम्पशन वैल्यू 999 शुद्धता वाले सोने के औसत बाजार भाव पर आधारित होती है. इसके लिए इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा पिछले तीन कार्य दिवसों (15, 16 और 17 अप्रैल 2026) के क्लोजिंग प्राइस का औसत लिया गया, जिसके आधार पर यह कीमत तय की गई.

2020 से 2026 तक: 205% का जबरदस्त रिटर्न

इस सीरीज में 2020 में निवेश की गई कीमत ₹5,001 प्रति ग्राम (ऑनलाइन) थी, जबकि ऑफलाइन कीमत ₹5,051 प्रति ग्राम थी. अब जब रिडेम्पशन कीमत ₹15,254 प्रति यूनिट तय हुई है, तो प्रति यूनिट फायदा करीब ₹10,253 और कुल रिटर्न लगभग 205% (ब्याज को छोड़कर) है. यह प्रदर्शन गोल्ड बॉन्ड को लंबे समय के निवेश के रूप में बेहद आकर्षक बनाता है.

₹1 लाख बना ₹3.05 लाख, ब्याज अलग से

अगर किसी निवेशक ने 2020 में इस सीरीज में ₹1 लाख का निवेश किया होता, तो आज उसकी वैल्यू लगभग ₹3.05 लाख तक पहुंच जाती. इसमें खास बात यह है कि इसमें मिलने वाला 2.5% सालाना ब्याज (जो हर छह महीने में मिलता है) इस रकम से अलग है, जिससे कुल रिटर्न और भी बढ़ जाता है.

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड क्या है?

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) सरकार द्वारा जारी किया जाने वाला एक सुरक्षित निवेश विकल्प है, जो सोने के ग्राम के रूप में होता है. इसमें निवेशक को फिजिकल गोल्ड रखने की जरूरत नहीं होती.

इसके फायदे सोने की कीमतों का सीधा लाभ, सुरक्षित सरकारी निवेश, चोरी या स्टोरेज का कोई जोखिम नहीं है. 

ब्याज और मैच्योरिटी का फायदा

SGB में निवेशकों को 2.5% सालाना फिक्स्ड ब्याज मिलता है, जो हर छह महीने में सीधे बैंक खाते में जमा होता है. मैच्योरिटी या समय से पहले रिडेम्पशन पर निवेशक को मूल राशि के साथ अंतिम ब्याज भी दिया जाता है.

 


जिनेवा का नेटवर्क पाकिस्तान पर प्रभावशाली, भारत की बैंकिंग व्यवस्था में भी मौजूदगी के दावे

इस्लामाबाद के सेरेना होटल में 21 घंटों तक अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वांस और ईरान के संसदीय अध्यक्ष रेड ज़ोन कॉन्फ्रेंस रूम में युद्ध रोकने की कोशिश करते रहे. जब काफिले निकले, तो पाकिस्तानी सरकार होटल का बिल नहीं चुका सकी. लेकिन जिनेवा में पंजीकृत एक निजी संस्था ने आगे आकर भुगतान कर दिया.

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Saturday, 18 April, 2026
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पलक शाह
सेरेना होटल का बिना भुगतान किया गया बिल सिर्फ पाकिस्तान की शर्मिंदगी नहीं था, यह भारत के लिए एक चेतावनी थी. जिनेवा आधारित एक नेटवर्क पाकिस्तान के सबसे बड़े बैंक का मालिक है, उसकी सरकार को आर्थिक सहारा देता है, परमाणु कूटनीति की मेजबानी करता है और 41 वर्षों से ग्रामीण भारत में गहरी पैठ के बाद एक भारतीय अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक में प्रमोटर का दर्जा और बोर्ड तक पहुंच रखता है.

इस्लामाबाद के सेरेना होटल में 21 घंटों तक अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वांस और ईरान के संसदीय अध्यक्ष रेड जोन कॉन्फ्रेंस रूम में युद्ध रोकने की कोशिश करते रहे. जब काफिले निकले, तो पाकिस्तानी सरकार होटल का बिल नहीं चुका सकी. लेकिन जिनेवा में पंजीकृत एक निजी संस्था ने आगे आकर भुगतान कर दिया.

यह केवल “चैरिटी” नहीं था, बल्कि एक “गुडविल जेस्चर” जैसा था. 24 करोड़ आबादी वाला परमाणु संपन्न देश, जिसकी दुनिया की छठी सबसे बड़ी सेना है, उसे अपने ही देश में हुए सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक आयोजन के लिए एक होटल मालिक से सहायता लेनी पड़ी.

वह मालिक था आगा खान डेवलपमेंट नेटवर्क.

पाकिस्तान में समानांतर प्रभाव और नियंत्रण

यह वही नेटवर्क है जो अब पाकिस्तान में सह-शासक जैसी भूमिका निभा रहा है. यह न केवल पाकिस्तान के वित्तीय ढांचे में गहराई तक मौजूद है, बल्कि भारत के वित्तीय सिस्टम और ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसकी मजबूत मौजूदगी है. यह कहानी केवल परोपकार की नहीं है, बल्कि शक्ति और नियंत्रण की है.

पाकिस्तान पर वास्तविक नियंत्रण

AKFED (आगा खान फंड फॉर इकोनॉमिक डेवलपमेंट) पाकिस्तान के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक हबीब बैंक लिमिटेड में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है. यह बैंक 1,700 शाखाओं और 3.7 करोड़ ग्राहकों के साथ पाकिस्तान की वित्तीय रीढ़ है.

यह सेरेना होटल चेन का मालिक है, जो परमाणु दौर की कूटनीति के लिए सुरक्षित मानी जाती है. यह देश के सबसे संवेदनशील उत्तरी क्षेत्रों में अस्पताल, स्कूल और टेलीकॉम सेवाएं भी चलाता है.

जब पाकिस्तान को किसी बड़े आयोजन की जरूरत होती है, तो उसे AKFED पर निर्भर रहना पड़ता है. और जब वह भुगतान नहीं कर पाता, तो AKFED भुगतान करता है. यह व्यापार नहीं बल्कि गहरी संरक्षक व्यवस्था है. इसका केंद्र जिनेवा में है.

आगा खान तृतीय, जिन्होंने इस संस्था की नींव रखी, पाकिस्तान आंदोलन और मोहम्मद अली जिन्ना की ऑल इंडिया मुस्लिम लीग के प्रमुख समर्थकों में से थे. उनकी वंश परंपरा अब आगा खान नेटवर्क का संचालन करती है.

स्विट्जरलैंड का पुराना उदाहरण, भारत पर प्रभाव

दिसंबर 1999. कंधार एयरपोर्ट का रनवे.

पाकिस्तान आधारित आतंकियों ने IC-814 विमान का अपहरण किया. अपहरणकर्ताओं को यह नहीं पता था कि एक यात्री रॉबर्टो जियोरी थे, स्विस-इटैलियन उद्योगपति, जिनकी कंपनी दुनिया के लगभग 90 प्रतिशत बैंक नोट छापती थी.

इसके बाद स्विस सरकार सक्रिय हो गई. एक विशेष संकट सेल सीधे फेडरल काउंसिल को रिपोर्ट करने लगा.

तत्कालीन विदेश मंत्री जोसेफ डीस ने जसवंत सिंह को फोन कर कहा: “जियोरी को सुरक्षित करने के लिए हर संभव प्रयास किया जाए.” स्विट्जरलैंड ने अपने राजदूत को तालिबान क्षेत्र में भेजा, जो एक तटस्थ देश के लिए असाधारण कदम था. अमेरिका ने भी “आर्थिक स्थिरता” का हवाला देकर दबाव का समर्थन किया.

भारत ने तीन आतंकियों को रिहा कर दिया, जिनमें मसूद अजहर भी शामिल था. बाद में उसने जैश-ए-मोहम्मद की स्थापना की.

भारत में गहरी मौजूदगी

1977 से AKFED भारत के वित्तीय ढांचे में मौजूद है. यह HDFC लिमिटेड के सह-संस्थापकों में शामिल था, जो आज भारत के सबसे बड़े निजी बैंक का आधार है.

वर्तमान में AKFED और इसकी सहयोगी संस्था प्लैटिनम जुबली इन्वेस्टमेंट्स DCB बैंक के आधिकारिक प्रमोटर हैं, जो एक RBI-मान्यता प्राप्त वाणिज्यिक बैंक है, जिसमें 469 शाखाएं और 25 लाख ग्राहक हैं.

गुजरात में आगा खान रूरल सपोर्ट प्रोग्राम 41 वर्षों से 3,500 से अधिक गांवों में काम कर रहा है, जिससे लगभग 40 लाख लोगों के जीवन से जुड़ा डेटा एकत्र किया गया है.

गंभीर नियामकीय सवाल

2017 में न्यूयॉर्क के नियामकों ने AKFED के नियंत्रण वाले हबीब बैंक पर 225 मिलियन डॉलर का जुर्माना लगाया था. आरोपों में आतंक वित्तपोषण और मनी लॉन्ड्रिंग शामिल थे. इसके बावजूद भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा इसे DCB बैंक के “फिट एंड प्रॉपर” प्रमोटर के रूप में बनाए रखने और 2025 में हिस्सेदारी बढ़ाने की अनुमति देने पर सवाल उठते हैं.

प्रधानमंत्री कार्यालय के सामने उठने वाले सवाल

1. क्या 2017 के अमेरिकी आदेश के बाद RBI ने AKFED की दोबारा पूर्ण जांच की?
2. क्या इसके वास्तविक मालिक और फंडिंग स्रोतों की जांच हुई?
3. क्या इसके ग्रामीण भारत में 41 वर्षों से एकत्र डेटा की निगरानी किसी एजेंसी ने की?
4. क्या पाकिस्तान और भारत के बीच डेटा सुरक्षा के लिए कोई फायरवॉल मौजूद है?
5. क्या एक ऐसे नेटवर्क को भारतीय बैंक में प्रमोटर बने रहने दिया जाना चाहिए जो पड़ोसी देश में सह-शासक जैसी भूमिका निभाता है?

भारत ने वर्षों से विदेशी संरचनाओं पर सख्त निगरानी व्यवस्था बनाई है. यह उसी प्रणाली को लागू करने का समय है.

सेरेना होटल का बिना भुगतान किया गया बिल पाकिस्तान की शर्मिंदगी नहीं, भारत के लिए चेतावनी संकेत है.

जो नेटवर्क चुपचाप पाकिस्तान की व्यवस्था में गहराई से जुड़ा है, वह लगभग 50 वर्षों से भारत में भी मौजूद है. अब सवाल यह नहीं है कि किसी ने इसे देखा या नहीं, सवाल यह है कि क्या शीर्ष स्तर पर अब इस पर कार्रवाई होगी.

सभी तथ्य सार्वजनिक रिकॉर्ड, RBI फाइलिंग, अमेरिकी नियामकीय आदेश, AKDN के बयानों और अप्रैल 2026 की रिपोर्टिंग पर आधारित हैं. यह किसी व्यक्ति पर आरोप नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर प्रश्न हैं.

AKFED, DCB बैंक और संबंधित सभी संस्थानों से प्रतिक्रिया अपेक्षित है.

पलक शाह, BW रिपोर्टर्स

(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free के लेखक हैं. लगभग दो दशकों के अनुभव के साथ, उन्होंने मुंबई में जमीनी रिपोर्टिंग करते हुए पैसे, ताकत और नियमों के गठजोड़ को उजागर किया है. उनके लेख The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line जैसे प्रमुख प्रकाशनों में प्रकाशित हुए हैं. 19 साल की उम्र में अपराध पत्रकारिता से शुरुआत करने वाले पलक ने जल्द ही समझ लिया कि 1980 के दशक के गैंगवार अब कॉरपोरेट अपराध में बदल चुके हैं. इसी ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने बाजार हेरफेर और सिस्टम की खामियों को उजागर किया.)
 


सरकार का बड़ा फैसला, 15 बैंकों को 3 साल तक सोना-चांदी आयात की मंजूरी

सरकार का यह कदम बाजार में सप्लाई चेन को मजबूत करने और कीमतों में संतुलन बनाए रखने की दिशा में अहम माना जा रहा है.

Last Modified:
Saturday, 18 April, 2026
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आम लोगों के लिए सोने-चांदी के दाम में राहत की उम्मीद बढ़ सकती है. केंद्र सरकार ने देश के 15 प्रमुख बैंकों को अगले तीन साल तक सोना और चांदी आयात करने की अनुमति दी है. इस फैसले का मकसद घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाना, कीमतों को स्थिर रखना और ज्वेलरी एक्सपोर्ट को बढ़ावा देना है.

तीन साल के लिए वैध होगा लाइसेंस

यह अनुमति 1 अप्रैल 2026 से लागू मानी जाएगी और 31 मार्च 2029 तक प्रभावी रहेगी. आमतौर पर यह मंजूरी हर साल दी जाती थी, लेकिन इस बार इसे तीन साल के लिए बढ़ाना एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है. इससे बैंकों और कारोबारियों को लंबी अवधि की योजना बनाने में सहूलियत मिलेगी.

देरी से अटका रहा आयात

विदेश व्यापार महानिदेशालय की अधिसूचना जारी होने में देरी के कारण सोना-चांदी का आयात अस्थायी रूप से रुक गया था. इससे करीब 5 मीट्रिक टन सोना और 8 मीट्रिक टन चांदी कस्टम क्लीयरेंस के लिए फंसी रही. इससे पहले भारतीय रिजर्व बैंक ने 6 अप्रैल को बैंकों की सूची जारी कर दी थी, लेकिन DGFT की मंजूरी के बिना आयात संभव नहीं था.

त्योहार से पहले बढ़ी चिंता, अब राहत

अक्षय तृतीया जैसे बड़े त्योहार से पहले इस देरी ने बाजार में अनिश्चितता पैदा कर दी थी. यह समय आमतौर पर सोने-चांदी की सबसे ज्यादा मांग का होता है. हालांकि अब मंजूरी मिलते ही कस्टम विभाग ने क्लियरेंस प्रक्रिया को तेज करने की बात कही है.

किन बैंकों को मिली अनुमति

इस सूची में Axis Bank, Bank of India, HDFC Bank, Federal Bank और Industrial and Commercial Bank of China जैसे बैंक शामिल हैं. इसके अलावा Deutsche Bank, Indian Overseas Bank और Punjab National Bank को भी इस बार सूची में जोड़ा गया है. वहीं Union Bank of India और Sberbank को केवल सोना आयात करने की अनुमति दी गई है.

ज्वेलरी इंडस्ट्री को मिलेगा फायदा

उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से ज्वेलरी सेक्टर को मजबूती मिलेगी. पर्याप्त आपूर्ति से कीमतों में स्थिरता आएगी और निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा. साथ ही, त्योहारों और शादी के सीजन में ग्राहकों को बेहतर विकल्प मिल सकते हैं.

 


भारत के मसाला उद्योग को नई ऊंचाई देने के लिए ‘वैल्यू शिफ्ट’ की जरूरत: विशेषज्ञ

सरकार के “विकसित भारत 2047” विजन के तहत भारत को “ग्लोबल फूड बास्केट” बनाने में मसाला उद्योग की अहम भूमिका रहने की उम्मीद है.

Last Modified:
Saturday, 18 April, 2026
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भारत के मसाला उद्योग को अगले स्तर पर ले जाने के लिए अब मात्रा आधारित मॉडल से हटकर गुणवत्ता, नवाचार और वैश्विक ब्रांडिंग पर आधारित वैल्यू-ड्रिवन मॉडल अपनाना जरूरी है. यह बात उद्योग विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं ने कही. यह सुझाव ऐसे समय में आया है जब देश के मसाला बाजार के आकार को दोगुना करने की कोशिशें चल रही हैं. इस दौरान किसानों को वैल्यू चेन से जोड़ने, रिसर्च और टेक्नोलॉजी में निवेश बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों का पालन मजबूत करने पर जोर दिया गया.

हाई-वैल्यू सेगमेंट में बढ़त जरूरी

भारत मसाला सम्मेलन 2026 में बोलते हुए केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि मसाला व्यापार में भारत की ऐतिहासिक बढ़त को अब हाई-वैल्यू और प्रोसेस्ड उत्पादों में नेतृत्व में बदलने की जरूरत है. भारत दुनिया के 109 मान्यता प्राप्त मसालों में से 60 से अधिक का उत्पादन करता है और 200 से ज्यादा देशों को निर्यात करता है, लेकिन अभी भी निर्यात का बड़ा हिस्सा कच्चे या कम वैल्यू वाले उत्पादों का है.

वॉल्यूम से वैल्यू की ओर बदलाव जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि प्रोसेस्ड, ब्रांडेड और फंक्शनल प्रोडक्ट्स जैसे वैल्यू एडिशन पर ध्यान देने से निर्यात आय और किसानों की आमदनी दोनों बढ़ सकती हैं. सरकार इस बदलाव को बढ़ावा देने के लिए 100% विदेशी निवेश (FDI) और प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिककरण योजना (PMFME) जैसी योजनाओं के जरिए समर्थन दे रही है. मंत्री ने यह भी कहा कि न्यूट्रास्यूटिकल्स और वेलनेस प्रोडक्ट्स जैसे उभरते क्षेत्रों में मसालों के उपयोग से नए अवसर पैदा हो सकते हैं.

क्वालिटी और स्टैंडर्ड पर फोकस जरूरी

विशेषज्ञों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भरोसा बढ़ाने के लिए गुणवत्ता नियंत्रण मजबूत करना बेहद जरूरी है. अनिल राजपूत ने कहा कि प्राकृतिक और हेल्थ-ओरिएंटेड प्रोडक्ट्स की बढ़ती मांग भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ा मौका है. उन्होंने टिकाऊ (सस्टेनेबल) और ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया, क्योंकि वैश्विक खरीदार अब सख्त सुरक्षा और पर्यावरण मानकों को प्राथमिकता दे रहे हैं.

ग्लोबल ब्रांडिंग पर देना होगा ध्यान

रणजीत मेहता ने कहा कि भारत को अब वैश्विक स्तर पर मजबूत ब्रांड बनाने पर ध्यान देना होगा. उन्होंने कहा, “भारत के पास उत्पादन और परंपरा की मजबूत नींव है, अब इसे ग्लोबल ब्रांड लीडरशिप में बदलने की जरूरत है.”

किसानों और MSME को सशक्त बनाना जरूरी

जे डी देसाई ने कहा कि किसानों और MSME सेक्टर की क्षमता बढ़ाना समावेशी विकास के लिए जरूरी है. उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर भारतीय मसालों को प्रीमियम उत्पाद के रूप में पेश किया जा सकता है.

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय और भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में यह निष्कर्ष निकला कि गुणवत्ता सुधार, वैल्यू एडिशन और वैश्विक मांग के अनुसार उत्पादन से भारत अपने मसाला उद्योग को नई ऊंचाई पर ले जा सकता है.

 

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बारिश से प्रभावित फसल पर राहत: गेहूं के गुणवत्ता मानकों में ढील, MSP पर पूरी खरीद का भरोसा

सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि रियायती मानकों के बावजूद किसानों को मिलने वाले न्यूनतम समर्थन मूल्य में कोई कमी नहीं होगी. गेहूं की खरीद ₹2,585 प्रति क्विंटल के MSP पर ही की जाएगी.

Last Modified:
Saturday, 18 April, 2026
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केंद्र सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए 2026-27 विपणन सत्र के लिए गेहूं के गुणवत्ता मानकों में महत्वपूर्ण ढील देने का फैसला किया है. बेमौसम बारिश से प्रभावित फसल को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है, जिससे किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर अपनी उपज बेचने में किसी तरह की परेशानी न हो.

बारिश से प्रभावित फसल के लिए विशेष राहत

कई दिनों की प्रतीक्षा के बाद केंद्र ने पंजाब और चंडीगढ़ में बारिश से प्रभावित गेहूं के लिए गुणवत्ता मानकों में ढील दी है. यह फैसला राज्य सरकार और भारतीय खाद्य निगम (FCI) के अनुरोध पर लिया गया, ताकि खराब मौसम से प्रभावित किसानों को नुकसान से बचाया जा सके.

नए गुणवत्ता मानकों में क्या बदलाव

संशोधित दिशानिर्देशों के तहत अब एफसीआई पंजाब में ऐसे गेहूं की खरीद करेगा जिसमें:

- 70% तक चमक खो चुकी हो
- 15% तक सिकुड़े हुए दाने हों (पहले सीमा 6% थी)
- हल्के और क्षतिग्रस्त दानों की मात्रा भी तय सीमा तक स्वीकार की जाएगी

इस फैसले से बड़ी मात्रा में गेहूं सरकारी खरीद के दायरे में आ सकेगा.

भंडारण और गुणवत्ता की जिम्मेदारी राज्य पर

केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि रियायती मानकों के तहत खरीदे गए गेहूं को अलग से भंडारित और दर्ज किया जाएगा. भंडारण के दौरान गुणवत्ता में किसी भी गिरावट की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी. इसके अलावा, इस श्रेणी में आने वाले गेहूं की समय से पहले खरीद की जाएगी और उससे जुड़ी अतिरिक्त लागत भी राज्य को ही उठानी होगी.

MSP पर कोई कटौती नहीं

सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि रियायती मानकों के बावजूद किसानों को मिलने वाले न्यूनतम समर्थन मूल्य में कोई कमी नहीं होगी. गेहूं की खरीद ₹2,585 प्रति क्विंटल के MSP पर ही की जाएगी.

खरीद प्रक्रिया में तेजी की उम्मीद

विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से केंद्रीय पूल के लिए गेहूं की खरीद में तेजी आएगी और किसानों को राहत मिलेगी. साथ ही, यह कदम कृषि क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने और किसानों के भरोसे को मजबूत करने में मदद करेगा.


अक्षय तृतीया से पहले बड़ी राहत! सस्ता हुआ सोना, चांदी में भी बड़ी गिरावट

त्योहारी सीजन से ठीक पहले सोने और चांदी की कीमतों में आई गिरावट ने बाजार का रुख बदल दिया है. जहां एक ओर निवेशक सतर्क हैं, वहीं आम खरीदारों के लिए यह राहत भरी स्थिति है.

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Saturday, 18 April, 2026
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अक्षय तृतीया से ठीक एक दिन पहले सर्राफा बाजार में सुस्ती देखने को मिली है. सोने की कीमतों में आई गिरावट ने खरीदारों को राहत दी है, जबकि चांदी भी सस्ती हुई है. वैश्विक संकेतों और भूराजनीतिक हालात में नरमी के चलते कीमतों पर दबाव बना हुआ है, जिससे बाजार फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए है.

त्योहार से पहले सोना हुआ सस्ता

अक्षय तृतीया से पहले सोने की कीमतों में आई तेजी पर ब्रेक लग गया है. 18 अप्रैल की सुबह राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट सोना घटकर 1,54,340 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया. इससे पहले भी कीमतों में गिरावट दर्ज की गई थी, जब सोना करीब 1,600 रुपये टूट गया था. मुंबई में भी 24 कैरेट सोने का भाव 1,54,190 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है. यह गिरावट ऐसे समय आई है, जब आमतौर पर त्योहार से पहले सोने की मांग बढ़ती है.

ग्लोबल मार्केट का असर

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमतें सीमित दायरे में बनी हुई हैं. हाजिर सोना करीब 4,786.90 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा है. बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशक अभी भूराजनीतिक तनाव में स्पष्टता का इंतजार कर रहे हैं. इजरायल और लेबनान के बीच अस्थायी युद्धविराम और अमेरिका-ईरान के बीच संभावित सुलह की खबरों ने बाजार में अनिश्चितता को कुछ हद तक कम किया है. इसी कारण सोने की सुरक्षित निवेश वाली मांग थोड़ी कमजोर पड़ी है.

देश के प्रमुख शहरों में गोल्ड रेट

देश के अलग-अलग शहरों में सोने के दाम में मामूली अंतर देखा गया है.

दिल्ली: 22 कैरेट – 1,41,490 रुपये | 24 कैरेट – 1,54,340 रुपये प्रति 10 ग्राम
मुंबई और कोलकाता: 22 कैरेट – 1,41,340 रुपये | 24 कैरेट – 1,54,190 रुपये
चेन्नई: 22 कैरेट – 1,42,090 रुपये | 24 कैरेट – 1,55,010 रुपये
पुणे और बेंगलुरु: 22 कैरेट – 1,41,340 रुपये | 24 कैरेट – 1,54,190 रुपये

इन कीमतों में स्थानीय टैक्स और डिमांड के हिसाब से थोड़ा अंतर संभव है.

चांदी में भी आई तेज गिरावट

सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. 18 अप्रैल को चांदी का भाव घटकर 2,64,900 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया. इससे पहले इसमें करीब 5,700 रुपये की गिरावट आई थी. अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमत करीब 79.28 डॉलर प्रति औंस पर बनी हुई है, जो संकेत देता है कि वैश्विक स्तर पर भी दबाव बना हुआ है.

खरीदारों के लिए मौका या इंतजार?

अक्षय तृतीया को सोना खरीदना शुभ माना जाता है, ऐसे में कीमतों में आई यह गिरावट खरीदारों के लिए एक अवसर बन सकती है. हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक हालात पूरी तरह स्पष्ट नहीं होते, तब तक कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है.

 


रूसी तेल पर अमेरिकी राहत: भारत के लिए सस्ते ईंधन का रास्ता फिर खुला

अमेरिका द्वारा रूसी तेल पर छूट बढ़ाने का फैसला भारत के लिए आर्थिक और रणनीतिक दोनों लिहाज से फायदेमंद है. इससे जहां भारत को सस्ता ईंधन मिलता रहेगा, वहीं वैश्विक बाजार में भी स्थिरता लाने में मदद मिल सकती है.

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Saturday, 18 April, 2026
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वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है. अमेरिका ने रूसी तेल पर लगे प्रतिबंधों में दी गई छूट को आगे बढ़ा दिया है, जिससे भारत जैसे देशों को रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदने का मौका मिलता रहेगा. यह फैसला न सिर्फ भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश भी माना जा रहा है.

16 मई तक बढ़ाई गई छूट

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने रूसी तेल की खरीद पर दी गई छूट को 16 मई तक बढ़ा दिया है. इस नई व्यवस्था के तहत देशों को समुद्र में लदे रूसी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद जारी रखने की अनुमति मिलेगी. यह कदम पहले दी गई 30-दिवसीय छूट के समाप्त होने के बाद उठाया गया है. हालांकि, इस लाइसेंस में ईरान, क्यूबा और उत्तर कोरिया से जुड़े लेन-देन को बाहर रखा गया है. अमेरिका का उद्देश्य साफ है, वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों को नियंत्रण में रखना और सप्लाई चेन को बाधित होने से बचाना.

ऊर्जा संकट और युद्ध का असर

मौजूदा समय में दुनिया ऊर्जा संकट से जूझ रही है. पश्चिम एशिया में संघर्ष और ‘होर्मुज स्ट्रेट’ में व्यवधान के कारण तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है. इस मार्ग से पहले वैश्विक तेल-गैस का लगभग 20% परिवहन होता था. इसी पृष्ठभूमि में अमेरिका का यह फैसला अहम हो जाता है, क्योंकि इससे बाजार में तेल की उपलब्धता बढ़ सकती है और कीमतों पर दबाव कम किया जा सकता है.

भारत की कूटनीतिक पहल रंग लाई

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत ने हाल ही में अमेरिका के साथ हुई बातचीत में इस छूट को बढ़ाने का मुद्दा उठाया था. विदेश स्तर पर हुई चर्चाओं में भारत ने साफ किया था कि ऊर्जा सुरक्षा उसके लिए प्राथमिकता है, खासकर तब जब वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो रही हो. यह निर्णय उसी कूटनीतिक प्रयास का परिणाम माना जा रहा है, जिसने भारत को एक बार फिर राहत दिलाई है.

सप्लाई बढ़ने की उम्मीद, लेकिन चुनौतियां बरकरार

रूस की ओर से संकेत मिले हैं कि इस छूट के चलते वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई बढ़ सकती है. अनुमान है कि करोड़ों बैरल कच्चा तेल बाजार में उपलब्ध हो सकता है, जिससे कीमतों पर कुछ हद तक नियंत्रण संभव है. हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि सिर्फ छूट से कीमतों में बड़ी गिरावट की उम्मीद करना मुश्किल है, क्योंकि भू-राजनीतिक तनाव अभी भी बना हुआ है.

भारत को बढ़ेगी रूसी सप्लाई

रूस ने भारत को भरोसा दिलाया है कि वह कच्चे तेल के साथ-साथ LPG और LNG की सप्लाई भी बढ़ाने के लिए तैयार है. रूस भारत को एक भरोसेमंद साझेदार मानता है और भविष्य में ऊर्जा सहयोग को और मजबूत करने की बात कह चुका है.

रूसी तेल का भारत में बढ़ता आयात

हाल के आंकड़े बताते हैं कि भारत ने रूस से तेल आयात में तेजी लाई है. मार्च महीने में यह आयात कई गुना बढ़ गया, जो दर्शाता है कि भारत सस्ते तेल के अवसर का पूरा फायदा उठा रहा है. पिछले कुछ वर्षों में भारत रूस के लिए एक प्रमुख तेल खरीदार बनकर उभरा है. इससे भारत को लागत कम करने में मदद मिली है, वहीं रूस को भी बड़ा बाजार मिला है.

 


होर्मुज स्ट्रेट फिर खुला: वैश्विक तेल बाजार को राहत, ट्रंप ने किया स्वागत

होर्मुज स्ट्रेट का दोबारा खुलना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है. इससे न केवल तेल आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद है, बल्कि पश्चिम एशिया में शांति बहाली की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

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Saturday, 18 April, 2026
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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच बड़ी राहत की खबर सामने आई है. ईरान ने रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज स्ट्रेट को सभी वाणिज्यिक जहाजों के लिए फिर से खोलने की घोषणा कर दी है. इस फैसले से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर बना दबाव कम होने की उम्मीद है, वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सकारात्मक असर देखने को मिला है.

युद्धविराम के बीच खुला समुद्री मार्ग

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बताया कि लेबनान में घोषित युद्धविराम के दौरान होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से खोल दिया गया है. अब वाणिज्यिक जहाज इस मार्ग से निर्बाध आवाजाही कर सकेंगे, हालांकि उन्हें पहले से तय समुद्री मार्गों का पालन करना होगा. गौरतलब है कि हाल ही में अमेरिका ने लेबनान और इजरायल के बीच 10 दिनों के युद्धविराम की घोषणा की थी, जिससे क्षेत्र में तनाव कुछ कम हुआ है.

ट्रंप ने फैसले का किया स्वागत

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के इस कदम का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट अब पूरी तरह से व्यापार और आवाजाही के लिए तैयार है. साथ ही उन्होंने दावा किया कि अमेरिका की मदद से ईरान इस क्षेत्र से समुद्री बारूदी सुरंगों को हटा रहा है. हालांकि ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी तब तक जारी रहेगी, जब तक दोनों देशों के बीच अंतिम समझौता नहीं हो जाता.

तेल की कीमतों में भारी गिरावट

होर्मुज स्ट्रेट खुलने की खबर का सीधा असर वैश्विक बाजारों पर पड़ा. कच्चे तेल की कीमतों में 10 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई. इससे निवेशकों को राहत मिली और अमेरिकी शेयर बाजारों में भी तेजी देखने को मिली.

1. एसएंडपी 500 में 0.7% की बढ़त.
2. डाउ जोंस में 1% उछाल.
3. नैस्डैक भी करीब 1% चढ़ा.

यह गिरावट इस संकेत का परिणाम है कि अब तेल आपूर्ति फिर से सामान्य हो सकती है.

तनाव के चलते बंद हुआ था होर्मुज स्ट्रेट

अमेरिका और इजरायल के साथ टकराव के बाद ईरान ने इस अहम समुद्री मार्ग को प्रभावी रूप से बंद कर दिया था. इससे फारस की खाड़ी से तेल आपूर्ति बाधित हो गई थी और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई थी. होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल वैश्विक बाजारों तक पहुंचता है.

पाकिस्तान की मध्यस्थता से बढ़ी कूटनीतिक हलचल

इस घटनाक्रम के बीच पाकिस्तान की भूमिका भी अहम नजर आई. पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने ईरान के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की, जिसमें तनाव कम करने और अमेरिका-ईरान वार्ता को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान जल्द ही अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली अहम वार्ता के अगले दौर की मेजबानी कर सकता है. इससे क्षेत्र में स्थायी शांति की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं.

समझौते की उम्मीदें बढ़ीं

ट्रंप ने संकेत दिया कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम समझौता हो जाता है, तो वे इस्लामाबाद का दौरा भी कर सकते हैं. उन्होंने यह भी दावा किया कि कई अहम मुद्दों पर सहमति लगभग बन चुकी है. फिलहाल दोनों देशों के बीच लागू युद्धविराम 21 अप्रैल तक जारी रहेगा. ऐसे में आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयास तेज होने और किसी ठोस समझौते की उम्मीद जताई जा रही है.