अगर 'बादल' ने नहीं दिया साथ, तो दिन में तारे दिखा देगा चावल

एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यदि मुफ्त में बांटने के लिए अलग से चावल के स्टॉक की जरूरत न हो, तो डिमांड और सप्लाई के अंतर को कम किया जा सकता है.

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Tuesday, 06 June, 2023
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फ्रीबीज (Freebies) यानी मुफ्त की रेवड़ियां, चुनावों में जीत की सबसे अचूक रणनीति कही जाती है. यही वजह है कि मध्य प्रदेश में होने विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए कर्ज के बोझ के बावजूद शिवराज सरकार 'लाड़ली बहना' जैसी योजनाओं को अमल में ला रही है. इस योजना के तहत सरकार एक निश्चित रकम महिलाओं को देगी. अब चूंकि मामला वोट का है, इसलिए विपक्षी कांग्रेस को भी इस 'फिजूल खर्ची' में कोई खामी नजर नहीं आती. उसने तो भाजपा से एक कदम आगे बढ़कर सरकार बनने की सूरत में 1500 रुपए प्रति माह महिलाओं को देने का वादा किया है. वैसे ये किसी एक राज्य की बात नहीं है, सबकी यही कहानी है. इस बीच, फ्रीबीज के चलते आने वाले दिनों में चावल की कीमतों में इजाफे की आशंका जताई जा रही है. 

पहले से ज्यादा हैं कीमतें
चावल की कीमतें पहले से ही ज्यादा चल रही हैं. एक रिपोर्ट बताती है कि चावल की औसत कीमत 3 जून को 40 रुपए प्रति किलो थी, जो पिछले साल की तुलना में करीब 8% ज्यादा है. ऐसे में यदि मानसून सामान्य नहीं रहा, बुवाई में कमी हुई और फिर अल नीनो का असर देखने को मिला, तो उत्पादन प्रभावित होना लाजमी है और इससे कीमतों का बढ़ना तय है. इस साल जिस तरह से मौसम ने सबको चौंकाया है, कुछ भी कहना मुश्किल हो गया है. जानकार मानते हैं कि मानसून यदि दगा देता है, तो चावल की डिमांड और सप्लाई का अंतर बढ़ सकता है, जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ना तय है.

मिलता रहेगा मुफ्त अनाज
केंद्र सरकार की मुफ्त राशन योजना (Free Ration Scheme) के तहत गरीबों को चावल, गेंहू और मोटा अनाज मुफ्त दिया जाता है. कोरोना के समय शुरू हुई इस योजना को इस साल दिसंबर तक बढ़ा दिया गया है. एक रिपोर्ट के अनुसार, इस कवायद पर करीब 2 लाख करोड़ रुपए खर्च होंगे, जिसका पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाएगी. चावल के उत्पादन में यदि कमी आती है, तो भी सरकार को गरीबों को दिए जाने वाले स्टॉक का इंतजाम करना होगा. इसके अलावा, खुले मार्केट में चावल की सप्लाई को बढ़ाना होगा, ताकि कीमतें अनियंत्रित न हो जाएं, लेकिन सीमित पैदावार की स्थिति में दोनों मोर्चों पर सफल होना कैसे मुमकिन होगा, ये अपने आप में एक बड़ा सवाल है. 

इस स्थिति में क्या होगा?
वैसे, अधिकारी बताते हैं कि फिलहाल सरकारी गोदामों में करीब 80 मीट्रिक टन चावल है, जो यह फूड सब्सिडी के तहत चावल वितरण के लिए काफी है. लेकिन सवाल फिर वही आ जाता है कि अगर मानसून की बेरुखी के चलते उत्पादन में गिरावट आई और डिमांड में इजाफा हुआ, तो क्या होगा? एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यदि चावल का उत्पादन पहले के मुकाबले कम रहा, तो फिर स्थिति मुश्किल हो जाएगी. सरकार गरीबों को तो मुफ्त चावल उपलब्ध करा देगी, लेकिन मिडिल क्लास जनता पर बढ़ी कीमतों का बोझ आ जाएगा, जो पहले से ही महंगाई से सबसे ज्यादा त्रस्त है. जानकारों का यह भी कहना है कि यदि मुफ्त में बांटने के लिए अलग से चावल के स्टॉक की जरूरत न हो, तो डिमांड और सप्लाई के अंतर को कम किया जा सकता है और इससे कीमतों को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी. केंद्र सरकार भी कहीं न कहीं इस चिंता से वाकिफ है, इसलिए उसने टूटे चावल के एक्सपोर्ट पर लगे प्रतिबंध को हटाने का कोई फैसला नहीं लिया है. मालूम हो कि भारत ने सितंबर 2022 में टूटे चावल के एक्सपोर्ट पर रोक लगा दी थी और कई दूसरे चावल के निर्यात पर 20% शुल्क भी लगाया था.

 


सेमीकंडक्टर सेक्टर में सरकार का बड़ा दांव, ₹1.27 लाख करोड़ की नई योजना को कैबिनेट की मंजूरी

नई योजना के तहत सेमीकंडक्टर उपकरण, विशेष रसायन, गैस और सामग्री बनाने वाली कंपनियों को भारत में विनिर्माण इकाइयां लगाने पर परियोजना लागत का 30% तक सीधा प्रोत्साहन मिलेगा.

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Thursday, 16 July, 2026
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केंद्र सरकार ने भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹1.27 लाख करोड़ के इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 और ₹62,500 करोड़ की संशोधित मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग योजना (MPMS) को मंजूरी दे दी है. नई योजनाओं के तहत चिप डिजाइन, उपकरण, विशेष रसायन, घरेलू वैल्यू एडिशन और रिसर्च एंड डेवलपमेंट को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे निवेश, उत्पादन, निर्यात और रोजगार में तेजी आने की उम्मीद है.

सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 पर सरकार का बड़ा फोकस

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि ₹1.27 लाख करोड़ के इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 के तहत अब सिर्फ चिप फैब्रिकेशन ही नहीं, बल्कि डिजाइन, उपकरण, विशेष रसायन, गैस, सामग्री और पूरे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के विकास पर जोर दिया जाएगा. योजना के विस्तृत दिशा-निर्देश अगले दो सप्ताह में जारी किए जाएंगे.

स्टार्टअप्स और घरेलू कंपनियों को मिलेगा बढ़ावा

सरकार ने भारत में रणनीतिक और व्यावसायिक चिप डिजाइन करने वाले स्टार्टअप्स के लिए ग्रांट-प्लस-इक्विटी मॉडल का प्रस्ताव रखा है, ताकि बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) देश में ही बने रहें. वहीं, मध्यम और बड़ी भारतीय कंपनियों को चिप डिजाइन के क्षेत्र में उतारने के लिए सह-निवेश, रॉयल्टी आधारित फंडिंग और प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन की व्यवस्था की जाएगी.

मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम पर रहेगा जोर

नई योजना के तहत सेमीकंडक्टर उपकरण, विशेष रसायन, गैस और सामग्री बनाने वाली कंपनियों को भारत में विनिर्माण इकाइयां लगाने पर परियोजना लागत का 30% तक सीधा प्रोत्साहन मिलेगा. सरकार का मानना है कि इससे चिप निर्माण के लिए आवश्यक सप्लाई चेन भी देश में विकसित होगी.

फैब्रिकेशन और पैकेजिंग के प्रोत्साहन में बदलाव

ISM 2.0 में चिप फैब्रिकेशन और पैकेजिंग इकाइयों के लिए प्रोत्साहन दरों को पहले चरण की तुलना में कम किया गया है. सिलिकॉन फैब्रिकेशन इकाइयों के लिए प्रोत्साहन 50% से घटाकर 40% और अन्य फैब्रिकेशन इकाइयों के लिए 35% कर दिया गया है. वहीं एडवांस्ड पैकेजिंग इकाइयों को 35% और पारंपरिक पैकेजिंग इकाइयों को 25% तक प्रोत्साहन मिलेगा. सरकार का कहना है कि पहले चरण में 12 परियोजनाओं को मंजूरी मिलने के बाद अब फोकस पूरे इकोसिस्टम को मजबूत करने पर है.

रिसर्च और स्किल डेवलपमेंट को मिलेगा समर्थन

सरकार उन्नत सेमीकंडक्टर तकनीकों पर काम करने वाली कंपनियों, स्टार्टअप्स और शैक्षणिक संस्थानों को केंद्रीय और राज्य सरकारों की ओर से कुल परियोजना लागत का 75% तक संयुक्त प्रोत्साहन देगी. इसका उद्देश्य रिसर्च, इनोवेशन और कुशल मानव संसाधन तैयार करना है.

₹4 लाख करोड़ निवेश और 1 लाख करोड़ निर्यात का लक्ष्य

सरकार का अनुमान है कि इस मिशन के जरिए करीब ₹4 लाख करोड़ का निवेश आकर्षित होगा. इससे ₹2 लाख करोड़ का उत्पादन और ₹1 लाख करोड़ का निर्यात हासिल किया जा सकेगा. अब तक पहले चरण के तहत ₹1.60 लाख करोड़ से अधिक निवेश वाली 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है.

मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग को भी मिला बड़ा प्रोत्साहन

कैबिनेट ने ₹62,500 करोड़ की संशोधित मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग योजना (MPMS) को भी मंजूरी दी है. नई योजना में प्रोत्साहन उत्पादन आधारित मॉडल की बजाय घरेलू वैल्यू एडिशन और स्थानीय सोर्सिंग के आधार पर दिया जाएगा. साथ ही भारतीय कंपनियों को मोबाइल डिजाइन, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और स्वदेशी बौद्धिक संपदा विकसित करने के लिए भी प्रोत्साहन मिलेगा.

उत्पादन, निर्यात और रोजगार बढ़ाने का लक्ष्य

सरकार का लक्ष्य अगले छह वर्षों में मोबाइल फोन उत्पादन को ₹39 लाख करोड़ तक पहुंचाना, ₹15 लाख करोड़ का निर्यात हासिल करना और मोबाइल विनिर्माण व इससे जुड़े क्षेत्रों में 60,000 अतिरिक्त रोजगार सृजित करना है. इससे भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को वैश्विक स्तर पर नई मजबूती मिलने की उम्मीद है.
 


कल बाजार में लौटी रौनक, आज Q1 नतीजे और ग्लोबल संकेत तय करेंगे सेंसेक्स-निफ्टी की चाल

बुधवार को सेंसेक्स 130.49 अंक यानी 0.17% की तेजी के साथ 77,185.43 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 26.45 अंक यानी 0.11% चढ़कर 24,078.50 के स्तर पर बंद हुआ था.

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Thursday, 16 July, 2026
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घरेलू शेयर बाजार ने बुधवार को गिरावट के बाद शानदार वापसी की और सेंसेक्स-निफ्टी दोनों बढ़त के साथ बंद हुए. अब गुरुवार के कारोबारी सत्र में निवेशकों की नजर कंपनियों के तिमाही नतीजों, कॉरपोरेट घोषणाओं और वैश्विक बाजारों के संकेतों पर रहेगी. ऐसे में बाजार खुलने से पहले जानिए पिछले सत्र का हाल और आज किन फैक्टर्स से बाजार की दिशा तय हो सकती है.

बुधवार को कैसी रही बाजार की चाल?

बुधवार को एशियाई बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों के दम पर घरेलू शेयर बाजार में खरीदारी लौटी. कारोबार के दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) बीएसई सेंसेक्स करीब 500 अंक तक उछलकर 77,200 के करीब पहुंच गया था. हालांकि, दोपहर बाद मुनाफावसूली के चलते बढ़त कुछ कम हो गई. आखिरकार सेंसेक्स 130.49 अंक यानी 0.17% की तेजी के साथ 77,185.43 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 26.45 अंक यानी 0.11% चढ़कर 24,078.50 के स्तर पर बंद हुआ.

इन ब्लूचिप शेयरों में रही सबसे ज्यादा हलचल

सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 18 बढ़त के साथ बंद हुए. Eternal, UltraTech Cement, SBI, Bajaj Finance, IndiGo, Asian Paints, Tech Mahindra और HDFC Bank के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली. दूसरी ओर Power Grid, Larsen & Toubro, Tata Steel, Infosys, NTPC और Bajaj Finserv के शेयरों में बिकवाली हावी रही.

ब्रॉडर मार्केट ने भी दिखाया दम

मुख्य सूचकांकों के मुकाबले ब्रॉडर मार्केट का प्रदर्शन बेहतर रहा. निफ्टी मिडकैप 150 करीब 0.5% और निफ्टी स्मॉलकैप 250 लगभग 0.75% की बढ़त के साथ बंद हुआ. सेक्टरवार देखें तो PSU बैंक और फार्मा शेयरों में खरीदारी रही, जबकि मेटल, आईटी, रियल्टी और FMCG इंडेक्स दबाव में रहे. ऑयल एंड गैस इंडेक्स भी दो दिनों की गिरावट के बाद संभल गया.

आज किन शेयरों पर रहेगी नजर?

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आज के कारोबार में Ather Energy, Adani Power, SBI, HDFC Bank, Tata Capital, Jio Platforms और Jupiter Life Line Hospitals से जुड़ी खबरों के चलते इन शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है. Ather Energy ने 960 करोड़ रुपये जुटाने की मंजूरी दी है, Adani Power ने 25 साल का बड़ा बिजली आपूर्ति समझौता किया है, जबकि SBI और HDFC Bank में शीर्ष स्तर की नियुक्तियां हुई हैं.

Q1 नतीजे तय करेंगे बाजार की दिशा

आज Wipro, Tech Mahindra, Jio Financial Services, BHEL, Polycab India, ITC Hotels, South Indian Bank, Ceat और WeWork India Management समेत कई कंपनियां अप्रैल-जून तिमाही के नतीजे जारी करेंगी. इन नतीजों का असर संबंधित शेयरों के साथ-साथ पूरे बाजार की चाल पर भी देखने को मिल सकता है.

विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार खुलने से पहले निवेशकों की नजर वैश्विक बाजारों के रुख, Q1 नतीजों और कॉरपोरेट अपडेट्स पर रहेगी. यदि अंतरराष्ट्रीय संकेत सकारात्मक रहे और कंपनियों के नतीजे उम्मीद के मुताबिक आए, तो बुधवार की तेजी गुरुवार के कारोबार में भी जारी रह सकती है. हालांकि, कमजोर वैश्विक संकेत या उम्मीद से खराब नतीजे आने पर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


पिता की याद में डॉ. सुभाष चंद्रा का बड़ा ऐलान, अग्रोहा में बनेगी ₹100 करोड़ की यूनिवर्सिटी

डॉ. सुभाष चंद्रा ने कहा कि यह संस्थान युवाओं को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ नंद किशोर गोयनका की सेवा और समाज कल्याण की विरासत को आगे बढ़ाएगा.

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Wednesday, 15 July, 2026
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एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन और पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. सुभाष चंद्रा ने अपने पिता एवं वरिष्ठ उद्योगपति और समाजसेवी स्वर्गीय नंद किशोर गोयनका की स्मृति में हरियाणा के अग्रोहा में लगभग ₹100 करोड़ की लागत से 'नंद किशोर गोयनका यूनिवर्सिटी' स्थापित करने की घोषणा की है. 32 एकड़ में बनने वाली यह यूनिवर्सिटी उच्च शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सेवा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विकसित की जाएगी.

अंतिम संस्कार के बाद किया ऐलान

यह घोषणा 13 जुलाई को मुंबई में 96 वर्ष की आयु में निधन के बाद स्वर्गीय नंद किशोर गोयनका के अंतिम संस्कार के अवसर पर की गई. उनका अंतिम संस्कार हरियाणा के हिसार स्थित अग्रोहा धाम के गोयनका उद्यान में संपन्न हुआ, जहां परिवार, समाज के प्रमुख लोगों और शुभचिंतकों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की. अंतिम संस्कार के बाद उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए डॉ. सुभाष चंद्रा ने कहा कि उन्होंने अपने तीनों भाइयों के साथ मिलकर अपने पिता की स्मृति में इस विश्वविद्यालय की स्थापना का निर्णय लिया है.

32 एकड़ में बनेगा आधुनिक विश्वविद्यालय

डॉ. सुभाष चंद्रा ने बताया कि प्रस्तावित विश्वविद्यालय एग्रोहा में 32 एकड़ भूमि पर बनाया जाएगा. इस परियोजना पर लगभग ₹100 करोड़ का निवेश किया जाएगा. उन्होंने कहा कि यह संस्थान युवाओं को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ नंद किशोर गोयनका की सेवा और समाज कल्याण की विरासत को आगे बढ़ाएगा.

सामाजिक सेवा पर आधारित होंगे विशेष पाठ्यक्रम

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में ऐसे विशेष पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे, जो सामाजिक सेवा, सामुदायिक विकास और समाज को वापस देने की भावना को प्रोत्साहित करेंगे. उद्देश्य यह है कि छात्र केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित न रहें, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी समझें और निभाएं.

एग्रोहा धाम के विकास में रहा अहम योगदान

हरियाणा के हिसार स्थित अग्रोहा धाम महाराजा अग्रसेन और मां महालक्ष्मी को समर्पित एक प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र है. इसका निर्माण वर्ष 1976 में शुरू हुआ था और 1984 में पूरा हुआ. नंद किशोर गोयनका एग्रोहा धाम के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले प्रमुख लोगों में शामिल रहे. समय के साथ यह परिसर अग्रवाल समाज का प्रमुख आस्था केंद्र बन गया है, जहां मंदिरों के अलावा शक्ति सरोवर, शैक्षणिक संस्थान और विभिन्न सामाजिक-धार्मिक सुविधाएं मौजूद हैं.

समाज सेवा और परोपकार के लिए जाने जाते थे नंद किशोर गोयनका

नंद किशोर गोयनका को उद्योग, समाज सेवा और परोपकार के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए व्यापक सम्मान मिला. वे कई धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं से जुड़े रहे तथा शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण से जुड़े अनेक कार्यों का समर्थन किया. वे श्री देवी भवन मंदिर गौशाला ट्रस्ट के संरक्षक और श्री वैश्य अग्रसेन गौशाला से भी जुड़े रहे. एग्रोहा धाम और अन्य सामाजिक परियोजनाओं में उनके योगदान ने उन्हें अग्रवाल समाज में विशेष पहचान दिलाई.

जल्द साझा होगी परियोजना की विस्तृत जानकारी

फिलहाल विश्वविद्यालय के निर्माण की समय-सीमा, शैक्षणिक कार्यक्रमों और नियामकीय मंजूरियों से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है. डॉ. सुभाष चंद्र ने कहा कि यह विश्वविद्यालय उनके पिता की विरासत को सम्मान देने के साथ-साथ शिक्षा, रोजगार और सामुदायिक विकास के नए अवसर पैदा करेगा.


यूनियन बैंक का मुनाफा 30% उछला, पहली तिमाही में ₹5,332 करोड़ का नेट प्रॉफिट

अप्रैल-जून तिमाही के दौरान बैंक की कुल आय में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई. रिटेल, कृषि और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्रों में कर्ज की मजबूत मांग से बैंक की आय को सहारा मिला.

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Wednesday, 15 July, 2026
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सार्वजनिक क्षेत्र के यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (Union Bank of India) ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) की पहली तिमाही में शानदार वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है. अप्रैल-जून तिमाही में बैंक का स्टैंडअलोन शुद्ध लाभ (Net Profit) सालाना आधार पर 30% बढ़कर 5,332.3 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 4,116 करोड़ रुपये था. बैंक के बेहतर नतीजों की प्रमुख वजह मजबूत कर्ज वृद्धि (Credit Growth), परिसंपत्ति गुणवत्ता (Asset Quality) में सुधार और प्रावधान (Provisioning) पर कम खर्च रही.

कुल आय में भी हुई बढ़ोतरी

अप्रैल-जून तिमाही के दौरान बैंक की कुल आय (Total Income) में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई. रिटेल, कृषि और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्रों में कर्ज की मजबूत मांग से बैंक की आय को सहारा मिला. हालांकि, बदलते ब्याज दरों के माहौल के कारण नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) पर दबाव बना रहा.

एसेट क्वालिटी में लगातार सुधार

तिमाही के दौरान यूनियन बैंक की परिसंपत्ति गुणवत्ता में भी सुधार जारी रहा. बैंक का सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (GNPA) अनुपात पिछले वर्ष की तुलना में और घटा है. वहीं, नेट एनपीए (NNPA) में भी सुधार देखने को मिला. साथ ही, प्रावधान कवरेज अनुपात (Provision Coverage Ratio) मजबूत बना रहा, जिससे संभावित डिफॉल्ट से निपटने की बैंक की क्षमता और मजबूत हुई है.

रिटेल और MSME से मिला ग्रोथ का सहारा

बैंक की कुल अग्रिम (Advances) में अच्छी वृद्धि दर्ज की गई. खासकर रिटेल, कृषि और प्राथमिकता क्षेत्र (Priority Sector) में कर्ज वितरण ने क्रेडिट ग्रोथ को मजबूती दी. कम प्रावधान और मजबूत बैलेंस शीट ने बैंक की तिमाही लाभप्रदता को और बेहतर बनाया.

मार्जिन पर दबाव, लेकिन भविष्य को लेकर उम्मीद

यूनियन बैंक परिचालन दक्षता (Operational Efficiency) बढ़ाने के साथ जोखिम प्रबंधन और कर्ज वितरण में अनुशासित रणनीति पर लगातार काम कर रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर एसेट क्वालिटी और स्थिर कर्ज वृद्धि के दम पर बैंक की आय आगे भी मजबूत रह सकती है, हालांकि ब्याज दरों में बदलाव के चलते नेट इंटरेस्ट मार्जिन पर दबाव बना रह सकता है.

निवेशकों की नजर इन संकेतकों पर

विश्लेषकों के अनुसार, अब निवेशकों की नजर बैंक प्रबंधन की जमा जुटाने (Deposit Mobilisation), कर्ज मांग (Credit Demand) और मार्जिन के भविष्य को लेकर दी जाने वाली टिप्पणी पर रहेगी. इसके अलावा, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति और ब्याज दरों से जुड़े फैसले भी पूरे वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान बैंक की लाभप्रदता पर अहम असर डाल सकते हैं.

सरकारी बैंकों की स्थिति लगातार मजबूत

यूनियन बैंक के बेहतर तिमाही नतीजे ऐसे समय आए हैं, जब देश के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की वित्तीय स्थिति लगातार मजबूत हो रही है. घटते एनपीए, कम क्रेडिट लागत और मजबूत बैलेंस शीट के कारण सरकारी बैंकों की कमाई में लगातार सुधार देखने को मिल रहा है.
 


17 जुलाई को रेलवे को मिलेगी नई रफ्तार, पीएम मोदी 4 स्टेशनों का करेंगे उद्घाटन, पहली हाइड्रोजन ट्रेन को दिखाएंगे हरी झंडी

पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी 17 जुलाई को पंजाब के चार आधुनिक रेलवे स्टेशनों का उद्घाटन करेंगे.

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Wednesday, 15 July, 2026
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को देश के रेलवे और बुनियादी ढांचे से जुड़ी कई बड़ी परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे. अमृत भारत स्टेशन योजना (Amrit Bharat Station Scheme) के तहत पंजाब के चार पुनर्विकसित रेलवे स्टेशनों को राष्ट्र को समर्पित करने के साथ ही वह भारत की पहली हाइड्रोजन ईंधन आधारित ट्रेन को भी हरी झंडी दिखाएंगे. इसके अलावा हरियाणा और राजस्थान में भी कई रेलवे परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया जाएगा.

पंजाब के चार रेलवे स्टेशनों का होगा उद्घाटन

पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी 17 जुलाई को पंजाब के चार आधुनिक रेलवे स्टेशनों का उद्घाटन करेंगे. इनमें जालंधर कैंट रेलवे स्टेशन का उद्घाटन प्रधानमंत्री स्वयं करेंगे, जबकि एसएएस नगर (मोहाली), श्री मुक्तसर साहिब और श्री आनंदपुर साहिब रेलवे स्टेशनों का उद्घाटन दोपहर करीब 3 बजे वर्चुअल माध्यम से किया जाएगा.

125 करोड़ रुपये की लागत से बदला जालंधर कैंट स्टेशन का स्वरूप

करीब 110 वर्ष पुराने जालंधर कैंट रेलवे स्टेशन का लगभग 125 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिकीकरण किया गया है. स्टेशन पर डबल-हाइट एयर कॉन्कोर्स, भारी स्टील प्लेटफॉर्म रूफिंग, फिसलन-रोधी फ्लोरिंग और ऊर्जा दक्ष एलईडी लाइटिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं. हाल ही में रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष सतीश कुमार ने स्टेशन पर चल रहे अंतिम चरण के कार्यों की समीक्षा भी की थी.

यात्रियों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं

अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत विकसित इन स्टेशनों पर यात्रियों के लिए बेहतर प्रतीक्षालय, आधुनिक कॉन्कोर्स, उन्नत प्लेटफॉर्म, लिफ्ट, एस्केलेटर और दिव्यांगजन-अनुकूल सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं. साथ ही स्टेशनों के पुनर्विकास में उनकी स्थानीय स्थापत्य शैली और सांस्कृतिक पहचान को भी बरकरार रखा गया है. इसी दिन राजस्थान के कोटा मंडल स्थित गंगापुर सिटी रेलवे स्टेशन का भी अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत उद्घाटन किया जाएगा.

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को मिलेगी हरी झंडी

प्रधानमंत्री मोदी हरियाणा के जींद से भारत की पहली हाइड्रोजन ईंधन आधारित ट्रेन को भी हरी झंडी दिखाएंगे. यह ट्रेन जींद और सोनीपत के बीच संचालित होगी. इसके अलावा जींद रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास का उद्घाटन, कुरुक्षेत्र में एलिवेटेड रेलवे ट्रैक और पुनर्निर्मित रेलवे स्टेशन का लोकार्पण भी किया जाएगा. साथ ही कुरुक्षेत्र में प्रस्तावित सिख संग्रहालय की आधारशिला भी रखी जाएगी.

पंजाब में बीजेपी के नए चुनावी अभियान की शुरुआत

जालंधर दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी रेलवे स्टेशन परिसर में आयोजित एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे, जिसमें करीब 5,000 भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों के शामिल होने की संभावना है. पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा द्वारा अकेले चुनाव लड़ने के फैसले के बाद यह प्रधानमंत्री मोदी का पहला पंजाब दौरा होगा. इसे राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है.
 


हीरो मोटोकॉर्प के ₹1,000 करोड़ निवेश से एथर एनर्जी के शेयरों में जोरदार उछाल, रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा स्टॉक

बुधवार के कारोबार के दौरान एथर एनर्जी का शेयर 9 फीसदी तक चढ़कर 1,290.10 रुपये के इंट्राडे हाई पर पहुंच गया, जो कंपनी की लिस्टिंग के बाद का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है.

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Wednesday, 15 July, 2026
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हीरो मोटोकॉर्प ने इलेक्ट्रिक स्कूटर निर्माता एथर एनर्जी में 1,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश को मंजूरी दे दी है. इस घोषणा के बाद बुधवार को एथर एनर्जी के शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली और कंपनी का शेयर 9 फीसदी तक उछलकर अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया. निवेशकों का मानना है कि यह निवेश एथर के भविष्य के विस्तार और भारत के तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बाजार में उसकी स्थिति को और मजबूत करेगा.

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा शेयर

बुधवार के कारोबार के दौरान एथर एनर्जी का शेयर 9 फीसदी तक चढ़कर 1,290.10 रुपये के इंट्राडे हाई पर पहुंच गया, जो कंपनी की लिस्टिंग के बाद का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है. हालांकि बाद में इसमें कुछ मुनाफावसूली भी देखने को मिली और शेयर बीएसई पर 7.90 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,298,00 रुपये पर बंद हुआ. यह तेजी हीरो मोटोकॉर्प के बोर्ड द्वारा एथर एनर्जी में 1,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश को मंजूरी दिए जाने के बाद आई.

प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट के जरिए होगा निवेश

हीरो मोटोकॉर्प का यह निवेश पूरी तरह नकद (कैश) में किया जाएगा. कंपनी यह निवेश प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट के जरिए करेगी, जिसके तहत इक्विटी शेयरों के साथ-साथ अन्य पात्र सिक्योरिटीज जैसे कंपल्सरिली कन्वर्टिबल प्रेफरेंस शेयर (CCPS) और वारंट जारी किए जा सकते हैं. हालांकि यह निवेश आवश्यक कॉर्पोरेट और नियामकीय मंजूरियों के अधीन रहेगा.

हीरो मोटोकॉर्प की कितनी हिस्सेदारी?

30 जून 2026 तक उपलब्ध एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, हीरो मोटोकॉर्प के पास एथर एनर्जी की पूर्ण रूप से डायल्यूटेड पेड-अप शेयर पूंजी में 29.48 फीसदी हिस्सेदारी थी. प्रस्तावित निवेश के बाद कंपनी की अंतिम हिस्सेदारी प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट की कीमत और संरचना पर निर्भर करेगी.

विस्तार की रणनीति को मिलेगा बल

नया निवेश ऐसे समय में आया है जब एथर एनर्जी भारत के इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता, रिटेल नेटवर्क और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार कर रही है. बेंगलुरु स्थित एथर एनर्जी ने 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष में 3,671.76 करोड़ रुपये का कारोबार दर्ज किया था.

2016 से एथर के साथ है हीरो मोटोकॉर्प

भारत की सबसे बड़ी मोटरसाइकिल निर्माता कंपनी हीरो मोटोकॉर्प वर्ष 2016 से एथर एनर्जी में निवेशक है. कंपनी समय-समय पर अपनी हिस्सेदारी बढ़ाती रही है, ताकि देश के तेजी से विकसित हो रहे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी बाजार में अपनी मौजूदगी को मजबूत किया जा सके.

निवेशकों का भरोसा और मजबूत

विश्लेषकों का मानना है कि 1,000 करोड़ रुपये की नई पूंजी एथर एनर्जी के अगले चरण के विस्तार में अहम भूमिका निभाएगी. साथ ही, यह निवेश हीरो मोटोकॉर्प के एथर के बिजनेस मॉडल और दीर्घकालिक विकास पर मजबूत भरोसे को भी दर्शाता है. यही वजह है कि इस घोषणा के बाद एथर के शेयरों में खरीदारी का जोर देखने को मिला और कंपनी के शेयर रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए.


अमेरिका ने भारत समेत 5 देशों को दी बड़ी राहत, रूस से तेल आयात पर 500% की जगह अब 100% टैरिफ का प्रस्ताव

अमेरिकी सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल के अनुसार, प्रस्तावित टैरिफ केवल रूस से ऊर्जा खरीदने वाले पांच सबसे बड़े देशों पर लागू होगा. इनमें चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं.

Last Modified:
Wednesday, 15 July, 2026
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रूस से कच्चा तेल आयात करने वाले देशों के लिए अमेरिका ने अपने प्रतिबंध प्रस्ताव में बड़ी नरमी दिखाई है. अमेरिकी सीनेट में पेश Sanctioning Russia Act 2025 के संशोधित मसौदे में भारत समेत पांच प्रमुख खरीदार देशों पर प्रस्तावित टैरिफ 500% से घटाकर अधिकतम 100% करने का प्रस्ताव रखा गया है. इसके साथ ही, कुछ देशों को विशेष परिस्थितियों में छूट देने का प्रावधान भी जोड़ा गया है.

संशोधित बिल में क्या बदला?

अमेरिकी सीनेट में रूस पर नए प्रतिबंधों से जुड़े संशोधित विधेयक में सबसे बड़ा बदलाव प्रस्तावित टैरिफ की दर और उसके दायरे में किया गया है. पहले रूस से तेल, प्राकृतिक गैस और अन्य ऊर्जा उत्पाद खरीदने वाले सभी देशों पर 500% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था. अब इसे घटाकर अधिकतम 100% कर दिया गया है और यह केवल रूस से तेल एवं गैस खरीदने वाले पांच सबसे बड़े देशों पर लागू होगा. भारत भी इस सूची में शामिल है.

किन देशों पर लागू होगा नया टैरिफ?

अमेरिकी सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल के अनुसार, प्रस्तावित टैरिफ केवल रूस से ऊर्जा खरीदने वाले पांच सबसे बड़े देशों पर लागू होगा. इनमें चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं. उन्होंने कहा कि विशेष परिस्थितियों में टैरिफ से छूट देने का प्रावधान भी रखा गया है, हालांकि इसका दायरा सीमित होगा.

किन देशों को मिल सकती है राहत?

संशोधित बिल में उन देशों के लिए राहत का भी प्रावधान है, जो रूस के प्राकृतिक गैस निर्यात का 15% से कम आयात करते हैं और रूस पर अपनी ऊर्जा निर्भरता कम करने के लिए ठोस कदम उठा रहे हैं. इस व्यवस्था का लाभ जापान, फ्रांस, बेल्जियम और हंगरी जैसे देशों को मिल सकता है.

रूस पर और कड़े होंगे प्रतिबंध

टैरिफ के अलावा, विधेयक में रूस की अर्थव्यवस्था के कई प्रमुख क्षेत्रों पर नए प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव भी शामिल है. इनमें ऊर्जा, रक्षा, वित्तीय और औद्योगिक क्षेत्र शामिल हैं. इसके अलावा रूस के 'शैडो फ्लीट', केंद्रीय बैंक और यामल LNG व आर्कटिक LNG जैसी प्रमुख ऊर्जा परियोजनाओं को भी प्रतिबंधों के दायरे में लाने का प्रस्ताव है. हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति को राष्ट्रीय हितों के आधार पर इन प्रतिबंधों में छूट देने का अधिकार भी दिया गया है.

पहले क्या था प्रस्ताव?

अप्रैल 2025 में पेश Sanctioning Russia Act 2025 के मूल मसौदे में रूस से तेल, गैस, यूरेनियम या अन्य पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने वाले देशों से आने वाले आयात पर 500% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था. यदि यह प्रस्ताव लागू होता, तो भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों पर इसका सबसे अधिक असर पड़ता, क्योंकि पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद इन देशों ने रियायती दरों पर रूसी कच्चे तेल का आयात जारी रखा है.

भारत के लिए क्यों अहम है यह फैसला?

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है और पिछले कुछ वर्षों में रूस उसके प्रमुख कच्चे तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल रहा है. ऐसे में प्रस्तावित टैरिफ को 500% से घटाकर 100% करना भारत के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है. हालांकि, यह अभी केवल संशोधित विधेयक का प्रस्ताव है और इसके कानून बनने की प्रक्रिया अभी बाकी है.
 


अब मिनटों में मिलेगा LPG सिलेंडर, Instamart-HPCL ने शुरू की ऑन-डिमांड डिलीवरी

साझेदारी के तहत सबसे पहले बेंगलुरु में ऑन-डिमांड LPG सिलेंडर डिलीवरी सेवा शुरू की गई है. ग्राहक इंस्टामार्ट ऐप के जरिए HP Navya 10 किलोग्राम कम्पोजिट LPG सिलेंडर और मौजूदा 5 किलोग्राम मेटल LPG सिलेंडर ऑर्डर कर सकेंगे.

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Wednesday, 15 July, 2026
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अब रसोई गैस खत्म होने पर घंटों इंतजार करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म इंस्टामार्ट (Instamart) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने मिलकर देश की पहली ऑन-डिमांड LPG सिलेंडर डिलीवरी सेवा शुरू की है. इस सुविधा के तहत ग्राहक इंस्टामार्ट ऐप से HP Navya कम्पोजिट LPG सिलेंडर मिनटों में मंगा सकेंगे. खास बात यह है कि इसके लिए पहले से घरेलू LPG कनेक्शन होना भी जरूरी नहीं होगा.

बेंगलुरु से शुरू हुई नई सुविधा

इंस्टामार्ट और हिंदुस्तान पेट्रोलियम की इस साझेदारी के तहत सबसे पहले बेंगलुरु में ऑन-डिमांड LPG सिलेंडर डिलीवरी सेवा शुरू की गई है. ग्राहक इंस्टामार्ट ऐप के जरिए HP Navya 10 किलोग्राम कम्पोजिट LPG सिलेंडर और मौजूदा 5 किलोग्राम मेटल LPG सिलेंडर ऑर्डर कर सकेंगे. हालांकि, फिलहाल कंपनियों ने यह नहीं बताया है कि इस सेवा का विस्तार देश के अन्य शहरों में कब तक किया जाएगा.

बिना LPG कनेक्शन के भी कर सकेंगे ऑर्डर

इस सेवा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सिलेंडर मंगाने के लिए ग्राहकों के पास पहले से घरेलू LPG कनेक्शन होना जरूरी नहीं है. इससे छात्र, किराए पर रहने वाले प्रोफेशनल्स, छोटे परिवार और ऐसे उपभोक्ता भी इसका लाभ उठा सकेंगे, जिनके पास पारंपरिक गैस कनेक्शन नहीं है.

पहली बार ऑर्डर करने पर इसे नए सिलेंडर की खरीद माना जाएगा, जिसके लिए पहचान सत्यापन और डिलीवरी से जुड़े जरूरी दस्तावेज पूरे करने होंगे. इसके बाद अगली बुकिंग रिफिल के रूप में होगी और डिलीवरी के समय खाली सिलेंडर वापस लिया जाएगा.

क्या है HP Navya सिलेंडर की खासियत?

हिंदुस्तान पेट्रोलियम का नया HP Navya 10 किलोग्राम कम्पोजिट LPG सिलेंडर पारंपरिक स्टील सिलेंडर की तुलना में हल्का और जंग-रोधी है. इसकी पारदर्शी बॉडी के कारण उपभोक्ता आसानी से देख सकते हैं कि सिलेंडर में कितनी गैस बची है. कॉम्पैक्ट डिजाइन होने की वजह से यह अपार्टमेंट, छोटे परिवारों और सेकेंडरी गैस सिलेंडर की जरूरत वाले घरों के लिए बेहतर विकल्प माना जा रहा है.

सुरक्षित तरीके से होगी डिलीवरी

इंस्टामार्ट पर किए गए सभी ऑर्डर हिंदुस्तान पेट्रोलियम के अधिकृत डिस्ट्रीब्यूटर नेटवर्क के जरिए पूरे किए जाएंगे. डिलीवरी प्रशिक्षित कर्मचारियों द्वारा सुरक्षा और नियामकीय मानकों का पालन करते हुए की जाएगी.

इंस्टामार्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) अमितेश झा ने कहा कि कंपनी अब केवल ग्रोसरी डिलीवरी तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि ग्राहकों की रोजमर्रा की जरूरतों को भी तेज और आसान बनाना चाहती है. हिंदुस्तान पेट्रोलियम के साथ यह साझेदारी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. वहीं, हिंदुस्तान पेट्रोलियम के मार्केटिंग निदेशक अमित गर्ग ने कहा कि कंपनी का उद्देश्य LPG को अधिक सुलभ, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाना है. इंस्टामार्ट जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ साझेदारी से ग्राहकों तक तेज़ी से पहुंच बनाने और उनके अनुभव को बेहतर करने में मदद मिलेगी.


जबरन मजदूरी से बने विदेशी सामानों पर भारत सख्त, आयात रोकने के लिए बदली विदेश व्यापार नीति

सरकार ने यह फैसला ऐसे समय लिया है, जब अमेरिका भारत सहित करीब 60 देशों की सप्लाई चेन की जांच कर रहा है.

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Wednesday, 15 July, 2026
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भारत सरकार ने विदेश व्यापार नीति (Foreign Trade Policy) में बड़ा बदलाव करते हुए जबरन मजदूरी (Forced Labour) से बने विदेशी उत्पादों के आयात पर रोक लगाने का रास्ता साफ कर दिया है. नए प्रावधानों के तहत यदि किसी उत्पाद के निर्माण में बंधुआ या जबरन मजदूरी का इस्तेमाल पाया जाता है, तो उसके भारत में आयात पर प्रतिबंध लगाया जा सकेगा. माना जा रहा है कि यह कदम वैश्विक सप्लाई चेन में पारदर्शिता बढ़ाने और अमेरिका समेत अन्य देशों की सख्त व्यापार नीतियों के अनुरूप उठाया गया है.

अमेरिका की सख्ती के बीच भारत का बड़ा कदम

सरकार ने यह फैसला ऐसे समय लिया है, जब अमेरिका भारत सहित करीब 60 देशों की सप्लाई चेन की जांच कर रहा है. अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) का आरोप है कि कई देश जबरन मजदूरी से बने उत्पादों के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रहे हैं. इसी पृष्ठभूमि में भारत ने अपनी विदेश व्यापार नीति में संशोधन कर स्पष्ट कर दिया है कि ऐसे उत्पादों के आयात को कानूनी तौर पर रोका जा सकेगा.

क्या है नया नियम?

डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, यदि किसी विदेशी उत्पाद के निर्माण में पूरी तरह या आंशिक रूप से जबरन मजदूरी का इस्तेमाल साबित होता है, तो उसके आयात पर प्रतिबंध लगाया जा सकेगा. इसके लिए विदेश व्यापार नीति के अध्याय-11 में 'जबरन मजदूरी' की परिभाषा भी जोड़ी गई है, जो अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के 1930 के कन्वेंशन नंबर-29 पर आधारित है. इसके अनुसार, किसी व्यक्ति से उसकी इच्छा के विरुद्ध सजा, धमकी या दबाव के तहत काम कराना जबरन मजदूरी माना जाएगा.

क्या तुरंत बंद हो जाएगा आयात?

सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि सभी विदेशी उत्पादों का आयात तुरंत रुक जाएगा. 13 जुलाई को जारी अधिसूचना के अनुसार, नए नियम 30 दिन बाद प्रभावी होंगे. फिलहाल सरकार ने केवल कानूनी ढांचा तैयार किया है. भविष्य में यदि DGFT की जांच में किसी उत्पाद के निर्माण में जबरन मजदूरी का इस्तेमाल साबित होता है, तभी उसके आयात पर रोक लगाई जाएगी. जांच की विस्तृत प्रक्रिया 'हैंडबुक ऑफ प्रोसीजर्स-2023' में निर्धारित की जाएगी.

अमेरिका के टैरिफ दबाव का भी असर

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव के पीछे अमेरिका का बढ़ता व्यापारिक दबाव भी एक अहम कारण है. अमेरिका ने जून में भारत सहित 54 देशों से आयात होने वाले उत्पादों पर अतिरिक्त 12.5 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा था. वहीं, जिन देशों ने पहले से ऐसे आयात पर रोक लगाने के कानून बनाए हैं, उन्हें अपेक्षाकृत राहत देने की बात कही गई थी. भारत का यह कदम अमेरिका के साथ प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की बातचीत को भी मजबूती दे सकता है.

चीन की सप्लाई चेन पर पड़ सकता है असर

ट्रेड विशेषज्ञों का मानना है कि नए नियमों का सबसे अधिक असर चीन से आने वाले उन उत्पादों पर पड़ सकता है, जिनके निर्माण में जबरन मजदूरी के आरोप लगते रहे हैं. खासकर शिनजियांग क्षेत्र से जुड़े कॉटन, सोलर पैनल, सीफूड, धातु और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद लंबे समय से वैश्विक जांच के दायरे में रहे हैं. हालांकि, ऐसे मामलों में प्रतिबंध लागू करना आसान नहीं होगा, क्योंकि इसके लिए मजबूत जांच और ठोस सबूत जरूरी होंगे.

भारत ने अपनाया वैश्विक मानक

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत ने ILO की परिभाषा को अपनाकर वैश्विक श्रम मानकों के अनुरूप अपनी व्यापार नीति को मजबूत किया है. इससे न केवल भारत की अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक साख मजबूत होगी, बल्कि यह भी संदेश जाएगा कि देश जबरन मजदूरी से बने उत्पादों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने के लिए तैयार है.
 


घर खरीदने से क्यों पीछे हट रही है यंग जनरेशन? EMI से ज्यादा किराए और निवेश को दे रही प्राथमिकता

प्रॉपर्टी प्लेटफॉर्म NoBroker के सर्वे के अनुसार, 46 फीसदी किराएदार लंबे समय तक किराए पर रहने को बेहतर विकल्प मानते हैं. इनमें 25-34 वर्ष आयु वर्ग के 53 फीसदी और 35-44 वर्ष के 48 फीसदी लोग शामिल हैं.

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Wednesday, 15 July, 2026
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भारत में अपना घर होना लंबे समय से सफलता की निशानी माना जाता रहा है, लेकिन अब मिलेनियल्स और जेन-जी की सोच तेजी से बदल रही है. महंगी प्रॉपर्टी, बढ़ती होम लोन EMI और करियर में लचीलापन बनाए रखने की चाह के चलते युवा घर खरीदने के बजाय किराए पर रहना पसंद कर रहे हैं. प्रॉपर्टी प्लेटफॉर्म NoBroker की रिपोर्ट के मुताबिक, 46 फीसदी किराएदार लंबे समय तक किराए के मकान में रहने को बेहतर विकल्प मानते हैं. उनका मानना है कि EMI में पैसा बांधने के बजाय निवेश और वित्तीय आजादी ज्यादा अहम है.

किराए के घर को मिल रही पहली पसंद

भारत में लंबे समय तक अपना घर खरीदना हर परिवार का सपना माना जाता रहा है, लेकिन अब यह सोच बदल रही है. खासकर मिलेनियल्स और जेन-जी प्रोफेशनल्स घर खरीदने की जल्दबाजी नहीं कर रहे हैं. वे लंबी अवधि के होम लोन की जिम्मेदारी लेने के बजाय किराए के मकान में रहकर अपनी वित्तीय स्वतंत्रता बनाए रखना चाहते हैं.

प्रॉपर्टी प्लेटफॉर्म NoBroker के सर्वे के अनुसार, 46 फीसदी किराएदार लंबे समय तक किराए पर रहने को बेहतर विकल्प मानते हैं. इनमें 25-34 वर्ष आयु वर्ग के 53 फीसदी और 35-44 वर्ष के 48 फीसदी लोग शामिल हैं.

EMI के मुकाबले किराया कहीं ज्यादा किफायती

युवाओं के इस बदलते रुझान की सबसे बड़ी वजह तेजी से बढ़ती प्रॉपर्टी कीमतें और महंगी होम लोन EMI हैं. देश के प्रमुख शहरों में घर की मासिक EMI अब किराए की तुलना में दोगुने से भी अधिक हो गई है. पिछले पांच वर्षों में गुरुग्राम का EMI-टू-रेंट रेशियो 1.86 से बढ़कर 2.68 हो गया है. बेंगलुरु में यह 2.38, हैदराबाद में 2.47 और मुंबई में 2.19 तक पहुंच चुका है. यानी जिस घर का मासिक किराया 50 हजार रुपये है, उसे खरीदने पर EMI एक लाख रुपये या उससे अधिक बैठ सकती है.

निवेश और वित्तीय आजादी को दे रहे प्राथमिकता

रिपोर्ट के अनुसार, युवा अब डाउन पेमेंट और भारी EMI में पैसा फंसाने के बजाय उसी रकम को म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार और अन्य निवेश विकल्पों में लगा रहे हैं. उनका मानना है कि इससे बेहतर रिटर्न मिलने के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर शहर या नौकरी बदलने की आजादी भी बनी रहती है.

बेंगलुरु के एक 31 वर्षीय आईटी प्रोफेशनल का कहना है कि अगले 20 वर्षों तक हर महीने एक लाख रुपये की EMI भरने से बेहतर है कि उसी राशि का निवेश किया जाए और करियर के अनुसार शहर बदलने की सुविधा बनी रहे.

लाइफस्टाइल भी बदल रही है प्राथमिकता

अब किराए पर रहना केवल मजबूरी नहीं, बल्कि एक सोचा-समझा फैसला बन चुका है. युवा बेहतर लोकेशन, गेटेड सोसाइटी, पूरी तरह फर्निश्ड अपार्टमेंट और आधुनिक सुविधाओं वाले घरों को प्राथमिकता दे रहे हैं.

बेंगलुरु में 3-BHK फ्लैट्स की मांग उनकी उपलब्धता से कहीं अधिक है. वहीं मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) में कुल किराये की मांग का करीब एक-तिहाई हिस्सा ऐसे घरों का है, जिनका मासिक किराया 40,000 रुपये से अधिक है. इससे साफ है कि बेहतर लाइफस्टाइल के लिए युवा अधिक किराया देने को भी तैयार हैं.

करियर में लचीलापन भी बड़ा कारण

हाइब्रिड वर्क कल्चर, तेजी से बदलती नौकरियां और अलग-अलग शहरों में करियर के अवसर भी युवाओं के फैसले को प्रभावित कर रहे हैं. कई प्रोफेशनल्स तब तक घर खरीदना नहीं चाहते, जब तक यह तय न हो जाए कि भविष्य में वे किस शहर में स्थायी रूप से बसेंगे.

इसी बदलते ट्रेंड का असर रेंटल मार्केट पर भी दिखाई दे रहा है. NoBroker के अनुसार, मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में किराये में सालाना 11 फीसदी की सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई है. इसके बाद चेन्नई में 8 फीसदी, बेंगलुरु में 7 फीसदी तथा हैदराबाद और दिल्ली-एनसीआर में लगभग 3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.

बदल रही है 'घर' की परिभाषा

विशेषज्ञों का मानना है कि नई पीढ़ी के लिए घर अब केवल एक संपत्ति नहीं, बल्कि एक वित्तीय निर्णय बन गया है. युवा फिलहाल अपनी पूंजी को निवेश, करियर और बेहतर जीवनशैली पर खर्च करना ज्यादा समझदारी मान रहे हैं. यही वजह है कि महानगरों में किराए का बाजार लगातार मजबूत होता जा रहा है और आने वाले वर्षों में यह रुझान और तेज हो सकता है.