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ग्वालियर में बनेगा भारत का नया ग्रीन हाइड्रोजन हब, GH2 Solar का ₹400 करोड़ का निवेश
GH2 Solar और AHES Ltd की यह साझेदारी केवल एक संयंत्र निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के ऊर्जा आत्मनिर्भरता, स्वच्छ ऊर्जा भविष्य और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अग्रणी बनने की दिशा में एक रणनीतिक पहल है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 9 months ago
भारत में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र को एक नई दिशा देते हुए GH2 Solar लिमिटेड ने दक्षिण कोरिया की कंपनी AHES Ltd के साथ मिलकर ₹400 करोड़ के निवेश से ग्रीन हाइड्रोजन इलेक्ट्रोलाइजर निर्माण इकाई की स्थापना की घोषणा की है. यह अत्याधुनिक संयंत्र ग्वालियर के पास पिपरसेवा, मुरैना जिले में स्थापित किया जाएगा. इस परियोजना की घोषणा एक भूमिपूजन समारोह के माध्यम से की गई, जिसमें मध्य प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे.
इस अवसर पर GH2 Solar के Founder and CEO अनुराग जैन ने कहा "भारत अब जीवाश्म ईंधनों से ग्रीन हाइड्रोजन की ओर बढ़ रहा है और हमारी इलेक्ट्रोलाइज़र निर्माण इकाई इस परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. हम वैश्विक तकनीक और स्थानीय संसाधनों को मिलाकर एक पूर्ण क्लीन एनर्जी इकोसिस्टम खड़ा कर रहे हैं, जिससे भारत न केवल आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि ग्रीन हाइड्रोजन का वैश्विक केंद्र भी बन सकेगा."
AHES के सीईओ प्रो. जूंग-ही-ली ने कहा "भविष्य ग्रीन है और कोई भी देश इसे अकेले हासिल नहीं कर सकता. GH2 Solar के साथ हमारी साझेदारी भारत में उच्च गुणवत्ता वाले इलेक्ट्रोलाइजर निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम है."
105 मेगावाट उत्पादन, 2030 तक 500 मेगावाट तक विस्तार की योजना
इस संयंत्र की प्रारंभिक वार्षिक उत्पादन क्षमता 105 मेगावाट होगी, जिसे 2030 तक बढ़ाकर 500 मेगावाट करने की योजना है. यह परियोजना भारत सरकार के SECI के SIGHT प्रोग्राम के तहत चयनित है और इसमें ₹157.5 करोड़ की PLI (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव) सब्सिडी का समर्थन शामिल है.
GH2 Solar द्वारा इस परियोजना में कुल ₹400 करोड़ का निवेश किया जाएगा, जिसमें पहले चरण में ₹100 करोड़ की लागत से 3 GWh BESS (Battery Energy Storage System) असेंबली लाइन स्थापित की जाएगी. शेष ₹300 करोड़ का निवेश 2030 तक चरणबद्ध रूप से किया जाएगा.
स्थानीय स्तर पर तैयार होंगे इलेक्ट्रोलाइज़र
GH2 Solar और AHES Ltd के इस संयुक्त उपक्रम के माध्यम से उन्नत अल्कलाइन इलेक्ट्रोलाइजर तकनीक भारत लाई जाएगी. भविष्य में PEM और अन्य पीढ़ी प्रणालियों पर भी कार्य किया जाएगा. UK की Rhizome Energy कंपनी इस संयंत्र में सस्टेनेबल डिजाइन और एडवांस इंजीनियरिंग सुनिश्चित करेगी ताकि यह भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सके.
300 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार, आत्मनिर्भर भारत मिशन को समर्थन
परियोजना के तहत संयंत्र के संचालन से 300 से अधिक प्रत्यक्ष नौकरियों के अवसर सृजित होंगे, साथ ही सप्लाई चेन, लॉजिस्टिक्स और रिन्यूएबल एनर्जी सेवाओं में सैकड़ों अप्रत्यक्ष रोजगार भी उत्पन्न होंगे. Invest India और Skill Council for Green Jobs इस परियोजना को तकनीकी, प्रशिक्षण और मानव संसाधन विकास में सहयोग प्रदान करेंगे.
ग्रीन हाइड्रोजन मिशन और नेट जीरो लक्ष्य को मिलेगा समर्थन
यह परियोजना भारत सरकार के राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को मजबूती प्रदान करेगी, जिसका लक्ष्य 2030 तक 5 मिलियन टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का है. यह संयंत्र इस दिशा में एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता बनेगा, विशेष रूप से स्टील, उर्वरक और रिफाइनरी जैसे उच्च उत्सर्जन वाले क्षेत्रों के डीकार्बोनाइज़ेशन में. साथ ही, यह यूरोप और पूर्वी एशिया को निर्यात के अवसर भी उत्पन्न करेगा.
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