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भारत का बी2सी ई-कॉमर्स सेक्टर 2025 में 1.3 बिलियन डॉलर की फंडिंग के साथ सतत विकास की राह पर

शहरी केंद्र बने मुख्य आधार, अर्ध-शहरी बाजार अगला विकास सीमांत

नवनीत सिंह 1 year ago

भारत का बी2सी (बिजनेस-टू-कंज्यूमर) ई-कॉमर्स इकोसिस्टम निवेशकों का ध्यान लगातार आकर्षित कर रहा है, जिसने 2025 में अब तक 1.3 बिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई है. ट्रैक्सन (Tracxn) की नई रिपोर्ट के अनुसार, इस साल अब तक 2,700 से अधिक स्टार्टअप्स को फंडिंग मिली है, जो सतत विकास और लाभप्रदता पर केंद्रित एक परिपक्व निवेश माहौल को दर्शाता है.

स्पिन्नी (Spinny) ने 171 मिलियन डॉलर की सीरीज़ F फंडिंग के साथ सूची में शीर्ष स्थान हासिल किया, इसके बाद गीवा (GIVA) ने सीरीज़ B और C में कुल 68 मिलियन डॉलर जुटाए, जबकि टीएमआरडब्ल्यू (TMRW) ने सीरीज़ C में 50 मिलियन डॉलर हासिल किए. ज़ेप्टो (Zepto) ने तीन सीरीज़ G राउंड्स के जरिए 49 मिलियन डॉलर जुटाए. अब तक भारत के बी2सी ई-कॉमर्स सेक्टर ने 5,600 से अधिक फंडिंग राउंड्स में कुल 57 बिलियन डॉलर से अधिक की फंडिंग प्राप्त की है.

पिछले दशक में वार्षिक फंडिंग 2016 के 2.1 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2021 में 11.6 बिलियन डॉलर के शिखर पर पहुंच गई, जो महामारी के दौरान तेज़ डिजिटल अपनाने से प्रेरित थी। उस वर्ष दो ऐतिहासिक 1 बिलियन डॉलर से अधिक के सौदे हुए - फ्लिपकार्ट का 3.6 बिलियन डॉलर का सीरीज़ J और स्विगी का 1.25 बिलियन डॉलर का सीरीज़ J - जिसने भारत की डिजिटल कॉमर्स क्षमता पर निवेशकों का विश्वास मज़बूत किया.

महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स कर रहे हैं नवाचार को आगे बढ़ाने का नेतृत्व
महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स लगातार अहम भूमिका निभा रहे हैं, जिन्होंने अब तक 1,900 फंडिंग राउंड्स के माध्यम से 8 बिलियन डॉलर से अधिक जुटाए हैं। इनमें से सात कंपनियां यूनिकॉर्न बन चुकी हैं, जबकि 60 से अधिक का अधिग्रहण हुआ है और 10 सार्वजनिक हो चुकी हैं। प्रमुख नामों में नायका (Nykaa), ममाअर्थ (Mamaearth), गीवा (GIVA) और फॉक्सटेल (Foxtale) शामिल हैं। 2025 में ही गीवा और फॉक्सटेल ने क्रमशः 68 मिलियन डॉलर और 30 मिलियन डॉलर जुटाए, जो महिला-नेतृत्व वाले उपभोक्ता ब्रांड्स में निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है।

नए खिलाड़ी और बदलता उपभोक्ता व्यवहार
यह सेक्टर अब 34,000 से अधिक स्टार्टअप्स तक विस्तारित हो गया है, जिनमें से 22,000 से अधिक 2016 और 2025 के बीच स्थापित हुए हैं। बढ़ती स्मार्टफोन पहुंच, बेहतर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और बदलते उपभोक्ता व्यवहार ने इस वृद्धि को प्रोत्साहित किया है। नए खिलाड़ी जैसे मायडेक (MyDeck), डियामिया (Diamia) और हैबिट (Habit) खिलौनों, पर्सनल केयर और फूड डिलीवरी में विविधता ला रहे हैं।

ट्रैक्सन की सह-संस्थापक नेहा सिंह ने कहा, “भारत के बी2सी ई-कॉमर्स क्षेत्र में फंडिंग एक स्थिर परिपक्वता के दौर को दर्शाती है। जहां पहले के वर्ष तेज़ विस्तार से परिभाषित थे, वहीं आज का ध्यान सतत विकास, मजबूत यूनिट इकोनॉमिक्स और नवाचार व भरोसे के माध्यम से स्थायी मूल्य सृजन पर है।”

प्रमुख शहरी केंद्रों में केंद्रित फंडिंग
फंडिंग गतिविधि अब भी प्रमुख शहरों में केंद्रित है। बेंगलुरु 33.8 बिलियन डॉलर की कुल फंडिंग के साथ शीर्ष पर है, इसके बाद दिल्ली-एनसीआर 16.7 बिलियन डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर है। इन दोनों हब्स में रिटेल, मोबिलिटी और हॉस्पिटैलिटी जैसे बड़े प्लेटफॉर्म सक्रिय हैं। फ्लिपकार्ट 12.1 बिलियन डॉलर के साथ सबसे अधिक फंडेड स्टार्टअप है, इसके बाद ओला (3.8 बिलियन डॉलर), स्विगी (3.6 बिलियन डॉलर) और ओयो (3.5 बिलियन डॉलर) हैं। ज़ेप्टो ने 2 बिलियन डॉलर जुटाए हैं, जो क्विक-कॉमर्स में बढ़ती निवेशक रुचि को दर्शाता है।

विलय और आईपीओ गतिविधि में तेजी
सेक्टर ने अब तक 235 अधिग्रहण देखे हैं, जिनमें 2025 में टीसीसी कॉन्सेप्ट द्वारा पेपरफ्राई और रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स द्वारा शून्य (Shunya) का अधिग्रहण शामिल है, जो जारी रणनीतिक एकीकरण को दर्शाता है। इसके अलावा, अब तक 64 आईपीओ पूरे हो चुके हैं, जिनमें हालिया सूचीबद्ध कंपनियों में जैपफ्रेश (Zappfresh), अर्बन कंपनी (Urban Company), ब्लूस्टोन ज्वेलरी (BlueStone Jewellery) और इलेक्ट्रॉनिक्स बाज़ार (Electronics Bazaar) शामिल हैं।

पेडलस्टार्ट के सह-संस्थापक मनस पाल ने कहा, “अर्ध-शहरी क्षेत्रों के उपभोक्ता अब अधिक जागरूक हो रहे हैं, और उनकी आकांक्षी खपत आधुनिक ब्रांड्स को बढ़ावा दे रही है। ये बाजार नई अग्रणी कंपनियों को विकसित करने में अहम भूमिका निभाएंगे, जो आने वाले दशकों तक फलती-फूलती रहेंगी।”

जैसे-जैसे भारत का बी2सी ई-कॉमर्स इकोसिस्टम सतत विकास के दौर में प्रवेश कर रहा है, निवेशक और स्टार्टअप्स नवाचार, दक्षता और अर्ध-शहरी बाजारों की अपार संभावनाओं पर दांव लगा रहे हैं — जो भारत के अगले यूनिकॉर्न्स की नई लहर को आकार देंगे।


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