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भारतीय रियल एस्टेट में 80 अरब डॉलर का निवेश, 2047 तक बनेगा वैश्विक हब: रिपोर्ट
रिपोर्ट बताती है के अनुसार कोरोना महामारी के बाद निवेशक भारत को अब केवल उभरते बाजार के रूप में नहीं देख रहे, बल्कि इसे भविष्य का वैश्विक केंद्र मान रहे हैं
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 9 months ago
भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर तेजी से वैश्विक निवेशकों का भरोसा जीत रहा है. क्रेडाई और कोलियर्स इंडिया की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 15 वर्षों में इस क्षेत्र में 80 अरब डॉलर का संस्थागत निवेश आया है, जिसमें लगभग 57 प्रतिशत विदेशी पूंजी का योगदान रहा. विशेषज्ञ मानते हैं कि यह प्रवृत्ति भारत को 2047 तक वैश्विक रियल्टी हब बनाने की दिशा में ले जा रही है. रिपोर्ट बताती है कि महामारी के बाद घरेलू पूंजी का प्रवाह भी तेज़ हुआ है, जिससे सेक्टर और स्थिर हुआ है. निवेशक भारत को अब केवल उभरते बाज़ार के रूप में नहीं देख रहे, बल्कि इसे भविष्य का वैश्विक केंद्र मान रहे हैं.
अनुमान है कि 2047 तक भारतीय रियल एस्टेट का आकार 5 से 10 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच सकता है. इस दौरान यह न केवल आर्थिक विकास में अहम योगदान देगा बल्कि लाखों नौकरियां भी सृजित करेगा. इंफ्रास्ट्रक्चर, कंस्ट्रक्शन, टेक्नोलॉजी और वित्तीय सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों में भी बड़ी वृद्धि होगी.
स्मार्ट सिटी, ग्रीन बिल्डिंग्स और आधुनिक टाउनशिप के विकास के साथ भारत की जीवनशैली और शहरी परिदृश्य तेजी से बदल रहा है. विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सेक्टर अब केवल वर्गफुट और कीमतों तक सीमित नहीं है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण और टिकाऊ जीवन देने का माध्यम बन चुका है.
भूमिका रियल्टी के सीईओ सिद्धार्थ कत्याल ने कहा कि आज का रियल एस्टेट जीवनशैली को बेहतर बनाने का जरिया है. 2047 तक यह सेक्टर न केवल रोज़गार देगा बल्कि परिवारों को टिकाऊ जीवनशैली भी उपलब्ध कराएगा.
एसकेए ग्रुप के डायरेक्टर संजय शर्मा ने कहा कि सरकारी योजनाओं और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स ने इस सेक्टर को मज़बूत आधार दिया है. आने वाले दशक में भारत का शहरी परिदृश्य वैश्विक शहरों की बराबरी करेगा.
निंबस ग्रुप के सीईओ साहिल अग्रवाल ने कहा कि भारतीय रियल एस्टेट में हो रहा निवेश आने वाली पीढ़ियों के लिए नए अवसर खोल रहा है. यहां निवेशकों को आकर्षक रिटर्न और ग्राहकों को किफायती घर मिल रहे हैं.
वन ग्रुप के डायरेक्टर,उदित जैन ने कहा भारत का रियल एस्टेट सेक्टर अब सिर्फ स्थानीय खरीदारों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने अपनी पकड़ वैश्विक निवेशकों तक मजबूत कर ली है. पिछले कुछ वर्षों में हमने देखा है कि भारत की आर्थिक मजबूती, तेजी से हो रहे शहरीकरण और सरकारी नीतियों ने इस क्षेत्र को नई उड़ान दी है.
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