US को पसंद आ रहा Bharat का साथ, हमारे निर्यात में 44% तक हुआ इजाफा 

भारत से अमेरिका जाने वाले सामान में तेजी से इजाफा हो रहा है. अमेरिका भारत से अपने आयात को बढ़ा रहा है, जबकि चीन से आयात को कम कर रहा है.

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Saturday, 23 September, 2023
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दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था यानी अमेरिका (America) में भारतीय उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है और इस वजह से भारत का निर्यात (India Export) भी बढ़ रहा है. जबकि दुनिया के सबसे बड़े सप्लायर कहे जाने वाले चीन (China) की हिस्सेदारी अमेरिकी बाजार में कम होती जा रही है. बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (BCG) की रिपोर्ट बताती है कि संबंधों में खटास के चलते अमेरिका चीन से अपने आयात में लगातार कटौती कर रहा है. जबकि भारत पर उसका विश्वास बढ़ा है. यूएस मैक्सिको और अन्य दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के साथ-साथ भारत से आयात बढ़ा रहा है.

वर्ल्ड लीडर की भूमिका
खुद को मैन्युफैक्चरिंग हब के तौर पर स्थापित करने के लिए भारत पिछले कुछ सालों से लगातार प्रयास कर रहा है और कई सेक्टर में उसे सफलता भी मिली है. भारत ने 14 सेक्टर्स में अपनी मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना शुरू की है. BCG की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 5 सालों में भारत अपने प्रयासों से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में वर्ल्ड लीडर के तौर पर उभरकर सामने आया है. इसी के चलते, वर्ष 2018 से 2022 के बीच अमेरिका होने वाले भारतीय निर्यात में कम से कम 44% का इजाफा हुआ है. 

चीन के लिए बुरी खबर
भारत का एक्सपोर्ट यहां अमेरिका में बढ़ रहा है. वहीं, चीन के यूएस निर्यात में कमी आई है. वर्ष 2018 से 2022 की अवधि में अमेरिका को होने वाले चीन के निर्यात में 10% कटौती हुई है, जो दर्शाता है कि अमेरिका को चीनी उत्पादों पर अब भरोसा नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने चीन से मैकेनिकल मशीनरी के आयात में पिछले चार सालों में 28 प्रतिशत की कटौती की है, जबकि Bharat से US भेजे जाने वाली मशीनरी में इस अवधि में 70 फीसदी का इजाफा हुआ है. 

भारत में बने उत्पाद सस्ते
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत इंजन और टरबाइन का बड़ा उत्पादक बन रहा है. वहां उत्पादन लागत कम है, जिससे उत्पाद अपेक्षाकृत सस्ते होते हैं. बता दें कि भारत दूसरे देशों के साथ व्यापार को लगातार मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है. पिछले साल भारत ने UAE और ऑस्ट्रेलिया के साथ विदेश व्यापार समझौता किया था.


घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा, सरकार ने कई कंपोनेंट्स पर हटाई कस्टम ड्यूटी

सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कई जरूरी पार्ट्स और मशीनों पर कस्टम ड्यूटी में राहत दी गई है. यह छूट 31 मार्च 2029 तक लागू रहेगी.

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Thursday, 09 July, 2026
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केंद्र सरकार ने देश में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और लिथियम-आयन बैटरी निर्माण में इस्तेमाल होने वाली कई मशीनों व पुर्जों पर 31 मार्च 2029 तक कस्टम ड्यूटी में छूट देने का ऐलान किया है. इस फैसले से कंपनियों की उत्पादन लागत घटेगी, निवेश को बढ़ावा मिलेगा और भविष्य में उपभोक्ताओं को इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद सस्ती कीमत पर मिल सकते हैं.

'मेक इन इंडिया' को मिलेगा बड़ा बूस्ट

भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में सरकार ने अहम कदम उठाया है. इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कई जरूरी पार्ट्स और मशीनों पर कस्टम ड्यूटी में राहत दी गई है. यह छूट 31 मार्च 2029 तक लागू रहेगी. सरकार का मानना है कि इससे देश में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, विदेशी आयात पर निर्भरता घटेगी और घरेलू विनिर्माण उद्योग अधिक प्रतिस्पर्धी बनेगा.

उत्पादन लागत घटेगी, निवेश बढ़ेगा

भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन कई महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स के लिए अब भी विदेशी आयात पर निर्भरता बनी हुई है. कस्टम ड्यूटी में छूट मिलने से कंपनियों की उत्पादन लागत कम होगी और घरेलू सप्लाई चेन मजबूत होगी. उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इससे इलेक्ट्रॉनिक्स और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में नए निवेश आकर्षित होंगे. साथ ही 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को भी मजबूती मिलेगी.

लिथियम-आयन बैटरी उद्योग को बड़ी राहत

इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा लिथियम-आयन बैटरी बनाने वाली कंपनियों को मिलेगा. इलेक्ट्रिक वाहनों (EV), स्मार्टफोन्स, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में इस्तेमाल होने वाली बैटरियों के निर्माण के लिए जरूरी मशीनों पर कस्टम ड्यूटी में राहत दी गई है.

सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेस एंड कस्टम्स (CBIC) के नोटिफिकेशन के अनुसार, अब बैटरी निर्माण प्रक्रिया से जुड़ी 85 प्रकार की मशीनें रियायती कस्टम ड्यूटी के दायरे में आएंगी. इनमें पाउडर प्रोसेसिंग, स्लरी मिक्सिंग, कोटिंग, इलेक्ट्रोड वाइंडिंग, लेजर वेल्डिंग, टेस्टिंग, इंस्पेक्शन, पैकेजिंग और एफ्लुएंट ट्रीटमेंट से जुड़ी मशीनें शामिल हैं.

डिस्प्ले कंपोनेंट्स पर भी मिली राहत

सरकार ने ऑटोमोबाइल, मेडिकल उपकरणों और औद्योगिक मशीनों में इस्तेमाल होने वाली डिस्प्ले असेंबली के कई आयातित कंपोनेंट्स पर भी कस्टम ड्यूटी हटा दी है. अब डिस्प्ले सेल, बैकलाइट यूनिट, फ्लेक्सिबल प्रिंटेड सर्किट असेंबली (FPCA) और फ्रेम जैसे पुर्जे कम लागत पर आयात किए जा सकेंगे. हालांकि, यह छूट मोबाइल फोन, टेलीविजन, स्मार्टवॉच और इंटरैक्टिव फ्लैट पैनल डिस्प्ले के कंपोनेंट्स पर लागू नहीं होगी.

वायरलेस चार्जिंग मॉड्यूल बनाना होगा सस्ता

सरकार ने स्मार्टफोन के वायरलेस चार्जिंग मॉड्यूल में इस्तेमाल होने वाले कई अहम कंपोनेंट्स पर भी कस्टम ड्यूटी में छूट दी है. इनमें NFC, इंडक्टर कॉइल, नैनो-क्रिस्टलाइन असेंबली, ई-शील्ड, PET लाइनर, PC शिम और NdFeB मैग्नेट जैसे पुर्जे शामिल हैं. इससे भविष्य में भारत में वायरलेस चार्जिंग तकनीक का स्थानीय उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है.

उपभोक्ताओं को कैसे होगा फायदा?

उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि जब कंपनियों की उत्पादन लागत घटेगी तो इसका फायदा धीरे-धीरे उपभोक्ताओं तक भी पहुंचेगा. भविष्य में इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है और ग्राहकों को अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उत्पाद मिलने की संभावना बढ़ेगी. इसके अलावा, स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ने से रोजगार सृजन, तकनीकी निवेश और निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा.

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बिना निवेशकों से मिले दो बहनों ने जुटाए 91 हजार डॉलर, क्राउडफंडिंग से लिखी सफलता की नई कहानी

लखनऊ की दो बहनों ने बिना किसी निवेशक से मुलाकात किए और बिना इक्विटी छोड़े अपने स्टार्टअप Mithrasa के लिए Kickstarter के जरिए 40 से अधिक देशों के 1,267 समर्थकों से 91,960 डॉलर जुटाए.

Last Modified:
Thursday, 09 July, 2026
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महिला उद्यमियों के लिए पूंजी जुटाना आज भी सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है, लेकिन लखनऊ की दो बहनों, मृणालिनी और न्योनिका मित्रा ने इस धारणा को गलत साबित कर दिया. दोनों ने बिना किसी निवेशक से मुलाकात किए और बिना इक्विटी छोड़े अपने स्टार्टअप Mithrasa के लिए Kickstarter के जरिए 40 से अधिक देशों के 1,267 समर्थकों से 91,960 डॉलर जुटाए. उनकी यह सफलता महिला उद्यमिता और क्राउडफंडिंग की ताकत का बड़ा उदाहरण बनकर उभरी है.

फंडिंग नहीं, ग्राहकों के भरोसे बनाई कंपनी

महिला उद्यमियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अक्सर आइडिया नहीं, बल्कि पूंजी, नेटवर्क और भरोसे तक पहुंच होती है. दुनियाभर में महिलाओं को संस्थागत निवेश का केवल एक छोटा हिस्सा ही मिलता है. रचनात्मक व्यवसायों को निवेशक अक्सर शौक समझकर नजरअंदाज कर देते हैं और यदि स्टार्टअप किसी बड़े स्टार्टअप हब की बजाय लखनऊ जैसे शहर से हो, तो यह चुनौती और बढ़ जाती है.

मल्टीमीडिया नैरेटिव स्टूडियो Mithrasa की सह-संस्थापक मृणालिनी और न्योनिका मित्रा ने इन चुनौतियों के बावजूद सीधे वैश्विक ग्राहकों तक पहुंचने का फैसला किया और निवेशकों के बजाय बाजार से अपनी पहचान बनाई.

Kickstarter पर लक्ष्य से 29 गुना ज्यादा फंडिंग

दोनों बहनों का पहला टेबलटॉप कार्ड गेम 'One More Page' Kickstarter पर लॉन्च हुआ. उन्होंने 3,108 डॉलर का लक्ष्य रखा था, लेकिन अभियान के अंत तक 91,960 डॉलर जुटा लिए. यानी लक्ष्य का करीब 2,900 प्रतिशत.

इस अभियान को अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा समेत 40 से अधिक देशों के 1,267 समर्थकों का साथ मिला. लेट प्लेज पूरे होने के बाद कुल फंडिंग 1 लाख डॉलर से अधिक पहुंचने की उम्मीद है. सबसे खास बात यह रही कि न उन्होंने किसी निवेशक के सामने प्रेजेंटेशन दिया और न ही कंपनी की कोई इक्विटी छोड़ी.

ग्राहकों ने किया फैसला, निवेशकों ने नहीं

मृणालिनी मित्रा कहती हैं कि अमेरिकी और यूरोपीय स्टूडियो के दबदबे वाले क्षेत्र में पहली बार काम करने वाले क्रिएटर के रूप में उन्होंने सीखा कि आखिरकार सबसे महत्वपूर्ण चीज उत्पाद की गुणवत्ता होती है. उनके मुताबिक, महिला उद्यमी होने के कारण उन्हें ऐसे पूर्वाग्रहों का सामना करना पड़ा, जहां कुछ लोगों की क्षमता को आसानी से स्वीकार कर लिया जाता है, जबकि महिलाओं की योग्यता पर सवाल उठाए जाते हैं.

उन्होंने कहा कि इसी वजह से उन्होंने अपने काम को इतना बेहतर बनाया कि उस पर सवाल उठाने की गुंजाइश ही न रहे. हर कार्ड हाथ से तैयार किया गया और हर छोटे-बड़े पहलू पर विशेष ध्यान दिया गया. उनका कहना है कि दुनिया भर के करीब 1,300 समर्थकों में से किसी ने यह नहीं पूछा कि वे कहां से हैं या कंपनी महिलाओं ने बनाई है. ग्राहकों ने केवल उत्पाद को देखा.

गेमिंग इंडस्ट्री में नेतृत्व की भूमिकाओं में महिलाओं की कमी

कंपनी में ऑपरेशंस, लॉजिस्टिक्स और फाइनेंस संभालने वाली न्योनिका मित्रा का मानना है कि गेमिंग और स्टोरीटेलिंग इंडस्ट्री में नेतृत्व के स्तर पर महिलाओं की भागीदारी अभी भी बेहद कम है. उनके अनुसार, महिलाएं कलाकार, लेखक और कम्युनिटी मैनेजर जैसी रचनात्मक भूमिकाओं में तो बड़ी संख्या में हैं, लेकिन संस्थापक, ऑपरेशनल लीडर और बजट व वितरण जैसे निर्णय लेने वाले पदों पर उनकी मौजूदगी काफी सीमित है.

उन्होंने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग और ग्लोबल सप्लाई चेन में काम करते हुए उन्होंने बहुत कम महिलाओं को इन भूमिकाओं में देखा है. उनके मुताबिक, समस्या प्रतिभा की नहीं बल्कि अवसरों की है.

महिलाओं के लिए क्या होना चाहिए बदलाव

न्योनिका का मानना है कि लड़कियों को डिजाइन और स्टोरीटेलिंग के साथ-साथ यूनिट इकोनॉमिक्स, मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और लाइसेंसिंग जैसी व्यावसायिक बुनियादी बातें भी सिखाई जानी चाहिए.

उन्होंने कहा कि क्राउडफंडिंग को वैकल्पिक नहीं, बल्कि मुख्य फंडिंग रणनीति के रूप में अपनाया जाना चाहिए, क्योंकि इससे महिला उद्यमियों को पारंपरिक निवेशकों की मंजूरी का इंतजार नहीं करना पड़ता.

उनका यह भी कहना है कि मीडिया को महिला उद्यमियों की कहानियां भी उसी तरह कवर करनी चाहिए, जैसे पुरुष उद्यमियों की होती हैं, जहां चर्चा उनके कारोबार, मार्जिन, सप्लाई चेन और बाजार हिस्सेदारी पर हो.

बहनों के बीच स्पष्ट जिम्मेदारियां बनी ताकत

Mithrasa में दोनों बहनों के बीच जिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारा है. मृणालिनी डिजाइन, ब्रांड और कहानी की दुनिया तैयार करती हैं, जबकि न्योनिका ऑपरेशंस, लॉजिस्टिक्स और फाइनेंस संभालती हैं.

दोनों का कहना है कि बहनों के रूप में साथ काम करने का सबसे बड़ा फायदा आपसी भरोसा रहा. उनके अनुसार, स्टार्टअप्स में अक्सर सह-संस्थापकों के बीच विवाद बड़ी वजह बनते हैं, लेकिन उनके बीच अधिकारों का बंटवारा पूरी तरह स्पष्ट है और कोई भी दूसरे के क्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं करता.

मां के इलाज के दौरान जन्मा था Mithrasa

Mithrasa की शुरुआत उनकी मां के कैंसर उपचार के दौरान हुई. उस कठिन दौर में पूरा परिवार हर रविवार बोर्ड गेम खेलकर साथ समय बिताता था. दोनों बहनों का कहना है कि इसी अनुभव ने उनके पहले गेम 'One More Page' को जन्म दिया, जो प्यार और रिश्तों पर आधारित है. उन्होंने यह भी तय किया कि कंपनी अपने मुनाफे का 2 प्रतिशत भारत के पशु आश्रयों को दान करेगी. गेम में मौजूद 'बो' नाम की गाय उनके रेस्क्यू लैब्राडोर से प्रेरित है.

सफलता की सबसे बड़ी कहानी 'शून्य' में छिपी है

BW के पाठकों के लिए मृणालिनी और न्योनिका मित्रा की सफलता केवल 2,900 प्रतिशत फंडिंग हासिल करने तक सीमित नहीं है. इस कहानी की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि उन्होंने शून्य इक्विटी छोड़ी, शून्य निवेशकों से मंजूरी ली और शून्य निवेशक बैठकों के बावजूद वैश्विक बाजार में छह अंकों की फंडिंग हासिल कर यह साबित कर दिया कि मजबूत उत्पाद और ग्राहकों का भरोसा किसी भी स्टार्टअप की सबसे बड़ी पूंजी हो सकता है.

ओजस्विता त्रिवेदी, BW रिपोर्टर्स
(लेखिका BW Businessworld में ट्रेनी संवाददाता हैं.)


Flipkart ने फैशन कैटेगरी में जीरो कमीशन किया लागू, 90 हजार सेलर्स को मिलेगा फायदा

कंपनी का कहना है कि इस फैसले से करीब 90 हजार सेलर्स, खासकर MSME और D2C ब्रांड्स को अधिक मुनाफा कमाने, कारोबार बढ़ाने और नए ग्राहकों तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी.

Last Modified:
Thursday, 09 July, 2026
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ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट (Flipkart) ने अपने प्लेटफॉर्म पर फैशन कैटेगरी के सभी प्रोडक्ट्स के लिए जीरो कमीशन नीति लागू करने का ऐलान किया है. पहले यह सुविधा सिर्फ 1,000 रुपये तक की कीमत वाले फैशन उत्पादों पर उपलब्ध थी. कंपनी का कहना है कि इस फैसले से करीब 90 हजार सेलर्स, खासकर MSME और D2C ब्रांड्स को अधिक मुनाफा कमाने, कारोबार बढ़ाने और नए ग्राहकों तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी.

अब सभी फैशन प्रोडक्ट्स पर नहीं लगेगा कमीशन

फ्लिपकार्ट ने अपनी जीरो कमीशन पॉलिसी का दायरा बढ़ाते हुए इसे फैशन कैटेगरी के सभी प्रोडक्ट्स पर लागू कर दिया है. इससे अब किसी भी कीमत के फैशन प्रोडक्ट पर कंपनी कमीशन नहीं लेगी. इस कदम का उद्देश्य सेलर्स को अधिक कमाई का अवसर देना और फैशन बिजनेस को बढ़ावा देना है.

90 हजार से अधिक सेलर्स को होगा फायदा

कंपनी के मुताबिक, इस फैसले से फैशन कैटेगरी में कारोबार करने वाले करीब 90 हजार विक्रेताओं को लाभ मिलेगा. इनमें बड़ी संख्या में MSME, घरेलू ब्रांड और डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) कंपनियां शामिल हैं. जीरो कमीशन लागू होने के बाद सेलर्स अपने मार्जिन का बड़ा हिस्सा अपने पास रख सकेंगे, जिससे वे नए उत्पाद लॉन्च करने, कारोबार का विस्तार करने और अपने ब्रांड को मजबूत बनाने में निवेश कर सकेंगे.

AI टूल्स से भी मिलेगी कारोबार बढ़ाने में मदद

फ्लिपकार्ट ने कहा कि सेलर्स को उसके AI आधारित डैशबोर्ड का भी लाभ मिलेगा. इसके जरिए उन्हें ग्राहकों की मांग, बाजार के ट्रेंड और कैटलॉग मैनेजमेंट से जुड़ी अहम जानकारी मिलेगी. इससे वे बेहतर तरीके से अपनी प्रोडक्ट रेंज बढ़ा सकेंगे और देशभर में ज्यादा ग्राहकों तक पहुंच बना सकेंगे.

ग्राहकों को मिलेंगे ज्यादा विकल्प

कंपनी का मानना है कि जब सेलर्स अपने कारोबार का विस्तार करेंगे तो ग्राहकों को भी इसका सीधा फायदा मिलेगा. उन्हें फैशन कैटेगरी में अधिक विकल्प, नए ट्रेंड्स तक तेजी से पहुंच और प्रीमियम प्रोडक्ट्स की बेहतर उपलब्धता मिलेगी. साथ ही प्रतिस्पर्धा बढ़ने से ग्राहकों को बेहतर कीमतों का भी लाभ मिलने की उम्मीद है.

Gen Z ग्राहकों पर कंपनी की खास नजर

फ्लिपकार्ट के अनुसार, फैशन कारोबार में Gen Z उपभोक्ताओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है. वर्तमान में फ्लिपकार्ट फैशन के लगभग 50% दर्शक और ग्राहक Gen Z वर्ग से आते हैं. यही वजह है कि कंपनी तेजी से बदलते फैशन ट्रेंड्स और नई मांग को ध्यान में रखते हुए अपने सेलर नेटवर्क को मजबूत करने पर जोर दे रही है.

फ्लिपकार्ट फैशन के वाइस प्रेसिडेंट कपिल थिरानी ने कहा कि भारत का फैशन इकोसिस्टम तेजी से विकसित हो रहा है और इसमें MSME, घरेलू ब्रांड्स तथा D2C कंपनियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं.

उन्होंने कहा कि पूरे फैशन कैटेगरी में जीरो कमीशन लागू करना कंपनी का 'सेलर-फर्स्ट' दृष्टिकोण है. इससे विक्रेता नवाचार, नए उत्पादों के विस्तार और ब्रांड निर्माण में अधिक निवेश कर सकेंगे. इसके साथ ही ग्राहकों को ज्यादा विकल्प, नए फैशन ट्रेंड्स और बेहतर कीमतों का लाभ मिलेगा.

फैशन कारोबार को मिलेगा नया बूस्ट

फ्लिपकार्ट का मानना है कि आज फैशन केवल खरीदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों की पहचान, संस्कृति और आत्म-अभिव्यक्ति का अहम हिस्सा बन चुका है. ऐसे में जीरो कमीशन जैसी पहल डिजिटल कॉमर्स से जुड़े कारोबारियों को आगे बढ़ने का अवसर देगी और देशभर के ग्राहकों को बेहतर शॉपिंग अनुभव उपलब्ध कराएगी.


IMF के बाद अब ADB ने भी घटाया भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान, महंगे तेल और बढ़ती लागत का असर

ADB ने जुलाई 2026 संस्करण के 'एशियन डेवलपमेंट आउटलुक' में FY27 के लिए भारत की GDP वृद्धि दर का अनुमान 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया है.

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Thursday, 09 July, 2026
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एशियाई विकास बैंक (ADB) ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया है. बैंक का कहना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, परिवहन लागत में बढ़ोतरी और उपभोक्ताओं पर बढ़ता महंगाई का बोझ निजी खपत को प्रभावित कर रहा है. हालांकि, इन चुनौतियों के बावजूद ADB का मानना है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना रहेगा. बता दें, इससे पहले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर (GDP Growth) के अनुमान में मामूली कटौती की है.

IMF ने अपनी अपडेटेड वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक (World Economic Outlook) रिपोर्ट में कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की GDP 6.4% की दर से बढ़ेगी. हालांकि, अगले वित्त वर्ष 2027-28 (FY28) के लिए अनुमान बढ़ाकर 6.7% कर दिया गया है. अप्रैल में FY28 के लिए 6.5% ग्रोथ का अनुमान लगाया गया था.

FY27 के लिए GDP ग्रोथ अनुमान में कटौती

ADB ने जुलाई 2026 संस्करण के 'एशियन डेवलपमेंट आउटलुक' में FY27 के लिए भारत की GDP वृद्धि दर का अनुमान 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया है. अप्रैल 2026 में जारी रिपोर्ट में बैंक ने 6.9% की ग्रोथ का अनुमान लगाया था. हालांकि, संशोधित अनुमान के बावजूद ADB का आकलन अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के 6.4% के अनुमान से बेहतर है.

क्यों घटाया गया ग्रोथ का अनुमान?

ADB के मुताबिक, कच्चे तेल की लगातार ऊंची कीमतों ने अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है. ईंधन महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ी है, जिसका असर लगभग हर वस्तु और सेवा की कीमत पर पड़ा है. बैंक का कहना है कि बढ़ती महंगाई के कारण लोगों की खरीदारी क्षमता प्रभावित हुई है, जिससे निजी खपत में कमजोरी देखने को मिल रही है. यही वजह है कि आर्थिक वृद्धि की रफ्तार पहले के अनुमान से धीमी रहने की संभावना है.

पश्चिम एशिया का तनाव भी बना जोखिम

रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर रहा है. इसके अलावा मौसम संबंधी जोखिम कृषि उत्पादन पर असर डाल सकते हैं. यदि ये परिस्थितियां बनी रहती हैं तो भारत की आर्थिक वृद्धि पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है.

इन वजहों से अर्थव्यवस्था को मिलेगा सहारा

ADB का मानना है कि चुनौतियों के बावजूद भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहेगी. इसके पीछे कई सकारात्मक कारक हैं. इनमें विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए सरकार के प्रयास, ईंधन पर टैक्स राहत, लक्षित कर्ज सहायता योजनाएं, सेवा क्षेत्र का मजबूत निर्यात और सरकार का लगातार पूंजीगत व्यय (Capex) शामिल हैं. बैंक का कहना है कि यही कारक आने वाले समय में आर्थिक गतिविधियों को गति देंगे.

FY28 का अनुमान बरकरार

ADB ने वित्त वर्ष 2027-28 (FY28) के लिए भारत की विकास दर का अनुमान 7.3% पर यथावत रखा है. यह अनुमान भी IMF के 6.7% के अनुमान से अधिक है. रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में संभावित सुधार और विभिन्न देशों के साथ होने वाले व्यापार समझौतों से भारत के निर्यात को फायदा मिल सकता है, जिससे अगले वित्त वर्ष में तेज विकास की उम्मीद है.

महंगाई का अनुमान भी बढ़ाया

ADB ने FY27 के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान भी बढ़ा दिया है. अब बैंक को उम्मीद है कि महंगाई दर 5.2% रह सकती है, जबकि अप्रैल में इसे 4.5% रहने का अनुमान जताया गया था. बैंक के मुताबिक, तेल और खाद्य पदार्थों की ऊंची कीमतें तथा रुपये में कमजोरी महंगाई बढ़ने की प्रमुख वजह हैं. हालांकि, FY28 के लिए महंगाई का अनुमान 4% पर बरकरार रखा गया है.

सिर्फ भारत नहीं, पूरे दक्षिण एशिया पर असर

ADB ने दक्षिण एशिया के लिए भी आर्थिक वृद्धि का अनुमान घटाया है. वर्ष 2026 के लिए क्षेत्र की विकास दर का अनुमान 6.3% से घटाकर 6% कर दिया गया है. वहीं, विकासशील एशिया और प्रशांत क्षेत्र के लिए 2026 का ग्रोथ अनुमान 5.1% से घटाकर 4.9% कर दिया गया है.

ऊर्जा संकट और सप्लाई चेन बनी बड़ी चुनौती

ADB का कहना है कि पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, सप्लाई चेन और माल ढुलाई की लागत प्रभावित हुई है. इसका असर पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों पर पड़ रहा है.

भारत अब भी सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल

हालांकि ADB ने FY27 के लिए भारत की विकास दर का अनुमान घटाया है, लेकिन बैंक का भरोसा बरकरार है कि मजबूत घरेलू मांग, सरकारी निवेश, सेवा क्षेत्र का प्रदर्शन और निवेश आकर्षित करने वाली नीतियां भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बनाए रखेंगी. आने वाले महीनों में तेल की कीमतों और वैश्विक भू-राजनीतिक हालात पर भारत की आर्थिक रफ्तार काफी हद तक निर्भर करेगी.
 


Piramal Alternatives ने JRG Automotive में लगाए 125 करोड़ रुपये, मैन्युफैक्चरिंग विस्तार को मिलेगी रफ्तार

कंपनी ने बताया कि नई पूंजी का इस्तेमाल मैन्युफैक्चरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने, प्रोडक्ट पोर्टफोलियो का विस्तार करने और रणनीतिक विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने में किया जाएगा.

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Thursday, 09 July, 2026
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Piramal Alternatives ने ऑटो कंपोनेंट निर्माता JRG Automotive Industries में 125 करोड़ रुपये का निवेश किया है. इस निवेश का उद्देश्य कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाना, नए प्रोडक्ट्स विकसित करना और रणनीतिक अधिग्रहण (Acquisitions) के जरिए कारोबार का विस्तार करना है. यह निवेश Piramal Alternatives के India Credit Opportunities Fund II (PCF II) के माध्यम से किया गया है.

उत्पादन क्षमता बढ़ाने और विस्तार पर होगा फोकस

कंपनी ने बताया कि नई पूंजी का इस्तेमाल मैन्युफैक्चरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने, प्रोडक्ट पोर्टफोलियो का विस्तार करने और रणनीतिक विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने में किया जाएगा. इसमें संभावित अधिग्रहण भी शामिल हैं, जिससे कंपनी अपनी बाजार हिस्सेदारी मजबूत कर सके.

यह निवेश India Credit Opportunities Fund II (PCF II) का चौथा निवेश है. यह फंड विभिन्न क्षेत्रों की तेजी से बढ़ती मिड-मार्केट कंपनियों में तीन से चार वर्षों के निवेश क्षितिज के साथ निवेश करता है.

2012 में हुई थी JRG Automotive की स्थापना

साल 2012 में स्थापित और गुरुग्राम मुख्यालय वाली JRG Automotive Industries दोपहिया और यात्री वाहनों के लिए पावरट्रेन-अज्ञेय (Powertrain-Agnostic) इंजेक्शन-मोल्डेड प्लास्टिक कंपोनेंट्स का निर्माण करती है.

कंपनी के उत्तर, पश्चिम और दक्षिण भारत के प्रमुख ऑटोमोबाइल हब में आठ विनिर्माण संयंत्र हैं. JRG Automotive देश की प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियों (OEMs) को कंपोनेंट्स की आपूर्ति करती है. इसके अलावा कंपनी ने नए उत्पाद क्षेत्रों में विस्तार के लिए वैश्विक कंपोनेंट निर्माताओं के साथ संयुक्त उपक्रम (Joint Ventures) भी स्थापित किए हैं.

फंडिंग से विकास को मिलेगी गति

JRG Automotive Industries India के प्रबंध निदेशक पवन गोयल ने कहा कि यह निवेश कंपनी के ऑर्गेनिक विस्तार और रणनीतिक अधिग्रहण दोनों को गति देगा. इससे घरेलू और वैश्विक बाजारों में बढ़ती मांग को पूरा करने की कंपनी की क्षमता भी मजबूत होगी.

Piramal Alternatives को दीर्घकालिक विकास की उम्मीद

Piramal Alternatives के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) कल्पेश किकानी ने कहा कि JRG Automotive के प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियों के साथ मजबूत संबंध, प्रति वाहन अधिक कंपोनेंट्स की आपूर्ति करने की क्षमता और नए प्रोडक्ट कैटेगरी में विस्तार की रणनीति कंपनी को दीर्घकालिक विकास के लिए मजबूत स्थिति में रखती है.

मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों पर बढ़ रहा निवेशकों का भरोसा

Piramal Alternatives का कहना है कि यह निवेश उच्च विकास क्षमता वाली विनिर्माण कंपनियों को लचीले क्रेडिट समाधान उपलब्ध कराने की उसकी रणनीति का हिस्सा है. कंपनी का पहला India Credit Opportunities Fund, जिसका आकार 2,100 करोड़ रुपये था, पूरी तरह निवेश किया जा चुका है. इस फंड ने 17 कंपनियों में निवेश किया था, जिनमें से 13 निवेशों से सफलतापूर्वक निकास (Exit) भी हो चुका है.

विशेषज्ञों का मानना है कि यह निवेश भारत की ऑटोमोबाइल सप्लाई चेन, खासकर ऑटो कंपोनेंट निर्माताओं में बढ़ते निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है. वाहन उत्पादन और निर्यात के बढ़ते अवसरों के बीच ऐसी कंपनियां क्षमता विस्तार और उत्पाद विविधीकरण के जरिए तेजी से विकास की ओर बढ़ रही हैं.
 


क्रिप्टोकरेंसी पर RBI की सख्ती बरकरार, टैक्स चोरी के बढ़ते खतरे पर आयकर विभाग की चेतावनी

दस्तावेजों के अनुसार, RBI ने एक बार फिर अपनी पुरानी राय दोहराई है कि बैंकों और अन्य विनियमित वित्तीय संस्थानों को क्रिप्टोकरेंसी या निजी तौर पर जारी किए गए स्टेबलकॉइन्स को रखने, उनमें निवेश करने या किसी भी तरह का एक्सपोजर लेने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.

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Thursday, 09 July, 2026
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भारत में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है. सरकार के आंतरिक दस्तावेजों से पता चला है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अब भी क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध की दिशा में झुकाव रखने वाली नीति का समर्थन कर रहा है. वहीं, आयकर विभाग ने चेतावनी दी है कि विदेशी क्रिप्टो एक्सचेंज और निजी वॉलेट्स के जरिए होने वाले लेनदेन के कारण टैक्स चोरी और निगरानी बड़ी चुनौती बनती जा रही है.

सरकार की चिंता. वित्तीय स्थिरता और टैक्स अनुपालन पर फोकस

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) पर अभी तक कोई व्यापक कानून लागू नहीं होने के बावजूद सरकार की प्रमुख एजेंसियां इनके जोखिमों को लेकर सतर्क हैं. दस्तावेज बताते हैं कि नीति-निर्माताओं का मुख्य फोकस वित्तीय स्थिरता बनाए रखने, मौद्रिक संप्रभुता की रक्षा करने और टैक्स अनुपालन को मजबूत करने पर है, क्योंकि देश में क्रिप्टो अपनाने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है.

RBI ने दोहराई प्रतिबंध जैसी नीति की मांग

दस्तावेजों के अनुसार, RBI ने एक बार फिर अपनी पुरानी राय दोहराई है कि बैंकों और अन्य विनियमित वित्तीय संस्थानों को क्रिप्टोकरेंसी या निजी तौर पर जारी किए गए स्टेबलकॉइन्स को रखने, उनमें निवेश करने या किसी भी तरह का एक्सपोजर लेने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.

केंद्रीय बैंक का मानना है कि ऐसा करने से वित्तीय प्रणाली को अत्यधिक उतार-चढ़ाव वाले डिजिटल एसेट्स से होने वाले जोखिमों से बचाया जा सकेगा और बाजार में संकट की स्थिति में संक्रमण (Contagion) का खतरा भी कम होगा.

स्टेबलकॉइन को लेकर भी जताई चिंता

RBI ने स्टेबलकॉइन को लेकर भी गंभीर चिंता जताई है. केंद्रीय बैंक का कहना है कि विदेशी मुद्रा से जुड़े स्टेबलकॉइन भारत की मौद्रिक संप्रभुता को प्रभावित कर सकते हैं. वहीं, रुपये से जुड़े स्टेबलकॉइन सरकार की 'सीनियोरेज इनकम' यानी मुद्रा जारी करने से होने वाली आय को कम कर सकते हैं और वित्तीय स्थिरता के लिए अतिरिक्त जोखिम पैदा कर सकते हैं.

आयकर विभाग ने टैक्स चोरी पर जताई चिंता

आयकर विभाग ने अपनी समीक्षा में पाया कि मार्च 2023 को समाप्त वित्त वर्ष के दौरान लगभग 6.45 लाख लोगों ने क्रिप्टोकरेंसी में कारोबार किया था. हालांकि इनमें से केवल एक-चौथाई से भी कम लोगों ने अपनी आयकर रिटर्न (ITR) में इन लेनदेन का खुलासा किया.

विभाग का कहना है कि विदेशी क्रिप्टो एक्सचेंज, निजी वॉलेट और पीयर-टू-पीयर (P2P) प्लेटफॉर्म के जरिए होने वाले लेनदेन में वास्तविक लाभार्थियों की पहचान करना और टैक्स वसूलना बेहद मुश्किल हो जाता है.

30% टैक्स और 1% TDS के बावजूद चुनौती बरकरार

भारत में फिलहाल वर्चुअल डिजिटल एसेट्स पर 30 प्रतिशत टैक्स और पात्र लेनदेन पर 1 प्रतिशत TDS लागू है. इसके बावजूद टैक्स विभाग का मानना है कि टैक्स अनुपालन संतोषजनक नहीं है.

दस्तावेजों में यह भी कहा गया है कि क्रिप्टो एसेट्स के मूल्यांकन के अलग-अलग तरीके और एक समान अकाउंटिंग मानकों की कमी के कारण टैक्स निर्धारण और नियामकीय निगरानी जटिल हो जाती है.

अकाउंटिंग नियमों पर भी हो रहा विचार

इन चुनौतियों को देखते हुए कॉरपोरेट मामलों का मंत्रालय (MCA) वर्चुअल डिजिटल एसेट्स के लिए अकाउंटिंग गाइडलाइंस तैयार करने की संभावना पर काम कर रहा है, ताकि वित्तीय रिपोर्टिंग और नियामकीय निगरानी को अधिक प्रभावी बनाया जा सके.

अभी तक नहीं बना व्यापक कानून

भारत ने अभी तक क्रिप्टोकरेंसी को लेकर कोई व्यापक कानून नहीं बनाया है. वर्ष 2021 में निजी क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगाने वाला एक मसौदा विधेयक तैयार किया गया था, लेकिन उसे संसद में पेश नहीं किया गया.

इसके बाद से सरकार का रुख यह रहा है कि किसी भी नीति में नवाचार को बढ़ावा देने और वित्तीय स्थिरता, उपभोक्ता सुरक्षा तथा अवैध वित्तीय गतिविधियों जैसे जोखिमों के बीच संतुलन बनाया जाना चाहिए.

भारत दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टो बाजारों में शामिल

नियामकीय अनिश्चितता के बावजूद भारत में क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है. सरकारी अनुमान के मुताबिक मई 2026 तक करीब 3.9 करोड़ भारतीयों के पास लगभग 2.1 अरब डॉलर मूल्य की डिजिटल संपत्तियां थीं. यूजर बेस के लिहाज से भारत दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टो बाजारों में शामिल हो चुका है.

दूसरे देशों से अलग है भारत का रुख

दुनिया के कई देशों ने क्रिप्टोकरेंसी को लेकर अलग-अलग नीतियां अपनाई हैं. जापान और सिंगापुर जैसे देशों ने लाइसेंसिंग और नियामकीय ढांचा तैयार किया है, जबकि चीन ने क्रिप्टो गतिविधियों पर व्यापक प्रतिबंध लगा रखा है. भारत फिलहाल ऐसे दौर में है जहां क्रिप्टो ट्रेडिंग पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, लेकिन सरकार और RBI दोनों ही सतर्क रुख बनाए हुए हैं.

आगे कैसी हो सकती है नीति

उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया दस्तावेज साफ संकेत देते हैं कि भारतीय नियामकों की प्राथमिकता क्रिप्टो को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि वित्तीय प्रणाली की सुरक्षा, टैक्स अनुपालन को मजबूत करना और बैंकिंग सिस्टम को संभावित जोखिमों से बचाना है.

फिलहाल सरकार की अंतिम क्रिप्टो नीति पर विचार-विमर्श जारी है, लेकिन मौजूदा संकेत बताते हैं कि भविष्य की नीति में वित्तीय स्थिरता, उपभोक्ता संरक्षण और टैक्स अनुपालन को सबसे अधिक प्राथमिकता दी जाएगी.
 


SBI Funds Management IPO: ₹545-574 का प्राइस बैंड तय, 14 जुलाई से खुलेगा इश्यू

SBI Funds Management ने अपने IPO का प्राइस बैंड ₹545 से ₹574 प्रति शेयर तय किया है. कंपनी अपने कर्मचारियों को प्रति शेयर ₹54 का विशेष डिस्काउंट भी दे रही है.

Last Modified:
Thursday, 09 July, 2026
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देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी SBI Funds Management के बहुप्रतीक्षित IPO का इंतजार अब खत्म होने वाला है. कंपनी ने इश्यू का प्राइस बैंड ₹545-574 प्रति शेयर तय कर दिया है और रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) भी दाखिल कर दिया है. यह IPO 14 जुलाई से निवेशकों के लिए खुलेगा. आइए जानते हैं इश्यू की तारीख, लॉट साइज, OFS की डिटेल्स और QIB निवेशकों के लिए हुए अहम बदलाव के बारे में.

₹545-574 तय हुआ प्राइस बैंड

SBI Funds Management ने अपने IPO का प्राइस बैंड ₹545 से ₹574 प्रति शेयर तय किया है. कंपनी अपने कर्मचारियों को प्रति शेयर ₹54 का विशेष डिस्काउंट भी दे रही है. IPO के लिए न्यूनतम लॉट साइज 26 शेयर रखा गया है. इसके बाद निवेशक 26-26 शेयरों के गुणकों में आवेदन कर सकेंगे.

14 जुलाई को खुलेगा IPO

यह IPO 14 जुलाई 2026 को सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा और 16 जुलाई 2026 को बंद होगा. एंकर निवेशकों के लिए बोली लगाने की प्रक्रिया 13 जुलाई से शुरू होगी, यानी आम निवेशकों के लिए इश्यू खुलने से एक दिन पहले.

पूरी तरह OFS होगा IPO

SBI Funds Management का यह IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) आधारित होगा. इसके तहत कुल 20.37 करोड़ शेयर बेचे जाएंगे, जो कंपनी की चुकता इक्विटी पूंजी का लगभग 10% हिस्सा है.

इस इश्यू में देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक SBI अपनी करीब 6.3% हिस्सेदारी यानी लगभग 12.83 करोड़ शेयर बेचेगा. वहीं, कंपनी का जॉइंट वेंचर पार्टनर Amundi India Holding लगभग 3.7% हिस्सेदारी यानी करीब 7.53 करोड़ शेयर ऑफलोड करेगा.

कंपनी को नहीं मिलेगा IPO का पैसा

चूंकि यह इश्यू पूरी तरह OFS है, इसलिए इससे जुटाई गई राशि कंपनी के पास नहीं जाएगी. IPO से मिलने वाली पूरी रकम SBI और Amundi India Holding को मिलेगी. कंपनी के अनुसार, इश्यू का अंतिम क्रियान्वयन नियामकीय मंजूरी, बाजार की स्थिति और अन्य आवश्यक शर्तों के अधीन रहेगा.

QIB निवेशकों के लिए बदली गई बिडिंग की तारीख

SBI ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि पहले जारी किए गए RHP में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) की बिडिंग अवधि को लेकर त्रुटि रह गई थी. शुरुआती सूचना में QIB निवेशकों के लिए 15 जुलाई को अंतिम तिथि बताया गया था.

अब कंपनी ने स्पष्ट किया है कि QIB निवेशक भी 16 जुलाई 2026 तक बोली लगा सकेंगे. यानी QIB श्रेणी की बिडिंग अवधि भी IPO के बंद होने वाले दिन तक जारी रहेगी.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


SIP का बढ़ता क्रेज: FY26 में ₹3.40 लाख करोड़ का रिकॉर्ड निवेश, छोटे राज्यों ने मारी बाजी

AMFI की रिपोर्ट बताती है कि देश के अधिकांश राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में म्यूचुअल फंड AUM का 65% से अधिक हिस्सा खुदरा निवेशकों के पास है.

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Thursday, 09 July, 2026
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भारत में म्यूचुअल फंड निवेश का स्वरूप तेजी से बदल रहा है. अब निवेश सिर्फ मुंबई और दिल्ली जैसे बड़े वित्तीय केंद्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. AMFI की FY26 वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में SIP के जरिए रिकॉर्ड 3.40 लाख करोड़ रुपये का निवेश हुआ. दिलचस्प बात यह है कि SIP अपनाने के मामले में उत्तर प्रदेश, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्य आगे रहे, जबकि महाराष्ट्र और दिल्ली इस मामले में पीछे रह गए.

छोटे राज्यों में तेजी से बढ़ा SIP का दायरा

AMFI की रिपोर्ट के मुताबिक, भले ही महाराष्ट्र और दिल्ली के पास म्यूचुअल फंड उद्योग के कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) का सबसे बड़ा हिस्सा है, लेकिन SIP अपनाने के मामले में छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने उल्लेखनीय बढ़त हासिल की है. इन क्षेत्रों में निवेशक एकमुश्त निवेश के बजाय नियमित और लंबी अवधि के निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं.

इन राज्यों में सबसे ज्यादा SIP निवेश

SIP के जरिए निवेश के मामले में लक्षद्वीप देश में सबसे आगे रहा. यहां कुल म्यूचुअल फंड AUM का 40% से अधिक हिस्सा SIP के जरिए आया. इसके अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, दादरा एवं नगर हवेली और पुडुचेरी में भी कुल AUM का 40% से ज्यादा हिस्सा SIP के माध्यम से जुटाया गया. यह आंकड़े बताते हैं कि इन राज्यों के निवेशक छोटी-छोटी रकम नियमित रूप से निवेश कर लंबी अवधि में संपत्ति बनाने की रणनीति अपना रहे हैं.

छोटे शहरों में बढ़ रही निवेशकों की जागरूकता

ऑप्टिमा मनी के फाउंडर पंकज मठपाल के मुताबिक, छोटे शहरों में म्यूचुअल फंड को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ी है. घटती ब्याज दरों के बीच निवेशकों का रुझान पारंपरिक बचत योजनाओं से हटकर SIP की ओर बढ़ा है. वहीं, इन क्षेत्रों में म्यूचुअल फंड की पहुंच अभी भी सीमित है, इसलिए आगे भी तेज वृद्धि की संभावना बनी हुई है.

दिल्ली और महाराष्ट्र क्यों रह गए पीछे?

रिपोर्ट के अनुसार, सभी राज्यों में SIP की रफ्तार समान नहीं रही. दिल्ली, महाराष्ट्र, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और दमन एवं दीव में कुल म्यूचुअल फंड AUM में SIP की हिस्सेदारी 20% से भी कम रही. इससे संकेत मिलता है कि इन क्षेत्रों में निवेशकों का बड़ा वर्ग अब भी लंपसम निवेश या अन्य निवेश विकल्पों को प्राथमिकता देता है. वहीं, महाराष्ट्र और दिल्ली में संस्थागत निवेशकों की मजबूत मौजूदगी भी इसकी एक प्रमुख वजह मानी जा रही है.

FY26 में SIP निवेश ने बनाया नया रिकॉर्ड

वित्त वर्ष 2025-26 में SIP के जरिए निवेश 19% बढ़कर 3.40 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया. पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 2.86 लाख करोड़ रुपये था. यानी एक साल में SIP निवेश में 54,227 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई.

मार्च 2026 तक SIP के तहत कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट बढ़कर 14.83 लाख करोड़ रुपये हो गया. वहीं, एक्टिव SIP खातों की संख्या बढ़कर 9.72 करोड़ पहुंच गई. यह दर्शाता है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों का नियमित निवेश पर भरोसा मजबूत बना हुआ है.

FY26 में SIP से जुड़े प्रमुख आंकड़े

1. SIP निवेश: 3.40 लाख करोड़ रुपये
2. SIP AUM: 14.83 लाख करोड़ रुपये
3. एक्टिव SIP खाते: 9.72 करोड़
4. SIP हिस्सेदारी के मामले में सबसे आगे: लक्षद्वीप (AUM का 40% से अधिक SIP के जरिए)

खुदरा निवेशक बने म्यूचुअल फंड उद्योग की सबसे बड़ी ताकत

AMFI की रिपोर्ट बताती है कि देश के अधिकांश राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में म्यूचुअल फंड AUM का 65% से अधिक हिस्सा खुदरा निवेशकों के पास है. इससे स्पष्ट है कि म्यूचुअल फंड अब केवल बड़े संस्थागत निवेशकों का माध्यम नहीं रह गया, बल्कि आम परिवारों की वित्तीय योजना का भी अहम हिस्सा बन चुका है.

लक्षद्वीप, त्रिपुरा, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, अरुणाचल प्रदेश और बिहार में कुल म्यूचुअल फंड AUM का 95% से अधिक हिस्सा व्यक्तिगत निवेशकों के पास है. दूसरी ओर, महाराष्ट्र और दिल्ली में व्यक्तिगत निवेशकों की हिस्सेदारी क्रमशः 48.28% और 44.36% रही, जो इन बाजारों में संस्थागत निवेशकों की मजबूत मौजूदगी को दर्शाती है.

बदल रहा है भारत में म्यूचुअल फंड निवेश का भूगोल

AMFI की रिपोर्ट से साफ है कि भारत में म्यूचुअल फंड निवेश का दायरा तेजी से छोटे शहरों, कस्बों और राज्यों तक फैल रहा है. SIP के प्रति बढ़ता भरोसा और खुदरा निवेशकों की मजबूत भागीदारी इस बदलाव की सबसे बड़ी पहचान बनकर उभरी है. आने वाले वर्षों में म्यूचुअल फंड उद्योग की वृद्धि सिर्फ मुंबई और दिल्ली जैसे वित्तीय केंद्रों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि देश के करोड़ों आम निवेशकों की नियमित बचत और अनुशासित निवेश इसके विकास को नई दिशा देंगे.
 


भारत की विकास दर पर IMF का नया अनुमान, FY27 में 6.4% रहेगी GDP ग्रोथ

IMF का कहना है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा और मजबूत घरेलू मांग तथा सेवा क्षेत्र की बदौलत अर्थव्यवस्था की रफ्तार बरकरार रहेगी.

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Thursday, 09 July, 2026
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अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर (GDP Growth) के अनुमान में मामूली कटौती की है. IMF ने अब भारत की विकास दर 6.4% रहने का अनुमान लगाया है, जबकि अप्रैल 2026 में इसे 6.5% बताया गया था. हालांकि, IMF का कहना है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा और मजबूत घरेलू मांग तथा सेवा क्षेत्र की बदौलत अर्थव्यवस्था की रफ्तार बरकरार रहेगी.

FY27 के लिए ग्रोथ अनुमान घटाया

IMF ने अपनी अपडेटेड वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक (World Economic Outlook) रिपोर्ट में कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की GDP 6.4% की दर से बढ़ेगी. हालांकि, अगले वित्त वर्ष 2027-28 (FY28) के लिए अनुमान बढ़ाकर 6.7% कर दिया गया है. अप्रैल में FY28 के लिए 6.5% ग्रोथ का अनुमान लगाया गया था.

निजी खपत और सेवा क्षेत्र बने रहेंगे ग्रोथ के इंजन

IMF के मुताबिक, भारत की आर्थिक वृद्धि को मजबूत निजी खपत (Private Consumption) और सेवा क्षेत्र (Services Sector) का समर्थन मिलता रहेगा. इन्हीं कारकों की वजह से भारत वैश्विक स्तर पर सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा.

महंगे कच्चे तेल ने बढ़ाई चिंता

IMF के विश्व आर्थिक अध्ययन प्रभाग की प्रमुख डेनिज इगन ने कहा कि भारत के ग्रोथ अनुमान में बदलाव के पीछे दो प्रमुख वजहें हैं. पहली, हाल के आर्थिक आंकड़े और हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स उम्मीद से बेहतर रहे हैं, जिससे आर्थिक गतिविधियों में मजबूती दिखाई दी है.

लेकिन दूसरी ओर, ऊर्जा की बढ़ती कीमतों ने इस सकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक कम कर दिया. उनके मुताबिक, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का असर भारत में खुदरा ईंधन कीमतों पर भी पड़ सकता है, जिससे आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ने की आशंका है.

FY28 में फिर तेज हो सकती है विकास दर

IMF का मानना है कि वित्त वर्ष 2027-28 में ऊर्जा कीमतों से जुड़े झटकों का असर कम होगा. ऐसे में भारतीय अर्थव्यवस्था दोबारा गति पकड़ सकती है और GDP ग्रोथ 6.7% तक पहुंच सकती है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मध्यम अवधि में भारत की विकास दर करीब 6.5% के आसपास बनी रहने की संभावना है.

वैश्विक अर्थव्यवस्था की रफ्तार भी रहेगी धीमी

IMF के अनुसार, वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 2026 में 3% और 2027 में 3.4% रहने का अनुमान है. यह 2024-25 की औसत 3.5% वृद्धि से कम है, हालांकि अप्रैल में जारी किए गए IMF के अनुमान के मुकाबले इसमें कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है.


कल 10 लाख करोड़ डूबे, आज क्या संभलेगा बाजार? जानिए किन शेयरों पर रहेगी नजर

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स कारोबार के दौरान 1,914 अंक तक लुढ़क गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 23,900 के नीचे फिसल गया था.

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Thursday, 09 July, 2026
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घरेलू शेयर बाजार में बुधवार को भारी बिकवाली के बाद आज निवेशकों की नजर बाजार की दिशा तय करने वाले कई बड़े ट्रिगर्स पर रहेगी. कल अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान को लेकर दिए बयान से वैश्विक बाजारों में घबराहट फैल गई थी, जिसके चलते सेंसेक्स कारोबार के दौरान करीब 1,900 अंक तक टूट गया और निवेशकों की करीब 10 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति साफ हो गई. ऐसे माहौल में आज TCS के तिमाही नतीजे, SBI Funds Management के IPO, Tata Steel के प्रोडक्शन अपडेट और कई अन्य कॉर्पोरेट घोषणाएं बाजार की चाल तय कर सकती हैं.

कल क्यों टूटा था शेयर बाजार?

बुधवार को वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण भारतीय शेयर बाजार में जोरदार बिकवाली देखने को मिली. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स कारोबार के दौरान 1,914 अंक तक लुढ़क गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 23,900 के नीचे फिसल गया. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान को लेकर दिए बयान के बाद निवेशकों ने जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनाई, जिसका असर दुनियाभर के बाजारों के साथ भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया. बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी, रुपये की कमजोरी और विदेशी संकेतों ने बाजार पर दबाव बनाए रखा.

आज इन शेयरों पर रखें नजर

आज शेयर बाजार में कई बड़े कॉर्पोरेट अपडेट्स के चलते कई शेयरों पर निवेशकों की नजर रहेगी. सबसे अहम, आज बाजार बंद होने के बाद TCS अपने पहली तिमाही के नतीजे जारी करेगी. वहीं SBI Funds Management का IPO 14 जुलाई से खुलेगा, जिसके लिए कंपनी ने 545-574 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है. TVS Motor और Indian Oil ने LPG सिलेंडर की लास्ट-माइल डिलीवरी को बेहतर बनाने के लिए रणनीतिक साझेदारी की है. Tata Steel ने जून तिमाही में भारत में कच्चे इस्पात का उत्पादन 11% बढ़ाकर 58.2 लाख टन और डिलीवरी 9% बढ़ाकर 51.7 लाख टन रहने की जानकारी दी है.

HFCL ने AI और डेटा सेंटर सेगमेंट के लिए OptiQ AI ब्रांड लॉन्च किया है, जबकि NALCO और NLC India ने ओडिशा में 1,080 मेगावाट के कैप्टिव पावर प्लांट के लिए संयुक्त उद्यम बनाने का समझौता किया है. इसके अलावा IRB Infrastructure की जून टोल कलेक्शन 28% बढ़कर 808 करोड़ रुपये रही, Indian Bank को 5,000 करोड़ रुपये तक पूंजी जुटाने की मंजूरी मिली है, Phoenix Mills की रिटेल खपत में 32% की वृद्धि दर्ज की गई है और BofA Securities ने Knack Packaging में 0.58% हिस्सेदारी खरीदी है. वहीं Flipkart ने बताया कि उसके फूड और न्यूट्रिशन कारोबार में 50% की सालाना बढ़ोतरी हुई है, जिसमें टियर-2 और छोटे शहरों की हिस्सेदारी 60% से अधिक रही.

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि बुधवार की तेज गिरावट के बाद आज शुरुआती कारोबार में अस्थिरता बनी रह सकती है. हालांकि यदि वैश्विक संकेतों में सुधार आता है और कॉर्पोरेट अपडेट सकारात्मक रहते हैं, तो बाजार में रिकवरी की भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)