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भारत-अमेरिका ट्रेड डील से घटेगी बाजार की अनिश्चितता, विदेशी निवेश को मिलेगा नया सहारा: सेबी चेयरमैन

सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय के मुताबिक यह समझौता पूंजी प्रवाह को बढ़ावा देने, निवेश से जुड़े फैसलों को आसान बनाने और बाजार में स्थिरता लाने में अहम भूमिका निभाएगा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 7 months ago

भारत और अमेरिका के बीच हुए ट्रेड एग्रीमेंट से व्यापार और निवेश से जुड़ी अनिश्चितताओं में कमी आएगी और इससे भारत में कैपिटल फ्लो को नई मजबूती मिल सकती है. यह बात भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने कही. उनके मुताबिक यह समझौता निवेशकों के लिए स्थिर और अनुमान योग्य माहौल बनाएगा, जिसका सीधा फायदा भारतीय बाजारों को मिलेगा.

ट्रेड डील से बढ़ेगी स्थिरता और निवेश का भरोसा

कॉरपोरेट बॉन्ड पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान तुहिन कांत पांडेय ने कहा कि जब व्यापार से जुड़ी नियामकीय और टैरिफ संबंधी चिंताएं दूर होती हैं, तो पूंजी निर्माण की रफ्तार तेज होती है. भारत-अमेरिका समझौते से निवेश से जुड़े फैसलों को मजबूती मिलेगी और पूंजी प्रवाह का बेहतर आकलन संभव होगा. उन्होंने यह भी कहा कि इस स्थिरता का सकारात्मक असर रुपये की विनिमय दर पर भी देखने को मिल सकता है.

ट्रेड डील के बाद एफआईआई की जोरदार खरीदारी

भारत के साथ व्यापार समझौते और टैरिफ में कटौती की घोषणा के एक दिन बाद ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में भरोसा दिखाया. मंगलवार को एफआईआई ने 7,561 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की. यह ऐसे समय में हुआ है, जब बीते कुछ महीनों से भारतीय बाजारों में विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली देखी जा रही थी.

हाल के वर्षों में विदेशी बिकवाली का दबाव

पांडेय की यह टिप्पणी ऐसे दौर में आई है, जब एफआईआई का रुख भारतीय बाजारों के प्रति कमजोर रहा है. साल 2025 में विदेशी निवेशकों ने करीब 1.66 लाख करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की थी, जबकि 2026 में अब तक लगभग 23,000 करोड़ रुपये की निकासी हो चुकी है. ऐसे में भारत-अमेरिका ट्रेड डील को निवेश धारणा सुधारने वाला अहम फैक्टर माना जा रहा है.

एफपीआई के लिए आसान और अनुमान योग्य ढांचे पर सेबी का फोकस

सेबी चेयरमैन ने कहा कि नियामक की प्राथमिक जिम्मेदारी विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लिए एक सतत, आसान और अनुमान योग्य रेगुलेटरी फ्रेमवर्क उपलब्ध कराना है, ताकि पूंजी प्रवाह बिना किसी रुकावट के जारी रह सके. उन्होंने बताया कि सेबी लगातार अपनी प्रक्रियाओं को सरल और बेहतर बना रहा है.

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए कई सुधार

पांडेय ने निवेशकों के लिए उठाए गए सुधारात्मक कदमों का जिक्र करते हुए कॉमन कॉन्ट्रैक्ट नोट, सरल रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया, डिजिटल सिग्नेचर के इस्तेमाल और एफपीआई के लिए मार्जिन नेटिंग के प्रस्ताव जैसे उपायों को गिनाया. उनके मुताबिक इन कदमों से विदेशी निवेशकों का अनुभव बेहतर होगा और बाजार में भागीदारी बढ़ेगी.

डेरिवेटिव बाजार पर फिलहाल कोई अतिरिक्त सख्ती नहीं

बजट में वायदा और विकल्प पर प्रतिभूति लेनदेन कर यानी एसटीटी बढ़ाए जाने के बाद डेरिवेटिव बाजार में और सख्ती की आशंका को लेकर उठ रही चिंताओं पर पांडेय ने साफ किया कि सेबी फिलहाल किसी नए नियामकीय कदम पर विचार नहीं कर रहा है. उन्होंने कहा कि डेरिवेटिव बाजार पर डेटा और अन्य इनपुट्स के आधार पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और मौजूदा फ्रेमवर्क जारी रहेगा.

कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार को मजबूत करने पर जोर

कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार के विकास को लेकर सेबी चेयरमैन ने कहा कि नियामक इस दिशा में उद्योग जगत और निवेशकों के साथ सक्रिय संवाद कर रहा है. प्राइमरी बॉन्ड इश्यू में सुधार, सेकेंडरी बाजार में लिक्विडिटी बढ़ाने, निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने और बॉन्ड स्कीम्स तक पहुंच आसान करने के लिए कंपनियों और निवेश बैंकों के साथ लगातार बातचीत की जा रही है.

बॉन्ड बाजार की ढांचागत चुनौतियां

पांडेय ने कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार से जुड़ी कई संरचनात्मक चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया. इनमें उच्च रेटिंग वाले जारीकर्ताओं का वर्चस्व, फंड जुटाने में वित्तीय संस्थानों की अधिक हिस्सेदारी, प्राइवेट प्लेसमेंट का बढ़ता चलन जिससे पारदर्शिता कम होती है, और कमजोर सेकेंडरी बाजार शामिल हैं.


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