विदेशियों के लिए म्यूचुअल फंड और कैपिटल मार्केट खोलने की तैयारी में भारत! जल्द होगा ऐलान

सूत्रों के अनुसार, नई दो चरणों वाली उदार नीति का ऐलान अगले कुछ हफ्तों में किया जा सकता है. इसमें NRI और OCI लोगों को भारत में सीधे निवेश करने की अनुमति मिल सकती है.

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Tuesday, 15 April, 2025
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भारत अब एक नया नियम लाने की तैयारी में है, जिससे सिर्फ NRI और OCI ही नहीं, बल्कि दूसरे विदेशी लोग भी सीधे भारतीय म्यूचुअल फंड्स में निवेश कर सकेंगे. यह कदम भारत के फाइनेंशियल सिस्टम को दुनिया के नियमों के हिसाब से और खोलने की दिशा में उठाया जा रहा है. 

इस नई पॉलिसी के पहले चरण में ऐसे विदेशी नागरिक जिन्हें भारत से कोई पारिवारिक संबंध नहीं है (जिन्हें Non-Resident Foreign Citizens या NRFC कहा जा रहा है), उन्हें भारत के डेट (ऋण) और इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में हर साल 2.5 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹2 करोड़) तक निवेश करने की अनुमति दी जाएगी. यह नियम भारत के "Liberalized Remittance Scheme (LRS)" की तरह होगा, जिसमें भारतीय नागरिक हर साल 2.5 लाख डॉलर तक विदेश में निवेश कर सकते हैं. सूत्रों के मुताबिक, भारत के बड़े म्यूचुअल फंड जैसे SBI Mutual Fund, ICICI Prudential, HDFC Mutual Fund और अन्य जो लगभग 800 अरब डॉलर की संपत्ति संभालते हैं, इन विदेशी निवेशकों से सीधे निवेश लेने में सक्षम होंगे.

ऑपरेशनल और रेगुलेटरी सुरक्षा उपाय

सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि यह प्रक्रिया आसान और सुरक्षित हो. इसके लिए हर NRFC निवेशक (यानी भारत से न जुड़े विदेशी नागरिक) को अपना पैसा भारत में मौजूद किसी RBI से मंज़ूरशुदा बैंक के ज़रिए भेजना होगा — जैसे HSBC, UBS, Citi, JP Morgan या SBI.

ये बैंक "Authorised Dealer (AD)" के रूप में काम करेंगे और ये सख्त नियमों का पालन करेंगे — जैसे KYC (Know Your Customer), मनी लॉन्ड्रिंग रोकने के नियम (AML), और अंतरराष्ट्रीय FATF नियम. हर विदेशी निवेशक को एक डिजिटल भारतीय PAN नंबर (Permanent Account Number) दिया जाएगा ताकि टैक्स की निगरानी और नियमों का पालन आसानी से किया जा सके. इससे आयकर विभाग को निवेश की पूरी जानकारी मिलती रहेगी.

खास बात यह है कि शुरुआत में निवेश सिर्फ म्यूचुअल फंड्स में ही किया जा सकेगा. इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि विदेशी निवेशक भारतीय कंपनियों के प्रबंधन या वोटिंग में दखल न दें. इस तरह भारतीय कंपनियों को बाहरी नियंत्रण के जोखिम से बचाया जाएगा.

सख्त नियंत्रण, बड़े फायदे

हर विदेशी व्यक्ति के लिए 2.5 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹2 करोड़) की सीमा रखी जा सकती है, ताकि विदेशी मुद्रा का बहाव कंट्रोल में रहे और बाजार में कोई गड़बड़ी न हो. टैक्स के मामले में, लंबे समय तक (2-3 साल से ज्यादा) किए गए निवेशों को टैक्स से छूट मिल सकती है, जबकि छोटे समय के निवेशों पर टैक्स लगेगा. इससे शॉर्ट टर्म और अचानक आने वाले "हॉट मनी" जैसे सट्टेबाज़ी वाले निवेशों को हतोत्साहित किया जाएगा और स्थिर, लंबे समय के निवेश को बढ़ावा मिलेगा.

SEBI के तहत चलने वाले म्यूचुअल फंड्स में पहले से ही मजबूत नियम और पारदर्शिता होती है, जिससे निवेशक सुरक्षित महसूस करेंगे. यह नीति म्यूचुअल फंड्स और अधिकृत बैंकों — दोनों को शामिल करेगी, जिससे दो स्तर की निगरानी होगी. इससे टैक्स चोरी और वित्तीय गड़बड़ियों के खतरे काफी हद तक कम हो जाएंगे.

ऋण बाजार (Debt Market)

हालांकि शेयर बाजार (equity market) अक्सर सुर्खियों में रहता है, लेकिन जानकारों का मानना है कि इस पॉलिसी का सबसे बड़ा असर भारत के डेट मार्केट पर पड़ेगा. भारत को इन्फ्रास्ट्रक्चर, हाउसिंग और विकास परियोजनाओं के लिए लंबे समय तक चलने वाले बड़े निवेश की ज़रूरत है. ऐसे में म्यूचुअल फंड्स जो सरकारी और कॉरपोरेट बॉन्ड्स में निवेश करते हैं, वे इन विदेशी पैसों को सही दिशा में लगा सकते हैं और देश की तरक्की में मदद कर सकते हैं.

दूसरा चरण: सीधे शेयर बाजार में निवेश

अगर पहले चरण की योजना सफल रहती है, तो दूसरा चरण शुरू किया जाएगा. इसमें NRFCs (भारत से न जुड़े विदेशी नागरिकों) को भारतीय शेयर बाजार में सीधे निवेश करने की अनुमति दी जा सकती है, ऐसा सूत्रों ने बताया.  इसका मतलब है कि वे SEBI से रजिस्टर्ड ब्रोकर्स के ज़रिए भारत में शेयर खरीद और बेच सकेंगे.  हालांकि इसके लिए पूरी तरह से KYC (पहचान की पुष्टि) और टैक्स से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करनी होगी, जिसे ब्रोकर्स और अधिकृत बैंक (Authorised Dealers) मिलकर संभालेंगे.

सोची-समझी और संतुलित ढील

वित्त मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यह कदम एक सावधानीपूर्वक और योजनाबद्ध आर्थिक ढील है, जिसका मकसद है — भारत को विदेशी पूंजी मिले, लेकिन बाजार की स्थिरता और वित्तीय सुरक्षा भी बनी रहे. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, "यह नीति भारत के बाजारों को विदेशी निवेशकों की एक नई श्रेणी के लिए खोलती है, बिना किसी रेगुलेटरी नियंत्रण के साथ समझौता किए. यह भारत और उन विदेशी निवेशकों — दोनों के लिए फायदेमंद है, जो दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था तक पहुंच बनाना चाहते हैं." सरकार की ओर से इसका आधिकारिक ऐलान आने वाले कुछ हफ्तों में होने की उम्मीद है.

(लेखक- पलक शाह, "द मार्केट माफिया - क्रॉनिकल ऑफ इंडिया’s हाई-टेक स्टॉक मार्केट स्कैंडल एंड द कबाल दैट वेंट स्कॉट-फ्री" किताब के लेखक हैं. पलक शाह पिछले दो दशकों से मुंबई में पत्रकारिता कर रहे हैं. उन्होंने द इकोनॉमिक टाइम्स, बिजनेस स्टैंडर्ड, द फाइनेंशियल एक्सप्रेस और द हिंदू बिजनेस लाइन जैसे प्रमुख पिंक पेपरों में काम किया है. वह 19 साल की उम्र में अपराध रिपोर्टिंग से जुड़े थे, लेकिन कुछ सालों में इस क्षेत्र में काम करने के बाद उन्हें यह महसूस हुआ कि अपराध की संरचना बदल चुकी थी और वह संगठित गिरोह, जैसा कि मुंबई ने 80 के दशक में देखा था, अब अस्तित्व में नहीं थे.  'व्हाइट मनी' अर्थव्यवस्था की जटिलताओं को समझने के उनके जुनून ने पलक को वित्त और नियामकों की दुनिया में पहुंचा दिया.)


निजी कंपनियों ने निवेश में लगाया जोर, प्राइवेट कैपेक्स 67% उछलकर 7.7 लाख करोड़ रुपये पहुंचा

CII ने CMIE Prowess डेटाबेस में शामिल करीब 1,200 कंपनियों का विश्लेषण किया. रिपोर्ट के मुताबिक, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने निजी निवेश में सबसे बड़ा योगदान दिया.

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Monday, 11 May, 2026
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भारत में निजी निवेश का माहौल तेजी से मजबूत होता दिखाई दे रहा है. सितंबर 2025 तक देश का प्राइवेट कैपेक्स 67 प्रतिशत की शानदार बढ़ोतरी के साथ 7.7 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है. एक साल पहले यह आंकड़ा 4.6 लाख करोड़ रुपये था. भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) ने इसे देश की निवेश साइकिल में बड़े बदलाव का संकेत बताया है. संगठन का कहना है कि निजी क्षेत्र का बढ़ता निवेश न सिर्फ औद्योगिक विस्तार को गति देगा, बल्कि रोजगार सृजन, निर्यात और आर्थिक विकास को भी मजबूती देगा.

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच CII ने अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए 5-पॉइंट एक्शन प्लान भी पेश किया है.

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर बना निवेश का सबसे बड़ा इंजन

CII ने CMIE Prowess डेटाबेस में शामिल करीब 1,200 कंपनियों का विश्लेषण किया. रिपोर्ट के मुताबिक, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने निजी निवेश में सबसे बड़ा योगदान दिया. इस सेक्टर में करीब 3.8 लाख करोड़ रुपये का निवेश हुआ, जो कुल प्राइवेट कैपेक्स का लगभग आधा हिस्सा है. मेटल, ऑटोमोबाइल और केमिकल सेक्टर निवेश के प्रमुख केंद्र रहे.

वहीं सर्विस सेक्टर का योगदान करीब 3.1 लाख करोड़ रुपये रहा. इसमें ट्रेड, कम्युनिकेशन और आईटी-आईटीईएस सेक्टर की अहम भूमिका रही.

निवेश चक्र में आया बड़ा बदलाव

CII के डायरेक्टर जनरल चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि प्राइवेट कैपेक्स में 67 प्रतिशत की बढ़ोतरी इस बात का सबसे मजबूत संकेत है कि भारत का निवेश चक्र निर्णायक रूप से बदल चुका है. उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में कैपेसिटी यूटिलाइजेशन 74.3 प्रतिशत से बढ़कर 75.6 प्रतिशत हो गया.

इसके अलावा नए ऑर्डर बुक में सालाना आधार पर 10.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि बैंक क्रेडिट ग्रोथ वित्त वर्ष 2026 के दूसरे हाफ में करीब 14 प्रतिशत तक पहुंच गई.

CII ने पेश किया 5-पॉइंट एक्शन प्लान

अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और निवेश की रफ्तार बनाए रखने के लिए CII ने पांच बड़े सुझाव दिए हैं.

1. पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में राहत

CII ने सुझाव दिया है कि पेट्रोल और डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर की केंद्रीय एक्साइज कटौती को अगले 6 से 9 महीनों में धीरे-धीरे वापस लिया जाए, जैसे-जैसे कच्चे तेल की कीमतें स्थिर हों.

2. ऊर्जा बचत पर उद्योगों का फोकस

उद्योग संगठन ने सदस्य कंपनियों से अगले दो तिमाहियों में फ्यूल और बिजली की खपत में 3 से 5 प्रतिशत तक कमी लाने का प्रस्ताव रखा है.

3. MSME के लिए 45 दिन पेमेंट गारंटी

छोटे और मझोले उद्योगों पर दबाव कम करने के लिए TReDS और सप्लाई-चेन फाइनेंस के जरिए 45 दिन के भीतर भुगतान सुनिश्चित करने की सिफारिश की गई है.

4. सप्लाई-चेन को मजबूत बनाने पर जोर

CII ने इंपोर्ट पर निर्भरता कम करने और घरेलू वैल्यू एडिशन बढ़ाने के लिए स्पेशलिटी केमिकल्स और कैपिटल गुड्स सेक्टर में स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने की बात कही है.

5. निवेश और इंटर्नशिप को बढ़ावा

मैन्युफैक्चरिंग, एनर्जी ट्रांजिशन और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में वित्त वर्ष 2027 के निवेश को पहले शुरू करने और PMIS योजना के तहत इंटर्नशिप बढ़ाने का सुझाव भी दिया गया है.

सरकार की नीतियों से मिला निवेश को बढ़ावा

चंद्रजीत बनर्जी ने निजी निवेश में तेजी का श्रेय सरकार की नीतियों को दिया. उन्होंने कहा कि लगातार सरकारी पूंजीगत खर्च, राजकोषीय अनुशासन, आधुनिक टैक्स ढांचा, PLI योजनाएं और मुक्त व्यापार समझौते निवेश बढ़ाने में अहम साबित हुए हैं.

उन्होंने कहा कि भारत अब उस स्थिति में पहुंच चुका है जहां उद्योगों को इस सकारात्मक माहौल को बड़े पैमाने पर उत्पादन, रोजगार और निर्यात में बदलना होगा.

GDP ग्रोथ और एक्सपोर्ट को लेकर बड़ी उम्मीद

CII को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026 में भारत की रियल GDP ग्रोथ 7.6 प्रतिशत से अधिक रह सकती है. संगठन का अनुमान है कि देश का निर्यात 863 बिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है, जबकि विदेशी मुद्रा भंडार 700 बिलियन डॉलर के पार जा सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि निजी निवेश में आई यह तेजी भारत की अर्थव्यवस्था को वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.
 


होर्मुज संकट से तेल सप्लाई प्रभावित, बाजार खुलते ही कच्चा तेल 104 डॉलर के पार

दुनिया का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल होर्मुज स्ट्रेट से गुजरता है. ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या जहाजों की आवाजाही रुकने का सीधा असर वैश्विक तेल सप्लाई और कीमतों पर पड़ता है.

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Monday, 11 May, 2026
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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने एक बार फिर वैश्विक तेल बाजार में हलचल मचा दी है. अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता विफल होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है. सोमवार को बाजार खुलते ही क्रूड ऑयल की कीमतों में करीब 3 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, जिससे भारत समेत दुनिया भर में महंगाई को लेकर चिंता बढ़ गई है.

स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि होर्मुज स्ट्रेट से तेल टैंकरों की आवाजाही लगभग ठप पड़ गई है. यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई का दबाव बढ़ गया है और तेल की कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी असर दिख सकता है.

1 अरब बैरल कच्चा तेल संकट की भेंट

सऊदी अरामको के सीईओ अमीन नासिर ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि पिछले दो महीनों में करीब 1 अरब बैरल कच्चा तेल ईरान संकट की वजह से प्रभावित हुआ है. उन्होंने चेतावनी दी कि भले ही होर्मुज स्ट्रेट में स्थिति सामान्य हो जाए, लेकिन वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर होने में लंबा समय लग सकता है.

केप्लर (Kpler) के शिपिंग डेटा के मुताबिक, पिछले एक सप्ताह में केवल दो तेल टैंकर ही होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित निकल पाए. बताया जा रहा है कि ईरानी हमलों से बचने के लिए कई जहाजों ने अपने ट्रैकिंग सिस्टम तक बंद कर दिए.

क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में गिना जाता है. दुनिया का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है. ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या जहाजों की आवाजाही रुकने का सीधा असर वैश्विक तेल सप्लाई और कीमतों पर पड़ता है. मौजूदा हालात में यही देखने को मिल रहा है.

कच्चे तेल की कीमत में जोरदार उछाल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 3.32 प्रतिशत बढ़कर 104.7 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई. वहीं यूएस वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) भी करीब 3.85 प्रतिशत की तेजी के साथ 99 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया. शुक्रवार को भी तेल की कीमतों में मजबूती देखी गई थी और नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत भी तेजी के साथ हुई है. विशेषज्ञों के मुताबिक, बाजार में फिलहाल सबसे बड़ा डर सप्लाई संकट को लेकर है.

अमेरिका-ईरान तनाव ने बढ़ाई चिंता

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका द्वारा तैयार किए गए शांति प्रस्ताव को ईरान ने स्वीकार नहीं किया. इसके बाद अमेरिका ने भी ईरान के जवाब को खारिज कर दिया. इससे पिछले 10 हफ्तों से जारी संघर्ष के जल्द खत्म होने की उम्मीद कमजोर पड़ गई है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस सप्ताह चीन यात्रा पर जा रहे हैं, जहां उनकी मुलाकात राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होगी. माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच ईरान संकट और तेल सप्लाई को लेकर अहम चर्चा हो सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का ईरान पर प्रभाव होने के कारण यह बैठक वैश्विक बाजारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है.

भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर क्या असर?

फिलहाल देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की तेजी के कारण सरकारी तेल कंपनियों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है. सरकार के मुताबिक, मौजूदा हालात में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को हर महीने करीब 30 हजार करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है.

सरकार ने यह भी कहा है कि भारत में उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश की जा रही है, जबकि कई देशों में पेट्रोल, डीजल और LPG के दाम काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच चुके हैं.

आने वाले दिनों में क्या बढ़ सकती है महंगाई?

जानकारों का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो इसका असर परिवहन लागत और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में हर बड़ी तेजी सीधे देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों के बजट को प्रभावित करती है. फिलहाल बाजार की नजर अमेरिका, ईरान और चीन के बीच होने वाली कूटनीतिक गतिविधियों पर टिकी हुई है.
 


शेयर बाजार में निवेशकों के लिए बड़ा दिन, कई दिग्गज कंपनियों के शेयर रहेंगे फोकस में

शुक्रवार को BSE सेंसेक्स 414.69 अंक यानी 0.53 प्रतिशत चढ़कर 77,328.19, जबकि NSE निफ्टी 178.6 अंक यानी 0.74 प्रतिशत मजबूत होकर 24,176.15 पर बंद हुआ था.

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Monday, 11 May, 2026
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भारतीय शेयर बाजार में पिछले सप्ताह उतार-चढ़ाव का दौर देखने को मिला. वैश्विक तनाव, खासकर पश्चिम एशिया की स्थिति और अमेरिका-ईरान संबंधों को लेकर बनी अनिश्चितता ने निवेशकों को सतर्क बनाए रखा. हालांकि सेंसेक्स और निफ्टी दोनों बढ़त के साथ बंद हुए, लेकिन देश की कई दिग्गज कंपनियों के मार्केट कैप में भारी गिरावट दर्ज की गई.

शुक्रवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स सप्ताह के दौरान 414.69 अंक यानी 0.53 प्रतिशत चढ़कर 77,328.19, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE निफ्टी 178.6 अंक यानी 0.74 प्रतिशत मजबूत होकर 24,176.15 पर बंद हुआ था. इसके बावजूद टॉप-10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में से चार कंपनियों का संयुक्त बाजार पूंजीकरण 1.09 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा घट गया. सबसे अधिक नुकसान भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को हुआ. दूसरी ओर छह कंपनियों ने मिलकर 46,685 करोड़ रुपये का बाजार मूल्य जोड़ा.

वैश्विक तनाव का बाजार पर असर

मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान-इजरायल से जुड़े घटनाक्रमों ने निवेशकों के भरोसे को प्रभावित किया. विदेशी निवेशकों की गतिविधियों में भी सतर्कता देखने को मिली, जिसके कारण बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव बना रहा. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक संकेतों के साथ-साथ कंपनियों के तिमाही नतीजे भी बाजार की दिशा तय करेंगे.

आज इन शेयरों पर रहेगी बाजार की खास नजर

सोमवार के कारोबारी सत्र में कई बड़ी कंपनियों से जुड़े निवेश, डील, कॉरपोरेट अपडेट और तिमाही नतीजों के कारण बाजार में जोरदार एक्शन देखने को मिल सकता है. निवेशकों की नजर खास तौर पर Lenskart, PB Fintech, Coal India, Flipkart और CMS Info Systems जैसी कंपनियों पर बनी रहेगी. दरअसल, Lenskart Solutions में बड़ा निवेश देखने को मिला है. करीब 82 निवेशकों ने कंपनी के 11.22 करोड़ शेयर खरीदे हैं, जो कंपनी की लगभग 6.46 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर है. इस डील का कुल मूल्य करीब 5,313.6 करोड़ रुपये बताया जा रहा है.

PB Fintech में Tencent Holdings की यूरोपीय यूनिट ने अपनी 1.05 प्रतिशत हिस्सेदारी पूरी तरह बेच दी है, यह सौदा लगभग 805 करोड़ रुपये में हुआ. ई-कॉमर्स कंपनी Flipkart छोटे शहरों के व्यापारियों को डिजिटल रूप से मजबूत बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित टूल्स पर तेजी से काम कर रही है. Flipkart ने हिंदी समेत कई क्षेत्रीय भाषाओं में AI डैशबोर्ड लॉन्च किए हैं.

CMS Info Systems को HDFC Bank से पांच साल का बड़ा आउटसोर्सिंग कॉन्ट्रैक्ट मिला है. करीब 400 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट के तहत कंपनी ATM मैनेजमेंट, कैश फोरकास्टिंग और लॉजिस्टिक्स सेवाएं उपलब्ध कराएगी. 

वहीं, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) में अशोक कुमार पांडा ने 9 मई से चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर का पदभार संभाल लिया है. कंपनी के नेतृत्व में यह बदलाव निवेशकों के लिए अहम माना जा रहा है. RateGain Travel Technologies के मुख्य वित्त अधिकारी (CFO) रोहन मित्तल ने निजी कारणों से इस्तीफा दे दिया है. कंपनी ने फिलहाल अंकित अग्रवाल को अंतरिम CFO की जिम्मेदारी सौंपी है.  

Coal India ने 2030-31 तक करीब 1 लाख करोड़ रुपये निवेश करने की योजना बनाई है. कंपनी यह निवेश माइनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, कोल गैसीफिकेशन, पावर प्रोजेक्ट्स और क्लीन एनर्जी सेक्टर में करेगी. कंपनी के मुताबिक, हर साल 18,000 करोड़ से 25,000 करोड़ रुपये तक का कैपेक्स खर्च किया जा सकता है. इस घोषणा के बाद Coal India के शेयर निवेशकों के रडार पर रहेंगे.

आज आएंगे कई बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजे

आज कई प्रमुख कंपनियां अपने तिमाही नतीजे जारी करेंगी. इनमें UPL, Canara Bank, Indian Hotels Company, Abbott India, JSW Energy, PVR Inox, GE Power India, JB Chemicals, Shyam Metalics और Nuvama Wealth Management शामिल हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, इन कंपनियों के नतीजे बाजार की चाल तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.

विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा समय में बाजार में सेक्टर-आधारित हलचल अधिक देखने को मिल सकती है. मजबूत कॉरपोरेट अपडेट और अच्छे तिमाही नतीजे वाले शेयरों में तेजी संभव है, जबकि वैश्विक तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली बाजार पर दबाव बनाए रख सकती है.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


अनिल अंबानी की कंपनियों पर शिकंजा,सीबीआई ने मुंबई में 17 ठिकानों पर की छापेमारी

सीबीआई ने सार्वजनिक क्षेत्र के विभिन्न बैंकों और LIC की शिकायतों के आधार पर रिलायंस ग्रुप के खिलाफ अब तक सात मामले दर्ज किए हैं. इन मामलों में हजारों करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का आरोप है.

Last Modified:
Saturday, 09 May, 2026
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मुंबई में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने शनिवार को रिलायंस एडीए ग्रुप () की कंपनियों से जुड़े तीन मामलों में 17 ठिकानों पर छापेमारी की. ये मामले रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड, रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड और रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड के खिलाफ दर्ज किए गए हैं. अधिकारियों के अनुसार इन मामलों में बैंकों और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) को कुल ₹27,337 करोड़ का कथित नुकसान हुआ है.

निदेशकों के घरों और कंपनियों के दफ्तरों में तलाशी

सीबीआई के प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा कि तलाशी अभियान कंपनियों के निदेशकों के आवासों और उन मध्यस्थ कंपनियों के कार्यालयों में चलाया गया, जिनके खातों का इस्तेमाल कथित तौर पर बैंक फंड्स के डायवर्जन के लिए किया गया था.

मामले में अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस समूह की कंपनियां जांच के दायरे में हैं. हालांकि, संबंधित कंपनियों की ओर से इस कार्रवाई पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

विशेष अदालत से मिला था तलाशी वारंट

सीबीआई ने शुक्रवार, 8 मई को मुंबई की विशेष अदालत से तलाशी वारंट हासिल किया था. अधिकारियों के मुताबिक छापेमारी के दौरान कई अहम और आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए गए हैं. जांच एजेंसी ने बताया कि तलाशी के दौरान यह भी सामने आया कि कई मध्यस्थ कंपनियां एक ही पते से संचालित हो रही थीं. मामले की जांच अभी जारी है.

रिलायंस ग्रुप के खिलाफ दर्ज हैं सात मामले

सीबीआई ने सार्वजनिक क्षेत्र के विभिन्न बैंकों और LIC की शिकायतों के आधार पर रिलायंस ग्रुप के खिलाफ अब तक सात मामले दर्ज किए हैं. इन मामलों में हजारों करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का आरोप है. एजेंसी इससे पहले भी पिछले कुछ महीनों में 14 स्थानों पर छापेमारी कर चुकी है.

RCom के दो वरिष्ठ अधिकारी पहले ही गिरफ्तार

इससे पहले सीबीआई ने ₹2,929 करोड़ के बैंक लोन धोखाधड़ी मामले में रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) और अनिल अंबानी के खिलाफ मामला दर्ज किया था. एजेंसी ने 24 अप्रैल को RCom के दो वरिष्ठ अधिकारियों, संयुक्त अध्यक्ष डी. विश्वनाथ और उपाध्यक्ष अनिल काल्या को गिरफ्तार किया था. CBI के अनुसार डी. विश्वनाथ समूह के बैंकिंग संचालन की समग्र जिम्मेदारी संभाल रहे थे, जबकि अनिल काल्या बैंकिंग संचालन, भुगतान और फंड उपयोग में उनकी सहायता कर रहे थे.

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही जांच

CBI ने कहा कि दोनों आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं. साथ ही, सुप्रीम कोर्ट इस पूरे मामले की निगरानी कर रहा है.


सिटी का बड़ा अलर्ट: भारत “अंडरवेट”, निफ्टी में 11.7% अपसाइड का अनुमान

सिटी ने कुछ सेक्टर्स पर सकारात्मक रुख बनाए रखा है, जिनमें बैंकिंग, टेलीकॉम, डिफेंस और फार्मास्युटिकल्स शामिल हैं. वहीं, कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी, कंज्यूमर स्टेपल्स और आईटी सर्विसेज पर अंडरवेट रेटिंग दी गई है.

Last Modified:
Saturday, 09 May, 2026
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वैश्विक ब्रोकरेज फर्म सिटी ग्रुप (Citigroup) ने भारत को अपनी ग्लोबल एसेट एलोकेशन में “अंडरवेट” कर दिया है. यह फैसला लगातार बने मैक्रोइकॉनॉमिक दबावों, भू-राजनीतिक जोखिमों और कमजोर कॉर्पोरेट अर्निंग्स को देखते हुए लिया गया है.

ब्रोकरेज ने Nifty 50 के लिए साल के अंत का लक्ष्य 27,000 तय किया है, जो मौजूदा स्तर 24,176 से लगभग 11.7% की बढ़त दर्शाता है. हालांकि, सिटी ने स्पष्ट किया कि कमाई के आउटलुक में जोखिम अभी भी ऊंचे बने हुए हैं.

ईरान युद्ध और कच्चे तेल की कीमतों पर चिंता

सिटी के नोट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2027 और 2028 के लिए उनके अर्निंग्स ग्रोथ अनुमान अभी तक ईरान युद्ध के संभावित प्रभाव को पूरी तरह शामिल नहीं करते. अगर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है या ऊर्जा कीमतों में और तेजी आती है, तो बाजार पर दबाव और बढ़ सकता है.

भारत पर मॉडल में कमजोर रेटिंग, लेकिन पोजिशनिंग हल्की

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत पिछले कुछ समय से उनके मॉडल में कमजोर प्रदर्शन कर रहा है. हालांकि, निवेशकों की पोजिशनिंग भारतीय बाजार में अभी हल्की है और अर्निंग्स को लेकर अपेक्षाएँ कई अन्य बाजारों की तुलना में अधिक संतुलित हैं.

सेक्टर वाइज नजरिया

सिटी ने कुछ सेक्टर्स पर सकारात्मक रुख बनाए रखा है, जिनमें बैंकिंग, टेलीकॉम, डिफेंस और फार्मास्युटिकल्स शामिल हैं. वहीं, कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी, कंज्यूमर स्टेपल्स और आईटी सर्विसेज पर अंडरवेट रेटिंग दी गई है.

भारतीय बाजार में उतार-चढ़ाव जारी

हाल के हफ्तों में भारतीय इक्विटी बाजारों में अस्थिरता देखी गई है. निवेशक वैश्विक विकास चिंताओं, भू-राजनीतिक जोखिमों और कॉर्पोरेट अर्निंग्स के रुझानों के बीच घरेलू मजबूत बुनियादों का मूल्यांकन कर रहे हैं.
 


अमेरिका-ईरान तनाव का एशिया-प्रशांत पर असर, उपभोक्ता भरोसे में तेज गिरावट दर्ज

Ipsos की रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि अमेरिका-ईरान तनाव का असर केवल राजनीतिक और सैन्य स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव आम लोगों की आर्थिक सोच, खर्च और ब्रांड भरोसे पर भी पड़ रहा है.

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Saturday, 09 May, 2026
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अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ एशिया-प्रशांत देशों के उपभोक्ताओं पर भी दिखाई देने लगा है। रिसर्च फर्म Ipsos की नई रिपोर्ट के अनुसार, इस संघर्ष के कारण ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी, महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता ने उपभोक्ता विश्वास को कोविड-19 महामारी के बाद सबसे निचले स्तरों में पहुंचा दिया है.

एशिया-प्रशांत देशों में उपभोक्ता भरोसे में बड़ी गिरावट

Ipsos की ग्लोबल कंज्यूमर कॉन्फिडेंस इंडेक्स रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में उपभोक्ता भरोसे में भारी गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक स्तर पर उपभोक्ता विश्वास सूचकांक 2 अंक गिरकर 46.7 पर पहुंच गया है. सबसे ज्यादा गिरावट थाईलैंड में 10.9 अंक की रही। इसके बाद मलेशिया में 6.1 अंक, दक्षिण कोरिया में 5.1 अंक, जापान में 4.7 अंक और ऑस्ट्रेलिया में 4.5 अंक की गिरावट दर्ज की गई.

ऊर्जा कीमतों ने बढ़ाई घरेलू चिंता

रिपोर्ट के मुताबिक, संघर्ष का सबसे बड़ा आर्थिक असर ऊर्जा बाजारों पर पड़ा है। जापान, दक्षिण कोरिया और भारत जैसे तेल आयात पर निर्भर देशों में ईंधन कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में सरकारों ने राहत उपाय शुरू किए हैं, जबकि उपभोक्ता खर्च को लेकर अधिक सतर्क हो गए हैं और केवल जरूरी चीजों पर ध्यान दे रहे हैं.

भारत में जरूरी खर्चों की ओर झुकाव

Ipsos इंडिया के कंट्री मैनेजर सुरेश रामालिंगम ने कहा कि ईरान संघर्ष भारत की आर्थिक मजबूती की परीक्षा ले रहा है। आयात लागत बढ़ने के कारण उपभोक्ता अब गैर-जरूरी खर्चों से बच रहे हैं और आवश्यक वस्तुओं पर अधिक ध्यान दे रहे हैं.

उन्होंने बताया कि सरकार ईंधन बचत और वैकल्पिक ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा रही है, जिनमें फ्यूल सेविंग कुकिंग विकल्प और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को प्रोत्साहन शामिल हैं.

दक्षिण कोरिया और फिलीपींस में भी बढ़ी चिंता

दक्षिण कोरिया में सरकार ने अस्थायी ईंधन मूल्य सीमा लागू की है और प्रभावित परिवारों के लिए राहत योजनाएं तैयार की हैं. वहीं, फिलीपींस में डीजल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बाद सरकार ने राष्ट्रीय ऊर्जा आपातकाल घोषित कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, वहां लोगों ने यात्रा और गैर-जरूरी खर्च कम करना शुरू कर दिया है.

‘ब्रांड अमेरिका’ पर घटा भरोसा

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि वैश्विक स्तर पर अमेरिका की छवि कमजोर हो रही है। 30 देशों में केवल 39 प्रतिशत लोगों ने अमेरिका को विश्व मामलों में सकारात्मक ताकत माना. इसके विपरीत चीन को लेकर सकारात्मक सोच में बढ़ोतरी देखी गई। मलेशिया, इंडोनेशिया, थाईलैंड और सिंगापुर जैसे ASEAN देशों में चीन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण 70 प्रतिशत से अधिक रहा.

ब्रांड की पहचान पर भी असर

Ipsos के अनुसार, अब किसी ब्रांड का मूल देश उपभोक्ताओं के भरोसे और खरीदारी के फैसलों को प्रभावित कर रहा है। कई बाजारों में अमेरिकी ब्रांड्स पर अधिक सवाल उठ रहे हैं, जबकि एशियाई ब्रांड्स तेजी से भरोसा हासिल कर रहे हैं.

रिपोर्ट में कहा गया कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र के उपभोक्ता वैश्विक ब्रांड्स को स्थानीय ब्रांड्स की तुलना में बेहतर मानते हैं, लेकिन अब एशियाई कंपनियों की बढ़ती वैश्विक मौजूदगी इस धारणा को बदल रही है.

 


हुंडई मोटर इंडिया का बड़ा ऐलान, 7,500 करोड़ रुपये का निवेश करेगी कंपनी

हुंडई मोटर इंडिया का यह बड़ा निवेश और नए मॉडल लॉन्च करने की योजना भारतीय ऑटो सेक्टर में प्रतिस्पर्धा को और तेज कर सकती है.

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Saturday, 09 May, 2026
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देश की प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियों में शामिल हुंडई मोटर इंडिया ने भारत में अपने कारोबार को विस्तार देने के लिए बड़ा निवेश करने की घोषणा की है। कंपनी ने शुक्रवार को बताया कि वह चालू वित्त वर्ष में 7,500 करोड़ रुपये का पूंजीगत निवेश करेगी और दो नए वाहन मॉडल लॉन्च करेगी.

दो नए मॉडल लॉन्च करेगी कंपनी

हुंडई मोटर इंडिया ने कहा कि वह इस साल एक नई मिड-साइज स्पोर्ट यूटिलिटी व्हीकल (SUV) और भारत में निर्मित इलेक्ट्रिक कॉम्पैक्ट SUV बाजार में उतारेगी. कंपनी को उम्मीद है कि मार्च 2027 तक समाप्त होने वाले वित्त वर्ष में घरेलू बिक्री और निर्यात में 8 से 10 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज होगी.

पुणे प्लांट का होगा विस्तार

कंपनी ने अपने पुणे मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के विस्तार की भी घोषणा की है. फेज-II विस्तार कार्यक्रम के तहत उत्पादन क्षमता में 70,000 यूनिट की बढ़ोतरी की जाएगी. इस विस्तार के बाद भारत में हुंडई की कुल उत्पादन क्षमता वर्ष 2030 तक बढ़कर 11.4 लाख वाहन प्रतिवर्ष हो जाएगी.

तिमाही मुनाफे में आई गिरावट

निवेश और विस्तार योजनाओं के साथ कंपनी ने अपने तिमाही नतीजे भी जारी किए। मार्च तिमाही में हुंडई मोटर इंडिया का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 23 प्रतिशत घटकर 1,221 करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले साल इसी अवधि में 1,582 करोड़ रुपये था.

राजस्व में बढ़ोतरी, लेकिन मार्जिन पर दबाव

कंपनी का परिचालन राजस्व मार्च तिमाही में 5 प्रतिशत बढ़कर 18,452 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि, EBITDA में 22 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 1,966 करोड़ रुपये पर आ गया. EBITDA मार्जिन भी घटकर 10.4 प्रतिशत रह गया, जो एक साल पहले 14.1 प्रतिशत था.

पूरे वित्त वर्ष का प्रदर्शन

31 मार्च को समाप्त वित्त वर्ष में कंपनी का शुद्ध लाभ 4 प्रतिशत घटकर 5,431 करोड़ रुपये रहा। वहीं राजस्व 2 प्रतिशत बढ़कर 70,763 करोड़ रुपये पहुंच गया. पूरे साल के दौरान EBITDA 4 प्रतिशत घटकर 8,598 करोड़ रुपये रहा और मार्जिन 12.2 प्रतिशत पर आ गया.

घरेलू बिक्री और निर्यात में बढ़ोतरी

हुंडई ने बताया कि पिछले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में कंपनी ने घरेलू बाजार में अब तक की सबसे अधिक तिमाही बिक्री दर्ज की। इसका बड़ा कारण पिछले साल सितंबर में घोषित जीएसटी कटौती और नए उत्पादों की लॉन्चिंग रही.

मार्च तिमाही में घरेलू थोक बिक्री 8.7 प्रतिशत बढ़ी, जबकि निर्यात में 9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। पूरे वित्त वर्ष में निर्यात 16.4 प्रतिशत बढ़ा, जो वैश्विक बाजारों में मजबूत मांग को दर्शाता है.

 


फ्लिपकार्ट और फोनपे लिस्टिंग से पहले वॉलमार्ट के सीईओ की पीएम मोदी से मुलाकात, भारत में बड़े विस्तार के संकेत

कंपनी ने X पर जानकारी देते हुए बताया कि पीएम के साथ बैठक में भारत की तेज आर्थिक वृद्धि और निवेश संभावनाओं पर विस्तार से बातचीत हुई. यह मुलाकात जॉन फर्नर की तीन दिवसीय भारत यात्रा के दौरान हुई.

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अमेरिकी रिटेल दिग्गज वॉलमार्ट (Walmart) ने भारत में अपने कारोबार के विस्तार को लेकर मजबूत संकेत दिए हैं। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) जॉन फर्नर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की, जिसमें भारत की आर्थिक वृद्धि, निर्यात क्षमता और विदेशी निवेश के अवसरों पर चर्चा हुई.

भारत में निवेश बढ़ाने पर जोर

वॉलमार्ट ने शुक्रवार को कहा कि वह भारत में अपने परिचालन को और विस्तार देने के लिए प्रतिबद्ध है. कंपनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए बताया कि बैठक में भारत की तेज आर्थिक वृद्धि और निवेश संभावनाओं पर विस्तार से बातचीत हुई. यह मुलाकात जॉन फर्नर की तीन दिवसीय भारत यात्रा के दौरान हुई.

फ्लिपकार्ट अधिग्रहण के बाद बढ़ा दायरा

वॉलमार्ट ने 2018 में फ्लिपकार्ट का अधिग्रहण कर भारतीय ई-कॉमर्स बाजार में प्रवेश किया था। इसके बाद कंपनी ने डिजिटल पेमेंट्स और सप्लाई चेन सेवाओं में भी अपनी मौजूदगी मजबूत की है. कंपनी भारत को अपने सबसे तेजी से बढ़ते उपभोक्ता बाजारों में से एक मानकर लगातार निवेश बढ़ा रही है.

40 अरब डॉलर से अधिक का सोर्सिंग कारोबार

वॉलमार्ट ने बताया कि वह अब तक भारत से 40 अरब डॉलर से अधिक के उत्पादों की खरीद कर चुका है। company स्थानीय उद्यमियों और सप्लायर्स के साथ साझेदारी को और मजबूत करने पर भी काम कर रही है. जॉन फर्नर ने कहा कि कंपनी सप्लायर क्षमता बढ़ाने, गुणवत्ता मानकों को सुधारने और भारतीय विनिर्माण को वैश्विक स्तर तक पहुंचाने पर ध्यान दे रही है.

IPO की तैयारी में फ्लिपकार्ट और फोनपे

यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब वॉलमार्ट के स्वामित्व वाली फ्लिपकार्ट और डिजिटल भुगतान कंपनी फोनपे भारत में अपने-अपने आईपीओ (IPO) की तैयारी कर रही हैं. वॉलमार्ट के पास फ्लिपकार्ट में लगभग 80 प्रतिशत और फोनपे में 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी है.

भारत वैश्विक सप्लाई चेन का केंद्र बन रहा है

वैश्विक कंपनियों के लिए भारत अब एक महत्वपूर्ण सोर्सिंग और ग्रोथ मार्केट के रूप में उभर रहा है। तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और बड़े उपभोक्ता बाजार के कारण अंतरराष्ट्रीय रिटेलर्स भारत में अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं.

वॉलमार्ट और भारत सरकार के बीच हुई यह उच्च स्तरीय बातचीत संकेत देती है कि कंपनी आने वाले समय में भारत में अपने निवेश और विस्तार को और तेज कर सकती है। फ्लिपकार्ट और फोनपे के संभावित आईपीओ के साथ भारत वॉलमार्ट की वैश्विक रणनीति का और भी अहम हिस्सा बनता जा रहा है.
 


भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में बड़ी गिरावट, 7.8 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज

लगातार दो हफ्तों की गिरावट के बाद भारत का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे आ गया है. वैश्विक तनाव और मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच RBI की सक्रिय भूमिका जारी है, जिससे रुपये की स्थिरता बनाए रखी जा सके.

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Saturday, 09 May, 2026
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भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) में एक बार फिर गिरावट दर्ज की गई है, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 1 मई को समाप्त सप्ताह में देश का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 7.794 अरब डॉलर घटकर 690.693 अरब डॉलर रह गया. यह गिरावट लगातार दूसरे सप्ताह देखने को मिली है, जिससे आर्थिक दबाव और वैश्विक अनिश्चितताओं का असर साफ दिखाई देता है.

लगातार दूसरे सप्ताह गिरावट

इससे पहले वाले सप्ताह में भी विदेशी मुद्रा भंडार में 4.82 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई थी, जिसके बाद यह 698.487 अरब डॉलर पर आ गया था. लगातार दो हफ्तों में गिरावट ने बाजार की चिंताओं को बढ़ा दिया है.

रिकॉर्ड स्तर से नीचे आया भंडार

विदेशी मुद्रा भंडार ने फरवरी 27 को समाप्त सप्ताह में 728.494 अरब डॉलर का रिकॉर्ड स्तर छुआ था. हालांकि इसके बाद से इसमें लगातार गिरावट देखने को मिल रही है. मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता का असर उभरते बाजारों की मुद्राओं पर पड़ा है, जिसमें भारत भी शामिल है.

RBI की बाजार में सक्रिय भूमिका

रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की बिक्री के जरिए हस्तक्षेप किया है. इसका उद्देश्य मुद्रा बाजार को स्थिर बनाए रखना और अचानक गिरावट से बचाना है.

विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में गिरावट

ताजा आंकड़ों के अनुसार, विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां, जो कुल भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा हैं, 2.797 अरब डॉलर घटकर 551.825 अरब डॉलर रह गईं. इनमें यूरो, ब्रिटिश पाउंड और जापानी येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं में बदलाव का प्रभाव शामिल होता है.

सोने के भंडार में तेज गिरावट

इस अवधि में सोने के भंडार में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई. यह 5.021 अरब डॉलर घटकर 115.216 अरब डॉलर रह गया.

अन्य घटकों में मामूली बढ़ोतरी

स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDR) में हल्की बढ़ोतरी देखी गई और यह 15 मिलियन डॉलर बढ़कर 18.789 अरब डॉलर हो गया. वहीं अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में भारत की आरक्षित स्थिति भी 8 मिलियन डॉलर बढ़कर 4.863 अरब डॉलर पर पहुंच गई.

लगातार दो हफ्तों की गिरावट के बाद भारत का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे आ गया है. वैश्विक तनाव और मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच RBI की सक्रिय भूमिका जारी है, जिससे रुपये की स्थिरता बनाए रखी जा सके.
 


SBI Q4 रिजल्ट: मुनाफा बढ़ा लेकिन गैर-ब्याज आय में गिरावट से दबाव, शेयर 6.6% लुढ़का

SBI के Q4 नतीजे संतुलित लेकिन दबाव वाले रहे. एक ओर मजबूत लोन ग्रोथ और रिकॉर्ड वार्षिक मुनाफा रहा, तो दूसरी ओर गैर-ब्याज आय में गिरावट और मार्जिन पर दबाव ने तिमाही प्रदर्शन को कमजोर किया.

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Saturday, 09 May, 2026
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देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं. बैंक का शुद्ध लाभ सालाना आधार पर बढ़ा जरूर है, लेकिन गैर-ब्याज आय में भारी गिरावट और मार्जिन पर दबाव ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया. नतीजों के बाद बाजार में बैंक के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली.

Q4 में मुनाफा 5.58% बढ़ा, लेकिन गति धीमी

मार्च तिमाही (Q4 FY26) में SBI का शुद्ध लाभ 5.58 फीसदी बढ़कर 19,684 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. हालांकि, पिछली तिमाही (Q3) की तुलना में इसमें 6.39 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जो बैंकिंग प्रदर्शन में धीमेपन का संकेत देती है.

गैर-ब्याज आय में बड़ी गिरावट ने बढ़ाया दबाव

तिमाही के दौरान बैंक की गैर-ब्याज आय 29 फीसदी घटकर 17,314 करोड़ रुपये रह गई. यह गिरावट मुख्य रूप से निवेश बिक्री में 1,471 करोड़ रुपये के घाटे के कारण रही, जबकि पिछले साल इसी अवधि में बैंक को 6,879 करोड़ रुपये का लाभ हुआ था. इसके अलावा 100 करोड़ रुपये का मार्क-टू-मार्केट (MTM) घाटा भी दर्ज किया गया, जिसने कुल मुनाफे पर अतिरिक्त दबाव डाला.

ब्याज आय में सुधार, लेकिन मार्जिन पर असर

गैर-ब्याज आय में कमजोरी के बावजूद बैंक की शुद्ध ब्याज आय (NII) 4.1 फीसदी बढ़कर 44,380 करोड़ रुपये रही. यह वृद्धि मुख्य रूप से 16.9 फीसदी की मजबूत ऋण वृद्धि के कारण देखने को मिली. हालांकि, शुद्ध ब्याज मार्जिन (NIM) पर दबाव बना रहा और यह सालाना आधार पर 3% गिरकर तथा तिमाही आधार पर 18 बेसिस पॉइंट घटकर 2.93% पर आ गया. बैंक प्रबंधन के अनुसार, ब्याज दरों में कटौती का पूरा असर इस तिमाही में दिखा है.

पूरे वित्त वर्ष 2026 में रिकॉर्ड मुनाफा

कमजोर तिमाही प्रदर्शन के बावजूद पूरे वित्त वर्ष 2026 में SBI का प्रदर्शन मजबूत रहा. बैंक का शुद्ध लाभ 80,032 करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया, जो सालाना आधार पर 12.9% की वृद्धि दर्शाता है. यह दिखाता है कि बैंक की लंबी अवधि की कमाई क्षमता अब भी मजबूत बनी हुई है, भले ही तिमाही में उतार-चढ़ाव देखने को मिला हो.

परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार जारी

बैंक की परिसंपत्ति गुणवत्ता में भी सुधार देखा गया. सकल NPA घटकर 1.49% पर आ गया, जबकि शुद्ध NPA 0.39% पर स्थिर रहा. साथ ही प्रावधान खर्च में भी 21% की गिरावट दर्ज की गई, जो यह संकेत देती है कि बैड लोन पर दबाव धीरे-धीरे कम हो रहा है और बैंक की बैलेंस शीट मजबूत हो रही है.

शेयर बाजार में गिरावट

शुक्रवार को  नतीजों के बाद निवेशकों की प्रतिक्रिया नकारात्मक रही. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर SBI का शेयर 6.62% गिरकर 1,019.55 रुपये पर बंद हुआ. बाजार में यह गिरावट मुख्य रूप से गैर-ब्याज आय में कमजोरी और मार्जिन पर दबाव के कारण देखी गई.

बैंक प्रबंधन ने वित्त वर्ष 2027 के लिए लगभग 3% NIM का अनुमान जताया है. साथ ही, यदि ऋण वृद्धि 13–15% के दायरे में बनी रहती है, तो जमा दरों में बड़े बदलाव की संभावना सीमित रहने की उम्मीद है.