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भारत-ईयू सुरक्षा साझेदारी और FTA: रणनीतिक सहयोग से आर्थिक क्रांति तक का नया अध्याय

यह साझेदारी भारत के लिए नई आर्थिक संभावनाओं के साथ-साथ रणनीतिक सुरक्षा ढांचे को भी मजबूत करेगी, जिससे भारत और EU के बीच रिश्ते नई ऊँचाइयों पर पहुंचेंगे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 7 months ago

भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने मंगलवार को रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को नई ऊँचाइयों पर पहुंचाते हुए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा और रक्षा साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए. साथ ही “मदर ऑफ ऑल डील्स” के नाम से चर्चित भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को भी अंतिम रूप दिया गया. दोनों कदम वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव के बीच भारत और EU के बीच रिश्तों को और गहरा करने का संकेत हैं.

सुरक्षा और रक्षा साझेदारी

भारत और EU ने FTA के तहत नई सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर हस्ताक्षर किए, जो दोनों पक्षों के बीच रणनीतिक विश्वास और सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. इस समझौते पर EU की उच्च प्रतिनिधि और यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष काजा कालास और भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हस्ताक्षर किए.

इस साझेदारी के तहत भारत और EU वार्षिक सुरक्षा और रक्षा संवाद शुरू करेंगे, जिसकी पहली बैठक एक महीने के भीतर आयोजित की जाएगी. इसके साथ ही समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी सहयोग के क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है. इसके अलावा भारत की भागीदारी को यूरोपीय रक्षा पहलों में शामिल करने के रास्ते भी तलाशे जाएंगे. अधिकारी सूत्रों के अनुसार यह समझौता Indo-Pacific, साइबर सुरक्षा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं जैसी बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है.

व्यापार में ऐतिहासिक बदलाव

दो दशकों से लंबित वार्ताओं के बाद भारत और EU ने भारत-EU FTA पर सहमति बना ली, जिसे “मदर ऑफ ऑल डील्स” कहा जा रहा है. इस समझौते से भारत और EU के बीच व्यापार के नए आयाम खुलेंगे और दोनों पक्षों के लिए साझा बाजार लगभग 2 अरब लोगों तक पहुंच जाएगा.

EU ने भारत से आयात होने वाले लगभग 99.5% सामानों पर आयात शुल्क कम करने या पूरी तरह खत्म करने का निर्णय लिया है, जबकि भारत EU से आने वाले 97% उत्पादों पर टैक्स में राहत देगा. समझौता लागू होने के बाद भारत और EU के बीच व्यापार के 30% हिस्से पर शुल्क शून्य हो जाएगा, जो अगले 10 वर्षों में बढ़कर 93% तक पहुंच जाएगा.

इस समझौते से भारत-EU वस्तु व्यापार 3-4 साल के भीतर 200 अरब डॉलर से ऊपर जा सकता है, जबकि सेवाओं का व्यापार 125 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है.

भारत के प्रमुख निर्यात क्षेत्रों को बड़ी रियायत

भारत के टेक्सटाइल, परिधान, केमिकल्स, फुटवियर, समुद्री उत्पाद, प्लास्टिक, रबर, चमड़ा, फर्नीचर, रत्न-आभूषण, खिलौने और खेल सामग्री जैसे क्षेत्र EU में ड्यूटी-फ्री पहुंच पाने वाले प्रमुख क्षेत्रों में शामिल हैं. इनमें वर्तमान में EU में 0 से 26% तक शुल्क लगता है, जिसे हटाने की प्रक्रिया शुरू होगी.

इसके अलावा EU ने सेवाओं के 155 में से 144 सब-सेक्टर खोलने की पेशकश की है, जबकि भारत EU के लिए 102 सब-सेक्टर खोलेगा. इसमें छात्रों की आवाजाही और पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा जैसे प्रावधान भी शामिल हैं.

ऑटो, ड्यूटी-फ्री और कोटा आधारित रियायतें

FTA में ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए कोटा-आधारित रियायतें तय की गई हैं. भारत 25 लाख रुपये से कम कीमत वाली कारों को EU में निर्यात नहीं करेगा, लेकिन इन कारों का EU में निर्माण कर सकता है. वहीं, 25 लाख रुपये से ऊपर के सेगमेंट में EU की मांग अधिक है, इसलिए इस वर्ग पर कोटा आधारित रियायतों का प्रावधान रखा गया है. इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के लिए कोटा समझौते के पांचवें साल से लागू होगा, जिसमें कुछ सेगमेंट में शुल्क 35% और कुछ में 30% से शुरू होकर धीरे-धीरे घटेगा.

कृषि और खाद्य पदार्थों पर सीमित रियायत

भारत ने डेयरी, सोया मील और अनाज पर कोई रियायत नहीं देने का निर्णय लिया है, जबकि EU ने चीनी, बीफ, मांस और पोल्ट्री के लिए सुरक्षा सुनिश्चित की है. भारत को EU में टेबल ग्रेप्स के लिए कोटा-आधारित ड्यूटी कटौती मिली है. भारत को करीब 1 अरब डॉलर के अंगूरों पर ड्यूटी-फ्री पहुंच मिलेगी, जबकि वाइन पर भारत 7 वर्षों में शुल्क 150% से घटाकर 20% करेगा.

भारत का वैश्विक प्रभाव बढ़ेगा

इन दोनों समझौतों के साथ भारत की वैश्विक रणनीति में स्पष्ट दिशा दिखाई देती है, जहां एक ओर आर्थिक और व्यापारिक अवसर बढ़ेंगे, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा सहयोग से अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की भूमिका मजबूत होगी.

 


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