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IMF ने कहा भारत और चीन की इकॉनमी से दुनिया को होगा जबरदस्त फायदा!

वर्ल्ड इकॉनमी के विकास में कुछ रफ्तार आगे बढ़ती हुई इकॉनोमीज की वजह से देखने को मिल रही है और इस नजरिये से एशिया काफी महत्त्वपूर्ण है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

IMF (इंटरनेशनल मोनेटरी फंड) की मैनेजिंग डायरेक्टर Kristalina Georgieva ने हाल ही में कहा है कि, इस साल ग्लोबल इकॉनमी के विकास का आधा हिस्सा भारत और चीन के योगदान द्वारा आएगा. IMF प्रमुख ने कहा है कि, कोविड खत्म होने के बाद के प्रभावों और रूस एवं युक्रेन के युद्ध के चलते वर्ल्ड इकॉनमी में अभी भी गिरावट जारी रहेगी. 

1990 के बाद इतनी खराब है हालत
आगे बताते हुए IMF प्रमुख ने कहा कि, 2023 में वर्ल्ड इकॉनमी की विकास दर 3% से भी कम रहने की उम्मीद है. इस बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि, इकॉनोमिक विकास की धीमी रफ्तार आगे भी जारी रहेगी और आने वाले 5 सालों में वर्ल्ड इकॉनमी की विकास दर 3% से भी कम रहेगी. 1990 के बाद से मीडियम-टर्म विकास के लिए यह हमारा सबसे कम पुर्वानुमान है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि, यह विकास दर पिछले दो दशकों की 3.8% की औसत विकास दर से भी कम है. 

चीन और भारत हैं महत्त्वपूर्ण
वर्ल्ड इकॉनमी के विकास में कुछ रफ्तार आगे बढ़ती हुई इकॉनोमीज की वजह से देखने को मिल रही है और इस नजरिये से एशिया काफी महत्त्वपूर्ण है. भारत और चीन साल 2023 में वर्ल्ड इकॉनमी के विकास में आधे से जयादा हिस्से का योगदान देंगे. लेकिन बाकी देशों के लिए इस वक्त इकॉनोमिक विकास काफी मुश्किल दिखाई दे रहा है. साल 2021 में अच्छी रिकवरी कर लेने के बाद युक्रेन और रूस का युद्ध शुरू हो गया था जिसकी वजह से 2022 में ग्लोबल विकास दर कम होकर लगभग आधी रह गयी. 

IMF प्रमुख की टिपण्णी जरूरी है
IMF प्रमुख ने कहा कि कम कमाई वाले देशों को विकास की धीमी रफ्तार की वजह से विकास की सामान्य रफ्तार हासिल करने में समय लगेगा और इसकी वजह से इन देशों को काफी गहरा नुकसान हो सकता है. IMF प्रमुख द्वारा की गयी ये टिपण्णी IMF और वर्ल्ड बैंक की अगले हफ्ते होने वाली मीटिंग से फौरन पहले आई है. अगले हफ्ते होने वाली इस मीटिंग में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों के संकट और इन्फ्लेशन को काबू करने के लिए तेजी से बढ़ते इंटरेस्ट रेट्स जैसे प्रमुख मुद्दों को उठाया जाएगा. 

इस साल होगा बुरा हाल 
IMF प्रमुख ने कहा है कि इस साल 90% से ज्यादा विकसित इकॉनमीयों की विकास दर में गिरावट देखने को मिलेगी. हालांकि, दुनिया का बैंकिंग सिस्टम 2008 की बैंकिंग क्राइसिस के बाद से काफी विकसित हो चुका है लेकिन सवाल अभी भी इकॉनमी में छुपे हुए खतरों का है फिर चाहे ये खतरे बैंकों से हों या किसी और संस्थानों से. 
 

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