इनकम टैक्‍स कर रहा है इतने हजार मामलों की जांच, जानिए क्‍या है पूरा मामला 

इनकम टैक्‍स विभाग ने ई वेरिफिकेशन स्‍कीम को दिसंबर 2021 में लॉन्‍च किया था. इस स्‍कीम को लॉन्‍च करने का मकसद खुद से टैक्‍स की जानकारी देना और सिस्‍टम को पूरी तरह से पारदर्शी बनाना. 

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Wednesday, 15 March, 2023
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केन्‍द्र सरकार ने टैक्‍स सिस्‍टम को पूरी तरह से पारदर्शी बनाने और टैक्‍स की जानकारी स्‍वत देने के लिए ई वेरिफिकेशन स्‍कीम 2021 को लॉन्‍च किया है. इस योजना की शुरुआत 13 दिसंबर 2021 को की गई थी. सरकार की ओर से जानकारी दी गई है कि पायलट प्रोजेक्‍ट के तौर पर वर्ष 2019 और 2020 की फाइलिंग में से 68000 मामलों को जांच के लिए लिया गया था, जिसमें से अब तक 35 हजार मामलों की पूरी तरह से जांच कर ली गई है.


इनकम टैक्‍स विभाग ने ट्वीट कर दी जानकारी 
ये ट्वीट कहता है कि विभाग की ओर से खुद से टैक्‍स की जानकारी देने के लिए ई वेरिफिकेशन की स्‍कीम को लॉन्‍च किया गया आयकर विभाग की ई-सत्यापन योजना को 13 दिसंबर, 2021 को अधिसूचित किया गया था. इसका उद्देश्य करदाता के साथ ऐसी वित्तीय लेन-देन की जानकारी साझा करना और सत्यापित करना है जो उनके द्वारा दायर आईटीआर में या तो रिपोर्ट नहीं की गई है या कम-रिपोर्ट की गई है.

 

68 हजार मामलों की हो रही है जांच 
पीआईबी रिलीज के में ये कहा गया है कि विभाग ने इस बाबत 68 हजार मामलों को जांच के लिए लिया था जिसमें से 35 हजार को पूरी तरह से निपटा लिया गया है. जबकि बाकी केसेज की जांच की जा रही है. एक बार जब I-T विभाग  जब एक करदाता को ई-सत्यापन के लिए उठाए गए मामले के बारे में इलेक्ट्रॉनिक रूप से सूचित करता है, तो करदाता को I-T विभाग से सूचना का जवाब देने के लिए 15 दिन का समय दिया जाता है. ई-सत्यापन के तहत किसी विशेष मामले को पूरा करने के लिए सीबीडीटी के पास 90 दिनों की समयावधि है, लेकिन जटिल मामलों में अधिक समय लग सकता है.
 


Adani ग्रुप में निवेश से खुश हैं Rajiv Jain, लेकिन इस बात का है मलाल

अडानी समूह के मुश्किल समय में GQG पार्टनर्स के राजीव जैन ने समूह की कंपनियों में निवेश की हिम्मत दिखाई थी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 21 February, 2024
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Wednesday, 21 February, 2024
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राजीव जैन (Rajiv Jain) का नाम तो आपने सुना ही होगा. GQG पार्टनर्स वाले राजीव जैन ही वह शख्स हैं, जिन्होंने मुश्किल समय में अडानी का साथ दिया था. हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद जब अडानी समूह (Adani Group) में निवेशकों का भरोसा कम हो रहा था, तब राजीव जैन की कंपनी ने अडानी समूह में निवेश की हिम्मत दिखाई थी. तब से लेकर अब तक वह अडानी की कई कंपनियों में पैसा लगा चुके हैं. हालांकि, कुछ ऐसा भी है जिसका मलाल उन्हें आज भी है. 

LIC को लेकर कही ये बात
राजीव जैन अडानी समूह में किए गए अपने निवेश से खुश हैं, लेकिन उन्हें इस बात का मलाल है कि LIC पर दांव लगाने से वह चूक गए. भारत में 22 अरब डॉलर से ज्यादा का एसेट मैनेज करने वाली अमेरिका कंपनी GQG पार्टनर्स LIC के शेयरों में पिछले साल आई रैली का लाभ उठाने का मौका चूक गई. जैन को इसी बात का मलाल है. बता दें कि देश की सबसे बड़ी सरकारी बीमा कंपनी एलआईसी के शेयरों में पिछले कुछ वक्त में अच्छी तेजी देखने को मिली है. कंपनी का शेयर 9 फरवरी को अपने ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गया था. 

जैन ने यहां लगाया है पैसा
GQG के मालिक जैन ने एक मीडिया संस्थान से बातचीत में कहा कि वह LIC के शेयर खरीदना जरूर पसंद करते, लेकिन मौका उनके हाथ से निकल गया. जीक्यूजी ने भारत की कई कंपनियों में पैसा लगाया है. पिछले साल GQG ने अडानी समूह की चार कंपनियों में निवेश किया था, जिससे उसे 2.4 अरब डॉलर का फायदा हुआ. एक रिपोर्ट बताती है कि जैन ने अडानी ग्रुप की कंपनियों में कुल 1.9 अरब डॉलर का निवेश किया था और दस महीने में उनका निवेश 130% बढ़कर 4.3 अरब डॉलर पहुंच गया. GQG पार्टनर्स की जीक्यूजी पार्टनर्स इमर्जिंग मार्केट्स इक्विटी फंड ने पिछले साल अप्रैल से सितंबर के बीच पतंजलि फूड्स लिमिटेड, JSW एनर्जी लिमिटेड, मैक्स हेल्थकेयर इंस्टीट्यूट लिमिटेड, मैक्रोटेक डेवलपर्स लिमिटेड और IDFC फर्स्ट बैंक में भी निवेश किया था. इसके अलावा, कंपनी ने ITC लिमिटेड और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में अपना निवेश बढ़ाया है. 

फ्लोरिडा में है मुख्यालय
राजीव जैन ने जून 2016 में GQG Partners की स्थापना की थी. यह दुनिया की प्रमुख ग्लोबल एंड एमर्जिंग मार्केट्स इनवेस्टर्स फर्म है. कंपनी का मुख्यालय अमेरिका के फ्लोरिडा में है. जबकि इसके ऑफिस न्यूयॉर्क, लंदन, सिएटल और सिडनी में भी हैं. GQG ऑस्ट्रेलिया के सिक्योरिटीज एक्सचेंज में लिस्टेड है. 2021 में कंपनी ऑस्ट्रेलिया में सबसे बड़ा आईपीओ लेकर आई थी. GQG ने आईपीओ के जरिए 1.187 अरब डॉलर जुटाए थे. भारत में इस कंपनी को असल पहचान अडानी समूह पर आए संकट के बाद ही मिली. 
 


कर्नाटक में मल्‍टी नेशनल कंपनियों को कन्‍नड़ Employee को लेकर देनी होगी ये जानकारी

कनार्टक सरकार इसके अतिरिक्‍त एक मोबाइल ऐप को लेकर भी काम कर रही है जिससे कन्‍नड़ लोग अपनी व्‍यक्तिगत समस्‍याओं से लेकर वर्कप्‍लेस की समस्‍याओं को सामने रख सकेंगे.

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Published - Wednesday, 21 February, 2024
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Wednesday, 21 February, 2024
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 कर्नाटक सरकार ने राज्‍य में काम करने वाली मल्‍टी नेशनल कंपनियों के लिए निर्देश जारी किया है कि उन्‍हें ये बताना होगा कि आखिर उनके वहां कितने कन्‍नड़ लोग काम कर रहे हैं. कर्नाटक सरकार के सांस्‍कृतिक मंत्री ने कहा कि उन्‍हें अपने वहां बोर्ड पर जानकारी देनी होगी कि उनके वहां कितने कन्‍नड़ स्‍टूडेंट काम कर रहे हैं. हालांकि इसमें टेक कंपनियां शामिल नहीं हैं. 

कर्नाटक सरकार के मंत्री ने क्‍या कहा? 
कर्नाटक में इन दिनों विधानसभा का सत्र चल रहा है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इसमें कर्नाटक संपूर्ण भाषा विकास बिल के अमेंडमेंड को लेकर अपनी बात कहते हुए कल्‍चरल मंत्री शिवराज तंगाडागी ने कहा कि ये बिल राज्‍य में 70 प्रतिशत साइनेज क्षेत्रीय भाषा में लगाने की बात करता है. उन्‍होंने ये कहा कि सरकार पूरे राज्‍य में कन्‍नड़ भाषा के विकास को लेकर काम कर रही है.  इस पर उन्‍होंने कहा कि वो जल्‍द ही सभी कंपनियों के लिए निर्देश जारी करने वाले हैं कि उनके वहां कितने कन्‍नड़ लोग काम कर रहे हैं इसकी जानकारी को उन्‍हें बाकायदा बोर्ड पर देनी होगी. सबसे खास बात ये है कि ये नियम टेक कंपनियों पर लागू नहीं होता है. उन्‍होंने कहा कि ऐसा ना करने पर कंपनी का लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा. 

इसे लेकर बनाई गई थी कमिटी 

कर्नाटक सरकार के मंत्री ने कहा कि इस मामले को लेकर एक समिति बनाई थी, जिसकी अध्‍यक्षता मैं खुद कर रहा था. इस मामले में सभी विशेषज्ञों की राय है कि एमएनसी के लिए नियम तय किए जा सकते हैं. इस समिति में सभी विभागों के सचिव शामिल थे, जिसमें इस मामले को लेकर सुझाव दिया है. 

लोग ऐप से दे पाएंगे जानकारी 
उन्‍होंने ये भी कहा कि कनार्टक सरकार कन्‍नड़ लोगों की समस्‍याओं को सुलझाने के लिए एक ऐप भी लाने जा रही है. इस ऐप पर वो जहां अपनी व्‍यक्तिगत समस्‍याओं को शिकायत कर सकती है वहीं दूसरी ओर अगर उनके वर्कऑफिस में किसी तरह की परेशानी होती है तो इस पर वो उसकी भी शिकायत कर सकते हैं. इससे पहले क्षेत्रीय लोगों को नौकरी में वरीयता देने को लेकर जहां हरियाणा सरकार कानून बना चुकी है वहीं कई अन्‍य सरकारों में भी इस तरह के प्रपोजल आ चुके हैं. 

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2000 करोड़ के दावे पर आया ZEE का बयान, कह दी ये बड़ी बात

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में किए गए दावे को जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने अफवाह करार दिया है.

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Wednesday, 21 February, 2024
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जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) ने मीडिया में चल रही उस रिपोर्ट का खंडन किया है, जिसमें भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) को लेकर बड़ा दावा किया गया है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि सेबी ने अपनी जांच में पाया है कि ZEE ने अपने अकाउंट्स से लगभग 2000 करोड़ रुपए के फंड का डायवर्जन किया. ZEE ने रिपोर्ट को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि जी में अकाउंटिंग मुद्दों से संबंधित रिपोर्ट गलत और झूठी है. कंपनी सेबी द्वारा अनुरोधित सभी टिप्पणियां प्रदान करने की प्रक्रिया में है और हमने सभी पहलुओं पर पूरा सहयोग दिया है.

SEBI का नहीं आया बयान
इससे पहले, कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि बाजार नियामक सेबी ने अपनी जांच में पाया है कि ZEE में करीब 2000 करोड़ रुपए के फंड का डायवर्जन हुआ है. रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि जब सेबी ने जांच शुरू की थी तो इसे इतनी बढ़ी रकम का अंजादा नहीं था. SEBI के अंदाजे के मुकाबले सामने आई रकम करीब 10 गुना ज्यादा है. हालांकि, SEBI की तरफ से फिलहाल इसे लेकर कोई आधिकरिक बयान सामने नहीं आया है. जबकि ZEE ने साफ कर दिया है कि इस तरह की खबरें महज अफवाह हैं. 

कंपनी के शेयरों में गिरावट
उधर, इस खबर ने Zee Entertainment Enterprises के शेयरों को नुकसान पहुंचाया है. कंपनी के शेयर आज दोपहर डेढ़ बजे तक 11.11% लुढ़ककर 171.25 रुपए पर पहुंच गए थे. बीते 5 कारोबारी सत्रों में इसमें 13.97% की गिरावट आई है. इस साल की बात करें, तो 2024 में अब तक ये शेयर 13.97% नीचे आ गया है. सोनी ग्रुप कॉर्प की भारत इकाई के साथ मर्जर डील रद्द होने के बाद से ZEE के शेयरों में नरमी देखी जा रही है. इस शेयर का 52 वीक का हाई लेवल 299.70 रुपए है.

बातचीत से भी किया इंकार
ZEE ने यह भी स्पष्ट किया है कि Sony के साथ मर्जर को लेकर उसकी अब कोई बातचीत नहीं चल रही है. कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में बताया है कि कंपनी किसी भी बातचीत में शामिल नहीं है. इससे पहले, मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि ZEE-Sony Merger को बचाने के लिए दोनों कंपनियों के प्रतिनिधि आखिरी प्रयास कर रहे हैं. दोनों की तरफ से किसी सहमति पर पहुंचने के लिए बातचीत चल रही है. गौरतलब है कि सोनी ने इस डील पर आगे बढ़ने से इंकार कर दिया था. उसने ZEE पर शर्तों के उल्लंघन का आरोप लगाया था, जिसका ZEE ने खंडन किया है.
  


Paytm पर आखिर किसने कसा तंज, 'फ्रंटपेज खरीदा जा सकता है, लेकिन भरोसा नहीं'?  

Paytm के लिए यह सबसे मुश्किल दौर है. RBI की कार्रवाई के बाद से उसे लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

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Published - Wednesday, 21 February, 2024
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Wednesday, 21 February, 2024
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की कार्रवाई के चलते Paytm को लेकर निवेशकों का विश्वास हिल गया है. वहीं, यूजर्स भी कंपनी के भविष्य को लेकर आशंकित हैं. इस स्थिति से निपटने के लिए Paytm प्रबंधन हर संभव प्रयास कर रहा है. फ्रंटपेज विज्ञापन दिए जा रहे हैं, ताकि मौजूदा हालातों और कंपनी के प्रयासों से सबको परिचित कराया जा सके. Paytm की इस कोशिश पर मर्चेंट प्लेटफॉर्म पाइन लैब्स ने तंज कसा है. कंपनी ने फ्रंटपेज विज्ञापन को लेकर Paytm पर ऐसा कटाक्ष किया है कि सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है.  

क्या लिखा था विज्ञापन में?
पाइन लैब्स ने भले ही Paytm का नाम नहीं लिया है, लेकिन उसका निशाना पेटीएम पर ही है. Pine Labs ने अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा है - फ्रंटपेज खरीदा जा सकता है, लेकिन भरोसा नहीं. बता दें कि 19 फरवरी को, पेटीएम ने एक अखबार में फ्रंटपेज विज्ञापन प्रकाशित किया था, जिसमें बताया गया था कि साउंड बॉक्स और QR कोड काम करते रहेंगे. कंपनी के विज्ञापन में लिखा था - भारत का प्रत्येक Paytm QR और Soundbox काम करता रहेगा. आज..कल...हमेशा. पाइन लैब्स ने इसी को आधार बनाते हुए Paytm पर निशाना साधा है. 

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दस लाख बिजनेस को भरोसा  
Paytm के विज्ञापन पर तंज कसते हुए Pine Labs ने आगे लिखा है कि भारत में लगभग दस लाख व्यवसाय को शक्ति देने और लेनदेन के लिए पाइन लैब्स पर भरोसा करते हैं. हमारे इन-स्टोर समाधानों की रेंज को एक्सप्लोर करें. बता दें कि रिजर्ब बैंक ने Paytm पेमेंट्स बैंक पर तमाम तरह के प्रतिबंधों की घोषणा 31 जनवरी को की थी. ये प्रतिबंध पहले 29 फरवरी से अमल में आने वाले थे, लेकिन बाद में इस डेडलाइन को बढ़ाकर 15 मार्च कर दिया गया. तब से लेकर अब तक Paytm को बड़े पैमाने पर नुकसान हो चुका है. उसे अपने यूजर बेस के दरकने की भी आशंका सता रही है.


गुजरात के इस शहर में शुरू हुआ सोलर बिजली प्‍लांट, इससे जगमगाएंगे 1.5 करोड़ घर

कंपनी आने वाले समय में इससे 500 गीगावॉट तक बिजली का उत्‍पादन करने की योजना बना रही है. कंपनी ने इस पार्क के साथ यहां के पूरे इलाके को विकसित किया है.

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Published - Wednesday, 21 February, 2024
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Wednesday, 21 February, 2024
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देश के औद्योगिक राज्‍य गुजरात से रिन्‍यूएबल एनर्जी का उत्‍पादन शुरू हो गया है. अडानी समूह ने गुजरात के खावड़ा से दुनिया के सबसे बड़े रिन्‍यूएबल एनर्जी पार्क की शुरुआत कर दी है. इस बिजलीघर से नेशनल ग्रिड को बिजली की सप्‍लाई शुरू कर दी गई है. खावड़ा में बने इस पावर ग्रिड से 551 मेगावॉट बिजली की सप्‍लाई शुरू हो चुकी है, जिससे डेढ़ करोड़ से ज्‍यादा घरों को बिजली दी जा सकेगी. 

भविष्‍य में और कितना होगा इस प्‍लांट से उत्‍पादन 
अडानी समूह की इस प्‍लांट से बड़े ऊर्जा उत्‍पादन की तैयारी है. अडानी समूह इस प्‍लांट से 30 गीगावॉट तक बिजली का उत्‍पादन करना चाहता है. 30 गीगावॉट बिजली को अगर यूनिट की भाषा में समझें तो ये 81 अरब यूनिट बिजली होगी. अडानी समूह ने पहले चरण में इससे 551 मेगावॉट बिजली का उत्‍पादन सिर्फ एक साल में शुरू किया है. उम्‍मीद जताई जा रही है कि आज कंपनी की इस उपलब्धि का असर उसके शेयरों पर भी देखने को मिलेगा. लेकिन खबर लिखे जाने तक एईजीएल के शेयरों की स्थिति पर नजर डालें तो 1020 रुपये पर ट्रेड कर रहे थे. इसमें 0.79 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली. शेयर 1014 पर खुला था. 

क्‍या बोले कंपनी के चेयरमैन? 
इस प्‍लांट के उद्घाटन के अवसर पर गौतम अडानी ने कहा कि अडानी समूह दुनिया के इस सबसे बड़े प्‍लांट के जरिए रिन्‍यूएबल एनर्जी इकोसिस्‍टम का विकास करना चाहती है. उन्‍होंने कहा कि कंपनी का मकसद 2030 तक 500 गीगावांट सौर और पवन ऊर्जा का उत्‍पादन करना है, जिससे कार्बन एमिशन को कम किया जा सके. उन्‍होंने ये भी कहा कि गुजरात के इस प्‍लांट के दम पर दुनियाभर में भारत का रिन्‍यूएबल एनर्जी में विशेष स्‍थान होगा. उन्‍होंने कहा कि इसमें अडानी समूह की विशेष भूमिका है. 

ये है इस पार्क की खास बात? 
 इस पार्क के जरिए अभी जहां डेढ़ करोड़ से ज्‍यादा घरों को एकसाथ बिजली दी जा सकेगी वहीं दूसरी ओर इससे 58 मिलियन टन सालाना कार्बन उत्‍सर्जन भी कम किया जा सकेगा. इस रिन्‍यूएबल एनर्जी पार्क के बनने के बाद गुजरात के कच्‍छ के रण जैसे इलाके को 8000 लोगों के रहने लायक बना दिया गया है. यहां रहने के लिए बेसिक इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर के साथ सड़कों को भी बनाया गया है जिससे कनेक्टिविटी बेहतर हो सके. 

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राम मंदिर के लिए अपनी तिजोरी खोलने वाले सांसद की रईसी से वाकिफ हैं आप?

भाजपा ने गुजरात से 4 उम्मीदवारों को राज्यसभा भेजा है. उसमें एक नाम गोविंदभाई ढोलकिया का भी है.

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Wednesday, 21 February, 2024
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अयोध्या में राम मंदिर (Ayodhya Ram Mandir) के लिए दुनियाभर से डोनेशन मिला. अपनी सामर्थ्य के हिसाब से लोगों ने बढ़-चढ़कर मंदिर निर्माण में आर्थिक सहयोग दिया. कई नाम ऐसे भी रहे जिनकी दान की राशि ने सबको चौंका दिया. गोविंदभाई ढोलकिया भी उन्हीं में से एक हैं. ढोलकिया ने राम मंदिर के लिए 11 करोड़ रुपए दान दिए थे. वैसे तो गुजरात गोविंदभाई ढोलकिया हीरा कारोबारी हैं, लेकिन अब उनके नाम के आगे सांसद भी जुड़ गया है. बता दें कि भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, हीरा कारोबारी गोविंदभाई ढोलकिया, जसवंतसिंह परमार और मयंक नायक को गुजरात से राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित चुना गया है.  

चारों में से सबसे अमीर
पहली बार राज्यसभा के सांसद बने गोविंदभाई ढोलकिया वैसे तो चर्चा में रहते ही हैं, लेकिन अयोध्या में बने राममंदिर के लिए 11 करोड़ रुपए दान देकर वह एकदम से खबरों में आ गए थे. वह राममंदिर के लिए सर्वाधिक दान करने वालों की लिस्ट में शामिल हैं. उनकी रईसी की बात करें, तो गुजरात से राज्यसभा पहुंचे भाजपा के चारों उम्मीदवारों में ढोलकिया सबसे अमीर हैं. उनके पास 279 करोड़ रुपए की संपत्ति है. 

दानवीर भी हैं ढोलकिया
सूरत में रहने वाले 76 वर्षीय गोविंदभाई ढोलकिया बड़े हीरा कारोबारी और वह रामकृष्ण एक्सपोर्ट्स के संस्थापक एवं चेयरमैन हैं. महज छठवीं क्लास तक शिक्षा प्राप्त करने वाले ढोलकिया ने 2022-23 में 35.24 करोड़ की कमाई की थी. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ढोलकिया ने अपने करियर की शुरुआत डायमंड सेक्टर में एक मजदूर के रूप में की थी. 1970 में उन्होंने अपना कारोबार शुरू किया और धीरे-धीरे तरक्की की सीढ़ियां चढ़ते चले गए. की गिनती दानवीरों में भी होती है. 'एसआरके नॉलेज फॉउंडेशन' के जरिए वह जरूरतमंदों की मदद करते हैं. दिवाली के मौके पर गोविंदभाई ढोलकिया द्वारा अपने कर्मचारियों को दिए जाने वाले गिफ्ट अमूमन सुर्खियां बंटोरते हैं. 


लग्‍जरी होटल चलाने वाली कंपनी का आज खुल रहा है IPO, जानिए इसका GMP

कंपनी इस आईपीओ से जो रकम जुटाएगी उसके बड़े हिस्‍से से कर्ज चुकाने और कार्पोरेट निवेश करने की तैयारी कर रही है. 

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Published - Wednesday, 21 February, 2024
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Wednesday, 21 February, 2024
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होटल चलाने वाली नामी कंपनी जिसकी चेन में हयात होटल जैसा नाम शामिल है वो आज अपना आईपीओ लेकर आ रही है. 21फरवरी से खुलने वाले इस आईपीओ में 23 फरवरी तक बोली लगाई जा सकेगी. कंपनी अपने इस आईपीओ के जरिए 1800 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी कर रही है.  

क्‍या है आईपीओ का प्राइस बैंड? 
जूनिपर होटल के आईपीओ का प्राइस बैंड 342 से 360 रुपये तक रखा गया है. इस आईपीओ का 75 प्रतिशत हिस्‍सा संस्‍थागत निवेशकों के लिए रिजर्व रखा गया है. वहीं रिटले निवेशकों के लिए 10 प्रतिशत और गैर संस्‍थागत निवेशकों के लिए 15 प्रतिशत हिस्‍सा सुरक्षित रखा गया है. कंपनी इस आईपीओ में ऑफर फॉर सेल के जरिए कोई शेयर नहीं बेचेगी. कंपनी इस आईपीओ से जुटाए गए 1800 करोड़ रुपये में से 1500 करोड़ रुपये का इस्‍तेमाल कर्ज चुकाने और कार्पोरेट उद्देश्‍यों के लिए कर रही है. 

क्‍या है इस आईपीओ का जीएमपी?  
जूनिपर होटल के इस आईपीओ का अनलिस्‍टेड मार्केट में शेयर 8 रुपये के प्रीमियम के साथ ट्रेड कर रहा है. कंपनी के आईपीओ के शेयरों का अलॉटमेंट 26 फरवरी को किया जाएगा जबकि 28 फरवरी को शेयर बाजार में लिस्‍ट होंगे. जूनिपर होटल्‍स का मालिकाना हक सराफ होटल्‍स औ जूनिपर इन्‍वेसटमेंट और टू सीरिज होल्डिंग के पास है. Kfin Technology limited को कंपनी ने रजिस्‍ट्रार बनाया है.

आखिर कौन हैं कंपनी के एंकर निवेशक? 
जूनिपर होटल्‍स देश में लग्‍जरी किस्‍म के होटल चलाती है. कंपनी के मेट्रो सिटी दिल्‍ली, मुंबई के साथ रायपुर, लखनऊ,और अहमदाबाद में हैं. कंपनी के एंकर निवेशकों पर नजर डालें तो Schroder International, Camrignac Portfolio, The Prudential Assurance Company, Goldman Sachs और Societe Generale,Marshall Wace Investment Strategies, Natixis International Funds, HSBC Global Investment Funds, Nedgroup Investment Funds,  GAM Multistock, Fidelity Funds, और Government Pension Fund Global,  शामिल हैं. 

ये है पढ़ें: अपनी ही कंपनी से होगी Byju Ravindran की विदाई? इस दिन जुट रहे निवेशक
 


अपनी ही कंपनी से होगी Byju Ravindran की विदाई? इस दिन जुट रहे निवेशक 

बायजू के निवेशकों का एक समूह बायजू रवींद्रन और उनके परिवार के सदस्यों को कंपनी से बाहर करना चाहता है.

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Published - Wednesday, 21 February, 2024
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Wednesday, 21 February, 2024
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मुश्किल दौर से गुजर रहे बायजू रवींद्रन (Byju Ravindran) की मुश्किलें आने वाले दिनों में बढ़ सकती हैं. दरअसल, एडटेक फर्म बायजू के निवेशकों का एक समूह कंपनी के संस्थापक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) बायजू रवींद्रन को कंपनी से बाहर करना चाहता है. इस समूह ने शुक्रवार को असाधारण आम बैठक यानी EGM बुलाई है, जिसका उद्देश्य बायजू रवींद्रन और उनके परिवार के अन्य सदस्यों को कंपनी से बाहर करने की योजना पर मंथन करना है.  

पहले भी किया था अनुरोध
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, निवेशकों के इस समूह ने बायजू रवींद्रन और उनके परिवार के सदस्यों पर कुप्रबंधन जैसे आरोप लगाते हुए उन्हें हटाने की मांग की है. बायजू के बोर्ड में फिलहाल बायजू रवींद्रन, उनके भाई रीजू रवींद्रन और पत्नी दिव्या गोकुलनाथ शामिल हैं. जबकि बायजू के निवेशकों में जनरल अटलांटिक, पीक-15 पार्टनर्स, सोफिना, आउल, चैन जुकरबर्ग इनिशिएटिव और सैंड्स शामिल हैं. बायजू में इनकी कुल मिलाकर लगभग 30% हिस्सेदारी है. बताया जा रहा है कि बायजू के शेयरधारकों के एक ग्रुप ने जुलाई और दिसंबर में भी बोर्ड की बैठक बुलाने का अनुरोध किया था, लेकिन उसे नजरअंदाज कर दिया गया. ये निवेशक कंपनी की मौजूदा हालत को देखते हुए उसके भविष्य को लेकर चिंतित हैं. उन्हें लगता है कि कंपनी की मौजूदा लीडरशिप और बोर्ड कंपनी को ठीक से संभालने में नाकाम रहे हैं.

बायजू पर लगाए ये आरोप
बायजू रवींद्रन और पारिवारिक सदस्यों के पास कंपनी में करीब 26 प्रतिशत हिस्सेदारी है. रिपोर्ट्स की मानें तो असाधारण आम बैठक (ईजीएम) के लिए दिए गए नोटिस में बायजू की पैरेंट कंपनी थिंक एंड लर्न के मौजूदा बोर्ड को बाहर करने की अपील की गई है. ईजीएम के नोटिस में बायजू रवींद्रन और उनके परिवार के सदस्यों को कंपनी से हटाने की मांग के साथ उसके कारण भी बताए गए हैं. जिसमें वित्तीय कुप्रबंधन, कंपनी के कानूनी अधिकारों को लागू करने में प्रबंधन की असफलता और महत्वपूर्ण जानकारी छिपाना आदि शामिल हैं.

सबकुछ लगा दिया दांव पर 
बायजू लंबे समय से वित्तीय संकट से जूझ रही है. कंपनी ने फंड जुटाने की काफी कोशिश की, लेकिन पूरी तरह सफलता नहीं मिल पाई. पिछले साल खबर आई थी कि कंपनी के मालिक बायजू रवींद्रन (Byju Ravindran) ने कर्मचारियों को सैलरी देने के लिए अपना घर और परिवार के सदस्यों के घर को भी गिरवी रख दिया था. रवींद्रन ने बेंगलुरु के दो घरों को गिरवी रखकर करीब 100 करोड़ रुपए जुटाए और करीब 15,000 कर्मचारियों को सैलरी दी. वहीं, एक अन्य रिपोर्ट बताती है कि रवींद्रन व्यक्तिगत स्तर पर 40 करोड़ डॉलर का कर्ज ले चुके हैं और इसके लिए उन्होंने कंपनी में अपने सारे शेयर दांव पर लगा दिए हैं. हालांकि, कुछ वक्त पहले खबर आई थी कि मनिपाल एजुकेशन एंड मेडिकल ग्रुप के चेयरमैन रंजन पई आकाश इंस्टीट्यूट में सबसे बड़े शेयरहोल्डर बन गए हैं.
 


अच्छे दिनों वाली फीलिंग की है तलाश, आज इन शेयरों में निवेश से पूरी होगी आस!

शेयर बाजार की चाल के बारे में सटीक तौर पर कुछ भी कहना मुश्किल है, लेकिन कुछ शेयरों में तेजी एक संकेत मिले हैं.

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Wednesday, 21 February, 2024
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शेयर बाजार (Stock Market) में निवेश करने वालों के फिलहाल अच्छे दिन चल रहे हैं. बाजार मंगलवार को भी तेजी के साथ बंद हुआ. इस तरह, लगातार छह कारोबारी सत्रों में बाजार ग्रीन लाइन पकड़कर चला है. बैंकिंग और कुछ अन्य सेक्टर्स में हुई लिवाली से मार्केट को मजबूती मिली और उतार-चढ़ाव के बीच बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 349.24 अंकों के उछाल के साथ 73057.40 पर पहुंच गया. इसी तरह, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी 74.70 अंकों की तेजी के साथ 22196.95 पॉइंट्स पर बंद हुआ. सेंसेक्स के 30 में से 18 शेयर फायदे में रहे. चलिए जानते हैं कि आज कौनसे शेयर ट्रेंड में रह सकते हैं. 

इनमें आ सकती है तेजी
सबसे पहले जानते हैं कि MACD ने आज के लिए क्या संकेत दिए हैं. मोमेंटम इंडिकेटर मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डिवर्जेंस यानी MACD ने Adani Wilmar, Voltas, Grasim Industries, Chambal Fertilisers, Lux Industries और Delhivery पर तेजी का रुख दर्शाया है. इसका मतलब है कि आज इन शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है. उनके भाव में उछाल की संभावना है. ऐसे में यदि आप इन पर दांव लगाते हैं तो मुनाफा भी कमा सकते हैं. हालांकि, BW हिंदी आपको सलाह देता है कि शेयर बाजार में निवेश से पहले किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से परामर्श जरूर कर लें. अन्यथा आपको नुकसान भी उठाना पड़ सकता है. तेजी के साथ ही MACD ने कुछ स्टॉक्स में मंदी के संकेत भी दिए हैं. Lupin, Elgi Equipments, Power Grid, FDC, ONGC और CDSL, वही शेयर हैं जिनमें आज गिरावट देखने को मिल सकती है. लिहाजा, समझदारी के साथ इनमें निवेश करें. 

इन शेयरों पर भी रखें नजर
अब यह भी जान लेते हैं कि किन शेयरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिल रही है. Apollo Hospital, NTPC, ONGC, Dr Reddy's Laboratories, Cipla और Grasim Industries पर निवेशक प्यार लुटा रहे हैं, जिससे इनमें मजबूत खरीदारी देखने को मिल रही है. पिछले कारोबारी दिन यानी मंगलवार को इन स्टॉक्स की चाल की बात करें, तो अपोलो हॉस्पिटल के शेयर करीब डेढ़ फीसदी की तेजी के साथ 6,748 रुपए पर बंद हुए. NTPC 2 प्रतिशत से अधिक की उछाल के साथ 346 रुपए पर पहुंच गया. ONGC भी 0.86% की मजबूती के साथ 277 रुपए पर बंद हुआ. डॉ रेड्डी में जरूर एक प्रतिशत से कम की गिरावट देखने को मिली और यह 6,379 रुपए पर आ गया. इसी तरह, Cipla भी कल नुकसान में रहा. 1.38% लुढ़ककर यह 1,450 पर बंद हुआ. जबकि Grasim Industries 1.36% की उछाल के साथ 2,198 रुपए पर बंद हुआ.


(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है).


इस पूर्व नौकरशाह के दिल्‍ली आवास पर CBI रेड, सैलरी से 119 गुना कमा रहा था अधिकारी 

अधिकारी पर आरोप है कि जिन कंपनियों को उन्‍होंने सेवा में रहते फायदा दिलाया अब वो उनकी कंसल्‍टेंसी ले रही थी. इस मामले में उनकी बेटी का नाम भी आ रहा है. 

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 20 February, 2024
Last Modified:
Tuesday, 20 February, 2024
CBI

उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के पूर्व सचिव रमेश अभिषेक पर आय से अधिक संपत्ति के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने उनके दिल्‍ली आवास पर छापा मारा है. ये छापेमारी अभिषेक के ग्रेटर कैलाश II स्थित बहुमंजिला आवास पर की गई. उन पर आय से अधिक संपत्ति के मामले में बड़ी कार्रवाई की गई है. 

15 महीने में कमाए 2 करोड़ से ज्‍यादा 
बिजनेस वर्ल्‍ड की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में सीबीआई ने जिस पूर्व नौकरशाह अभिषेक के वहां छापेमारी की है उसने लोकपाल के समक्ष स्वीकार किया था कि उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद केवल 15 महीनों में पेशेवर परामर्श शुल्क के रूप में 2.7 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की है. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी अभिषेक के खिलाफ जांच कर रहा था. लोकपाल ने ईडी को ग्रेटर कैलाश-II में उनके भव्य बंगले के मूल्यांकन सहित अन्य मामलों की जांच करने का निर्देश दिया है.

उनके मासिक वेतन से इतने गुना ज्‍यादा थी कमाई 
अभिषेक ने जो राशि कमाई वो उनके सरकारी कर्मचारी के रूप में मासिक वेतन से 119 गुना अधिक है. सेवानिवृत्ति के समय एक सरकारी कर्मचारी के रूप में उनकी कुल कमाई 2.26 लाख रुपये थी. यह खुलासा तब सामने आया जब अभिषेक ने लोकपाल को दिए अपने हलफनामे में सेवानिवृत्ति के बाद की आय का जिक्र किया. अभिषेक फॉरवर्ड मार्केट्स कमीशन के विवादास्पद प्रमुख भी थे, जिन्हें एनएसईएल स्पॉट एक्सचेंज मामले में सुप्रीम कोर्ट से फटकार का सामना करना पड़ा था. 

शिकायतकर्ता ने क्‍या दी थी जानकारी 
इस मामले में एक शिकायतकर्ता ने लोकपाल और केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) को बताया था कि एमवे इंडिया एंटरप्राइजेज, धर्मपाल सत्यपाल लिमिटेड, पी एंड ए लॉ ऑफिस और प्राइमस पार्टनर्स प्राइवेट लिमिटेड, वन97 कम्युनिकेशंस (पेटीएम), पीएजीएसी III होल्डिंग IV (एचके) लिमिटेड, हर्ष वर्धन सिंह, आत्मनिर्भर डिजिटल इंडिया, फाउंडेशन, सोशल एंड पॉलिटिकल रिसर्च फाउंडेशन, आईडीएच सस्टेनेबल ट्रेड इनिशिएटिव और आख्या मीडिया सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड सहित सहित 16 से अधिक इकाइयां शामिल हैं जिन्‍हें अभिषेक की ओर से मदद की गई थी.  ये कंपनियां अब उनके ग्राहकों के रूप में काम करती हैं और वित्तीय वर्ष 2020-21 और 2022-23 में उनकी 2.7 करोड़ रुपये से अधिक की आय में शामिल हैं. दिलचस्प बात यह है कि दो ग्राहक, लुलु इंटरनेशनल शॉपिंग मॉल प्राइवेट लिमिटेड और पीएजीएसी III होल्डिंग IV (एचके) लिमिटेड पनामा पेपर्स लीक में शामिल थे. इस स्‍टोरी पर प्रतिक्रिया के लिए जब अभिषेक से संपर्क किया गया तो उन्‍होंने ना तो फोन कॉल का जवाब नहीं दिया और ना ही व्हाट्सएप संदेशों का जवाब दिया. 

अपने परिवार को भी दिलाया फायदा 
लोकपाल और सीवीसी को की गई शिकायत में एक नौकरशाह के रूप में अभिषेक द्वारा आधिकारिक पद के दुरुपयोग का भी खुलासा हुआ था. शिकायतकर्ता के अनुसार, मेक इन इंडिया पर सरकारी पैनल के एक प्रमुख सदस्य के रूप में व्यापार करने में आसानी को बढ़ावा देने की आड़ में, अभिषेक ने अपनी बेटी वनीसा अग्रवाल को कई फर्मों में सलाहकार के रूप में नियुक्त किया और भारी शुल्क वसूला. यह आरोप लगाया गया था कि उन्होंने तत्कालीन सेबी अध्यक्ष यूके सिन्हा को प्रभावित करने के लिए अपने पद का दुरुपयोग करते हुए एक विशेष रिक्ति निकालकर अपनी बेटी को सेबी में नियुक्त कराया था.