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अगस्त में भारतीय रेलवे की माल ढुलाई में 8.5% वृद्धि, ₹14,100 करोड़ पर पहुँचा राजस्व
यह बढ़ोतरी रेलवे की विविध माल आवाजाही और नई बाजार संभावनाओं को दर्शाती है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 9 months ago
भारतीय रेलवे ने अगस्त 2025 में माल ढुलाई के क्षेत्र में जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए 130.9 मिलियन टन (MT) माल लोड किया, जो पिछले वर्ष इसी महीने के 120.6 मिलियन टन की तुलना में 8.5 प्रतिशत अधिक है. इसी अवधि में रेलवे की मालभाड़ा आय रिकॉर्ड ₹14,100 करोड़ तक पहुँच गई. रेल मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से अगस्त 2025 के बीच कुल माल लोडिंग 673.64 मिलियन टन रही, जो वित्त वर्ष 2023–24 की समान अवधि में दर्ज 653.22 मिलियन टन से अधिक है.
अधिकारियों ने इस वृद्धि का श्रेय विविध क्षेत्रों में माल की आवाजाही को दिया है, भले ही इस दौरान मानसून की लंबी अवधि और कम बिजली मांग के चलते कोयला परिवहन में थोड़ी गिरावट देखी गई. रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि "बैलेंस अदर गुड्स" श्रेणी, जो पारंपरिक माल से हटकर अन्य प्रकार के सामान को दर्शाती है, में अगस्त माह में 31 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. इससे संकेत मिलता है कि अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ़ का माल ढुलाई पर नगण्य प्रभाव पड़ा है और रेलवे का माल ढुलाई आधार और व्यापक हुआ है.
वस्तु-वार प्रदर्शन इस प्रकार रहा:
- कोयला: 9% वृद्धि
- तैयार स्टील: 22% वृद्धि
- खनिज तेल: 4.5% वृद्धि
- घरेलू कंटेनर: 6% वृद्धि
- एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट (EXIM) कंटेनर: 5% वृद्धि
यह प्रदर्शन भारतीय रेलवे के उस लक्ष्य को बल देता है जिसके तहत वह 2027 तक 3,000 मिलियन टन सालाना माल ढुलाई और 2030 तक माल ढुलाई में 45% का मोडल शेयर प्राप्त करना चाहता है, जो अभी लगभग 27–28% के आसपास है. ये लक्ष्य नेशनल रेल प्लान (Vision 2030) का हिस्सा हैं, जिसका उद्देश्य रेलवे को “भविष्य के लिए तैयार” बनाना है.
अधिकारियों ने यह भी कहा कि अब रेलवे की कोयला, सीमेंट और स्टील जैसी कोर कमोडिटीज़ पर निर्भरता धीरे-धीरे कम हो रही है. रेलवे अब नए प्रकार के माल जैसे कृषि उत्पाद, कंटेनर, और अन्य औद्योगिक सामग्रियों की ढुलाई पर ज़ोर दे रहा है.
इस बीच, ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFCs) ने FY25 में 47% अधिक ट्रेन ट्रिप्स दर्ज की हैं, और अब तक कुल 1.3 लाख से अधिक ट्रिप्स पूरी की जा चुकी हैं. इन कॉरिडोर्स पर दैनिक 350 से अधिक मालगाड़ियाँ चल रही हैं, और यह संख्या वेस्टर्न कॉरिडोर के पूरी तरह चालू होने के बाद और भी बढ़ने की उम्मीद है.
भारतीय रेलवे का यह प्रगति पथ न केवल राजस्व और क्षमता के मामले में उल्लेखनीय है, बल्कि देश की सतत विकास और लॉजिस्टिक्स क्षमता को भी एक नई दिशा दे रहा है.
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