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2025 में ₹30 लाख करोड़ के पार पहुंचेगा भारत का कार्ड पेमेंट बाजार : GolbalData
यूपीआई की वजह से डेबिट कार्ड का उपयोग सीमित, क्रेडिट कार्ड का दबदबा. ई-कॉमर्स और उपभोक्ता खर्च में वृद्धि के चलते इस साल 9.4% की वृद्धि का अनुमान है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
ग्लोबलडाटा (GolbalData) के एक नए पूर्वानुमान के अनुसार, भारत का कार्ड भुगतान बाजार 2025 में 359.7 अरब डॉलर (30.1 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंचने की उम्मीद है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9.4% की वृद्धि को दर्शाता है. यह वृद्धि बढ़ते उपभोक्ता खर्च, डिजिटल लेनदेन की बढ़ती लोकप्रियता और बैंकिंग बुनियादी ढांचे तक व्यापक पहुंच के कारण हो रही है.
2020 से 2024 के बीच, भारत में कार्ड भुगतान ने 19.5% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) दर्ज की और 2024 में 328.9 अरब डॉलर (₹27.5 लाख करोड़) तक पहुंच गया. इस वृद्धि को मजबूत उपभोक्ता मांग और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने तथा नकद रहित लेनदेन को प्रोत्साहित करने वाली सरकारी पहलों का समर्थन मिला.
ग्लोबलडाटा की लीड बैंकिंग और पेमेंट्स एनालिस्ट शिवानी गुप्ता ने कहा कि "जहां कभी भारत नकद आधारित अर्थव्यवस्था था, वहीं पिछले एक दशक में इलेक्ट्रॉनिक भुगतान विधियों को बड़े पैमाने पर अपनाया गया है. जन धन योजना के तहत कम लागत वाले बैंक खातों और रुपे कार्डों, तथा मर्चेंट सर्विस चार्ज में कमी के कारण कार्ड स्वीकार्यता आसान हुई है, जिससे कार्ड भुगतान को बढ़ावा मिला है.”
हालांकि डेबिट कार्डों का बड़े पैमाने पर जारी किया गया है, लेकिन इनका उपयोग मुख्य रूप से एटीएम निकासी के लिए किया जाता है और 2024 में कुल कार्ड भुगतान मूल्य का केवल 19% हिस्सा ही डेबिट कार्ड से हुआ. इसका एक प्रमुख कारण यूपीआई आधारित मोबाइल भुगतान का बढ़ता प्रभाव है, जो स्मार्टफोन के माध्यम से बिना भौतिक कार्ड के सीधे बैंक ट्रांसफर की सुविधा देता है.
क्रेडिट और चार्ज कार्ड अब कुल कार्ड खर्च का 81% हिस्सा बनाते हैं, जिसकी वजह है इनकी लचीलापन और रिवॉर्ड प्रोग्राम. 2024 में औसतन एक क्रेडिट कार्ड का उपयोग 44.4 बार किया गया, जबकि डेबिट कार्ड का केवल 1.7 बार उपयोग हुआ.
ऑनलाइन खरीदारी में भी कार्डों की लोकप्रियता बढ़ रही है. ग्लोबलडाटा के 2024 वित्तीय सेवा उपभोक्ता सर्वेक्षण के अनुसार, डेबिट, क्रेडिट और चार्ज कार्डों ने मिलकर भारत के ई-कॉमर्स लेनदेन मूल्य में 20.8% का योगदान दिया.
कॉण्टैक्टलेस भुगतान गति पकड़ रहे हैं, लेकिन भारत में अभी इसे लंबा रास्ता तय करना है. जून 2025 में एक हालिया पहल के तहत एक्सिस बैंक, मास्टरकार्ड और वियरेबल टेक ब्रांड बोट ने मिलकर वेव फॉर्च्यून स्मार्टवॉच के जरिए ‘टैप एंड पे’ सुविधा शुरू की, जिससे पीओएस टर्मिनल पर कॉण्टैक्टलेस कार्ड भुगतान संभव हो गया.
इन नवाचारों के बावजूद, कार्ड उपयोग सीमित ही है. 2024 में एक औसत भारतीय ने साल भर में केवल 6 बार कार्ड लेनदेन किया, जो कि कम कार्ड प्रचलन, दूरदराज के क्षेत्रों में व्यापारी कवरेज की कमी और यूपीआई पर बढ़ती निर्भरता के कारण है.
आगे देखते हुए, ग्लोबलडाटा का अनुमान है कि भारत का कार्ड भुगतान बाजार 2025 से 2029 के बीच 9.9% की CAGR से बढ़ेगा और 2029 तक 524.6 अरब डॉलर (₹43.9 लाख करोड़) तक पहुंच जाएगा. शिवानी गुप्ता ने कहा कि “बाजार की यह वृद्धि व्यापक कार्ड स्वीकार्यता, बेहतर बुनियादी ढांचे और निरंतर सरकारी समर्थन से प्रेरित होगी, हालांकि यूपीआई कार्ड आधारित भुगतानों के लिए एक मजबूत विकल्प बना रहेगा.”
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