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मध्य पूर्व तनाव लंबा चला तो तेल, चावल और हीरे के कारोबार पर पड़ सकता है असर : क्रिसिल

अभी की स्थिति को देखते हुए फिलहाल खतरा कम, लेकिन हालात बिगड़ने पर कुछ क्षेत्रों पर दबाव पड़ सकता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव का अभी तक भारतीय कंपनियों पर सीमित असर पड़ा है, लेकिन अगर यह तनाव लंबे समय तक बना रहा या और अधिक गंभीर हुआ, तो कई क्षेत्रों की परिचालन लागत और मुनाफे पर असर पड़ सकता है. यह बात क्रिसिल रेटिंग्स की एक ताजा रिपोर्ट में सामने आई है. आइए इस रिपोर्ट पर एक नजर डालते हैं.

तेल, बासमती चावल और उर्वरक उद्योग सबसे अधिक संवेदनशील
रिपोर्ट के अनुसार, भारत का ईरान और इजराइल के साथ सीधा व्यापार काफी सीमित है. बीते वित्त वर्ष में दोनों देशों के साथ व्यापार कुल विदेशी व्यापार का केवल 1 प्रतिशत से भी कम रहा. फिर भी, अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो बासमती चावल, उर्वरक और हीरा उद्योग जैसे क्षेत्रों पर असर पड़ सकता है.

बासमती चावल के निर्यात में ईरान और इजराइल की हिस्सेदारी 14 प्रतिशत रही है. चूंकि यह एक आवश्यक खाद्य उत्पाद है और भारत के पास विविध बाजार हैं, इसलिए मांग पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन भुगतान में देरी और कार्यशील पूंजी चक्र पर दबाव बन सकता है. हीरा उद्योग में भारत की पॉलिश हीरा निर्यात का 4 प्रतिशत हिस्सा इजराइल को जाता है और कच्चे हीरे के आयात का 2 प्रतिशत वहीं से होता है. हालांकि बेल्जियम और यूएई जैसे विकल्प मौजूद हैं, जो आपूर्ति में बाधा की स्थिति में मदद कर सकते हैं.

उर्वरक क्षेत्र में, भारत के मूरेट ऑफ पोटाश (MoP) आयात में इजराइल की हिस्सेदारी लगभग 7 प्रतिशत रही है. घरेलू खपत में यह हिस्सा 10 प्रतिशत से कम है और भारत अन्य देशों से इसकी आपूर्ति कर सकता है.

कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना चिंता का विषय
रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्रेंट क्रूड की कीमतें इस सप्ताह बढ़कर 73–76 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जो अप्रैल–मई के औसत 65 डॉलर प्रति बैरल से अधिक है. हालांकि यह अभी भी 2025 के अनुमानित औसत 78 डॉलर प्रति बैरल से नीचे है, लेकिन आपूर्ति में रुकावट आने पर कीमतें और बढ़ सकती हैं, जिससे कई क्षेत्रों की लाभप्रदता प्रभावित हो सकती है.
ऊपर की ओर तेल कंपनियों को इससे लाभ हो सकता है, लेकिन रिफाइनरी, केमिकल, पेंट और एविएशन जैसे क्षेत्रों पर लागत का दबाव बढ़ सकता है. कंपनियों पर निर्भर करेगा कि वे यह अतिरिक्त लागत उपभोक्ताओं तक पहुंचा पाती हैं या नहीं.

लॉजिस्टिक्स और इंश्योरेंस खर्च भी बढ़ सकते हैं
क्रिसिल ने आगाह किया है कि अगर अनिश्चितता लंबी चली, तो वायु और समुद्री परिवहन की लागत और बीमा प्रीमियम में इजाफा हो सकता है, जिससे निर्यात-आयात आधारित क्षेत्रों पर असर पड़ेगा.

एविएशन सेक्टर में ईंधन की बढ़ती कीमतें और हवाई क्षेत्र के बंद होने के कारण यात्रा समय बढ़ने से संचालन लागत में वृद्धि हो सकती है, हालांकि मांग मजबूत बनी रहने से मार्जिन को सहारा मिल सकता है.

टायर कंपनियों, विशेषकर मूल उपकरण निर्माण (OEM) में, अस्थायी मार्जिन दबाव का सामना करना पड़ सकता है, जबकि फ्लेक्सिबल पैकेजिंग और सिंथेटिक टेक्सटाइल उद्योग पर भी मध्यम असर पड़ेगा.

निकट भविष्य में असर सीमित, लेकिन सतर्कता जरूरी
क्रिसिल रेटिंग्स ने कहा कि वह बदलते भू-राजनीतिक हालात पर नजर बनाए रखेगी और जरूरत पड़ने पर कंपनियों की क्रेडिट गुणवत्ता का मूल्यांकन अलग-अलग आधार पर करेगी.
रिपोर्ट में निष्कर्ष के तौर पर कहा गया है कि निकट भविष्य में भारतीय कंपनियों पर प्रभाव सीमित रहने की संभावना है, क्योंकि इन कंपनियों का पूंजीगत व्यय कम है और उनकी बैलेंस शीट मजबूत है, जो संभावित जोखिमों से उन्हें सुरक्षा प्रदान करती है.
 


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