Hyderabad Angel Fund ने लॉन्च किया Rs 100 करोड़ का VC फंड, शुरुआती स्टार्टअप्स को मिलेगा पूंजी और मेंटरशिप

SEBI-रजिस्टर्ड कैटिगरी I VC फंड न केवल शुरुआती पूंजी उपलब्ध कराएगा बल्कि रणनीतिक मेंटरशिप भी प्रदान करेगा, ताकि देश के क्षेत्रीय स्टार्टअप इकोसिस्टम को और मजबूत किया जा सके

Last Modified:
Friday, 14 November, 2025
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Hyderabad Angel Fund (haf.vc) ने भारत में शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स को समर्थन देने के लिए Rs 100 करोड़ का नया वेंचर कैपिटल फंड लॉन्च किया है. यह SEBI-रजिस्टर्ड कैटिगरी I VC फंड न केवल शुरुआती पूंजी उपलब्ध कराएगा बल्कि रणनीतिक मेंटरशिप भी प्रदान करेगा, ताकि देश के क्षेत्रीय स्टार्टअप इकोसिस्टम को और मजबूत किया जा सके.

फंड के तहत अगले कुछ वर्षों में 15–20 हाई-पोटेंशियल स्टार्टअप्स में निवेश किया जाएगा. इसके निवेश क्षेत्रों में जनरेटिव AI, स्पेसटेक, गेमिंग, ड्रोन, हेल्थटेक, कंज्यूमर टेक, फिनटेक, एंटरप्राइज SaaS और सस्टेनेबिलिटी शामिल हैं. प्रत्येक स्टार्टअप को आमतौर पर Rs 2–4 करोड़ के शुरुआती चेक की योजना है, साथ ही स्केल-अप के लिए फॉलो-ऑन निवेश के लिए रिज़र्व भी रखा गया है.

हैदराबाद एंजेल फंड ने अपने 62% लक्ष्य प्रतिबद्धताएँ पहले ही जुटा ली हैं और अब अपने पहले संस्थागत निवेश पर बातचीत कर रहा है. Rs 100 करोड़ की कुल कॉर्पस में Rs 50 करोड़ का ग्रीन-शू ऑप्शन भी शामिल है. फंड ने पहले ही तीन संभावित स्टार्टअप्स की पहचान कर ली है और एक डील भी पूरी कर चुका है.

तेजी से बढ़ते भारतीय स्टार्टअप लैंडस्केप में गतिविधियाँ अब केवल मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि टियर-2 और टियर-3 शहरों तक फैल रही हैं. ऐसे माहौल में क्षेत्रीय फंड शुरुआती उद्यमियों तक पहुंचने और उन्हें समय पर संसाधन उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

Hyderabad Angel Fund का यह नया पहल शुरुआती चरण के भारतीय स्टार्टअप्स के लिए पूंजी, नेटवर्क और स्केल-अप अवसरों को व्यापक रूप से बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

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टाटा के नेतृत्व परिवर्तन से लेकर फिनटेक के नए दौर तक, BW Businessworld के नए अंक में कारोबार की बड़ी तस्वीर

BW Businessworld के नवीनतम अंक में रतन टाटा के बाद नेतृत्व बदलाव, एन. चंद्रशेखरन के कार्यकाल का आकलन और फिनटेक के इंफ्रास्ट्रक्चर बनने पर खास फोकस

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 01 September, 2026
Last Modified:
Tuesday, 01 September, 2026
BWHindia

BW Businessworld के नवीनतम अंक में भारतीय कारोबार की दो बड़ी संस्थागत बदलावों पर विस्तार से चर्चा की गई है. एक ओर अंक में टाटा समूह में रतन टाटा के बाद नेतृत्व परिवर्तन और अगले Tata Sons चेयरमैन के सामने मौजूद चुनौतियों का विश्लेषण किया गया है, वहीं दूसरी ओर फिनटेक के उपभोक्ता-केंद्रित सेक्टर से आगे बढ़कर आधुनिक वित्तीय व्यवस्था के बुनियादी ढांचे में बदलने पर व्यापक स्पेशल पैकेज पेश किया गया है.

इस अंक की कवर स्टोरी ‘Back To Tata’ है, जिसमें टाटा समूह के अगले चरण, टाटा ट्रस्ट्स की भूमिका और प्रोफेशनल मैनेजमेंट के सामने आने वाले नए दायित्वों का विश्लेषण किया गया है. इसके साथ ही ‘Festival of Fintech 2026’ पर आधारित फिनटेक स्पेशल में AI, पेमेंट्स, लेंडिंग, वेल्थटेक, इंश्योरटेक और वित्तीय समावेशन जैसे क्षेत्रों में हो रहे बदलावों को जगह दी गई है.

अगले चेयरमैन से आगे टाटा समूह की दिशा पर नजर

‘Back To Tata’ कवर स्टोरी केवल अगले Tata Sons चेयरमैन के संभावित नामों तक सीमित नहीं है. इसमें इससे बड़ा सवाल उठाया गया है कि भारत के सबसे प्रभावशाली कारोबारी समूहों में से एक टाटा ग्रुप का अगला स्वरूप कैसा होगा और उसके अगले प्रोफेशनल लीडर के सामने क्या प्राथमिकताएं होंगी.

स्टोरी में कहा गया है कि टाटा समूह में परिवार के हाथों में प्रत्यक्ष प्रबंधन की वापसी की बात नहीं हो रही है. इसके बजाय Noel Tata के नेतृत्व में Tata Trusts एक बार फिर उस संस्थागत केंद्र के रूप में उभर रहे हैं, जो मालिकों के दीर्घकालिक उद्देश्य, जोखिम लेने की क्षमता और प्रोफेशनल मैनेजमेंट से अपेक्षाओं को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.

कवर पैकेज में एन. चंद्रशेखरन के कार्यकाल का डेटा आधारित आकलन भी किया गया है. FY20 से FY26 के बीच Tata Group का रेवेन्यू 2.1 गुना बढ़ा, जबकि टैक्स के बाद मुनाफा 5.4 गुना बढ़ा. इसी अवधि में समूह की लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन 2.6 गुना बढ़ गया.

नए कारोबारों में बड़ा निवेश, लेकिन घाटा भी बढ़ा

BW Businessworld की रिपोर्ट के मुताबिक Tata Electronics, Air India, Tata Digital और Agratas ने FY26 में संयुक्त रूप से करीब 2.39 लाख करोड़ रुपये का रेवेन्यू दर्ज किया. हालांकि, इन चारों नए कारोबारों का संयुक्त घाटा 29,924 करोड़ रुपये रहा.

इसके विपरीत, Tata Sons ने इस नेतृत्व परिवर्तन के दौर में 31,961 करोड़ रुपये का टैक्स के बाद मुनाफा दर्ज किया. कंपनी के पास 21,841 करोड़ रुपये का नेट कैश था और उस पर कोई उधारी नहीं थी.

ऐसे में समूह के सामने सबसे बड़ी चुनौती वित्तीय क्षमता की नहीं, बल्कि पूंजी के सही आवंटन, कारोबारों के प्रभावी क्रियान्वयन और संस्थागत तालमेल की है.

BW Businessworld के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ तथा exchange4media Group के संस्थापक डॉ. अनुराग बत्रा ने कहा कि टाटा समूह भारत के सबसे बड़े कारोबारी संस्थानों में से एक होने के साथ-साथ एंटरप्राइज, प्रोफेशनल मैनेजमेंट, ओनरशिप स्टूवर्डशिप और सार्वजनिक उद्देश्य के बीच एक अलग तरह का संतुलन भी दर्शाता है.

उन्होंने कहा कि इस बदलाव को केवल अगले चेयरमैन की पहचान तक सीमित नहीं किया जा सकता. ‘Back To Tata’ के जरिए यह समझने की कोशिश की गई है कि Noel Tata की संस्थागत भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है, एन. चंद्रशेखरन अपने पीछे किस स्तर का समूह छोड़कर जा रहे हैं और अगले प्रोफेशनल लीडर के सामने क्या जिम्मेदारियां होंगी.

कवर स्टोरी के साथ डॉ. अनुराग बत्रा के कॉलम भी प्रकाशित किए गए हैं, जिनमें Noel Tata के ऑपरेटर, बिल्डर और टाटा की विचारधारा के संरक्षक के रूप में रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया है.

फिनटेक अब सिर्फ सेवा नहीं, वित्तीय इंफ्रास्ट्रक्चर

अंक का दूसरा प्रमुख पैकेज ‘The Infrastructuralisation Of Finance’ है. इसमें बताया गया है कि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर किस तरह वित्तीय सेवाओं को व्यक्तिगत लेनदेन के स्तर से आगे ले जाकर डिजिटल अर्थव्यवस्था की बुनियादी संरचना में बदल रहा है.

यूपीआई (UPI), आधार (Aadhaar), अकाउंट एग्रीगेटर्स (Account Aggregators), ओएनडीसी (ONDC) और ओपन क्रेडिट एनेबलमेंट नेटवर्क (Open Credit Enablement Network) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म इस बदलाव के प्रमुख आधार बन रहे हैं. इनके साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बढ़ता इस्तेमाल पेमेंट्स, क्रेडिट, इंश्योरेंस और निवेश जैसी सेवाओं को उन डिजिटल प्लेटफॉर्म और ग्राहक अनुभवों में शामिल कर रहा है, जिनका इस्तेमाल लोग और कंपनियां पहले से कर रही हैं.

इसका मतलब है कि वित्तीय सेवाएं धीरे-धीरे अधिक ‘इनविजिबल’ और रोजमर्रा की गतिविधियों में एकीकृत होती जा रही हैं. ट्रैवल बुकिंग, ई-कॉमर्स खरीदारी, सप्लाई चेन प्लेटफॉर्म, गिग वर्क और एंटरप्राइज सिस्टम इसका उदाहरण हैं.

MSME और नए कर्जदारों के लिए खुल रहे नए अवसर

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सहमति आधारित कैश-फ्लो डेटा पारंपरिक कोलेटरल और क्रेडिट हिस्ट्री का विकल्प या पूरक बन रहा है. इससे MSMEs, पहली बार कर्ज लेने वाले लोगों और अब तक वित्तीय सेवाओं से कम जुड़े उपभोक्ताओं के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं.

इस पैकेज में भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व डिप्टी गवर्नर टी. रबी शंकर, Multi Commodity Exchange of India की मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ प्रवीणा राय समेत पेमेंट्स, एम्बेडेड फाइनेंस, पब्लिक डिजिटल सिस्टम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े कई विशेषज्ञों और उद्योग नेताओं के विचार शामिल हैं.

‘India’s Fintech Architects’ को सम्मान

फिनटेक स्पेशल में ‘India’s Fintech Architects’ भी शामिल है, जिसमें BW Businessworld के Festival of Fintech 2026 में सम्मानित संगठनों और नेताओं को जगह दी गई है. इन पुरस्कारों में लेंडिंग प्लेटफॉर्म, पेमेंट सॉल्यूशंस, वित्तीय समावेशन, कस्टमर एक्सपीरियंस, फिनटेक प्रोडक्ट्स, वेल्थटेक, इंश्योरटेक, फिनटेक में AI के इस्तेमाल, स्टार्टअप्स और नई तकनीकी पहलों के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन को मान्यता दी गई.

प्रतिभागियों का मूल्यांकन इनोवेशन, कारोबारी प्रभाव, स्केलेबिलिटी, ग्राहक मूल्य, गवर्नेंस, तकनीकी उत्कृष्टता, बाजार में अलग पहचान और व्यापक वित्तीय इकोसिस्टम में योगदान जैसे मानकों पर किया गया.

BW Businessworld की ग्रुप एडिटोरियल डायरेक्टर Noor Fathima Warsia ने कहा कि टाटा और फिनटेक दोनों ही महत्वपूर्ण संस्थागत बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं. जहां टाटा अपने अगले चरण के लिए ओनरशिप, उद्देश्य और प्रोफेशनल मैनेजमेंट के बीच संतुलन तय कर रहा है, वहीं फिनटेक डिसरप्शन से आगे बढ़कर इंफ्रास्ट्रक्चर और संस्थान निर्माण की दिशा में जा रहा है.

BW Businessworld का यह नया अंक डिजिटल और प्रिंट, दोनों फॉर्मेट में उपलब्ध है. इसमें टाटा समूह के नेतृत्व परिवर्तन से लेकर भारत के तेजी से बदलते फिनटेक इकोसिस्टम तक कारोबार जगत के अहम बदलावों का विस्तृत विश्लेषण किया गया है.

BW Businessworld के बारे में

45 साल की विरासत वाला BW Businessworld भारत के तेजी से बढ़ते 360-डिग्री बिजनेस मीडिया हाउस में से एक है. इसका नेटवर्क 23 विशेष कारोबारी समुदायों और 10 मैगजीन तक फैला हुआ है. समूह विभिन्न घरेलू और वैश्विक क्षेत्रों में कॉन्फ्रेंस और फोरम आयोजित करता है, जहां अलग-अलग सेक्टर के कारोबारी नेताओं को संवाद और सहयोग का मंच मिलता है. इसके सभी अंक डिजिटल रूप से भी कवर किए जाते हैं और प्रत्येक अंक का ई-मैगजीन संस्करण उपलब्ध है.

 


रुपये में जोरदार रिकवरी, एक महीने के हाई पर पहुंचा; RBI सपोर्ट और मजबूत GDP से मिला सहारा

डॉलर के मुकाबले 94.87 पर पहुंची भारतीय करेंसी, मजबूत घरेलू ग्रोथ, विदेशी निवेश और RBI के हस्तक्षेप से मिला सपोर्ट

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 01 September, 2026
Last Modified:
Tuesday, 01 September, 2026
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भारतीय रुपये में मंगलवार को जोरदार रिकवरी देखने को मिली. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 0.3 फीसदी मजबूत होकर 94.87 के स्तर पर पहुंच गया, जो करीब एक महीने का उच्चतम स्तर है. घरेलू करेंसी 95 रुपये प्रति डॉलर पर खुली थी, लेकिन कारोबार के दौरान 94 के दायरे में आ गई. बाजार के जानकारों के मुताबिक, मजबूत घरेलू आर्थिक आंकड़ों, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के संभावित हस्तक्षेप और विदेशी निवेश से रुपये को मजबूती मिली है.

RBI के संभावित हस्तक्षेप से रुपये को मिला सहारा

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, करेंसी मार्केट के ट्रेडर्स का मानना है कि लोकल स्पॉट मार्केट खुलने से पहले RBI की ओर से डॉलर की संभावित बिक्री ने रुपये को सपोर्ट दिया. ऊंची तेल कीमतों और मजबूत डॉलर जैसे बाहरी दबावों के बावजूद घरेलू करेंसी ने मजबूती दिखाई है.

फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स के ट्रेजरी हेड अनिल कुमार भंसाली के मुताबिक, मजबूत घरेलू ग्रोथ, फिस्कल स्लिपेज पर नियंत्रण, RBI का समर्थन और पोर्टफोलियो इनफ्लो ने अगस्त के अंत में रुपये को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई.

7.8% GDP ग्रोथ ने बढ़ाया भरोसा

रुपये की मजबूती को भारत की आर्थिक ग्रोथ के बेहतर आंकड़ों से भी सपोर्ट मिला है. अप्रैल-जून तिमाही में भारत की GDP ग्रोथ 7.8 फीसदी रही, जो बाजार की उम्मीदों से बेहतर है. इसने RBI और निजी अर्थशास्त्रियों के अनुमानों को भी पीछे छोड़ दिया. मजबूत आर्थिक वृद्धि से भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर निवेशकों का भरोसा बढ़ा है. इसके अलावा राजकोषीय घाटे पर नियंत्रण में रहने से भी घरेलू करेंसी को सहारा मिला है.

MSCI से जुड़े इनफ्लो का भी असर

बाजार में विदेशी पूंजी का प्रवाह भी रुपये के लिए सकारात्मक रहा है. MSCI से जुड़े इनफ्लो के साथ विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की घरेलू इक्विटी में खरीदारी ने भी करेंसी को सपोर्ट किया है. FPIs जुलाई और अगस्त में लगातार दो महीने भारतीय इक्विटी बाजार में नेट खरीदार रहे. अगस्त में उन्होंने 29,631 करोड़ रुपये की नेट खरीदारी की, जबकि जुलाई में यह आंकड़ा 20,200 करोड़ रुपये रहा. हालांकि, साल की शुरुआत से तस्वीर अलग है. जनवरी से अब तक FPIs भारतीय शेयर बाजार से 2.24 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं. यह पिछले साल दर्ज 1.66 लाख करोड़ रुपये के आउटफ्लो से भी ज्यादा है.

डॉलर इंडेक्स में मामूली बढ़त

मंगलवार को डॉलर इंडेक्स 0.07 फीसदी बढ़कर 99.47 पर पहुंच गया. हालांकि, अगस्त में इसमें कुल 0.54 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. डॉलर इंडेक्स छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को मापता है. डॉलर में कमजोरी आम तौर पर उभरते बाजारों की करेंसी और परिसंपत्तियों को विदेशी निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बनाती है.

शेयर बाजार की तेजी से भी रुपये को सपोर्ट

मंगलवार को घरेलू शेयर बाजारों में भी तेजी रही. इंट्राडे कारोबार में सेंसेक्स 206.95 अंक यानी 0.27 फीसदी बढ़कर 77,165.73 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 0.15 फीसदी की बढ़त के साथ 24,118.35 पर कारोबार करता दिखा. शेयर बाजार में विदेशी निवेश का बढ़ना आम तौर पर रुपये के लिए सकारात्मक माना जाता है, क्योंकि विदेशी निवेशकों को भारतीय परिसंपत्तियों में निवेश के लिए रुपये की जरूरत होती है.

आगे रुपये में और मजबूती की उम्मीद

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर घरेलू आर्थिक आंकड़े मजबूत बने रहते हैं, विदेशी पूंजी का प्रवाह जारी रहता है और RBI रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए हस्तक्षेप करता रहता है, तो आने वाले दिनों में भारतीय करेंसी को और मजबूती मिल सकती है. हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, वैश्विक स्तर पर मजबूत डॉलर और विदेशी पूंजी के संभावित आउटफ्लो जैसे जोखिम रुपये पर दबाव बनाए रख सकते हैं.
 


सप्लाई चेन को लेकर बदली भारतीय कंपनियों की रणनीति, 70% ने अपनाया डायवर्सिफाइड सोर्सिंग: रिपोर्ट

59% कंपनियां बढ़ा रहीं इन्वेंटरी, संभावित रुकावटों से निपटने के लिए डिजिटल टेक्नोलॉजी और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पर भी फोकस

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 01 September, 2026
Last Modified:
Tuesday, 01 September, 2026
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वैश्विक व्यापार में बढ़ती अनिश्चितताओं और सप्लाई चेन में संभावित रुकावटों के बीच भारतीय कंपनियां अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव कर रही हैं. कंपनियां अब सप्लायर बेस में विविधता लाने, रणनीतिक रूप से इन्वेंटरी बढ़ाने और डिजिटल तकनीक अपनाने पर ज्यादा जोर दे रही हैं. डीपी वर्ल्ड की ग्लोबल ट्रेड ऑब्जर्वेटरी की इंडिया कंट्री रिपोर्ट 2026 के मुताबिक, 70 प्रतिशत भारतीय एक्जीक्यूटिव्स ने सप्लायर डायवर्सिफिकेशन को प्राथमिकता बताया है, जबकि 59 प्रतिशत कंपनियां इन्वेंटरी का स्तर बढ़ा रही हैं.

सप्लाई चेन को मजबूत करना पहली प्राथमिकता

सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स से जुड़े 451 वरिष्ठ एक्जीक्यूटिव्स के सर्वे पर आधारित रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय कंपनियां वैश्विक कंपनियों की तुलना में अपनी सप्लाई चेन को मजबूत करने को ज्यादा प्राथमिकता दे रही हैं. सप्लायर डायवर्सिफिकेशन के बाद इन्वेंटरी बढ़ाना और फ्रेंड-शोरिंग यानी भरोसेमंद एवं अनुकूल देशों से सोर्सिंग करना कंपनियों की प्रमुख रणनीतियों में शामिल है.

कंपनियां नए बाजारों में विस्तार के साथ टेक्नोलॉजी को भी तेजी से अपना रही हैं. आधे से अधिक भारतीय कंपनियों ने कस्टमर-फेसिंग सर्विसेज को पूरी तरह डिजिटल कर दिया है. वैश्विक स्तर पर ऐसी कंपनियों की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से भी कम है.

रिपोर्ट के मुताबिक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल रूट ऑप्टिमाइजेशन, डॉक्यूमेंटेशन और कस्टम्स प्रोसेस को अधिक प्रभावी बनाने में किया जा रहा है. इससे कंपनियों को लागत और समय कम करने के साथ सप्लाई चेन की रेजिलिएंस बढ़ाने में मदद मिल रही है.

ट्रेड एग्रीमेंट से बढ़े सोर्सिंग और नए बाजारों के अवसर

भारत के बदलते व्यापार परिदृश्य ने भी कंपनियों की रणनीति में इस बदलाव को गति दी है. प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम से घरेलू मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा मिला है, जबकि बढ़ते व्यापारिक संबंधों से कंपनियों के लिए नए सोर्सिंग और एक्सपोर्ट बाजार खुले हैं.

2022 से अब तक भारत ने यूएई, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, ईएफटीए देशों, ओमान और न्यूजीलैंड के साथ व्यापार समझौते किए हैं. यूरोपीय संघ के साथ भी व्यापार समझौते की दिशा में प्रगति हुई है, जबकि गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) और इजरायल के साथ बातचीत चल रही है.

रिपोर्ट में करीब आधे एक्जीक्यूटिव्स ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTA) को व्यापार विकास के लिए प्रमुख नीतिगत प्राथमिकता बताया है. डिजिटलाइजेशन और व्यापार सुविधा जैसे कदमों के अलावा भारत में ट्रेड फाइनेंस तक पहुंच भी अपेक्षाकृत बेहतर बताई गई है. 57 प्रतिशत एक्जीक्यूटिव्स का मानना है कि भारत में ट्रेड फाइनेंस आसानी से उपलब्ध है, जबकि वैश्विक स्तर पर ऐसा मानने वाले एक्जीक्यूटिव्स की हिस्सेदारी 39 प्रतिशत है.

ग्राहकों के करीब इन्वेंटरी रखने पर जोर

सोर्सिंग को डायवर्सिफाई करने और नए बाजारों में विस्तार के साथ कंपनियां इन्वेंटरी को ग्राहकों के करीब रखने की रणनीति पर भी जोर दे रही हैं. इसका उद्देश्य सप्लाई में किसी तरह की बाधा आने की स्थिति में ग्राहकों को समय पर उत्पाद उपलब्ध कराना है. इसी बढ़ती जरूरत के बीच भारत में डीपी वर्ल्ड का इंटीग्रेटेड ट्रेड और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क पोर्ट्स, वेयरहाउसिंग, फ्रेट फॉरवर्डिंग और मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को जोड़ता है.

कंपनी के मुताबिक, 60 लाख टीईयू की कुल सालाना क्षमता वाले उसके पांच कंटेनर टर्मिनल भारत के करीब एक-चौथाई आयात-निर्यात (EXIM) कंटेनर बाजार को सेवा देते हैं. इस नेटवर्क में तीन फ्री ट्रेड वेयरहाउसिंग जोन, 50 लाख वर्ग फीट वेयरहाउसिंग स्पेस, पांच कंटेनर फ्रेट स्टेशन और आठ इनलैंड रेल टर्मिनल शामिल हैं.

इसके अलावा नेटवर्क में 16,000 से अधिक कंटेनर, 15,000 पिन कोड को कवर करने वाला एक्सप्रेस लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, डिजिटल फ्रेट फॉरवर्डिंग और ट्रेड फाइनेंस सॉल्यूशंस भी शामिल हैं. इन सुविधाओं का उद्देश्य कंपनियों को ज्यादा प्रभावी और रेजिलिएंट सप्लाई चेन बनाने में मदद करना है.

'डायवर्सिफाइड सोर्सिंग और स्ट्रैटेजिक इन्वेंटरी तेजी से महत्वपूर्ण'

रिपोर्ट के नतीजों पर डीपी वर्ल्ड के सबकॉन्टिनेंट, सेंट्रल एशिया, लेवांत एंड इजिप्ट के सीईओ एवं एमडी रिजवान सूमर ने कहा कि भारत का व्यापार विकास के नए चरण में प्रवेश कर रहा है और कंपनियां अपनी सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए रणनीतियों में बदलाव कर रही हैं.

उन्होंने कहा, "वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन में आने वाली बाधाओं से निपटने के लिए डायवर्सिफाइड सोर्सिंग, स्ट्रैटेजिक इन्वेंटरी, डिजिटलाइजेशन और नए बाजारों तक पहुंच तेजी से महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं."

उन्होंने कहा कि डीपी वर्ल्ड पोर्ट्स, इनलैंड मार्केट, लॉजिस्टिक्स और टेक्नोलॉजी को जोड़कर कंपनियों को अधिक दक्षता के साथ कारोबार करने में मदद कर रहा है. इससे भारत की प्रतिस्पर्धी क्षमता और ग्लोबल वैल्यू चेन में उसकी भूमिका को मजबूत करने में मदद मिल सकती है.

46% लॉजिस्टिक्स अधिकारियों की पहली पसंद सड़क नेटवर्क

भारत का व्यापारिक आकार बढ़ने के साथ लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर भी कंपनियों की रणनीति का अहम हिस्सा बन रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, 46 प्रतिशत लॉजिस्टिक्स अधिकारियों ने सड़क नेटवर्क को प्राथमिकता दी है. हालांकि, कंपनियां अब सड़क परिवहन के साथ रेल और तटीय शिपिंग जैसे मल्टीमॉडल विकल्पों की ओर भी तेजी से बढ़ रही हैं. मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी से बंदरगाहों को देश के अंदरूनी बाजारों से जोड़ने में मदद मिलती है. इससे लॉजिस्टिक्स की दक्षता बढ़ाने के साथ लागत और उत्सर्जन कम करने में भी मदद मिल सकती है.

कंपनियों के लिए बेहतर कनेक्टिविटी का मतलब देश के भीतर और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक सामान पहुंचाने के लिए ज्यादा विकल्प और अधिक भरोसेमंद लॉजिस्टिक्स नेटवर्क है.

ग्लोबल ट्रेड कॉरिडोर में भारत की भूमिका बढ़ाने का मौका

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में कारोबार के विकास का अगला चरण कंपनियों की बदलते वैश्विक व्यापार माहौल के अनुरूप खुद को ढालने की क्षमता पर निर्भर करेगा. इंटीग्रेटेड इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल क्षमताओं और व्यापार को सुगम बनाने वाली व्यवस्थाओं में निवेश से भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूत किया जा सकता है. इससे भारत को उभरते ग्लोबल ट्रेड कॉरिडोर में अपनी भूमिका बढ़ाने और नए कारोबारी अवसर हासिल करने में मदद मिल सकती है.

 


अगस्त में GST कलेक्शन 14.8% बढ़ा, रिफंड ने बिगाड़ा खेल; नेट ग्रोथ सिर्फ 8.3%

अगस्त में ग्रॉस GST कलेक्शन 14.8% बढ़ा, आयात से टैक्स राजस्व 29% चढ़ा; रिफंड की तेज बढ़ोतरी के कारण नेट कलेक्शन की वृद्धि सिर्फ 8.3% रही

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 01 September, 2026
Last Modified:
Tuesday, 01 September, 2026
BWHindia

अगस्त 2026 में वस्तु एवं सेवा कर (GST) से सरकार की कमाई करीब 2 लाख करोड़ रुपये रही. ग्रॉस GST कलेक्शन सालाना आधार पर 14.8 फीसदी बढ़ा, लेकिन रिफंड में तेज उछाल ने शुद्ध संग्रह की रफ्तार को काफी कम कर दिया. अगस्त में GST रिफंड 68 फीसदी बढ़कर 31,795 करोड़ रुपये पहुंच गया. इसके चलते रिफंड समायोजित करने के बाद नेट GST कलेक्शन की वृद्धि दर 8.3 फीसदी रही.

वित्त मंत्रालय की ओर से मंगलवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में ग्रॉस GST कलेक्शन करीब 2 लाख करोड़ रुपये रहा. हालांकि, यह जुलाई के 2.11 लाख करोड़ रुपये के ग्रॉस कलेक्शन से कम है.

आयात से GST राजस्व में 29% की जोरदार बढ़ोतरी

अगस्त के GST आंकड़ों में आयात से मिलने वाले राजस्व की भूमिका अहम रही. आयात से ग्रॉस GST राजस्व सालाना आधार पर 29 फीसदी बढ़कर 62,604 करोड़ रुपये हो गया. इसके मुकाबले घरेलू लेनदेन से ग्रॉस GST कलेक्शन 9 फीसदी बढ़कर 1.37 लाख करोड़ रुपये रहा. यानी कुल GST राजस्व में बढ़ोतरी को आयात से मिलने वाले टैक्स ने बड़ा सहारा दिया. विशेषज्ञों के अनुसार, आयात से जुड़े GST राजस्व में तेज वृद्धि कुछ क्षेत्रों में बाहरी स्रोतों पर निर्भरता की ओर इशारा करती है. ऐसे में स्थानीय उत्पादन बढ़ाने और आयात के विकल्प विकसित करने के लिए संतुलित नीतिगत प्रयास जरूरी हो सकते हैं.

रिफंड 68% बढ़ा, नेट कलेक्शन की रफ्तार घटी

ग्रॉस GST कलेक्शन में करीब 15 फीसदी की बढ़ोतरी के बावजूद नेट कलेक्शन में वृद्धि केवल 8.3 फीसदी रही. रिफंड समायोजित करने के बाद अगस्त में सरकार का शुद्ध GST कलेक्शन 1.68 लाख करोड़ रुपये रहा. जुलाई के मुकाबले अगस्त में नेट GST कलेक्शन में 7 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज हुई. इसकी प्रमुख वजह GST रिफंड में तेज बढ़ोतरी रही.

अगस्त में कुल GST रिफंड सालाना आधार पर 68 फीसदी बढ़कर 31,795 करोड़ रुपये पहुंच गया. इसमें घरेलू लेनदेन से जुड़े रिफंड का हिस्सा 18,490 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की तुलना में करीब 73 फीसदी अधिक है. वहीं, आयात पर चुकाए गए GST का रिफंड करीब 62 फीसदी बढ़कर 13,305 करोड़ रुपये हो गया.

पांच महीने में ₹10.43 लाख करोड़ का ग्रॉस GST कलेक्शन

चालू वित्त वर्ष 2026-27 के पहले पांच महीनों में GST कलेक्शन की रफ्तार मजबूत बनी हुई है. अप्रैल से अगस्त के बीच ग्रॉस GST कलेक्शन सालाना आधार पर 11 फीसदी बढ़कर 10.43 लाख करोड़ रुपये हो गया. इसी अवधि में रिफंड के बाद नेट GST कलेक्शन 9 फीसदी बढ़कर 8.89 लाख करोड़ रुपये रहा. इससे संकेत मिलता है कि चालू वित्त वर्ष में अप्रत्यक्ष कर संग्रह अब तक स्थिर गति से बढ़ रहा है.

त्योहारी सीजन से मिल सकता है कलेक्शन को सहारा

आने वाले महीनों में GST कलेक्शन को त्योहारी सीजन से अतिरिक्त सहारा मिलने की उम्मीद है. त्योहारों के दौरान उपभोक्ता खर्च और खरीदारी बढ़ने से घरेलू लेनदेन से मिलने वाले GST राजस्व में तेजी आ सकती है. विशेषज्ञों के अनुसार, त्योहारी मांग में बढ़ोतरी से आने वाले महीनों में GST राजस्व को मजबूती मिल सकती है. हालांकि, अगस्त के आंकड़ों में यह भी साफ दिखाई देता है कि ग्रॉस कलेक्शन में मजबूत बढ़ोतरी के बावजूद रिफंड में तेज वृद्धि ने सरकार के शुद्ध राजस्व पर दबाव डाला है.
 


मैन्युफैक्चरिंग की रफ्तार 5 साल के निचले स्तर पर, अगस्त में PMI घटकर 52.8

कमजोर मांग और नए ऑर्डर की धीमी ग्रोथ से अगस्त में मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों पर पड़ा दबाव, रोजगार में भी करीब ढाई साल बाद गिरावट

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 01 September, 2026
Last Modified:
Tuesday, 01 September, 2026
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भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की रफ्तार अगस्त में और सुस्त पड़ गई. उत्पादन और नए ऑर्डर की वृद्धि धीमी होने के कारण HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) अगस्त में घटकर 52.8 पर आ गया. यह पांच साल में मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों की सबसे धीमी वृद्धि है. जुलाई में PMI 53.5 रहा था.

अगस्त में यह लगातार तीसरा महीना है जब मैन्युफैक्चरिंग PMI में गिरावट दर्ज की गई. साथ ही, यह 54.2 के दीर्घकालिक औसत से भी नीचे रहा. हालांकि PMI का 50 से ऊपर रहना सेक्टर में विस्तार का संकेत है, लेकिन आंकड़ा यह बताता है कि विस्तार की रफ्तार लगातार कमजोर हो रही है.

उत्पादन और नए ऑर्डर की ग्रोथ धीमी

HSBC की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी के मुताबिक, अगस्त में उत्पादन सूचकांक अगस्त 2021 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया. कंपनियों ने उत्पादन में बढ़ोतरी जारी रखी, लेकिन कमजोर मांग और नए ऑर्डर में सुस्ती के कारण इसकी रफ्तार काफी कम रही.

सर्वे में शामिल कंपनियों ने बाजार की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों और कुछ उत्पादों की कमजोर मांग को नए कारोबार की धीमी वृद्धि की प्रमुख वजह बताया. तीन प्रमुख औद्योगिक समूहों में से दो में मांग कमजोर हुई, जबकि कंज्यूमर गुड्स सेगमेंट अपेक्षाकृत बेहतर रहा.

करीब ढाई साल बाद रोजगार में गिरावट

मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में सुस्ती का असर रोजगार पर भी पड़ा. अगस्त में सेक्टर में रोजगार करीब ढाई साल में पहली बार घटा, हालांकि गिरावट मामूली रही. कर्मचारियों की संख्या घटाने वाली कंपनियों ने कारोबार की कम जरूरत को इसकी प्रमुख वजह बताया.

कंपनियों की खरीदारी गतिविधियों में भी सुस्ती देखने को मिली. कच्चे माल और अन्य इनपुट की खरीद लगातार 62वें महीने बढ़ी, लेकिन अगस्त में इसकी वृद्धि दर इस अवधि की सबसे धीमी रही. कुछ कंपनियों ने इन्वेंटरी बढ़ाने के लिए खरीद जारी रखी, जबकि कमजोर मांग के चलते कुछ कंपनियों ने खरीदारी घटा दी.

तैयार माल का स्टॉक बढ़ा

कमजोर बिक्री का असर कंपनियों के तैयार माल के स्टॉक पर भी दिखाई दिया. अगस्त में तैयार माल का स्टॉक लगातार दूसरे महीने बढ़ा. हालांकि इसकी वृद्धि दर जुलाई की तुलना में कम रही. इससे संकेत मिलता है कि कंपनियों की बिक्री उम्मीद के मुकाबले कमजोर रही और कुछ तैयार माल इन्वेंटरी में जमा हुआ.

एक्सपोर्ट ऑर्डर में भी सुस्ती

अगस्त में विदेशी बाजारों से नए ऑर्डर मिलने का सिलसिला जारी रहा. ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, चीन, स्पेन, थाईलैंड और अमेरिका जैसे बाजारों से कंपनियों को नए ऑर्डर मिले. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर की वृद्धि दर जुलाई के मुकाबले धीमी रही.

इनपुट लागत का दबाव हुआ कम

मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए लागत के मोर्चे पर कुछ राहत मिली. स्टील और परिवहन जैसी लागत में बढ़ोतरी के बावजूद कुल इनपुट लागत में वृद्धि की रफ्तार छह महीने के निचले स्तर पर आ गई. लागत दबाव कम होने का असर उत्पादों की कीमतों पर भी पड़ा. अगस्त में 7 फीसदी से कम कंपनियों ने अपनी बिक्री कीमतें बढ़ाईं. उत्पाद कीमतों में वृद्धि की दर 45 महीने में सबसे कम रही.

भविष्य को लेकर कंपनियों का भरोसा बढ़ा

मौजूदा समय में मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों की रफ्तार भले ही कमजोर हुई हो, लेकिन कंपनियां अगले 12 महीनों को लेकर अपेक्षाकृत आशावादी हैं. सर्वे में करीब 16 फीसदी कंपनियों ने अगले एक साल में उत्पादन बढ़ने की उम्मीद जताई. कारोबारी भरोसा मई के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है. हालांकि, ऐतिहासिक आंकड़ों के मुकाबले कंपनियों का भरोसा अभी भी अपेक्षाकृत कमजोर बना हुआ है.
 


जोमैटो का बड़ा एक्शन: नकली डेयरी प्रोडक्ट वाले खाने पर रोक, नियम तोड़ने वाले रेस्तरां होंगे प्लेटफॉर्म से बाहर

FSSAI की कार्रवाई के बाद सख्त हुआ जोमैटो, पनीर-घी-मक्खन जैसे डेयरी उत्पादों के कृत्रिम विकल्प इस्तेमाल करने वाले व्यंजनों को हटाया

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Published - Tuesday, 01 September, 2026
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Tuesday, 01 September, 2026
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ऑनलाइन फूड डिलिवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो ने अपने प्लेटफॉर्म पर एनालॉग यानी कृत्रिम डेयरी उत्पादों के इस्तेमाल को लेकर सख्त रुख अपनाया है. कंपनी ने ऐसे व्यंजनों को प्लेटफॉर्म से हटाना शुरू कर दिया है, जिनमें रेस्तरां पार्टनर्स ने एनालॉग डेयरी उत्पादों के इस्तेमाल की जानकारी दी थी. जोमैटो ने साफ किया है कि खाद्य गुणवत्ता और नियमों का पालन नहीं करने वाले रेस्तरां पार्टनर्स को प्लेटफॉर्म से हटाया जा सकता है.

FSSAI की कार्रवाई के बाद बढ़ी सख्ती

जोमैटो का यह फैसला भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) की महाराष्ट्र में की गई कार्रवाई के बाद आया है. FSSAI ने डेयरी उत्पादों की निगरानी और उनकी गुणवत्ता की जांच को मजबूत करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भी निर्देश दिए हैं. महाराष्ट्र में जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन मिलने पर कई भोजनालयों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं.

क्या होते हैं एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट?

एनालॉग डेयरी उत्पाद ऐसे कृत्रिम विकल्प होते हैं, जिनमें पारंपरिक डेयरी सामग्री की जगह अपेक्षाकृत सस्ते अन्य पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है. पनीर, घी, खोया और मक्खन जैसे डेयरी उत्पादों के विकल्प के तौर पर इनका इस्तेमाल किया जा सकता है. ऐसे उत्पादों के इस्तेमाल और उनकी जानकारी ग्राहकों को स्पष्ट रूप से दिए जाने को लेकर खाद्य सुरक्षा नियमों के पालन पर जोर दिया जा रहा है.

रेस्तरां को करनी होगी सामग्री की जांच

जोमैटो ने अपने रेस्तरां पार्टनर्स से तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने को कहा है. कंपनी के मुताबिक, रेस्तरां को प्राकृतिक डेयरी उत्पादों के इस्तेमाल पर ध्यान देना होगा और ऐसे व्यंजनों को अपने मेनू से हटाना होगा जिनमें एनालॉग डेयरी उत्पाद इस्तेमाल किए जा रहे हैं.

इसके अलावा रेस्तरां पार्टनर्स को अपने सप्लायर्स की ओर से दिए गए प्रोडक्ट लेबल और सामग्री से जुड़ी घोषणाओं की समीक्षा करनी होगी. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि खाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की सही जानकारी उपलब्ध हो.

नियम तोड़े तो प्लेटफॉर्म से हटेंगे रेस्तरां

जोमैटो ने कहा है कि वह अपने प्लेटफॉर्म पर केवल गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप उत्पादों की लिस्टिंग को बढ़ावा देगा. अगर किसी रेस्तरां पार्टनर की ओर से नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो कंपनी संबंधित उत्पाद को मेनू से हटाने के साथ-साथ रेस्तरां को अपने प्लेटफॉर्म से भी बाहर कर सकती है. कंपनी ने संकेत दिया है कि खाद्य गुणवत्ता के मामले में किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा.

जोमैटो के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आदित्य मंगला ने कहा कि कंपनी का लक्ष्य लोगों को बेहतर भोजन उपलब्ध कराना है. उन्होंने कहा कि ग्राहकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के साथ-साथ रेस्तरां पार्टनर्स की ओर से सूचीबद्ध और परोसे जाने वाले उत्पादों के लिए स्पष्ट मानक बनाए रखना भी कंपनी की प्राथमिकता है.


Happiest Minds और ITC Infotech का होगा विलय, FY28 तक 1 अरब डॉलर की आय का लक्ष्य

Happiest Minds-ITC Infotech Merger: दोनों कंपनियों के विलय से 19,000 से अधिक कर्मचारियों वाली टेक्नोलॉजी सर्विसेज कंपनी बनेगी. नई कंपनी के पास 30 से ज्यादा देशों में 800 से अधिक ग्राहक होंगे.

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Published - Tuesday, 01 September, 2026
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Tuesday, 01 September, 2026
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हैपिएस्ट माइंड्स टेक्नोलॉजी (Happiest Minds Technologies) और आईटीसी इंफोटेक (ITC Infotech) ने विलय के लिए समझौता किया है. इस प्रस्तावित सौदे के बाद 19,000 से अधिक कर्मचारियों वाली एक बड़ी टेक्नोलॉजी सर्विसेज कंपनी अस्तित्व में आएगी. दोनों कंपनियों ने संयुक्त कारोबार के लिए वित्त वर्ष 2027-28 तक सालाना 1 अरब डॉलर की आय का लक्ष्य रखा है.

प्रस्तावित विलय से Happiest Minds की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल इंजीनियरिंग, क्लाउड, डेटा और साइबर सिक्योरिटी क्षमताओं को ITC Infotech की एंटरप्राइज ट्रांसफॉर्मेशन, SAP, प्रोडक्ट लाइफसाइकिल मैनेजमेंट और इंडस्ट्री 4.0 विशेषज्ञता के साथ जोड़ा जाएगा.

₹7,033 करोड़ की होगी संयुक्त आय

कंपनियों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के आधार पर संयुक्त कारोबार का सालाना राजस्व करीब ₹7,033 करोड़ होगा. नई कंपनी 30 से अधिक देशों में 800 से ज्यादा ग्राहकों को सेवाएं देगी.

विलय के तहत ITC Infotech, Happiest Minds में उसके प्रमोटर और प्रमोटर संस्थाओं से करीब 22.1 फीसदी की कुल अल्पांश हिस्सेदारी दो चरणों में खरीदेगी. इस सौदे के लिए कुल ₹1,330 करोड़ का भुगतान किया जाएगा. यह करीब ₹395 प्रति शेयर के औसत भाव को दर्शाता है.

शेयर स्वैप के जरिए पूरा होगा विलय

हिस्सेदारी खरीदने के बाद प्रस्तावित विलय शेयर स्वैप के जरिए पूरा किया जाएगा. इसके तहत Happiest Minds के शेयरधारकों को उनके पास मौजूद प्रत्येक 81 शेयर के बदले ITC Infotech के 25 शेयर मिलेंगे. विलय के बाद ITC Ltd की संयुक्त कंपनी में करीब 73.4 फीसदी हिस्सेदारी होगी और वह नई कंपनी की प्रमोटर बनेगी.

AI से साइबर सिक्योरिटी तक सेवाओं का विस्तार

दोनों कंपनियों के संयोजन से AI, डिजिटल और प्रोडक्ट इंजीनियरिंग, क्लाउड, डेटा, साइबर सिक्योरिटी, कंसल्टिंग और इंडस्ट्री-विशिष्ट टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस का व्यापक पोर्टफोलियो तैयार होगा. नई कंपनी अपने विस्तारित ग्राहक आधार के बीच AI, क्लाउड, साइबर सिक्योरिटी, SAP और इंजीनियरिंग सेवाओं की क्रॉस-सेलिंग के जरिए कारोबार बढ़ाने की योजना बना रही है. इसके अलावा बड़ी एंटरप्राइज ट्रांसफॉर्मेशन और डिजिटल इंजीनियरिंग परियोजनाओं पर भी फोकस किया जाएगा.

Generative और Agentic AI पर भी फोकस

कंपनी को Generative AI और Agentic AI सॉल्यूशंस को तेजी से अपनाए जाने से भी कारोबार में वृद्धि की उम्मीद है. इसके साथ ही Microsoft, SAP, ServiceNow और PTC जैसे टेक्नोलॉजी पार्टनर्स के साथ गहरी भागीदारी के जरिए नए अवसर तलाशे जाएंगे.

उत्तरी अमेरिका और यूरोप की बड़ी हिस्सेदारी

संयुक्त कंपनी के भौगोलिक कारोबार में उत्तरी अमेरिका की हिस्सेदारी करीब 38 फीसदी और यूरोप की करीब 31 फीसदी रहने की उम्मीद है. कंपनियों के मुताबिक, इससे नई कंपनी का अंतरराष्ट्रीय कारोबार पहले के मुकाबले अधिक संतुलित होगा.

15 महीने में पूरा हो सकता है सौदा

दोनों कंपनियों को उम्मीद है कि प्रस्तावित लेनदेन अगले 15 महीनों के भीतर पूरा हो जाएगा. हालांकि, इसके लिए शेयरधारकों, नियामकों, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI), स्टॉक एक्सचेंजों और नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) समेत संबंधित संस्थाओं की मंजूरी जरूरी होगी.

जरूरी मंजूरियां मिलने तक Happiest Minds और ITC Infotech स्वतंत्र रूप से अपना कारोबार जारी रखेंगी. सभी मंजूरियां मिलने के बाद संयुक्त कंपनी को संबंधित स्टॉक एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध किया जाएगा.

दोनों कंपनियों ने बताया रणनीतिक कदम

Happiest Minds के चेयरमैन और चीफ मेंटर अशोक सूटा ने कहा कि यह विलय कंपनी को बड़ा प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराएगा और दोनों कारोबारों के मूल्यों तथा पोर्टफोलियो में काफी समानताएं हैं.

वहीं, ITC के चेयरमैन संजीव पुरी ने कहा कि दोनों कंपनियों की पूरक क्षमताओं और डोमेन विशेषज्ञता को एक साथ लाने से ITC समूह की विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस उपलब्ध कराने की क्षमता मजबूत होगी.


मुकेश अंबानी की कंपनी को SEBI से मिली हरी झंडी, ₹37,700 करोड़ जुटाने की तैयारी

Jio Platforms के प्रस्तावित IPO को SEBI की मंजूरी मिल गई है. करीब ₹37,700 करोड़ के इस इश्यू के जरिए कंपनी नए शेयर जारी कर पूंजी जुटाएगी. IPO आने के बाद यह देश के सबसे बड़े सार्वजनिक निर्गमों में शामिल हो सकता है.

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Published - Tuesday, 01 September, 2026
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Tuesday, 01 September, 2026
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रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी की टेलीकॉम और डिजिटल कारोबार से जुड़ी कंपनी जियो (Jio Platforms) के बहुप्रतीक्षित IPO का रास्ता साफ हो गया है. भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने कंपनी के प्रस्तावित पब्लिक इश्यू को मंजूरी दे दी है. कंपनी इस IPO के जरिए करीब ₹37,700 करोड़ जुटाने की तैयारी में है. इश्यू का अंतिम आकार, प्राइस बैंड और लॉन्च की तारीख अभी तय नहीं हुई है.

अगर IPO इसी आकार के साथ बाजार में आता है, तो यह भारत के सबसे बड़े IPO में शामिल हो सकता है. करीब 3 अरब डॉलर के संभावित इश्यू साइज के साथ जियो का सार्वजनिक निर्गम हुंडई मोटर इंडिया के IPO के आकार को पीछे छोड़ सकता है.

पूरी तरह फ्रेश इश्यू होगा IPO

जियो प्लेफॉर्म्स का प्रस्तावित IPO पूरी तरह फ्रेश इश्यू होगा. कंपनी अधिकतम 27 करोड़ नए शेयर जारी कर सकती है. इसमें ऑफर फॉर सेल (OFS) का हिस्सा नहीं होगा. इसका मतलब है कि IPO से जुटाई गई रकम सीधे कंपनी के पास जाएगी और मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचकर रकम नहीं जुटाएंगे.

प्रस्तावित इश्यू में अधिकतम 50 फीसदी हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) के लिए आरक्षित किया जा सकता है, जबकि कम से कम 35 फीसदी हिस्सा रिटेल निवेशकों के लिए रखा जा सकता है. रिलायंस इंडस्ट्रीज के पात्र शेयरधारकों और कर्मचारियों के लिए आरक्षण से जुड़ी अंतिम जानकारी अभी सामने नहीं आई है.

IPO की रकम से चुकाया जाएगा कर्ज

जियो की ओर से SEBI के पास दाखिल ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) के मुताबिक, IPO से जुटाई गई रकम का बड़ा हिस्सा उसकी सब्सिडियरी रिलायंस जियो इंफोकॉम (RJIL) के कर्ज को समय से पहले चुकाने में इस्तेमाल किया जाएगा. कंपनी करीब ₹27,500 करोड़ का इस्तेमाल RJIL के कुछ बकाया कर्ज के प्रीपेमेंट के लिए करने की योजना बना रही है. बाकी रकम का इस्तेमाल सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए किया जाएगा.

रिलायंस इंडस्ट्रीज की 66.43% हिस्सेदारी

जियो में रिलायंस इंडस्ट्रीज सबसे बड़ी शेयरधारक है और उसकी करीब 66.43 फीसदी हिस्सेदारी है. मेटा की अप्रत्यक्ष सब्सिडियरी जाधू होलीडेज (Jaadhu Holidays) के पास करीब 10 फीसदी हिस्सेदारी है, जबकि गूगल इंटरनेशनल (Google International LLC) की हिस्सेदारी करीब 8 फीसदी है. जियो के IPO को लेकर बाजार में लंबे समय से चर्चा थी. कंपनी ने 19 जून को सेबीके पास DRHP दाखिल किया था. अब नियामक की मंजूरी मिलने के बाद IPO की अगली प्रक्रिया शुरू होगी.

अभी तय नहीं हुआ प्राइस बैंड और तारीख

सेबी की मंजूरी मिलने के बावजूद निवेशकों को IPO की लॉन्च तारीख और शेयर के प्राइस बैंड के लिए अभी इंतजार करना होगा. कंपनी ने इनका अंतिम ऐलान नहीं किया है. इश्यू का अंतिम आकार भी बाजार में आने से पहले बदल सकता है. ऐसे में जियो का IPO कब खुलेगा, कितने रुपये का प्राइस बैंड होगा और कंपनी का अंतिम वैल्यूएशन कितना तय होगा, इन सवालों पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी.

 


अनुमानों को पछाड़ 7.8% की रफ्तार से दौड़ी भारतीय अर्थव्यवस्था, निवेश और मैन्युफैक्चरिंग ने दिया जोरदार सहारा

पहली तिमाही में GDP ग्रोथ 7.8% रही, जो RBI समेत ज्यादातर अनुमानों से बेहतर है. मजबूत विनिर्माण, सेवा गतिविधियों और निवेश मांग ने अर्थव्यवस्था की रफ्तार को बनाए रखा.

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Published - Tuesday, 01 September, 2026
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Tuesday, 01 September, 2026
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भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करते हुए 7.8 फीसदी की मजबूत वृद्धि दर्ज की है. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, जून तिमाही में GDP ग्रोथ 7.8 फीसदी रही, जबकि विभिन्न एजेंसियों ने इसके 6.9 फीसदी से 8 फीसदी के बीच रहने का अनुमान जताया था. भारतीय रिजर्व बैंक का अनुमान 7 फीसदी था. हालांकि, यह वृद्धि पिछली तिमाही के 8.6 फीसदी के मुकाबले कम रही, लेकिन वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया संकट के बीच 7.8 फीसदी की ग्रोथ को भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.

GVA ग्रोथ GDP से रही ज्यादा

पहली तिमाही में सकल मूल्य वर्धन (GVA) की वृद्धि दर 8.2 फीसदी रही. GVA की यह वृद्धि वास्तविक GDP ग्रोथ से अधिक है. वहीं, जून तिमाही में नॉमिनल GDP 10.3 फीसदी बढ़ी, जबकि वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में इसकी वृद्धि दर 9.1 फीसदी रही थी.

निवेश मांग में जोरदार तेजी

GDP के आंकड़ों के मुताबिक, जून तिमाही में निवेश मांग में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिली. सकल स्थिर पूंजी निर्माण से जुड़े संकेतकों के आधार पर निवेश मांग 11.9 फीसदी बढ़ी. इससे पता चलता है कि कंपनियों और कारोबारों की ओर से आर्थिक गतिविधियों के विस्तार को लेकर भरोसा मजबूत बना हुआ है. इस दौरान निजी अंतिम उपभोग व्यय 7.1 फीसदी बढ़ा. हालांकि, सरकारी खर्च की वृद्धि दर 4.3 फीसदी रही, जो पिछली मार्च तिमाही के मुकाबले धीमी है.

पिछले आंकड़ों में भी हुआ संशोधन

सांख्यिकी मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2023, वित्त वर्ष 2024 और वित्त वर्ष 2026 के तिमाही और वार्षिक राष्ट्रीय आय के आंकड़ों में भी संशोधन किया है. नए आउटपुट उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) और 2022-23 को आधार वर्ष मानकर तैयार किए गए औद्योगिक उत्पादन सूचकांक को संशोधित आंकड़ों में शामिल किया गया है. सबसे महत्वपूर्ण संशोधन वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के GDP आंकड़ों में हुआ है. मार्च तिमाही की GDP ग्रोथ को पहले के 7.8 फीसदी के अनुमान से बढ़ाकर 8.6 फीसदी कर दिया गया है.

PM मोदी ने बताया 'असाधारण उपलब्धि'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में 7.8 फीसदी GDP वृद्धि को 'असाधारण उपलब्धि' बताया. उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं, तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूत वृद्धि दर्ज की है.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी GDP के मजबूत आंकड़ों का श्रेय देश के लोगों की मेहनत और सरकार के आर्थिक सुधारों को दिया. उन्होंने कहा कि सरकार के सुधारों और अर्थव्यवस्था के कुशल प्रबंधन के परिणाम अब दिखाई दे रहे हैं.

विनिर्माण और सेवा क्षेत्र बने ग्रोथ के प्रमुख आधार

डेलॉयट इंडिया की अर्थशास्त्री रुमकी मजूमदार के मुताबिक, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में व्यापक मजबूती से संकेत मिलता है कि कंपनियां मजबूत मांग की उम्मीद में अपनी गतिविधियों का विस्तार कर रही थीं. इन दोनों क्षेत्रों का बेहतर प्रदर्शन जून तिमाही में आर्थिक वृद्धि के प्रमुख आधारों में रहा. हालांकि, विशेषज्ञों ने आने वाली तिमाहियों को लेकर कुछ जोखिम भी जताए हैं. केयरएज रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा के मुताबिक, आने वाली तिमाहियों में आर्थिक वृद्धि में कुछ नरमी देखने को मिल सकती है. भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार नीति को लेकर अनिश्चितता वैश्विक जोखिमों को बढ़ा सकती है, जिसका असर भारत की ग्रोथ पर भी पड़ सकता है. इसके बावजूद, जून तिमाही के 7.8 फीसदी के आंकड़े से यह संकेत मिलता है कि घरेलू मांग, निवेश और प्रमुख आर्थिक क्षेत्रों की मजबूती ने वैश्विक चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार दिया है.


महंगा क्रूड और कमजोर ग्लोबल संकेत, आज बाजार में इन शेयरों पर रहेगी नजर

सोमवार को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ था. सेंसेक्स 307.24 अंक गिरकर 76,957.27 के स्तर पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 95.25 अंक की गिरावट के साथ 24,080.40 पर बंद हुआ. 

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Published - Tuesday, 01 September, 2026
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Tuesday, 01 September, 2026
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भारतीय शेयर बाजार के लिए मंगलवार का शुरुआती सेटअप दबाव वाला नजर आ रहा है. पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को फिर ऊपर धकेल दिया है. Brent Crude $90 प्रति बैरल के पार पहुंच गया है. इसके साथ ही अमेरिकी बाजारों में गिरावट और एशियाई बाजारों के कमजोर रुख का असर घरेलू बाजार की धारणा पर पड़ सकता है. हालांकि, भारत के मजबूत जीडीपी आंकड़े बाजार को कुछ सहारा दे सकते हैं.

कल कितने अंक पर बंद हुआ बाजार?

इससे पहले सोमवार, 31 अगस्त को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ था. BSE Sensex 307.24 अंक यानी 0.40 फीसदी गिरकर 76,957.27 के स्तर पर बंद हुआ. वहीं, NSE Nifty 95.25 अंक यानी 0.39 फीसदी की गिरावट के साथ 24,080.40 पर बंद हुआ. कारोबार के दौरान Sensex 76,751.32 के निचले स्तर तक गया, जबकि Nifty ने 23,993.60 का इंट्राडे लो बनाया. हालांकि बैंकिंग शेयरों में मजबूती रही. Nifty Bank 0.92 फीसदी चढ़कर 58,024.95 पर बंद हुआ. 

GIFT Nifty क्या संकेत दे रहा है?

मंगलवार सुबह GIFT Nifty करीब 24,172 के स्तर पर कारोबार कर रहा था और इसमें लगभग 55 अंक यानी 0.22 फीसदी की गिरावट थी. इससे भारतीय बाजार में बड़ी गैप-डाउन ओपनिंग के बजाय सतर्क या कमजोर शुरुआत के संकेत मिल रहे थे. हालांकि, बाद के संकेतों में मजबूत भारतीय जीडीपी आंकड़ों के चलते बाजार की शुरुआती तस्वीर कुछ बेहतर हुई. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार के हल्की बढ़त के साथ खुलने की उम्मीद थी, लेकिन बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और महंगे कच्चे तेल से तेजी सीमित रह सकती है. 

कच्चा तेल $90 के पार, बाजार के लिए बड़ी चिंता

भारतीय शेयर बाजार के लिए इस समय सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल की कीमत बनी हुई है. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बाद Brent Crude की कीमत $90 प्रति बैरल के पार पहुंच गई है और मंगलवार सुबह यह करीब $91 प्रति बैरल तक पहुंची. महंगे कच्चे तेल से भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश पर दबाव बढ़ सकता है. इससे आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर असर पड़ने की आशंका रहती है. यही वजह है कि तेल की कीमतों में तेज उछाल को भारतीय शेयर बाजार के लिए नकारात्मक संकेत माना जा रहा है.

अमेरिकी बाजार भी दबाव में

सोमवार को अमेरिकी शेयर बाजारों में भी गिरावट देखने को मिली. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई. इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता भी बाजार के लिए दबाव का कारण बनी हुई है. 

एशियाई बाजारों में भी कमजोरी

मंगलवार सुबह एशियाई बाजारों में भी मिला-जुला से कमजोर रुख रहा. पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और तेल की कीमतों में तेजी का असर एशियाई बाजारों की धारणा पर पड़ा. जापान और ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख सूचकांकों में कमजोरी रही, जबकि हांगकांग के बाजारों के फ्यूचर्स में भी दबाव देखने को मिला.

FII बिकवाली से भी बढ़ा दबाव

विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी घरेलू बाजार के लिए चिंता का कारण बनी हुई है. 31 अगस्त को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयरों में करीब ₹7,986 करोड़ की नेट बिकवाली की. दूसरी ओर घरेलू संस्थागत निवेशकों ने करीब ₹4,589 करोड़ की नेट खरीदारी की. हालांकि, अगस्त में विदेशी निवेशकों का कुल रुख पूरी तरह नकारात्मक नहीं रहा. Reuters के मुताबिक, अगस्त 2026 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय इक्विटी में करीब $3.1 अरब का निवेश किया, जो 23 महीने में सबसे बड़ा मासिक इनफ्लो रहा.

भारत की GDP ग्रोथ से मिल सकता है सहारा

बाजार के लिए एक सकारात्मक संकेत भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि है. अप्रैल-जून तिमाही में भारत की वास्तविक GDP ग्रोथ 7.8 फीसदी रही, जो उम्मीद से बेहतर है. मजबूत निवेश, मैन्युफैक्चरिंग और घरेलू मांग ने आर्थिक वृद्धि को सपोर्ट किया.  इसलिए मंगलवार के कारोबार में एक तरफ मजबूत घरेलू आर्थिक आंकड़े बाजार को सहारा दे सकते हैं, वहीं महंगा कच्चा तेल, अमेरिका-ईरान तनाव और कमजोर ग्लोबल संकेत तेजी पर अंकुश लगा सकते हैं.

आज किन शेयरों पर रहेगी नजर?

मंगलवार के कारोबार में PVR INOX, Happiest Minds Technologies, ITC, Tribhovandas Bhimji Zaveri (TBZ), E2E Networks, Milky Mist Dairy Food, Brigade Enterprises, Time Technoplast, Indo Tech Transformers, PNB Housing Finance और Himadri Speciality Chemical समेत कई शेयर खबरों के चलते फोकस में रहेंगे. Happiest Minds-ITC Infotech विलय, PVR INOX के शेयर बायबैक, TBZ में GRT Jewellers की हिस्सेदारी खरीदने की योजना, Milky Mist के मजबूत तिमाही नतीजे, E2E Networks के करीब ₹1,000 करोड़ के AI सौदे, Brigade Enterprises के कोयंबटूर प्रोजेक्ट, Time Technoplast और Indo Tech Transformers के नए ऑर्डर तथा PNB Housing Finance की फंड जुटाने की योजना से इन शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है.

कुल मिलाकर, मंगलवार को बाजार की दिशा तय करने में कच्चे तेल की कीमत, पश्चिम एशिया का तनाव, विदेशी निवेशकों की गतिविधि और वैश्विक बाजारों के संकेत अहम भूमिका निभाएंगे.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)