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Gensol Engineering में कैसे हुआ स्कैम? SEBI ने एक-एक कर सच्चाई की उजागर
अंतरिम आदेश में पैसों के गलत इस्तेमाल, झूठी जानकारी और रुके हुए स्टॉक स्प्लिट का खुलासा हुआ है; प्रमोटरों को अहम पदों से हटाया गया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
भारत की बाजार नियामक संस्था SEBI ने Gensol Engineering के खिलाफ एक सख्त अंतरिम आदेश जारी किया है. इस आदेश में कंपनी और उसके प्रमोटरों – अनमोल सिंह जग्गी और पुनीत सिंह जग्गी – पर निवेशकों को गुमराह करने, पैसों का गलत इस्तेमाल करने, और झूठे दावे करने का आरोप लगाया गया है, खासकर उनकी इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) से जुड़ी गतिविधियों को लेकर.
कैसे खुला स्कैम का पिटारा?
9 अप्रैल को NSE (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज) ने पुणे के चाकन में Gensol की EV फैक्ट्री की जांच की. वहां कोई उत्पादन नहीं चल रहा था और सिर्फ 2-3 मजदूर दिखे. पिछले एक साल का बिजली का बिल भी बहुत कम था, जिससे साफ हुआ कि वहां कोई असली काम नहीं हो रहा.
28 जनवरी 2025 को कंपनी ने दावा किया था कि उसने 30,000 EVs के प्री-ऑर्डर लिए हैं, जो Bharat Mobility Global Expo 2025 में मिले थे. SEBI की जांच में पता चला कि ये सिर्फ कागज़ी समझौते (MoUs) थे, जिनमें ना दाम तय थे, ना भुगतान का तरीका और ना ही डिलीवरी की तारीख. 16 जनवरी को कंपनी ने एक और दावा किया कि उसने Refex Green Mobility के साथ Rs 315 करोड़ की डील की है EVs खरीदने के लिए, लेकिन यह डील मार्च में चुपचाप रद्द कर दी गई.
पैसों की हेराफेरी
25 फरवरी को Gensol ने दावा किया कि उसने अपनी अमेरिका की कंपनी Scorpius Trackers Inc को Rs 350 करोड़ में बेच दिया है. लेकिन यह कंपनी जुलाई 2024 में ही बनी थी और इतनी जल्दी इतनी बड़ी कीमत पर बेचे जाने पर SEBI को शक हुआ. Gensol ने Rs 977.75 करोड़ का लोन लिया था IREDA और PFC से, जिसमें से Rs 663.89 करोड़ का इस्तेमाल 6,400 EVs खरीदने के लिए होना था. लेकिन कंपनी ने सिर्फ 4,704 EVs ही खरीदे. बाकी पैसों – करीब Rs 262.13 करोड़ – का गलत इस्तेमाल किया गया, जैसे कि महंगे मकान खरीदना और परिवार से जुड़ी कंपनियों में निवेश.
SEBI का फैसला
15 अप्रैल को SEBI ने आदेश जारी किया, सेबी ने कहा अनमोल और पुनीत जग्गी अब Gensol में कोई बड़ी भूमिका नहीं निभा सकते. दोनों को शेयर बाजार से भी बैन कर दिया गया है जब तक आगे का आदेश ना आए. कंपनी का जो 1:10 स्टॉक स्प्लिट होने वाला था, उसे रोक दिया गया है. यह मामला दिखाता है कि कुछ कंपनियां झूठे वादों से निवेशकों को फँसाने की कोशिश कर रही हैं, खासकर EV जैसे नई और तेजी से बढ़ती इंडस्ट्री में, SEBI अब ऐसी कंपनियों पर कड़ी नजर रखेगी.
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