रुपये में ऐतिहासिक गिरावट, डॉलर के मुकाबले पहली बार 96.89 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा

रुपये की कमजोरी और महंगे कच्चे तेल का असर सीधे महंगाई पर पड़ सकता है. तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल, ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा की वस्तुओं की लागत बढ़ने का खतरा रहता है.

Last Modified:
Wednesday, 20 May, 2026
BWHindi

भारतीय रुपये में कमजोरी लगातार गहराती जा रही है. बुधवार को रुपया डॉलर के मुकाबले पहली बार 96 के स्तर से नीचे फिसल गया और शुरुआती कारोबार में 96.89 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया. कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और मजबूत अमेरिकी डॉलर ने रुपये पर दबाव बढ़ा दिया है. पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में आई तेज गिरावट ने बाजार और निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है.

लगातार पांचवें सत्र में कमजोर हुआ रुपया

मंगलवार को रुपया 96.53 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था, जबकि बुधवार को इसकी शुरुआत 96.86 के स्तर पर हुई. कारोबार के दौरान रुपया 96.89 तक फिसल गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है. पिछले पांच कारोबारी सत्रों में भारतीय मुद्रा करीब 1 रुपये तक कमजोर हो चुकी है, जिससे विदेशी मुद्रा बाजार में दबाव साफ दिखाई दे रहा है.

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का बड़ा असर

रुपये पर सबसे ज्यादा दबाव कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का पड़ रहा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है और बुधवार को यह करीब 111 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखा.

पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई को लेकर अनिश्चितता के कारण तेल बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित तेल से पूरा करता है, इसलिए तेल महंगा होने पर डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर पड़ता है.

स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज को लेकर बढ़ी चिंता

वैश्विक बाजारों में स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज को लेकर चिंता बढ़ गई है. यह दुनिया का बेहद अहम समुद्री मार्ग है, जहां से लगभग 20% वैश्विक तेल सप्लाई गुजरती है. अगर इस मार्ग में किसी भी तरह की बाधा आती है, तो वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है. इसी आशंका के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और बाजारों में अस्थिरता बनी हुई है.

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और मजबूत डॉलर का असर

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और वैश्विक अनिश्चितता के कारण निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं. इससे डॉलर मजबूत हो रहा है और उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव बढ़ रहा है. भारतीय रुपया भी इसी वैश्विक दबाव का सामना कर रहा है, जिसके चलते विदेशी निवेशकों की सतर्कता बढ़ी हुई है.

पहले भी उछल चुकी हैं तेल कीमतें

इससे पहले 30 अप्रैल को ब्रेंट क्रूड 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था, जबकि 9 मार्च को पश्चिम एशिया तनाव बढ़ने के बाद इसमें 27% तक की तेजी दर्ज की गई थी. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भू-राजनीतिक तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो तेल कीमतों और रुपये दोनों पर दबाव बना रह सकता है.

महंगाई बढ़ने का खतरा

रुपये की कमजोरी और महंगे कच्चे तेल का असर सीधे महंगाई पर पड़ सकता है. तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल, ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा की वस्तुओं की लागत बढ़ने का खतरा रहता है. अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो सरकार और Reserve Bank of India के सामने महंगाई नियंत्रित करने की चुनौती और बढ़ सकती है.
 


राज्यों के आर्थिक आंकड़ों में एकरूपता लाने की तैयारी, MoSPI ने शुरू की देशव्यापी SDP समीक्षा प्रक्रिया

यह वार्षिक समीक्षा प्रक्रिया राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के तहत नेशनल अकाउंट्स डिवीजन (NAD) द्वारा आयोजित की जा रही है.

Last Modified:
Wednesday, 20 May, 2026
BWHindia

केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के आर्थिक आंकड़ों को अधिक सटीक और तुलनात्मक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) 20 मई से 19 जून 2026 तक देशभर के राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ संयुक्त समीक्षा बैठकें करेगा. इस प्रक्रिया का उद्देश्य राज्य घरेलू उत्पाद (SDP) और सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) के आंकड़ों में अंतर को दूर करना और राष्ट्रीय आर्थिक डेटा में बेहतर तालमेल सुनिश्चित करना है.

चार चरणों में होंगी बैठकें

यह वार्षिक समीक्षा प्रक्रिया राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के तहत नेशनल अकाउंट्स डिवीजन (NAD) द्वारा आयोजित की जा रही है. नई दिल्ली स्थित खुर्शीद लाल भवन में चार चरणों में अलग-अलग राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ बैठकें होंगी. पहला चरण 20 से 22 मई तक चलेगा, जबकि अन्य बैठकें 3 से 5 जून, 10 से 12 जून और 17 से 19 जून के बीच आयोजित की जाएंगी.

GSDP आंकड़ों में सुधार पर रहेगा फोकस

इस वर्ष की चर्चा का मुख्य फोकस संशोधित आधार वर्ष 2022-23 के तहत 2022-23, 2023-24 और 2024-25 के चालू कीमतों पर आधारित GSDP आंकड़ों पर रहेगा. बैठकों में विभिन्न सेक्टरों के लिए नई पद्धतियों, संशोधित अनुमान तकनीकों और नए डेटा स्रोतों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी, ताकि राज्यों के आर्थिक उत्पादन का अधिक सटीक आकलन किया जा सके.

राज्यों और केंद्र के बीच होगा तालमेल

इन बैठकों में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी निदेशालय (DES) के अधिकारी शामिल होंगे. अंतिम चरण में वरिष्ठ अधिकारी अनुमान संशोधन और आंकड़ों के सामंजस्य को अंतिम रूप देंगे. सरकार का मानना है कि एकरूप और तुलनात्मक आर्थिक आंकड़े नीति निर्माण और वित्तीय योजना को अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेंगे.

वित्तीय योजना और नीति निर्माण में अहम भूमिका

MoSPI के अनुसार, इस प्रक्रिया से तैयार होने वाले तुलनात्मक SDP आंकड़ों का इस्तेमाल वित्त आयोग, वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग और भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) जैसी संस्थाएं करती हैं. इसके अलावा यह डेटा अंतर-सरकारी वित्तीय हस्तांतरण, सार्वजनिक खर्च के मूल्यांकन और व्यापक आर्थिक योजना तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

डेटा पारदर्शिता पर सरकार का जोर

सरकार लगातार आर्थिक आंकड़ों की सटीकता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाने पर जोर दे रही है. बदलते आर्थिक ढांचे और नई मापन प्रणालियों के बीच यह वार्षिक समीक्षा प्रक्रिया राष्ट्रीय खातों में एकरूपता बनाए रखने के लिए अहम मानी जा रही है.
 

TAGS bw-hindi

भारत-डेनमार्क संबंधों को नई रफ्तार, ग्रीन एनर्जी और AI पर बढ़ेगा सहयोग

यह साझेदारी भारत और डेनमार्क के संबंधों का अहम आधार बन चुकी है, जिसमें रिन्यूएबल एनर्जी, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास पर खास फोकस किया गया है.

Last Modified:
Wednesday, 20 May, 2026
BWHindia

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नॉर्डिक समिट के दौरान नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में डेनमार्क की कार्यवाहक प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन के साथ द्विपक्षीय बैठक की. इस दौरान दोनों देशों ने भारत-डेनमार्क ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को और मजबूत बनाने पर सहमति जताई. बातचीत में ग्रीन ट्रांजिशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रक्षा सहयोग, स्टार्टअप, टेक्नोलॉजी और क्लीन एनर्जी जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई.

ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को मिला बढ़ावा

बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने 2020 में शुरू हुई भारत-डेनमार्क ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप की प्रगति की समीक्षा की. दोनों पक्षों ने सस्टेनेबिलिटी, क्लाइमेट एक्शन और ग्रीन एनर्जी सेक्टर में बढ़ते सहयोग पर संतोष जताया. यह साझेदारी भारत और डेनमार्क के संबंधों का अहम आधार बन चुकी है, जिसमें रिन्यूएबल एनर्जी, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास पर खास फोकस किया गया है.

AI, टेक्नोलॉजी और डिफेंस सेक्टर पर जोर

दोनों देशों ने उभरती तकनीकों, एडवांस कम्युनिकेशन, रिसर्च कोलैबोरेशन, स्टार्टअप इकोसिस्टम और अकादमिक एक्सचेंज को और मजबूत करने पर सहमति जताई. इसके अलावा रक्षा सहयोग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में भी साझेदारी बढ़ाने पर चर्चा हुई.

डेनिश कंपनियों को GIFT City में निवेश का न्योता

प्रधानमंत्री मोदी ने डेनमार्क की कंपनियों को भारत में निवेश बढ़ाने और गुजरात स्थित गिफ्ट सिटी में अवसर तलाशने का आमंत्रण दिया. उन्होंने कहा कि भारत तेजी से ग्रीन इकोनॉमी की दिशा में आगे बढ़ रहा है और देश टिकाऊ एवं पर्यावरण-अनुकूल समाधानों के लिए डेनमार्क की तकनीक और विशेषज्ञता का स्वागत करने को तैयार है.

नदी सफाई और जल प्रबंधन पर भी चर्चा

बैठक में जल प्रबंधन और नदी सफाई तकनीकों पर भी विशेष चर्चा हुई. दोनों नेताओं ने वाराणसी में चल रही “स्मार्ट लेबोरेटरी ऑन क्लीन रिवर्स” पहल की सराहना की. यह परियोजना भारत सरकार, डेनमार्क सरकार और इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (बनारस हिंदू विश्वविद्यालय) के सहयोग से चलाई जा रही है. इसका उद्देश्य नई जल और नदी सफाई तकनीकों का विकास करना है.

वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी हुई बातचीत

दोनों नेताओं ने वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी विचार साझा किए. प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में डेनमार्क की गैर-स्थायी सदस्यता के लिए शुभकामनाएं भी दीं.

भारत-डेनमार्क संबंधों को नई दिशा

ओस्लो में हुई यह बैठक इस बात का संकेत मानी जा रही है कि भारत और डेनमार्क भविष्य में ग्रीन टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, क्लाइमेट एक्शन और रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं.
 

TAGS bw-hindi

भारतीय रेलवे का बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान, वैष्णो देवी कटड़ा रूट समेत 3 ₹2193 करोड़ के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी

रेलवे ने जम्मू-श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा रेल सेक्शन के लिए ₹238 करोड़ के सुरक्षा पैकेज को मंजूरी दी है. इस प्रोजेक्ट के तहत भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों की सुरक्षा, टनलों के पुनर्वास, पानी के रिसाव को रोकने और संवेदनशील पुलों की मजबूती पर काम किया जाएगा.

Last Modified:
Wednesday, 20 May, 2026
BWHindia

भारतीय रेलवे ने देश के रेल नेटवर्क को अधिक सुरक्षित, तेज और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. दरअसल, रेलवे ने ₹2193 करोड़ की लागत वाली तीन अहम परियोजनाओं को मंजूरी दी है. इनमें जम्मू-श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा रेल रूट की सुरक्षा मजबूत करने, हावड़ा-दिल्ली कॉरिडोर की क्षमता बढ़ाने और चेन्नई उपनगरीय नेटवर्क में भीड़ कम करने से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं. रेलवे का मानना है कि इन योजनाओं से यात्रियों की सुविधा बढ़ने के साथ माल ढुलाई और औद्योगिक कनेक्टिविटी को भी मजबूती मिलेगी.

वैष्णो देवी कटड़ा रूट को सुरक्षित बनाने पर फोकस

रेलवे ने जम्मू-श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा रेल सेक्शन के लिए ₹238 करोड़ के सुरक्षा पैकेज को मंजूरी दी है. इस प्रोजेक्ट के तहत भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों की सुरक्षा, टनलों के पुनर्वास, पानी के रिसाव को रोकने और संवेदनशील पुलों की मजबूती पर काम किया जाएगा.

कटड़ा रूट देश के सबसे चुनौतीपूर्ण पहाड़ी रेल मार्गों में गिना जाता है, जहां खराब मौसम और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां अक्सर परिचालन में बाधा बनती हैं. हर साल लाखों श्रद्धालु इस मार्ग से वैष्णो देवी धाम पहुंचते हैं, इसलिए इस रूट को और सुरक्षित बनाना रेलवे की प्राथमिकता माना जा रहा है.

हावड़ा-दिल्ली कॉरिडोर को मिलेगी नई रफ्तार

रेलवे ने बिहार के क्यूल-झाझा सेक्शन पर तीसरी रेल लाइन बिछाने के लिए ₹962 करोड़ की परियोजना को भी मंजूरी दी है. यह नई लाइन करीब 54 किलोमीटर लंबी होगी. फिलहाल इस रूट की डबल लाइन अपनी क्षमता से अधिक ट्रैफिक संभाल रही है, जिससे ट्रेनों की लेटलतीफी बढ़ रही है. तीसरी लाइन बनने के बाद यात्री और मालगाड़ियों दोनों का संचालन अधिक सुचारु हो सकेगा. यह कॉरिडोर कोलकाता और हल्दिया बंदरगाहों को उत्तर भारत तथा नेपाल से जोड़ने वाला अहम मार्ग माना जाता है. कई थर्मल पावर प्लांट के लिए कोयला सप्लाई भी इसी रूट से होती है.

चेन्नई सबअर्बन नेटवर्क में कम होगी भीड़

तीसरी बड़ी परियोजना तमिलनाडु के अरक्कोनम-चेंगलपट्टू सेक्शन से जुड़ी है. रेलवे इस 68 किलोमीटर लंबे सिंगल लाइन कॉरिडोर को डबल लाइन में बदलेगा, जिस पर करीब ₹993 करोड़ खर्च किए जाएंगे. यह रूट चेन्नई उपनगरीय नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां मौजूदा समय में भारी ट्रैफिक दबाव है. डबल लाइन बनने से लोकल ट्रेनों की संख्या बढ़ेगी और यात्रियों का यात्रा समय कम होगा.

यह कॉरिडोर महिंद्रा वर्ल्ड सिटी, श्रीपेरंबुदूर जैसे बड़े औद्योगिक क्षेत्रों को जोड़ता है. प्रस्तावित परंदूर एयरपोर्ट के लिए भी यह रेल नेटवर्क महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

माल ढुलाई और उद्योगों को मिलेगा फायदा

रेल मंत्रालय का कहना है कि इन परियोजनाओं से सीमेंट, ऑटोमोबाइल, खाद्यान्न, लोहा और इस्पात जैसे सेक्टर्स की माल ढुलाई में तेजी आएगी. बेहतर रेल कनेक्टिविटी से लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी और उद्योगों को सप्लाई चेन मजबूत करने में मदद मिलेगी. रेल मंत्री अश्विनी वैषणव के मुताबिक ये प्रोजेक्ट देश के रेल नेटवर्क को अधिक भरोसेमंद, सुरक्षित और भविष्य के ट्रैफिक के लिए तैयार बनाने की दिशा में अहम कदम हैं.

रेलवे का इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार जारी

भारतीय रेलवे पिछले कुछ वर्षों में हाई-स्पीड कॉरिडोर, नई लाइनों, स्टेशन आधुनिकीकरण और सुरक्षा परियोजनाओं पर तेजी से निवेश बढ़ा रहा है. सरकार का फोकस ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर पर है, जो यात्रियों की सुविधा बढ़ाने के साथ देश की आर्थिक और औद्योगिक गतिविधियों को भी नई गति दे सके.
 


सेंसेक्स-निफ्टी पर दबाव बरकरार, आज ग्लोबल संकेत और कंपनियों के नतीजों पर रहेगी नजर

मंगलवार को सेंसेक्स 114.19 अंक यानी 0.15% की गिरावट के साथ 75,200.85 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 31.95 अंक यानी 0.14% गिरकर 23,618 के स्तर पर आ गया.

Last Modified:
Wednesday, 20 May, 2026
BWHindia

घरेलू शेयर बाजार में 19 मई को पूरे दिन तेजी का माहौल बना रहा, लेकिन कारोबार के आखिरी घंटे में अचानक आई बिकवाली ने निवेशकों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया. बैंकिंग और मेटल शेयरों में दबाव, रुपये की रिकॉर्ड कमजोरी और वैश्विक तनावों ने बाजार का मूड बिगाड़ दिया. अब 20 मई को निवेशकों की नजर ग्लोबल मार्केट संकेतों, कच्चे तेल की चाल और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी, जो बाजार की अगली दिशा तय कर सकते हैं. 

शुरुआती तेजी के बाद बाजार में पलटा रुख

कल बाजार की शुरुआत सकारात्मक ग्लोबल संकेतों के बीच मजबूत रही. बीएसई सेंसेक्स में कारोबार के दौरान 400 अंक से अधिक की तेजी देखने को मिली, जबकि एनएसई निफ्टी 23,700 के स्तर को पार कर गया था. हालांकि अंतिम घंटे में बिकवाली हावी हो गई और पूरा बढ़त वाला बाजार गिरावट में बदल गया. बाजार बंद होने पर सेंसेक्स 114.19 अंक यानी 0.15% की गिरावट के साथ 75,200.85 पर बंद हुआ. वहीं निफ्टी 31.95 अंक यानी 0.14% गिरकर 23,618 के स्तर पर आ गया. सेंसेक्स के 30 में से 18 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ गया.

किन शेयरों में रही सबसे ज्यादा हलचल

बैंकिंग और ऑटो सेक्टर के कई दिग्गज शेयरों में गिरावट देखने को मिली.  कोटक महिंद्रा बैंक में 2.31% की सबसे बड़ी गिरावट, टाइटन, अल्ट्राटेक सीमेंट, भारती एयरटेल, सन फार्मा, अडानी पोर्ट्स, इंडिगो और हिंदुस्तान यूनिलीवर में भी कमजोरी दिखी. दूसरी ओर आईटी सेक्टर ने बाजार को कुछ सहारा दिया,  इन्फोसिस, एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा, टीसीएस और इटरनल में 2% से अधिक तेजी दिखी.

कच्चे तेल में गिरावट का असर

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली. ब्रेंट क्रूड करीब 1.89% गिरकर 110 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. मध्य पूर्व में तनाव कम होने की उम्मीदों और अमेरिका के बयान के बाद तेल बाजार में नरमी देखी गई.

आज इन शेयरों पर रखें नजर
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आज यानी 20 मई 2026 को शेयर बाजार में वैश्विक कमजोर संकेतों के बीच दबाव देखने को मिल सकता है और निवेशकों की नजर कई प्रमुख शेयरों पर रहेगी. महंगाई और भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से ग्लोबल मार्केट सेंटीमेंट कमजोर बना हुआ है. अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण एशियाई बाजारों में गिरावट दर्ज की गई, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है. ऐसे माहौल में BPCL, कर्नाटक बैंक, हिंदाल्को, मैनकाइंड फार्मा और JSW एनर्जी जैसे शेयर निवेशकों के फोकस में रहेंगे.

BPCL ने मार्च 2026 तिमाही में ₹3,191 करोड़ का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया, जो सालाना आधार पर 1% कम रहा, जबकि कंपनी का रेवेन्यू 6.3% बढ़कर ₹1.34 लाख करोड़ पहुंच गया. वहीं कर्नाटक बैंक का मुनाफा 61.7% बढ़कर ₹408 करोड़ हो गया और नेट इंटरेस्ट इनकम में भी 8% की बढ़ोतरी दर्ज की गई.

हिंदाल्को की सहयोगी कंपनी नोवेलिस को अमेरिकी प्लांट में आग लगने के कारण 84 मिलियन डॉलर का घाटा हुआ, हालांकि कंपनी की बिक्री बढ़ी है. दूसरी ओर मैनकाइंड फार्मा का शुद्ध मुनाफा 31.7% बढ़कर ₹554 करोड़ पहुंच गया और कंपनी का रेवेन्यू भी मजबूत रहा.

इसके अलावा JSW एनर्जी ने Toshiba JSW Power Systems में अतिरिक्त हिस्सेदारी खरीदने के लिए ₹150 करोड़ का समझौता किया है. कंपनी का कहना है कि इससे थर्मल पावर कारोबार और सप्लाई चेन को मजबूती मिलेगी. वहीं गोदावरी पावर, ऑर्कला इंडिया, PTC इंडिया और सुला वाइनयार्ड्स से जुड़ी खबरें भी बाजार में हलचल पैदा कर सकती हैं.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


तेल संकट और असाधारण खर्चों का असर, BPCL का मुनाफा 58% घटा

BPCL का शुद्ध लाभ मार्च तिमाही में ₹3,191 करोड़ रहा, जो पिछली तिमाही के मुकाबले करीब 58% कम है.

Last Modified:
Wednesday, 20 May, 2026
BWHindia

सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के मार्च 2026 तिमाही नतीजे कमजोर रहे. कंपनी का शुद्ध मुनाफा तिमाही-दर-तिमाही आधार पर करीब 57.7% गिरकर ₹3,191 करोड़ रह गया. तेल बाजार में उतार-चढ़ाव, असाधारण खर्चों में बढ़ोतरी और LPG पर लगातार नुकसान ने कंपनी की कमाई पर बड़ा दबाव डाला. हालांकि सालाना आधार पर मुनाफे में मामूली गिरावट दर्ज हुई.

तिमाही मुनाफे में बड़ी गिरावट

BPCL का शुद्ध लाभ मार्च तिमाही में ₹3,191 करोड़ रहा, जो पिछली तिमाही के मुकाबले करीब 58% कम है. सालाना आधार पर भी कंपनी के मुनाफे में लगभग 1% की हल्की गिरावट दर्ज की गई है. पिछले साल इसी अवधि में कंपनी का मुनाफा ₹3,214 करोड़ था, जो अब घटकर लगभग स्थिर स्तर पर आ गया है.

असाधारण खर्चों ने बढ़ाया दबाव

मुनाफे में तेज गिरावट की मुख्य वजह असाधारण खर्चों में बढ़ोतरी रही. यह नुकसान BPCL की अपस्ट्रीम सहायक कंपनी भारत पेट्रो रिसोर्सेज लिमिटेड से जुड़े इम्पेयरमेंट लॉस के कारण हुआ. इसी वजह से कंपनी का तिमाही प्रदर्शन बाजार उम्मीदों से कमजोर रहा.

रेवेन्यू में बढ़ोतरी, लेकिन मार्जिन दबाव में

रिपोर्टिंग तिमाही में BPCL का ऑपरेशनल रेवेन्यू बढ़कर ₹1,34,896 करोड़ हो गया, जो पिछले साल ₹1,26,864 करोड़ था. हालांकि तिमाही-दर-तिमाही आधार पर इसमें 1.2% की गिरावट देखी गई. EBITDA भी 13.8% घटकर ₹10,061 करोड़ पर आ गया, जबकि मार्जिन 100 बेसिस प्वाइंट घटकर 8.5% रह गया.

रिफाइनिंग और बिक्री का प्रदर्शन

कंपनी की रिफाइनरी थ्रूपुट 10.40 MMT रही, जो पिछले साल 10.58 MMT से कम है. घरेलू बिक्री में हालांकि 3.28% की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 13.86 MMT पर पहुंच गई. विश्लेषकों का अनुमान था कि मजबूत रिफाइनिंग मार्जिन से कंपनियों को फायदा होगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका.

LPG सब्सिडी से बढ़ा घाटा

BPCL ने बताया कि घरेलू LPG सिलेंडरों की बिक्री पर कंपनी को लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा है. क्योंकि बिक्री मूल्य और वास्तविक लागत के बीच अंतर बना हुआ है, जिससे मार्जिन पर दबाव बढ़ रहा है.

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और ग्लोबल असर

जनवरी-मार्च अवधि में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में लगभग 94% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई. मध्य पूर्व में तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष के चलते वैश्विक सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ी. होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ी आपूर्ति चिंताओं ने भी तेल बाजार को प्रभावित किया.

सालाना आधार पर मजबूत प्रदर्शन

कमजोर तिमाही के बावजूद BPCL का पूरे वित्त वर्ष FY26 में प्रदर्शन बेहतर रहा. कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹5.22 लाख करोड़ रहा, जो FY25 के ₹5 लाख करोड़ से अधिक है. नेट प्रॉफिट भी बढ़कर ₹23,303 करोड़ पहुंच गया, जो पिछले साल ₹13,275 करोड़ था.

तिमाही आधार पर BPCL के नतीजे कमजोर रहे, लेकिन सालाना स्तर पर कंपनी ने मजबूत ग्रोथ दिखाई. तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव, LPG सब्सिडी दबाव और असाधारण नुकसान ने इस तिमाही के प्रदर्शन को प्रभावित किया, जबकि रिफाइनिंग और डिमांड स्थिरता ने कुछ राहत दी.
 


आखिर क्यों बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, SBI रिपोर्ट में सामने आई बड़ी वजह

देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 4 रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा किया गया है. इससे ट्रांसपोर्टेशन लागत बढ़ने और रोजमर्रा के सामान महंगे होने की आशंका जताई जा रही है.

Last Modified:
Tuesday, 19 May, 2026
BWHindia

देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है. पांच दिनों में दूसरी बार ईंधन महंगा होने से महंगाई और घरेलू बजट पर असर की आशंका बढ़ गई है. हालांकि, SBI की ताजा रिपोर्ट बताती है कि यह फैसला सिर्फ कीमत बढ़ाने का नहीं, बल्कि तेल कंपनियों को भारी घाटे से बचाने की मजबूरी भी था. रिपोर्ट के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगे कच्चे तेल और स्थिर खुदरा कीमतों के कारण तेल कंपनियां रोजाना करीब 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान झेल रही थीं.

पांच दिन में दूसरी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम

देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 4 रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा किया गया है. इससे ट्रांसपोर्टेशन लागत बढ़ने और रोजमर्रा के सामान महंगे होने की आशंका जताई जा रही है. आम उपभोक्ताओं पर इसका सीधा असर पड़ेगा, क्योंकि ईंधन की कीमतें लगभग हर सेक्टर की लागत से जुड़ी होती हैं.

SBI रिपोर्ट में सामने आई असली वजह

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की ‘इकोरैप’ रिपोर्ट के मुताबिक तेल कंपनियों को लंबे समय से भारी वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ रहा था. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई थीं, जबकि घरेलू खुदरा कीमतों में लंबे समय तक बदलाव नहीं किया गया.

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस वजह से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को हर दिन करीब 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा था. सालाना आधार पर यह घाटा करीब 3.6 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. ऐसे में कीमतों में बढ़ोतरी कंपनियों के नुकसान को कुछ हद तक कम करने के लिए जरूरी मानी गई.

महंगाई पर पड़ेगा असर

रिपोर्ट के मुताबिक पेट्रोल-डीजल महंगा होने से मई और जून 2026 में खुदरा महंगाई दर यानी CPI में 0.15 से 0.20 फीसदी तक का उछाल आ सकता है. इसी के चलते वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 4.7 फीसदी कर दिया गया है.

हालांकि रिपोर्ट यह भी कहती है कि शुरुआती दौर में लोग ईंधन की खपत कम करते हैं, लेकिन कुछ समय बाद मांग दोबारा सामान्य स्तर पर लौट आती है. यानी लंबे समय में बिक्री पर बहुत बड़ा असर देखने को नहीं मिलता.

3 रुपये की बढ़ोतरी से कितनी राहत?

SBI के मुताबिक हालिया कीमत बढ़ोतरी से तेल कंपनियों को करीब 52,700 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राहत मिल सकती है. हालांकि यह राशि उनके अनुमानित कुल नुकसान का केवल 15 फीसदी हिस्सा ही कवर कर पाएगी, यानी मौजूदा बढ़ोतरी से कंपनियों पर दबाव कुछ कम जरूर होगा, लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं होगा.

टैक्स घटाने पर सरकार को होगा भारी नुकसान

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अगर सरकार जनता को राहत देने के लिए एक्साइज ड्यूटी में बड़ी कटौती करती है, तो इसका सीधा असर सरकारी खजाने पर पड़ेगा. फिलहाल पेट्रोल पर 11.9 फीसदी और डीजल पर 7.8 फीसदी एक्साइज ड्यूटी लगती है. अगर इसे पूरी तरह खत्म कर दिया जाए, तो सरकार को करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो सकता है. इससे राजकोषीय घाटा GDP के 0.5 फीसदी तक बढ़ने का खतरा पैदा हो सकता है.

राज्यों की कमाई पर भी पड़ेगा असर

केंद्र सरकार की टैक्स नीति का असर राज्यों की कमाई पर भी पड़ता है. SBI के अनुमान के अनुसार, अगर केंद्र एक्साइज ड्यूटी शून्य कर देता है, तो राज्यों को करीब 80,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है. हालांकि बढ़ी हुई ईंधन कीमतों से राज्यों को वैट के जरिए अतिरिक्त आय भी मिलेगी. इसके बावजूद राज्यों का कुल शुद्ध नुकसान करीब 50,000 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है.

आम आदमी के लिए क्या मायने?

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है. हालांकि सरकार और तेल कंपनियों के सामने चुनौती यह है कि एक तरफ उपभोक्ताओं को राहत दी जाए और दूसरी तरफ कंपनियों तथा सरकारी वित्तीय संतुलन को भी बनाए रखा जाए.
 

TAGS bw-hindi

युवा निवेशकों के लिए बड़ा दांव: Trackk ने जुटाए 3.7 मिलियन डॉलर, Lightspeed ने किया निवेश

कंपनी का कहना है कि नई फंडिंग के जरिए वह अपनी ब्रोकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगी और युवा निवेशकों के लिए नए फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स तैयार करेगी.

Last Modified:
Tuesday, 19 May, 2026
BWHindia

भारत के युवा निवेशकों को ध्यान में रखकर बनाई गई इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म ट्रैक (Trackk) ने सीड फंडिंग राउंड में 3.7 मिलियन डॉलर जुटाए हैं. इस फंडिंग राउंड की अगुवाई Lightspeed ने की, जबकि Info Edge Ventures और कई चर्चित एंजेल निवेशकों ने भी इसमें हिस्सा लिया. कंपनी इस पूंजी का इस्तेमाल अपनी ब्रोकिंग टेक्नोलॉजी मजबूत करने, नए प्रोडक्ट्स विकसित करने और यूजर बेस बढ़ाने में करेगी.

Lightspeed और बड़े एंजेल निवेशकों का मिला साथ

मुंबई और बेंगलुरुस की स्टार्टअप कंपनी Trackk में Lightspeed के अलावा Info Edge Ventures ने भी निवेश किया है. वहीं एंजेल निवेशकों में गौरव मुंजाल, रोमन सैनी, तनमय भट्ट, वरुण मय्या और गौरव कपूर जैसे नाम शामिल हैं.

कंपनी का कहना है कि नई फंडिंग के जरिए वह अपनी ब्रोकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगी और युवा निवेशकों के लिए नए फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स तैयार करेगी. इसके अलावा ग्राहक ऑनबोर्डिंग, यूजर एक्विजिशन और टीम विस्तार पर भी फोकस किया जाएगा.

Gen Z निवेशकों के लिए बनाया गया प्लेटफॉर्म

Trackk की स्थापना वेदांत गुप्ते, सिद्धार्थ ठक्कर और आर्यन जैन ने की है. यह प्लेटफॉर्म खासतौर पर Gen Z यानी युवा निवेशकों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. कंपनी AI आधारित स्टॉक डिस्कवरी, पर्सनलाइज्ड यूजर एक्सपीरियंस और आसान निवेश टूल्स के जरिए पहली बार निवेश करने वालों के लिए निवेश प्रक्रिया को सरल बनाने की कोशिश कर रही है.

“युवा निवेशकों की जरूरतें बदल चुकी हैं”

Trackk के को-फाउंडर और CEO वेदांत गुप्ते ने कहा कि आज के युवा निवेशक पहले की पीढ़ियों से अलग तरीके से वित्तीय जानकारी हासिल करते हैं. अब निवेश से जुड़ी जानकारी डिजिटल कम्युनिटी, क्रिएटर्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए तेजी से पहुंच रही है, लेकिन निवेश करने का अनुभव अब भी नए यूजर्स के लिए काफी जटिल है. उन्होंने कहा कि Trackk का मकसद युवा भारतीयों के लिए निवेश को आसान, सहज और ज्यादा सुलभ बनाना है.

“नई पीढ़ी के निवेशकों के लिए अलग सोच जरूरी”

Lightspeed के निवेशक रोमित मेहता ने कहा कि नई पीढ़ी का फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स के साथ रिश्ता पहले की तुलना में पूरी तरह बदल चुका है. Trackk की टीम युवा यूजर्स के व्यवहार को अच्छी तरह समझती है और उसी के अनुरूप प्रोडक्ट तैयार कर रही है. वहीं, Info Edge Ventures के पार्टनर चिन्मय शर्मा ने कहा कि युवा भारतीयों को ऐसे निवेश प्लेटफॉर्म्स की जरूरत है, जो उन्हें सही वित्तीय फैसले लेने और लंबे समय में संपत्ति बनाने में मदद करें.

Gen Z यूजर्स में तेजी से बढ़ रही लोकप्रियता

कंपनी के मुताबिक उसके करीब 90 फीसदी यूजर्स Gen Z कैटेगरी से आते हैं और प्लेटफॉर्म पर औसत यूजर की उम्र 20 से 24 साल के बीच है. Trackk भविष्य में मल्टी-एसेट फाइनेंशियल प्लेटफॉर्म बनाने की दिशा में काम कर रही है, जिसमें निवेश, वेल्थ क्रिएशन और अन्य वित्तीय सेवाएं शामिल होंगी.

भारत के सबसे युवा रजिस्टर्ड ब्रोकर में शामिल

अक्टूबर 2025 में Trackk भारत के सबसे युवा रजिस्टर्ड ब्रोकर्स में शामिल बनी थी. उस दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO सुंदररमन आर ने कंपनी को सम्मानित भी किया था.
 


आइसक्रीम बाजार में अनंत अंबानी की एंट्री, जानिए भारत में कितने करोड़ का है ये कारोबार

एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत का आइसक्रीम बाजार 2026 से 2034 के बीच करीब 16 फीसदी की CAGR से बढ़ सकता है.

Last Modified:
Tuesday, 19 May, 2026
BWHindia

भारत में बढ़ती गर्मी, बदलती लाइफस्टाइल और क्विक-कॉमर्स के तेजी से विस्तार ने आइसक्रीम कारोबार को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है. देश का आइसक्रीम बाजार अब सिर्फ गर्मियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह रोजमर्रा की लाइफस्टाइल का हिस्सा बनता जा रहा है. इसी तेजी से बढ़ते बाजार में अब अनंत अंबानी की एंट्री ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है. अनुमान है कि आने वाले कुछ वर्षों में भारत का आइसक्रीम कारोबार 1 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर सकता है. दरअसल, अनंत अंबानी ने हाल ही में अपना आइसक्रीम ब्रांड वंतारा क्रीमैरी (Vantara Creamery)  लॉन्च किया है, जिससे इस कारोबार में तेजी की उम्मीद जताई जा रही है. 

5 साल में दोगुना हुआ आइसक्रीम बाजार

देश में आइसक्रीम इंडस्ट्री ने पिछले पांच वर्षों में जबरदस्त ग्रोथ दर्ज की है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2020 में भारत का आइसक्रीम बाजार करीब 14,800 करोड़ रुपये का था, जो 2025 में बढ़कर 31,276 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. यानी महज पांच साल में यह कारोबार दोगुने से ज्यादा हो गया. विशेषज्ञों का मानना है कि अगले पांच वर्षों में भी यही रफ्तार बनी रह सकती है. अनुमान है कि 2030 तक भारत का आइसक्रीम बाजार 65,780 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा.

2034 तक 1.19 लाख करोड़ रुपये का होगा कारोबार

रिपोर्ट के अनुसार, भारत का आइसक्रीम बाजार 2026 से 2034 के बीच करीब 16 फीसदी की CAGR से बढ़ सकता है. इसी रफ्तार से आगे बढ़ते हुए 2034 तक यह इंडस्ट्री 1.19 लाख करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंचने का अनुमान है. इस तेज ग्रोथ के पीछे कई बड़े कारण हैं. इनमें बढ़ती डिस्पोजेबल इनकम, तेजी से हो रहा शहरीकरण, क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स का विस्तार, टियर-2 और टियर-3 शहरों में बढ़ती मांग और मजबूत कोल्ड-चेन इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं.

अब सिर्फ मौसमी नहीं रहा आइसक्रीम कारोबार

पहले आइसक्रीम को सिर्फ गर्मियों का प्रोडक्ट माना जाता था, लेकिन अब यह पूरे साल पसंद की जाने वाली फूड कैटेगरी बन चुकी है. ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स और क्विक-कॉमर्स कंपनियों ने इसकी पहुंच को काफी आसान बना दिया है. किराना दुकानों और लोकल स्टोर्स पर फ्रीजर नेटवर्क के विस्तार ने भी आइसक्रीम कंपनियों की बिक्री बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है.

इंपल्स आइसक्रीम का सबसे ज्यादा दबदबा

बाजार में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी इंपल्स आइसक्रीम सेगमेंट की है. 2025 में इसकी हिस्सेदारी करीब 59.62 फीसदी रही. चलते-फिरते आइसक्रीम खाने का बढ़ता ट्रेंड और हर जगह इसकी आसान उपलब्धता इसकी सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही है.

फ्लेवर की बात करें तो चॉकलेट फ्लेवर सबसे ज्यादा पसंद किया जा रहा है. कुल बाजार में इसकी हिस्सेदारी 31.05 फीसदी है. इसके बाद वनीला 28.42 फीसदी और फ्रूट फ्लेवर 24.63 फीसदी हिस्सेदारी के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं.

महाराष्ट्र सबसे बड़ा बाजार

राज्यों की बात करें तो महाराष्ट्र देश का सबसे बड़ा आइसक्रीम बाजार बनकर उभरा है. कुल कारोबार में इसकी हिस्सेदारी करीब 12 फीसदी है. मुंबई और पुणे जैसे बड़े शहरों में प्रीमियम और ब्रांडेड आइसक्रीम की मजबूत मांग इसकी प्रमुख वजह मानी जा रही है. इसके अलावा महाराष्ट्र का मजबूत कोल्ड-चेन नेटवर्क भी इस सेक्टर की ग्रोथ को बढ़ावा दे रहा है.

PLI स्कीम से मिल रही सरकारी मदद

भारत सरकार भी फूड प्रोसेसिंग सेक्टर को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है. PLI स्कीम के तहत फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री के आधुनिकीकरण के लिए करीब 10,900 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बना हुआ है. 2023-24 में देश में करीब 236.35 मिलियन मीट्रिक टन दूध का उत्पादन हुआ. यही मजबूत डेयरी बेस आइसक्रीम उद्योग को सस्ता और स्थिर कच्चा माल उपलब्ध कराने में मदद कर रहा है.

अनंत अंबानी की एंट्री से बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा

मुकेश अंबानी के परिवार की ओर से लॉन्च की गई वंतारा क्रीमैरी (Vantara Creamery) अब इस तेजी से बढ़ते बाजार में नई चुनौती पेश कर सकती है. कंपनी ने 17 फ्लेवर के साथ अपनी शुरुआत की है. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जिस तरह रिलायंस ने कैंपा के जरिए सॉफ्ट ड्रिंक मार्केट में बड़ी कंपनियों को चुनौती दी, उसी तरह आइसक्रीम कारोबार में भी क्वालिटी वॉल्स, क्रीमबेल और बास्किन रॉबिंस जैसी कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है. आने वाले वर्षों में भारत का आइसक्रीम बाजार सिर्फ बड़ा ही नहीं होगा, बल्कि इसमें प्रतिस्पर्धा भी पहले से कहीं ज्यादा तेज दिखाई दे सकती है.


पैरामोटर डिजिटल टेक्नोलॉजी का IPO की ओर बड़ा कदम, सेबी के पास जमा किए दस्तावेज

RewardOn प्लेटफॉर्म कंपनियों को डिजिटल रिवॉर्ड प्रोग्राम डिजाइन, मैनेज और वितरित करने की सुविधा देता है.

Last Modified:
Tuesday, 19 May, 2026
BWHindia

भारत की फिनटेक और एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी कंपनी पैरामोटर डिजिटल टेक्नोलॉजी (Paramotor Digital Technology Limited) ने प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) लाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (Sebi) के पास गोपनीय तरीके से ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल किया है. कंपनी की ओर से जारी सार्वजनिक सूचना में यह जानकारी दी गई.

2016 में हुई थी स्थापना

साल 2016 में स्थापित पैरामोटर डिजिटल टेक्नोलॉजी उपभोक्ताओं और कारोबारों के लिए फिनटेक तथा एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी सेवाएं उपलब्ध कराती है. कंपनी का कारोबार कंज्यूमर स्पेंड मैनेजमेंट, रिवॉर्ड और लॉयल्टी सॉल्यूशंस, डिजिटल गिफ्टिंग और एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी सेवाओं तक फैला हुआ है.

कंपनी का नेतृत्व एग्जीक्यूटिव चेयरपर्सन सोनिया अशर और मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल आनंद कर रहे हैं. दोनों के पास बैंकिंग, पेमेंट्स और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र का व्यापक अनुभव है.

कई डिजिटल प्लेटफॉर्म का संचालन

कंपनी के पोर्टफोलियो में SpendPro, RewardOn, yayyy.shop और DevStack जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं. SpendPro एक प्रीपेड कार्ड आधारित स्पेंड मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म है, जबकि RewardOn एंटरप्राइज रिवॉर्ड और लॉयल्टी मैनेजमेंट सॉल्यूशन उपलब्ध कराता है. वहीं yayyy.shop सीधे उपभोक्ताओं के लिए डिजिटल गिफ्टिंग मार्केटप्लेस के रूप में काम करता है. DevStack कंपनी की एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट सेवाओं से जुड़ी इकाई है.

डिजिटल अपनाने के बढ़ते ट्रेंड से फायदा मिलने की उम्मीद

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी का एसेट-लाइट और टेक्नोलॉजी आधारित बिजनेस मॉडल भारत में तेजी से बढ़ रही डिजिटल स्वीकार्यता का लाभ उठा सकता है. खासतौर पर कंज्यूमर स्पेंडिंग, एंटरप्राइज एंगेजमेंट और बिजनेस प्रोसेस डिजिटाइजेशन में बढ़ती मांग कंपनी के लिए अवसर पैदा कर सकती है. कंपनी का yayyy.shop प्लेटफॉर्म ग्राहकों को विभिन्न श्रेणियों में प्रीपेड कार्ड और ब्रांडेड गिफ्ट कार्ड की सुविधा देता है, जिससे डिजिटल कॉमर्स क्षेत्र में उसकी मौजूदगी मजबूत हुई है.

एंटरप्राइज ग्राहकों पर भी फोकस

RewardOn प्लेटफॉर्म कंपनियों को डिजिटल रिवॉर्ड प्रोग्राम डिजाइन, मैनेज और वितरित करने की सुविधा देता है. इसके जरिए कंपनियां कर्मचारी जुड़ाव, ग्राहक लॉयल्टी और चैनल इंसेंटिव कार्यक्रमों को अपनी जरूरत के अनुसार कस्टमाइज कर सकती हैं.

वहीं DevStack कारोबारों के लिए कस्टमाइज्ड और स्केलेबल डिजिटल सॉल्यूशंस विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करता है, जिससे कंपनियों को बिजनेस-क्रिटिकल सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन तैयार करने में मदद मिलती है.

निवेशकों की नजर टेक-आधारित कंपनियों पर

उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि उपभोक्ता खर्च, रिवॉर्ड, डिजिटल गिफ्टिंग और एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी जैसे विविध क्षेत्रों में फैला पैरामोटर का डिजिटल इकोसिस्टम उसे भारतीय शेयर बाजार में उभरती टेक कंपनियों की श्रेणी में मजबूत दावेदार बना सकता है. खासकर ऐसे समय में जब निवेशकों का रुझान तेजी से बढ़ने वाली टेक्नोलॉजी-आधारित कंपनियों की ओर बढ़ रहा है.
 


5 दिन में दूसरी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, आम आदमी पर बढ़ेगा महंगाई का बोझ

नई बढ़ोतरी के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 98.64 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है, जबकि डीजल 91.58 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है. इससे पहले पेट्रोल 97.77 रुपये और डीजल 90.67 रुपये प्रति लीटर था.

Last Modified:
Tuesday, 19 May, 2026
BWHindia

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, महंगे कच्चे तेल और कमजोर रुपये का असर अब सीधे आम आदमी की जेब पर दिखने लगा है. पेट्रोल और डीजल की कीमतों में पिछले पांच दिनों में दूसरी बार बढ़ोतरी की गई है. नई कीमतों के बाद ईंधन करीब 4 रुपये प्रति लीटर तक महंगा हो चुका है, जिससे रोजाना सफर करने वालों से लेकर ट्रांसपोर्ट और कैब सेवाओं तक की लागत बढ़ने की आशंका है.

5 दिन में दूसरी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम

सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी की है. इस बार पेट्रोल 86 पैसे प्रति लीटर और डीजल 83 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ है. इससे पहले 15 मई को दोनों ईंधनों की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बड़ी बढ़ोतरी की गई थी. लगातार दूसरी बार दाम बढ़ने से पांच दिनों में पेट्रोल-डीजल करीब 4 रुपये प्रति लीटर तक महंगे हो गए हैं.

दिल्ली में क्या हो गई नई कीमतें

नई बढ़ोतरी के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 98.64 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है, जबकि डीजल 91.58 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है. इससे पहले पेट्रोल 97.77 रुपये और डीजल 90.67 रुपये प्रति लीटर था.

सीएनजी भी हुई महंगी

पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ सीएनजी की कीमतों में भी हाल के दिनों में बढ़ोतरी हुई है. दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी के दाम 1 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ाए गए हैं. इससे पहले 15 मई को सीएनजी 2 रुपये प्रति किलो महंगी हुई थी. नई कीमतों के बाद दिल्ली में सीएनजी 80.09 रुपये प्रति किलो और नोएडा में 88.70 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है.

नौकरीपेशा और ड्राइवरों पर बढ़ेगा दबाव

ईंधन की बढ़ती कीमतों का सीधा असर रोजाना सफर करने वाले नौकरीपेशा लोगों, ऑटो-रिक्शा चालकों और ऐप-बेस्ड कैब ड्राइवरों पर पड़ेगा. ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने से आने वाले दिनों में जरूरी सामानों की कीमतों पर भी असर देखने को मिल सकता है.

कच्चे तेल और कमजोर रुपये का असर

ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 50 फीसदी से ज्यादा का उछाल आ चुका है. पिछले कई दिनों से ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है. वहीं डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 96.23 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया है.

महंगाई बढ़ने की आशंका

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं और रुपया कमजोर होता गया, तो आने वाले दिनों में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है. भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों के लिए महंगा तेल सीधे अर्थव्यवस्था और आम लोगों के खर्च पर असर डालता है.