एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत का आइसक्रीम बाजार 2026 से 2034 के बीच करीब 16 फीसदी की CAGR से बढ़ सकता है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
भारत में बढ़ती गर्मी, बदलती लाइफस्टाइल और क्विक-कॉमर्स के तेजी से विस्तार ने आइसक्रीम कारोबार को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है. देश का आइसक्रीम बाजार अब सिर्फ गर्मियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह रोजमर्रा की लाइफस्टाइल का हिस्सा बनता जा रहा है. इसी तेजी से बढ़ते बाजार में अब अनंत अंबानी की एंट्री ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है. अनुमान है कि आने वाले कुछ वर्षों में भारत का आइसक्रीम कारोबार 1 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर सकता है. दरअसल, अनंत अंबानी ने हाल ही में अपना आइसक्रीम ब्रांड वंतारा क्रीमैरी (Vantara Creamery) लॉन्च किया है, जिससे इस कारोबार में तेजी की उम्मीद जताई जा रही है.
5 साल में दोगुना हुआ आइसक्रीम बाजार
देश में आइसक्रीम इंडस्ट्री ने पिछले पांच वर्षों में जबरदस्त ग्रोथ दर्ज की है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2020 में भारत का आइसक्रीम बाजार करीब 14,800 करोड़ रुपये का था, जो 2025 में बढ़कर 31,276 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. यानी महज पांच साल में यह कारोबार दोगुने से ज्यादा हो गया. विशेषज्ञों का मानना है कि अगले पांच वर्षों में भी यही रफ्तार बनी रह सकती है. अनुमान है कि 2030 तक भारत का आइसक्रीम बाजार 65,780 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा.
2034 तक 1.19 लाख करोड़ रुपये का होगा कारोबार
रिपोर्ट के अनुसार, भारत का आइसक्रीम बाजार 2026 से 2034 के बीच करीब 16 फीसदी की CAGR से बढ़ सकता है. इसी रफ्तार से आगे बढ़ते हुए 2034 तक यह इंडस्ट्री 1.19 लाख करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंचने का अनुमान है. इस तेज ग्रोथ के पीछे कई बड़े कारण हैं. इनमें बढ़ती डिस्पोजेबल इनकम, तेजी से हो रहा शहरीकरण, क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स का विस्तार, टियर-2 और टियर-3 शहरों में बढ़ती मांग और मजबूत कोल्ड-चेन इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं.
अब सिर्फ मौसमी नहीं रहा आइसक्रीम कारोबार
पहले आइसक्रीम को सिर्फ गर्मियों का प्रोडक्ट माना जाता था, लेकिन अब यह पूरे साल पसंद की जाने वाली फूड कैटेगरी बन चुकी है. ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स और क्विक-कॉमर्स कंपनियों ने इसकी पहुंच को काफी आसान बना दिया है. किराना दुकानों और लोकल स्टोर्स पर फ्रीजर नेटवर्क के विस्तार ने भी आइसक्रीम कंपनियों की बिक्री बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है.
इंपल्स आइसक्रीम का सबसे ज्यादा दबदबा
बाजार में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी इंपल्स आइसक्रीम सेगमेंट की है. 2025 में इसकी हिस्सेदारी करीब 59.62 फीसदी रही. चलते-फिरते आइसक्रीम खाने का बढ़ता ट्रेंड और हर जगह इसकी आसान उपलब्धता इसकी सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही है.
फ्लेवर की बात करें तो चॉकलेट फ्लेवर सबसे ज्यादा पसंद किया जा रहा है. कुल बाजार में इसकी हिस्सेदारी 31.05 फीसदी है. इसके बाद वनीला 28.42 फीसदी और फ्रूट फ्लेवर 24.63 फीसदी हिस्सेदारी के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं.
महाराष्ट्र सबसे बड़ा बाजार
राज्यों की बात करें तो महाराष्ट्र देश का सबसे बड़ा आइसक्रीम बाजार बनकर उभरा है. कुल कारोबार में इसकी हिस्सेदारी करीब 12 फीसदी है. मुंबई और पुणे जैसे बड़े शहरों में प्रीमियम और ब्रांडेड आइसक्रीम की मजबूत मांग इसकी प्रमुख वजह मानी जा रही है. इसके अलावा महाराष्ट्र का मजबूत कोल्ड-चेन नेटवर्क भी इस सेक्टर की ग्रोथ को बढ़ावा दे रहा है.
PLI स्कीम से मिल रही सरकारी मदद
भारत सरकार भी फूड प्रोसेसिंग सेक्टर को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है. PLI स्कीम के तहत फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री के आधुनिकीकरण के लिए करीब 10,900 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बना हुआ है. 2023-24 में देश में करीब 236.35 मिलियन मीट्रिक टन दूध का उत्पादन हुआ. यही मजबूत डेयरी बेस आइसक्रीम उद्योग को सस्ता और स्थिर कच्चा माल उपलब्ध कराने में मदद कर रहा है.
अनंत अंबानी की एंट्री से बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा
मुकेश अंबानी के परिवार की ओर से लॉन्च की गई वंतारा क्रीमैरी (Vantara Creamery) अब इस तेजी से बढ़ते बाजार में नई चुनौती पेश कर सकती है. कंपनी ने 17 फ्लेवर के साथ अपनी शुरुआत की है. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जिस तरह रिलायंस ने कैंपा के जरिए सॉफ्ट ड्रिंक मार्केट में बड़ी कंपनियों को चुनौती दी, उसी तरह आइसक्रीम कारोबार में भी क्वालिटी वॉल्स, क्रीमबेल और बास्किन रॉबिंस जैसी कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है. आने वाले वर्षों में भारत का आइसक्रीम बाजार सिर्फ बड़ा ही नहीं होगा, बल्कि इसमें प्रतिस्पर्धा भी पहले से कहीं ज्यादा तेज दिखाई दे सकती है.
RewardOn प्लेटफॉर्म कंपनियों को डिजिटल रिवॉर्ड प्रोग्राम डिजाइन, मैनेज और वितरित करने की सुविधा देता है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत की फिनटेक और एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी कंपनी पैरामोटर डिजिटल टेक्नोलॉजी (Paramotor Digital Technology Limited) ने प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) लाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (Sebi) के पास गोपनीय तरीके से ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल किया है. कंपनी की ओर से जारी सार्वजनिक सूचना में यह जानकारी दी गई.
2016 में हुई थी स्थापना
साल 2016 में स्थापित पैरामोटर डिजिटल टेक्नोलॉजी उपभोक्ताओं और कारोबारों के लिए फिनटेक तथा एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी सेवाएं उपलब्ध कराती है. कंपनी का कारोबार कंज्यूमर स्पेंड मैनेजमेंट, रिवॉर्ड और लॉयल्टी सॉल्यूशंस, डिजिटल गिफ्टिंग और एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी सेवाओं तक फैला हुआ है.
कंपनी का नेतृत्व एग्जीक्यूटिव चेयरपर्सन सोनिया अशर और मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल आनंद कर रहे हैं. दोनों के पास बैंकिंग, पेमेंट्स और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र का व्यापक अनुभव है.
कई डिजिटल प्लेटफॉर्म का संचालन
कंपनी के पोर्टफोलियो में SpendPro, RewardOn, yayyy.shop और DevStack जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं. SpendPro एक प्रीपेड कार्ड आधारित स्पेंड मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म है, जबकि RewardOn एंटरप्राइज रिवॉर्ड और लॉयल्टी मैनेजमेंट सॉल्यूशन उपलब्ध कराता है. वहीं yayyy.shop सीधे उपभोक्ताओं के लिए डिजिटल गिफ्टिंग मार्केटप्लेस के रूप में काम करता है. DevStack कंपनी की एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट सेवाओं से जुड़ी इकाई है.
डिजिटल अपनाने के बढ़ते ट्रेंड से फायदा मिलने की उम्मीद
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी का एसेट-लाइट और टेक्नोलॉजी आधारित बिजनेस मॉडल भारत में तेजी से बढ़ रही डिजिटल स्वीकार्यता का लाभ उठा सकता है. खासतौर पर कंज्यूमर स्पेंडिंग, एंटरप्राइज एंगेजमेंट और बिजनेस प्रोसेस डिजिटाइजेशन में बढ़ती मांग कंपनी के लिए अवसर पैदा कर सकती है. कंपनी का yayyy.shop प्लेटफॉर्म ग्राहकों को विभिन्न श्रेणियों में प्रीपेड कार्ड और ब्रांडेड गिफ्ट कार्ड की सुविधा देता है, जिससे डिजिटल कॉमर्स क्षेत्र में उसकी मौजूदगी मजबूत हुई है.
एंटरप्राइज ग्राहकों पर भी फोकस
RewardOn प्लेटफॉर्म कंपनियों को डिजिटल रिवॉर्ड प्रोग्राम डिजाइन, मैनेज और वितरित करने की सुविधा देता है. इसके जरिए कंपनियां कर्मचारी जुड़ाव, ग्राहक लॉयल्टी और चैनल इंसेंटिव कार्यक्रमों को अपनी जरूरत के अनुसार कस्टमाइज कर सकती हैं.
वहीं DevStack कारोबारों के लिए कस्टमाइज्ड और स्केलेबल डिजिटल सॉल्यूशंस विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करता है, जिससे कंपनियों को बिजनेस-क्रिटिकल सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन तैयार करने में मदद मिलती है.
निवेशकों की नजर टेक-आधारित कंपनियों पर
उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि उपभोक्ता खर्च, रिवॉर्ड, डिजिटल गिफ्टिंग और एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी जैसे विविध क्षेत्रों में फैला पैरामोटर का डिजिटल इकोसिस्टम उसे भारतीय शेयर बाजार में उभरती टेक कंपनियों की श्रेणी में मजबूत दावेदार बना सकता है. खासकर ऐसे समय में जब निवेशकों का रुझान तेजी से बढ़ने वाली टेक्नोलॉजी-आधारित कंपनियों की ओर बढ़ रहा है.
नई बढ़ोतरी के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 98.64 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है, जबकि डीजल 91.58 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है. इससे पहले पेट्रोल 97.77 रुपये और डीजल 90.67 रुपये प्रति लीटर था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, महंगे कच्चे तेल और कमजोर रुपये का असर अब सीधे आम आदमी की जेब पर दिखने लगा है. पेट्रोल और डीजल की कीमतों में पिछले पांच दिनों में दूसरी बार बढ़ोतरी की गई है. नई कीमतों के बाद ईंधन करीब 4 रुपये प्रति लीटर तक महंगा हो चुका है, जिससे रोजाना सफर करने वालों से लेकर ट्रांसपोर्ट और कैब सेवाओं तक की लागत बढ़ने की आशंका है.
5 दिन में दूसरी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम
सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी की है. इस बार पेट्रोल 86 पैसे प्रति लीटर और डीजल 83 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ है. इससे पहले 15 मई को दोनों ईंधनों की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बड़ी बढ़ोतरी की गई थी. लगातार दूसरी बार दाम बढ़ने से पांच दिनों में पेट्रोल-डीजल करीब 4 रुपये प्रति लीटर तक महंगे हो गए हैं.
दिल्ली में क्या हो गई नई कीमतें
नई बढ़ोतरी के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 98.64 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है, जबकि डीजल 91.58 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है. इससे पहले पेट्रोल 97.77 रुपये और डीजल 90.67 रुपये प्रति लीटर था.
सीएनजी भी हुई महंगी
पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ सीएनजी की कीमतों में भी हाल के दिनों में बढ़ोतरी हुई है. दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी के दाम 1 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ाए गए हैं. इससे पहले 15 मई को सीएनजी 2 रुपये प्रति किलो महंगी हुई थी. नई कीमतों के बाद दिल्ली में सीएनजी 80.09 रुपये प्रति किलो और नोएडा में 88.70 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है.
नौकरीपेशा और ड्राइवरों पर बढ़ेगा दबाव
ईंधन की बढ़ती कीमतों का सीधा असर रोजाना सफर करने वाले नौकरीपेशा लोगों, ऑटो-रिक्शा चालकों और ऐप-बेस्ड कैब ड्राइवरों पर पड़ेगा. ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने से आने वाले दिनों में जरूरी सामानों की कीमतों पर भी असर देखने को मिल सकता है.
कच्चे तेल और कमजोर रुपये का असर
ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 50 फीसदी से ज्यादा का उछाल आ चुका है. पिछले कई दिनों से ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है. वहीं डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 96.23 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया है.
महंगाई बढ़ने की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं और रुपया कमजोर होता गया, तो आने वाले दिनों में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है. भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों के लिए महंगा तेल सीधे अर्थव्यवस्था और आम लोगों के खर्च पर असर डालता है.
सोमवार को सेंसेक्स 77.05 अंक की बढ़त के साथ 75,315.04 अंक पर बंद हुआ. वहीं निफ्टी 6.45 अंक की मामूली तेजी के साथ 23,649.95 अंक पर लगभग सपाट बंद हुआ.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की लगातार ऊंची कीमतों और रुपये में रिकॉर्ड कमजोरी ने सोमवार को घरेलू शेयर बाजार को भारी दबाव में ला दिया था. हालांकि शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 1000 अंक से ज्यादा टूटने के बाद आईटी शेयरों में जोरदार खरीदारी से बाजार ने शानदार वापसी की. ऐसे में आज भी निवेशकों को बाजार में उतार-चढ़ाव भरा कारोबार देखने को मिल सकता है. निवेशकों की नजर कच्चे तेल की चाल, वैश्विक बाजारों के संकेत, रुपये की स्थिति और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी, जो आज बाजार की दिशा तय कर सकते हैं.
भारी गिरावट के बाद संभला बाजार
कल दिनभर के उतार-चढ़ाव भरे कारोबार के बाद बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 77.05 अंक यानी 0.10 फीसदी की बढ़त के साथ 75,315.04 अंक पर बंद हुआ. वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 6.45 अंक यानी 0.03 फीसदी की मामूली तेजी के साथ 23,649.95 अंक पर लगभग सपाट बंद हुआ. सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 16 बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि बाकी शेयरों में दबाव देखने को मिला.
आईटी शेयरों में जोरदार खरीदारी
बाजार में रिकवरी की सबसे बड़ी वजह आईटी सेक्टर में आई तेजी रही. टेक महिंद्रा के शेयरों में सबसे ज्यादा 4.97 फीसदी उछाल दर्ज किया गया. इसके अलावा इन्फोसिस, भारती एयरटेल, बजाज फिनसर्व, बजाज फाइनेंस, सन फार्मा, एचसीएल टेक और टीसीएस में भी मजबूत खरीदारी देखने को मिली. निफ्टी आईटी इंडेक्स में 2 फीसदी से अधिक की तेजी दर्ज की गई. वहीं फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर ने भी बाजार को सहारा दिया.
दूसरी ओर मेटल और सरकारी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली का दबाव बना रहा. टाटा स्टील में सबसे ज्यादा 3.09 फीसदी की गिरावट आई. इसके अलावा पावरग्रिड, एसबीआई, एनटीपीसी, मारुति, ट्रेंट और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयर भी लाल निशान में बंद हुए.
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर दबाव
ब्रॉडर मार्केट में कमजोरी बनी रही. निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.15 फीसदी गिरा, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 1.26 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई. सेक्टोरल इंडेक्स में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और पीएसयू बैंक शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली.
रुपया फिर रिकॉर्ड निचले स्तर पर
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और बॉन्ड यील्ड में उछाल का असर भारतीय मुद्रा पर भी पड़ा. डॉलर के मुकाबले रुपया शुरुआती कारोबार में 0.2 फीसदी टूटकर 96.18 के स्तर तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है. रुपये में लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई है. फरवरी के अंत में ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 5.5 फीसदी कमजोर हो चुका है. एशियाई मुद्राओं में इस साल रुपया सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली करेंसी बन गया है.
आज इन शेयरों पर रखें नजर
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आज शेयर बाजार में कई बड़े शेयर निवेशकों के रडार पर रह सकते हैं. जैसे Eicher Motors की सहयोगी कंपनी रॉयल एनफील्ड आंध्र प्रदेश के ताडा में करीब 2,500 करोड़ रुपये के निवेश से नया ग्रीनफील्ड मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने जा रही है, जिससे कंपनी की उत्पादन क्षमता बढ़ने की उम्मीद है. वहीं JSW Steel में बड़ी ब्लॉक डील देखने को मिली है, जहां जीक्यूजी पार्टनर्स और एसबीआई म्यूचुअल फंड ने बड़ी हिस्सेदारी खरीदी है. अडानी समूह भी चर्चा में रहेगा, क्योंकि कंपनी ने ईरान से जुड़े एलपीजी आयात मामले में अमेरिकी संस्था ओएफएसी के साथ समझौता करते हुए 275 मिलियन डॉलर भुगतान पर सहमति दी है, हालांकि कंपनी ने किसी भी गलती से इनकार किया है. दूसरी ओर Hyundai Motor Company भारत में FY28 तक सालाना 10 लाख यूनिट उत्पादन क्षमता हासिल करने की तैयारी में है और इसके लिए 7,500 करोड़ रुपये निवेश करेगी. वहीं Vascon Engineers को Reliance Industries से 131.58 करोड़ रुपये का बड़ा ऑर्डर मिला है. इसके अलावा आज Bharat Electronics, Zydus Lifesciences, Bharat Petroleum, Mankind Pharma, PI Industries, PNC Infratech और Zee Entertainment Enterprises जैसी कंपनियां अपने चौथी तिमाही के नतीजे जारी करेंगी, जिनका असर बाजार की चाल पर देखने को मिल सकता है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
अमेरिकी अभियोजकों ने अदालत में दाखिल दस्तावेज में कहा कि मामले की समीक्षा के बाद विभाग ने यह निष्कर्ष निकाला कि आरोपों को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त आधार और सबूत मौजूद नहीं हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर सागर अडानी को अमेरिका में बड़ी कानूनी राहत मिली है. अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने न्यूयॉर्क में चल रहे सिक्योरिटीज और वायर फ्रॉड मामले में दोनों के खिलाफ लगाए गए सभी आपराधिक आरोप हमेशा के लिए वापस ले लिए हैं. अदालत ने मामले को “विद प्रेजुडिस” खारिज किया है. यानी अब इस केस को भविष्य में दोबारा नहीं खोला जा सकेगा.
अमेरिकी अभियोजकों ने अदालत में दाखिल दस्तावेज में कहा कि मामले की समीक्षा के बाद विभाग ने यह निष्कर्ष निकाला कि आरोपों को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त आधार और सबूत मौजूद नहीं हैं. इसके बाद अदालत ने अडानी और अन्य आरोपियों के खिलाफ दायर अभियोग को स्थायी रूप से खारिज करने का आदेश जारी कर दिया. अमेरिकी आपराधिक मामलों में इस तरह “विद प्रेजुडिस” केस बंद होना काफी दुर्लभ माना जाता है.
2024 में लगे थे रिश्वत और धोखाधड़ी के आरोप
यह मामला 2024 के अंत में सामने आया था. जब अमेरिकी न्याय विभाग और अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (SEC) ने आरोप लगाया था कि अडानी समूह ने भारत में सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट्स हासिल करने के लिए भारतीय अधिकारियों को करीब 26.5 करोड़ डॉलर की रिश्वत देने की योजना बनाई थी. जांच एजेंसियों का दावा था कि इस कथित व्यवस्था की जानकारी अमेरिकी निवेशकों और कर्जदाताओं से छिपाई गई.
हालांकि जांच के दौरान अभियोजकों को अमेरिका से जुड़े स्पष्ट लिंक और आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले. सूत्रों के मुताबिक. इसी वजह से मामला धीरे-धीरे कमजोर पड़ता गया और अंततः डीओजे ने सभी आपराधिक आरोप वापस लेने का फैसला किया.
लगातार बंद होती गईं जांचें
पिछले कुछ दिनों में अडानी समूह से जुड़ी कई अमेरिकी जांचों का निपटारा हुआ है. हाल ही में एसईसी ने निवेशक खुलासों से जुड़े सिविल मामले का समझौते के जरिए निपटारा किया था. अदालत में दाखिल दस्तावेजों के अनुसार. गौतम अडानी ने 60 लाख डॉलर और सागर अडानी ने 1.2 करोड़ डॉलर के भुगतान पर सहमति जताई थी. हालांकि दोनों ने किसी भी गलत काम को स्वीकार नहीं किया.
इसके अलावा अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की संस्था ओएफएसी ने ईरान से एलपीजी आयात से जुड़े प्रतिबंध उल्लंघन मामले में भी समझौता किया. इस मामले में अडानी समूह ने 27.5 करोड़ डॉलर का भुगतान करने और जांच में सहयोग देने पर सहमति दी.
ट्रंप के निजी वकील ने संभाली थी पैरवी
मामले में अडानी पक्ष की ओर से अमेरिका की कई बड़ी लॉ फर्मों ने कानूनी लड़ाई लड़ी. अडानी के प्रमुख वकीलों में शामिल रॉबर्ट गिफ्रा, जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निजी वकील भी माने जाते हैं. उन्होंने न्याय विभाग के अधिकारियों के सामने करीब 100 पन्नों की प्रस्तुति दी थी.
बचाव पक्ष ने तर्क दिया था कि मामला अमेरिकी क्षेत्राधिकार से बाहर का है. क्योंकि कथित घटनाएं भारत में हुईं. संबंधित कंपनियां भारतीय थीं और संबंधित प्रतिभूतियां अमेरिकी एक्सचेंजों में सूचीबद्ध नहीं थीं. वकीलों ने यह भी कहा कि अमेरिकी निवेशकों को कोई प्रत्यक्ष नुकसान नहीं हुआ और आरोपों के समर्थन में पर्याप्त सबूत मौजूद नहीं हैं.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक. अडानी पक्ष ने यह भी दलील दी थी कि जब तक यह मामला चलता रहेगा. तब तक अडानी एंटरप्राइजेज अमेरिका में प्रस्तावित निवेश योजनाओं को आगे नहीं बढ़ा पाएगी. गौरतलब है कि गौतम अडानी ने अमेरिकी चुनावों में ट्रंप की जीत के बाद अमेरिका में 10 अरब डॉलर निवेश और करीब 15,000 नौकरियां पैदा करने की घोषणा की थी.
विशेषज्ञों ने भी उठाए थे अधिकार क्षेत्र पर सवाल
कई कानूनी विशेषज्ञों ने भी इस मामले में सवाल उठाए थे कि क्या अमेरिकी एजेंसियां विदेशी कंपनियों और विदेश में हुई गतिविधियों पर अपने कानूनों का दायरा जरूरत से ज्यादा बढ़ा रही हैं. विशेषज्ञों के अनुसार. अडानी और अन्य आरोपियों पर रिश्वतखोरी या विदेशी भ्रष्ट आचरण अधिनियम (FCPA) के तहत गंभीर आरोप नहीं लगाए गए थे. बल्कि मामला मुख्य रूप से सिक्योरिटीज और वायर फ्रॉड तक सीमित था.
अडानी समूह ने शुरुआत से ही सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा था कि समूह वैश्विक कॉरपोरेट गवर्नेंस और अनुपालन मानकों का पालन करता है. अब अमेरिकी अदालत द्वारा मामला स्थायी रूप से बंद किए जाने के बाद समूह को बड़ी प्रतिष्ठात्मक और कानूनी राहत मिली है.
12 से 15 अगस्त तक भारत मंडपम में देश के सबसे बड़े व्यापार एक्सपो का आयोजन होगा, जिसमें ‘लोकल टू ग्लोबल’ को नई ताकत मिलेगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत को वैश्विक व्यापार और विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को भारत मंडपम, प्रगति मैदान में भारतीय व्यापार महोत्सव (BVM) की आधिकारिक वेबसाइट लॉन्च की.
यह महोत्सव 12 से 15 अगस्त तक भारत मंडपम में आयोजित किया जाएगा. इसका संयुक्त आयोजन आईटीपीओ और कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) द्वारा किया जा रहा है. आयोजन का उद्देश्य भारत को केवल उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि वैश्विक विनिर्माण और निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करना है.
भारत तेजी से बन रहा वैश्विक आर्थिक शक्ति
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि भारत आज दुनिया में तेजी से एक मजबूत आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रहा है. उन्होंने कहा कि यदि व्यापारी, उद्योग जगत, एमएसएमई, स्टार्टअप्स और उद्यमी मिलकर काम करें तो भारत आसानी से 1 ट्रिलियन डॉलर निर्यात का लक्ष्य हासिल कर सकता है. उन्होंने कहा कि भारत कौशल, प्रतिभा और ज्ञान से भरपूर देश है. यदि भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता को और बेहतर बनाया जाए तो दुनिया में ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ सकती है.
‘वोकल फॉर लोकल’ को मिलेगा नया मंच
सांसद और कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि भारतीय व्यापार महोत्सव केवल एक एक्सपो नहीं, बल्कि व्यापारियों, एमएसएमई, महिला उद्यमियों, स्टार्टअप्स और कारीगरों को सशक्त बनाने का राष्ट्रीय अभियान है. उन्होंने कहा कि यह आयोजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ विजन को नई गति देगा. साथ ही भारतीय उत्पादों और सेवाओं को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगा.
प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि भारत की पहचान अब सिर्फ एक बड़े उपभोक्ता बाजार के रूप में नहीं, बल्कि एक मजबूत मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करने की जरूरत है.
देशभर से जुटे व्यापार और उद्योग जगत के प्रतिनिधि
कार्यक्रम के दौरान पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच व्यापार और उद्योग क्षेत्र के लिए रणनीतिक कदमों पर भी चर्चा हुई. सम्मेलन में देश के 27 राज्यों से करीब 150 प्रमुख व्यापारिक नेता, उद्योगपति, निर्यातक, स्टार्टअप्स, महिला उद्यमी और विभिन्न व्यापार संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए. इस दौरान भारत को वैश्विक सप्लाई चेन और सोर्सिंग हब बनाने की रणनीतियों पर भी मंथन किया गया.
भारतीय उत्पादों को मिलेगा वैश्विक मंच
आईटीपीओ के अध्यक्ष जावेद अशरफ ने कहा कि भारतीय व्यापार महोत्सव देश के रिटेल व्यापार की छवि बदलने वाला ऐतिहासिक आयोजन साबित हो सकता है. वहीं, आईटीपीओ के प्रबंध निदेशक नीरज खरवाल ने कहा कि यह महोत्सव भारत की उत्पादन क्षमता, पारंपरिक उत्पादों, नवाचार और उद्यमशीलता को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने का सशक्त माध्यम बनेगा. उन्होंने कहा कि इस पहल से एमएसएमई, महिला उद्यमियों, स्टार्टअप्स और कारीगरों को नए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक अवसर मिलेंगे.
वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग द्वारा जारी निर्देश के मुताबिक सरकारी बैंकों, बीमा कंपनियों और अन्य वित्तीय संस्थानों को गैर-जरूरी खर्चों में कटौती करने को कहा गया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
बढ़ते वैश्विक आर्थिक दबाव और पश्चिम एशिया तनाव के बीच केंद्र सरकार ने सरकारी बैंकों, बीमा कंपनियों और वित्तीय संस्थानों में बड़े स्तर पर खर्च कटौती अभियान शुरू कर दिया है. वित्त मंत्रालय ने संस्थानों को विदेशी यात्राएं सीमित करने, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को बढ़ावा देने और पेट्रोल-डीजल वाहनों की जगह चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को अपनाने के निर्देश दिए हैं.
सरकारी संस्थानों में खर्च नियंत्रण पर फोकस
वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग द्वारा जारी निर्देश के मुताबिक सरकारी बैंकों, बीमा कंपनियों और अन्य वित्तीय संस्थानों को गैर-जरूरी खर्चों में कटौती करने को कहा गया है. इस फैसले का असर देश के बड़े सरकारी संस्थानों और लाखों कर्मचारियों पर पड़ेगा. इस अभियान के दायरे में भारतीय स्टेट बैंक (SBI), बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) जैसी प्रमुख संस्थाएं शामिल हैं.
अब ज्यादातर बैठकें होंगी वर्चुअल
सरकार ने निर्देश दिया है कि सभी बैठकें, समीक्षा और कंसल्टेशन अधिकतम स्तर तक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित किए जाएं. केवल उन्हीं बैठकों में फिजिकल उपस्थिति अनिवार्य होगी, जहां इसकी वास्तविक जरूरत हो. सरकार का मानना है कि इससे यात्रा और प्रशासनिक खर्चों में बड़ी बचत होगी.
विदेशी यात्राओं पर सख्ती
नए निर्देशों के तहत चेयरपर्सन, प्रबंध निदेशक (MD) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) समेत शीर्ष अधिकारियों की विदेशी यात्राओं को सीमित रखने को कहा गया है. जहां संभव हो, अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों और बैठकों में वर्चुअल माध्यम से भाग लेने को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं.
इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने की तैयारी
सरकार ने सरकारी बैंकों और वित्तीय संस्थानों को किराये पर ली गई पेट्रोल और डीजल कारों की जगह इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने का लक्ष्य तय करने को कहा है. आदेश में कहा गया है कि मुख्यालय और शाखा कार्यालयों में इस्तेमाल होने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से EV में बदला जाए, ताकि ईंधन लागत कम हो और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिले.
पीएम मोदी की अपील के बाद तेज हुआ अभियान
यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील के बाद उठाया गया है, जिसमें उन्होंने सरकारी विभागों और संस्थानों से मितव्ययिता अपनाने और खर्चों में संयम बरतने को कहा था. सरकार वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के असर को लेकर सतर्क नजर आ रही है.
पश्चिम एशिया तनाव से बढ़ी आर्थिक चिंता
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगा है. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई और चालू खाते के घाटे पर दबाव बढ़ने की आशंका है. इसी बीच भारतीय रुपया भी इस साल एशिया की सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में शामिल हो गया है और डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच चुका है.
राज्यों में भी शुरू हुए बचत के प्रयास
लागत में कटौती के लिए कई राज्य सरकारों ने कर्मचारियों को सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम की अनुमति देने जैसे कदम भी उठाए हैं. सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक खर्चों को नियंत्रित करना और संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है.
### फिजिकल गोल्ड की झंझट से मिलेगी राहत. निवेशकों को मिलेगा सुरक्षित और पारदर्शी डिजिटल गोल्ड प्लेटफॉर्म
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने डिजिटल गोल्ड निवेश को नई दिशा देते हुए इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स (EGR) की ट्रेडिंग शुरू कर दी है. यह व्यवस्था निवेशकों को डिजिटल माध्यम से सोने में निवेश का अवसर देगी, जबकि इसके पीछे वास्तविक फिजिकल गोल्ड सुरक्षित वॉल्ट में रखा जाएगा. NSE का यह कदम भारत के गोल्ड मार्केट में बड़ा बदलाव माना जा रहा है. इसका उद्देश्य गोल्ड ट्रेडिंग को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और आसान बनाना है, ताकि निवेशकों को शुद्धता, स्टोरेज और चोरी जैसी समस्याओं से राहत मिल सके.
18 मई से शुरू हुई ट्रेडिंग
एक्सचेंज के अनुसार EGR ट्रेडिंग की शुरुआत 18 मई से हो गई है. बाजार सोमवार से शुक्रवार सुबह 9 बजे से रात 11:30 बजे तक खुला रहेगा, जबकि अमेरिकी डेलाइट सेविंग टाइम के दौरान यह समय रात 11:55 बजे तक रहेगा. इस प्रणाली में सेटलमेंट T+1 साइकिल के आधार पर होगा, जिससे निवेशकों को तेज और व्यवस्थित सेटलमेंट सुविधा मिलेगी.
देशभर में बढ़ाया जाएगा नेटवर्क
NSE ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स को बाजार से शानदार प्रतिक्रिया मिली है. फिलहाल अहमदाबाद और मुंबई में वैल्यूइंग और कलेक्शन सेंटर शुरू किए जा चुके हैं. इसके अलावा दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और बेंगलुरु में भी नए सेंटर जल्द सक्रिय किए जाएंगे. एक्सचेंज का लक्ष्य आने वाले समय में देशभर में करीब 120 सेंटर स्थापित करने का है.
क्या है इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट (EGR)?
इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट यानी EGR, सेबी द्वारा विनियमित वॉल्ट में रखे गए फिजिकल गोल्ड के स्वामित्व का डिजिटल प्रमाण है. प्रत्येक EGR सुरक्षित रूप से संग्रहित सोने की एक निश्चित मात्रा का प्रतिनिधित्व करता है. इस सोने को लाइसेंस प्राप्त वॉल्ट प्रदाताओं द्वारा प्रमाणित और प्रबंधित किया जाता है. निवेशकों की होल्डिंग डीमैट अकाउंट में शेयरों और अन्य प्रतिभूतियों की तरह दिखाई देगी.
छोटे निवेशकों के लिए भी आसान होगा निवेश
EGR की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें निवेशक अपनी सुविधा के अनुसार छोटी या बड़ी मात्रा में सोना खरीद सकते हैं. यह 1 किलोग्राम, 100 ग्राम, 10 ग्राम, 1 ग्राम और यहां तक कि 100 मिलीग्राम जैसे विभिन्न आकारों में उपलब्ध होगा. इससे छोटे निवेशकों के लिए भी गोल्ड निवेश आसान और सुलभ बन जाएगा.
फिजिकल गोल्ड की परेशानियों से मिलेगी राहत
भारत में सोना सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि परंपरा और संपत्ति का प्रतीक भी माना जाता है. हालांकि फिजिकल गोल्ड खरीदने में शुद्धता की जांच, सुरक्षित स्टोरेज, चोरी का खतरा और दोबारा बेचने पर नुकसान जैसी कई चुनौतियां रहती हैं. EGR सिस्टम इन समस्याओं को कम करने का प्रयास करेगा और निवेशकों को अधिक सुरक्षित डिजिटल विकल्प उपलब्ध कराएगा.
अभी भी मौजूद हैं कुछ चुनौतियां
विशेषज्ञों का मानना है कि EGR भारत के गोल्ड इकोसिस्टम में बड़ा बदलाव ला सकता है, लेकिन इसके सामने कुछ चुनौतियां भी हैं. फिलहाल सबसे बड़ी चिंता बाजार में पर्याप्त लिक्विडिटी की है. इसके अलावा ब्रोकर प्लेटफॉर्म्स को भी इस सिस्टम के साथ बड़े स्तर पर एकीकृत करने की जरूरत होगी. वहीं भारत में बड़ी संख्या में लोग अब भी फिजिकल गोल्ड को प्राथमिकता देते हैं, जिससे डिजिटल गोल्ड को व्यापक स्तर पर अपनाने में समय लग सकता है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
सरकार ने फरवरी में ‘नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन’ (NMP 2.0) की घोषणा की थी. इसके तहत वित्त वर्ष 2026 से 2030 के बीच सिर्फ सड़क क्षेत्र से 4.42 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश में तेजी से बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को नई रफ्तार देने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा वित्तीय प्लान तैयार किया है. सरकार अगले वित्त वर्ष 2026-27 में देशभर के 28 प्रमुख नेशनल हाईवे एसेट्स को लीज पर देकर करीब 35 हजार करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में है. इस रकम का इस्तेमाल नई सड़कें, एक्सप्रेसवे और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के निर्माण में किया जाएगा.
सरकार की यह रणनीति ‘एसेट मोनेटाइजेशन’ मॉडल पर आधारित है, जिसके तहत पहले से चालू और राजस्व देने वाली सड़कों का संचालन तय अवधि के लिए निजी कंपनियों और निवेशकों को सौंपा जाएगा. बदले में सरकार को एकमुश्त बड़ी राशि प्राप्त होगी.
NHAI ने तैयार किया पूरा ब्लूप्रिंट
नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने इस योजना का खाका तैयार कर लिया है. करीब 1,800 किलोमीटर लंबे 28 हाईवे स्ट्रेच इस मोनेटाइजेशन योजना में शामिल किए गए हैं. इन परियोजनाओं को पब्लिक-प्राइवेट इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvIT) और टोल-ऑपरेट-ट्रांसफर (TOT) मॉडल के जरिए लागू किया जाएगा. इसके तहत सात इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (EPC) प्रोजेक्ट भी शामिल किए गए हैं.
हरियाणा और यूपी के हाईवे पर निवेशकों की नजर
जानकारी के अनुसार, इस नई सूची में सबसे ज्यादा हाईवे एसेट्स हरियाणा से चुने गए हैं, जबकि उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर है. इन राज्यों के प्रमुख हाईवे ट्रैफिक और टोल कलेक्शन के लिहाज से निवेशकों के लिए आकर्षक माने जा रहे हैं. सरकार निवेश का जोखिम कम करने के लिए हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) वाले एसेट्स को प्राथमिकता दे रही है. इससे घरेलू और विदेशी संस्थागत निवेशकों का भरोसा बढ़ने की उम्मीद है.
हाल ही में सरकार ने सॉवरेन वेल्थ फंड और पेंशन फंड को सीधे ग्रीनफील्ड टोल रोड परियोजनाओं में निवेश की अनुमति भी दी है. माना जा रहा है कि इससे हाईवे सेक्टर में बड़े निवेश का रास्ता खुलेगा.
NMP 2.0 से इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगा बड़ा बूस्ट
सरकार ने फरवरी में ‘नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन’ (NMP 2.0) की घोषणा की थी. इसके तहत वित्त वर्ष 2026 से 2030 के बीच सिर्फ सड़क क्षेत्र से 4.42 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है. सरकार को उम्मीद है कि सिर्फ वित्त वर्ष 2026-27 में ही मोनेटाइजेशन प्रक्रिया से करीब 68,770 करोड़ रुपये जुटाए जा सकेंगे.
पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में सड़क परिवहन मंत्रालय ने इसी मॉडल के जरिए करीब 29 हजार करोड़ रुपये जुटाए थे. इसमें 9 हजार करोड़ रुपये चार राज्यों की 260 किलोमीटर लंबी पांच सड़कों के पब्लिक InvIT के जरिए आए थे.
आम लोगों को क्या होगा फायदा
विशेषज्ञों के मुताबिक, सरकार जब पुरानी सड़कों से आय जुटाकर उसे नए प्रोजेक्ट्स में निवेश करती है, तो इससे देशभर में कनेक्टिविटी बेहतर होती है. नए हाईवे बनने से यात्रा का समय घटता है और माल ढुलाई की लागत कम होती है, जिसका असर महंगाई पर भी पड़ सकता है. इसके अलावा शेयर बाजार में निवेश करने वाले लोगों के लिए InvIT के जरिए सरकारी हाईवे परियोजनाओं में निवेश कर स्थिर रिटर्न कमाने का नया विकल्प भी उपलब्ध होगा.
सरकार आने वाले तीन से पांच वर्षों में करीब 1,500 किलोमीटर अतिरिक्त चालू सड़कों को भी इस मॉडल में शामिल करने की तैयारी कर रही है. यानी आने वाले समय में देश के हाईवे सिर्फ परिवहन का माध्यम नहीं, बल्कि निवेश और आय का बड़ा जरिया भी बन सकते हैं.
NFP सम्पूर्णा फूड्स अपने आईपीओ के जरिए 44.6 लाख नए शेयर जारी करेगी. यह एनएसई एसएमई प्लेटफॉर्म का इश्यू 18 मई से 20 मई तक सब्सक्रिप्शन के लिए खुला रहेगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत का आईपीओ (IPO) बाजार एक बार फिर व्यस्त रहने वाला है. इस सप्ताह लघु एवं मध्यम उद्यम (SME) सेगमेंट में चार कंपनियां अपने आईपीओ लॉन्च करने जा रही हैं. इनमें क्लाउड किचन और फूड ब्रांड से लेकर निर्माण समाधान और एक्सपोर्ट कारोबार से जुड़ी कंपनियां शामिल हैं. इस सप्ताह जिन कंपनियों के आईपीओ खुलने वाले हैं उनमें NFP सम्पूर्णा फूड्स, टीमटेक फॉर्मवर्क सॉल्यूशंस, वेगोरामा पंजाबी अंगीठी और हरिकांता ओवरसीज शामिल हैं. इन आईपीओ के जरिए निवेशकों को फूड, कंस्ट्रक्शन और निर्यात जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में निवेश का अवसर मिलेगा.
फूड और क्लाउड किचन कारोबार पर निवेशकों की नजर
इस सप्ताह आने वाले आईपीओ में वेगोरामा पंजाबी अंगीठी खास चर्चा में है, जो क्लाउड किचन और फूड ब्रांड के तौर पर कारोबार करती है. उपभोक्ता आधारित कारोबार में निवेशकों की लगातार बढ़ती रुचि के बीच इस आईपीओ पर बाजार की खास नजर रहने की संभावना है. इसके अलावा पैकेज्ड फूड कंपनी NFP सम्पूर्णा फूड्स भी अपना आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए खोलेगी. वहीं टीमटेक फॉर्मवर्क सॉल्यूशंस निर्माण समाधान क्षेत्र में काम करती है और हरिकांता ओवरसीज निर्यात आधारित कारोबार से जुड़ी कंपनी है.
NFP सम्पूर्णा फूड्स का आईपीओ की डिटेल
NFP सम्पूर्णा फूड्स का आईपीओ करीब 24.53 करोड़ रुपये जुटाने के उद्देश्य से लाया जा रहा है, जिसके तहत कंपनी 44.6 लाख नए शेयर जारी करेगी. यह एनएसई एसएमई प्लेटफॉर्म का इश्यू 18 मई से 20 मई तक सब्सक्रिप्शन के लिए खुला रहेगा, जबकि इसकी संभावित लिस्टिंग 25 मई को एनएसई एसएमई प्लेटफॉर्म पर हो सकती है. कंपनी ने आईपीओ का प्राइस बैंड 52 से 55 रुपये प्रति शेयर तय किया है. निवेशक न्यूनतम 2,000 शेयरों के लिए बोली लगा सकेंगे, जबकि रिटेल निवेशकों को कम से कम दो लॉट यानी 4,000 शेयरों के लिए आवेदन करना होगा, जिसके लिए ऊपरी प्राइस बैंड पर लगभग 2.2 लाख रुपये का निवेश करना पड़ेगा. छोटे गैर-संस्थागत निवेशकों (NII) के लिए न्यूनतम आवेदन आकार 6,000 शेयर तय किया गया है, जिसकी कीमत करीब 3.3 लाख रुपये होगी. यह आईपीओ पूरी तरह फ्रेश इश्यू पर आधारित है, यानी इसमें ऑफर फॉर सेल (OFS) का कोई हिस्सा शामिल नहीं है और सार्वजनिक निर्गम से मिलने वाली पूरी राशि कंपनी को प्राप्त होगी. बाजार के प्रतिभागी लिस्टिंग से पहले ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP), सब्सक्रिप्शन डिमांड और निवेशकों की प्रतिक्रिया पर भी नजर बनाए हुए हैं, हालांकि GMP अनौपचारिक होता है और इसमें उतार-चढ़ाव संभव है. बोली प्रक्रिया के दौरान विभिन्न श्रेणियों में सब्सक्रिप्शन ट्रेंड पर निवेशकों की खास नजर रहने की उम्मीद है.
निवेशक GMP और वैल्यूएशन पर रखेंगे नजर
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार निवेशक इन आईपीओ में ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP), वैल्यूएशन, सब्सक्रिप्शन डिमांड और कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन पर करीबी नजर रखेंगे. विश्लेषकों का कहना है कि निवेशकों की रुचि काफी हद तक संबंधित सेक्टर के आउटलुक, शेयरों की कीमत और कंपनियों की भविष्य की विकास संभावनाओं पर निर्भर करेगी.
प्राथमिक बाजार में बनी हुई है तेजी
भारत के प्राथमिक बाजार में खुदरा निवेशकों की मजबूत भागीदारी और लिस्टिंग गेन की उम्मीदों के चलते लगातार गतिविधियां बनी हुई हैं. हालांकि विशेषज्ञों ने निवेशकों को सलाह दी है कि किसी भी आईपीओ में निवेश से पहले कंपनी के बिजनेस मॉडल, वित्तीय स्थिति और वैल्यूएशन का सावधानी से आकलन जरूर करें.
यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है, जब आईजीएल ने 15 मई को ही सीएनजी के दाम में 2 रुपये प्रति किलो की वृद्धि की थी. उस समय दिल्ली में सीएनजी की कीमत 79.09 रुपये प्रति किलो कर दी गई थी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
वैश्विक ऊर्जा कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के बीच इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने दिल्ली-एनसीआर में कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) की कीमतों में फिर इजाफा कर दिया है. कंपनी ने अपने नेटवर्क में सीएनजी की कीमत 1 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ा दी है. नई दरें 17 मई सुबह 6 बजे से लागू हो गई हैं. ताजा बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में सीएनजी की खुदरा कीमत पहली बार 80 रुपये प्रति किलो के पार पहुंच गई है. अब राजधानी में सीएनजी 80.09 रुपये प्रति किलोग्राम मिलेगी, जबकि नोएडा और गाजियाबाद में उपभोक्ताओं को 88.70 रुपये प्रति किलोग्राम चुकाने होंगे.
दो दिन में दूसरी बार बढ़े दाम
यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है, जब आईजीएल ने 15 मई को ही सीएनजी के दाम में 2 रुपये प्रति किलो की वृद्धि की थी. उस समय दिल्ली में सीएनजी की कीमत 79.09 रुपये प्रति किलो कर दी गई थी. अब दो दिन बाद फिर 1 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी की गई है.
वैश्विक ऊर्जा संकट का असर
आईजीएल के मुताबिक, इनपुट गैस की लागत में बढ़ोतरी और अमेरिकी डॉलर की मजबूती के असर को आंशिक रूप से संतुलित करने के लिए कीमतों में संशोधन किया गया है. कंपनी ने कहा कि बढ़ती लागत के बावजूद उपभोक्ताओं पर सीमित बोझ डालने की कोशिश की गई है.
15 मई को हुई पिछली बढ़ोतरी के दौरान केंद्र सरकार ने भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा किया था. दिल्ली में पेट्रोल करीब 3 रुपये प्रति लीटर बढ़कर 97.77 रुपये और डीजल लगभग 3 रुपये बढ़कर 90.67 रुपये प्रति लीटर हो गया था.
पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी तेल कीमतें
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में तेजी पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण देखी जा रही है. अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष ने वैश्विक कच्चे तेल की सप्लाई को प्रभावित किया है, जिससे ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है.
विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान के पास स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बाधाओं के कारण तेल और एलएनजी की आपूर्ति प्रभावित हो रही है. यह समुद्री मार्ग दुनिया के करीब पांचवें हिस्से के तेल और एलएनजी शिपमेंट का प्रमुख रास्ता माना जाता है. वैश्विक एलएनजी कीमतें भी तीन साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं.
यात्रियों और महंगाई पर पड़ेगा असर
दिल्ली-एनसीआर में सार्वजनिक परिवहन का बड़ा हिस्सा सीएनजी पर आधारित है. ऐसे में सीएनजी कीमतों में बढ़ोतरी का असर यात्रियों और आम उपभोक्ताओं पर पड़ना तय माना जा रहा है. उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि परिवहन लागत बढ़ने से खुदरा महंगाई पर भी दबाव बढ़ सकता है.
इस बीच इंडियन ऑयल कार्पोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी सरकारी तेल कंपनियों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहने के कारण इन कंपनियों को रोजाना करीब 1,600 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है.
पीएम मोदी ने की ईंधन बचत की अपील
पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से जीवाश्म ईंधन की खपत कम करने और मितव्ययिता अपनाने की अपील की थी. उन्होंने कहा था कि भारत की आयातित ईंधन पर निर्भरता विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ाती है.