12 से 15 अगस्त तक भारत मंडपम में देश के सबसे बड़े व्यापार एक्सपो का आयोजन होगा, जिसमें ‘लोकल टू ग्लोबल’ को नई ताकत मिलेगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
भारत को वैश्विक व्यापार और विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को भारत मंडपम, प्रगति मैदान में भारतीय व्यापार महोत्सव (BVM) की आधिकारिक वेबसाइट लॉन्च की.
यह महोत्सव 12 से 15 अगस्त तक भारत मंडपम में आयोजित किया जाएगा. इसका संयुक्त आयोजन आईटीपीओ और कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) द्वारा किया जा रहा है. आयोजन का उद्देश्य भारत को केवल उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि वैश्विक विनिर्माण और निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करना है.
भारत तेजी से बन रहा वैश्विक आर्थिक शक्ति
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि भारत आज दुनिया में तेजी से एक मजबूत आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रहा है. उन्होंने कहा कि यदि व्यापारी, उद्योग जगत, एमएसएमई, स्टार्टअप्स और उद्यमी मिलकर काम करें तो भारत आसानी से 1 ट्रिलियन डॉलर निर्यात का लक्ष्य हासिल कर सकता है. उन्होंने कहा कि भारत कौशल, प्रतिभा और ज्ञान से भरपूर देश है. यदि भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता को और बेहतर बनाया जाए तो दुनिया में ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ सकती है.
‘वोकल फॉर लोकल’ को मिलेगा नया मंच
सांसद और कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि भारतीय व्यापार महोत्सव केवल एक एक्सपो नहीं, बल्कि व्यापारियों, एमएसएमई, महिला उद्यमियों, स्टार्टअप्स और कारीगरों को सशक्त बनाने का राष्ट्रीय अभियान है. उन्होंने कहा कि यह आयोजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ विजन को नई गति देगा. साथ ही भारतीय उत्पादों और सेवाओं को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगा.
प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि भारत की पहचान अब सिर्फ एक बड़े उपभोक्ता बाजार के रूप में नहीं, बल्कि एक मजबूत मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करने की जरूरत है.
देशभर से जुटे व्यापार और उद्योग जगत के प्रतिनिधि
कार्यक्रम के दौरान पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच व्यापार और उद्योग क्षेत्र के लिए रणनीतिक कदमों पर भी चर्चा हुई. सम्मेलन में देश के 27 राज्यों से करीब 150 प्रमुख व्यापारिक नेता, उद्योगपति, निर्यातक, स्टार्टअप्स, महिला उद्यमी और विभिन्न व्यापार संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए. इस दौरान भारत को वैश्विक सप्लाई चेन और सोर्सिंग हब बनाने की रणनीतियों पर भी मंथन किया गया.
भारतीय उत्पादों को मिलेगा वैश्विक मंच
आईटीपीओ के अध्यक्ष जावेद अशरफ ने कहा कि भारतीय व्यापार महोत्सव देश के रिटेल व्यापार की छवि बदलने वाला ऐतिहासिक आयोजन साबित हो सकता है. वहीं, आईटीपीओ के प्रबंध निदेशक नीरज खरवाल ने कहा कि यह महोत्सव भारत की उत्पादन क्षमता, पारंपरिक उत्पादों, नवाचार और उद्यमशीलता को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने का सशक्त माध्यम बनेगा. उन्होंने कहा कि इस पहल से एमएसएमई, महिला उद्यमियों, स्टार्टअप्स और कारीगरों को नए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक अवसर मिलेंगे.
वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग द्वारा जारी निर्देश के मुताबिक सरकारी बैंकों, बीमा कंपनियों और अन्य वित्तीय संस्थानों को गैर-जरूरी खर्चों में कटौती करने को कहा गया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
बढ़ते वैश्विक आर्थिक दबाव और पश्चिम एशिया तनाव के बीच केंद्र सरकार ने सरकारी बैंकों, बीमा कंपनियों और वित्तीय संस्थानों में बड़े स्तर पर खर्च कटौती अभियान शुरू कर दिया है. वित्त मंत्रालय ने संस्थानों को विदेशी यात्राएं सीमित करने, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को बढ़ावा देने और पेट्रोल-डीजल वाहनों की जगह चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को अपनाने के निर्देश दिए हैं.
सरकारी संस्थानों में खर्च नियंत्रण पर फोकस
वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग द्वारा जारी निर्देश के मुताबिक सरकारी बैंकों, बीमा कंपनियों और अन्य वित्तीय संस्थानों को गैर-जरूरी खर्चों में कटौती करने को कहा गया है. इस फैसले का असर देश के बड़े सरकारी संस्थानों और लाखों कर्मचारियों पर पड़ेगा. इस अभियान के दायरे में भारतीय स्टेट बैंक (SBI), बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) जैसी प्रमुख संस्थाएं शामिल हैं.
अब ज्यादातर बैठकें होंगी वर्चुअल
सरकार ने निर्देश दिया है कि सभी बैठकें, समीक्षा और कंसल्टेशन अधिकतम स्तर तक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित किए जाएं. केवल उन्हीं बैठकों में फिजिकल उपस्थिति अनिवार्य होगी, जहां इसकी वास्तविक जरूरत हो. सरकार का मानना है कि इससे यात्रा और प्रशासनिक खर्चों में बड़ी बचत होगी.
विदेशी यात्राओं पर सख्ती
नए निर्देशों के तहत चेयरपर्सन, प्रबंध निदेशक (MD) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) समेत शीर्ष अधिकारियों की विदेशी यात्राओं को सीमित रखने को कहा गया है. जहां संभव हो, अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों और बैठकों में वर्चुअल माध्यम से भाग लेने को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं.
इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने की तैयारी
सरकार ने सरकारी बैंकों और वित्तीय संस्थानों को किराये पर ली गई पेट्रोल और डीजल कारों की जगह इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने का लक्ष्य तय करने को कहा है. आदेश में कहा गया है कि मुख्यालय और शाखा कार्यालयों में इस्तेमाल होने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से EV में बदला जाए, ताकि ईंधन लागत कम हो और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिले.
पीएम मोदी की अपील के बाद तेज हुआ अभियान
यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील के बाद उठाया गया है, जिसमें उन्होंने सरकारी विभागों और संस्थानों से मितव्ययिता अपनाने और खर्चों में संयम बरतने को कहा था. सरकार वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के असर को लेकर सतर्क नजर आ रही है.
पश्चिम एशिया तनाव से बढ़ी आर्थिक चिंता
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगा है. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई और चालू खाते के घाटे पर दबाव बढ़ने की आशंका है. इसी बीच भारतीय रुपया भी इस साल एशिया की सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में शामिल हो गया है और डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच चुका है.
राज्यों में भी शुरू हुए बचत के प्रयास
लागत में कटौती के लिए कई राज्य सरकारों ने कर्मचारियों को सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम की अनुमति देने जैसे कदम भी उठाए हैं. सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक खर्चों को नियंत्रित करना और संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है.
### फिजिकल गोल्ड की झंझट से मिलेगी राहत. निवेशकों को मिलेगा सुरक्षित और पारदर्शी डिजिटल गोल्ड प्लेटफॉर्म
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने डिजिटल गोल्ड निवेश को नई दिशा देते हुए इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स (EGR) की ट्रेडिंग शुरू कर दी है. यह व्यवस्था निवेशकों को डिजिटल माध्यम से सोने में निवेश का अवसर देगी, जबकि इसके पीछे वास्तविक फिजिकल गोल्ड सुरक्षित वॉल्ट में रखा जाएगा. NSE का यह कदम भारत के गोल्ड मार्केट में बड़ा बदलाव माना जा रहा है. इसका उद्देश्य गोल्ड ट्रेडिंग को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और आसान बनाना है, ताकि निवेशकों को शुद्धता, स्टोरेज और चोरी जैसी समस्याओं से राहत मिल सके.
18 मई से शुरू हुई ट्रेडिंग
एक्सचेंज के अनुसार EGR ट्रेडिंग की शुरुआत 18 मई से हो गई है. बाजार सोमवार से शुक्रवार सुबह 9 बजे से रात 11:30 बजे तक खुला रहेगा, जबकि अमेरिकी डेलाइट सेविंग टाइम के दौरान यह समय रात 11:55 बजे तक रहेगा. इस प्रणाली में सेटलमेंट T+1 साइकिल के आधार पर होगा, जिससे निवेशकों को तेज और व्यवस्थित सेटलमेंट सुविधा मिलेगी.
देशभर में बढ़ाया जाएगा नेटवर्क
NSE ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स को बाजार से शानदार प्रतिक्रिया मिली है. फिलहाल अहमदाबाद और मुंबई में वैल्यूइंग और कलेक्शन सेंटर शुरू किए जा चुके हैं. इसके अलावा दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और बेंगलुरु में भी नए सेंटर जल्द सक्रिय किए जाएंगे. एक्सचेंज का लक्ष्य आने वाले समय में देशभर में करीब 120 सेंटर स्थापित करने का है.
क्या है इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट (EGR)?
इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट यानी EGR, सेबी द्वारा विनियमित वॉल्ट में रखे गए फिजिकल गोल्ड के स्वामित्व का डिजिटल प्रमाण है. प्रत्येक EGR सुरक्षित रूप से संग्रहित सोने की एक निश्चित मात्रा का प्रतिनिधित्व करता है. इस सोने को लाइसेंस प्राप्त वॉल्ट प्रदाताओं द्वारा प्रमाणित और प्रबंधित किया जाता है. निवेशकों की होल्डिंग डीमैट अकाउंट में शेयरों और अन्य प्रतिभूतियों की तरह दिखाई देगी.
छोटे निवेशकों के लिए भी आसान होगा निवेश
EGR की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें निवेशक अपनी सुविधा के अनुसार छोटी या बड़ी मात्रा में सोना खरीद सकते हैं. यह 1 किलोग्राम, 100 ग्राम, 10 ग्राम, 1 ग्राम और यहां तक कि 100 मिलीग्राम जैसे विभिन्न आकारों में उपलब्ध होगा. इससे छोटे निवेशकों के लिए भी गोल्ड निवेश आसान और सुलभ बन जाएगा.
फिजिकल गोल्ड की परेशानियों से मिलेगी राहत
भारत में सोना सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि परंपरा और संपत्ति का प्रतीक भी माना जाता है. हालांकि फिजिकल गोल्ड खरीदने में शुद्धता की जांच, सुरक्षित स्टोरेज, चोरी का खतरा और दोबारा बेचने पर नुकसान जैसी कई चुनौतियां रहती हैं. EGR सिस्टम इन समस्याओं को कम करने का प्रयास करेगा और निवेशकों को अधिक सुरक्षित डिजिटल विकल्प उपलब्ध कराएगा.
अभी भी मौजूद हैं कुछ चुनौतियां
विशेषज्ञों का मानना है कि EGR भारत के गोल्ड इकोसिस्टम में बड़ा बदलाव ला सकता है, लेकिन इसके सामने कुछ चुनौतियां भी हैं. फिलहाल सबसे बड़ी चिंता बाजार में पर्याप्त लिक्विडिटी की है. इसके अलावा ब्रोकर प्लेटफॉर्म्स को भी इस सिस्टम के साथ बड़े स्तर पर एकीकृत करने की जरूरत होगी. वहीं भारत में बड़ी संख्या में लोग अब भी फिजिकल गोल्ड को प्राथमिकता देते हैं, जिससे डिजिटल गोल्ड को व्यापक स्तर पर अपनाने में समय लग सकता है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
सरकार ने फरवरी में ‘नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन’ (NMP 2.0) की घोषणा की थी. इसके तहत वित्त वर्ष 2026 से 2030 के बीच सिर्फ सड़क क्षेत्र से 4.42 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश में तेजी से बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को नई रफ्तार देने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा वित्तीय प्लान तैयार किया है. सरकार अगले वित्त वर्ष 2026-27 में देशभर के 28 प्रमुख नेशनल हाईवे एसेट्स को लीज पर देकर करीब 35 हजार करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में है. इस रकम का इस्तेमाल नई सड़कें, एक्सप्रेसवे और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के निर्माण में किया जाएगा.
सरकार की यह रणनीति ‘एसेट मोनेटाइजेशन’ मॉडल पर आधारित है, जिसके तहत पहले से चालू और राजस्व देने वाली सड़कों का संचालन तय अवधि के लिए निजी कंपनियों और निवेशकों को सौंपा जाएगा. बदले में सरकार को एकमुश्त बड़ी राशि प्राप्त होगी.
NHAI ने तैयार किया पूरा ब्लूप्रिंट
नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने इस योजना का खाका तैयार कर लिया है. करीब 1,800 किलोमीटर लंबे 28 हाईवे स्ट्रेच इस मोनेटाइजेशन योजना में शामिल किए गए हैं. इन परियोजनाओं को पब्लिक-प्राइवेट इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvIT) और टोल-ऑपरेट-ट्रांसफर (TOT) मॉडल के जरिए लागू किया जाएगा. इसके तहत सात इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (EPC) प्रोजेक्ट भी शामिल किए गए हैं.
हरियाणा और यूपी के हाईवे पर निवेशकों की नजर
जानकारी के अनुसार, इस नई सूची में सबसे ज्यादा हाईवे एसेट्स हरियाणा से चुने गए हैं, जबकि उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर है. इन राज्यों के प्रमुख हाईवे ट्रैफिक और टोल कलेक्शन के लिहाज से निवेशकों के लिए आकर्षक माने जा रहे हैं. सरकार निवेश का जोखिम कम करने के लिए हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) वाले एसेट्स को प्राथमिकता दे रही है. इससे घरेलू और विदेशी संस्थागत निवेशकों का भरोसा बढ़ने की उम्मीद है.
हाल ही में सरकार ने सॉवरेन वेल्थ फंड और पेंशन फंड को सीधे ग्रीनफील्ड टोल रोड परियोजनाओं में निवेश की अनुमति भी दी है. माना जा रहा है कि इससे हाईवे सेक्टर में बड़े निवेश का रास्ता खुलेगा.
NMP 2.0 से इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगा बड़ा बूस्ट
सरकार ने फरवरी में ‘नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन’ (NMP 2.0) की घोषणा की थी. इसके तहत वित्त वर्ष 2026 से 2030 के बीच सिर्फ सड़क क्षेत्र से 4.42 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है. सरकार को उम्मीद है कि सिर्फ वित्त वर्ष 2026-27 में ही मोनेटाइजेशन प्रक्रिया से करीब 68,770 करोड़ रुपये जुटाए जा सकेंगे.
पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में सड़क परिवहन मंत्रालय ने इसी मॉडल के जरिए करीब 29 हजार करोड़ रुपये जुटाए थे. इसमें 9 हजार करोड़ रुपये चार राज्यों की 260 किलोमीटर लंबी पांच सड़कों के पब्लिक InvIT के जरिए आए थे.
आम लोगों को क्या होगा फायदा
विशेषज्ञों के मुताबिक, सरकार जब पुरानी सड़कों से आय जुटाकर उसे नए प्रोजेक्ट्स में निवेश करती है, तो इससे देशभर में कनेक्टिविटी बेहतर होती है. नए हाईवे बनने से यात्रा का समय घटता है और माल ढुलाई की लागत कम होती है, जिसका असर महंगाई पर भी पड़ सकता है. इसके अलावा शेयर बाजार में निवेश करने वाले लोगों के लिए InvIT के जरिए सरकारी हाईवे परियोजनाओं में निवेश कर स्थिर रिटर्न कमाने का नया विकल्प भी उपलब्ध होगा.
सरकार आने वाले तीन से पांच वर्षों में करीब 1,500 किलोमीटर अतिरिक्त चालू सड़कों को भी इस मॉडल में शामिल करने की तैयारी कर रही है. यानी आने वाले समय में देश के हाईवे सिर्फ परिवहन का माध्यम नहीं, बल्कि निवेश और आय का बड़ा जरिया भी बन सकते हैं.
NFP सम्पूर्णा फूड्स अपने आईपीओ के जरिए 44.6 लाख नए शेयर जारी करेगी. यह एनएसई एसएमई प्लेटफॉर्म का इश्यू 18 मई से 20 मई तक सब्सक्रिप्शन के लिए खुला रहेगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत का आईपीओ (IPO) बाजार एक बार फिर व्यस्त रहने वाला है. इस सप्ताह लघु एवं मध्यम उद्यम (SME) सेगमेंट में चार कंपनियां अपने आईपीओ लॉन्च करने जा रही हैं. इनमें क्लाउड किचन और फूड ब्रांड से लेकर निर्माण समाधान और एक्सपोर्ट कारोबार से जुड़ी कंपनियां शामिल हैं. इस सप्ताह जिन कंपनियों के आईपीओ खुलने वाले हैं उनमें NFP सम्पूर्णा फूड्स, टीमटेक फॉर्मवर्क सॉल्यूशंस, वेगोरामा पंजाबी अंगीठी और हरिकांता ओवरसीज शामिल हैं. इन आईपीओ के जरिए निवेशकों को फूड, कंस्ट्रक्शन और निर्यात जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में निवेश का अवसर मिलेगा.
फूड और क्लाउड किचन कारोबार पर निवेशकों की नजर
इस सप्ताह आने वाले आईपीओ में वेगोरामा पंजाबी अंगीठी खास चर्चा में है, जो क्लाउड किचन और फूड ब्रांड के तौर पर कारोबार करती है. उपभोक्ता आधारित कारोबार में निवेशकों की लगातार बढ़ती रुचि के बीच इस आईपीओ पर बाजार की खास नजर रहने की संभावना है. इसके अलावा पैकेज्ड फूड कंपनी NFP सम्पूर्णा फूड्स भी अपना आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए खोलेगी. वहीं टीमटेक फॉर्मवर्क सॉल्यूशंस निर्माण समाधान क्षेत्र में काम करती है और हरिकांता ओवरसीज निर्यात आधारित कारोबार से जुड़ी कंपनी है.
NFP सम्पूर्णा फूड्स का आईपीओ की डिटेल
NFP सम्पूर्णा फूड्स का आईपीओ करीब 24.53 करोड़ रुपये जुटाने के उद्देश्य से लाया जा रहा है, जिसके तहत कंपनी 44.6 लाख नए शेयर जारी करेगी. यह एनएसई एसएमई प्लेटफॉर्म का इश्यू 18 मई से 20 मई तक सब्सक्रिप्शन के लिए खुला रहेगा, जबकि इसकी संभावित लिस्टिंग 25 मई को एनएसई एसएमई प्लेटफॉर्म पर हो सकती है. कंपनी ने आईपीओ का प्राइस बैंड 52 से 55 रुपये प्रति शेयर तय किया है. निवेशक न्यूनतम 2,000 शेयरों के लिए बोली लगा सकेंगे, जबकि रिटेल निवेशकों को कम से कम दो लॉट यानी 4,000 शेयरों के लिए आवेदन करना होगा, जिसके लिए ऊपरी प्राइस बैंड पर लगभग 2.2 लाख रुपये का निवेश करना पड़ेगा. छोटे गैर-संस्थागत निवेशकों (NII) के लिए न्यूनतम आवेदन आकार 6,000 शेयर तय किया गया है, जिसकी कीमत करीब 3.3 लाख रुपये होगी. यह आईपीओ पूरी तरह फ्रेश इश्यू पर आधारित है, यानी इसमें ऑफर फॉर सेल (OFS) का कोई हिस्सा शामिल नहीं है और सार्वजनिक निर्गम से मिलने वाली पूरी राशि कंपनी को प्राप्त होगी. बाजार के प्रतिभागी लिस्टिंग से पहले ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP), सब्सक्रिप्शन डिमांड और निवेशकों की प्रतिक्रिया पर भी नजर बनाए हुए हैं, हालांकि GMP अनौपचारिक होता है और इसमें उतार-चढ़ाव संभव है. बोली प्रक्रिया के दौरान विभिन्न श्रेणियों में सब्सक्रिप्शन ट्रेंड पर निवेशकों की खास नजर रहने की उम्मीद है.
निवेशक GMP और वैल्यूएशन पर रखेंगे नजर
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार निवेशक इन आईपीओ में ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP), वैल्यूएशन, सब्सक्रिप्शन डिमांड और कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन पर करीबी नजर रखेंगे. विश्लेषकों का कहना है कि निवेशकों की रुचि काफी हद तक संबंधित सेक्टर के आउटलुक, शेयरों की कीमत और कंपनियों की भविष्य की विकास संभावनाओं पर निर्भर करेगी.
प्राथमिक बाजार में बनी हुई है तेजी
भारत के प्राथमिक बाजार में खुदरा निवेशकों की मजबूत भागीदारी और लिस्टिंग गेन की उम्मीदों के चलते लगातार गतिविधियां बनी हुई हैं. हालांकि विशेषज्ञों ने निवेशकों को सलाह दी है कि किसी भी आईपीओ में निवेश से पहले कंपनी के बिजनेस मॉडल, वित्तीय स्थिति और वैल्यूएशन का सावधानी से आकलन जरूर करें.
यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है, जब आईजीएल ने 15 मई को ही सीएनजी के दाम में 2 रुपये प्रति किलो की वृद्धि की थी. उस समय दिल्ली में सीएनजी की कीमत 79.09 रुपये प्रति किलो कर दी गई थी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
वैश्विक ऊर्जा कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के बीच इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने दिल्ली-एनसीआर में कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) की कीमतों में फिर इजाफा कर दिया है. कंपनी ने अपने नेटवर्क में सीएनजी की कीमत 1 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ा दी है. नई दरें 17 मई सुबह 6 बजे से लागू हो गई हैं. ताजा बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में सीएनजी की खुदरा कीमत पहली बार 80 रुपये प्रति किलो के पार पहुंच गई है. अब राजधानी में सीएनजी 80.09 रुपये प्रति किलोग्राम मिलेगी, जबकि नोएडा और गाजियाबाद में उपभोक्ताओं को 88.70 रुपये प्रति किलोग्राम चुकाने होंगे.
दो दिन में दूसरी बार बढ़े दाम
यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है, जब आईजीएल ने 15 मई को ही सीएनजी के दाम में 2 रुपये प्रति किलो की वृद्धि की थी. उस समय दिल्ली में सीएनजी की कीमत 79.09 रुपये प्रति किलो कर दी गई थी. अब दो दिन बाद फिर 1 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी की गई है.
वैश्विक ऊर्जा संकट का असर
आईजीएल के मुताबिक, इनपुट गैस की लागत में बढ़ोतरी और अमेरिकी डॉलर की मजबूती के असर को आंशिक रूप से संतुलित करने के लिए कीमतों में संशोधन किया गया है. कंपनी ने कहा कि बढ़ती लागत के बावजूद उपभोक्ताओं पर सीमित बोझ डालने की कोशिश की गई है.
15 मई को हुई पिछली बढ़ोतरी के दौरान केंद्र सरकार ने भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा किया था. दिल्ली में पेट्रोल करीब 3 रुपये प्रति लीटर बढ़कर 97.77 रुपये और डीजल लगभग 3 रुपये बढ़कर 90.67 रुपये प्रति लीटर हो गया था.
पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी तेल कीमतें
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में तेजी पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण देखी जा रही है. अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष ने वैश्विक कच्चे तेल की सप्लाई को प्रभावित किया है, जिससे ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है.
विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान के पास स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बाधाओं के कारण तेल और एलएनजी की आपूर्ति प्रभावित हो रही है. यह समुद्री मार्ग दुनिया के करीब पांचवें हिस्से के तेल और एलएनजी शिपमेंट का प्रमुख रास्ता माना जाता है. वैश्विक एलएनजी कीमतें भी तीन साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं.
यात्रियों और महंगाई पर पड़ेगा असर
दिल्ली-एनसीआर में सार्वजनिक परिवहन का बड़ा हिस्सा सीएनजी पर आधारित है. ऐसे में सीएनजी कीमतों में बढ़ोतरी का असर यात्रियों और आम उपभोक्ताओं पर पड़ना तय माना जा रहा है. उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि परिवहन लागत बढ़ने से खुदरा महंगाई पर भी दबाव बढ़ सकता है.
इस बीच इंडियन ऑयल कार्पोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी सरकारी तेल कंपनियों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहने के कारण इन कंपनियों को रोजाना करीब 1,600 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है.
पीएम मोदी ने की ईंधन बचत की अपील
पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से जीवाश्म ईंधन की खपत कम करने और मितव्ययिता अपनाने की अपील की थी. उन्होंने कहा था कि भारत की आयातित ईंधन पर निर्भरता विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ाती है.
3500 करोड़ रुपये के सौदे से बदलेगा भारतीय बीमा बाजार का समीकरण, कंपनी एचसीएल ग्रुप के साथ नया हेल्थ इंश्योरेंस वेंचर भी लॉन्च करेगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
ब्रिटेन की वैश्विक बीमा कंपनी प्रूडेंशियल पीएलसी ने भारतीय बीमा बाजार में बड़ा कदम उठाते हुए भारती एंटरप्राइजेज प्रवर्तित भारती लाइफ इंश्योरेंस में 75 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने का ऐलान किया है. यह सौदा करीब 3500 करोड़ रुपये में होगा और इसके लिए नियामकीय मंजूरियां ली जाएंगी. इसके साथ ही कंपनी ने एचसीएल ग्रुप के साथ मिलकर हेल्थ इंश्योरेंस क्षेत्र में नया संयुक्त उद्यम शुरू करने की भी घोषणा की है.
आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल में हिस्सेदारी घटाएगी कंपनी
प्रूडेंशियल पीएलसी ने बताया कि वह आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस में अपनी हिस्सेदारी लगभग 22 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी करेगी. कंपनी के अनुसार, हिस्सेदारी बिक्री से प्राप्त राशि का एक हिस्सा भारती लाइफ के विस्तार में लगाया जाएगा, जबकि शेष पूंजी कंपनी के मुक्त अधिशेष में रखी जाएगी.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रूडेंशियल अपनी हिस्सेदारी ब्लॉक डील के जरिए सेकंडरी मार्केट में बेचने की तैयारी कर रही है. वहीं फरवरी में आईसीआईसीआई बैंक बोर्ड ने बीमा कंपनी में अतिरिक्त 2 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने को मंजूरी दी थी.
नियमों के कारण उठाना पड़ा यह कदम
मौजूदा नियमों के तहत कोई भी कंपनी एक से अधिक बीमा कंपनियों में 10 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी नहीं रख सकती. इसी वजह से प्रूडेंशियल को आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल में अपनी हिस्सेदारी कम करनी पड़ रही है. वर्तमान में आईसीआईसीआई बैंक की कंपनी में 50.89 फीसदी हिस्सेदारी है.
यह हाल के समय का दूसरा बड़ा उदाहरण है जब किसी वैश्विक बीमा कंपनी ने पुरानी साझेदारी से बाहर निकलकर नई रणनीतिक साझेदारी चुनी है. इससे पहले अलायंज ने बजाज फिनसर्व के साथ साझेदारी समाप्त कर जियो फाइनैंशियल के साथ हाथ मिलाने का फैसला किया था.
भारती लाइफ में हिस्सेदारी का नया समीकरण
फिलहाल भारती एंटरप्राइजेज के पास भारती लाइफ वेंचर्स के जरिए 85 फीसदी हिस्सेदारी है, जबकि 360 वन एसेट मैनेजमेंट के पास 15 फीसदी हिस्सेदारी मौजूद है.
सौदा पूरा होने के बाद 360 वन पूरी तरह बाहर हो जाएगी और भारती एंटरप्राइजेज की हिस्सेदारी घटकर 25 फीसदी रह जाएगी. वहीं प्रूडेंशियल कंपनी में नियंत्रणकारी हिस्सेदारी हासिल कर लेगी.
भारत को बताया रणनीतिक बाजार
प्रूडेंशियल पीएलसी ने भारत को अपने लिए बेहद आकर्षक और रणनीतिक बाजार बताया है. कंपनी का कहना है कि इस सौदे से भारतीय ग्राहकों की बीमा जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा किया जा सकेगा.
कंपनी ने कहा कि भारती की मजबूत स्थानीय पहुंच और प्रूडेंशियल की वैश्विक बीमा विशेषज्ञता मिलकर भारतीय ग्राहकों तक जीवन और स्वास्थ्य सुरक्षा समाधान पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएंगे.
एचसीएल के साथ हेल्थ इंश्योरेंस कारोबार में एंट्री
प्रूडेंशियल पीएलसी ने एचसीएल ग्रुप प्रवर्तकों के साथ मिलकर ‘प्रूडेंशियल एचसीएल हेल्थ इंश्योरेंस’ शुरू करने की योजना भी घोषित की है. कंपनी फिलहाल नियामकीय मंजूरियों पर काम कर रही है और 2026 में कारोबार शुरू होने की उम्मीद है.
सौदा पूरा होने के बाद भारत में प्रूडेंशियल के कारोबार में भारती लाइफ इंश्योरेंस में बहुल हिस्सेदारी के साथ-साथ नई हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी और दो सूचीबद्ध कंपनियों में अल्पांश हिस्सेदारी शामिल होगी.
क्या बोले कंपनी और भारती समूह के प्रमुख
प्रूडेंशियल पीएलसी के सीईओ अनिल वाधवानी ने कहा कि भारत कंपनी के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बाजार है. उन्होंने कहा कि लगभग 180 वर्षों की वैश्विक बीमा विशेषज्ञता और भारती की मजबूत स्थानीय उपस्थिति मिलकर भारतीय ग्राहकों की बचत और सुरक्षा जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा करेगी.
वहीं भारती एंटरप्राइजेज के संस्थापक और चेयरमैन सुनील भारती मित्तल ने कहा कि प्रूडेंशियल का वैश्विक अनुभव और भारती का मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड भारतीय जीवन बीमा क्षेत्र की विशाल संभावनाओं को नई दिशा देगा. उन्होंने कहा कि यह साझेदारी कर्मचारियों के लिए नए अवसर पैदा करेगी और भारत-ब्रिटेन रणनीतिक संबंधों को भी मजबूत बनाएगी.
प्रधानमंत्री मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के बीच हुई वार्ता में दोनों देशों ने राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा और तकनीकी सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय नीदरलैंड यात्रा भारत के लिए तकनीक, व्यापार और रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से बेहद अहम साबित हुई है. इस दौरान भारत और नीदरलैंड के बीच सेमीकंडक्टर, हरित ऊर्जा, रक्षा सहयोग, महत्वपूर्ण खनिज, कृषि, डेरी और समुद्री लॉजिस्टिक्स समेत 17 प्रमुख क्षेत्रों में बड़े समझौतों पर सहमति बनी. दोनों देशों ने अपने रिश्तों को “रणनीतिक साझेदारी” के स्तर तक ले जाने का फैसला किया, जिससे आने वाले वर्षों में व्यापार, निवेश और हाईटेक सेक्टर में सहयोग को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है.
भारत-नीदरलैंड रिश्तों को मिला रणनीतिक साझेदारी का दर्जा
प्रधानमंत्री मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के बीच हुई वार्ता में दोनों देशों ने राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा और तकनीकी सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई. दोनों पक्षों ने नियमित और योजनाबद्ध सहयोग के जरिए संबंधों को नई ऊंचाई देने के लिए रणनीतिक साझेदारी की कार्य योजना तैयार करने का फैसला किया.
नीदरलैंड यूरोप में भारत का एक बड़ा व्यापारिक साझेदार है. वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 27.8 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि 55.6 अरब डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के साथ नीदरलैंड भारत का चौथा सबसे बड़ा निवेशक बना हुआ है.
सेमीकंडक्टर सेक्टर में बड़ा कदम
यात्रा के दौरान सबसे अहम समझौता गुजरात के धोलेरा में भारत के पहले हाईटेक सेमीकंडक्टर फैब को लेकर हुआ. टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और डच कंपनी ASML के बीच साझेदारी को दोनों प्रधानमंत्रियों ने ऐतिहासिक बताया.
ASML दुनिया की अग्रणी कंपनी है, जो सेमीकंडक्टर चिप निर्माण के लिए जरूरी हाई-प्रिसीजन लिथोग्राफी उपकरण बनाती है. इस साझेदारी से भारत की सेमीकंडक्टर निर्माण क्षमता को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
इसके अलावा इंडो-डच सेमीकंडक्टर ऑनलाइन स्कूल और “ब्रेन ब्रिज” कार्यक्रम के तहत डच विश्वविद्यालयों और भारतीय तकनीकी संस्थानों के बीच सहयोग को भी मंजूरी दी गई. इसमें IISc, IIT दिल्ली, IIT मुंबई, IIT चेन्नई और IIT गांधीनगर जैसे संस्थान शामिल होंगे.
ग्रीन एनर्जी और हरित हाइड्रोजन पर फोकस
भारत और नीदरलैंड ने हरित हाइड्रोजन विकास के लिए साझा रोडमैप लॉन्च किया. इसके तहत स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा और ग्रीन ट्रांजिशन में सहयोग बढ़ाया जाएगा. नीदरलैंड नीति आयोग के साथ मिलकर क्षमता निर्माण में सहयोग करेगा, जबकि ग्रोनिंगन यूनिवर्सिटी और भारतीय IIT संस्थानों के बीच शैक्षणिक साझेदारी को भी बढ़ावा दिया जाएगा.
रक्षा और समुद्री सहयोग को बढ़ावा
दोनों देशों ने रक्षा उद्योगों और रिसर्च संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए रक्षा औद्योगिक कार्य योजना पर काम करने का फैसला किया. साथ ही संयुक्त त्रि-सेवा वार्ता और रक्षा तकनीक सहयोग के नए रास्ते तलाशने पर भी सहमति बनी.
भारत को रणनीतिक “ग्रीन और डिजिटल मैरीटाइम कॉरिडोर” विकसित करने में भी डच विशेषज्ञता का लाभ मिलेगा. रॉटरडैम बंदरगाह को भारतीय निर्यातकों के लिए यूरोप में प्रवेश का अहम केंद्र माना जा रहा है.
कृषि, डेरी और जल प्रबंधन में भी सहयोग
दोनों देशों ने कृषि, डेरी और जल प्रबंधन के क्षेत्र में भी साझेदारी बढ़ाने का निर्णय लिया. बेंगलुरु में डेरी प्रशिक्षण केंद्र, पश्चिम त्रिपुरा में फ्लोरिकल्चर सेंटर और कृषि उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की योजना पर सहमति बनी. इसके अलावा गुजरात की कल्पसर परियोजना के लिए जल प्रबंधन में डच विशेषज्ञता हासिल करने पर भी समझौता हुआ.
वैश्विक मुद्दों पर भी हुई चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी और रॉब जेटेन ने रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर इसके प्रभावों को लेकर भी चर्चा की. दोनों नेताओं ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्वतंत्र नौवहन, क्षेत्रीय अखंडता और शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने पर जोर दिया.
स्वीडन पहुंचेंगे पीएम मोदी
नीदरलैंड दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी स्वीडन पहुंचे, जहां वह प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन से मुलाकात करेंगे और यूरोपीय उद्योग गोलमेज सम्मेलन को संबोधित करेंगे. यह दौरा भारत और यूरोप के बीच रणनीतिक और आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है.
शुक्रवार को BSE सेंसेक्स 2,090.2 अंक यानी करीब 2.7 प्रतिशत टूट गया, जबकि NSE निफ्टी 532.65 अंक यानी 2.2 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पिछले सप्ताह शेयर बाजार में आई भारी गिरावट और टॉप कंपनियों के मार्केट कैप में बड़ी टूट के बाद आज यानी 18 मई को निवेशकों की नजर बाजार के मूड और चुनिंदा शेयरों की चाल पर रहेगी. कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक तनाव के बीच बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है. वहीं कंपनियों के तिमाही नतीजे, बड़े निवेश सौदे, डिफेंस सेक्टर से जुड़े अपडेट और 5G विस्तार जैसी खबरों के चलते Adani Ports, HAL, Vodafone Idea, Uno Minda और Coal India समेत कई शेयरों में आज तेज हलचल देखने को मिल सकती है.
सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट
पिछले सप्ताह घरेलू शेयर बाजार में चौतरफा दबाव देखने को मिला. 30 शेयरों वाला बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 2,090.2 अंक यानी करीब 2.7 प्रतिशत टूट गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 532.65 अंक यानी 2.2 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ. बाजार में कमजोरी का असर देश की दिग्गज कंपनियों के बाजार पूंजीकरण पर साफ दिखाई दिया.
रिलायंस समेत बड़ी कंपनियों को नुकसान
टॉप 10 कंपनियों में से 9 के बाजार मूल्य में तेज गिरावट दर्ज की गई. इनमें सबसे अधिक नुकसान रिलायंस इंडस्ट्रीज को हुआ, जिससे कंपनी के निवेशकों को बड़ा झटका लगा. बाजार में जारी कमजोरी का असर बैंकिंग, ऊर्जा और वित्तीय कंपनियों के शेयरों पर भी देखने को मिला.
तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने से भारत के लिए आयातित महंगाई का दबाव बढ़ा है. इससे कंपनियों की लागत और मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है. साथ ही राजकोषीय दबाव और रुपये की कमजोरी ने निवेशकों की चिंता और गहरा दी है.
भू-राजनीतिक तनाव और एफआईआई बिकवाली का असर
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और महंगाई को लेकर बढ़ती आशंकाओं ने बाजार का sentiment कमजोर किया. विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ हफ्तों से जारी कंसोलिडेशन के बाद बाजार ने निचले स्तर की ओर रुख किया, जिससे निवेशकों में घबराहट बढ़ी और बिकवाली तेज हो गई.
आज इन शेयरों पर रखें नजर
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में कई बड़े शेयर निवेशकों के फोकस में रहेंगे. तिमाही नतीजों, फंड जुटाने की योजनाओं, डिफेंस सेक्टर के अपडेट और बड़े निवेश सौदों के चलते बाजार में शेयर आधारित हलचल देखने को मिल सकती है. Adani Ports की सहायक कंपनी द्वारा मेरिडियन ट्रांसपोर्टेस मैरिटिमोस SA में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने की खबर से कंपनी के शेयर चर्चा में रह सकते हैं, वहीं Hindustan Aeronautics Limited पर तेजस Mk-1A लड़ाकू विमान सौदे में संभावित बदलावों के कारण दबाव बन सकता है. Uno Minda ने मजबूत तिमाही नतीजों के साथ महाराष्ट्र में नए ईवी पावरट्रेन प्रोजेक्ट में 550 करोड़ रुपये निवेश की घोषणा की है. Vodafone Idea ने 5G विस्तार, फंड जुटाने और ग्राहक आधार बढ़ने का अपडेट दिया है, जबकि Coal India की सहायक कंपनी MCL की संभावित लिस्टिंग को भी मंजूरी मिल गई है. इसके अलावा Aurobindo Pharma को कैंसर उपचार से जुड़ी दवा के लिए बड़ी मंजूरी मिली है, जबकि Emcure Pharmaceuticals को US FDA से सात ऑब्जर्वेशन के साथ Form 483 जारी हुआ है. Shree Cement को 153 करोड़ रुपये का टैक्स नोटिस मिला है और Garware Hi-Tech Films के CFO ने इस्तीफा दे दिया है. आज Indian Oil Corporation, Ola Electric Mobility, Astral, Indraprastha Gas, Puravankara और Zydus Wellness जैसी कई बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजे भी जारी होंगे, जिससे संबंधित शेयरों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
रिपोर्ट के अनुसार, सोने के आयात पर सख्ती के चलते चालू खाता घाटा (CAD) कुछ हद तक कम हो सकता है. बैंक ने वित्त वर्ष 2027 के लिए CAD का अनुमान GDP के 1.8 प्रतिशत से घटाकर 1.5 प्रतिशत कर दिया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत का व्यापार घाटा अप्रैल 2026 में बढ़कर 28.4 अरब डॉलर पहुंच गया. मार्च में यह 20.7 अरब डॉलर था. तेल और सोने के आयात में तेज बढ़ोतरी इसकी मुख्य वजह रही. हालांकि निर्यात में हाल के महीनों की तुलना में मजबूत बढ़त दर्ज की गई है. यस बैंक (Yes Bank) की इकोनॉमिक्स रिसर्च टीम की रिपोर्ट के मुताबिक. घरेलू मांग मजबूत रहने से आयात तेजी से बढ़ रहा है. जबकि निर्यात वृद्धि अभी उस गति को पूरी तरह संतुलित नहीं कर पा रही है.
अप्रैल में निर्यात में मजबूत सुधार
अप्रैल में भारत का कुल निर्यात सालाना आधार पर 13.8 प्रतिशत बढ़कर 43.6 अरब डॉलर पहुंच गया. मार्च में इसमें 7.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी. पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में सबसे ज्यादा तेजी देखी गई. यह एक महीने में 85.1 प्रतिशत बढ़ा. वैश्विक कीमतों में उछाल इसका बड़ा कारण रहा. इसके अलावा रत्न एवं आभूषण. इलेक्ट्रॉनिक सामान और लौह अयस्क के निर्यात में भी बढ़त दर्ज की गई. हालांकि गैर-तेल निर्यात में केवल 0.7 प्रतिशत की मामूली वृद्धि हुई और यह 34 अरब डॉलर पर पहुंचा. इससे साफ संकेत मिलता है कि ऊर्जा क्षेत्र को छोड़कर निर्यात की रफ्तार अभी भी कमजोर बनी हुई है.
आयात बिल में भी तेज उछाल
अप्रैल में कुल आयात बिल 71.9 अरब डॉलर रहा. यह सालाना आधार पर 10 प्रतिशत अधिक है. गैर-तेल और गैर-सोना आयात 47.7 अरब डॉलर पर मजबूत बना रहा. तेल आयात बिल मार्च के 12.2 अरब डॉलर से बढ़कर अप्रैल में 18.6 अरब डॉलर हो गया. रिपोर्ट के मुताबिक. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में युद्धविराम की घोषणा के बाद तेल आपूर्ति में फिर से तेजी आई. वहीं, सोने का आयात 83.8 प्रतिशत बढ़कर 5.6 अरब डॉलर पहुंच गया. अप्रैल में कुल आयात में सोने की हिस्सेदारी 7.8 प्रतिशत रही.
सरकार ने सोने के आयात पर बढ़ाई सख्ती
सरकार ने 13 मई से सोने और चांदी पर आयात शुल्क 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दिया है. साथ ही कृषि एवं अवसंरचना विकास उपकर (AIDC) को 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत किया गया है. इससे कुल प्रभावी आयात शुल्क 15 प्रतिशत हो गया है.
इसके अलावा एडवांस ऑथराइजेशन योजना के तहत निर्माताओं के लिए 100 किलोग्राम तक की आयात सीमा तय की गई है. नई लाइसेंस शर्तों के तहत कम से कम 50 प्रतिशत पुराने निर्यात दायित्व पूरे करना भी जरूरी होगा. यस बैंक का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 में सोने का आयात घटकर करीब 420 टन रह सकता है. जबकि वित्त वर्ष 2026 में यह लगभग 720 टन रहने का अनुमान है.
चालू खाता घाटे के अनुमान में सुधार
रिपोर्ट के अनुसार, सोने के आयात पर सख्ती के चलते चालू खाता घाटा (CAD) कुछ हद तक कम हो सकता है. बैंक ने वित्त वर्ष 2027 के लिए CAD का अनुमान GDP के 1.8 प्रतिशत से घटाकर 1.5 प्रतिशत कर दिया है.
ब्रेंट क्रूड की कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल रहने के अनुमान के आधार पर बैंक का कहना है कि केवल सोने के आयात में कमी से करीब 23 अरब डॉलर की बचत हो सकती है. अब वित्त वर्ष 2027 में सोने के कुल आयात का अनुमान 57 अरब डॉलर लगाया गया है. इससे पहले यह अनुमान 80 अरब डॉलर था.
रुपये पर दबाव बना रह सकता है
हालांकि चालू खाता घाटे में राहत के बावजूद यस बैंक ने चेतावनी दी है कि पूंजी प्रवाह पर दबाव बना रह सकता है. बैंक के मुताबिक. भुगतान संतुलन घाटा 30 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि डॉलर के मुकाबले रुपया साल के मध्य तक 97 से 97.50 के स्तर तक पहुंच सकता है.
सेवा क्षेत्र का शुद्ध अधिशेष अप्रैल में थोड़ा घटकर 20.6 अरब डॉलर रह गया. मार्च में यह 20.9 अरब डॉलर था. सेवा निर्यात महीने-दर-महीने 2.5 प्रतिशत घटा. हालांकि सालाना आधार पर इसमें 13.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई.
केवल सोना नियंत्रण से नहीं सुलझेगी चुनौती
यस बैंक का कहना है कि केवल सोने के आयात पर रोक लगाने से भुगतान संतुलन की पूरी समस्या हल नहीं होगी. असली चुनौती ऐसे समय में पर्याप्त विदेशी पूंजी निवेश आकर्षित करना है. जब वैश्विक बाजार में जोखिम लेने की क्षमता कमजोर बनी हुई है और रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ है.
RBL Bank के अनुसार, यह निवेश प्राथमिक पूंजी निवेश के रूप में किया जाएगा. Emirates NBD Bank तरजीही निर्गम के जरिए 280 रुपए प्रति शेयर के भाव पर 959,045,636 इक्विटी शेयर खरीदेगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के निजी बैंकिंग सेक्टर में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. दरअसल, वित्त मंत्रालय ने दुबई स्थित एमिरेट्स एनबीडी बैंक (Emirates NBD Bank) को आरबीएल बैंक (RBL Bank) में 74 प्रतिशत तक हिस्सेदारी अधिग्रहित करने की अंतिम मंजूरी दे दी है. इस मंजूरी के साथ करीब 26,850 करोड़ रुपए के बड़े विदेशी निवेश का रास्ता साफ हो गया है. यह सौदा भारतीय बैंकिंग सेक्टर के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय निवेशों में से एक माना जा रहा है. अधिग्रहण प्रस्ताव की घोषणा 18 अक्टूबर 2025 को की गई थी.
अब नए निवेशकों के हाथ में होगी बैंक की कमान
वित्त मंत्रालय की मंजूरी के बाद आरबीएल बैंक में मालिकाना हक और नियंत्रण का बड़ा हिस्सा नए प्रमोटर समूह के पास चला जाएगा. बैंक ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि वित्तीय सेवा विभाग की ओर से भेजे गए पत्र में 49 प्रतिशत से अधिक और 74 प्रतिशत तक हिस्सेदारी खरीदने की अनुमति दी गई है.
इस तरह के बड़े बैंकिंग सौदों में रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय की मंजूरी बेहद अहम मानी जाती है. इससे पहले भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) भी इस प्रस्ताव को मंजूरी दे चुके हैं.
किस तरह पूरी होगी डील
आरबीएल बैंक के अनुसार, यह निवेश प्राथमिक पूंजी निवेश के रूप में किया जाएगा. एमिरेट्स एनबीडी बैंक तरजीही निर्गम के जरिए 280 रुपए प्रति शेयर के भाव पर 959,045,636 इक्विटी शेयर खरीदेगा. इस डील के बाद विदेशी बैंक की हिस्सेदारी 51 प्रतिशत से 74 प्रतिशत के बीच रह सकती है. हालांकि अंतिम हिस्सेदारी नियामकीय शर्तों पर निर्भर करेगी. लेनदेन पूरा होने के बाद बैंक में विदेशी बैंक की अनुषंगी इकाई वाला मॉडल लागू होगा और एमिरेट्स एनबीडी बैंक को प्रमोटर के रूप में मान्यता मिलेगी.
बैंक की ग्रोथ को मिलेगा बड़ा सहारा
बैंक का कहना है कि यह निवेश उसे विकास के अगले चरण के लिए मजबूत स्थिति में लाएगा. पूंजी बढ़ने से बैंक की कर्ज देने की क्षमता. डिजिटल विस्तार और नए कारोबार क्षेत्रों में निवेश को मजबूती मिलेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि इस डील से भारतीय बैंकिंग सेक्टर में विदेशी निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होगा.
शेयर बाजार में बढ़ सकती है हलचल
वित्त मंत्रालय की मंजूरी के बाद आने वाले कारोबारी सत्रों में आरबीएल बैंक के शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है. शुक्रवार को बैंक का शेयर 1.05 रुपए की तेजी के साथ 338 रुपए पर बंद हुआ. कारोबार के दौरान शेयर 339.55 रुपए के दिन के उच्च स्तर तक पहुंचा था. वहीं बैंक के शेयर का 52 हफ्तों का उच्चतम स्तर 349.75 रुपए रहा है. फिलहाल शेयर अपने 52 हफ्तों के हाई से करीब 10 से 11 रुपए नीचे कारोबार कर रहा है.
भारतीय बैंकिंग सेक्टर के लिए अहम सौदा
विशेषज्ञों के अनुसार. यह सौदा भारतीय बैंकिंग सेक्टर में विदेशी रणनीतिक निवेश के लिहाज से एक बड़ा कदम माना जा रहा है. इससे न केवल आरबीएल बैंक को पूंजी और वैश्विक विशेषज्ञता मिलेगी. बल्कि भारतीय बैंकिंग बाजार में अंतरराष्ट्रीय बैंकों की दिलचस्पी भी बढ़ सकती है.