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जीत या हार बाद की बात, इस लोकसभा चुनाव हवा में जमकर उड़े पैसे
लोकसभा चुनाव के दौरान प्रचार के लिए किराए पर हेलिकॉप्टर की होड़ मची रही, जिसका कंपनियों ने खूब फायदा उठाया.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
चुनावी मौसम में आसमान से बूंदें भले ही न टपकें, लेकिन वादों की बरसात जरूर होती है. नेता दिल-खोलकर वादे करते हैं और इन वादों का अहसास जनता को कराने के लिए प्रचार पर पानी की तरह पैसा भी बहाते हैं. वैसे, तो हर चुनावी सीजन में पैसों की बरसात होती है, लेकिन इस बार यह बरसात काफी भारी हुई है. जमीन से लेकर आसमान तक नेताओं ने प्रचार के लिए हर साधन का जबरदस्त इस्तेमाल किया है. सोशल मीडिया पर भी करोड़ों रुपए के विज्ञापन दिए गए हैं, क्योंकि देश का भविष्य कही जाने वाली युवा पीढ़ी सबसे ज्यादा समय वहीं बिताती है.
हेलिकॉप्टर ऑपरेटरों ने काटी चांदी
इस लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election 2024) में हेलिकॉप्टर के पंखे काफी तेजी से घूमे हैं. भाजपा से लेकर कांग्रेस तक के बड़े नेताओं ने प्रचार के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचने के लिए हेलिकॉप्टर का जमकर इस्तेमाल किया है. हेलिकॉप्टर किराए पर देने वाली कंपनियां प्रति घंटे के हिसाब से चार्ज करती हैं. एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्विन इंजन वाले 8-सीटर हेलिकॉप्टर का किराया प्रति घंटे करीब 3 लाख रुपए होता है. ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस चुनावी मौसम में हेलिकॉप्टर ऑपरेटरों (Helicopter Operators) ने कितना कमाया होगा.
सबसे ज्यादा कमाई वाला चुनाव
रिपोर्ट बताती है कि 2024 का लोकसभा चुनाव हेलिकॉप्टर कंपनियों के लिए सबसे ज्यादा कमाई वाला साबित हुआ है. इस दौरान इनकी कमाई का आंकड़ा लगभग 350 से 400 करोड़ रुपए तक पहुंचने का अनुमान है. बढ़ती डिमांड को देखते हुए हेलिकॉप्टर ऑपरेटरों ने किराए में भी अच्छी-खासी बढ़ोत्तरी की है. 6-7 लोगों के बैठने की क्षमता वाले BEL407 जैसे सिंगल इंजन वाले हेलिकॉप्टर का किराया बढ़कर 1.3-1.5 लाख प्रति घंटा हो गया है. इसी तरह, 7-8 की क्षमता वाले ऑगस्टा AW109 और H145 एयरबस हेलिकॉप्टर का किराया प्रति घंटा 2.3-3 लाख तक पहुंच गया है. वहीं, 15-सीटर वाले अगस्ता वेस्टलैंड के लिए 4 लाख रुपए प्रति घंटा किराया वसूला गया है.
डिमांड के साथ किराया भी बढ़ा
रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि इस लोकसभा चुनाव में डिमांड बढ़ने के कारण हेलिकॉप्टर ऑपरेटर्स ने नियमित किराए की तुलना में 40-50% तक अधिक किराया चार्ज किया है. जबकि 2019 के लोकसभा चुनाव में इसमें 20-30% की बढ़ोतरी देखने को मिली थी. दरअसल, इस चुनाव में हेलिकॉप्टर्स की मांग बहुत अधिक रही है. राज्य स्तर पर पार्टियों से भी इनकी डिमांड मिली है. डिमांड के अनुरूप हेलीकॉप्टरों की संख्या में वृद्धि नहीं हुई है. इस वजह से उसके किराए में इजाफा देखने को मिला है. हेलिकॉप्टर ऑपरेटर्स पार्टी या नेताओं के साथ 45-60 दिनों के लॉन्ग टर्म के लिए एग्रीमेंट साइन करते हैं. इसमें उड़ान के घंटे भी पहले ही निर्धारित कर लिए जाते हैं. इसके बाद चाहे हेलिकॉप्टर इस्तेमाल किए जाएं या नहीं, उसका भुगतान करना ही होता है.
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