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क्या प्राइवेटाइजेशन पर नरम हुए सरकार के तेवर? BPCL के सौदे से किया इंकार!
सरकार के केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री का कहना है कि BPCL में हिस्सेदारी अब नहीं बेची जाएगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
क्या इस बार की मोदी सरकार विनिवेश (Privatisation) को लेकर पहले जैसे फैसलों से बचेगी? यह सवाल इसलिए पूछा जा रहा है क्योंकि इस बार भाजपा को बहुमत नहीं मिला है और उसने सहयोगियों की मदद से सरकार बनाई है. अब केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने विनिवेश को लेकर जो बयान दिया है, उससे कहीं न कहीं इस सवाल का जवाब मिल गया है. पुरी का कहना है कि सरकारी स्वामित्व वाली भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के निजीकरण की योजना को फिलहाल टाल दिया गया है.
ऐसे PSU नहीं बिकेंगे
एक मीडिया हाउस से बात करते हुए केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि BPCL के निजीकरण की योजना को फिलहाल टाल दिया गया है. साथ ही उन्होंने यह भी उच्च राजस्व अर्जित करने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को बेचने की जरूरत नहीं है. पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय का कार्यभार संभालते हुए पुरी ने कहा कि BPCL ने पहली तीन तिमाहियों में जो मुनाफा कमाया है, वो उसकी हिस्सेदारी बेचकर मिलने वाली राशि से अधिक है. बीपीसीएल ने वित्त वर्ष 2024 की पहली छमाही में 19000 करोड़ रुपए से अधिक का शुद्ध लाभ दर्ज किया है.
मजबूत हुई कंपनी की सेहत
वित्त वर्ष 2024 की तीसरी तिमाही में, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने अपने समेकित शुद्ध लाभ में 82% की वृद्धि दर्ज की, जो वित्त वर्ष 23 की इसी अवधि में 1,747.01 करोड़ रुपए की तुलना में 3,181.42 करोड़ रहा. वित्त वर्ष 24 की तीसरी तिमाही में परिचालन से कंपनी का राजस्व 1.30 लाख करोड़ रहा, जबकि एक साल पहले यह 1.33 लाख करोड़ रुपए था. बता दें कि मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल में BPCL को निजी हाथों में सौंपने की काफी कोशिश हुई थी. फिर चुनाव के चलते विनिवेश को लगभग टाल दिया गया था. पीएम मोदी को उम्मीद थी कि 400 पार का नारा काम करेगा और भाजपा को पूर्ण बहुमत मिलने के बाद फिर से विनिवेश पर काम किया जाएगा. लेकिन पार्टी को बहुमत नहीं मिला.
आसान नहीं होगी राह
राजनीति के जानकारों का कहना है कि गठबंधन की सरकार में मोदी के लिए विनिवेश जैसे मुद्दे पर कड़े फैसले लेना आसान नहीं होगा. विनिवेश का काफी विरोध में किया जा रहा है. ऐसे में TDP और JDU जैसी पार्टियां अपने प्रदेशों में नुकसान की आशंका के चलते मोदी सरकार को फ्रीहैंड देने से बचेंगी. हालांकि, यह भी माना जा रहा है कि सरकार IDBI बैंक को लेकर पुरानी योजना पर आगे बढ़ सकती है. आईडीबीआई बैंक में सरकार के पास 49.24% और एलआईसी की 45.48% हिस्सेदारी है.
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