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Happy Birthday नंदन नीलेकणि: Murthy के 'टफ' टेस्ट को महज डेढ़ मिनट में ही कर दिया था सॉल्व 

नारायण मूर्ति को इम्प्रेस करना कभी आसान नहीं रहा. वह हमेशा इस सिद्धांत के साथ चलते हैं कि साथ काम करने वाले इंटेलीजेंट होने चाहिए, फिर भले ही वो साथ कितना भी छोटा क्यों न हो.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

डिजिटल इंडिया की बुनियाद रखने वाले नंदन नीलेकणि (Nandan Nilekani) 68 साल के हो गए हैं. उनका जन्म 2 जून 1955 को बेंगलुरु में हुआ था, यानी आज वह अपना जन्मदिन मना रहे हैं. अपने अब तक के सफर में नीलेकणि ने कई उतार-चढ़ाव देखे, अनगिनत चुनौतियों का सामना किया और सफलता का समुंदर अपने नाम करने में सफल रहे. वैसे तो उनकी लाइफ से जुड़े कई ऐसे किस्से-कहानियां हैं, जो दूसरों को प्रेरित करते हैं, लेकिन नारायण मूर्ति के साथ उनकी पहली मुलाकात सबसे खास है. इस एक मुलाकात में नीलेकणि मूर्ति को इस कदर प्रभावित कर गए कि आगे चलकर दोनों बिजनेस पार्टनर बन गए. 

वही बताया, जो सच था     
यह बात तब की है जब नारायण मूर्ति (N.R. Narayana Murthy) पटनी कंप्यूटर सिस्टम्स (Patni Computer Systems) में सॉफ्टवेयर प्रमुख के रूप में काम करते थे. 18 फरवरी, 1979 को नंदन नीलेकणि नौकरी के सिलसिले में मूर्ति से मिलने पहुंचे. सवाल-जवाब का सिलसिला शुरू हुआ. नारायण मूर्ति ने नीलेकणि से पूछा कि उन्हें नौकरी क्यों चाहिए, इस पर नंदन नीलेकणि ने वही कारण बताया जो वाकई सच था. उन्होंने कहा - मेरे पास सितंबर तक फ्री टाइम है. मेरा अमेरिका के बिजनेस स्कूल में दाखिला हो गया है, लेकिन अभी वहां जाने में कुछ महीने हैं. इसलिए इस अवधि के लिए मुझे नौकरी चाहिए. नीलेकणि की इस साफगोई ने मूर्ति को प्रभावित है, लेकिन इतना भी नहीं कि वो उन्हें नौकरी पर रख लें.

मिले 50 में से 50 अंक
नारायण मूर्ति को इम्प्रेस करना कभी आसान नहीं रहा. वह हमेशा इस सिद्धांत के साथ चलते हैं कि साथ काम करने वाले इंटेलीजेंट होने चाहिए, फिर भले ही वो साथ कितना भी छोटा क्यों न हो. उन्होंने नंदन नीलेकणि का Learnability Test लिया, जिसमें नीलेकणि न केवल पास हुए बल्कि वह एकमात्र ऐसे कैंडिडेट थे, जिन्हें 50 में से 50 अंक मिले थे. इसके बाद नीलेकणि का IQ टेस्ट हुआ. इस टेस्ट को मैट्रिक्स रोटेशन कहा जाता था, जिसे मूर्ति ने ही डिजाइन किया था. इस टेस्ट को नंदन नीलेकणि ने महज डेढ़ मिनट में पूरा किया. और इस तरह वह 'टफ' समझाने वाले मूर्ति को पूरी तरह इम्प्रेस करने में सफल रहे. आगे चलकर दोनों ने एक ऐसी कंपनी की नींव रखी, जिसने आईटी सेक्टर में कई नई ऊंचाइयों को छुआ. 80 के दशक में नारायण मूर्ति और नंदन नीलेकणि ने इंफोसिस की स्थापना की. ये वो दौर था, जब किसी स्टार्टअप का ग्रो करना काफी मुश्किल काम था. करीब 10 सालों तक इंफोसिस मुश्किल हालातों में से गुजरती रही. लेकिन 1991 में भारतीय अर्थव्यवस्था में हुए मेजर रिफॉर्म से इंफोसिस को एक नया रास्ता मिला और फिर उसने कभी मुड़कर नहीं देखा.

संभाला UIDAI प्रोजेक्ट
1992 में इंफोसिस अपना आईपीओ लेकर आई. 1999 में इंफोसिस NASDAQ पर लिस्ट होने वाली भारत की पहली कंपनी बनी. इसके तुरंत बाद कंपनी की मार्केट कैपिटलाइजेशन 1 बिलियन डॉलर के बैंचमार्क को क्रॉस कर गई. 2002 में नंदन नीलेकणि को कंपनी का सीईओ बनाया गया. नीलेकणि की काबिलियत को देखते हुए 2009 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उन्हें UIDAI प्रोजेक्ट का चेयरमैन बनने के लिए आमंत्रित किया. इस प्रस्ताव को उन्होंने स्वीकार कर लिया. डिजिटल इंडिया को आकार देने में यह प्रोजेक्ट एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है. आज दुनियाभर में 'आधार' को सबसे बड़े बायोमीट्रिक सिस्टम के रूप में पहचान मिली है. आधार कार्ड ने डिजिटल इंडिया को गति देने में बड़ी भूमिका निभाई है. 

ONDC को दे रहे आकार  
नंदन नीलेकणि को 2003 में फार्च्यून मैग्जीन ने एशिया के बिजनेसमैन ऑफ द ईयर सम्मान से नवाजा था. 2005 में भारत सरकार ने पद्म भूषण से सम्मानित किया. साल 2022 में टाइम मैगजीन ने नंदन नीलेकणि को 100 Most Influential People Of the Year में जगह दी थी. नीलेकणि ने ही सही मायनों में डिजिटल इंडिया की नींव रखी है. आज जिस UPI सिस्टम से हम आसानी से ऑनलाइन भुगतान करते हैं, वो नीलेकणि द्वारा ही डिजाइन किया गया है. इतना ही नहीं, स्टैंडर्डाइजिंग इलेक्ट्रॉनिक टोल सिस्टम को डिजाइन करने का काम भी नीलेकणि और उनकी टीम ने किया. फिलहाल वह भारत सरकार के साथ मिलकर देश में फ्री एक्सिसेबल ऑनलाइन सिस्टम को डिजाइन कर रहे हैं, जहां व्यापारी और ग्राहक किसी छोटी चीज से लेकर बड़े-बड़े आइटम्स खरीद सकेंगे. इस प्रोजेक्ट का नाम ONDC- Open Network For Digital Commerce है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर ये प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियों का एकाधिकार देश में खत्म हो सकता है.


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