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देश की 14वीं महारत्न कंपनी बनी HAL, जानिए कैसे और किन कंपनियों को मिलता है ये दर्जा?

महारत्न का दर्जा प्राप्त करने के बाद HAL को न केवल भारत में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी उपस्थिति बढ़ाने का मौका मिलेगा. यह भारत की आत्मनिर्भरता को सशक्त करेगा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

अगर आपने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के शेयर में निवेश किया है, तो ये खबर आपके काम की हो सकती है. दरअसल, भारत के रक्षा क्षेत्र की इस सरकारी कंपनी  को महारत्न का दर्जा मिला है. यह सम्मान एचएएल की बेहतरीन वित्तीय परफॉर्मेंस और बढ़ते वैश्विक कद का प्रतीक है. कंपनी ने सार्वजनिक उद्यम विभाग (DPE) द्वारा जारी इस फैसले की जानकारी को अपने एक्स (X) हैंडल पर साझा किया है. इस फैसले को वित्त सचिव और कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली समितियों की सिफारिशों के बाद भारत सरकार द्वारा मंजूरी दी गई है. तो आइए जानते हैं एक कंपनी को ये खिताब कैसे मिलता है?

इस वजह से कंपनी को मिला महारत्न का खिताब

एचएएल का महारत्न बनने में इसके शानदार वित्तीय प्रदर्शन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. वित्त वर्ष 2023-24 में एचएएल ने 28,162 करोड़ रुपए का वार्षिक कारोबार किया और 7,595 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया. इस मजबूत वित्तीय स्थिति ने कंपनी को महारत्न का दर्जा दिलाने में अहम योगदान दिया.

रक्षा उपकरणों के विकास और उत्पादन में  आएगी तेजी

एचएएल के इस उपलब्धि से भारत के रक्षा क्षेत्र को नई दिशा मिलेगी. महारत्न का दर्जा प्राप्त करने के बाद कंपनी को न केवल भारत में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी उपस्थिति बढ़ाने का मौका मिलेगा. यह भारत की आत्मनिर्भरता (Aatmanirbhar Bharat) को सशक्त करेगा और भविष्य में नए प्रोजेक्ट्स और इनोवेशन के अवसर पैदा करेगा. एचएएल की इस उपलब्धि से रक्षा उपकरणों के विकास और उत्पादन में भी तेजी आएगी, जिससे देश के रक्षा क्षेत्र को एक नई ऊंचाई मिलेगी.

इन कंपनियों को मिलता है महारत्न दर्जा

महारत्न का दर्जा उन्हीं कंपनियों को दिया जाता है, जो पहले से नवरत्न हों और लगातार तीन साल तक 5,000 करोड़ रुपये का औसत शुद्ध लाभ और 25,000 करोड़ रुपये का वार्षिक टर्नओवर हासिल करती हों. इसके साथ ही कंपनी की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपस्थिति भी जरूरी होती है. 

महारत्न श्रेणी के फायदे
1. महारत्न कंपनियों को फैसले लेने में विशेष स्वायत्तता और अधिकार मिलते हैं. 
2. एचएएल को अब अपनी कुल संपत्ति के 15 प्रतिशत तक या 5,000 करोड़ रुपये तक के निवेश का अधिकार मिल जाएगा, जिससे वह किसी प्रोजेक्ट में सरकार की मंजूरी के बिना निवेश कर सकेगी.
3. इसके अलावा, कंपनी को भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विलय, अधिग्रहण और रणनीतिक निवेश करने की भी आजादी मिल जाएगी, जिससे उसकी वैश्विक विस्तार की योजनाओं को बल मिलेगा.
 


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