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Gautam Adani और मोदी सरकार को लेकर इस दिग्गज इन्वेस्टर ने कही बड़ी बात
राजीव जैन और उनकी GQG पार्टनर ने भारतीय शेयर बाजार में 13 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है. GQG भारत में और निवेश करने के बारे में भी सोच रही है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
गौतम अडानी (Gautam Adani) को लेकर अक्सर यह आरोप लगते रहते हैं कि उनकी तरक्की का ग्राफ मोदी सरकार (Modi Government) के कार्यकाल में खड़ा हुआ है. विपक्ष यह भी कहता रहा है कि मोदी सरकार की नीतियां अडानी को फायदा पहुंचाने के हिसाब से डिजाइन की जाती हैं. अब इन आरोपों में सच्चाई है या नहीं, ये एक अलग मुद्दा है लेकिन आज अडानी ग्रुप एक ऐसे मुकाम पर आ गया है, जहां उसकी ग्रोथ को लेकर विश्वास तेजी से बढ़ रहा है. हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बावजूद दिग्गज इन्वेस्टर्स समूह में पैसा लगाने को तैयार हैं.
अडानी के संकटमोचक हैं जैन
गौतम अडानी के संकटमोचक कहे जाने वाले राजीव जैन (Rajiv Jain) का तो यहां तक कहना है कि मोदी सरकार रहे या न रहे, अडानी ग्रुप का जलवा कायम रहेगा, ग्रुप लगातार विकास करता रहेगा. राजीव अमेरिकी फर्म GQG पार्टनर्स के चेयरमैन हैं. मालूम हो कि हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट आने के बाद गौतम अडानी की कंपनियों के शेयरों में गिरावट का दौर जारी था और उनकी दौलत लगातार गिरती जा रही थी, तब राजीव जैन ने अडानी ग्रुप में अरबों रुपए इन्वेस्ट किए थे. जिसके चलते दूसरे निवेशकों में भी समूह के प्रति भरोसा बहाल हुआ था.
13 अरब डॉलर का निवेश
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फंड मैनेजर राजीव जैन और उनकी GQG पार्टनर ने भारतीय शेयर बाजार में 13 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है. GQG भारत में और निवेश करने के बारे में भी सोच रही है. जैन को गौतम अडानी की कंपनियों पर पूरा भरोसा है. उनका यह भी मानना है कि अडानी समूह के लिए कॉर्पोरेट गवर्नेंस और पॉलिटिकल रिस्क जैसा कुछ नहीं है. उनका कहना है कि अडानी ग्रुप की कंपनियों का जलवा कायम रहेगा, भले ही भारत में मोदी सरकार रहे या न रहे. बता दें कि जीक्यूजी पार्टनर्स ने FMCG कंपनी ITC, सन फार्मा, SBI, ICICI बैंक और HDFC के अलावा गौतम अडानी ग्रुप की कंपनियों में भी पैसा लगाया हुआ है.
इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण में बड़ी भूमिका
राजीव जैन का कहना है कि उन्हें भारत के प्राइवेट बैंक, IT और कंजूमर कंपनियों पर भरोसा है. उनके मुताबिक, इंफ्रास्ट्रक्चर भारत के ग्रोथ में नई स्टोरी की तरह साबित हो सकता है. जैन का कहना है कि भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण और इसे तेजी से आगे बढ़ाने में अडानी ग्रुप की कंपनियों की बड़ी हिस्सेदारी है और इसका मोदी सरकार से कोई संबंध नहीं है. लिहाजा, केंद्र में मोदी की सरकार रहे या न रहे, अडानी ग्रुप की कंपनियों के कामकाज पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला. समूह विकास करता रहेगा.
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