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सरकार ने गेहूं की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण के लिए उठाया कदम, अब ऐसे रूकेगी महंगाई
सरकार ने गेहूं की कीमत के लिए जो कदम उठाया है उससे पहले वो यही कदम दालों के लिए भी उठा चुकी है. क्योंकि दालों के फ्रंट पर भी सरकार को महंगाई का सामना करना पड़ रहा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
दो दिन पहले दालों में लगातार बढ़ रही महंगाई को रोकने के लिए सरकार की ओर से उन पर स्टॉक लिमिट तय की गई थी. अब उसी कड़ी में गेहूं पर बढ़ रही महंगाई को कम करने के लिए सरकार ने स्टॉक लिमिट लगाने का फैसला लिया है. सरकार का कहना है कि देश में गेहूं की कोई कमी नहीं है और आयात शुल्क में कमी करने का विकल्प खुला हुआ है.
इतनी तय की है सरकार ने लिमिट
सरकार की ओर से जो लिमिट तय की गई है उसके अनुसार होल सेलर्स 3000 टन तक गेहूं रख सकते हैं जबकि रिटेलर्स के लिए 10 टन की लिमिट तय की गई है. सरकार की ओर से जारी आदेश के अनुसार, ये लिमिट 31 मार्च 2025 तक लागू रहेगी. सरकार का साफ कहना है कि देश में गेहूं की कोई कमी नहीं है. सरकार महंगाई पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए खाने पीने के सामान पर निगरानी बनाए हुए है.
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कमी पड़ने पर ही खरीदा जाएगा गेहूं
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे मामले को लेकर खाद्य सचिव का कहना है कि अगर आने वाले दिनों में जरूरत पड़ी तो गेहूं खरीदा जा सकता है. यही नहीं अगर खरीदना पड़ा तो इंपोर्ट ड्यूटी को कम किया जा सकता है. सरकार सिर्फ एक फ्रंट पर ही कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए काम नहीं कर रही है बल्कि खुले बाजार में गेहूं की बिक्री भी कर रही है. सरकार हाल ही में 101.5 लाख टन गेहूं को खुले बाजार में बिक्री के लिए जारी कर चुकी है. सरकार इस गेहूं में से 80.8 लाख टन गेहूं को खुले बााजार में बिक्री स्कीम के तहत बेच चुकी है. अकेले जनवरी से लेकर मार्च के बीच में 25 लाख टन गेहूं ओएमएसएस के तहत बाजार में उतारा गया है.
सरकार बेच रही है भारत आटा
सरकार आम नागरिकों को सस्ता आटा मुहैया कराने के लिए गेहूं के आटे को सस्ते दामों पर बेच रही है. सरकार भारत ब्रैंड नाम से आटा बेच रही है जिसकी कीमत 27.5 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेच रही है. सरकार इस आटे को सिर्फ नैफैड या दूसरे साधनों से नहीं बेच रही है बल्कि ई कॉमर्स साइटों के माध्यम से भी बेच रही है. सरकार का मानना है कि अभी गेहूं की कोई कमी नहीं है लेकिन ये जो उपाए किए जा रहे हैं वो कालाबाजारी रोकने के मकसद से उठाए जा रहे हैं.
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