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बदल रहे हैं अनिल अंबानी के सितारे, कर्ज के दलदल से बाहर निकली एक और कंपनी
कुछ वक्त पहले अनिल अंबानी को कलकत्ता हाई कोर्ट से भी राहत मिली थी. अदालत ने दामोदर घाटी निगम (DVC) के साथ 780 करोड़ के मध्यस्थता विवाद में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के पक्ष में फैसला सुनाया था.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
अनिल अंबानी का समय अब बदल रहा है. उनकी एक और कंपनी कर्ज के भंवर से बाहर निकल आई है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रिलायंस पावर की इकाई रोजा पावर सप्लाई कंपनी ने सिंगापुर के कर्जदाता वर्डे पार्टनर्स का 485 करोड़ का कर्ज चुका दिया है. इसी के साथ रोजा पावर कर्ज मुक्त कंपनी बन गई है. रिलायंस पावर की तरफ से बताया गया है कि रोजा पावर ने शून्य ऋण की स्थिति हासिल कर ली है. कंपनी ने निर्धारित समय से पहले ही बकाया का भुगतान कर दिया है.
क्या करती है कंपनी?
रोजा पावर उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के करीब 1,200 मेगावाट का कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्र संचालित करती है. इस बीच, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड यानी SEBI ने अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड और पूर्व अधिकारियों सहित छह पक्षों से 129 करोड़ रुपए का भुगतान करने को कहा है. नियामक ने कंपनी के फंड की अवैध हेराफेरी के संबंध में यह आदेश दिया है. सेबी ने सभी पक्षों को चेतावनी दी है कि अगर वे 15 दिन के भीतर भुगतान करने में विफल रहते हैं तो उनकी संपत्ति और बैंक खाते कुर्क कर लिए जाएंगे. इस मामले में रिलायंस होम फाइनेंस, रवींद्र सुधालकर, अमित बापना, पिंकेश शाह, फी मैनेजमेंट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड और आधार प्रोजेक्ट मैनेजमेंट एंड कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड को नोटिस भेजा गया है.
विदेश में की बड़ी डील
हाल ही में खबर आई थी कि अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस समूह ने भूटान में 1,270 मेगावाट की सौर और पनबिजली परियोजनाएं स्थापित करने का ऐलान किया है. समूह ने बताया कि भूटान सरकार की वाणिज्यिक और निवेश शाखा ड्रक होल्डिंग एंड इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड (DHI) के साथ एक रणनीतिक साझेदारी समझौता किया गया है. इसका उद्देश्य भूटान के रिन्यूएबल और ग्रीन एनर्जी सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है. इस साझेदारी के तहत हरित ऊर्जा उत्पादन, सौर एवं पनबिजली पर फोकस के साथ अभिनव हरित प्रौद्योगिकियों की खोज की जाएगी. इसके लिए अनिल अंबानी के रिलायंस समूह ने एक नई कंपनी ‘रिलायंस एंटरप्राइजेज’ भी बनाई है.
यहां भी मिल चुकी राहत
इससे पहले अनिल अंबानी को कलकत्ता हाई कोर्ट से भी राहत मिली थी. अदालत ने कुछ समय पहले दामोदर घाटी निगम (DVC) के साथ 780 करोड़ रुपए के मध्यस्थता विवाद में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के पक्ष में फैसला सुनाया था. दरअसल, रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर को 2008 में पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में 3,750 करोड़ की लागत से 1200 मेगावाट का ताप विद्युत संयंत्र स्थापित करने का ठेका मिला था. विवाद और अन्य कारणों से परियोजना में देरी हुई, नतीजतन डीवीसी ने रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर से हर्जाना मांगा. रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर ने इसे चुनौती दी थी, जिसका फेसला उसके हक में आया है. अदालत से मिली राहत के बाद कंपनी के शेयरों में तेजी देखने को मिली थी.
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