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सोने की चमक से बढ़ी देश की ताकत: भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब डॉलर के पार
सोने और विदेशी मुद्रा आस्तियों में एक साथ हुई वृद्धि से यह साफ है कि RBI ने देश की वित्तीय सुरक्षा को और मजबूत किया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 months ago
साल 2026 की शुरुआत भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद मजबूत संकेत लेकर आई है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 16 जनवरी 2026 को समाप्त सप्ताह में देश के विदेशी मुद्रा भंडार में एक ही झटके में 14.17 अरब डॉलर की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इसके साथ ही भारत का कुल फॉरेक्स रिजर्व बढ़कर 701.36 अरब डॉलर के स्तर को पार कर गया है.
एक हफ्ते में आई ऐतिहासिक उछाल
पिछले सप्ताह जहां विदेशी मुद्रा भंडार में सिर्फ 392 मिलियन डॉलर की मामूली बढ़त हुई थी, वहीं इस बार इसमें कई गुना ज्यादा तेजी देखने को मिली है. मौजूदा स्तर भारत को एक बार फिर उस ऐतिहासिक ऊंचाई के करीब ले गया है, जहां सितंबर 2024 में देश का फॉरेक्स रिजर्व 704.88 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था.
विदेशी मुद्रा आस्तियों (FCA) में जबरदस्त मजबूती
RBI के साप्ताहिक आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान भारत की विदेशी मुद्रा आस्तियां यानी *Foreign Currency Assets (FCA)* में 9.65 अरब डॉलर की बड़ी बढ़ोतरी हुई है. अब एफसीए का कुल स्तर बढ़कर 560.51 अरब डॉलर हो गया है. यह हिस्सा देश के कुल विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा और सबसे अहम घटक माना जाता है, जिसमें यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर-डॉलर मुद्राओं की वैल्यू में उतार-चढ़ाव का असर भी शामिल होता है.
सोने की खरीद से मजबूत हुआ रिजर्व
इस दौरान भारत के *गोल्ड रिजर्व* में भी शानदार इजाफा देखने को मिला है. एक ही हफ्ते में सोने के भंडार की वैल्यू 4.62 अरब डॉलर बढ़कर 117.45 अरब डॉलर पर पहुंच गई है. फिलहाल RBI के पास 880 टन से ज्यादा सोना जमा है, जो देश के कुल फॉरेक्स रिजर्व का करीब 15 फीसदी हिस्सा बनता है.
SDR और IMF रिजर्व में हल्की गिरावट
हालांकि, इस हफ्ते *स्पेशल ड्रॉइंग राइट (SDR)* में 35 मिलियन डॉलर की मामूली गिरावट दर्ज की गई है और यह घटकर 18.70 अरब डॉलर रह गया है. इसके अलावा IMF के पास जमा भारत के रिजर्व में भी 73 मिलियन डॉलर की कमी आई है, जिससे यह अब 4.68 अरब डॉलर के स्तर पर आ गया है.
अर्थव्यवस्था के लिए क्या मायने?
विशेषज्ञों के मुताबिक, विदेशी मुद्रा भंडार में यह मजबूत उछाल भारत की आर्थिक स्थिति, रुपये की स्थिरता और वैश्विक झटकों से निपटने की क्षमता को और मजबूत करता है. साथ ही, यह संकेत देता है कि भारत की बाहरी आर्थिक स्थिति फिलहाल काफी सुरक्षित और मजबूत बनी हुई है.
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