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70 प्रतिशत किसानों की खेती पर हो रहा है ग्‍लोबल वार्मिंग का ये असर, सर्वे में आया सामने 

इस सर्वे में दुनियाभर के 800 किसानों को शामिल किया गया था, और इस सर्वे को उन क्षेत्रों में भी किया गया है जो मौजूदा समय में युद्ध से प्रभावित हैं. 

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

ग्‍लोबल वार्मिंग आज एक ऐसा विषय बन चुका है जिस पर दुनिया के हर बड़े मंच पर बातें सामने आती हैं.  बातें तो होती हैं लेकिन इसके ठोस समाधान पर बात नहीं हो पाती है. इसी कड़ी में फार्मर वाइस के 8 देशों में हुए एक सर्वे की रिपोर्ट बताती है कि 70 प्रतिशत किसान इस समस्‍या से जूझ रहे हैं. 73 प्रतिशत किसान ऐसे हैं जिन्‍हें कीटनाशकों के इस्‍तेमाल के कारण ज्‍यादा दबाव का सामना करना पड़ रहा है. इसके कारण किसानों की आय भी 15 प्रतिशत तक प्रभावित हुई है. 

क्‍या कहती है फॉर्मर वाइस? 
8 देशों में हुए इस सर्वे की रिपोर्ट बताती है कि जलवायु परिवर्तन के कारण पिछले दो साल में किसानों की आय में अनुमानित तौर पर औसतन 15.7 प्रतिशत की कमी आई है. आर्थिक अनिश्चितता और लागत को लेकर चिंता के कारण ज्यादातर किसानों को शॉर्ट-टर्म चैलेंज का सामना करना पड़ रहा है. 5 में से 4 किसानों ने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करने की दिशा में कदम उठाए हैं या कदम उठाने की तैयारी कर रहे हैं.  'फार्मर वॉइस' सर्वे के लिए लाइफ साइंस कंपनी बेयर ने एक एजेंसी के माध्यम से दुनियाभर में 800 किसानों का साक्षात्कार किया है. इनमें ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, चीन, जर्मनी, भारत, केन्या, यूक्रेन और यूनाइटेड स्टेट्स के बड़े एवं छोटे किसानों की बराबर संख्या थी. केन्या और भारत के किसानों में इस बारे में सबसे ज्यादा चिंता देखी गई.

क्‍या बोले सर्वे कंपनी बेयर के प्रेसीडेंट? 
बेयर एजी के बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट के सदस्य और क्रॉप साइंस डिवीजन के प्रेसिडेंट रोड्रिगो सैंटोस ने कहा, 'किसानों को जलवायु परिवर्तन के कारण खेती पर दुष्प्रभाव का सामना करना पड़ रहा है और साथ ही वे इस गंभीर चुनौती से निपटने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका भी निभा रहे हैं. इसीलिए उनकी आवाज को सामने लाना बहुत महत्वपूर्ण है। बढ़ती वैश्विक आबादी को देखते हुए सर्वेक्षण से मिले ये नतीजे कृषि को रीजनरेटिव बनाने के प्रयासों को गति देने में कैटलिस्ट की भूमिका निभाएंगे.

आने वाले सालों में और बड़ी होगी चुनौती 
जिस तरह से जलवायु परिवर्तन का संकट बढ़ रहा है, अगले तीन साल में आर्थिक चुनौतियां सबसे बड़ी प्राथमिकता होंगी. आधे से ज्यादा (55 प्रतिशत) किसान उर्वरकों की बढ़ती लागत को शीर्ष तीन चुनौतियों में से एक मानते हैं. इसके बाद चुनौतियों के मामले में ऊर्जा की लागत (47 प्रतिशत) और कीमतों एवं आय में उतार-चढ़ाव (37 प्रतिशत) और क्रॉप प्रोटेक्शन की लागत (36 प्रतिशत) का स्थान रहा.
 केन्या, भारत और यूक्रेन में उर्वरकों की बढ़ती लागत सबसे महत्वपूर्ण चिंता के रूप में सामने आई है. फार्मर वॉइस सर्वे में 800 किसानों को शामिल किया गया। इनमें ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, चीन, जर्मनी, भारत, केन्या, यूक्रेन और यूनाइटेड स्टेट्स के बराबर किसान शामिल थे.

 यूक्रेन के किसानों के सामने आ रही है ये चुनौती 
सर्वे कंपनी ने इसके लिए यूक्रेन को भी चुना था, यूक्रेन में 70 प्रतिशत किसानों ने उर्वरकों की लागत को शीर्ष तीन चुनौतियों में से एक माना। यह युद्ध के कारण वहां किसानों पर पड़ रहे दबाव को दिखाता है। इसके अतिरिक्त 40 प्रतिशत किसानों ने युद्ध के कारण सामान्य बाधाओं और टकराव को बड़ी चुनौती माना। इसके अलावा यूक्रेन के किसानों की चिंता भी मोटे तौर पर वैश्विक स्तर पर अन्य किसानों जैसी ही रही। तीन चौथाई से ज्यादा (77 प्रतिशत) ने माना कि जलवायु परिवर्तन के कारण उनकी खेती पर प्रभाव पड़ चुका है.

 
 


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