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आखिर ऐसा क्या हुआ कि विदेशी एयरलाइन्स ने दे डाली भारत छोड़ने की धमकी?
इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन की वार्षिक बैठक में भारत के टैक्स सिस्टम को लेकर चिंता व्यक्त की गई है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा एविएशन (Aviation) मार्केट है. कई ग्लोबल एयरलाइन्स (Global Airlines) यहां मौजूद हैं और अपनी उपस्थिति को लगातार मजबूत करना चाहती हैं. लेकिन उनकी इस चाहत में भारत का टैक्स सिस्टम आड़े आ रहा है. उनका कहना है कि भारत का टैक्स सिस्टम बेहद जटिल है और यदि स्थिति में कोई सुधार नहीं होता तो उन्हें हमेशा के लिए भारत को अलविदा कहना पड़ सकता है.
IATA की मीटिंग में उठा मुद्दा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) भारत के टैक्स सिस्टम को लेकर चिंतित है. उसने चेतावनी देते हुए कहा है कि भारत में टैक्स संबंधी जटिलताएं ग्लोबल एयरलाइन्स को देश छोड़ने के लिए मजबूर कर सकती हैं. आईएटीए की 80वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में एसोसिएशन के डायरेक्टर जनरल विली वॉल्श ने कहा कि भारत में टैक्स सिस्टम बेहद जटिल है. कुछ प्रस्ताव ऐसे हैं जिनके कारण विदेशी एयरलाइन्स को भारत छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है. ग्लोबल एविएशन कंपनियों को यहां टैक्स नियम संबंधी जटिलाएं, बहुत ज्यादा टैक्स और डबल टैक्सेशन के जोखिम का सामना करना पड़ रहा है. ये कुछ ऐसे मुद्दे हैं, जिनसे विदेशी एयरलाइन बचना चाहती हैं.
नाराजगी की ये भी है वजह
पिछले साल अक्टूबर में डायरेक्ट्रेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलीजेंस (DGGI) ने कई विदेशी एयरलाइन कंपनियों के कार्यालयों पर छापा मारा था. यह कार्रवाई टैक्स की चोरी के मामले में हुई थी. Etihad, Emirates, Saudi Airlines, Qatar Airways, Air Arabia, Oman Air और Kuwait Airways उन कंपनियों में शुमार थीं, जिनके ऑफिस DGGI ने खंगाले थे. इस कार्रवाई से विदेशी कंपनियों में नाराजगी है. इसी को आधार बनाकर अब इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) ने भारत में टैक्स का मुद्दा उठाया है. बता दें कि IATA की स्थापना 1945 में कुछ एयरलाइन कंपनियों के साथ हुई थी. आज दुनियाभर की 300 से अधिक एयरलाइन्स इससे जुड़ी हुई हैं.
GST पर हुआ था विवाद
इसी साल डीजीसीआई ने Thai Airways, Singapore Airlines, Lufthansa और British Airways के भारतीय कर्मचारियों को समन भेजा था. इन एयरलाइन्स पर GST का भुगतान नहीं करने का आरोप था. DGGI के अनुसार, विदेशी एयरलाइन कंपनियों को भारत में एयरक्राफ्ट मेंटनेंस, रेंटल और क्रू की सैलरी पर जीएसटी का भुगतान करना होगा. IATA की बैठक में ब्रिटिश एयरवेज के चीफ एग्जीक्यूटिव रहे वॉल्श ने कहा कि जब मैं एयरलाइन का सीईओ था, तो हमेशा भारत में टैक्स नियमों की चर्चा होती थी. भारत का टैक्स सिस्टम दुनिया में सबसे ज्यादा जटिल है. उन्होंने आगे कहा कि दुनिया में एक टैक्स स्ट्रक्चर है, जो अच्छा काम कर रहा है. यदि आप इसमें बदलाव करते हैं, तो विदेशी एयरलाइन आपके यहां से जा सकती हैं.
Emirates का है दबदबा
Directorate General of Civil Aviation (DGCA) के 2022-23 के आंकड़े बताते हैं कि भारत के इंटरनेशनल एयर ट्रैफिक में विदेशी एयरलाइन्स की हिस्सेदारी 56% है. जबकि भारतीय कंपनियों का हिस्सा 44 प्रतिशत है. विदेशी कंपनियों में सबसे ज्यादा 10% की हिस्सेदारी एमिरेट्स के पास है. इसके बाद Singapore Airlines, Etihad, Qatar Airways, Lufthansa और Air Arabia. का नंबर है. अक्टूबर-दिसंबर के दौरान देश में इंटरनेशनल एयर ट्रैफिक 1.73 करोड़ रहा. इस डिमांड को 78 विदेशी और 6 घरेलू कंपनियों ने पूरा किया है. अब यह देखने वाली बात होगी कि नई सरकार इस मुद्दे को कैसे सुलझाती है.
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