होम / बिजनेस / अरबपतियों की सूची में गौतम अडानी 24वें स्थान पर खिसके, नेटवर्थ रह गई सिर्फ इतनी
अरबपतियों की सूची में गौतम अडानी 24वें स्थान पर खिसके, नेटवर्थ रह गई सिर्फ इतनी
अडानी समूह का संकट तब शुरू हुआ जब अमेरिका स्थित शॉर्ट सेलर फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च ने समूह पर आरोप लगाया था कि उसने शेल फर्मों के माध्यम से शेयर बाजार में कई तरह की धोखाधड़ी के आरोप लगाए थे.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
पोर्ट-टू-पावर समूह अडानी समूह के अध्यक्ष, गौतम अडानी की समस्या खत्म होने का नाम नहीं ले रही है. दुनियाभर के अरबपतियों की सूची में अडानी अब 24वें स्थान पर पहुंच गए हैं. अडानी समूह के खिलाफ यूएस-आधारित लघु विक्रेता हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा जारी की गई रिपोर्ट के बाद समूह की परेशानियां खत्म नहीं हो रही हैं. ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार, 14 फरवरी तक अडानी की कुल संपत्ति 52.4 बिलियन डॉलर तक पहुंच गई है. फोर्ब्स रियल-टाइम बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार, टाइकून की कुल संपत्ति 53 बिलियन डॉलर है.
लगातार हो रही है अडानी की स्थिति कमजोर
ब्लूमबर्ग बिलिनेयर्स इंडेक्स की सूची में अडानी की स्थिति रिपोर्ट आने के बाद लगातार कमजोर हो रही है. पहले वो टॉप 10 से बाहर हुए और उसके बाद अब वो 24 वें नंबर पर पहुंच गए हैं. अडानी को अब तक इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद से लगातार नुकसान का सामना करना पड़ रहा है.
हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद से शुरू हुआ है विवाद
अडानी समूह का संकट तब शुरू हुआ जब अमेरिका स्थित शॉर्ट सेलर फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च ने शेल फर्मों के माध्यम से शेयर बाजार में हेरफेर, मनी लॉन्ड्रिंग सहित कई तरह की धोखाधड़ी का आरोप लगाया था. रिपोर्ट के कारण अडानी समूह की कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई. कंपनी को अब तक अरबों रुपये का नुकसान हो चुका है.
सेबी ने SC में दिया जवाब
इस बीच अडानी समूह के खिलाफ जांच का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की पहली सुनवाई में कहा था कि सेबी बताए कि निवेशकों की सुरक्षा के लिए भविष्य में क्या कदम उठाए जा सकते हैं. इस पर नियामक सेबी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि वह अडानी समूह के खिलाफ हिंडनबर्ग के आरोपों और रिपोर्ट आने से पहले और बाद दोनों स्थितियों की जांच कर रहा है. इसने आगे कहा कि हिंडनबर्ग अन्य कंपनियों के बीच एक लघु विक्रेता अनुसंधान कंपनी है जो उन कंपनियों पर शोध करती है जो शासन या वित्तीय मुद्दों से जुड़ी हुई हैं.
शॉर्ट पोजीशन लेने की है रणनीति
सेबी ने शीर्ष अदालत से कहा, उनकी रणनीति मौजूदा कीमतों पर ऐसी कंपनियों के बॉन्ड/शेयरों में शॉर्ट पोजीशन लेना है, (यानी, बॉन्ड/शेयरों को वास्तव में रखे बिना बेचना) और फिर उनकी रिपोर्ट प्रकाशित करना है. अडानी और उनकी कंपनियों के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए शीर्ष अदालत में एक जनहित याचिका दायर की गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय निवेशकों की सुरक्षा के उपायों पर कोर्ट में सेबी के बयान के बाद अडानी ग्रुप ने निवेशकों को आश्वस्त किया और समाचार एजेंसी रॉयटर्स को दिए एक बयान में कहा कि उसके पास मजबूत कैश फ्लो है और व्यावसायिक योजनाएं पूरी तरह से वित्त पोषित हैं. इस बीच समूह ने बयान दिया है कि हम शेयरधारकों को बेहतर रिटर्न देने के लिए अपने पोर्टफोलियो की निरंतर क्षमता में विश्वास रखते हैं.
टैग्स