रिसर्च फर्म हिंडनबर्ग की एक रिपोर्ट ने गौतम अडानी को भारी नुकसान पहुंचाया है. ग्रुप की कंपनियों के शेयर लगातार नीचे जा रहे हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
बॉलीवुड फिल्म का गाना 'क्या से क्या हो गए देखते-देखते' इस वक्त गौतम अडानी (Gautam Adani) पर बिल्कुल सटीक बैठता है. रिसर्च फर्म हिंडनबर्ग (Hindenburg) की रिपोर्ट से अडानी की रईसी को करारा झटका लगा है. नए साल में वह दौलत गंवाने वालों की लिस्ट में टॉप पर पहुंच गए हैं. अडानी कुछ वक्त पहले तक वह ब्लूमबर्ग बिलेनियर इंडेक्स (Bloomberg Billionaires Index) में चौथे स्थान पर थे और आज लुढ़ककर 7वें नंबर पर आ गए हैं.
इस साल गंवाए इतने
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल अब तक गौतम अडानी ने करीब 227,385 करोड़ रुपए गंवाए हैं. अडानी के नेटवर्थ में आई कमी के पीछे उनकी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट है. Hindenburg की रिपोर्ट के बाद से ये शेयर लगातार गिर रहे हैं. गुरुवार और शुक्रवार दोनों दिन अडानी समूह की कंपनियों के शेयर भारी गिरावट के साथ बंद हुए. यदि बाजार साप्ताहिक अवकाश के लिए बंद नहीं होता, तो गिरावट का सिलसिला बरकरार रहने की आशंका थी.
अंबानी की दौलत भी घटी
वहीं, दौलत गंवाने वालों में रिलायंस इंडस्ट्री के चेयरमैन मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) भी शामिल हैं. अंबानी ने इस साल अब तक 5.77 अरब डॉलर का नुकसान उठाया है. दुनिया भर के अरबपति कारोबारियों की लिस्ट में वह लुढ़ककर 13वें स्थान पर पहुंच गए हैं, जबकि कुछ वक्त पहले उन्होंने टॉप 10 में जगह बनाने में सफलता हासिल की थी. ब्लूमबर्ग बिलेनियर इंडेक्स के ताजा अपडेट के अनुसार, गौतम अडानी अब सातवें नंबर पर हैं. उनके आगे आगे लैरी एलिशन, वॉरेन बफेट, बिल गेट्स, जेफ बेजोस, Elon Musk और बर्नार्ड अर्नाल्ट हैं. अडानी की नेटवर्थ 120.7 अरब डॉलर से घटकर 92.7 अरब डॉलर रह गई है.
FPO का बिगाड़ा खेल
Hindenburg की रिपोर्ट ने अडानी इंटरप्राइजेज के FPO का खेल बिगाड़ दिया है. शुक्रवार को खुले इस FPO में पहले दिन कमजोर रिस्पांस देखने को मिला. दरअसल, पिछले दो दिनों से कंपनी के स्टॉक में आ रही गिरावट के कारण निवेशक अलर्ट हो गए है. शेयर बाजार पर उपलब्ध सूचना के अनुसार अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड के एफपीओ के पहले दिन 4.55 करोड़ शेयर के बदले केवल 4.7 लाख शेयरों के लिए ही बोली आई. कंपनी ने FPO के लिए कीमत दायरा 3,112 से 3,276 रुपए प्रति शेयर रखा हुआ है. जबकि शुक्रवार को इसका शेयर बीएसई पर 2,762.15 रुपए के भाव पर बंद हुआ.
NSDL के सेक्टर आधारित आंकड़ों के अनुसार, जुलाई के पहले पखवाड़े में विदेशी निवेशकों ने सबसे ज्यादा निवेश कंज्यूमर सर्विसेज सेक्टर में किया. इस सेक्टर में ₹7,361 करोड़ का विदेशी निवेश आया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय शेयर बाजार में एक बार फिर भरोसा दिखाया है. नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार में शुद्ध रूप से ₹17,227 करोड़ का निवेश किया है. इसके साथ ही FPIs की लगातार चार महीने से जारी बिकवाली का सिलसिला खत्म हो गया है.
22 जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में हुआ निवेश इस साल का केवल दूसरा महीना है, जब विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार में नेट खरीदार बने हैं. इससे पहले फरवरी में FPIs ने ₹22,615 करोड़ का निवेश किया था. हालांकि, जुलाई में खरीदारी के बावजूद साल 2026 में विदेशी निवेशक अब भी कुल मिलाकर शुद्ध विक्रेता बने हुए हैं. 22 जुलाई तक भारतीय इक्विटी बाजार से FPIs की कुल निकासी ₹2.57 लाख करोड़ रही है. साल की शुरुआत में भारी बिकवाली के कारण यह आंकड़ा अभी भी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है.
मार्च से जून तक जारी रही भारी बिकवाली
इससे पहले विदेशी निवेशकों ने लगातार चार महीनों तक भारतीय बाजार से पैसा निकाला था. आंकड़ों के मुताबिक, जून में FPIs ने ₹49,340 करोड़, मई में ₹32,963 करोड़, अप्रैल में ₹60,847 करोड़ और मार्च में ₹1.18 लाख करोड़ की निकासी की थी.
वहीं, जनवरी में विदेशी निवेशकों ने ₹35,962 करोड़ की बिकवाली की थी. इसके बाद फरवरी में वे नेट खरीदार बने थे, लेकिन मार्च से जून तक फिर से बिकवाली का दबाव देखने को मिला.
कंज्यूमर सर्विसेज और मेटल सेक्टर में सबसे ज्यादा निवेश
NSDL के सेक्टर आधारित आंकड़ों के अनुसार, जुलाई के पहले पखवाड़े में विदेशी निवेशकों ने सबसे ज्यादा निवेश कंज्यूमर सर्विसेज सेक्टर में किया. इस सेक्टर में ₹7,361 करोड़ का विदेशी निवेश आया.
इसके बाद मेटल्स और माइनिंग सेक्टर में ₹5,993 करोड़ और हेल्थकेयर सेक्टर में ₹4,101 करोड़ का निवेश हुआ. जुलाई के पहले दो हफ्तों में विदेशी निवेशक लगातार दूसरी पखवाड़े में नेट खरीदार रहे, जो फरवरी की शुरुआत के बाद सबसे मजबूत खरीदारी का दौर रहा. हालांकि, ऑटोमोबाइल, कैपिटल गुड्स और पावर सेक्टर में विदेशी निवेशकों की ओर से अब भी शुद्ध निकासी जारी रही.
विदेशी निवेश में सुधार के संकेत
जुलाई में FPIs की वापसी भारतीय इक्विटी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है. चार महीने की लगातार बिकवाली के बाद विदेशी निवेशकों की खरीदारी से बाजार में सेंटीमेंट को मजबूती मिली है. हालांकि, पूरे साल के आंकड़े अभी भी नकारात्मक बने हुए हैं और विदेशी निवेशकों की कुल हिस्सेदारी में सुधार आने में समय लग सकता है.
कंपनी के अनुसार, देश के लगभग 40% क्रिप्टो यूजर्स टियर-2 और टियर-3 शहरों से आते हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए इस प्लेटफॉर्म को अलग-अलग भाषाओं और विभिन्न पृष्ठभूमि के लोगों के लिए सुलभ बनाया गया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
वर्चुअल डिजिटल एसेट (VDA) ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म BitDelta India ने भारत में क्रिप्टो निवेशकों के लिए पहला स्ट्रक्चर्ड लर्निंग और सर्टिफिकेशन इकोसिस्टम 'CrypTution' लॉन्च किया है. यह प्लेटफॉर्म निवेशकों को क्रिप्टो बाजार में उतरने से पहले ब्लॉकचेन और डिजिटल एसेट्स की शिक्षा, वर्चुअल ट्रेडिंग का व्यावहारिक अनुभव और योग्यता आधारित सर्टिफिकेशन उपलब्ध कराएगा. इस पहल के लिए कंपनी ने अमेरिका एकेडमी ऑफ फाइनेंशियल मैनेजमेंट (AAFM) के साथ साझेदारी की है.
कंपनी का कहना है कि आज क्रिप्टो से जुड़ी जानकारी इंटरनेट पर आसानी से उपलब्ध है, लेकिन संरचित और भरोसेमंद शिक्षा की कमी के कारण अधिकांश निवेशक अधूरी या बिखरी हुई जानकारी पर निर्भर रहते हैं. CrypTution इसी अंतर को भरने का प्रयास करेगा. इसमें निवेशकों को वास्तविक निवेश से पहले प्रशिक्षण, वर्चुअल मार्केट सिमुलेशन और योग्यता आधारित सर्टिफिकेशन की सुविधा मिलेगी.
जिम्मेदार और सुरक्षित निवेश संस्कृति विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सा
BitDelta India के मुताबिक, देश के लगभग 40% क्रिप्टो यूजर्स टियर-2 और टियर-3 शहरों से आते हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए इस प्लेटफॉर्म को अलग-अलग भाषाओं और विभिन्न पृष्ठभूमि के लोगों के लिए सुलभ बनाया गया है. BitDelta India के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) विकास एम. सचदेवा ने कहा कि जिस तरह म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार में निवेशक शिक्षा ने लोगों की भागीदारी बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई, उसी तरह क्रिप्टो सेक्टर को भी व्यवस्थित शिक्षा की जरूरत है. उन्होंने कहा कि फिलहाल भारत में VDA के प्रति जागरूकता 30% से कम है और हर पांच में से एक सक्रिय निवेशक मानता है कि वह अभी भी इस बाजार को समझने की प्रक्रिया में है. ऐसे में CrypTution जिम्मेदार और सुरक्षित निवेश संस्कृति विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा.
तीन चरणों में होगा प्रशिक्षण
CrypTution का लर्निंग मॉडल 'पढ़ो, सीखो और बढ़ो' के तीन चरणों पर आधारित है.
1. 'पढ़ो' चरण में ब्लॉकचेन, वर्चुअल डिजिटल एसेट्स, बाजार की बुनियादी समझ, सुरक्षा और जोखिम प्रबंधन की पढ़ाई कराई जाएगी.
2.'सीखो' चरण में प्रतिभागियों को बिना वास्तविक पैसा लगाए वर्चुअल मार्केट सिमुलेशन के जरिए ट्रेडिंग का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा.
3. 'बढ़ो' चरण में सफल प्रतिभागियों को BitDelta India के प्लेटफॉर्म पर लाइव मार्केट ट्रेडिंग की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा.
AAFM India के साथ साझेदारी
CrypTution के 'पढ़ो' मॉड्यूल को American Academy of Financial Management (AAFM) India के सहयोग से तैयार किया गया है. AAFM India इस पहल में नॉलेज और एजुकेशन पार्टनर की भूमिका निभाएगा. संस्था को BFSI शिक्षा क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का अनुभव है और वह एक लाख से ज्यादा वित्तीय पेशेवरों को प्रशिक्षण दे चुकी है.
तीन सर्टिफिकेशन कोर्स
CrypTution के तहत अलग-अलग जरूरतों के अनुसार तीन सर्टिफिकेशन कोर्स शुरू किए गए हैं. इनमें शुरुआती निवेशकों के लिए 'Certified Virtual Asset Investor', वित्तीय सलाहकारों के लिए 'Certified Virtual Asset Practitioner' और एडवांस ट्रेडिंग, मार्केट एनालिसिस तथा जोखिम प्रबंधन सीखने के इच्छुक लोगों के लिए 'Certified Virtual Asset Trader' शामिल हैं.
कंपनी के अनुसार, CrypTution केवल सर्टिफिकेट देने तक सीमित नहीं रहेगा. इस प्लेटफॉर्म पर शिक्षार्थियों को वर्चुअल मार्केट सिमुलेशन, मार्केट इंटेलिजेंस, वेबिनार, विशेषज्ञों की मेंटरशिप, परीक्षाएं और कम्युनिटी नेटवर्किंग जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी. कंपनी का लक्ष्य भारत में वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) के क्षेत्र में अधिक जागरूक, प्रशिक्षित और जिम्मेदार निवेशक तैयार करना है.
कंपनी जमीन अधिग्रहण, टरबाइन की आपूर्ति, बैलेंस ऑफ प्लांट (BoP), इंजीनियरिंग, निर्माण, कमीशनिंग और लंबे समय तक संचालन एवं रखरखाव (O&M) सहित पूरी EPC सेवाएं प्रदान करेगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश की सबसे बड़ी विंड एनर्जी कंपनी Suzlon Energy को Waaree Group की पहली विंड एनर्जी परियोजना के लिए 201.6 मेगावाट (MW) का बड़ा ऑर्डर मिला है. आंध्र प्रदेश में विकसित होने वाली इस परियोजना के तहत Suzlon अपने DevCo (डेवलपमेंट कंपनी) मॉडल पर जमीन अधिग्रहण, इंजीनियरिंग, खरीद, निर्माण (EPC), टरबाइन की स्थापना और संचालन एवं रखरखाव (O&M) तक की पूरी जिम्मेदारी संभालेगी. यह साझेदारी दोनों कंपनियों के लिए रिन्यूएबल एनर्जी क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम मानी जा रही है.
64 विंड टरबाइन लगाएगी Suzlon
इस परियोजना के तहत Suzlon अपनी S144 विंड टरबाइन जनरेटर (WTG) की 64 यूनिट लगाएगी. प्रत्येक टरबाइन की क्षमता 3.15 मेगावाट होगी. कंपनी जमीन अधिग्रहण, टरबाइन की आपूर्ति, बैलेंस ऑफ प्लांट (BoP), इंजीनियरिंग, निर्माण, कमीशनिंग और लंबे समय तक संचालन एवं रखरखाव (O&M) सहित पूरी EPC सेवाएं प्रदान करेगी.
DevCo मॉडल पर बढ़ रहा जोर
कंपनी के अनुसार, जैसे-जैसे रिन्यूएबल एनर्जी परियोजनाएं बड़ी और जटिल होती जा रही हैं, एंड-टू-एंड DevCo मॉडल की मांग भी बढ़ रही है. यह मॉडल परियोजनाओं के विकास से जुड़े जोखिम कम करने, समय पर निष्पादन और बड़े स्तर पर विस्तार में मदद करता है.
'दो अग्रणी कंपनियों का रणनीतिक गठजोड़'
Suzlon Group के वाइस चेयरमैन गिरीश तांती ने कहा कि यह साझेदारी रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे रिन्यूएबल एनर्जी क्षेत्र की दो प्रमुख कंपनियां एक साथ आई हैं. उनके मुताबिक, Waaree ने सोलर सेक्टर में और Suzlon ने विंड एनर्जी क्षेत्र में मजबूत पहचान बनाई है. अब दोनों कंपनियां ग्राहकों को एकीकृत (Integrated) रिन्यूएबल एनर्जी समाधान उपलब्ध कराने की दिशा में काम करेंगी, जहां अलग-अलग तकनीकों के बजाय समग्र समाधान की मांग बढ़ रही है.
Waaree ने विंड एनर्जी में रखा पहला कदम
Waaree Forever Energies के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पवन अग्रवाल ने कहा कि कंपनी सोलर एनर्जी से आगे बढ़कर विविधीकृत रिन्यूएबल एनर्जी पोर्टफोलियो तैयार कर रही है. उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश में 201.6 मेगावाट की यह विंड एनर्जी परियोजना कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और इससे भारत की बढ़ती स्वच्छ ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी.
Suzlon और Waaree की मजबूत मौजूदगी
करीब 33% बाजार हिस्सेदारी के साथ Suzlon भारत की सबसे बड़ी विंड एनर्जी कंपनी है. वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का राजस्व 1.75 अरब डॉलर से अधिक रहा और 1 जून 2026 तक उसका मार्केट कैप 7.5 अरब डॉलर के पार पहुंच चुका था. कंपनी अब तक 17 देशों में लगभग 21.7 गीगावाट विंड एनर्जी क्षमता स्थापित कर चुकी है.
वहीं, 1990 में स्थापित Waaree Energies भारत की प्रमुख रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियों में शामिल है. कंपनी की वैश्विक सोलर पीवी मॉड्यूल और सोलर सेल निर्माण क्षमता 22.77 गीगावाट है तथा उसका कारोबार भारत समेत 25 से अधिक देशों में फैला हुआ है.
वेस्ट एशिया तनाव और महंगे कच्चे तेल ने बिगाड़ा तेल कंपनियों का गणित, HPCL को ₹12,265 करोड़ और BPCL को ₹3,962 करोड़ का नुकसान
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का असर अब भारतीय तेल कंपनियों के वित्तीय नतीजों पर दिखाई देने लगा है. सरकारी तेल कंपनियां हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) और भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भारी घाटा उठाना पड़ा है.
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद कंपनियों ने लंबे समय तक पेट्रोल, डीजल और LPG की कीमतों में बड़ा बदलाव नहीं किया, जिससे उन्हें लागत और बिक्री मूल्य के बीच भारी अंतर का सामना करना पड़ा. हालांकि, रिफाइनरी कारोबार से अच्छी कमाई हुई, लेकिन ईंधन बिक्री में हुए नुकसान ने पूरे मुनाफे को खत्म कर दिया.
HPCL को ₹12,265 करोड़ का घाटा
हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने जून तिमाही में 12,265 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा दर्ज किया है. पिछले साल इसी अवधि में कंपनी को 4,111 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था. कंपनी के मुख्य कारोबार (स्टैंडअलोन ऑपरेशंस) के आधार पर देखें तो HPCL को 11,526 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में कंपनी ने 4,371 करोड़ रुपये का लाभ कमाया था.
हालांकि, कंपनी की कुल आय में बढ़ोतरी दर्ज की गई. अप्रैल-जून तिमाही में HPCL की कुल आय बढ़कर 1.45 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 21 प्रतिशत ज्यादा है. लेकिन कच्चे तेल की महंगाई और ईंधन बिक्री में दबाव के कारण आय बढ़ने के बावजूद कंपनी मुनाफे में नहीं आ सकी.
BPCL को 15 तिमाहियों बाद हुआ नुकसान
भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) भी पहली तिमाही में घाटे में रही. कंपनी को अप्रैल-जून 2026 तिमाही में 3,962 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. यह BPCL का करीब 15 तिमाहियों के बाद पहला घाटा है. पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी ने 6,124 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था.
BPCL की कुल आय बढ़कर 1.59 लाख करोड़ रुपये हो गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 1.35 लाख करोड़ रुपये था. यानी कंपनी का कारोबार बढ़ा, लेकिन लागत बढ़ने और मार्जिन घटने के कारण मुनाफा घाटे में बदल गया.
क्यों हुआ इतना बड़ा नुकसान?
तेल कंपनियों के घाटे की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल रही. वेस्ट एशिया में तनाव और ईरान से जुड़े घटनाक्रमों के कारण कच्चे तेल के दामों में भारी तेजी आई.
आमतौर पर कच्चा तेल महंगा होने पर पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाई जाती हैं, ताकि कंपनियां बढ़ी हुई लागत की भरपाई कर सकें. लेकिन इस बार सरकारी तेल कंपनियों ने करीब ढाई महीने तक पेट्रोल और डीजल के दामों में बदलाव नहीं किया.
बाद में मई के दूसरे हिस्से में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 7.50 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा की बढ़ोतरी की गई. साथ ही घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में भी बदलाव हुआ, लेकिन तब तक कंपनियों को बड़ा नुकसान हो चुका था.
आगे भी बनी रह सकती है चुनौती
तेल कंपनियों के लिए आने वाली तिमाहियां भी चुनौतीपूर्ण रह सकती हैं, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है. अगर भू-राजनीतिक तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो ईंधन कीमतों, रिफाइनिंग मार्जिन और कंपनियों के मुनाफे पर इसका असर जारी रह सकता है.
अमेरिकी हमलों और लाल सागर में टैंकरों पर खतरे से बढ़ी आपूर्ति बाधित होने की आशंका, ब्रेंट क्रूड 96 डॉलर प्रति बैरल के पार
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अमेरिका द्वारा ईरान पर नए सिरे से हमले और लाल सागर में तेल टैंकरों को लेकर बढ़ते खतरे के बीच वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में गुरुवार को करीब 2% की तेजी दर्ज की गई. भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका गहरा गई है, जिसके चलते क्रूड ऑयल छह हफ्तों के उच्च स्तर पर पहुंच गया.
ब्रेंट क्रूड 96 डॉलर प्रति बैरल के पार
ब्रेंट क्रूड वायदा 1.93 डॉलर यानी करीब 2% बढ़कर 96 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. इससे पहले बुधवार को भी ब्रेंट क्रूड में 3 डॉलर से ज्यादा की तेजी आई थी. वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 1.44 डॉलर यानी 1.7% बढ़कर 88.27 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. बुधवार को WTI में करीब 3% की बढ़त दर्ज की गई थी.
अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी चिंता
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तेल बाजार में यह तेजी मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण आई है. अमेरिकी सेना ने ईरान पर लगातार 12वीं रात हमले किए. इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में किसी जहाज पर हमला करता है, तो अमेरिका ईरान के पुल या बिजली संयंत्रों को निशाना बनाएगा.
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के दक्षिणी हिस्से में एक तेल टैंकर में विस्फोट के बाद आग लग गई. गार्ड्स के मुताबिक, दो अन्य टैंकरों ने भी अपना रास्ता बदल लिया.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बढ़ा जोखिम
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने यह भी दावा किया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर उसका नियंत्रण है और अमेरिकी सैन्य कार्रवाई जारी रहने तक यह पूरी तरह बंद है. उसने चेतावनी दी कि ईरान के साथ समन्वय के बिना किसी भी तेल टैंकर को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का परिवहन होता है. इस मार्ग में किसी भी तरह की बाधा से वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है.
लाल सागर में भी बढ़ा खतरा
तेल आपूर्ति को लेकर चिंता उस समय और बढ़ गई जब ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी की घोषणा की और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सऊदी तेल टैंकरों को निशाना बनाने की धमकी दी.
हूतियों ने दावा किया कि चेतावनी के बाद करीब 10 जहाजों ने सऊदी बंदरगाहों की ओर अपनी यात्रा रोक दी है, हालांकि इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है.
अमेरिका में बढ़ा कच्चे तेल का भंडार
इस बीच, अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले सप्ताह अमेरिका में कच्चे तेल का भंडार 20 लाख बैरल बढ़ गया. रिफाइनरी गतिविधियों में कमी, निर्यात घटने और आयात बढ़ने के कारण स्टॉक में बढ़ोतरी दर्ज की गई.
ऊर्जा लागत और सप्लाई से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद आर्थिक गतिविधियों में मजबूती, जून में 32 महीने के उच्च स्तर पर पहुंची रफ्तार
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत की अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में 6.4% से 6.6% की दर से बढ़ने का अनुमान है. रेटिंग एजेंसी इक्रा (Icra) की रिपोर्ट के अनुसार, ऊर्जा लागत में बढ़ोतरी और सप्लाई से जुड़ी चुनौतियों के कारण कई क्षेत्रों के मार्जिन पर दबाव रहा, लेकिन मजबूत आर्थिक गतिविधियों ने विकास दर को सहारा दिया. हालांकि, यह अनुमान पिछली तिमाही (जनवरी-मार्च 2026) में दर्ज 7.8% की GDP वृद्धि से कम है. इससे संकेत मिलता है कि घरेलू अर्थव्यवस्था की रफ्तार मजबूत बने रहने के बावजूद पिछली तिमाही की तुलना में विकास की गति कुछ धीमी हो सकती है.
जून में आर्थिक गतिविधियां 32 महीने के उच्च स्तर पर
इक्रा के बिजनेस एक्टिविटी मॉनिटर के मुताबिक, जून 2026 में आर्थिक गतिविधियां 32 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गईं. जून में इस इंडेक्स में सालाना आधार पर 12% की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि मई में यह वृद्धि 9.4% रही थी. यह इंडेक्स आधिकारिक GDP आंकड़े जारी होने से पहले अर्थव्यवस्था की स्थिति का आकलन करने के लिए 16 प्रमुख संकेतकों को ट्रैक करता है.
13 संकेतकों में दिखा सुधार
रिपोर्ट के अनुसार, जून में बिजनेस एक्टिविटी में सुधार व्यापक स्तर पर देखने को मिला. 16 में से 13 संकेतकों में सालाना आधार पर वृद्धि की रफ्तार तेज हुई. इक्रा ने इसके पीछे कई कारण बताए हैं, जिनमें अमेरिका-ईरान के बीच अस्थायी युद्धविराम, जून में 40% कम बारिश के कारण निर्माण और खनन गतिविधियों के लिए कामकाजी अवधि बढ़ना और अनुकूल आधार प्रभाव शामिल हैं.
अप्रैल-जून तिमाही में बिजनेस एक्टिविटी मॉनिटर में सालाना आधार पर 10% की वृद्धि दर्ज की गई, जो पिछली तिमाही के 9.1% से अधिक है. इस दौरान गैर-कृषि क्षेत्र से जुड़े 17 संकेतकों में से 10 में सालाना आधार पर सुधार देखने को मिला.
औद्योगिक गतिविधियों में मिला-जुला रुख
इक्रा के अनुसार, संशोधित कोर इंडस्ट्रीज इंडेक्स में जून 2026 में सालाना आधार पर 5% की वृद्धि दर्ज की गई. इसके आधार पर एजेंसी ने अनुमान जताया है कि जून में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में 5-6% की वृद्धि हो सकती है.
जुलाई के शुरुआती आंकड़े भी आर्थिक गतिविधियों में मजबूती का संकेत दे रहे हैं. 1 जुलाई से 19 जुलाई के बीच बिजली की मांग में सालाना आधार पर 12.2% की वृद्धि दर्ज की गई, जो जून में रही 10.9% वृद्धि से अधिक है. इसका कारण अधिक तापमान और सामान्य से कम बारिश को माना गया है.
वाहन बिक्री की रफ्तार हुई धीमी
हालांकि, वाहन पंजीकरण में कुछ नरमी देखने को मिली. जुलाई की शुरुआती अवधि में वाहन रजिस्ट्रेशन में सालाना आधार पर 5% की वृद्धि हुई, जबकि जून में यह वृद्धि 23% रही थी. इक्रा के मुताबिक, खपत से जुड़े क्षेत्रों में अलग-अलग गति के कारण वाहन क्षेत्र की रफ्तार प्रभावित हुई है.
कुल मिलाकर, इक्रा का मानना है कि बाहरी चुनौतियों और लागत दबाव के बावजूद घरेलू मांग, औद्योगिक गतिविधियों और सेवा क्षेत्र की मजबूती के चलते भारतीय अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में स्थिर गति से आगे बढ़ने की स्थिति में है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि फास्ट-ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था लागू करने के लिए संबंधित विभागों और अधिकारियों को सभी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं, ताकि पेपर लीक जैसे मामलों का जल्द निपटारा हो सके.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देशभर में परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर बढ़ते विवाद के बीच केंद्र सरकार ने पेपर लीक मामलों पर सख्त रुख अपनाया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को पेपर लीक मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की घोषणा की. उन्होंने कहा कि इन अदालतों के जरिए ऐसे मामलों की तेजी से सुनवाई होगी और दोषियों को जल्द एवं कड़ी सजा दिलाई जाएगी. इसके साथ ही संबंधित मंत्रालयों और अधिकारियों को इस फैसले को जल्द लागू करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाने के निर्देश भी दिए गए हैं.
'युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को नहीं बख्शेंगे'
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "हमारे युवाओं का कल्याण और उनका भविष्य सर्वोच्च प्राथमिकता है. पेपर लीक में शामिल लोगों को त्वरित और कड़ी सजा दिलाने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित करने का फैसला किया गया है. यह छात्रों के हितों की रक्षा के लिए सरकार के लगातार प्रयासों का हिस्सा है. जो लोग हमारे युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करेंगे, उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा.
Nothing is more important than the welfare and future of our youth!
— Narendra Modi (@narendramodi) July 23, 2026
We have decided to set up fast-track courts to ensure swift and stringent punishment for those involved in paper leaks. Have directed the concerned authorities and officials to take all necessary steps in this…
अधिकारियों को दिए जरूरी निर्देश
प्रधानमंत्री ने कहा कि फास्ट-ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था लागू करने के लिए संबंधित विभागों और अधिकारियों को सभी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं, ताकि पेपर लीक जैसे मामलों का जल्द निपटारा हो सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके.
विरोध प्रदर्शनों के बीच आया फैसला
प्रधानमंत्री की यह घोषणा ऐसे समय में आई है, जब नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन हो रहे हैं. इन विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के कई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है.
आरबीआई की ताजा 'स्टेट ऑफ द इकोनॉमी' रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में निर्यात और आयात दोनों में तेज वृद्धि दर्ज की गई, जो भारत के बाह्य व्यापार की मजबूत रफ्तार को दर्शाती है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ताजा अर्थव्यवस्था रिपोर्ट में देश की आर्थिक स्थिति को लेकर सकारात्मक तस्वीर सामने आई है. रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशी निवेशकों का भारत पर भरोसा फिर मजबूत हुआ है, जबकि घरेलू मांग, औद्योगिक गतिविधियों और सेवा क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन ने आर्थिक विकास को मजबूती दी है. साथ ही, निर्यात-आयात में तेजी और बढ़ते FDI-FPI प्रवाह से आने वाले महीनों में भी अर्थव्यवस्था की रफ्तार बनाए रहने की उम्मीद जताई गई है.
निर्यात-आयात में तेजी से मजबूत हुई आर्थिक रफ्तार
आरबीआई की ताजा 'स्टेट ऑफ द इकोनॉमी' रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में निर्यात और आयात दोनों में तेज वृद्धि दर्ज की गई, जो भारत के बाह्य व्यापार की मजबूत रफ्तार को दर्शाती है. आरबीआई का मानना है कि भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के लागू होने और अन्य द्विपक्षीय व्यापार समझौतों में प्रगति से आने वाले समय में व्यापार को और गति मिलेगी.
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह अध्ययन आरबीआई के अधिकारियों ने डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता की देखरेख में तैयार किया है और इसमें व्यक्त विचार लेखकों के निजी हैं.
अप्रैल-मई में FDI में बड़ा उछाल
रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 के अप्रैल-मई के दौरान शुद्ध FDI बढ़कर 6.5 अरब डॉलर पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 2.47 अरब डॉलर था. अप्रैल 2026 में मजबूत इक्विटी निवेश और विदेशी निवेशकों की कम निकासी के कारण शुद्ध FDI 6.58 अरब डॉलर रहा, जबकि मई में केवल 7.4 करोड़ डॉलर की मामूली निकासी दर्ज की गई.
जून में FPI प्रवाह भी रहा मजबूत
आरबीआई के अनुसार, जून 2026 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) में भी शुद्ध निवेश दर्ज किया गया. इसकी प्रमुख वजह ऋण बाजार के लिए नीतिगत समर्थन और भू-राजनीतिक तनाव में कमी रही. 20 जुलाई तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने इक्विटी और डेट बाजार में कुल 3.1 अरब डॉलर का निवेश किया.
जापान, सिंगापुर और मॉरीशस से आया सबसे ज्यादा निवेश
रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल-मई 2026 के दौरान भारत में कुल इक्विटी FDI का लगभग 74% हिस्सा जापान, सिंगापुर और मॉरीशस से आया. सबसे अधिक निवेश वित्तीय सेवा क्षेत्र में हुआ, जबकि इसके बाद विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) और रिटेल सेक्टर का स्थान रहा.
वहीं, भारत से बाहर जाने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (ODI) का लगभग 74% हिस्सा अमेरिका, केमैन आइलैंड्स और नीदरलैंड गया. इसमें वित्तीय सेवाओं, बीमा और विनिर्माण क्षेत्रों की हिस्सेदारी 85% से अधिक रही.
विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत, जोखिम नियंत्रण में
रिपोर्ट में कहा गया है कि जून में आरबीआई द्वारा घोषित विशेष स्वैप सुविधा के बाद 8 जून से 17 जुलाई के बीच एफसीएनआर (बी) जमा में 17.4 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई. मार्च 2026 के अंत तक देश का विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत बना रहा और बाह्य क्षेत्र से जुड़े प्रमुख जोखिम नियंत्रण में रहे.
महंगाई पर सीमित असर, मांग बनी हुई मजबूत
आरबीआई का कहना है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून का वितरण भले ही सामान्य नहीं रहा हो, लेकिन पर्याप्त खाद्यान्न भंडार के कारण खाद्य महंगाई पर इसका बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है. जून में खाद्य और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी से खुदरा महंगाई में हल्की तेजी जरूर आई, लेकिन मजबूत घरेलू मांग और औद्योगिक एवं सेवा क्षेत्रों के बेहतर प्रदर्शन ने भारतीय अर्थव्यवस्था को बाहरी अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूती प्रदान की है.
बुधवार को बीएसई सेंसेक्स 715.06 अंक यानी 0.92% की गिरावट के साथ 76,755.05 अंक पर बंद हुआ. वहीं, एनएसई निफ्टी 191.45 अंक यानी 0.79% टूटकर 23,996.25 अंक पर बंद हुआ.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आयातित जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ लगाने के ऐलान से बुधवार को भारतीय शेयर बाजार लगातार तीसरे दिन गिरावट के साथ बंद हुआ. सेंसेक्स 715 अंक टूट गया और निफ्टी 24,000 के नीचे फिसल गया. अब गुरुवार के कारोबार में निवेशकों की नजर एचसीएल टेक के बड़े AI निवेश, कई कंपनियों के अधिग्रहण और इन्फोसिस, सिप्ला व इंडिगो समेत दिग्गज कंपनियों के जून तिमाही नतीजों पर रहेगी, जो बाजार की दिशा तय कर सकते हैं.
4 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति स्वाहा
कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 715.06 अंक यानी 0.92% की गिरावट के साथ 76,755.05 अंक पर बंद हुआ. वहीं, एनएसई निफ्टी 191.45 अंक यानी 0.79% टूटकर 23,996.25 अंक पर बंद हुआ. विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया भी डॉलर के मुकाबले 0.3% कमजोर होकर 96.5650 पर बंद हुआ. बाजार में आई इस गिरावट से बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब 4 लाख करोड़ रुपये घटकर 480 लाख करोड़ रुपये रह गया.
इन ब्लूचिप शेयरों में रही सबसे ज्यादा बिकवाली
सेंसेक्स के 30 में से 23 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए. इंडिगो में सबसे ज्यादा 3.68% की गिरावट रही. इसके अलावा एक्सिस बैंक, इन्फोसिस, एसबीआई, अल्ट्राटेक सीमेंट, आईसीआईसीआई बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, अडानी पोर्ट्स, टेक महिंद्रा और कोटक महिंद्रा बैंक के शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली. दूसरी ओर, इटरनल, हिंदुस्तान यूनिलीवर, पावरग्रिड, एनटीपीसी, टाइटन, एशियन पेंट्स, आईटीसी और ट्रेंट बढ़त के साथ बंद हुए.
अमेरिकी बाजार पर निर्भर फार्मा कंपनियों पर सबसे ज्यादा असर
ट्रंप के टैरिफ प्लान का सबसे अधिक असर उन भारतीय दवा कंपनियों पर पड़ा जिनकी आय का बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजार से आता है. सन फार्मा, डॉ. रेड्डीज लैब, अरबिंदो फार्मा और सिप्ला के शेयरों में 1% से 2% तक की गिरावट दर्ज की गई.
ब्रॉडर मार्केट में भी रही कमजोरी
निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 1.09% और स्मॉलकैप इंडेक्स 1.54% लुढ़क गए. सेक्टोरल इंडेक्स में पीएसयू बैंक और रियल्टी सबसे ज्यादा टूटे, जबकि एफएमसीजी और ऑटो सेक्टर में सीमित बढ़त देखने को मिली.
आज इन शेयरों पर रहेगी बाजार की नजर
गुरुवार के कारोबार में कई कॉरपोरेट घोषणाएं और जून तिमाही (Q1) के नतीजे बाजार की दिशा तय कर सकते हैं. एचसीएल टेक ने ओडिशा के भुवनेश्वर में करीब 730 करोड़ रुपये के निवेश से एआई आधारित डेटा सेंटर और ग्लोबल डेवलपमेंट सेंटर स्थापित करने की योजना पेश की है, जिससे उसका शेयर फोकस में रहेगा. टीवीएस मोटर ने वित्त वर्ष 2026-27 में अंतरराष्ट्रीय कारोबार में मजबूत वृद्धि का भरोसा जताया है. गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स ने अपनी सहायक कंपनी गोडरेज पेट केयर में 200 करोड़ रुपये का निवेश किया है. रुबिकॉन रिसर्च ने अमेरिका में एक मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का अधिग्रहण किया है, एमक्योर फार्मा ने Gennova में अतिरिक्त 12.05% हिस्सेदारी खरीदकर उसे पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी बना लिया है और आईनॉक्स ग्रीन एनर्जी सर्विसेज ने 600 करोड़ रुपये तक फंड जुटाने की मंजूरी दी है.
इन दिग्गज कंपनियों के Q1 नतीजों पर रहेगा फोकस
आज इन्फोसिस, इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो), सिप्ला, एमफैसिस, पीवीआर आईनॉक्स, इंडियन एनर्जी एक्सचेंज (IEX), मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज, चेन्नई पेट्रोलियम, साइएंट, महिंद्रा लाइफस्पेस, नोवार्टिस इंडिया, विशाल मेगा मार्ट, सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक और उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक समेत कई बड़ी कंपनियां जून तिमाही (Q1) के नतीजे जारी करेंगी. ऐसे में बुधवार की गिरावट के बाद गुरुवार के कारोबार में निवेशकों की नजर इन कंपनियों के नतीजों और कॉरपोरेट अपडेट्स पर रहेगी, जो बाजार की अगली दिशा तय कर सकते हैं.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
कंपनी की यह रीब्रांडिंग एक बूटस्ट्रैप्ड मुंबई स्टार्टअप से सूचीबद्ध वैश्विक AdTech प्लेटफॉर्म तक के उसके विकास को दर्शाती है. इसके साथ ही कंपनी ने एक नई AI इंटेलिजेंस लेयर भी पेश की है, जिसे इस तरह तैयार किया गया है कि वह मार्केटर्स के विज्ञापन की योजना बनाने, लॉन्च करने और उसके प्रदर्शन को मापने के तरीके को बदल सके.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
विज्ञापन, मार्केटिंग और उपभोक्ता विकास के क्षेत्र में काम करने वाली AI-नेटिव टेक्नोलॉजी कंपनी Mobavenue AI Tech ने आज अपनी नई ब्रांड पहचान का अनावरण किया और Mobavenue Neural Engine लॉन्च करने की घोषणा की. यह एक AI इंटेलिजेंस लेयर है, जिसे कंपनी के विज्ञापन प्रौद्योगिकी प्लेटफॉर्म्स पर विकसित किया गया है.
यह घोषणा उस बदलाव का संकेत है, जिस दिशा में कंपनी कई वर्षों से काम कर रही थी. अब कंपनी केवल विज्ञापन अभियान (Campaign) चलाने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि मार्केटर्स को बेहतर निर्णय लेने में भी मदद करना चाहती है.
Mobavenue की कहानी कंपनी के अस्तित्व में आने से पहले शुरू हुई थी. 17 वर्ष के दो इंजीनियरिंग छात्र, तेजस राठौड़ और कुणाल कोठारी, कोडिंग और डिजिटल विज्ञापन के साथ प्रयोग करते हुए यह समझना चाहते थे कि तकनीक उपभोक्ताओं का ध्यान किस तरह प्रभावित करती है. यही जिज्ञासा 2017 में एक डिजिटल मार्केटिंग एजेंसी में बदल गई. इसके बाद के वर्षों में, जब कंपनी ने अपने सर्विस मॉडल को बदलकर प्रोडक्ट प्लेटफॉर्म बनाने की दिशा में काम शुरू किया, तब ईशांक जोशी तीसरे सह-संस्थापक के रूप में जुड़े और यह बदलाव तेज़ी से आगे बढ़ा. आज Mobavenue एक प्रोडक्ट-आधारित AdTech और Consumer Growth प्लेटफॉर्म है, जिसके 200 से अधिक कर्मचारी हैं और जो 10 से अधिक बाजारों में 150 से अधिक ब्रांड्स को सेवाएं दे रहा है.
पूरी यात्रा के दौरान कंपनी बूटस्ट्रैप्ड रही. 2025 में कंपनी ने शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के बाद भी अपनी स्वामित्व वाली टेक्नोलॉजी स्टैक GMP 360 में निवेश जारी रखा.
कंपनी का कहना है कि यह रीब्रांडिंग किसी नए बदलाव की शुरुआत नहीं है, बल्कि उस बदलाव को स्वीकार करने का संकेत है, जो पहले ही हो चुका है.
Mobavenue AI Tech के संस्थापक, प्रबंध निदेशक (MD) और CEO ईशांक जोशी ने कहा, "विज्ञापन जगत में हर बड़ा बदलाव तकनीक की वजह से आया है. सर्च ने खोज (Discovery) का तरीका बदला, सोशल मीडिया ने वितरण (Distribution) को बदला, प्रोग्रामेटिक ने निर्णय लेने (Decisioning) के तरीके को बदला और अब AI विज्ञापन जगत को इरादे (Intent), बुद्धिमत्ता (Intelligence) और प्रभाव (Impact) की दिशा में बदल रहा है. हमने अपने लोगो को बदलने से काफी पहले इस बदलाव के लिए काम शुरू कर दिया था. हमारी नई पहचान केवल उस कंपनी के अनुरूप है, जिसमें हम बदल चुके हैं. वहीं Neural Engine इस बात की सबसे स्पष्ट अभिव्यक्ति है कि हम किस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं—भारत से विकसित AI-संचालित विज्ञापन और Consumer Growth इंफ्रास्ट्रक्चर, जो ब्रांड्स को बड़े पैमाने पर मापने योग्य परिणाम हासिल करने में मदद करता है."
Mobavenue Neural Engine,एक AI इंटेलिजेंस लेयर
इस नए अध्याय के केंद्र में Mobavenue Neural Engine है, जो एक AI इंटेलिजेंस लेयर है और पूरे विज्ञापन जीवनचक्र (Advertising Lifecycle) को एक ही सिस्टम में एकीकृत करती है. Mobavenue के मुख्य ग्रोथ प्लेटफॉर्म्स पर निर्मित यह इंजन मार्केटर्स को योजना बनाने से लेकर लाइव कैंपेन शुरू करने तक की प्रक्रिया 59 सेकंड से भी कम समय में पूरी करने में सक्षम बनाता है.
यह इंजन कोई स्वतंत्र AI असिस्टेंट नहीं है. यह Mobavenue के A³ Framework, Awareness, Acquisition और Activation के सभी हिस्सों में कार्य करता है और पूरे मार्केटिंग फनल में कंपनी के प्रोडक्ट्स को चार एकीकृत क्षमताओं के माध्यम से सशक्त बनाता है:
1. Planning: ब्रांड के उद्देश्यों, ऑडियंस इनसाइट्स और मार्केट इंटेलिजेंस के आधार पर बजट, श्रेणी या उद्देश्य के अनुसार अनुकूलित मार्केटिंग प्लान तैयार करता है.
2. Execution: प्लेटफॉर्म से सीधे विज्ञापन अभियान लॉन्च करता है, जिससे लॉन्च का समय कई दिनों से घटकर एक मिनट से भी कम रह जाता है.
3. Creative Intelligence: विज्ञापन क्रिएटिव तैयार करता है और Connected TV, OTT, म्यूजिक तथा युवा-केंद्रित प्लेटफॉर्म्स पर उपयुक्त प्लेसमेंट की सिफारिश करता है.
4. Conversational Reporting: मार्केटर्स को सामान्य भाषा में प्रदर्शन से जुड़े प्रश्न पूछने की सुविधा देता है और उन्हें इम्प्रेशन, कन्वर्जन, ऑडियंस और चैनल्स से संबंधित तुरंत इनसाइट्स प्रदान करता है.
Mobavenue AI Tech के संस्थापक और CTO तेजस राठौड़ ने कहा, "मार्केटिंग टीमों का बहुत अधिक समय बिखरे हुए वर्कफ्लो में खर्च हो जाता है. योजना एक टूल में बनती है, लॉन्च दूसरे में होता है, क्रिएटिव की ब्रीफिंग अलग से करनी पड़ती है और फिर यह समझने के लिए डैशबोर्ड खंगालने पड़ते हैं कि आखिर हुआ क्या. मार्केटिंग में AI की परिपक्वता (AI Maturity) पर उद्योग के अधिकांश मौजूदा शोध, जिनमें हमने भी एक प्रैक्टिशनर के रूप में योगदान दिया है, इसी अंतर की ओर इशारा करते हैं—AI को अपनाने की गति तेज है, लेकिन उसका एकीकरण नहीं हुआ है. हमने इसी अंतर को समाप्त करने के लिए Neural Engine बनाया है, जो पूरे जीवनचक्र को एक ही इंटेलिजेंस लेयर में समेट देता है. हमारे ग्राहकों के लिए इसका मतलब है कि वे विज्ञापन प्रबंधन की जटिल प्रक्रियाओं में कम समय बिताएं और रणनीति, रचनात्मकता तथा विकास पर अधिक ध्यान दे सकें."
Mobavenue AI Tech के संस्थापक, चेयरमैन और COO कुणाल कोठारी ने कहा, "टाइम्स स्क्वायर में अपनी नई पहचान को प्रदर्शित होते देखना हमारे लिए खास था, बिलबोर्ड की वजह से नहीं, बल्कि इसलिए कि वह हमारी यात्रा की दूरी को दर्शाता है. हमने इस कंपनी की शुरुआत मुंबई से बिना किसी बाहरी पूंजी के की थी और आज हम इसे अमेरिका, ब्रिटेन और सिंगापुर सहित कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार दे रहे हैं. इस विस्तार को संभव बनाने वाली ताकत AI है, जिसे हमने अपने हर संचालन का हिस्सा बनाया है. इससे हमारी टीमों और ग्राहकों, दोनों के लिए जटिलता कम हुई है. यह अनावरण केवल एक ब्रांड लॉन्च नहीं, बल्कि हमारे इरादे का संकेत था कि हम केवल वैश्विक विज्ञापन इकोसिस्टम का हिस्सा नहीं बनना चाहते, बल्कि उसके लिए निर्माण भी करना चाहते हैं."
आगे क्या
Mobavenue Neural Engine को कंपनी अपने लंबे प्रोडक्ट रोडमैप की नींव मानती है, जहां विज्ञापन तकनीक में ऑटोमेशन नहीं, बल्कि इंटेलिजेंस सबसे महत्वपूर्ण परत होगी. जैसे-जैसे उद्योग बंद इकोसिस्टम (Walled Gardens) की सीमाओं से आगे बढ़ रहा है, कंपनी का उद्देश्य ब्रांड्स को केवल विज्ञापन अभियान प्रबंधित करने से आगे बढ़ाकर भविष्यवाणी-आधारित निर्णय (Predictive Decision-making) और मापने योग्य व्यावसायिक प्रभाव के जरिए बेहतर परिणाम हासिल करने में मदद करना है.
कंपनी के नए टैगलाइन "Connecting What's Next" में भी यही सोच झलकती है. Mobavenue ने अपनी शुरुआत तेज़ी से बदलती डिजिटल दुनिया में ब्रांड्स, लोगों और संभावनाओं को जोड़ने के उद्देश्य से की थी. अब उसका अगला अध्याय व्यवसायों को उस इंटेलिजेंस से जोड़ने पर केंद्रित है, जो मापने योग्य परिणामों को आगे बढ़ाती है.
नई ब्रांड पहचान और Neural Engine को एक साथ लॉन्च करना कंपनी का यह कहने का तरीका है कि उसका अगला चरण पहले ही शुरू हो चुका है.