गौतम अडानी के अच्छे दिनों की शुरुआत हो चुकी है. वह मुकेश अंबानी को पीछे छोड़ते हुए फिर से एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी (Gautam Adani) के लिए 2024 की शुरुआत शानदार रही है. नए साल में अब तक सबसे ज्यादा कमाई करने के साथ ही अडानी को एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति का खिताब वापस मिल गया था. उन्होंने रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) से यह ताज छीन लिया है. हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के पहले तक अडानी एशिया के नंबर 1 रईस कारोबारी थी, लेकिन रिपोर्ट के असर से उनकी दौलत का पहाड़ दरकता गया और मुकेश अंबानी ने यह ख़िताब अपने नाम पर लिया. अब अडानी वापस एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं.
अंबानी की दौलत हुई कम
दुनिया के अरबपतियों की लिस्ट में गौतम अडानी 97.6 अरब डॉलर की नेटवर्थ के साथ 12वें स्थान पर आ गए हैं, जबकि मुकेश अंबानी खिसककर 13वें स्थान पर चले गए हैं. अंबानी की कुल संपत्ति 97 अरब डॉलर है. अडानी और अंबानी की दौलत में यह अंतर कुछ ही दिनों में आया है. साल के पहले 4 दिनों में अडानी ने कमाई के मामले में दुनिया के सभी अमीरों को पीछे छोड़ दिया है. ब्लूमबर्ग बिलेनियर इंडेक्स के मुताबिक, इस साल अब तक गौतम अडानी की संपत्ति 13.3 अरब डॉलर बढ़ी है. इसमें से 7.67 अरब डॉलर तो उन्होंने गुरुवार को ही कमा लिए हैं.
Arnault ने ज्यादा गंवाया
दरअसल, अडानी-हिंडनबर्ग मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अडानी ग्रुप के शेयरों में उछाल आया है और गौतम अडानी की संपत्ति भी बढ़ी है. अडानी इस साल अब तक के टॉप गेनर हैं, जबकि 2023 के वह टॉप लूजर थे. पिछले साल के टॉप गेनर रहे एलन मस्क (Elon Musk) इस साल अब तक के दूसरे टॉप लूजर बन गए हैं. उन्होंने पिछले 4 दिनों में 9 अरब डॉलर गंवाए हैं. वहीं, फ्रेंच कारोबारी Bernard Arnault सबसे ज्यादा गंवाने वाले अरबपति बन गए हैं. उन्हें इस साल अब तक 10.8 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है. इसके साथ ही उनकी नेटवर्थ घटकर 168 अरब डॉलर रह गई है.
राहत से बढ़ा विश्वास
गौतम अडानी दौलत के मामले में पिछले साल टॉप लूजर रहे थे. उन्होंने दुनिया में सबसे ज्यादा दौलत गंवाई थी. ब्लूमबर्ग बिलिनेयर इंडेक्स के अनुसार, पिछले साल अडानी की नेटवर्थ में 36.3 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई, जो दूसरे अरबपतियों के मुकाबले ज्यादा थी. जबकि इस साल की शुरुआत उन्होंने दूसरों से ज्यादा कमाई के साथ की है, यानी वह टॉप गेनर बन गए हैं. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद अडानी समूह के निवेशकों का विश्वास बढ़ा है. साथ ही नए निवेशक भी अडानी समूह में पैसा लगाने के लिए आकर्षित होंगे. ऐसे में यह साल समूह के लिए काफी अच्छा रहा सकता है. यह भी संभव है कि पिछले साल गौतम अडानी ने जितना गंवाया, उससे ज्यादा वह इस साल कमा लें.
विप्रो ने नियामकीय फाइलिंग में बताया कि 2 रुपये फेस वैल्यू वाले 60 करोड़ तक इक्विटी शेयरों को वापस खरीदने के प्रस्ताव को कंपनी के बोर्ड और शेयरधारकों दोनों की मंजूरी मिल चुकी है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश की प्रमुख आईटी कंपनी विप्रो (Wipro) ने अपने 15,000 करोड़ रुपये के शेयर बायबैक कार्यक्रम के लिए 5 जून 2026 को रिकॉर्ड डेट तय कर दी है. इस तारीख तक जिन निवेशकों के पास कंपनी के शेयर होंगे, वही इस बायबैक योजना में हिस्सा लेने के पात्र होंगे. कंपनी ने अप्रैल में इस बायबैक का ऐलान किया था.
60 करोड़ शेयर खरीदेगी कंपनी
बेंगलुरु मुख्यालय वाली विप्रो ने 16 अप्रैल 2026 को बायबैक योजना की घोषणा की थी. कंपनी के बोर्ड ने टेंडर ऑफर के जरिए 60 करोड़ तक पूरी तरह चुकता इक्विटी शेयर वापस खरीदने को मंजूरी दी थी. यह कंपनी की कुल इक्विटी पूंजी का 5 प्रतिशत से अधिक हिस्सा है. कंपनी प्रति शेयर 250 रुपये की कीमत पर शेयर वापस खरीदेगी. इस पूरी प्रक्रिया पर अधिकतम 15,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे.
करीब तीन साल बाद कर रही है बायबैक
यह लगभग तीन साल बाद विप्रो का पहला शेयर बायबैक होगा. इससे पहले कंपनी ने जून 2023 में 12,000 करोड़ रुपये का बायबैक किया था. उस दौरान 22 जून से 30 जून 2023 के बीच कंपनी ने 26.96 करोड़ इक्विटी शेयर वापस खरीदे थे. उस समय कंपनी ने अपनी कुल इक्विटी का करीब 4.91 प्रतिशत हिस्सा 445 रुपये प्रति शेयर के भाव पर खरीदा था. हालांकि दिसंबर 2024 में घोषित 1:1 बोनस इश्यू के बाद इस कीमत को समायोजित नहीं किया गया है.
बोर्ड और शेयरधारकों से मिली मंजूरी
विप्रो ने नियामकीय फाइलिंग में बताया कि 2 रुपये फेस वैल्यू वाले 60 करोड़ तक इक्विटी शेयरों को वापस खरीदने के प्रस्ताव को कंपनी के बोर्ड और शेयरधारकों दोनों की मंजूरी मिल चुकी है. कंपनी ने यह भी कहा कि प्रमोटर और प्रमोटर समूह के सदस्य भी इस बायबैक में हिस्सा लेने का इरादा रखते हैं.
क्या होता है शेयर बायबैक
शेयर बायबैक को आमतौर पर कंपनी द्वारा अतिरिक्त नकदी को शेयरधारकों को लौटाने का तरीका माना जाता है. इससे बाजार में उपलब्ध शेयरों की संख्या घटती है, जिससे प्रति शेयर आय यानी EPS बेहतर हो सकती है और निवेशकों का भरोसा मजबूत होता है.
शेयर में दिखी तेजी
बायबैक रिकॉर्ड डेट की घोषणा के बाद शुक्रवार को Wipro के शेयरों में तेजी देखने को मिली. NSE पर कंपनी का शेयर 1.62 प्रतिशत बढ़कर 202.97 रुपये पर बंद हुआ.
कंपनी ने साफ कहा है कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है और उपभोक्ताओं को पैनिक बाइंग यानी घबराहट में ज्यादा ईंधन खरीदने से बचना चाहिए.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश के कई हिस्सों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें और ईंधन की किल्लत की खबरों के बीच सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल (Indian Oil Corporation) ने बड़ा बयान जारी किया है. कंपनी ने साफ कहा है कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है और उपभोक्ताओं को पैनिक बाइंग यानी घबराहट में ज्यादा ईंधन खरीदने से बचना चाहिए. इंडियन ऑयल के मुताबिक कुछ इलाकों में जो दबाव दिख रहा है, वह अस्थायी और स्थानीय कारणों से पैदा हुआ है.
कुछ इलाकों में क्यों लगी लंबी कतारें?
देश के कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर अचानक बढ़ी भीड़ ने लोगों की चिंता बढ़ा दी. कई जगह ‘नो स्टॉक’ के बोर्ड भी देखने को मिले. हालांकि इंडियन ऑयल का कहना है कि यह स्थिति पूरे देश की नहीं बल्कि कुछ चुनिंदा इलाकों तक सीमित है. कंपनी के मुताबिक स्थानीय स्तर पर मांग और सप्लाई के असंतुलन तथा बिक्री के पैटर्न में बदलाव के कारण कुछ पेट्रोल पंपों पर दबाव बढ़ा है. अधिकांश पेट्रोल पंपों पर सप्लाई पूरी तरह सामान्य बनी हुई है.
कटाई के सीजन से बढ़ी डीजल की मांग
इंडियन ऑयल ने बताया कि इस समय देश के कई हिस्सों में फसलों की कटाई का मौसम चल रहा है. खेती और कृषि उपकरणों में डीजल की खपत बढ़ने से इसकी मांग में मौसमी उछाल आया है. डीजल की बढ़ी खपत का असर खासतौर पर ग्रामीण और कृषि प्रधान इलाकों में देखने को मिल रहा है, जहां ईंधन की मांग सामान्य दिनों की तुलना में काफी ज्यादा हो गई है.
सरकारी पंपों की ओर बढ़ा ग्राहकों का रुख
कंपनी के अनुसार निजी तेल कंपनियों के कई पेट्रोल पंपों पर कीमतें सरकारी पंपों की तुलना में अधिक हैं. यही वजह है कि बड़ी संख्या में ग्राहक सरकारी तेल कंपनियों के आउटलेट्स पर पहुंच रहे हैं. इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण थोक और संस्थागत सप्लाई महंगी हो गई है. ऐसे में बड़े कमर्शियल खरीदार भी सीधे सरकारी पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीद रहे हैं.
मई में पेट्रोल और डीजल बिक्री में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
इंडियन ऑयल के आंकड़ों के मुताबिक 1 से 22 मई 2026 के दौरान कंपनी की ईंधन बिक्री में बड़ा उछाल दर्ज किया गया. इस अवधि में पेट्रोल की बिक्री पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 14% बढ़ी है. वहीं डीजल की बिक्री में करीब 18% की वृद्धि दर्ज की गई है. कंपनी का कहना है कि मांग में इतनी तेज बढ़ोतरी के बावजूद पूरे देश में सप्लाई बनाए रखी गई है और ग्राहकों को लगातार ईंधन उपलब्ध कराया जा रहा है.
42 हजार से ज्यादा पेट्रोल पंपों पर सप्लाई सामान्य
इंडियन ऑयल ने बताया कि देशभर में उसके 42 हजार से अधिक पेट्रोल पंपों का नेटवर्क है. इनमें से केवल कुछ चुनिंदा आउटलेट्स पर ही दबाव की स्थिति बनी हुई है. कंपनी ने भरोसा दिलाया कि अधिकांश पेट्रोल पंपों पर स्टॉक पर्याप्त मात्रा में मौजूद है और सप्लाई चेन पूरी तरह सामान्य तरीके से काम कर रही है.
अफवाहों से बचें, पैनिक बाइंग न करें
इंडियन ऑयल ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और जरूरत से ज्यादा पेट्रोल-डीजल खरीदने से बचें. कंपनी ने कहा कि वह अन्य तेल विपणन कंपनियों के साथ मिलकर देशभर में पर्याप्त स्टॉक बनाए हुए है और जहां कहीं स्थानीय स्तर पर दिक्कत आ रही है, वहां तुरंत कदम उठाए जा रहे हैं.
Icra ने FY27 के लिए कच्चे तेल की औसत कीमत का अनुमान बढ़ाकर 95 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है, जबकि पहले यह अनुमान 85 डॉलर प्रति बैरल था.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है. रेटिंग एजेंसी Icra Limited ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए भारत की GDP वृद्धि दर का अनुमान 6.5% से घटाकर 6.2% कर दिया है. एजेंसी का कहना है कि महंगे ऊर्जा आयात, कमजोर निवेश माहौल और वैश्विक अनिश्चितताओं ने आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार को प्रभावित किया है. हालांकि, निर्यात और वाहन उत्पादन जैसे कुछ सेक्टर अभी भी मजबूती दिखा रहे हैं.
बिजनेस एक्टिविटी में मामूली सुधार, लेकिन व्यापक तेजी नहीं
Icra के बिजनेस एक्टिविटी मॉनिटर, जो 16 हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स पर आधारित एक संयुक्त सूचकांक है, उसकी सालाना वृद्धि अप्रैल 2026 में 8.3% रही. मार्च 2026 में यह 8.0% थी. हालांकि एजेंसी ने कहा कि यह सुधार सीमित रहा और नवंबर 2025 से फरवरी 2026 के दौरान दर्ज 9-11% की मजबूत वृद्धि से अभी भी नीचे है. एजेंसी के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे वित्तीय परिस्थितियां सख्त हुई हैं और आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ा है.
कच्चे तेल का अनुमान बढ़ाया
Icra ने FY27 के लिए कच्चे तेल की औसत कीमत का अनुमान बढ़ाकर 95 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है, जबकि पहले यह अनुमान 85 डॉलर प्रति बैरल था. एजेंसी का मानना है कि वित्त वर्ष की पहली छमाही में तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं और दूसरी छमाही में घटकर करीब 80 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकती हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि लंबे समय तक ऊंची ऊर्जा कीमतें बनी रहने से निवेश मांग कमजोर पड़ सकती है, कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है और उपभोक्ताओं का भरोसा भी घट सकता है.
कमजोर मानसून और एल नीनो का खतरा
Icra ने FY27 की दूसरी छमाही के लिए संभावित एल नीनो और कमजोर मानसून को भी बड़ा जोखिम बताया है. एजेंसी के अनुसार, यदि बारिश सामान्य से कम रहती है तो कृषि उत्पादन और ग्रामीण मांग दोनों प्रभावित हो सकते हैं.
16 में से 9 संकेतकों में गिरावट
अप्रैल 2026 में बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स में हल्की बढ़त के बावजूद 16 में से 9 संकेतकों का प्रदर्शन मार्च की तुलना में कमजोर रहा. घरेलू हवाई यात्री यातायात अप्रैल में 1.6% घट गया, जबकि मार्च में इसमें 0.9% की गिरावट थी. एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमतें बढ़ने से हवाई किराए महंगे हुए और यात्रा मांग प्रभावित हुई.
डीजल खपत की वृद्धि दर मार्च के 8.0% से घटकर अप्रैल में सिर्फ 0.3% रह गई. पेट्रोल खपत की वृद्धि भी 7.6% से घटकर 6.4% हो गई. खनन उत्पादन अप्रैल में 6.9% घटा, जो मार्च में 3.1% की गिरावट से भी ज्यादा खराब रहा. फिनिश्ड स्टील की खपत वृद्धि भी 14.1% से घटकर 8.1% रह गई. GST ई-वे बिल जनरेशन की वृद्धि दर 11.8% रही, जो पिछले छह महीनों का सबसे धीमा स्तर है.
कुछ सेक्टरों ने दिखाई मजबूती
कमजोर संकेतकों के बीच कुछ सेक्टरों ने बेहतर प्रदर्शन भी किया. गैर-तेल वस्तु निर्यात अप्रैल में 9.0% की दर से बढ़ा, जबकि मार्च में इसमें 9.2% की गिरावट दर्ज की गई थी. इसमें कमोडिटी कीमतों में तेजी और रुपये की कमजोरी का योगदान रहा.
पैसेंजर व्हीकल उत्पादन अप्रैल में सालाना आधार पर 12.8% बढ़ा, जबकि मार्च में यह वृद्धि 9.0% थी. टू-व्हीलर उत्पादन भी मजबूत बना रहा. वाहन रजिस्ट्रेशन अप्रैल में 12.8% बढ़े. रिपोर्ट के मुताबिक GST दरों में तर्कसंगत बदलाव से ग्राहकों की खरीद क्षमता में सुधार हुआ.
सीमेंट उत्पादन वृद्धि 4.7% से बढ़कर 9.4% हो गई, जबकि बिजली उत्पादन 0.8% से बढ़कर 4.1% पहुंच गया. गर्मी और हीटवेव की वजह से बिजली मांग में इजाफा देखने को मिला.
कोर सेक्टर की रफ्तार अब भी धीमी
भारत के आठ प्रमुख कोर सेक्टरों की वृद्धि दर अप्रैल में मामूली बढ़कर 1.7% रही, जो मार्च में 1.2% थी. हालांकि Icra ने कहा कि अनुकूल बेस होने के बावजूद प्रदर्शन कमजोर बना हुआ है.
स्टील, सीमेंट और बिजली उत्पादन को छोड़कर बाकी पांच कोर उद्योगों में उत्पादन घटा है. एजेंसी का मानना है कि इसका असर औद्योगिक उत्पादन के आंकड़ों पर भी दिखाई दे सकता है.
ग्रामीण रोजगार की स्थिति बिगड़ी
अप्रैल में श्रम बाजार के संकेतक भी कमजोर हुए. भारत की बेरोजगारी दर बढ़कर 5.2% हो गई, जो पिछले छह महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है. मार्च में यह 5.1% थी. ग्रामीण क्षेत्रों में वर्कर-पॉपुलेशन रेशियो 55.5% से घटकर 54.9% हो गया, जबकि ग्रामीण बेरोजगारी दर सात महीने के उच्च स्तर 4.6% पर पहुंच गई. हालांकि शहरी क्षेत्रों में स्थिति कुछ बेहतर रही और शहरी बेरोजगारी दर 6.8% से घटकर 6.6% हो गई.
मई के शुरुआती संकेत बेहतर
Icra के मुताबिक मई 2026 के शुरुआती आंकड़े कुछ राहत देने वाले हैं. 1 से 21 मई के बीच रोजाना औसत वाहन रजिस्ट्रेशन करीब 23% बढ़कर 76,600 यूनिट तक पहुंच गया, जबकि अप्रैल में यह वृद्धि 13% थी.
इसी अवधि में बिजली मांग वृद्धि भी 4.4% से बढ़कर 8.1% हो गई. हालांकि एजेंसी ने चेतावनी दी कि वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेजी के कारण बॉन्ड यील्ड, कॉरपोरेट बॉन्ड स्प्रेड और रुपये पर दबाव अभी भी चिंता का विषय बने हुए हैं.
राज्य सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक कच्चे तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी हुई है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
बढ़ती ईंधन कीमतों, वैश्विक कच्चे तेल संकट और ऊर्जा सुरक्षा की चिंताओं के बीच ओडिशा सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. राज्य सरकार ने 1 जून 2026 से सभी सरकारी विभागों और संस्थानों के लिए केवल इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की खरीद अनिवार्य कर दी है. सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य ईंधन की खपत कम करना, खर्चों में कटौती करना और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देना है.
मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने जारी किए निर्देश
मोहन चरण माझी मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने निर्देश दिया है कि 1 जून के बाद सरकारी कार्यालयों द्वारा खरीदे जाने वाले सभी नए दोपहिया और चारपहिया वाहन इलेक्ट्रिक होने चाहिए. इसके साथ ही विभागों द्वारा किराये पर लिए जाने वाले चारपहिया वाहन भी EV होंगे. हालांकि, विशेष परिस्थितियों में ही पेट्रोल और डीजल वाहनों की खरीद की अनुमति दी जाएगी.
ईंधन बचत और ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार का फोकस
राज्य सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक कच्चे तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी हुई है. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नागरिकों से पेट्रोल और डीजल के अनावश्यक उपयोग को कम करने की अपील की थी. मुख्यमंत्री मांझी इससे पहले अपने काफिले में वाहनों की संख्या आधी कर चुके हैं और लोगों से ईंधन बचाने की अपील भी कर चुके हैं.
लागू होंगे आठ बड़े दिशानिर्देश
मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव अनु गर्ग को राज्यभर में सरकारी विभागों, सार्वजनिक संस्थानों और सरकारी सहायता प्राप्त संगठनों में ईंधन खपत कम करने के लिए व्यापक आठ-सूत्रीय दिशानिर्देश लागू करने के निर्देश दिए हैं. इन उपायों का मकसद सरकारी खर्च कम करने के साथ-साथ ऊर्जा दक्षता बढ़ाना है.
सरकारी बैठकों में बढ़ेगा वर्चुअल सिस्टम
नई व्यवस्था के तहत अब सरकारी बैठकों, समीक्षा बैठकों, ट्रेनिंग प्रोग्राम और कार्यशालाओं को प्राथमिकता के आधार पर ऑनलाइन आयोजित किया जाएगा. सरकार ने कहा है कि केवल बेहद जरूरी मामलों में ही अधिकारियों और कर्मचारियों की फिजिकल मौजूदगी अनिवार्य होगी. बाकी कर्मचारी वर्चुअल माध्यम से शामिल होंगे.
अधिकारियों को सार्वजनिक परिवहन इस्तेमाल करने की सलाह
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि सरकारी अधिकारी आधिकारिक यात्राओं के दौरान निजी सरकारी वाहनों के बजाय बस और ट्रेन जैसे सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें. सरकार का मानना है कि इससे ईंधन की खपत में बड़ी कमी लाई जा सकती है.
कर्मचारियों के लिए शुरू होंगी इलेक्ट्रिक बस सेवाएं
राज्य सरकार शहरी क्षेत्रों में सरकारी कर्मचारियों के लिए इलेक्ट्रिक बस और मिनीबस सेवाएं शुरू करने की भी तैयारी कर रही है. इन सेवाओं का उद्देश्य उन कर्मचारियों को सुविधा देना है जो आवासीय इलाकों से रोजाना दफ्तर आते-जाते हैं. इससे निजी वाहनों पर निर्भरता कम होगी और प्रदूषण में भी कमी आएगी.
EV सेक्टर को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि ओडिशा सरकार का यह कदम इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग को बड़ा प्रोत्साहन दे सकता है. सरकारी स्तर पर EV अपनाने से न सिर्फ ईंधन की बचत होगी, बल्कि कार्बन उत्सर्जन कम करने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी.
वेरिएबल रेट रेपो (VRR) नीलामी RBI का एक मौद्रिक उपकरण है, जिसका इस्तेमाल बैंकिंग सिस्टम में अल्पकालिक लिक्विडिटी उपलब्ध कराने के लिए किया जाता है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
बैंकिंग सिस्टम में घटती नकदी और बढ़ती मनी मार्केट दरों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय बैंक ने तीन-दिवसीय वेरिएबल रेट रेपो (VRR) नीलामी के जरिए 81,590 करोड़ रुपये की अस्थायी लिक्विडिटी सिस्टम में डाली है. विशेषज्ञों का मानना है कि RBI का यह कदम बैंकिंग सिस्टम में नकदी की उपलब्धता बनाए रखने और अल्पकालिक ब्याज दरों को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया है.
क्या है VRR और क्यों जरूरी है यह कदम?
वेरिएबल रेट रेपो (VRR) नीलामी RBI का एक मौद्रिक उपकरण है, जिसका इस्तेमाल बैंकिंग सिस्टम में अल्पकालिक लिक्विडिटी उपलब्ध कराने के लिए किया जाता है. जब सिस्टम में नकदी कम होने लगती है और बैंकों के लिए फंड जुटाना महंगा हो जाता है, तब RBI इस तरह की नीलामी के जरिए बैंकों को फंड उपलब्ध कराता है. RBI ने बताया कि यह फंड 5.26% की कट-ऑफ दर पर उपलब्ध कराया गया.
मांग उम्मीद से कम, लेकिन पिछली नीलामी से बेहतर
हालांकि RBI ने 1 लाख करोड़ रुपये तक की राशि उपलब्ध कराने की घोषणा की थी, लेकिन बैंकों की कुल मांग 81,590 करोड़ रुपये तक ही रही. इसके बावजूद, 21 मई को हुई पिछली VRR नीलामी की तुलना में इस बार बैंकों की भागीदारी और मांग अधिक रही, जो बाजार में बढ़ती नकदी जरूरत को दर्शाती है.
तेजी से घटा लिक्विडिटी सरप्लस
RBI के आंकड़ों के मुताबिक, बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी सरप्लस तेजी से घटा है. 20 मई को जहां सिस्टम में करीब 1.51 लाख करोड़ रुपये का सरप्लस था, वहीं 21 मई तक यह घटकर लगभग 58,876.29 करोड़ रुपये रह गया. लिक्विडिटी में इस गिरावट का असर मनी मार्केट पर भी दिखाई दिया है और ओवरनाइट कॉल मनी रेट में तेज उछाल दर्ज किया गया है.
RBI उठा सकता है और कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सिस्टम में नकदी का दबाव बना रहता है, तो RBI आने वाले दिनों में एक और VRR नीलामी की घोषणा कर सकता है. विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों में केंद्रीय बैंक का फोकस बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त लिक्विडिटी बनाए रखने और अल्पकालिक ब्याज दरों को स्थिर रखने पर है.
अर्थव्यवस्था और बाजार पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का कहना है कि बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त नकदी बनाए रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि इसका सीधा असर कर्ज वितरण, ब्याज दरों और बाजार की स्थिरता पर पड़ता है. अगर लिक्विडिटी की स्थिति ज्यादा कमजोर होती है, तो बैंकों के लिए फंड जुटाने की लागत बढ़ सकती है, जिसका असर आम ग्राहकों के लिए लोन दरों पर भी पड़ सकता है.
कंपनी के निवेश प्रबंधक क्यूब हाईवेज फंड एडवाइजर्स के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने मार्च तिमाही के लिए 3.57 रुपये प्रति यूनिट वितरण को मंजूरी दी है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
क्यूब हाईवेज ट्रस्ट (Cube InvIT) ने वित्त वर्ष 2025-26 में शानदार वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है. कंपनी ने पूरे वित्त वर्ष के लिए 13.77 रुपये प्रति यूनिट (DPU) के रिकॉर्ड वितरण की घोषणा की है. कंपनी ने 31 मार्च 2026 को समाप्त तिमाही और पूरे वित्त वर्ष के नतीजे जारी करते हुए बताया कि मजबूत ट्रैफिक ग्रोथ, अधिग्रहण और बेहतर परिचालन प्रदर्शन की वजह से आय और EBITDA में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई.
चौथी तिमाही में 480 करोड़ रुपये का वितरण
कंपनी के निवेश प्रबंधक क्यूब हाईवेज फंड एडवाइजर्स (Cube Highways Fund Advisors Pvt. Ltd) के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने मार्च तिमाही के लिए 3.57 रुपये प्रति यूनिट वितरण को मंजूरी दी है.
कुल वितरण राशि 480 करोड़ रुपये रहेगी. इसमें:
1. 1.74 रुपये प्रति यूनिट ब्याज
2. 0.27 रुपये प्रति यूनिट डिविडेंड
3. 1.55 रुपये प्रति यूनिट SPV लोन रीपेमेंट
4. 0.01 रुपये प्रति यूनिट ट्रेजरी इनकम शामिल है.
FY26 में आय और EBITDA में जोरदार बढ़ोतरी
कंपनी के ग्रुप सीएफओ पंकज वासनी ने कहा कि FY26 में कंपनी की कंसोलिडेटेड आय सालाना आधार पर 26.23% बढ़कर 4,359 करोड़ रुपये पहुंच गई. वहीं, EBITDA में 29.95% की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 3,092 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू भी 28.17% बढ़कर 4,239 करोड़ रुपये हो गया. उन्होंने बताया कि 8.1% की मजबूत ट्रैफिक ग्रोथ और सालभर किए गए रणनीतिक अधिग्रहणों ने इस प्रदर्शन में अहम भूमिका निभाई.
रिकॉर्ड वार्षिक वितरण और मजबूत NAV
कंपनी के मुताबिक FY26 उसके लिए एक ऐतिहासिक साल रहा. इस दौरान कंपनी ने लिस्टिंग के बाद अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक वितरण किया, जो 1,851 करोड़ रुपये रहा. कंपनी का नेट एसेट वैल्यू (NAV) बढ़कर 145.8 रुपये प्रति यूनिट हो गया, जो दिसंबर 2025 में 142.7 रुपये प्रति यूनिट था.
कर्ज स्थिर, एसेट्स अंडर मैनेजमेंट बढ़े
क्यूब हाईवेज ट्रस्ट का नेट डेट 17,768 करोड़ रुपये पर स्थिर रहा. कंपनी ने 46.82% का संतुलित नेट डेट-टू-एंटरप्राइज वैल्यू अनुपात बनाए रखा. वहीं, कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर 36,842 करोड़ रुपये हो गया.
AAA रेटिंग बरकरार
कंपनी ने बताया कि उसे क्रिसिल (CRISILL), इंडिया रेटिंग्स (India Ratings and Research) और इकरा (ICRA) से AAA/Stable क्रेडिट रेटिंग मिली हुई है, जो उसकी मजबूत वित्तीय स्थिति को दर्शाती है.
27 मई रिकॉर्ड डेट, 4 जून तक मिलेगा भुगतान
कंपनी ने बताया कि वितरण के लिए रिकॉर्ड डेट 27 मई 2026 तय की गई है, जबकि निवेशकों को भुगतान 4 जून 2026 या उससे पहले कर दिया जाएगा.
क्या करती है Cube Highways Trust?
क्यूब हाईवेज ट्रस्ट भारत के हाईवे सेक्टर में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत काम करती है. कंपनी केंद्र और राज्य सरकारों के साथ मिलकर हाईवे प्रोजेक्ट्स का संचालन और प्रबंधन करती है.
कंपनी को वैश्विक निवेशकों का समर्थन प्राप्त है, जिनमें आई स्कावार्ड कैपिटल (I Squared Capital Capital), अबु धाबी इंवेस्टमेंट अथॉरिटी (Abu Dhabi Investment Authority) और मुबाडाला इन्वेस्टमेंट कंपनी (Mubadala Investment Company) जैसे बड़े नाम शामिल हैं.
कंपनी के मुताबिक, डिजिटल सर्विसेज, रिटेल कारोबार और ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C) बिजनेस में मजबूत प्रदर्शन और लगातार विस्तार ने इस रिकॉर्ड उपलब्धि में अहम भूमिका निभाई.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries Limited) ने भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास में नया कीर्तिमान स्थापित किया है. मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली कंपनी वित्त वर्ष 2025-26 में 120 बिलियन डॉलर से अधिक का सकल राजस्व हासिल करने वाली देश की पहली कंपनी बन गई है. कंपनी ने इस दौरान 124 बिलियन डॉलर का रेवेन्यू दर्ज किया, जो भारतीय उद्योग जगत के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है. कंपनी के मुताबिक, डिजिटल सर्विसेज, रिटेल कारोबार और ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C) बिजनेस में मजबूत प्रदर्शन और लगातार विस्तार ने इस रिकॉर्ड उपलब्धि में अहम भूमिका निभाई.
टेक्सटाइल कारोबार से शुरू होकर ग्लोबल दिग्गज बनने तक का सफर
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि 1966 में एक छोटे टेक्सटाइल कारोबार के रूप में शुरू हुई कंपनी आज 124 बिलियन डॉलर के वैश्विक समूह में बदल चुकी है. कंपनी ने कहा कि FY26 में 120 बिलियन डॉलर का रेवेन्यू पार करना भारतीय कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है.
From a textile dream in 1966 to a $124 Billion global conglomerate in 2026.
— Reliance Industries Limited (@RIL_Updates) May 22, 2026
Reliance Industries becomes the first Indian company to surpass USD $120 Billion revenue landmark in FY 2025-26. This is a testament to the spirit of an unstoppable India.
The journey continues. Because… pic.twitter.com/COB5hUPRU7
एक महीने पहले बनाया था नेट प्रॉफिट का भी रिकॉर्ड
यह उपलब्धि ऐसे समय आई है जब करीब एक महीने पहले ही रिलायंस 10 बिलियन डॉलर का वार्षिक नेट प्रॉफिट कमाने वाली पहली भारतीय कंपनी बनी थी. कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में 95,610 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट दर्ज किया. डॉलर के मुकाबले 94.4 रुपये की विनिमय दर के हिसाब से यह करीब 10.1 बिलियन डॉलर बैठता है.
TCS, Infosys और HCL Tech से भी ज्यादा रहा मुनाफा
रिलायंस का नेट प्रॉफिट देश की बड़ी आईटी कंपनियों Tata Consultancy Services TCS, Infosys इंफोसिस और HCL Technologies HCL Tech के संयुक्त मुनाफे से भी अधिक रहा. विशेषज्ञों का मानना है कि रिलायंस का विविध कारोबार मॉडल और उपभोक्ता आधारित बिजनेस रणनीति कंपनी की लगातार मजबूत ग्रोथ का प्रमुख कारण है.
जियो, रिटेल और O2C बिजनेस बने ग्रोथ इंजन
कंपनी की ग्रोथ में Jio Platforms जियो प्लेटफॉर्म्स, Reliance Retail रिलायंस रिटेल और पारंपरिक ऑयल-टू-केमिकल्स कारोबार की अहम भूमिका रही. विशेष रूप से डिजिटल और रिटेल बिजनेस में लगातार बढ़ते ग्राहक आधार और विस्तार ने कंपनी की आय को नई ऊंचाई तक पहुंचाया.
शेयरों में भी दिखा तेजी का असर
शानदार वित्तीय प्रदर्शन का असर कंपनी के शेयरों पर भी देखने को मिला. शुक्रवार को बीएसई पर रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर 4.90 रुपये की बढ़त के साथ 1,354.60 रुपये पर बंद हुआ. कारोबार के दौरान शेयर 1,367.50 रुपये के दिन के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया. बाजार विश्लेषकों का कहना है कि मजबूत वित्तीय नतीजों और भविष्य की ग्रोथ संभावनाओं से निवेशकों का भरोसा कंपनी पर बना हुआ है.
यह फैसला RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में मुंबई में हुई केंद्रीय निदेशक मंडल की 623वीं बैठक में लिया गया.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ते राजकोषीय दबाव के बीच भारतीय रिजर्व बैंक ने केंद्र सरकार को बड़ी राहत दी है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार को रिकॉर्ड 2.87 लाख करोड़ रुपये का अधिशेष (Surplus Transfer) देने का फैसला किया है. यह पिछले साल दिए गए 2.69 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड लाभांश से भी करीब 7% अधिक है. माना जा रहा है कि आरबीआई से मिलने वाली यह बड़ी रकम सरकार को राजकोषीय घाटा नियंत्रित करने और खर्चों को संभालने में मदद करेगी.
RBI बोर्ड की बैठक में लिया गया बड़ा फैसला
यह फैसला RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में मुंबई में हुई केंद्रीय निदेशक मंडल की 623वीं बैठक में लिया गया. हालांकि, केंद्रीय बैंक ने आकस्मिक जोखिम बफर (CRB) को बैलेंस शीट के 7.5% से घटाकर 6.5% करने का भी निर्णय लिया है. इसके बावजूद जोखिम प्रावधानों में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
विदेशी मुद्रा भंडार बिक्री से बढ़ी RBI की कमाई
विशेषज्ञों के मुताबिक विदेशी मुद्रा भंडार की बिक्री से आरबीआई की आय में बड़ा इजाफा हुआ, जिससे अधिशेष राशि बढ़ाने में मदद मिली. 31 मार्च 2026 तक RBI की बैलेंस शीट 20.61% बढ़कर 91.97 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई. वहीं, केंद्रीय बैंक की सकल आय में 26.42% की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि जोखिम प्रावधानों से पहले खर्च 27.60% बढ़ा.
RBI की शुद्ध आय में भी बड़ा उछाल
आरबीआई की वित्त वर्ष 2025-26 में जोखिम प्रावधान और वैधानिक निधियों में हस्तांतरण से पहले शुद्ध आय 3.96 लाख करोड़ रुपये रही. इससे पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 3.13 लाख करोड़ रुपये था. आरबीआई ने कहा कि संशोधित आर्थिक पूंजी ढांचा (ECF) केंद्रीय बैंक को आकस्मिक जोखिम बफर को बैलेंस शीट के 4.5% से 7.5% के बीच बनाए रखने की लचीलापन देता है.
जोखिम प्रावधान दोगुने से ज्यादा बढ़े
केंद्रीय बोर्ड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए CRB में 1.09 लाख करोड़ रुपये हस्तांतरित करने का फैसला किया है. पिछले वित्त वर्ष में यह राशि 44,861.70 करोड़ रुपये थी.विशेषज्ञों का कहना है कि CRB अनुपात घटाने के बावजूद जोखिम प्रावधानों में तेज बढ़ोतरी के कारण अधिशेष राशि बाजार की उम्मीदों से थोड़ी कम रही. आरबीआई की बैलेंस शीट में 21% की वृद्धि के कारण जोखिम प्रावधान दोगुने से ज्यादा बढ़ गए.
सरकार को राहत, लेकिन चुनौतियां बरकरार
विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई से रिकॉर्ड अधिशेष मिलने के बावजूद सरकार के सामने राजकोषीय दबाव पूरी तरह खत्म नहीं होगा. विशेषज्ञों के अनुसार, उर्वरक और ईंधन सब्सिडी की बढ़ती जरूरत, कम कर संग्रह और तेल कंपनियों से कम लाभांश सरकार की वित्तीय स्थिति पर दबाव बनाए रख सकते हैं.
कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 10 रुपये फेस वैल्यू वाले प्रत्येक इक्विटी शेयर पर 0.50 रुपये के अंतिम डिविडेंड का प्रस्ताव रखा है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
सरकारी गैस कंपनी गेल इंडियाा (GAIL India Limited) को वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में बड़ा झटका लगा है. कंपनी का कंसोलिडेटेड शुद्ध लाभ (PAT) सालाना आधार पर 40.41% घटकर 1,484.72 करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले साल की समान तिमाही में 2,491.76 करोड़ रुपये था.
कंपनी की ओर से जारी वित्तीय नतीजों के अनुसार, जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में ऑपरेशंस से होने वाला राजस्व भी 2.30% घटकर 35,705.49 करोड़ रुपये रह गया. एक साल पहले समान अवधि में यह आंकड़ा 36,549.35 करोड़ रुपये था.
पूरे वित्त वर्ष में भी कमजोर रहा प्रदर्शन
पूरे वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें तो GAIL का कंसोलिडेटेड PAT 39.09% गिरकर 7,582.47 करोड़ रुपये पर आ गया, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी ने 12,449.80 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था. वहीं, पूरे साल का ऑपरेशनल रेवेन्यू मामूली 0.13% गिरावट के साथ 1,42,094.30 करोड़ रुपये रहा. पिछले वित्त वर्ष में यह 1,42,289.62 करोड़ रुपये था.
शेयरधारकों को मिलेगा डिविडेंड
कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 10 रुपये फेस वैल्यू वाले प्रत्येक इक्विटी शेयर पर 0.50 रुपये के अंतिम डिविडेंड का प्रस्ताव रखा है. हालांकि, इसे आगामी AGM में शेयरधारकों की मंजूरी मिलना जरूरी होगा. यह पहले घोषित किए जा चुके 5 रुपये प्रति शेयर के अंतरिम डिविडेंड के अतिरिक्त होगा. इसके साथ ही कंपनी का कुल डिविडेंड पेआउट रेशियो 51.9% तक पहुंच गया है.
विस्तार योजनाओं पर जोर, 9,594 करोड़ रुपये का Capex
GAIL ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 9,594 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय (Capex) किया. यह निवेश मुख्य रूप से पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर, पेट्रोकेमिकल प्रोजेक्ट्स, ऑपरेशनल जरूरतों और जॉइंट वेंचर एवं सब्सिडियरी कंपनियों में इक्विटी निवेश पर खर्च किया गया. कंपनी का कहना है कि यह निवेश उसकी दीर्घकालिक विस्तार रणनीति का हिस्सा है, जिससे भविष्य में कारोबार को मजबूती मिलने की उम्मीद है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और साइप्रस ने अगले पांच वर्षों में भारत में साइप्रस के निवेश को फिर से दोगुना करने का लक्ष्य तय किया है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत और साइप्रस ने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देते हुए शुक्रवार को अपने रिश्तों को ‘स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ में बदलने का ऐलान किया. नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और साइप्रस (Cyprus) के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडुलिडिस के बीच हुई विस्तृत वार्ता के बाद यह बड़ा फैसला लिया गया. दोनों देशों ने इंफ्रास्ट्रक्चर, शिपिंग और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए एक संयुक्त टास्क फोर्स बनाने की भी घोषणा की.
पश्चिम एशिया और यूक्रेन संकट पर भी हुई चर्चा
बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया और यूक्रेन में जारी संघर्ष समेत कई वैश्विक घटनाक्रमों पर विचार-विमर्श किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत सभी मौजूदा संघर्षों के जल्द समाधान और शांति बहाली के प्रयासों का समर्थन करता है.
भारत में बढ़ा साइप्रस का निवेश
अपने मीडिया बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पिछले एक दशक में साइप्रस से भारत में आने वाला निवेश लगभग दोगुना हो गया है. यह दोनों देशों के बीच बढ़ते भरोसे और आर्थिक सहयोग को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि प्रस्तावित भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (India-EU Free Trade Agreement) दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के नए अवसर पैदा कर सकता है.
अगले पांच वर्षों में निवेश दोगुना करने का लक्ष्य
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और साइप्रस ने अगले पांच वर्षों में भारत में साइप्रस के निवेश को फिर से दोगुना करने का लक्ष्य तय किया है. उन्होंने कहा कि नई स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी.
समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग बढ़ेगा
दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया. वहीं, राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडुलिडिस ने कहा कि नई संयुक्त टास्क फोर्स इंफ्रास्ट्रक्चर और शिपिंग जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करेगी.
तीन दिवसीय भारत दौरे पर हैं साइप्रस के राष्ट्रपति
साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडुलिडिस बुधवार को तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर भारत पहुंचे थे. इस दौरे को दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देने वाला अहम कदम माना जा रहा है.