प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और साइप्रस ने अगले पांच वर्षों में भारत में साइप्रस के निवेश को फिर से दोगुना करने का लक्ष्य तय किया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
भारत और साइप्रस ने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देते हुए शुक्रवार को अपने रिश्तों को ‘स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ में बदलने का ऐलान किया. नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और साइप्रस (Cyprus) के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडुलिडिस के बीच हुई विस्तृत वार्ता के बाद यह बड़ा फैसला लिया गया. दोनों देशों ने इंफ्रास्ट्रक्चर, शिपिंग और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए एक संयुक्त टास्क फोर्स बनाने की भी घोषणा की.
पश्चिम एशिया और यूक्रेन संकट पर भी हुई चर्चा
बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया और यूक्रेन में जारी संघर्ष समेत कई वैश्विक घटनाक्रमों पर विचार-विमर्श किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत सभी मौजूदा संघर्षों के जल्द समाधान और शांति बहाली के प्रयासों का समर्थन करता है.
भारत में बढ़ा साइप्रस का निवेश
अपने मीडिया बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पिछले एक दशक में साइप्रस से भारत में आने वाला निवेश लगभग दोगुना हो गया है. यह दोनों देशों के बीच बढ़ते भरोसे और आर्थिक सहयोग को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि प्रस्तावित भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (India-EU Free Trade Agreement) दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के नए अवसर पैदा कर सकता है.
अगले पांच वर्षों में निवेश दोगुना करने का लक्ष्य
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और साइप्रस ने अगले पांच वर्षों में भारत में साइप्रस के निवेश को फिर से दोगुना करने का लक्ष्य तय किया है. उन्होंने कहा कि नई स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी.
समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग बढ़ेगा
दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया. वहीं, राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडुलिडिस ने कहा कि नई संयुक्त टास्क फोर्स इंफ्रास्ट्रक्चर और शिपिंग जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करेगी.
तीन दिवसीय भारत दौरे पर हैं साइप्रस के राष्ट्रपति
साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडुलिडिस बुधवार को तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर भारत पहुंचे थे. इस दौरे को दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देने वाला अहम कदम माना जा रहा है.
शाओमी ने लॉन्च किया फ्लैगशिप ‘मैक्स’ स्मार्टफोन, प्रीमियम फीचर्स से आईफोन और सैमसंग को देगा टक्कर
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
शाओमी (Xiaomi) ने अपना नया फ्लैगशिप स्मार्टफोन शाओमी 17 मैक्स (Xiaomi 17 Max) लॉन्च कर दिया है. यह कंपनी की शाओमी 17 सीरीज का पांचवां मॉडल है, जिसे खासतौर पर प्रीमियम यूजर्स और गेमिंग-फोटोग्राफी पसंद करने वालों को ध्यान में रखकर पेश किया गया है. फोन में 200 मेगापिक्सल का दमदार कैमरा, 8000mAh की बड़ी बैटरी और लेटेस्ट स्नैपड्रैगन 8 एलीट जेन 5 प्रोसेसर दिया गया है. कंपनी का दावा है कि यह फोन परफॉर्मेंस, कैमरा और बैटरी तीनों मोर्चों पर फ्लैगशिप एक्सपीरियंस देगा. तो चलिए इसके फीचर्स और कीमत के बारे में आपको विस्तार से बताते हैं.
6.9 इंच AMOLED डिस्प्ले के साथ मिलेगा प्रीमियम व्यूइंग एक्सपीरियंस
शाओमी 17 मैक्स में 6.9 इंच का 1.5K AMOLED डिस्प्ले दिया गया है, जिसका रेजोल्यूशन 1200×2608 पिक्सल है. यह डिस्प्ले 120Hz रिफ्रेश रेट और 300Hz टच सैंपलिंग रेट सपोर्ट करता है. फोन में 3500 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस, HDR10+, डॉल्बी विजन और HDR विविड सपोर्ट भी मिलता है, जिससे वीडियो और गेमिंग का अनुभव काफी शानदार हो जाता है. डिस्प्ले की सुरक्षा के लिए ड्रैगन क्रिस्टल 3.0 प्रोटेक्शन दिया गया है. इसके अलावा फोन को डस्ट और वॉटर रेजिस्टेंस के लिए IP68 रेटिंग भी मिली हुई है.
Snapdragon 8 Elite Gen 5 प्रोसेसर से मिलेगा दमदार परफॉर्मेंस
फोन में 3nm प्रोसेस पर आधारित Snapdragon 8 Elite Gen 5 ऑक्टा-कोर प्रोसेसर दिया गया है, जिसकी पीक क्लॉक स्पीड 4.6GHz तक जाती है. यह प्रोसेसर हाई-एंड गेमिंग, मल्टीटास्किंग और AI फीचर्स के लिए काफी पावरफुल माना जा रहा है. सिक्योरिटी के लिए फोन में 3D अल्ट्रासोनिक फिंगरप्रिंट सेंसर भी दिया गया है.
200MP कैमरे के साथ मिलेगा फ्लैगशिप फोटोग्राफी एक्सपीरियंस
शाओमी 17 मैक्स में Leica-ट्यून्ड ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप दिया गया है. इसमें OIS सपोर्ट के साथ 200 मेगापिक्सल का प्राइमरी कैमरा सेंसर मिलता है. इसके अलावा 50 मेगापिक्सल का पेरिस्कोप टेलीफोटो कैमरा दिया गया है, जो 3x ऑप्टिकल जूम सपोर्ट करता है. फोन में 50 मेगापिक्सल का अल्ट्रा-वाइड कैमरा भी मौजूद है. वहीं सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए 32 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा दिया गया है.
8000mAh बैटरी के साथ 100W फास्ट चार्जिंग
फोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी 8000mAh की बड़ी बैटरी है, जो लंबे समय तक बैकअप देने का दावा करती है. यह स्मार्टफोन 100W वायर्ड फास्ट चार्जिंग सपोर्ट करता है. साथ ही इसमें 22.5W वायर्ड रिवर्स चार्जिंग फीचर भी मिलता है, जिससे दूसरे डिवाइसेज को भी चार्ज किया जा सकता है.
कनेक्टिविटी फीचर्स भी हैं दमदार
कनेक्टिविटी के लिए फोन में Wi-Fi 7, 5G, 4G LTE, ब्लूटूथ 5.4, NFC, USB Type-C पोर्ट, GPS, GLONASS, QZSS और NavIC जैसे फीचर्स दिए गए हैं.
जानिए कितनी है कीमत
शाओमी 17 मैक्स को कई स्टोरेज वेरिएंट्स में लॉन्च किया गया है.
- 12GB RAM + 256GB स्टोरेज: करीब ₹68,000
- 16GB RAM + 256GB स्टोरेज: करीब ₹72,000
- 12GB RAM + 512GB स्टोरेज: करीब ₹76,000
- 16GB RAM + 512GB स्टोरेज: करीब ₹82,000
अगर यह स्मार्टफोन भारतीय बाजार में इसी प्राइस रेंज में लॉन्च होता है, तो यह iPhone 17 आईफोन 17 और Samsung Galaxy S25 Plus सैमसंग गैलेक्सी S25 प्लस जैसे प्रीमियम स्मार्टफोन्स को कड़ी टक्कर दे सकता है.
आम उपभोक्ता खर्च में सुस्ती, लेकिन प्रीमियम कारों और शहरी खर्च में दिख रही मजबूती
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश की अर्थव्यवस्था में सुस्ती के संकेतों के बावजूद भारत में प्रीमियम कंजम्प्शन यानी हाई-एंड उपभोक्ता खर्च मजबूत बना हुआ है. डीएसवी एसेट मैनेजर्स (DSP Asset Managers) की रिपोर्ट के मुताबिक, जहां आम उपभोक्ता मांग कमजोर पड़ती दिख रही है, वहीं प्रीमियम कारों, शहरी खर्च और चुनिंदा हाई-वैल्यू सेगमेंट्स में अच्छी मजबूती बनी हुई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्थिक रिकवरी फिलहाल मुख्य रूप से प्रीमियम उपभोक्ता वर्ग तक सीमित नजर आ रही है.
प्रीमियम कारों की बिक्री बढ़ी, टू-व्हीलर डिमांड कमजोर
“तथ्य मई 2026” नाम की रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल में यूटिलिटी व्हीकल्स समेत पैसेंजर व्हीकल बिक्री में 5.3 फीसदी की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई. हालांकि यूटिलिटी व्हीकल्स को छोड़ दें तो पैसेंजर कार बिक्री 7.5 फीसदी घट गई. वहीं, टू-व्हीलर बिक्री में 16.7 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जो आम उपभोक्ता वर्ग की कमजोर मांग का संकेत मानी जा रही है.
रिपोर्ट के मुताबिक प्रीमियम सेगमेंट में यूटिलिटी व्हीकल्स की मांग बढ़ने के पीछे जीएसटी कटौती का असर भी माना जा रहा है, जिससे ग्राहकों की खरीदारी क्षमता में सुधार आया है.
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में दिखी मजबूती
रिपोर्ट में कहा गया है कि मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में अच्छी तेजी देखने को मिली है. अप्रैल में मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 57 के स्तर पर बना रहा, जो मजबूत औद्योगिक गतिविधियों का संकेत है. औद्योगिक उत्पादन सूचकांक यानी आईआईपी मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ अप्रैल में 4 फीसदी रही, जबकि इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन आउटपुट में 9.9 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई. इस दौरान सीमेंट उत्पादन 12.2 फीसदी और स्टील उत्पादन 8.7 फीसदी बढ़ा.
अर्थव्यवस्था में अभी भी मजबूत गति की कमी
हालांकि डीएसपी एसेट मैनेजर्स ने यह भी कहा कि व्यापक अर्थव्यवस्था में अभी भी मजबूत गति की कमी बनी हुई है. रिपोर्ट के अनुसार पिछले एक साल के दौरान कई आर्थिक संकेतकों में कोई बड़ी तेजी देखने को नहीं मिली है. यानी आर्थिक गतिविधियां पूरी तरह कमजोर नहीं हैं, लेकिन उनमें व्यापक स्तर पर तेज सुधार भी नजर नहीं आ रहा.
हाउसिंग लोन ग्रोथ में भी दिखी सुस्ती
रिपोर्ट के मुताबिक हाउसिंग लोन ग्रोथ, जो पहले तक मजबूत बनी हुई थी, अब उसमें भी नरमी के संकेत मिलने लगे हैं. अप्रैल 2026 में हाउसिंग लोन ग्रोथ घटकर 10.7 फीसदी रह गई, जबकि एक साल पहले यह 11.5 फीसदी थी.
महंगे कच्चे तेल से बढ़ सकता है महंगाई का दबाव
डीएसपी ने चेतावनी दी है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत में महंगाई का दबाव बढ़ा सकती हैं, खासकर थोक महंगाई के जरिए. अप्रैल में थोक मूल्य सूचकांक यानी डब्ल्यूपीआई 0.9 फीसदी बढ़ा, जबकि भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत सालाना आधार पर 67.3 फीसदी बढ़कर 75.5 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई.
रिपोर्ट में कहा गया है कि डब्ल्यूपीआई बास्केट का करीब 34 फीसदी हिस्सा क्रूड ऑयल और प्राकृतिक गैस से जुड़ा हुआ है. ऐसे में अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो महंगाई का दबाव लगातार बढ़ सकता है.
रुपये पर बना दबाव, आरबीआई कर रहा हस्तक्षेप
रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल में रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 89 के स्तर तक पहुंच गया, जबकि एक साल पहले यह 84.8 पर था. डीएसपी ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक डॉलर बेचकर मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप कर रहा है, जिससे रुपये में गिरावट उतनी तेज नहीं हो रही.
शेयर बाजार वैल्यूएशन अब आकर्षक स्तर पर
रिपोर्ट में कहा गया है कि विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बाद भारतीय शेयर बाजार के कई हिस्सों में वैल्यूएशन काफी सस्ते स्तर पर पहुंच गए हैं. कुछ सेक्टर्स में वैल्यूएशन अब कोविड महामारी और ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस जैसे दौर के निचले स्तरों के करीब पहुंच चुके हैं.
विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी, SIP निवेश मजबूत
अप्रैल में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 1.5 अरब डॉलर की निकासी की. हालांकि घरेलू निवेशकों का भरोसा मजबूत बना हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक एसआईपी निवेश सालाना आधार पर 30.7 फीसदी बढ़कर 295 अरब रुपये तक पहुंच गया.
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बाजार में वैल्यूएशन आकर्षक बने रहते हैं तो आने वाले समय में विदेशी निवेशकों की बिकवाली पर भी कुछ हद तक लगाम लग सकती है.
अमेरिका की दिग्गज इनवेस्टमेंट मैनेजमेंट कंपनी कैपिटल ग्रुप ने हाल के महीनों में अडानी ग्रुप की कंपनियों में बड़े पैमाने पर निवेश बढ़ाया है, जबकि रिलायंस इंडस्ट्रीज में अपनी हिस्सेदारी लगातार घटाई है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के दो सबसे बड़े कारोबारी घरानों, अडानी ग्रुप और रिलायंस इंडस्ट्रीज के बीच कारोबारी मुकाबला अब विदेशी निवेशकों की रणनीति में भी साफ दिखाई देने लगा है. अमेरिका की दिग्गज इनवेस्टमेंट मैनेजमेंट कंपनी कैपिटल ग्रुप (Capital Group) ने हाल के महीनों में अडानी ग्रुप की कंपनियों में बड़े पैमाने पर निवेश बढ़ाया है, जबकि रिलायंस इंडस्ट्रीज में अपनी हिस्सेदारी लगातार घटाई है. यह बदलाव ऐसे समय में सामने आया है जब अडानी ग्रुप के शेयरों में तेज तेजी देखने को मिली है और रिलायंस के शेयर दबाव में रहे हैं.
अडानी ग्रुप की कंपनियों में ₹19,000 करोड़ से ज्यादा का निवेश
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, लॉस एंजिलिस स्थित कैपिटल ग्रुप ने हाल ही में अडानी ग्रुप की तीन प्रमुख कंपनियों में करीब 2 अरब डॉलर यानी लगभग 19,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया है. 5 मई 2026 को कंपनी ने अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन में करीब 2 फीसदी हिस्सेदारी 74.86 अरब रुपये में खरीदी. यह खरीदारी खुले बाजार के जरिए की गई. इसके अलावा कैपिटल ग्रुप ने अडानी पावर और अडानी ग्रीन एनर्जी में भी 1.5 फीसदी से 2 फीसदी तक हिस्सेदारी खरीदी है.
3.3 ट्रिलियन डॉलर एसेट्स मैनेज करती है कैपिटल ग्रुप
कैपिटल ग्रुप दुनिया की सबसे बड़ी इनवेस्टमेंट मैनेजमेंट कंपनियों में शामिल है और यह वैश्विक स्तर पर 3.3 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा की परिसंपत्तियों का प्रबंधन करती है. हालांकि कंपनी की ओर से इस निवेश पर आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है. वहीं अडानी ग्रुप की तरफ से भी इस पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई.
रिलायंस में लगातार घट रही हिस्सेदारी
जहां अडानी ग्रुप में निवेश बढ़ा है, वहीं रिलायंस इंडस्ट्रीज में कैपिटल ग्रुप की हिस्सेदारी लगातार कम होती दिख रही है. मार्च 2026 के अंत तक कैपिटल ग्रुप के पास रिलायंस इंडस्ट्रीज के करीब 142 मिलियन शेयर थे. छह साल पहले यह आंकड़ा करीब 500 मिलियन शेयर था, जबकि मार्च 2017 में यह 755 मिलियन शेयर तक पहुंचा हुआ था.
यह बदलाव दिखाता है कि विदेशी निवेशकों का फोकस धीरे-धीरे नए ग्रोथ सेक्टर्स और तेज रिटर्न देने वाली कंपनियों की ओर शिफ्ट हो रहा है.
शेयरों की चाल में भी दिखा बड़ा अंतर
पिछले एक साल में अडानी ग्रुप की कंपनियों ने शानदार प्रदर्शन किया है.
1. अडानी पावर के शेयर में करीब 94 फीसदी तेजी आई
2. अडानी ग्रीन एनर्जी में 35 फीसदी उछाल दर्ज हुआ
3. अडानी पोर्ट्स के शेयर में 25 फीसदी की बढ़त रही
वहीं दूसरी ओर रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर पिछले एक साल में करीब 8.36 फीसदी गिरा है.
बाजार में फिलहाल कैसी है शेयरों की चाल
शुक्रवार को खबर लिखे जाने तक अडानी पोर्ट्स का शेयर 0.011 प्रतिशत की तेजी के साथ 1793.50 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा था. इसका 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर 1823.75 रुपये रहा है. वहीं अडानी पावर का शेयर 0.46 प्रतिशत की तेजी के साथ 220.34 रुपये और अडानी ग्रीन एनर्जी का शेयर 0.88 प्रतिशत बढ़कर 1370.20 रुपये पर ट्रेड करता दिखा.
दूसरी ओर रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर प्रतिशत के साथ 1343.40 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहा था, हालांकि यह अभी भी अपने 52 हफ्ते के उच्चतम स्तर 1611.20 रुपये से नीचे है.
क्या संकेत दे रहा है विदेशी निवेशकों का रुख?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रीन एनर्जी और पावर सेक्टर में अडानी ग्रुप की आक्रामक विस्तार रणनीति विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर रही है. दूसरी ओर रिलायंस इंडस्ट्रीज में हालिया समय में सीमित रिटर्न और कुछ सेक्टर्स में धीमी ग्रोथ के कारण निवेशकों का रुख थोड़ा सतर्क दिखाई दे रहा है.
विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले समय में विदेशी निवेशकों की रणनीति भारत के कॉरपोरेट सेक्टर में नई प्रतिस्पर्धा और वैल्यूएशन ट्रेंड्स को प्रभावित कर सकती है.
Equirus के अनुसार, 2020 से 2025 के बीच इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में पूंजी बाजार से जुटाए गए फंड का सबसे बड़ा हिस्सा रिन्यूएबल एनर्जी, InvITs और EPC कंपनियों के पास गया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश का रुख तेजी से बदल रहा है. अब निवेशक नए प्रोजेक्ट्स की बजाय ऑपरेशनल रोड एसेट्स और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं. निवेश बैंकिंग और रिसर्च फर्म Equirus की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हाईवे निर्माण की रफ्तार धीमी पड़ने और ऊर्जा परिवर्तन पर बढ़ते खर्च के बीच निवेशक स्थिर रिटर्न देने वाली परिसंपत्तियों को प्राथमिकता दे रहे हैं.
इंफ्रा सेक्टर में बड़े सौदों का दबदबा
रिपोर्ट के अनुसार पिछले दो वित्त वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में प्राइवेट इक्विटी और मर्जर एंड एक्विजिशन गतिविधियों पर रिन्यूएबल और ट्रांसपोर्ट एसेट्स का दबदबा रहा. इस दौरान कई अरब डॉलर के सौदों ने बाजार की तस्वीर बदल दी. मार्च 2025 में जेएसडब्ल्यू एनर्जी (JSW Energy) ने केएसके महानदी पावर कंपनी (KSK Mahanadi Power Company) का 1.86 अरब डॉलर में अधिग्रहण किया था. वहीं फरवरी 2025 में ओएनजीसी एनटीपीसी ग्रीन प्राइवेट लिमिटेड (ONGC NTPC Green Pvt Ltd) ने अयाना रिन्यूएबल पावर (Ayana Renewable Power) को 2.3 अरब डॉलर में खरीदा.
सड़क परियोजनाओं में भी बढ़ी विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी
ऑपरेशनल रोड एसेट्स भी वैश्विक निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं. अप्रैल 2026 में विंची हाईवेज (Vinci Highways) ने लगभग 1.7 अरब डॉलर में सेफवे कंसेशंस (Safeway Concessions) के अधिग्रहण पर सहमति जताई थी. इसके अलावा एक्टिस ग्रुप (Actis Group) ने कालीकट एक्सप्रेसवे प्राइवेट लिमिटेड (Calicut Expressway Pvt Ltd) और विंध्याचल एक्सप्रेसवे प्राइवेट लिमिटेड (Vindhyachal Expressway Pvt Ltd) समेत कई सड़क परियोजनाओं का अधिग्रहण किया.
रिपोर्ट में कहा गया है कि हाइब्रिड एन्युटी और टोल-ऑपरेट-ट्रांसफर मॉडल के तहत आने वाली ऑपरेशनल हाईवे परिसंपत्तियां निवेशकों को इसलिए पसंद आ रही हैं क्योंकि इनमें ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स की तुलना में कम जोखिम और ज्यादा स्थिर रिटर्न मिलता है.
सात साल के निचले स्तर पर पहुंचा हाईवे निर्माण
रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हाईवे निर्माण गतिविधियां धीमी हो रही हैं. वित्त वर्ष 2025-26 में हाईवे निर्माण और नए प्रोजेक्ट अवॉर्ड्स सात साल के निचले स्तर पर पहुंच गए. इस दौरान 10,000 किलोमीटर से कम हाईवे बनाए गए, जबकि करीब 7,000 किलोमीटर नई परियोजनाओं को मंजूरी मिली.
टोल कलेक्शन ने बनाया नया रिकॉर्ड
हाईवे निर्माण की रफ्तार धीमी होने के बावजूद टोल कलेक्शन में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई. FY26 में टोल कलेक्शन सालाना आधार पर 14 फीसदी बढ़कर रिकॉर्ड 82,900 करोड़ रुपये पहुंच गया.
इस बढ़ोतरी की बड़ी वजह टोल रोड नेटवर्क का विस्तार और फास्टैग (FASTag) के बढ़ते इस्तेमाल को माना जा रहा है. भारत का टोल रोड नेटवर्क FY19 के 26,067 किलोमीटर से बढ़कर नवंबर 2025 तक 55,812 किलोमीटर हो गया.
डेवलपर्स पुराने एसेट्स बेचकर जुटा रहे पूंजी
रिपोर्ट में कहा गया है कि इन बदलावों के चलते डेवलपर्स अब परिपक्व सड़क परिसंपत्तियों को मोनेटाइज कर नई परियोजनाओं में निवेश या कर्ज घटाने की रणनीति अपना रहे हैं.
रिन्यूएबल एनर्जी में निवेश की रफ्तार बरकरार
रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में भी निवेश का उत्साह बना हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने सिर्फ 14 महीनों में 50 गीगावॉट सोलर क्षमता जोड़ ली है. नेशनल सोलर एनर्जी फेडरेशन ऑफ इंडिया (National Solar Energy Federation of India) के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि 2026 तक भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोलर मार्केट बन सकता है.
ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर बना बड़ी चुनौती
हालांकि तेजी से बढ़ते रिन्यूएबल सेक्टर के सामने ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. रिपोर्ट के अनुसार अकेले राजस्थान में करीब 60 गीगावॉट रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स ट्रांसमिशन कनेक्टिविटी का इंतजार कर रहे हैं, जिससे भारत की ग्रिड विस्तार योजनाओं पर दबाव बढ़ रहा है.
भारत के ऊर्जा बदलाव में गैस सेक्टर की कमजोर कड़ी
रिपोर्ट में भारत के प्राकृतिक गैस सेक्टर को ऊर्जा परिवर्तन की “मिसिंग मिडिल” बताया गया है. भारत के कुल ऊर्जा मिश्रण में गैस की हिस्सेदारी केवल 7 फीसदी है, जबकि वैश्विक औसत करीब 24 फीसदी है. सीमित पाइपलाइन नेटवर्क, एलएनजी इंफ्रास्ट्रक्चर (LNG Infrastructure) और लॉन्ग-टर्म सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट्स की कमी इसके पीछे बड़ी वजह मानी गई है.
रिपोर्ट का अनुमान है कि FY40 तक भारत में गैस की मांग लगभग चार गुना तक बढ़ सकती है, जिससे सप्लाई चेन और इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव और बढ़ेगा.
इंफ्रा सेक्टर में पूंजी बाजार से जुटाई जा रही बड़ी रकम
इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में आईपीओ (IPO), क्यूआईपी (QIP) और इनविट (InvIT) के जरिए फंड जुटाने की गतिविधियां भी FY26 में मजबूत बनी रहीं. इस दौरान राजमार्ग इंफ्रा इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (Raajmarg Infra Investment Trust) ने 60,000 मिलियन रुपये और क्लीन मैक्स एनवायरो एनर्जी सॉल्यूशंस (Clean Max Enviro Energy Solutions) ने 30,799 मिलियन रुपये जुटाए.
इक्विरस (Equirus) के मुताबिक 2020 से 2025 के बीच इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में पूंजी बाजार से जुटाए गए फंड का सबसे बड़ा हिस्सा रिन्यूएबल एनर्जी, इनविट्स (InvITs) और ईपीसी कंपनियों (EPC Companies) के पास गया.
सेबी ने दोबारा सूचीबद्ध होने वाले शेयरों की बेस प्राइस तय करने के लिए नया फ्रेमवर्क प्रस्तावित किया है. इसके तहत सबसे हालिया ट्रेड प्राइस को आधार बनाया जाएगा, बशर्ते वह छह महीने से ज्यादा पुराना न हो.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनियम बोर्ड (SEBI) ने आईपीओ (IPO) और दोबारा लिस्ट होने वाले शेयरों के लिए प्राइस डिस्कवरी सिस्टम में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है. नियामक का मानना है कि मौजूदा प्री-ओपन कॉल ऑक्शन सिस्टम कई मामलों में सही कीमत तय करने में प्रभावी साबित नहीं हो रहा है. इसी वजह से सेबी अब डमी प्राइस बैंड, फ्लेक्सिंग मैकेनिज्म और बेस प्राइस तय करने के नियमों में बदलाव कर बाजार को ज्यादा पारदर्शी और संतुलित बनाने की तैयारी कर रहा है.
Relisted Shares के लिए बदलेगा बेस प्राइस तय करने का तरीका
सेबी ने दोबारा सूचीबद्ध होने वाले शेयरों की बेस प्राइस तय करने के लिए नया फ्रेमवर्क प्रस्तावित किया है. इसके तहत सबसे हालिया ट्रेड प्राइस को आधार बनाया जाएगा, बशर्ते वह छह महीने से ज्यादा पुराना न हो.
अगर ऐसी कीमत उपलब्ध नहीं होती है, तो स्वतंत्र वैल्यूएशन एजेंसियों के मूल्यांकन प्रमाणपत्र के आधार पर बेस प्राइस तय की जाएगी. वहीं जिन शेयरों का कारोबार छह महीने से ज्यादा समय तक निलंबित रहा है, उनके लिए दो अलग-अलग वैल्यूएशन एजेंसियों की बुक वैल्यू में से कम कीमत को आधार बनाया जाएगा.
IPO प्राइस डिस्कवरी सिस्टम में भी होगा बदलाव
सेबी ने आईपीओ के दौरान शुरुआती कीमत तय करने की प्रक्रिया में भी बड़े बदलाव सुझाए हैं. नियामक को मिली शिकायतों में कहा गया था कि मौजूदा डमी प्राइस बैंड और बेस प्राइस सिस्टम सही प्राइस डिस्कवरी में मदद नहीं कर रहा है.
सेबी ने एक ऐसे मामले का जिक्र किया, जहां कॉल ऑक्शन सत्र के दौरान करीब 90 फीसदी खरीद ऑर्डर सिर्फ इसलिए रिजेक्ट हो गए क्योंकि वे तय प्राइस बैंड से बाहर थे.
डमी प्राइस बैंड में आएगा फ्लेक्सिंग मैकेनिज्म
अभी आईपीओ शेयरों के लिए बेस प्राइस से 50 फीसदी नीचे और 100 फीसदी ऊपर तक डमी प्राइस बैंड तय होता है. वहीं एसएमई आईपीओ में यह सीमा प्लस या माइनस 90 फीसदी तक सीमित रहती है और इसमें किसी तरह का फ्लेक्सिंग मैकेनिज्म नहीं है.
अब सेबी ने प्रस्ताव दिया है कि अगर संकेतक संतुलन मूल्य ऊपरी या निचली सीमा के करीब पहुंचता है, तो एक्सचेंज अपने आप प्राइस बैंड को 10 फीसदी तक बढ़ा सकेंगे. इससे अधिक ऑर्डर्स को शामिल करने और सही कीमत तय करने में मदद मिल सकती है.
SME IPO को भी मिलेगा नया फायदा
खास बात यह है कि सेबी अब फ्लेक्सिंग मैकेनिज्म को एसएमई आईपीओ तक भी बढ़ाने की तैयारी में है. एसएमई सेगमेंट में उतार-चढ़ाव ज्यादा होने के बावजूद अभी तक ऐसी कोई सुविधा उपलब्ध नहीं थी.
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे छोटे और मध्यम उद्यमों के आईपीओ में बेहतर प्राइस डिस्कवरी और निवेशकों की भागीदारी बढ़ सकती है.
प्री-ओपन कॉल ऑक्शन के नियम भी होंगे सख्त
फिलहाल आईपीओ और दोबारा सूचीबद्ध शेयरों के लिए लिस्टिंग के पहले दिन सुबह 9 बजे से 10 बजे तक प्री-ओपन कॉल ऑक्शन सत्र आयोजित किया जाता है. इसका उद्देश्य सामान्य ट्रेडिंग शुरू होने से पहले संतुलन कीमत तय करना होता है.
सेबी ने अब प्रस्ताव दिया है कि कॉल ऑक्शन तभी सफल माना जाएगा, जब कम-से-कम पांच अलग-अलग PAN आधारित खरीदारों और विक्रेताओं के ऑर्डर्स के आधार पर कीमत तय हो.
अगर सही प्राइस डिस्कवरी नहीं हो पाती है, तो कॉल ऑक्शन अगले कारोबारी दिनों में भी जारी रह सकता है, जब तक संतुलित कीमत तय न हो जाए.
11 जून तक मांगे गए सुझाव
सेबी ने इन प्रस्तावित बदलावों पर बाजार सहभागियों और आम लोगों से 11 जून 2026 तक सुझाव मांगे हैं. माना जा रहा है कि इन सुधारों का उद्देश्य IPO और relisted shares में पारदर्शिता बढ़ाना, अस्थिरता कम करना और निवेशकों के हितों की बेहतर सुरक्षा करना है.
LIC के सिंगल प्रीमियम कलेक्शन में भी मजबूत बढ़त देखने को मिली. Q4FY26 में यह 22 फीसदी बढ़कर 70,119 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले साल समान तिमाही में यह 57,694 करोड़ रुपये था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश की सबसे बड़ी सरकारी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है. कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 23 फीसदी बढ़कर 23,467 करोड़ रुपये पहुंच गया है. मजबूत प्रीमियम कलेक्शन और निवेश से बढ़ी कमाई ने कंपनी के नतीजों को मजबूती दी है. इसके साथ ही LIC ने निवेशकों के लिए 10 रुपये प्रति शेयर फाइनल डिविडेंड की सिफारिश भी की है, जिससे शेयरधारकों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है.
23 फीसदी बढ़ा कंपनी का मुनाफा
LIC का नेट प्रॉफिट पिछले साल की समान तिमाही में 19,039 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 23,467 करोड़ रुपये हो गया है. कंपनी ने बताया कि बेहतर प्रीमियम इनकम और निवेश से हुई मजबूत आय ने मुनाफे को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है.
प्रीमियम इनकम में भी शानदार बढ़ोतरी
मार्च तिमाही में कंपनी की नेट प्रीमियम इनकम 12 फीसदी बढ़कर 1.65 लाख करोड़ रुपये हो गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 1.48 लाख करोड़ रुपये थी. पहले साल की प्रीमियम इनकम 17 फीसदी बढ़कर 13,009 करोड़ रुपये पहुंच गई, जो पिछले साल 11,103 करोड़ रुपये थी. वहीं रिन्यूअल प्रीमियम इनकम भी बढ़कर 82,233 करोड़ रुपये हो गई, जो एक साल पहले 79,425 करोड़ रुपये थी.
सिंगल प्रीमियम कलेक्शन में बड़ा उछाल
LIC के सिंगल प्रीमियम कलेक्शन में भी मजबूत बढ़त देखने को मिली. Q4FY26 में यह 22 फीसदी बढ़कर 70,119 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले साल समान तिमाही में यह 57,694 करोड़ रुपये था.
निवेश से कमाई में आई तेजी
निवेश से होने वाली कमाई LIC के लिए सबसे बड़ा राजस्व स्रोत बनी रही. मार्च तिमाही में निवेश आय करीब 17 फीसदी बढ़कर 1.09 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह 93,443 करोड़ रुपये थी.
कंपनी ने इस तिमाही में कुल 89,058 करोड़ रुपये का सरप्लस दर्ज किया. एसोसिएट्स और माइनॉरिटी इंटरेस्ट का हिस्सा घटाने के बाद सरप्लस 24,964 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल 20,271 करोड़ रुपये था.
खर्च बढ़ने के बावजूद मजबूत रही वित्तीय स्थिति
तिमाही के दौरान LIC के मैनेजमेंट खर्च बढ़कर 20,699 करोड़ रुपये हो गए, जबकि पिछले साल यह 16,526 करोड़ रुपये थे. कर्मचारियों की सैलरी और वेलफेयर खर्च भी बढ़कर 8,891 करोड़ रुपये पहुंच गया.
इसके बावजूद कंपनी की वित्तीय स्थिति मजबूत बनी रही. 31 मार्च 2026 तक LIC का सॉल्वेंसी रेश्यो बढ़कर 2.35 हो गया, जो पिछले साल 2.11 था. यह स्तर नियामकीय जरूरतों से काफी ऊपर है.
परसिस्टेंसी रेशियो में हल्की गिरावट
कंपनी का 13वें महीने का परसिस्टेंसी रेशियो 67.77 फीसदी रहा, जो पिछले साल 68.62 फीसदी था. वहीं 61वें महीने का परसिस्टेंसी रेशियो घटकर 54.13 फीसदी पर आ गया, जो एक साल पहले 58.54 फीसदी था.
निवेशकों के लिए क्या है संकेत
मजबूत मुनाफा, बढ़ती प्रीमियम इनकम और डिविडेंड ऐलान से LIC ने निवेशकों को सकारात्मक संकेत दिए हैं. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी की मजबूत बैलेंस शीट और निवेश पोर्टफोलियो भविष्य में भी इसकी ग्रोथ को सपोर्ट कर सकते हैं.
गुरुवार को बीएसई सेंसेक्स 135.03 अंक गिरकर 75,183.36 अंक पर बंद हुआ था. वहीं, निफ्टी 4.3 अंक की मामूली गिरावट के साथ 23,654.70 अंक पर बंद हुआ था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
घरेलू शेयर बाजार ने गुरुवार को मजबूत शुरुआत के बावजूद कमजोरी के साथ कारोबार खत्म किया था. आईटी और एफएमसीजी शेयरों में बिकवाली के दबाव से सेंसेक्स 135 अंक फिसल गया, जबकि निफ्टी मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ. हालांकि रुपये में आई मजबूती ने बाजार को कुछ राहत जरूर दी. अब शुक्रवार के कारोबारी सत्र में निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों, रुपये की चाल से जुड़ी बड़ी खबरों पर रहेगी. वहीं, तिमाही नतीजे, ब्लॉक डील, फंड जुटाने और कीमत बढ़ोतरी जैसे अपडेट्स के चलते आज बाजार में चुनिंदा शेयरों में तेज हलचल देखने को मिल सकती है.
कल बाजार में क्या हुआ था
गुरुवार को कारोबार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स करीब 550 अंक तक उछल गया था, जबकि निफ्टी50 इंडेक्स 23,800 के पार पहुंच गया था, लेकिन दिन चढ़ने के साथ आईटी और एफएमसीजी सेक्टर में बिकवाली बढ़ने लगी, जिससे बाजार की तेजी टिक नहीं सकी. अंत में सेंसेक्स 135.03 अंक यानी 0.18 फीसदी गिरकर 75,183.36 अंक पर बंद हुआ था. वहीं निफ्टी 4.3 अंक यानी 0.02 फीसदी की मामूली गिरावट के साथ 23,654.70 अंक पर बंद हुआ था.
इन शेयरों ने बढ़ाया था दबाव
सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 18 गिरावट के साथ बंद हुए थे. सबसे ज्यादा दबाव वित्तीय और आईटी शेयरों में देखने को मिला था. बजाज फाइनेंस में 1.64 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई थी. इसके अलावा इन्फोसिस, टेक महिंद्रा, हिंदुस्तान यूनिलीवर, बजाज फिनसर्व और भारती एयरटेल के शेयर भी एक फीसदी से ज्यादा टूटे थे.
इन शेयरों में दिखी थी खरीदारी
बाजार में कमजोरी के बावजूद कुछ चुनिंदा शेयरों में निवेशकों ने खरीदारी जारी रखी थी. इंडिगो, ट्रेंट, बीईएल, अडानी पोर्ट्स, अल्ट्राटेक सीमेंट, टाटा स्टील और लार्सन एंड टुब्रो के शेयर तेजी के साथ बंद हुए थे. रियल्टी और सीमेंट सेक्टर में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली थी, जिससे बाजार को कुछ सहारा मिला था.
ब्रॉडर मार्केट का कैसा रहा हाल
ब्रॉडर मार्केट में मिला-जुला रुख देखने को मिला था. निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.04 फीसदी की हल्की गिरावट के साथ बंद हुआ था, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.63 फीसदी की तेजी दर्ज की गई थी. सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी आईटी और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में सबसे ज्यादा दबाव रहा था. दूसरी ओर निफ्टी रियल्टी और निफ्टी सीमेंट इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए थे.
बाजार खुलने से पहले जानिए आज किन फैक्टर्स पर रहेगी नजर
आज के कारोबारी सत्र में बाजार की नजर वैश्विक संकेतों, रुपये की चाल और ITC, Paytm, Maruti Suzuki, Tata Steel जैसे दिग्गज शेयरों से जुड़ी बड़ी खबरों पर रहेगी. ब्लॉक डील, तिमाही नतीजे, फंड जुटाने और कीमत बढ़ोतरी जैसे अपडेट्स के चलते आज बाजार में चुनिंदा शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है.
गौरव भगत एकेडमी के फाउंडर गौरव भगत के अनुसार, इस समय भारत की बाजार कहानी तीन बड़े थीम्स के इर्द-गिर्द घूम रही है. इंफ्रास्ट्रक्चर में तेजी, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ता बदलाव, ये अब सिर्फ शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग ट्रेंड्स नहीं रह गए हैं, बल्कि भारत की दीर्घकालिक आर्थिक दिशा को दर्शाने वाले मजबूत संकेत बन चुके हैं. अशोका बिल्डकॉन, NBCC, KNR कंस्ट्रक्शन, पटेल इंजीनियरिंग और DLF जैसी कंपनियाँ राष्ट्र निर्माण और वास्तविक परिसंपत्ति निर्माण को लेकर बढ़ते भरोसे का प्रतिनिधित्व करती हैं। सरकार का इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार ज़ोर सीमेंट, निर्माण, लॉजिस्टिक्स और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में मल्टीप्लायर इफेक्ट पैदा कर रहा है. इसके अलावा रक्षा क्षेत्र भारत की सबसे मजबूत रणनीतिक विकास कहानियों में से एक बनकर उभर रहा है. EV और क्लीन एनर्जी सेक्टर ऊर्जा सुरक्षा, सस्टेनेबिलिटी और सरकारी प्रोत्साहनों के दम पर तेज बदलाव के दौर में हैं. सबसे दिलचस्प बात यह है कि बाजार अब उन कंपनियों को महत्व दे रहा है जो मजबूत विजन, बेहतर निष्पादन और भविष्य की तैयारी के साथ आगे बढ़ रही हैं. आने वाले समय में सबसे बड़े वेल्थ क्रिएशन के अवसर उन्हीं सेक्टर्स से निकल सकते हैं, जो सीधे तौर पर भारत के राष्ट्रीय परिवर्तन से जुड़े हैं. ऐसे में निवेशक इन सभी फैक्टर्स को ध्यान में रखकर निवेश की योजना बना सकते हैं.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
RAINMUMBAI एक वेदर डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट है, जिसमें निवेशक या कंपनियां बारिश की अनिश्चितता से होने वाले आर्थिक जोखिम को हेज कर सकेंगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत अब मौसम आधारित फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स के नए दौर में प्रवेश करने जा रहा है. NCDEX 1 जून 2026 से देश का पहला एक्सचेंज-ट्रेडेड वेदर डेरिवेटिव “RAINMUMBAI” लॉन्च करने जा रहा है. यह ऐसा वित्तीय कॉन्ट्रैक्ट होगा, जो मुंबई में होने वाली बारिश के आंकड़ों से जुड़ा रहेगा और कंपनियों को मानसून से जुड़े जोखिमों से बचाव का मौका देगा.
क्या है RAINMUMBAI?
RAINMUMBAI एक वेदर डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट है, जिसमें निवेशक या कंपनियां बारिश की अनिश्चितता से होने वाले आर्थिक जोखिम को हेज कर सकेंगी. आसान शब्दों में समझें तो अगर किसी कंपनी को डर है कि कम या ज्यादा बारिश से उसके कारोबार पर असर पड़ सकता है, तो वह इस कॉन्ट्रैक्ट में पोजिशन लेकर संभावित नुकसान की भरपाई कर सकती है.
बारिश के आंकड़ों पर होगा पूरा खेल
यह कॉन्ट्रैक्ट मुंबई में मानसून के दौरान दर्ज होने वाली बारिश पर आधारित होगा. इसमें “क्यूम्युलेटिव डेविएशन रेनफॉल” यानी CDR को ट्रैक किया जाएगा, जो यह बताएगा कि वास्तविक बारिश दीर्घकालिक औसत (LPA) से कितनी ज्यादा या कम रही. इसका भुगतान फसल या संपत्ति के नुकसान के आधार पर नहीं, बल्कि वास्तविक बारिश के आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर किया जाएगा.
IMD के डेटा का होगा इस्तेमाल
RAINMUMBAI कॉन्ट्रैक्ट के लिए भारतीय मौसम विभाग के मुंबई स्थित सांताक्रूज और कोलाबा वेधशालाओं के आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाएगा. LPA का निर्धारण 1991 से 2020 तक के 30 साल के ऐतिहासिक डेटा के आधार पर किया गया है, ताकि सिस्टम में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रहे.
IIT बॉम्बे के सहयोग से तैयार हुआ प्रोडक्ट
NCDEX ने इस वेदर डेरिवेटिव को IIT बॉम्बे के सहयोग से विकसित किया है. एक्सचेंज का कहना है कि यह प्रोडक्ट विज्ञान और वित्तीय बाजारों के मेल का उदाहरण है, जो मौसम से जुड़े जोखिमों को मापने और प्रबंधित करने में मदद करेगा.
किसानों के साथ कई सेक्टरों को होगा फायदा
यह प्रोडक्ट सिर्फ किसानों के लिए नहीं बनाया गया है. बिजली कंपनियां, निर्माण कंपनियां, इंफ्रास्ट्रक्चर फर्म, लॉजिस्टिक्स कंपनियां और कृषि क्षेत्र को कर्ज देने वाले बैंक भी इसका इस्तेमाल कर सकेंगे. मानसून पर निर्भर किसी भी कारोबार को इससे जोखिम प्रबंधन में मदद मिल सकती है.
बीमा से कैसे अलग है यह सिस्टम?
पारंपरिक बीमा में नुकसान का आकलन करने और सर्वे के बाद भुगतान किया जाता है. लेकिन RAINMUMBAI एक कैश-सेटल्ड डेरिवेटिव होगा, जिसमें सेटलमेंट सीधे बारिश के आंकड़ों के आधार पर होगा. इससे भुगतान प्रक्रिया तेज होगी और विवाद की संभावना कम रहेगी.
क्या होंगी कॉन्ट्रैक्ट की प्रमुख शर्तें?
NCDEX के मुताबिक इस कॉन्ट्रैक्ट की कुछ अहम शर्तें होंगी:
1. टिक साइज: 1 मिमी वर्षा
2. लॉट मल्टीप्लायर: प्रति मिमी 50 रुपये
3. अधिकतम ऑर्डर साइज: 50 लॉट
4. दैनिक मूल्य सीमा: 9%
5. ट्रेडिंग समय: सोमवार से शुक्रवार, सुबह 10 बजे से
मौसम जोखिम को मिलेगा नया वित्तीय रूप
विशेषज्ञों का मानना है कि वेदर डेरिवेटिव्स भविष्य में भारत के लिए बड़ा बाजार बन सकते हैं. जलवायु परिवर्तन और मौसम की बढ़ती अनिश्चितता के दौर में ऐसे प्रोडक्ट कंपनियों को जोखिम प्रबंधन का नया विकल्प देंगे. इससे मौसम से जुड़े आर्थिक झटकों को कम करने में मदद मिल सकती है.
NCDEX ने क्या कहा?
NCDEX के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO अरुण रस्ते ने कहा कि भारत सदियों से मानसून की अनिश्चितता के साथ जीता आया है और RAINMUMBAI सभी हितधारकों को इससे निपटने के लिए वैज्ञानिक और रेगुलेटेड साधन देगा. वहीं, IMD के अधिकारी बिक्रम सिंह ने इसे “रेगुलेटेड मार्केटप्लेस में साइंस और फाइनेंस का संगम” बताया.
कंपनी ने गुरुवार को रेगुलेटरी फाइलिंग में बताया कि उसने जयप्रकाश पावर वेंचर्स में जयप्रकाश एसोसिएट्स की 24 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के लिए शेयर परचेज एग्रीमेंट किया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अडानी पावर (Adani Power) ने ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा दांव खेलते हुए जेपी पावर वेंचर (Jaiprakash Power Ventures) में 24 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने और चुनिंदा थर्मल पावर एसेट्स अधिग्रहित करने का फैसला किया है. करीब 4,194 करोड़ रुपये की इस डील को जय प्रकाश एसोसिएट्स (Jaiprakash Associates) के दिवाला समाधान योजना का हिस्सा माना जा रहा है.
24% हिस्सेदारी खरीदने के लिए हुआ समझौता
कंपनी ने गुरुवार को रेगुलेटरी फाइलिंग में बताया कि उसने जयप्रकाश पावर वेंचर्स में जयप्रकाश एसोसिएट्स की 24 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के लिए शेयर परचेज एग्रीमेंट किया है. इस सौदे की कुल कीमत करीब 2,993.60 करोड़ रुपये तय की गई है.
यूपी के थर्मल पावर प्लांट का भी अधिग्रहण
अडानी पावर ने उत्तर प्रदेश के चुरक स्थित 180 मेगावाट थर्मल पावर प्लांट और उससे जुड़े एसेट्स खरीदने के लिए बिजनेस ट्रांसफर एग्रीमेंट भी किया है. इसके साथ ही जयप्रकाश एसोसिएट्स की प्रयागराज पावर जेनरेशन कंपनी में 11.49 फीसदी हिस्सेदारी भी अडानी पावर को ट्रांसफर की जाएगी. इन एसेट्स के लिए करीब 1,200 करोड़ रुपये का सौदा तय किया गया है.
दिवाला समाधान योजना का हिस्सा है डील
यह अधिग्रहण ऐसे समय में हुआ है जब मार्च में अडानी पावर ने स्टॉक एक्सचेंज को जानकारी दी थी कि वह नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) द्वारा मंजूर जयप्रकाश एसोसिएट्स की समाधान योजना में इम्प्लीमेंटिंग एंटिटी बनने में रुचि रखती है. कंपनी के मुताबिक मौजूदा समझौते उसी मंजूर समाधान योजना को लागू करने की प्रक्रिया का हिस्सा हैं.
पावर सेक्टर में और मजबूत होगी अडानी की पकड़
विशेषज्ञों का मानना है कि इस अधिग्रहण से अडानी पावर की थर्मल पावर क्षमता और बाजार में मौजूदगी दोनों मजबूत होंगी. साथ ही कर्ज में डूबी जयप्रकाश एसोसिएट्स के एसेट्स के पुनर्गठन को भी इससे गति मिलने की उम्मीद है.
यह डील इस बात का संकेत है कि भारतीय बैंकिंग सिस्टम अब तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रिक वाहन सेक्टर पर बड़ा दांव लगा रहा है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ रही है. इसी बीच जेएसडब्ल्यू मोटर्स (JSW Motors) ने बड़ा कदम उठाते हुए भारतीय स्टेट बैंक से करीब 8,000 करोड़ रुपये की फंडिंग हासिल की है. इस रकम का इस्तेमाल महाराष्ट्र में नई EV मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी लगाने और नई एनर्जी गाड़ियों के उत्पादन को बढ़ाने में किया जाएगा.
महाराष्ट्र में बनेगा नया EV मैन्युफैक्चरिंग प्लांट
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने जेएसडब्ल्यू मोटर्स को 10 साल से ज्यादा अवधि के लिए यह लोन सुविधा दी है. कंपनी इस फंड का इस्तेमाल महाराष्ट्र में ग्रीनफील्ड मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी तैयार करने में करेगी. यह प्लांट नई एनर्जी वाली पैसेंजर गाड़ियों के उत्पादन पर फोकस करेगा. माना जा रहा है कि यह प्रोजेक्ट भारत के EV सेक्टर को नई दिशा दे सकता है.
सेकेंडरी लोन मार्केट में भी बढ़ सकती है हलचल
जानकारों के मुताबिक अगर सेकेंडरी लोन मार्केट में मांग मजबूत रहती है, तो SBI इस लोन का कुछ हिस्सा दूसरे बैंकों और वित्तीय संस्थानों को ट्रांसफर कर सकता है. इससे देश के क्रेडिट मार्केट में गतिविधियां बढ़ने और ऑटो सेक्टर में निवेश को नया बल मिलने की उम्मीद है.
EV सेक्टर पर बढ़ा बैंकों का भरोसा
यह डील इस बात का संकेत है कि भारतीय बैंकिंग सिस्टम अब तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रिक वाहन सेक्टर पर बड़ा दांव लगा रहा है. सरकारी प्रोत्साहन, पर्यावरण को लेकर बढ़ती जागरूकता और ग्राहकों की बदलती पसंद की वजह से भारत में EV बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है. CareEdge Ratings के मुताबिक चालू वित्त वर्ष में देश में क्रेडिट ग्रोथ 13% से 14.5% तक पहुंच सकती है, जबकि जमा वृद्धि दर 11% से 12% रहने का अनुमान है.
ऑटो सेक्टर में मजबूत पहचान बनाने की तैयारी
JSW समूह पहले से स्टील, सीमेंट और पावर सेक्टर में मजबूत मौजूदगी रखता है. कंपनी की चीन की SAIC Motor के साथ JSW MG Motor India में साझेदारी भी है. इसके अलावा नई एनर्जी गाड़ियों के लिए Chery Automobile के साथ भी सहयोग किया गया है. कंपनी का लक्ष्य भारत के नई एनर्जी पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में मजबूत पहचान बनाना है. आने वाले समय में कंपनी अपने नए मॉडल्स और लॉन्च टाइमलाइन की जानकारी साझा कर सकती है.
भारत के EV बाजार को मिल सकती है नई रफ्तार
विशेषज्ञों का मानना है कि JSW Motors का यह निवेश भारत के इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में प्रतिस्पर्धा को और तेज कर सकता है. नई मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ने से घरेलू उत्पादन मजबूत होगा और भारत को EV हब बनाने की दिशा में भी मदद मिल सकती है.