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दिल्लीवालों के दिल में बस गए थे 'काकाजी', ऐसे बनाया Bikanervala को देश का चहेता ब्रैंड
बीकानेरवाला का कारोबार आज देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी फैला हुआ है. कंपनी की अगले तीन सालों में अपना आईपीओ लाने की भी योजना है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
एक छोटी सी दुकान से शुरुआत करके बीकानेरवाला (Bikanervala) को देशभर में पहचान दिलाने वाले लाला केदारनाथ अग्रवाल अब हमारे बीच नहीं हैं. 86 साल की उम्र में सोमवार को उन्होंने आखिरी सांस ली. आज देश में Bikanervala के 60 से ज्यादा स्टोर्स हैं और इसका टर्नओवर 1,300 करोड़ रुपए के आसपास है. इतना ही नहीं अमेरिका, न्यूजीलैंड, UAE, नेपाल और सिंगापुर जैसे देशों में भी बीकानेरवाला का कारोबार फैला हुआ है. बीकानेरवाला को देश का चहेता ब्रैंड बनाने का श्रेय काकाजी के नाम से मशहूर लाला केदारनाथ अग्रवाल को ही जाता है. बता दें कि कंपनी अपना आईपीओ लाने की योजना पर काम कर रही है.
बीकानेर से आए दिल्ली
मूलरूप से बीकानेर के रहने वाले केदारनाथ अग्रवाल की शहर में एक छोटी सी मिठाई की दुकान थी. 'बीकानेर नमकीन भंडार' नामक दुकान पर कुछ प्रकार की मिठाइयां और नमकीन मिलती थीं. 1950 के दशक की शुरुआत में वह अपने भाई सत्यनारायण अग्रवाल के साथ दिल्ली आ गए. शुरुआत में उन्होंने पुरानी दिल्ली में भुजिया और रसगुल्ले टोकरी में रखकर बेचना शुरू किया. कुछ ही समय में दिल्ली के लोगों की जुबां पर बीकानेर का अनूठा स्वाद चढ़ गया. इसके बाद अग्रवाल बंधुओं ने चांदनी चौक में दुकान शुरू कर दी, और यहीं से बीकानेर के एक बैंड बनने की शुरुआत हुई. आज भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों में कंपनी का बिजनेस फैला हुआ है.
इस तरह फैला कारोबार
साल 1988 में ब्रैंड को विश्व स्तर पर ले जाने के लिए कंपनी ने एयर-टाइट पैकेजिंग में मिठाई और नमकीन बेचने के लिए बिकानो लॉन्च किया था. इसके बाद 1995 में कंपनी ने हरियाणा के फरीदाबाद में प्लांट लगाते हुए पेप्सिको के ब्रैंड 'लहर' के लिए नमकीन उत्पादन का एक विशेष समझौता किया. 2003 में कंपनी ने 'बिकानो चैट कैफे' खोलने शुरू किए, जो एक किस्म का फास्ट फूड सर्विस रेस्टोरेंट है. कहा जाता है कि दिल्लीवालों को सबसे पहले मूंग की दाल का हलवा चखाने का श्रेय भी काकाजी को ही जाता है. काकाजी के बनाए रसगुल्ले भी लोगों को काफी पसंद आए. एक समय ऐसा था जब रसगुल्लों की राशनिंग यानी लिमिट तक तय करनी पड़ी. एक बार में एक शख्स को 10 से ज्यादा रसगुल्ले नहीं बेचे जाते थे.
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