भारत का यात्री वाहन निर्यात लगातार मजबूत हो रहा है, लेकिन इसमें वैश्विक कंपनियों की पकड़ बढ़ने और घरेलू कंपनियों की सीमित हिस्सेदारी एक महत्वपूर्ण संरचनात्मक अंतर को दर्शाती है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
भारत के यात्री वाहन निर्यात क्षेत्र में वित्त वर्ष 26 के दौरान मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है, जिसमें दो वैश्विक ऑटोमोबाइल दिग्गजों मारुति सुजुकी इंडिया और हुंडई मोटर इंडिया ने मिलकर 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी हासिल की है. सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) के आंकड़ों के अनुसार यह प्रदर्शन भारत के ऑटो निर्यात में वैश्विक ब्रांड्स की बढ़ती पकड़ को दर्शाता है.
वैश्विक ब्रांड्स की मजबूत पकड़
वित्त वर्ष 26 में भारत से कुल 9,05,200 यात्री वाहनों का निर्यात हुआ, जिसमें मारुति सुजुकी इंडिया और हुंडई मोटर इंडिया की संयुक्त हिस्सेदारी 70.03 प्रतिशत रही. यह हिस्सेदारी वित्त वर्ष 25 के 64.05 प्रतिशत की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाती है. अगर इसमें निसान मोटर इंडिया को भी शामिल किया जाए, तो तीनों विदेशी जुड़ी कंपनियों की संयुक्त हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 80 प्रतिशत तक पहुंच जाती है. वित्त वर्ष 25 में यह आंकड़ा 73 प्रतिशत था.
घरेलू कंपनियां पीछे, सीमित हिस्सेदारी
इसके विपरीत, देश की प्रमुख घरेलू ऑटोमोबाइल कंपनियां टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा निर्यात के मोर्चे पर पीछे रहीं. वित्त वर्ष 26 में दोनों की संयुक्त हिस्सेदारी केवल 3.2 प्रतिशत रही. दोनों कंपनियों ने मिलकर 29,072 वाहनों का निर्यात किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में मामूली वृद्धि है, लेकिन वैश्विक कंपनियों के मुकाबले काफी कम है.
मारुति सुजुकी बनी निर्यात की अगुआ
निर्यात वृद्धि की सबसे बड़ी अगुआ मारुति सुजुकी इंडिया रही, जिसने वित्त वर्ष 26 में 34.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की. कंपनी का निर्यात वित्त वर्ष 25 के 3,30,081 वाहनों से बढ़कर वित्त वर्ष 26 में 4,43,825 वाहनों के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. हुंडई मोटर इंडिया का निर्यात भी 16.36 प्रतिशत बढ़कर 1,90,725 वाहनों तक पहुंचा, जबकि निसान मोटर इंडिया का निर्यात 15.5 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 84,408 वाहनों तक पहुंच गया. कुल मिलाकर, भारत का यात्री वाहन निर्यात सालाना आधार पर लगभग 15 प्रतिशत बढ़ा.
इलेक्ट्रिक वाहनों और पीएलआई योजना का प्रभाव
इस वृद्धि को सरकार की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजना के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के प्रयासों से भी जोड़ा जा रहा है. यह योजना भारत को ईवी निर्माण और निर्यात के उभरते केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद कर रही है.
कुछ वैश्विक कंपनियों में गिरावट
जहां कुछ कंपनियों ने मजबूत प्रदर्शन किया, वहीं कुछ वैश्विक ऑटो कंपनियों की निर्यात स्थिति कमजोर हुई. होंडा कार्स इंडिया का निर्यात वित्त वर्ष 25 के 60,229 वाहनों से घटकर वित्त वर्ष 26 में 26,485 वाहनों पर आ गया. इसी तरह फोक्सवैगन इंडिया ने भी अपने निर्यात में मामूली गिरावट दर्ज की है.
भारत के प्रमुख निर्यात मॉडल
वित्त वर्ष 26 में निर्यात किए गए प्रमुख मॉडलों में मारुति सुजुकी ब्रेजा (1,63,000), बलेनो (1,59,000), ई-विटारा इलेक्ट्रिक एसयूवी (62,886) और ऑल्टो व स्प्रेसो (45,934) शामिल रहे. हुंडई के प्रमुख निर्यात मॉडल में आई10, आई20, ऑरा और ग्रैंड आई10 (संयुक्त रूप से 1,00,000) तथा वरना (63,044) शामिल रहे. निसान का प्रमुख मॉडल सनी सेडान (25,696) रहा.
रिटेल और टेलीकॉम क्षेत्रों में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, वैश्विक कंपनियों से टक्कर और बदलते नियामक ढांचे के बीच रिलायंस लगातार अपनी रणनीतियों को परिष्कृत कर रही है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
मुकेश अंबानी ने अपने 69वें जन्मदिन के साथ एक बार फिर यह संकेत दिया है कि रिलायंस (Reliance Industries) अब विकास के नए चरण में प्रवेश कर रही है. कंपनी डिजिटल विस्तार, स्वच्छ ऊर्जा निवेश और वैश्विक महत्वाकांक्षाओं के सहारे आगे बढ़ने की रणनीति पर काम कर रही है, जबकि विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा भी तेज हो रही है.
देश की सबसे बड़ी निजी क्षेत्र की कंपनी रिलायंस अब पारंपरिक पेट्रोकेमिकल और रिफाइनिंग व्यवसाय से आगे बढ़कर तकनीक और स्थिरता-आधारित क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रही है. यह बदलाव कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है, जो भविष्य के उद्योगों में मजबूत पकड़ बनाने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है.
वैश्विक स्तर पर अंबानी की मजबूत स्थिति
ब्लूमबर्ग (Bloomberg Billionaires Index) के अनुसार, मुकेश अंबानी दुनिया के शीर्ष 20 सबसे अमीर व्यक्तियों में शामिल हैं. विश्लेषकों का मानना है कि उनका यह जन्मदिन ऐसे समय आया है, जब समूह अपने पारंपरिक कारोबार और उभरते अवसरों के बीच संतुलन बनाने की दिशा में काम कर रहा है.
विरासत से वैश्विक साम्राज्य तक का सफर
मुकेश अंबानी ने अपने पिता धीरूभाई अंबानी से एक बढ़ते हुए कारोबार को विरासत में पाया, जिसकी शुरुआत टेक्सटाइल क्षेत्र से हुई थी. समय के साथ उन्होंने इसे एक विविधीकृत वैश्विक समूह में बदल दिया. यह बदलाव भारत की अर्थव्यवस्था के उस परिवर्तन को भी दर्शाता है, जहां विनिर्माण आधारित विकास से डिजिटल और उपभोक्ता-आधारित मॉडल की ओर रुख हुआ है.
जामनगर से उपभोक्ता तक मजबूत पकड़
गुजरात के जामनगर में स्थित विशाल रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स कंपनी की औद्योगिक ताकत का आधार बना हुआ है. वहीं, उपभोक्ता-केन्द्रित कारोबारों के विस्तार ने कंपनी को करोड़ों भारतीयों की रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़ दिया है.
2002 के बाद का निर्णायक दौर
2002 में धीरूभाई अंबानी के निधन के बाद रिलायंस समूह का विभाजन मुकेश अंबानी और उनके भाई अनिल अंबानी के बीच हुआ. इस विभाजन के बाद मुकेश अंबानी ने ऊर्जा और पेट्रोकेमिकल व्यवसाय अपने पास रखा, जो आगे चलकर कंपनी की स्थिर वृद्धि का आधार बना.
Jio और रिटेल ने बदली तस्वीर
हाल के वर्षों में कंपनी ने आक्रामक विविधीकरण किया है. Jio Platforms के लॉन्च ने भारत के टेलीकॉम सेक्टर में क्रांतिकारी बदलाव लाया और डेटा को सस्ता व सुलभ बनाया. वहीं Reliance Retail देश के सबसे बड़े रिटेल नेटवर्क्स में से एक बनकर उभरा है.
नए क्षेत्रों में विस्तार और भविष्य की तैयारी
Reliance ने मीडिया, टेक्नोलॉजी और खेल जैसे क्षेत्रों में भी अपनी उपस्थिति मजबूत की है. Mumbai Indians की मालिकाना हिस्सेदारी इसके व्यापक रणनीतिक दृष्टिकोण को दर्शाती है, जिसमें कंटेंट, कॉमर्स और कनेक्टिविटी का एकीकरण शामिल है.
इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रिन्यूएबल एनर्जी और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में निवेश कंपनी के भविष्य-केंद्रित दृष्टिकोण को स्पष्ट करता है.
चुनौतियों के बीच संतुलन की रणनीति
रिटेल और टेलीकॉम क्षेत्रों में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, वैश्विक कंपनियों से टक्कर और बदलते नियामक ढांचे के बीच रिलायंस लगातार अपनी रणनीतियों को परिष्कृत कर रही है. इसके बावजूद कंपनी ने स्थिरता और ऊर्जा संक्रमण जैसे वैश्विक मुद्दों के साथ खुद को जोड़ने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं.
डिजिटल और ग्रीन एनर्जी पर फोकस*
जैसे-जैसे मुकेश अंबानी अपने 70वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं, कंपनी का फोकस पारंपरिक ताकत और नए अवसरों के बीच संतुलन बनाने पर है. डिजिटल सेवाओं और स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ता झुकाव रिलायंस के अगले विकास चरण को परिभाषित कर सकता है, जबकि इसके मुख्य व्यवसाय स्थिरता बनाए रखेंगे.
बैंक की एसेट क्वालिटी में इस तिमाही सुधार दर्ज किया गया है. ग्रॉस NPA रेशियो घटकर 1.40 प्रतिशत रह गया, जबकि पिछले साल यह 1.67 प्रतिशत था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश के प्रमुख निजी बैंकों में शामिल ICICI Bank ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही (जनवरी–मार्च) के नतीजे जारी कर दिए हैं. इस बार बैंक ने मुनाफे में स्थिर वृद्धि दर्ज की है, जबकि एसेट क्वालिटी में सुधार देखने को मिला है. साथ ही, बैंक ने शेयरधारकों के लिए ₹12 प्रति शेयर के डिविडेंड को मंजूरी दी है.
मुनाफे में 8.5% की बढ़ोतरी
मार्च 2026 तिमाही में ICICI Bank का स्टैंडअलोन शुद्ध मुनाफा 13,701.68 करोड़ रुपये रहा. यह पिछले साल की समान तिमाही के 12,629.58 करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 8.5 प्रतिशत अधिक है. बैंक की कुल आय भी 2 प्रतिशत बढ़कर 50,584.38 करोड़ रुपये पर पहुंच गई, जबकि एक साल पहले यह 49,690.87 करोड़ रुपये थी.
कुल ब्याज आय बढ़कर 43,275.39 करोड़ रुपये रही. वहीं शुद्ध ब्याज आय 8.4 प्रतिशत की बढ़त के साथ 22,979.2 करोड़ रुपये दर्ज की गई. इस तिमाही में बैंक का शुद्ध ब्याज मार्जिन 4.32 प्रतिशत रहा, जो इसके मजबूत फंडामेंटल्स को दर्शाता है.
एसेट क्वालिटी में सुधार, NPA में गिरावट
बैंक की एसेट क्वालिटी में इस तिमाही सुधार दर्ज किया गया है. ग्रॉस NPA रेशियो घटकर 1.40 प्रतिशत रह गया, जबकि पिछले साल यह 1.67 प्रतिशत था. इसी तरह नेट NPA रेशियो भी घटकर 0.33 प्रतिशत पर आ गया, जो पिछले वर्ष 0.39 प्रतिशत था. यह गिरावट बताती है कि बैंक ने खराब कर्जों पर बेहतर नियंत्रण हासिल किया है.
डिपॉजिट और लोन ग्रोथ में मजबूती
मार्च 2026 के अंत तक बैंक के कुल डिपॉजिट बढ़कर 17.94 लाख करोड़ रुपये हो गए, जबकि पिछले साल यह 16.10 लाख करोड़ रुपये थे. इसी तरह एडवांसेज (लोन बुक) भी बढ़कर 15.53 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जो पिछले वर्ष 13.41 लाख करोड़ रुपये थी. यह बैंक के मजबूत विस्तार और बढ़ते ग्राहक आधार को दर्शाता है.
₹12 प्रति शेयर डिविडेंड को मंजूरी
बैंक के बोर्ड ने 18 अप्रैल की बैठक में वित्त वर्ष 2026 के लिए ₹12 प्रति शेयर डिविडेंड को मंजूरी दी है. हालांकि अभी इसकी रिकॉर्ड डेट तय नहीं की गई है. इस डिविडेंड पर अंतिम मंजूरी बैंक की वार्षिक आम बैठक में दी जाएगी. रिकॉर्ड डेट तक जिन निवेशकों के नाम कंपनी के रिकॉर्ड में होंगे, वे इस लाभ के पात्र होंगे.
वित्त वर्ष 2026 का कुल प्रदर्शन
पूरे वित्त वर्ष 2026 में ICICI Bank की कुल स्टैंडअलोन आय 2,00,703.68 करोड़ रुपये रही, जबकि शुद्ध मुनाफा 50,146.64 करोड़ रुपये दर्ज किया गया. यह बैंक के मजबूत और स्थिर वार्षिक प्रदर्शन को दर्शाता है.
शेयर बाजार में प्रदर्शन
सुबह खबर लिखे जाने तक बैंक का शेयर करीब 1.05 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,361.00 रुपये पर ट्रेड कर रहा है और इसका मार्केट कैप 9.65 लाख करोड़ रुपये से अधिक है. पिछले दो हफ्तों में शेयर लगभग 11 प्रतिशत मजबूत हुआ है. नतीजों के बाद आने वाले सत्रों में इस स्टॉक पर बाजार की नजर बनी रह सकती है.
सर्वे के अनुसार, रिटेल लोन सेगमेंट में उच्च दोहरे अंकों की ग्रोथ देखने को मिल सकती है. वहीं, कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में भी 9-13% की वृद्धि का अनुमान है, जो ग्रामीण मांग में सुधार को दर्शाता है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के बैंकिंग सेक्टर में साल 2026 की पहली छमाही (जनवरी-जून) के दौरान कर्ज वितरण में स्थिर लेकिन मजबूत वृद्धि के संकेत मिल रहे हैं. उद्योग, इंफ्रास्ट्रक्चर और बढ़ती मांग के चलते बैंकों द्वारा 9-13% तक लोन ग्रोथ दर्ज की जा सकती है. यह रुझान आर्थिक गतिविधियों में सुधार और निवेश चक्र की वापसी की ओर इशारा करता है.
औद्योगिक कर्ज में सुधार के संकेत
फिक्की-आईबीए सर्वे के मुताबिक, औद्योगिक कर्ज में 9-13% की वृद्धि संभव है. यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) में तेजी, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के विस्तार और बाजार में मांग बढ़ने से समर्थित होगी. हालांकि, इसमें तेज उछाल के बजाय क्रमिक और स्थिर वृद्धि की संभावना जताई गई है.
अलग-अलग बैंकों की अलग रणनीति
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (PSBs): इन बैंकों में सबसे ज्यादा आशावाद दिख रहा है. बेहतर एसेट क्वालिटी, मजबूत पूंजी स्थिति और कॉरपोरेट लोन में सुधार के चलते 11-13% या उससे अधिक ग्रोथ की उम्मीद है.
निजी बैंक: निजी बैंकों का प्रदर्शन मिश्रित रहने की संभावना है, लेकिन अधिकतर 11-13% की ग्रोथ रेंज में रह सकते हैं. मजबूत रिटेल पोर्टफोलियो, MSME लोन और संतुलित कॉरपोरेट एक्सपोजर उनकी रणनीति का हिस्सा हैं.
छोटे वित्त और सहकारी बैंक: ये बैंक अपेक्षाकृत सतर्क रुख अपनाए हुए हैं. बड़े उद्योगों में सीमित जोखिम और रिटेल व MSME पर फोकस के चलते इनकी लोन ग्रोथ 7-9% रहने का अनुमान है.
विदेशी बैंकों का संतुलित रुख
विदेशी बैंकों के लिए 11-13% की मध्यम वृद्धि का अनुमान है. इनकी रणनीति वैश्विक तरलता, पूंजी आवंटन और भारतीय कॉरपोरेट बाजार में सीमित लेकिन रणनीतिक भागीदारी पर आधारित है.
रिटेल और कृषि क्षेत्र में मजबूत उम्मीद
सर्वे के अनुसार, रिटेल लोन सेगमेंट में उच्च दोहरे अंकों की ग्रोथ देखने को मिल सकती है. वहीं, कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में भी 9-13% की वृद्धि का अनुमान है, जो ग्रामीण मांग में सुधार को दर्शाता है.
कुल मिलाकर, भारतीय बैंकिंग सेक्टर 2026 की पहली छमाही में संतुलित और टिकाऊ कर्ज वृद्धि की ओर बढ़ रहा है. इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश, कैपेक्स रिकवरी और मजबूत मांग इस ग्रोथ के प्रमुख चालक होंगे, जिससे अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है.
मार्च 2026 के अंत तक बैंक के कुल डिपॉजिट बढ़कर 31.05 लाख करोड़ रुपये हो गए. पिछले साल यह 27.14 लाख करोड़ रुपये थे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश के प्रमुख निजी बैंकों में शामिल एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही (जनवरी–मार्च) के नतीजे जारी कर दिए हैं. इस बार बैंक ने स्थिर आय के बीच मुनाफे में बढ़ोतरी दर्ज की है और एसेट क्वालिटी में सुधार भी देखने को मिला है. साथ ही, शेयरधारकों के लिए ₹13 प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड की घोषणा की गई है.
मुनाफे में 9% की बढ़ोतरी
मार्च 2026 तिमाही में बैंक का स्टैंडअलोन शुद्ध मुनाफा 19,221.05 करोड़ रुपये रहा. यह पिछले साल की समान तिमाही के 17,616.14 करोड़ रुपये के मुकाबले करीब 9 प्रतिशत अधिक है. हालांकि कुल आय लगभग स्थिर रही और 89,808.90 करोड़ रुपये पर पहुंची, जबकि एक साल पहले यह 89,487.99 करोड़ रुपये थी. इस दौरान कुल ब्याज आय 76,610.02 करोड़ रुपये रही, जो पिछले वर्ष के मुकाबले थोड़ी कम दर्ज हुई, जबकि शुद्ध ब्याज आय 3.8 प्रतिशत बढ़कर 33,281.5 करोड़ रुपये हो गई.
NPA में सुधार
बैंक की एसेट क्वालिटी में इस तिमाही सुधार देखा गया है. ग्रॉस NPA रेशियो घटकर 1.15 प्रतिशत पर आ गया, जबकि पिछले साल यह 1.33 प्रतिशत था. नेट NPA रेशियो भी घटकर 0.38 प्रतिशत रह गया, जो पिछले वर्ष 0.43 प्रतिशत था. यह दिखाता है कि बैंक ने खराब कर्जों पर बेहतर नियंत्रण हासिल किया है और जोखिम प्रबंधन मजबूत हुआ है.
डिपॉजिट और लोन बुक में मजबूती
मार्च 2026 के अंत तक बैंक के कुल डिपॉजिट बढ़कर 31.05 लाख करोड़ रुपये हो गए. पिछले साल यह 27.14 लाख करोड़ रुपये थे. इसी तरह, एडवांसेज यानी लोन बुक भी बढ़कर 29.37 लाख करोड़ रुपये हो गई, जो पिछले वर्ष 26.19 लाख करोड़ रुपये थी. इससे बैंक के कारोबार विस्तार और ग्राहक आधार में मजबूती दिखाई देती है.
₹13 फाइनल डिविडेंड घोषित*
बैंक के बोर्ड ने वित्त वर्ष 2026 के लिए ₹13 प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड को मंजूरी दी है. इसके लिए 19 जून 2026 को रिकॉर्ड डेट तय की गई है. इस तारीख तक जिन निवेशकों के नाम कंपनी के रिकॉर्ड में होंगे, वे इस डिविडेंड के पात्र होंगे. इससे पहले बैंक ₹2.50 प्रति शेयर का स्पेशल डिविडेंड भी घोषित कर चुका है.
वित्त वर्ष 2026 का कुल प्रदर्शन
पूरे वित्त वर्ष 2026 में बैंक की कुल स्टैंडअलोन आय 3,70,054.65 करोड़ रुपये रही और शुद्ध मुनाफा 74,671.29 करोड़ रुपये दर्ज किया गया. यह बैंक के स्थिर और मजबूत वित्तीय प्रदर्शन को दर्शाता है. वहीं, BSE पर बैंक का शेयर लगभग 799.90 रुपये पर ट्रेड कर रहा है. इसका मार्केट कैप 12.31 लाख करोड़ रुपये से अधिक है. हालांकि पिछले छह महीनों में शेयर लगभग 20 प्रतिशत गिर चुका है, लेकिन तिमाही नतीजों के बाद इसमें बाजार की हलचल बनी रह सकती है.
MCX ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि उसे 17 अप्रैल 2026 को SEBI से कोल एक्सचेंज स्थापित करने के लिए मंजूरी मिल गई है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश में कोयला कारोबार अब एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहा है. मार्केट रेगुलेटर SEBI से मंजूरी मिलने के बाद मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) जल्द ही कोयला ट्रेडिंग के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च करने की तैयारी में है. इस कदम से कोयले की खरीद-बिक्री ज्यादा पारदर्शी, संगठित और टेक्नोलॉजी आधारित हो सकेगी.
MCX को मिली SEBI की मंजूरी
MCX ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि उसे 17 अप्रैल 2026 को SEBI से कोल एक्सचेंज स्थापित करने के लिए मंजूरी मिल गई है. अब अगला कदम कोल कंट्रोलर ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया से लाइसेंस हासिल करना होगा, जिसके लिए कंपनी निर्धारित नियमों के बाद आवेदन करेगी.
क्या है MCX का प्लान
इस मंजूरी के बाद MCX एक नई पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी बनाएगा, जिसका संभावित नाम MCX Coal Exchange Ltd. हो सकता है. इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य कोयले की खरीद-बिक्री के लिए एक रेगुलेटेड और डिजिटल इकोसिस्टम तैयार करना है.
कंपनी इस नई इकाई में शुरुआती तौर पर करीब 100 करोड़ रुपये तक निवेश करेगी, ताकि जरूरी नेटवर्थ की शर्तों को पूरा किया जा सके. शुरुआत में MCX की इस कंपनी में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी, हालांकि भविष्य में इसमें रणनीतिक निवेशकों को भी शामिल किया जा सकता है.
कोयला ट्रेडिंग में क्या बदलेगा
नए डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए कोयले की ट्रेडिंग पहले से ज्यादा पारदर्शी और आसान हो जाएगी. यहां पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी और फिजिकल डिलीवरी की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी. इससे कीमत तय होने की प्रक्रिया यानी प्राइस डिस्कवरी बेहतर होगी और पूरे सेक्टर में एफिशिएंसी बढ़ेगी. MCX अपने मौजूदा अनुभव जैसे गवर्नेंस, सर्विलांस और क्लियरिंग सिस्टम का उपयोग कर एक मजबूत कोल ट्रेडिंग इकोसिस्टम विकसित करने की योजना बना रहा है.
NSE भी रेस में शामिल
इस क्षेत्र में सिर्फ MCX ही नहीं, बल्कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) भी तेजी से कदम बढ़ा रहा है. NSE को भी अपने कोल एक्सचेंज प्रोजेक्ट के लिए SEBI से मंजूरी मिल चुकी है. NSE अपनी नई कंपनी National Coal Exchange of India Limited में करीब 100 करोड़ रुपये तक निवेश करेगा. इसमें उसकी 60 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी, जबकि बाकी 40 प्रतिशत हिस्सेदारी अन्य निवेशकों को दी जाएगी.
पूरे सेक्टर पर पड़ेगा असर
MCX और NSE जैसे बड़े एक्सचेंजों के इस क्षेत्र में उतरने से कोयला उद्योग में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. एक ही प्लेटफॉर्म पर खरीदार और विक्रेता आने से बाजार की कीमतें ज्यादा पारदर्शी होंगी. साथ ही कोयले को ग्रेड, क्वालिटी और डिलीवरी के आधार पर स्टैंडर्डाइज किया जाएगा, जिससे ट्रेडिंग प्रक्रिया और व्यवस्थित बनेगी.
इसके अलावा, डिजिटल सिस्टम के चलते मैनुअल और ऑफलाइन डीलिंग में कमी आएगी. पावर, सीमेंट और स्टील कंपनियां अपनी जरूरत के अनुसार आसानी से कोयला खरीद सकेंगी और बेहतर प्लानिंग कर पाएंगी.
शुरुआत में यह प्लेटफॉर्म फिजिकल ट्रेडिंग पर फोकस करेगा, लेकिन आगे चलकर इसके आधार पर फ्यूचर्स और हेजिंग जैसे फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स भी लॉन्च किए जा सकते हैं.
शुक्रवार को बीएसई सेंसेक्स 505 अंक यानी 0.65 फीसदी चढ़कर 78,493.54 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी50 157 अंक की तेजी के साथ 24,343.55 पर पहुंच गया था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
घरेलू शेयर बाजार में आज (20 अप्रैल) हल्की से मध्यम तेजी देखने को मिल सकती है. ग्लोबल स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत बहाल होने की उम्मीद से निवेशकों का सेंटीमेंट बेहतर हुआ है. पिछले सत्र में भी बाजार ने शुरुआती कमजोरी के बाद मजबूती दिखाई थी, जिससे संकेत मिलते हैं कि बुल्स अभी भी बाजार पर पकड़ बनाए हुए हैं.
पिछले सत्र में क्या हुआ था
बीते कारोबारी दिन बाजार ने उतार-चढ़ाव के बाद मजबूती के साथ क्लोजिंग दी. बीएसई सेंसेक्स 505 अंक यानी 0.65 फीसदी चढ़कर 78,493.54 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी50 157 अंक की तेजी के साथ 24,343.55 पर पहुंच गया. इससे पहले के सत्र में बाजार में हल्की गिरावट दर्ज की गई थी.
आज बाजार की चाल कैसी रह सकती है
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, गिफ्ट निफ्टी से मिले संकेतों के आधार पर बाजार की शुरुआत फ्लैट से हल्की पॉजिटिव हो सकती है. एक्सपर्ट्स के अनुसार, निफ्टी के लिए 24,200–24,250 का स्तर सपोर्ट के रूप में देखा जा रहा है, जबकि 24,500–24,700 के बीच रेजिस्टेंस हो सकता है. अगर निफ्टी इस रेंज को पार करता है, तो आगे नई तेजी देखने को मिल सकती है. साथ ही ग्लोबल संकेत मजबूत बने रहते हैं, तो दिन के दौरान खरीदारी बढ़ सकती है. हालांकि, ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली भी देखने को मिल सकती है, इसलिए बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है. निवेशकों को चुनिंदा शेयरों पर फोकस करने की सलाह दी जा रही है.
विशेषज्ञों के अनुसार, आज के बाजार में निवेशकों को जल्दबाजी से बचते हुए चरणबद्ध तरीके से निवेश करने की सलाह है. मिडकैप और सेक्टर-विशिष्ट शेयरों में मौके बन सकते हैं, लेकिन ऊंचे स्तरों पर सतर्क रहना जरूरी है.
इन शेयरों पर एक्सपर्ट बुलिश
बाजार की मौजूदा तेजी के बीच कई बड़े ब्रोकरेज हाउस ने कुछ शेयरों पर ‘Buy’ रेटिंग दी है, जिनमें आगे अच्छी तेजी की संभावना जताई जा रही है. Suzlon Energy के शेयर में करीब 30% तक रिटर्न की उम्मीद है, जबकि Groww (Billionbrains Garage Ventures) को तेजी से बढ़ते रिटेल इनवेस्टमेंट मार्केट का मजबूत खिलाड़ी माना जा रहा है. Dixon Technologies में भी करीब 30% तक अपसाइड का अनुमान जताया गया है. Hero MotoCorp के शेयर में ग्रामीण मांग और एक्सपोर्ट के चलते ग्रोथ की उम्मीद है, वहीं Wipro को मजबूत डील पाइपलाइन और बायबैक से सपोर्ट मिल सकता है. JSW Energy को पावर डिमांड और कैपेसिटी एक्सपेंशन का फायदा मिलने की संभावना है. Adani Enterprises में इंफ्रास्ट्रक्चर और नई ऊर्जा बिजनेस के चलते लंबी अवधि में ग्रोथ की उम्मीद जताई गई है. Hyundai Motor India में नए मॉडल और प्राइस हाइक से रिकवरी आ सकती है. Prestige Estates Projects मजबूत प्री-सेल्स के चलते रियल एस्टेट सेक्टर में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है, जबकि Nuvoco Vistas Corporation में बेहतर तिमाही नतीजों के आधार पर 50% से ज्यादा अपसाइड की संभावना जताई गई है.
सेक्टोरल ट्रेंड पर नजर
विशेषज्ञों के अनुसार, आईटी सेक्टर का रुख स्थिर से पॉजिटिव बना हुआ है. ऑटो सेक्टर में रिकवरी के संकेत मिल रहे हैं, जबकि पावर और एनर्जी सेक्टर में मजबूत रुझान देखने को मिल रहा है. वहीं रियल एस्टेट सेक्टर में भी मांग बनी हुई है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
प्रधानमंत्री रात 8:30 बजे संबोधित करेंगे क्योंकि सीमांकन और महिलाओं के कोटे से जुड़े संविधान (131वां संशोधन) विधेयक की हार पर राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शनिवार को रात 8:30 बजे राष्ट्र को संबोधित करेंगे, मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह उस दिन के बाद हो रहा है जब महिलाओं के आरक्षण पर एक महत्वपूर्ण विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो सका.
इस संबोधन में विधायिकाओं में महिलाओं के आरक्षण के प्रस्तावित कार्यान्वयन पर ध्यान केंद्रित होने की उम्मीद है, साथ ही संसद में हुए घटनाक्रम पर भी, जहां संविधान (131वां संशोधन) विधेयक को शुक्रवार को विपक्षी दलों ने खारिज कर दिया. उल्लेखनीय है कि मोदी का राष्ट्र के नाम आखिरी संबोधन 21 सितंबर को था, जब उन्होंने जीएसटी सुधारों पर बात की थी.
इस विधेयक में 2029 के आम चुनावों से पहले महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने के लिए लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव था. यह विस्तार 2011 की जनगणना के आधार पर सीमांकन अभ्यास से जुड़ा था. सरकार ने यह भी संकेत दिया था कि कोटा लागू करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी इसी तरह सीटों में वृद्धि की आवश्यकता होगी.
हालांकि, यह विधेयक आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में विफल रहा. मतदान करने वाले 528 सांसदों में से 298 ने विधेयक का समर्थन किया जबकि 230 ने इसका विरोध किया, जो पारित होने के लिए आवश्यक 352 मतों से कम था.
इस परिणाम ने राजनीतिक टकराव को जन्म दिया है, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर महिलाओं के आरक्षण को रोकने का आरोप लगाया. विपक्षी नेताओं, जिनमें राहुल गांधी भी शामिल हैं, ने तर्क दिया कि वे आरक्षण के विचार का समर्थन करते हैं, लेकिन इसे सीमांकन से जोड़ने का विरोध करते हैं.
"कल संसद में वे एक नया विधेयक लेकर आए. उन्होंने कहा कि यह महिला विधेयक है, लेकिन वह पहले ही 2023 में पारित हो चुका था. उस विधेयक के पीछे छिपा एजेंडा सीमांकन था. विचार यह था कि संसद में तमिलनाडु के प्रतिनिधित्व को कम किया जाए और दक्षिणी तथा छोटे राज्यों को कमजोर किया जाए. हमने कल संसद में उस विधेयक को हरा दिया," गांधी ने शनिवार को तमिलनाडु के पोन्नेरी में एक रैली में कहा.
उन्होंने संघवाद पर अपने व्यापक रुख को दोहराते हुए भारत को "राज्यों का संघ" बताया, जहां प्रत्येक राज्य को समान प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए. “हर राज्य की संघ में एक आवाज होनी चाहिए और उसे अपनी भाषा व्यक्त करने और अपनी परंपरा की रक्षा करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए.”
देश के गोल्ड रिजर्व में भी वृद्धि दर्ज की गई है. बीते सप्ताह इसकी वैल्यू 601 मिलियन डॉलर बढ़कर 121.343 अरब डॉलर हो गई.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
मार्च में भारी गिरावट के बाद भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) ने अप्रैल में दमदार वापसी की है. लगातार दो हफ्तों की बढ़ोतरी के साथ देश का भंडार फिर से 700 अरब डॉलर के पार पहुंच गया है. अप्रैल के शुरुआती दो हफ्तों में ही इसमें 12 अरब डॉलर से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई है, जो वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.
लगातार दूसरे हफ्ते बढ़ा भंडार
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक 10 अप्रैल 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 3.825 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई. इससे पहले वाले सप्ताह में भी 9.063 अरब डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई थी. इन बढ़ोतरी के साथ कुल विदेशी मुद्रा भंडार 700.946 अरब डॉलर तक पहुंच गया है. इससे पहले 27 फरवरी 2026 को यह 728.494 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर था.
मार्च में आई थी बड़ी गिरावट
मार्च 2026 भारत के विदेशी मुद्रा भंडार के लिए चुनौतीपूर्ण रहा. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक अस्थिरता के चलते पूरे महीने में भंडार से 40 अरब डॉलर से ज्यादा की निकासी हुई थी. हालांकि, अप्रैल में बाजार की स्थिति सुधरने के साथ भंडार में फिर से मजबूती देखने को मिल रही है.
विदेशी मुद्रा आस्तियों (FCA) में उछाल
विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा मानी जाने वाली फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA) में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. समीक्षाधीन सप्ताह में FCA में 3.127 अरब डॉलर की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसके बाद यह बढ़कर 555.983 अरब डॉलर हो गया. इसमें यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं के उतार-चढ़ाव का भी असर शामिल होता है.
सोने के भंडार में भी इजाफा
देश के गोल्ड रिजर्व में भी वृद्धि दर्ज की गई है. बीते सप्ताह इसकी वैल्यू 601 मिलियन डॉलर बढ़कर 121.343 अरब डॉलर हो गई. वर्तमान में भारत के पास 880 टन से अधिक सोना है, जो कुल विदेशी मुद्रा भंडार का करीब 15% हिस्सा है. सोने की कीमतों में बदलाव का सीधा असर कुल भंडार पर पड़ता है.
SDR और IMF रिजर्व में हल्की बढ़त
स्पेशल ड्रॉइंग राइट (SDR) में 56 मिलियन डॉलर की मामूली बढ़ोतरी के साथ यह 18.763 अरब डॉलर पर पहुंच गया है. वहीं, International Monetary Fund के पास रखे भारत के रिजर्व में भी 41 मिलियन डॉलर की वृद्धि हुई है, जो अब 4.857 अरब डॉलर हो गया है.
क्या संकेत देता है यह ट्रेंड
अप्रैल में विदेशी मुद्रा भंडार की तेज रिकवरी यह दर्शाती है कि भारत की बाहरी आर्थिक स्थिति फिर से मजबूत हो रही है. इससे रुपये को स्थिरता मिल सकती है और वैश्विक आर्थिक दबावों से निपटने की क्षमता भी बढ़ती है. कुल मिलाकर, मार्च की गिरावट के बाद अप्रैल में आई यह तेजी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरी खबर है.
2020 में जारी इस SGB सीरीज ने साबित कर दिया है कि सोने में सही समय पर किया गया निवेश लंबी अवधि में बेहद शानदार रिटर्न दे सकता है. 5 साल में 205% का रिटर्न और अतिरिक्त ब्याज इसे एक मजबूत और भरोसेमंद निवेश विकल्प बनाते हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
सोने में निवेश हमेशा से सुरक्षित और भरोसेमंद माना जाता रहा है, लेकिन जब बात सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) की आती है तो यह सिर्फ सुरक्षा ही नहीं बल्कि शानदार रिटर्न का भी उदाहरण बन जाता है. इसका ताजा सबूत RBI द्वारा घोषित 2020-21 सीरीज-VII का रिडेम्पशन है, जिसने निवेशकों को करीब 205% का भारी-भरकम रिटर्न दिया है.
RBI ने तय की ₹15,254 प्रति यूनिट रिडेम्पशन कीमत
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड 2020-21 सीरीज-VII के लिए समय से पहले रिडेम्पशन कीमत ₹15,254 प्रति यूनिट तय की है. यह बॉन्ड 20 अक्टूबर 2020 को जारी हुआ था और निवेशक इसे 20 अप्रैल 2026 से भुना सकते हैं. नियमों के मुताबिक, SGB को जारी होने के 5 साल बाद ब्याज भुगतान की तारीख पर समय से पहले रिडीम करने की सुविधा मिलती है.
कैसे तय होती है SGB की कीमत?
RBI के अनुसार, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की रिडेम्पशन वैल्यू 999 शुद्धता वाले सोने के औसत बाजार भाव पर आधारित होती है. इसके लिए इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा पिछले तीन कार्य दिवसों (15, 16 और 17 अप्रैल 2026) के क्लोजिंग प्राइस का औसत लिया गया, जिसके आधार पर यह कीमत तय की गई.
2020 से 2026 तक: 205% का जबरदस्त रिटर्न
इस सीरीज में 2020 में निवेश की गई कीमत ₹5,001 प्रति ग्राम (ऑनलाइन) थी, जबकि ऑफलाइन कीमत ₹5,051 प्रति ग्राम थी. अब जब रिडेम्पशन कीमत ₹15,254 प्रति यूनिट तय हुई है, तो प्रति यूनिट फायदा करीब ₹10,253 और कुल रिटर्न लगभग 205% (ब्याज को छोड़कर) है. यह प्रदर्शन गोल्ड बॉन्ड को लंबे समय के निवेश के रूप में बेहद आकर्षक बनाता है.
₹1 लाख बना ₹3.05 लाख, ब्याज अलग से
अगर किसी निवेशक ने 2020 में इस सीरीज में ₹1 लाख का निवेश किया होता, तो आज उसकी वैल्यू लगभग ₹3.05 लाख तक पहुंच जाती. इसमें खास बात यह है कि इसमें मिलने वाला 2.5% सालाना ब्याज (जो हर छह महीने में मिलता है) इस रकम से अलग है, जिससे कुल रिटर्न और भी बढ़ जाता है.
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड क्या है?
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) सरकार द्वारा जारी किया जाने वाला एक सुरक्षित निवेश विकल्प है, जो सोने के ग्राम के रूप में होता है. इसमें निवेशक को फिजिकल गोल्ड रखने की जरूरत नहीं होती.
इसके फायदे सोने की कीमतों का सीधा लाभ, सुरक्षित सरकारी निवेश, चोरी या स्टोरेज का कोई जोखिम नहीं है.
ब्याज और मैच्योरिटी का फायदा
SGB में निवेशकों को 2.5% सालाना फिक्स्ड ब्याज मिलता है, जो हर छह महीने में सीधे बैंक खाते में जमा होता है. मैच्योरिटी या समय से पहले रिडेम्पशन पर निवेशक को मूल राशि के साथ अंतिम ब्याज भी दिया जाता है.
इस्लामाबाद के सेरेना होटल में 21 घंटों तक अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वांस और ईरान के संसदीय अध्यक्ष रेड ज़ोन कॉन्फ्रेंस रूम में युद्ध रोकने की कोशिश करते रहे. जब काफिले निकले, तो पाकिस्तानी सरकार होटल का बिल नहीं चुका सकी. लेकिन जिनेवा में पंजीकृत एक निजी संस्था ने आगे आकर भुगतान कर दिया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पलक शाह
सेरेना होटल का बिना भुगतान किया गया बिल सिर्फ पाकिस्तान की शर्मिंदगी नहीं था, यह भारत के लिए एक चेतावनी थी. जिनेवा आधारित एक नेटवर्क पाकिस्तान के सबसे बड़े बैंक का मालिक है, उसकी सरकार को आर्थिक सहारा देता है, परमाणु कूटनीति की मेजबानी करता है और 41 वर्षों से ग्रामीण भारत में गहरी पैठ के बाद एक भारतीय अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक में प्रमोटर का दर्जा और बोर्ड तक पहुंच रखता है.
इस्लामाबाद के सेरेना होटल में 21 घंटों तक अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वांस और ईरान के संसदीय अध्यक्ष रेड जोन कॉन्फ्रेंस रूम में युद्ध रोकने की कोशिश करते रहे. जब काफिले निकले, तो पाकिस्तानी सरकार होटल का बिल नहीं चुका सकी. लेकिन जिनेवा में पंजीकृत एक निजी संस्था ने आगे आकर भुगतान कर दिया.
यह केवल “चैरिटी” नहीं था, बल्कि एक “गुडविल जेस्चर” जैसा था. 24 करोड़ आबादी वाला परमाणु संपन्न देश, जिसकी दुनिया की छठी सबसे बड़ी सेना है, उसे अपने ही देश में हुए सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक आयोजन के लिए एक होटल मालिक से सहायता लेनी पड़ी.
वह मालिक था आगा खान डेवलपमेंट नेटवर्क.
पाकिस्तान में समानांतर प्रभाव और नियंत्रण
यह वही नेटवर्क है जो अब पाकिस्तान में सह-शासक जैसी भूमिका निभा रहा है. यह न केवल पाकिस्तान के वित्तीय ढांचे में गहराई तक मौजूद है, बल्कि भारत के वित्तीय सिस्टम और ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसकी मजबूत मौजूदगी है. यह कहानी केवल परोपकार की नहीं है, बल्कि शक्ति और नियंत्रण की है.
पाकिस्तान पर वास्तविक नियंत्रण
AKFED (आगा खान फंड फॉर इकोनॉमिक डेवलपमेंट) पाकिस्तान के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक हबीब बैंक लिमिटेड में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है. यह बैंक 1,700 शाखाओं और 3.7 करोड़ ग्राहकों के साथ पाकिस्तान की वित्तीय रीढ़ है.
यह सेरेना होटल चेन का मालिक है, जो परमाणु दौर की कूटनीति के लिए सुरक्षित मानी जाती है. यह देश के सबसे संवेदनशील उत्तरी क्षेत्रों में अस्पताल, स्कूल और टेलीकॉम सेवाएं भी चलाता है.
जब पाकिस्तान को किसी बड़े आयोजन की जरूरत होती है, तो उसे AKFED पर निर्भर रहना पड़ता है. और जब वह भुगतान नहीं कर पाता, तो AKFED भुगतान करता है. यह व्यापार नहीं बल्कि गहरी संरक्षक व्यवस्था है. इसका केंद्र जिनेवा में है.
आगा खान तृतीय, जिन्होंने इस संस्था की नींव रखी, पाकिस्तान आंदोलन और मोहम्मद अली जिन्ना की ऑल इंडिया मुस्लिम लीग के प्रमुख समर्थकों में से थे. उनकी वंश परंपरा अब आगा खान नेटवर्क का संचालन करती है.
स्विट्जरलैंड का पुराना उदाहरण, भारत पर प्रभाव
दिसंबर 1999. कंधार एयरपोर्ट का रनवे.
पाकिस्तान आधारित आतंकियों ने IC-814 विमान का अपहरण किया. अपहरणकर्ताओं को यह नहीं पता था कि एक यात्री रॉबर्टो जियोरी थे, स्विस-इटैलियन उद्योगपति, जिनकी कंपनी दुनिया के लगभग 90 प्रतिशत बैंक नोट छापती थी.
इसके बाद स्विस सरकार सक्रिय हो गई. एक विशेष संकट सेल सीधे फेडरल काउंसिल को रिपोर्ट करने लगा.
तत्कालीन विदेश मंत्री जोसेफ डीस ने जसवंत सिंह को फोन कर कहा: “जियोरी को सुरक्षित करने के लिए हर संभव प्रयास किया जाए.” स्विट्जरलैंड ने अपने राजदूत को तालिबान क्षेत्र में भेजा, जो एक तटस्थ देश के लिए असाधारण कदम था. अमेरिका ने भी “आर्थिक स्थिरता” का हवाला देकर दबाव का समर्थन किया.
भारत ने तीन आतंकियों को रिहा कर दिया, जिनमें मसूद अजहर भी शामिल था. बाद में उसने जैश-ए-मोहम्मद की स्थापना की.
भारत में गहरी मौजूदगी
1977 से AKFED भारत के वित्तीय ढांचे में मौजूद है. यह HDFC लिमिटेड के सह-संस्थापकों में शामिल था, जो आज भारत के सबसे बड़े निजी बैंक का आधार है.
वर्तमान में AKFED और इसकी सहयोगी संस्था प्लैटिनम जुबली इन्वेस्टमेंट्स DCB बैंक के आधिकारिक प्रमोटर हैं, जो एक RBI-मान्यता प्राप्त वाणिज्यिक बैंक है, जिसमें 469 शाखाएं और 25 लाख ग्राहक हैं.
गुजरात में आगा खान रूरल सपोर्ट प्रोग्राम 41 वर्षों से 3,500 से अधिक गांवों में काम कर रहा है, जिससे लगभग 40 लाख लोगों के जीवन से जुड़ा डेटा एकत्र किया गया है.
गंभीर नियामकीय सवाल
2017 में न्यूयॉर्क के नियामकों ने AKFED के नियंत्रण वाले हबीब बैंक पर 225 मिलियन डॉलर का जुर्माना लगाया था. आरोपों में आतंक वित्तपोषण और मनी लॉन्ड्रिंग शामिल थे. इसके बावजूद भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा इसे DCB बैंक के “फिट एंड प्रॉपर” प्रमोटर के रूप में बनाए रखने और 2025 में हिस्सेदारी बढ़ाने की अनुमति देने पर सवाल उठते हैं.
प्रधानमंत्री कार्यालय के सामने उठने वाले सवाल
1. क्या 2017 के अमेरिकी आदेश के बाद RBI ने AKFED की दोबारा पूर्ण जांच की?
2. क्या इसके वास्तविक मालिक और फंडिंग स्रोतों की जांच हुई?
3. क्या इसके ग्रामीण भारत में 41 वर्षों से एकत्र डेटा की निगरानी किसी एजेंसी ने की?
4. क्या पाकिस्तान और भारत के बीच डेटा सुरक्षा के लिए कोई फायरवॉल मौजूद है?
5. क्या एक ऐसे नेटवर्क को भारतीय बैंक में प्रमोटर बने रहने दिया जाना चाहिए जो पड़ोसी देश में सह-शासक जैसी भूमिका निभाता है?
भारत ने वर्षों से विदेशी संरचनाओं पर सख्त निगरानी व्यवस्था बनाई है. यह उसी प्रणाली को लागू करने का समय है.
सेरेना होटल का बिना भुगतान किया गया बिल पाकिस्तान की शर्मिंदगी नहीं, भारत के लिए चेतावनी संकेत है.
जो नेटवर्क चुपचाप पाकिस्तान की व्यवस्था में गहराई से जुड़ा है, वह लगभग 50 वर्षों से भारत में भी मौजूद है. अब सवाल यह नहीं है कि किसी ने इसे देखा या नहीं, सवाल यह है कि क्या शीर्ष स्तर पर अब इस पर कार्रवाई होगी.
सभी तथ्य सार्वजनिक रिकॉर्ड, RBI फाइलिंग, अमेरिकी नियामकीय आदेश, AKDN के बयानों और अप्रैल 2026 की रिपोर्टिंग पर आधारित हैं. यह किसी व्यक्ति पर आरोप नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर प्रश्न हैं.
AKFED, DCB बैंक और संबंधित सभी संस्थानों से प्रतिक्रिया अपेक्षित है.
पलक शाह, BW रिपोर्टर्स
(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free के लेखक हैं. लगभग दो दशकों के अनुभव के साथ, उन्होंने मुंबई में जमीनी रिपोर्टिंग करते हुए पैसे, ताकत और नियमों के गठजोड़ को उजागर किया है. उनके लेख The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line जैसे प्रमुख प्रकाशनों में प्रकाशित हुए हैं. 19 साल की उम्र में अपराध पत्रकारिता से शुरुआत करने वाले पलक ने जल्द ही समझ लिया कि 1980 के दशक के गैंगवार अब कॉरपोरेट अपराध में बदल चुके हैं. इसी ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने बाजार हेरफेर और सिस्टम की खामियों को उजागर किया.)