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मार्च 2025 तक पूरा हो जाएगा Fincare का अधिग्रहण : CEO एयू स्मॉल बैंक
एयू के सीईओ संजय अग्रवाल ने कहा कि देश में किसी भी तरह का विलय करना इतना आसान नहीं है. अभी इस विलय को लेकर कुछ अनुमति आनी है वो मुझे लगता है कि मार्च तक पूरी हो जाएंगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
टियर 2, टियर 3 शहरों में तेजी से विस्तार कर रहा एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक (AU Small Finance Bank) दक्षिण भारत की माइक्रो फाइनेंस यूनिट फिनकेयर बैंक का अधिग्रहण करने जा रहा है. इस अधिग्रहरण को लेकर गुरुवार को एयू स्मॉल बैंक के सीईओ संजय अग्रवाल ने कहा कि हमें लगता है कि ये अधिग्रहण मार्च 2025 तक पूरा हो जाएगा. उन्होंने ये बात गुरुवार को एयू स्मॉल बैंक और Ixigo के ज्वॉइंट वेंचर में आए क्रेडिट कार्ड के लॉन्च के मौके पर कही.
अधिग्रहण को लेकर क्या बोले एयू सीईओ?
AU Small Finance bank के सीईओ संजय अग्रवाल ने आज इस मर्जर को लेकर अपनी बात कहते हुए कहा कि इसके लिए शेयर होल्डर की अनुमति से लेकर रेग्यूलेटर और कई संस्थाओं का अप्रूवल लेना होता है. उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि मार्च 2025 तक ये सभी अनुमति हमें मिल जाएंगी. उन्होंने कहा कि एक ओर जहां हमारा कस्टमर बेस नार्थ इंडिया में है वहीं दूसरी ओर फिनकेयर दक्षिण का एक प्रमुख बैंक है. उन्होंने कहा कि अधिग्रहण करना इतना आसान काम नहीं है. सभी तरह का अप्रूवल लेना भी अपने आप में एक बड़ा काम होता है.
इतना है बैंक का मार्केट कैप
AU स्मॉल फाइनेंस बैंक का मार्केट कैप अभी 46,000 करोड़ रुपए है और विलय के बाद अस्तित्व में आई कंपनी का मार्केट कैप 50,000 करोड़ रुपए से अधिक हो जाएगा. इस डील में फिनकेयर का मूल्य लगभग 4,416 करोड़ रुपए आंका गया है. विलय की शर्तों के अनुसार, फिनकेयर SSB का प्रमोटर फिनकेयर बिजनेस सर्विसेज लिमिटेड (FBSL), मर्जर पूरा होने से पहले फिनकेयर एसएफबी में 700 करोड़ का निवेश करेगा. AU स्मॉल फाइनेंस बैंक की बात करें, तो संजय अग्रवाल ने इसकी स्थापना 2017 में की थी. इस बैंक का मुख्यालय जयपुर में है और देशभर में इसकी 1000 शाखाएं हैं. अभी तक बैंक से करीब 30 लाख कस्टमर जुड़ चुके हैं और इसके कर्मचारियों की संख्या पिछले साल तक 30 हजार थी.
कर्मचारियों के एट्रीशन रेट पर क्या बोले सीईओ?
एयू स्मॉल बैंक के सीईओ संजय अग्रवाल ने कर्मचारियों के एट्रीशन को लेकर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाला पीएसयू में चला जाता है कई बार पीएसयू में काम करने वाला प्राइवेट में आ जाता है. ये एक तरह की ऐसी स्थिति है कि कोई किसी को रोक नहीं सकता. कई लोग ऐसे होते हैं जो प्राइवेट सेक्टर में ही काम करना चाहते हैं जबकि कई लोग ऐसे होते हैं जो पीएसयू से प्राइवेट में नहीं आना चाहते हैं. इसलिए ये कर्मचारी ही तय करता है.
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