सिल्वेस्टर ने कई विज्ञापन डिजाइन किए थे, लेकिन सही मायनों में उन्हें पहचान Amul Girl के जरिए ही मिली.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
अमूल गर्ल और उसके चुलबुलेपन से तो आप जरूर वाकिफ होंगे. बड़ी-बड़ी आंखें, सफेद-लाल रंग की डॉटेड फ्रॉक वाली अमूल गर्ल (Amul Girl), अमूल कंपनी की पहचान बन गई है. इस 'गर्ल' को ज्यादातर सबने हंसते-हंसाते ही देखा है, लेकिन आज इसकी आंखों में आंसू है. वजह ही कुछ ऐसी है कि उसकी आंखें दर्द से भर आई हैं. दरअसल, अमूल गर्ल को इस दुनिया में लाने वाले यानी उसके क्रिएटर सिल्वेस्टर दाकुन्हा (Sylvester daCunha) का निधन हो गया है. अमूल के पूर्व MD आरएस सोढ़ी ने अमूल गर्ल की एक फोटो सोशल मीडिया शेयर की है, जिसमें उसे रोते दिखाया गया है.
कल्पना से दिया था जन्म
सिल्वेस्टर दाकुन्हा 1966 में अमूल गर्ल को इस दुनिया में लेकर आए थे. उन्हें 'फादर ऑफ अमूल गर्ल' कहा जाता है. सिल्वेस्टर ने अपना कल्पना से अमूल गर्ल जन्म दिया था. उनका ये कैंपेन देखते ही देखते इतना फेमस हो गया कि ये 'गर्ल' ही कंपनी की पहचान बन गई है. मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि एड गुरु सिल्वेस्टर दाकुन्हा का 80 साल की उम्र में निधन हो गया है. उनके दुनिया को अलविदा कहने के दुख को अमूल गर्ल रोते हुए दर्शा रही है.
— R S Sodhi (@Rssamul) June 21, 2023
इस कैंपेन से मिली पहचान
विज्ञापन की दुनिया में सिल्वेस्टर दाकुन्हा एक बहुत बड़ा नाम थे. उन्होंने अमूल की Utterly Butterly गर्ल को डिजाइन किया था, जिसे काफी सराहा गया. आज ये लड़की Amul की पहचान बन गई है. सिल्वेस्टर दाकुन्हा के परिवार में उनकी पत्नी निशा और बेटे राहुल दाकुन्हा हैं. वैसे, तो सिल्वेस्टर ने कई विज्ञापन डिजाइन किए, लेकिन सही मायनों में उन्हें पहचान Amul Girl के जरिए ही मिली. उनके द्वारा दी गई टैगलाइन 'अटरली बटरली डिलीशियस' भी काफी लोकप्रिय हुई है. एक रिपोर्ट में बताया गया है कि अमूल गर्ल अभियान की शुरुआत के 3 साल बाद सिल्वेस्टर दाकुन्हा ने अपने भाई के साथ मिलकर 1969 में दाकुल्हा कम्युनिकेशंस की स्थापना की थी. इसी के जरिए वो अमूल गर्ल के क्रिएटिव कार्टून तैयार करते थे.
बेटा संभाल रहा कारोबार
सिल्वेस्टर दाकुन्हा ने अपना कारोबार अपने बेटे राहुल को सौंप दिया था और वो ही अमूल के इस कैंपेन को जारी रखे हुए हैं. बता दें कि अमूल का ये कार्टून अब सिर्फ ब्रैंड तक सीमित नहीं है, बल्कि अक्सर इसे सियासी तंज कसने या समसामयिक घटनाओं पर अलग सोच दर्शाते हुए भी देखा जा सकता है. सिल्वेस्टर अब भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन वो अमूल गर्ल के रूप में हमेशा के लिए अमर हो गए हैं. जब भी अमूल गर्ल का जिक्र होगा, सिल्वेस्टर दाकुन्हा हमेशा याद आएंगे.
अप्रैल-जून तिमाही के दौरान बैंक की कुल आय में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई. रिटेल, कृषि और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्रों में कर्ज की मजबूत मांग से बैंक की आय को सहारा मिला.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
सार्वजनिक क्षेत्र के यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (Union Bank of India) ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) की पहली तिमाही में शानदार वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है. अप्रैल-जून तिमाही में बैंक का स्टैंडअलोन शुद्ध लाभ (Net Profit) सालाना आधार पर 30% बढ़कर 5,332.3 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 4,116 करोड़ रुपये था. बैंक के बेहतर नतीजों की प्रमुख वजह मजबूत कर्ज वृद्धि (Credit Growth), परिसंपत्ति गुणवत्ता (Asset Quality) में सुधार और प्रावधान (Provisioning) पर कम खर्च रही.
कुल आय में भी हुई बढ़ोतरी
अप्रैल-जून तिमाही के दौरान बैंक की कुल आय (Total Income) में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई. रिटेल, कृषि और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्रों में कर्ज की मजबूत मांग से बैंक की आय को सहारा मिला. हालांकि, बदलते ब्याज दरों के माहौल के कारण नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) पर दबाव बना रहा.
एसेट क्वालिटी में लगातार सुधार
तिमाही के दौरान यूनियन बैंक की परिसंपत्ति गुणवत्ता में भी सुधार जारी रहा. बैंक का सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (GNPA) अनुपात पिछले वर्ष की तुलना में और घटा है. वहीं, नेट एनपीए (NNPA) में भी सुधार देखने को मिला. साथ ही, प्रावधान कवरेज अनुपात (Provision Coverage Ratio) मजबूत बना रहा, जिससे संभावित डिफॉल्ट से निपटने की बैंक की क्षमता और मजबूत हुई है.
रिटेल और MSME से मिला ग्रोथ का सहारा
बैंक की कुल अग्रिम (Advances) में अच्छी वृद्धि दर्ज की गई. खासकर रिटेल, कृषि और प्राथमिकता क्षेत्र (Priority Sector) में कर्ज वितरण ने क्रेडिट ग्रोथ को मजबूती दी. कम प्रावधान और मजबूत बैलेंस शीट ने बैंक की तिमाही लाभप्रदता को और बेहतर बनाया.
मार्जिन पर दबाव, लेकिन भविष्य को लेकर उम्मीद
यूनियन बैंक परिचालन दक्षता (Operational Efficiency) बढ़ाने के साथ जोखिम प्रबंधन और कर्ज वितरण में अनुशासित रणनीति पर लगातार काम कर रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर एसेट क्वालिटी और स्थिर कर्ज वृद्धि के दम पर बैंक की आय आगे भी मजबूत रह सकती है, हालांकि ब्याज दरों में बदलाव के चलते नेट इंटरेस्ट मार्जिन पर दबाव बना रह सकता है.
निवेशकों की नजर इन संकेतकों पर
विश्लेषकों के अनुसार, अब निवेशकों की नजर बैंक प्रबंधन की जमा जुटाने (Deposit Mobilisation), कर्ज मांग (Credit Demand) और मार्जिन के भविष्य को लेकर दी जाने वाली टिप्पणी पर रहेगी. इसके अलावा, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति और ब्याज दरों से जुड़े फैसले भी पूरे वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान बैंक की लाभप्रदता पर अहम असर डाल सकते हैं.
सरकारी बैंकों की स्थिति लगातार मजबूत
यूनियन बैंक के बेहतर तिमाही नतीजे ऐसे समय आए हैं, जब देश के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की वित्तीय स्थिति लगातार मजबूत हो रही है. घटते एनपीए, कम क्रेडिट लागत और मजबूत बैलेंस शीट के कारण सरकारी बैंकों की कमाई में लगातार सुधार देखने को मिल रहा है.
पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी 17 जुलाई को पंजाब के चार आधुनिक रेलवे स्टेशनों का उद्घाटन करेंगे.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को देश के रेलवे और बुनियादी ढांचे से जुड़ी कई बड़ी परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे. अमृत भारत स्टेशन योजना (Amrit Bharat Station Scheme) के तहत पंजाब के चार पुनर्विकसित रेलवे स्टेशनों को राष्ट्र को समर्पित करने के साथ ही वह भारत की पहली हाइड्रोजन ईंधन आधारित ट्रेन को भी हरी झंडी दिखाएंगे. इसके अलावा हरियाणा और राजस्थान में भी कई रेलवे परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया जाएगा.
पंजाब के चार रेलवे स्टेशनों का होगा उद्घाटन
पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी 17 जुलाई को पंजाब के चार आधुनिक रेलवे स्टेशनों का उद्घाटन करेंगे. इनमें जालंधर कैंट रेलवे स्टेशन का उद्घाटन प्रधानमंत्री स्वयं करेंगे, जबकि एसएएस नगर (मोहाली), श्री मुक्तसर साहिब और श्री आनंदपुर साहिब रेलवे स्टेशनों का उद्घाटन दोपहर करीब 3 बजे वर्चुअल माध्यम से किया जाएगा.
125 करोड़ रुपये की लागत से बदला जालंधर कैंट स्टेशन का स्वरूप
करीब 110 वर्ष पुराने जालंधर कैंट रेलवे स्टेशन का लगभग 125 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिकीकरण किया गया है. स्टेशन पर डबल-हाइट एयर कॉन्कोर्स, भारी स्टील प्लेटफॉर्म रूफिंग, फिसलन-रोधी फ्लोरिंग और ऊर्जा दक्ष एलईडी लाइटिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं. हाल ही में रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष सतीश कुमार ने स्टेशन पर चल रहे अंतिम चरण के कार्यों की समीक्षा भी की थी.
यात्रियों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत विकसित इन स्टेशनों पर यात्रियों के लिए बेहतर प्रतीक्षालय, आधुनिक कॉन्कोर्स, उन्नत प्लेटफॉर्म, लिफ्ट, एस्केलेटर और दिव्यांगजन-अनुकूल सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं. साथ ही स्टेशनों के पुनर्विकास में उनकी स्थानीय स्थापत्य शैली और सांस्कृतिक पहचान को भी बरकरार रखा गया है. इसी दिन राजस्थान के कोटा मंडल स्थित गंगापुर सिटी रेलवे स्टेशन का भी अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत उद्घाटन किया जाएगा.
भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को मिलेगी हरी झंडी
प्रधानमंत्री मोदी हरियाणा के जींद से भारत की पहली हाइड्रोजन ईंधन आधारित ट्रेन को भी हरी झंडी दिखाएंगे. यह ट्रेन जींद और सोनीपत के बीच संचालित होगी. इसके अलावा जींद रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास का उद्घाटन, कुरुक्षेत्र में एलिवेटेड रेलवे ट्रैक और पुनर्निर्मित रेलवे स्टेशन का लोकार्पण भी किया जाएगा. साथ ही कुरुक्षेत्र में प्रस्तावित सिख संग्रहालय की आधारशिला भी रखी जाएगी.
पंजाब में बीजेपी के नए चुनावी अभियान की शुरुआत
जालंधर दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी रेलवे स्टेशन परिसर में आयोजित एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे, जिसमें करीब 5,000 भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों के शामिल होने की संभावना है. पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा द्वारा अकेले चुनाव लड़ने के फैसले के बाद यह प्रधानमंत्री मोदी का पहला पंजाब दौरा होगा. इसे राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है.
बुधवार के कारोबार के दौरान एथर एनर्जी का शेयर 9 फीसदी तक चढ़कर 1,290.10 रुपये के इंट्राडे हाई पर पहुंच गया, जो कंपनी की लिस्टिंग के बाद का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
हीरो मोटोकॉर्प ने इलेक्ट्रिक स्कूटर निर्माता एथर एनर्जी में 1,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश को मंजूरी दे दी है. इस घोषणा के बाद बुधवार को एथर एनर्जी के शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली और कंपनी का शेयर 9 फीसदी तक उछलकर अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया. निवेशकों का मानना है कि यह निवेश एथर के भविष्य के विस्तार और भारत के तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बाजार में उसकी स्थिति को और मजबूत करेगा.
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा शेयर
बुधवार के कारोबार के दौरान एथर एनर्जी का शेयर 9 फीसदी तक चढ़कर 1,290.10 रुपये के इंट्राडे हाई पर पहुंच गया, जो कंपनी की लिस्टिंग के बाद का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है. हालांकि बाद में इसमें कुछ मुनाफावसूली भी देखने को मिली और शेयर बीएसई पर 7.90 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,298,00 रुपये पर बंद हुआ. यह तेजी हीरो मोटोकॉर्प के बोर्ड द्वारा एथर एनर्जी में 1,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश को मंजूरी दिए जाने के बाद आई.
प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट के जरिए होगा निवेश
हीरो मोटोकॉर्प का यह निवेश पूरी तरह नकद (कैश) में किया जाएगा. कंपनी यह निवेश प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट के जरिए करेगी, जिसके तहत इक्विटी शेयरों के साथ-साथ अन्य पात्र सिक्योरिटीज जैसे कंपल्सरिली कन्वर्टिबल प्रेफरेंस शेयर (CCPS) और वारंट जारी किए जा सकते हैं. हालांकि यह निवेश आवश्यक कॉर्पोरेट और नियामकीय मंजूरियों के अधीन रहेगा.
हीरो मोटोकॉर्प की कितनी हिस्सेदारी?
30 जून 2026 तक उपलब्ध एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, हीरो मोटोकॉर्प के पास एथर एनर्जी की पूर्ण रूप से डायल्यूटेड पेड-अप शेयर पूंजी में 29.48 फीसदी हिस्सेदारी थी. प्रस्तावित निवेश के बाद कंपनी की अंतिम हिस्सेदारी प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट की कीमत और संरचना पर निर्भर करेगी.
विस्तार की रणनीति को मिलेगा बल
नया निवेश ऐसे समय में आया है जब एथर एनर्जी भारत के इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता, रिटेल नेटवर्क और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार कर रही है. बेंगलुरु स्थित एथर एनर्जी ने 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष में 3,671.76 करोड़ रुपये का कारोबार दर्ज किया था.
2016 से एथर के साथ है हीरो मोटोकॉर्प
भारत की सबसे बड़ी मोटरसाइकिल निर्माता कंपनी हीरो मोटोकॉर्प वर्ष 2016 से एथर एनर्जी में निवेशक है. कंपनी समय-समय पर अपनी हिस्सेदारी बढ़ाती रही है, ताकि देश के तेजी से विकसित हो रहे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी बाजार में अपनी मौजूदगी को मजबूत किया जा सके.
निवेशकों का भरोसा और मजबूत
विश्लेषकों का मानना है कि 1,000 करोड़ रुपये की नई पूंजी एथर एनर्जी के अगले चरण के विस्तार में अहम भूमिका निभाएगी. साथ ही, यह निवेश हीरो मोटोकॉर्प के एथर के बिजनेस मॉडल और दीर्घकालिक विकास पर मजबूत भरोसे को भी दर्शाता है. यही वजह है कि इस घोषणा के बाद एथर के शेयरों में खरीदारी का जोर देखने को मिला और कंपनी के शेयर रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए.
अमेरिकी सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल के अनुसार, प्रस्तावित टैरिफ केवल रूस से ऊर्जा खरीदने वाले पांच सबसे बड़े देशों पर लागू होगा. इनमें चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
रूस से कच्चा तेल आयात करने वाले देशों के लिए अमेरिका ने अपने प्रतिबंध प्रस्ताव में बड़ी नरमी दिखाई है. अमेरिकी सीनेट में पेश Sanctioning Russia Act 2025 के संशोधित मसौदे में भारत समेत पांच प्रमुख खरीदार देशों पर प्रस्तावित टैरिफ 500% से घटाकर अधिकतम 100% करने का प्रस्ताव रखा गया है. इसके साथ ही, कुछ देशों को विशेष परिस्थितियों में छूट देने का प्रावधान भी जोड़ा गया है.
संशोधित बिल में क्या बदला?
अमेरिकी सीनेट में रूस पर नए प्रतिबंधों से जुड़े संशोधित विधेयक में सबसे बड़ा बदलाव प्रस्तावित टैरिफ की दर और उसके दायरे में किया गया है. पहले रूस से तेल, प्राकृतिक गैस और अन्य ऊर्जा उत्पाद खरीदने वाले सभी देशों पर 500% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था. अब इसे घटाकर अधिकतम 100% कर दिया गया है और यह केवल रूस से तेल एवं गैस खरीदने वाले पांच सबसे बड़े देशों पर लागू होगा. भारत भी इस सूची में शामिल है.
किन देशों पर लागू होगा नया टैरिफ?
अमेरिकी सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल के अनुसार, प्रस्तावित टैरिफ केवल रूस से ऊर्जा खरीदने वाले पांच सबसे बड़े देशों पर लागू होगा. इनमें चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं. उन्होंने कहा कि विशेष परिस्थितियों में टैरिफ से छूट देने का प्रावधान भी रखा गया है, हालांकि इसका दायरा सीमित होगा.
किन देशों को मिल सकती है राहत?
संशोधित बिल में उन देशों के लिए राहत का भी प्रावधान है, जो रूस के प्राकृतिक गैस निर्यात का 15% से कम आयात करते हैं और रूस पर अपनी ऊर्जा निर्भरता कम करने के लिए ठोस कदम उठा रहे हैं. इस व्यवस्था का लाभ जापान, फ्रांस, बेल्जियम और हंगरी जैसे देशों को मिल सकता है.
रूस पर और कड़े होंगे प्रतिबंध
टैरिफ के अलावा, विधेयक में रूस की अर्थव्यवस्था के कई प्रमुख क्षेत्रों पर नए प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव भी शामिल है. इनमें ऊर्जा, रक्षा, वित्तीय और औद्योगिक क्षेत्र शामिल हैं. इसके अलावा रूस के 'शैडो फ्लीट', केंद्रीय बैंक और यामल LNG व आर्कटिक LNG जैसी प्रमुख ऊर्जा परियोजनाओं को भी प्रतिबंधों के दायरे में लाने का प्रस्ताव है. हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति को राष्ट्रीय हितों के आधार पर इन प्रतिबंधों में छूट देने का अधिकार भी दिया गया है.
पहले क्या था प्रस्ताव?
अप्रैल 2025 में पेश Sanctioning Russia Act 2025 के मूल मसौदे में रूस से तेल, गैस, यूरेनियम या अन्य पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने वाले देशों से आने वाले आयात पर 500% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था. यदि यह प्रस्ताव लागू होता, तो भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों पर इसका सबसे अधिक असर पड़ता, क्योंकि पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद इन देशों ने रियायती दरों पर रूसी कच्चे तेल का आयात जारी रखा है.
भारत के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है और पिछले कुछ वर्षों में रूस उसके प्रमुख कच्चे तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल रहा है. ऐसे में प्रस्तावित टैरिफ को 500% से घटाकर 100% करना भारत के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है. हालांकि, यह अभी केवल संशोधित विधेयक का प्रस्ताव है और इसके कानून बनने की प्रक्रिया अभी बाकी है.
साझेदारी के तहत सबसे पहले बेंगलुरु में ऑन-डिमांड LPG सिलेंडर डिलीवरी सेवा शुरू की गई है. ग्राहक इंस्टामार्ट ऐप के जरिए HP Navya 10 किलोग्राम कम्पोजिट LPG सिलेंडर और मौजूदा 5 किलोग्राम मेटल LPG सिलेंडर ऑर्डर कर सकेंगे.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अब रसोई गैस खत्म होने पर घंटों इंतजार करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म इंस्टामार्ट (Instamart) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने मिलकर देश की पहली ऑन-डिमांड LPG सिलेंडर डिलीवरी सेवा शुरू की है. इस सुविधा के तहत ग्राहक इंस्टामार्ट ऐप से HP Navya कम्पोजिट LPG सिलेंडर मिनटों में मंगा सकेंगे. खास बात यह है कि इसके लिए पहले से घरेलू LPG कनेक्शन होना भी जरूरी नहीं होगा.
बेंगलुरु से शुरू हुई नई सुविधा
इंस्टामार्ट और हिंदुस्तान पेट्रोलियम की इस साझेदारी के तहत सबसे पहले बेंगलुरु में ऑन-डिमांड LPG सिलेंडर डिलीवरी सेवा शुरू की गई है. ग्राहक इंस्टामार्ट ऐप के जरिए HP Navya 10 किलोग्राम कम्पोजिट LPG सिलेंडर और मौजूदा 5 किलोग्राम मेटल LPG सिलेंडर ऑर्डर कर सकेंगे. हालांकि, फिलहाल कंपनियों ने यह नहीं बताया है कि इस सेवा का विस्तार देश के अन्य शहरों में कब तक किया जाएगा.
बिना LPG कनेक्शन के भी कर सकेंगे ऑर्डर
इस सेवा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सिलेंडर मंगाने के लिए ग्राहकों के पास पहले से घरेलू LPG कनेक्शन होना जरूरी नहीं है. इससे छात्र, किराए पर रहने वाले प्रोफेशनल्स, छोटे परिवार और ऐसे उपभोक्ता भी इसका लाभ उठा सकेंगे, जिनके पास पारंपरिक गैस कनेक्शन नहीं है.
पहली बार ऑर्डर करने पर इसे नए सिलेंडर की खरीद माना जाएगा, जिसके लिए पहचान सत्यापन और डिलीवरी से जुड़े जरूरी दस्तावेज पूरे करने होंगे. इसके बाद अगली बुकिंग रिफिल के रूप में होगी और डिलीवरी के समय खाली सिलेंडर वापस लिया जाएगा.
क्या है HP Navya सिलेंडर की खासियत?
हिंदुस्तान पेट्रोलियम का नया HP Navya 10 किलोग्राम कम्पोजिट LPG सिलेंडर पारंपरिक स्टील सिलेंडर की तुलना में हल्का और जंग-रोधी है. इसकी पारदर्शी बॉडी के कारण उपभोक्ता आसानी से देख सकते हैं कि सिलेंडर में कितनी गैस बची है. कॉम्पैक्ट डिजाइन होने की वजह से यह अपार्टमेंट, छोटे परिवारों और सेकेंडरी गैस सिलेंडर की जरूरत वाले घरों के लिए बेहतर विकल्प माना जा रहा है.
सुरक्षित तरीके से होगी डिलीवरी
इंस्टामार्ट पर किए गए सभी ऑर्डर हिंदुस्तान पेट्रोलियम के अधिकृत डिस्ट्रीब्यूटर नेटवर्क के जरिए पूरे किए जाएंगे. डिलीवरी प्रशिक्षित कर्मचारियों द्वारा सुरक्षा और नियामकीय मानकों का पालन करते हुए की जाएगी.
इंस्टामार्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) अमितेश झा ने कहा कि कंपनी अब केवल ग्रोसरी डिलीवरी तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि ग्राहकों की रोजमर्रा की जरूरतों को भी तेज और आसान बनाना चाहती है. हिंदुस्तान पेट्रोलियम के साथ यह साझेदारी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. वहीं, हिंदुस्तान पेट्रोलियम के मार्केटिंग निदेशक अमित गर्ग ने कहा कि कंपनी का उद्देश्य LPG को अधिक सुलभ, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाना है. इंस्टामार्ट जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ साझेदारी से ग्राहकों तक तेज़ी से पहुंच बनाने और उनके अनुभव को बेहतर करने में मदद मिलेगी.
सरकार ने यह फैसला ऐसे समय लिया है, जब अमेरिका भारत सहित करीब 60 देशों की सप्लाई चेन की जांच कर रहा है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत सरकार ने विदेश व्यापार नीति (Foreign Trade Policy) में बड़ा बदलाव करते हुए जबरन मजदूरी (Forced Labour) से बने विदेशी उत्पादों के आयात पर रोक लगाने का रास्ता साफ कर दिया है. नए प्रावधानों के तहत यदि किसी उत्पाद के निर्माण में बंधुआ या जबरन मजदूरी का इस्तेमाल पाया जाता है, तो उसके भारत में आयात पर प्रतिबंध लगाया जा सकेगा. माना जा रहा है कि यह कदम वैश्विक सप्लाई चेन में पारदर्शिता बढ़ाने और अमेरिका समेत अन्य देशों की सख्त व्यापार नीतियों के अनुरूप उठाया गया है.
अमेरिका की सख्ती के बीच भारत का बड़ा कदम
सरकार ने यह फैसला ऐसे समय लिया है, जब अमेरिका भारत सहित करीब 60 देशों की सप्लाई चेन की जांच कर रहा है. अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) का आरोप है कि कई देश जबरन मजदूरी से बने उत्पादों के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रहे हैं. इसी पृष्ठभूमि में भारत ने अपनी विदेश व्यापार नीति में संशोधन कर स्पष्ट कर दिया है कि ऐसे उत्पादों के आयात को कानूनी तौर पर रोका जा सकेगा.
क्या है नया नियम?
डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, यदि किसी विदेशी उत्पाद के निर्माण में पूरी तरह या आंशिक रूप से जबरन मजदूरी का इस्तेमाल साबित होता है, तो उसके आयात पर प्रतिबंध लगाया जा सकेगा. इसके लिए विदेश व्यापार नीति के अध्याय-11 में 'जबरन मजदूरी' की परिभाषा भी जोड़ी गई है, जो अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के 1930 के कन्वेंशन नंबर-29 पर आधारित है. इसके अनुसार, किसी व्यक्ति से उसकी इच्छा के विरुद्ध सजा, धमकी या दबाव के तहत काम कराना जबरन मजदूरी माना जाएगा.
क्या तुरंत बंद हो जाएगा आयात?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि सभी विदेशी उत्पादों का आयात तुरंत रुक जाएगा. 13 जुलाई को जारी अधिसूचना के अनुसार, नए नियम 30 दिन बाद प्रभावी होंगे. फिलहाल सरकार ने केवल कानूनी ढांचा तैयार किया है. भविष्य में यदि DGFT की जांच में किसी उत्पाद के निर्माण में जबरन मजदूरी का इस्तेमाल साबित होता है, तभी उसके आयात पर रोक लगाई जाएगी. जांच की विस्तृत प्रक्रिया 'हैंडबुक ऑफ प्रोसीजर्स-2023' में निर्धारित की जाएगी.
अमेरिका के टैरिफ दबाव का भी असर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव के पीछे अमेरिका का बढ़ता व्यापारिक दबाव भी एक अहम कारण है. अमेरिका ने जून में भारत सहित 54 देशों से आयात होने वाले उत्पादों पर अतिरिक्त 12.5 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा था. वहीं, जिन देशों ने पहले से ऐसे आयात पर रोक लगाने के कानून बनाए हैं, उन्हें अपेक्षाकृत राहत देने की बात कही गई थी. भारत का यह कदम अमेरिका के साथ प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की बातचीत को भी मजबूती दे सकता है.
चीन की सप्लाई चेन पर पड़ सकता है असर
ट्रेड विशेषज्ञों का मानना है कि नए नियमों का सबसे अधिक असर चीन से आने वाले उन उत्पादों पर पड़ सकता है, जिनके निर्माण में जबरन मजदूरी के आरोप लगते रहे हैं. खासकर शिनजियांग क्षेत्र से जुड़े कॉटन, सोलर पैनल, सीफूड, धातु और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद लंबे समय से वैश्विक जांच के दायरे में रहे हैं. हालांकि, ऐसे मामलों में प्रतिबंध लागू करना आसान नहीं होगा, क्योंकि इसके लिए मजबूत जांच और ठोस सबूत जरूरी होंगे.
भारत ने अपनाया वैश्विक मानक
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत ने ILO की परिभाषा को अपनाकर वैश्विक श्रम मानकों के अनुरूप अपनी व्यापार नीति को मजबूत किया है. इससे न केवल भारत की अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक साख मजबूत होगी, बल्कि यह भी संदेश जाएगा कि देश जबरन मजदूरी से बने उत्पादों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने के लिए तैयार है.
प्रॉपर्टी प्लेटफॉर्म NoBroker के सर्वे के अनुसार, 46 फीसदी किराएदार लंबे समय तक किराए पर रहने को बेहतर विकल्प मानते हैं. इनमें 25-34 वर्ष आयु वर्ग के 53 फीसदी और 35-44 वर्ष के 48 फीसदी लोग शामिल हैं.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत में अपना घर होना लंबे समय से सफलता की निशानी माना जाता रहा है, लेकिन अब मिलेनियल्स और जेन-जी की सोच तेजी से बदल रही है. महंगी प्रॉपर्टी, बढ़ती होम लोन EMI और करियर में लचीलापन बनाए रखने की चाह के चलते युवा घर खरीदने के बजाय किराए पर रहना पसंद कर रहे हैं. प्रॉपर्टी प्लेटफॉर्म NoBroker की रिपोर्ट के मुताबिक, 46 फीसदी किराएदार लंबे समय तक किराए के मकान में रहने को बेहतर विकल्प मानते हैं. उनका मानना है कि EMI में पैसा बांधने के बजाय निवेश और वित्तीय आजादी ज्यादा अहम है.
किराए के घर को मिल रही पहली पसंद
भारत में लंबे समय तक अपना घर खरीदना हर परिवार का सपना माना जाता रहा है, लेकिन अब यह सोच बदल रही है. खासकर मिलेनियल्स और जेन-जी प्रोफेशनल्स घर खरीदने की जल्दबाजी नहीं कर रहे हैं. वे लंबी अवधि के होम लोन की जिम्मेदारी लेने के बजाय किराए के मकान में रहकर अपनी वित्तीय स्वतंत्रता बनाए रखना चाहते हैं.
प्रॉपर्टी प्लेटफॉर्म NoBroker के सर्वे के अनुसार, 46 फीसदी किराएदार लंबे समय तक किराए पर रहने को बेहतर विकल्प मानते हैं. इनमें 25-34 वर्ष आयु वर्ग के 53 फीसदी और 35-44 वर्ष के 48 फीसदी लोग शामिल हैं.
EMI के मुकाबले किराया कहीं ज्यादा किफायती
युवाओं के इस बदलते रुझान की सबसे बड़ी वजह तेजी से बढ़ती प्रॉपर्टी कीमतें और महंगी होम लोन EMI हैं. देश के प्रमुख शहरों में घर की मासिक EMI अब किराए की तुलना में दोगुने से भी अधिक हो गई है. पिछले पांच वर्षों में गुरुग्राम का EMI-टू-रेंट रेशियो 1.86 से बढ़कर 2.68 हो गया है. बेंगलुरु में यह 2.38, हैदराबाद में 2.47 और मुंबई में 2.19 तक पहुंच चुका है. यानी जिस घर का मासिक किराया 50 हजार रुपये है, उसे खरीदने पर EMI एक लाख रुपये या उससे अधिक बैठ सकती है.
निवेश और वित्तीय आजादी को दे रहे प्राथमिकता
रिपोर्ट के अनुसार, युवा अब डाउन पेमेंट और भारी EMI में पैसा फंसाने के बजाय उसी रकम को म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार और अन्य निवेश विकल्पों में लगा रहे हैं. उनका मानना है कि इससे बेहतर रिटर्न मिलने के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर शहर या नौकरी बदलने की आजादी भी बनी रहती है.
बेंगलुरु के एक 31 वर्षीय आईटी प्रोफेशनल का कहना है कि अगले 20 वर्षों तक हर महीने एक लाख रुपये की EMI भरने से बेहतर है कि उसी राशि का निवेश किया जाए और करियर के अनुसार शहर बदलने की सुविधा बनी रहे.
लाइफस्टाइल भी बदल रही है प्राथमिकता
अब किराए पर रहना केवल मजबूरी नहीं, बल्कि एक सोचा-समझा फैसला बन चुका है. युवा बेहतर लोकेशन, गेटेड सोसाइटी, पूरी तरह फर्निश्ड अपार्टमेंट और आधुनिक सुविधाओं वाले घरों को प्राथमिकता दे रहे हैं.
बेंगलुरु में 3-BHK फ्लैट्स की मांग उनकी उपलब्धता से कहीं अधिक है. वहीं मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) में कुल किराये की मांग का करीब एक-तिहाई हिस्सा ऐसे घरों का है, जिनका मासिक किराया 40,000 रुपये से अधिक है. इससे साफ है कि बेहतर लाइफस्टाइल के लिए युवा अधिक किराया देने को भी तैयार हैं.
करियर में लचीलापन भी बड़ा कारण
हाइब्रिड वर्क कल्चर, तेजी से बदलती नौकरियां और अलग-अलग शहरों में करियर के अवसर भी युवाओं के फैसले को प्रभावित कर रहे हैं. कई प्रोफेशनल्स तब तक घर खरीदना नहीं चाहते, जब तक यह तय न हो जाए कि भविष्य में वे किस शहर में स्थायी रूप से बसेंगे.
इसी बदलते ट्रेंड का असर रेंटल मार्केट पर भी दिखाई दे रहा है. NoBroker के अनुसार, मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में किराये में सालाना 11 फीसदी की सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई है. इसके बाद चेन्नई में 8 फीसदी, बेंगलुरु में 7 फीसदी तथा हैदराबाद और दिल्ली-एनसीआर में लगभग 3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.
बदल रही है 'घर' की परिभाषा
विशेषज्ञों का मानना है कि नई पीढ़ी के लिए घर अब केवल एक संपत्ति नहीं, बल्कि एक वित्तीय निर्णय बन गया है. युवा फिलहाल अपनी पूंजी को निवेश, करियर और बेहतर जीवनशैली पर खर्च करना ज्यादा समझदारी मान रहे हैं. यही वजह है कि महानगरों में किराए का बाजार लगातार मजबूत होता जा रहा है और आने वाले वर्षों में यह रुझान और तेज हो सकता है.
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के अंतरिम आंकड़ों के मुताबिक, 13 जुलाई तक शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 16.40 फीसदी बढ़कर 6.51 लाख करोड़ रुपये हो गया.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत सरकार के लिए राजस्व के मोर्चे पर बेहद मजबूत रही है. 13 जुलाई तक शुद्ध प्रत्यक्ष कर (Direct Tax) संग्रह 16.4 फीसदी बढ़कर 6.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया है. इस बढ़ोतरी में सबसे बड़ा योगदान कॉरपोरेट टैक्स का रहा, जिसमें 22 फीसदी की तेज वृद्धि दर्ज की गई. साथ ही व्यक्तिगत आयकर और अन्य गैर-कॉरपोरेट टैक्स संग्रह में भी दोहरे अंकों की बढ़ोतरी देखने को मिली है. विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत कॉरपोरेट मुनाफा, बेहतर टैक्स अनुपालन और औपचारिक अर्थव्यवस्था के विस्तार से सरकार को अपने वार्षिक कर संग्रह लक्ष्य तक पहुंचने में मदद मिलेगी.
कॉरपोरेट टैक्स बना सबसे बड़ा सहारा
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के अंतरिम आंकड़ों के मुताबिक, 13 जुलाई तक शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 16.40 फीसदी बढ़कर 6.51 लाख करोड़ रुपये हो गया. इसमें शुद्ध कॉरपोरेट टैक्स संग्रह 22 फीसदी बढ़कर 2.40 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जो कुल बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण रहा. वहीं सकल कॉरपोरेट टैक्स संग्रह 3.35 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो कंपनियों की मजबूत आय और बेहतर टैक्स भुगतान को दर्शाता है.
गैर-कॉरपोरेट टैक्स में भी दोहरे अंक की बढ़त
शुद्ध गैर-कॉरपोरेट टैक्स संग्रह 11.66 फीसदी बढ़कर 3.85 लाख करोड़ रुपये हो गया. इसमें व्यक्तिगत आयकर, हिंदू अविभाजित परिवार (HUF), फर्म, व्यक्तियों के संघ (AOP), व्यक्तियों के समूह (BOI), स्थानीय निकाय और आर्टिफिशियल ज्यूरिडिकल पर्सन्स द्वारा चुकाए गए कर शामिल हैं. सकल गैर-कॉरपोरेट टैक्स संग्रह करीब 4.12 लाख करोड़ रुपये रहा. इससे संकेत मिलता है कि व्यक्तिगत आयकर संग्रह और टैक्स अनुपालन दोनों मजबूत बने हुए हैं.
सकल टैक्स कलेक्शन 7.74 लाख करोड़ रुपये के करीब
सरकार के मुताबिक, 13 जुलाई तक सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह 16.11 फीसदी बढ़कर 7.74 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया. इसी अवधि में करदाताओं को 1.22 लाख करोड़ रुपये का रिफंड जारी किया गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 14.57 फीसदी अधिक है.
शेयर बाजार की तेजी से STT कलेक्शन में उछाल
सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) संग्रह में सबसे तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई. 13 जुलाई तक STT कलेक्शन 47.85 फीसदी बढ़कर 26,429 करोड़ रुपये हो गया. यह शेयर बाजार में बढ़ती ट्रेडिंग गतिविधियों और ऊंचे कारोबार मूल्य का संकेत है.
सरकार ने रखा है ₹26.97 लाख करोड़ का लक्ष्य
केंद्रीय बजट में सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए प्रत्यक्ष कर संग्रह का लक्ष्य 26.97 लाख करोड़ रुपये तय किया है, जो पिछले वित्त वर्ष के 23.40 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले लगभग 15 फीसदी अधिक है. शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि सरकार लक्ष्य की दिशा में मजबूत शुरुआत कर चुकी है.
विशेषज्ञों ने बताए मजबूत संकेत
डेलॉयट इंडिया के पार्टनर रोहिंटन सिधवा के मुताबिक, मौजूदा आंकड़े संकेत देते हैं कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक आर्थिक सुस्ती का भारतीय कंपनियों की आय पर बड़ा असर नहीं पड़ा है और कॉरपोरेट मुनाफा मजबूत बना हुआ है.
ईवाई इंडिया के टैक्स पार्टनर जयेश सांघवी का कहना है कि कॉरपोरेट टैक्स और अग्रिम कर भुगतान में मजबूत वृद्धि देखने को मिल रही है. साथ ही व्यक्तिगत आयकर संग्रह में भी मजबूती बनी हुई है, जो बेहतर टैक्स अनुपालन और अर्थव्यवस्था के तेजी से औपचारिक होने का संकेत देती है.
प्राइस वॉटरहाउस एंड कंपनी LLP के पार्टनर हितेश साहनी के अनुसार, 22 फीसदी से अधिक की कॉरपोरेट टैक्स वृद्धि कंपनियों की मजबूत लाभप्रदता और बेहतर अनुपालन को दर्शाती है. उन्होंने कहा कि अब तक का शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह बजट अनुमान का करीब 19.5 फीसदी हासिल कर चुका है, जबकि गैर-कॉरपोरेट टैक्स संग्रह अपने वार्षिक लक्ष्य का लगभग 27.6 फीसदी छू चुका है. इससे साफ है कि चालू वित्त वर्ष में प्रत्यक्ष कर संग्रह की रफ्तार फिलहाल मजबूत बनी हुई है.
CETA लागू होने के साथ ही भारत के अधिकांश निर्यात उत्पादों को ब्रिटेन में बिना कस्टम ड्यूटी के प्रवेश मिलेगा.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत और ब्रिटेन के बीच हुआ व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) आज यानी 15 जुलाई 2026 से लागू हो गया है. इस ऐतिहासिक समझौते के तहत भारतीय उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार में 99 फीसदी तक ड्यूटी-फ्री पहुंच मिलेगी, जबकि भारत में आयात होने वाली कई ब्रिटिश वस्तुओं, खासकर प्रीमियम कारों और शराब पर कस्टम ड्यूटी चरणबद्ध तरीके से कम होगी. सरकार का मानना है कि इससे द्विपक्षीय व्यापार, निवेश और रोजगार को नई रफ्तार मिलेगी.
भारतीय निर्यात को मिलेगा बड़ा फायदा
CETA लागू होने के साथ ही भारत के अधिकांश निर्यात उत्पादों को ब्रिटेन में बिना कस्टम ड्यूटी के प्रवेश मिलेगा. टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट, लेदर, फुटवियर, प्रोसेस्ड फूड, समुद्री उत्पाद, हैंडीक्राफ्ट और इंजीनियरिंग उत्पाद जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को इसका सबसे अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है. इससे भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और ब्रिटेन में उनकी बाजार हिस्सेदारी मजबूत होगी.
विदेशी कारों पर घटेगा आयात शुल्क
इस समझौते के तहत भारत ने पहली बार किसी मुक्त व्यापार समझौते में पूरी तरह निर्मित (CBU) विदेशी पैसेंजर कारों और ट्रकों पर आयात शुल्क में बड़ी कटौती पर सहमति दी है. ब्रिटेन से आयात होने वाली कारों पर 110 फीसदी कस्टम ड्यूटी को चरणबद्ध तरीके से घटाकर 10 फीसदी किया जाएगा. पेट्रोल और डीजल वाहनों पर यह राहत जल्द लागू होगी, जबकि इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन वाहनों को यह छूट समझौते के छठे वर्ष से मिलेगी.
प्रीमियम विदेशी शराब होगी सस्ती
समझौते का असर प्रीमियम विदेशी शराब की कीमतों पर भी दिखेगा. स्कॉच व्हिस्की, जिन, रम, वोदका, बॉर्बन और टकीला जैसी शराब पर आयात शुल्क पहले वर्ष में 150 फीसदी से घटाकर 110 फीसदी किया जाएगा. अगले 10 वर्षों में यह शुल्क क्रमशः कम होकर 75 फीसदी तक आ जाएगा, जबकि स्कॉच व्हिस्की पर टैक्स 40 फीसदी तक लाया जाएगा. हालांकि, यह लाभ केवल निर्धारित न्यूनतम आयात मूल्य (Minimum Import Price) वाले उत्पादों को ही मिलेगा.
IT और सर्विस सेक्टर को भी बड़ी राहत
CETA के तहत भारतीय IT और सर्विस सेक्टर को भी महत्वपूर्ण लाभ मिलेगा. 'डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन' के तहत ब्रिटेन में अस्थायी तौर पर काम करने वाले भारतीय पेशेवरों और उनकी कंपनियों को पांच वर्षों तक सामाजिक सुरक्षा अंशदान (Social Security Contribution) से छूट मिलेगी. इससे TCS, Infosys, Wipro, HCLTech जैसी कंपनियों की लागत घटेगी और उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी.
संवेदनशील क्षेत्रों को रखा गया सुरक्षित
समझौते में भारत ने सेब, अखरोट, गोल्ड बार और स्मार्टफोन जैसे संवेदनशील उत्पादों को टैरिफ रियायतों से बाहर रखा है, ताकि घरेलू उद्योगों पर प्रतिकूल असर न पड़े. साथ ही भारत ने दवाओं से जुड़े पेटेंट नियमों में बदलाव की ब्रिटेन की मांग स्वीकार नहीं की, जिससे जरूरत पड़ने पर सस्ती जेनेरिक दवाओं के उत्पादन का अधिकार सुरक्षित रहेगा.
व्यापार और निवेश को मिलेगी नई गति
एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने कहा, भारत–यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) भारत की एफटीए यात्रा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है. यह समझौता दुनिया के दो सबसे पुराने लोकतंत्रों को व्यापक मुक्त व्यापार साझेदारी से जोड़ता है. इसके तहत भारत के 99% निर्यात को ब्रिटेन के बाजार में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी, जबकि भारत ने यूके के लिए 89.5% टैरिफ लाइनों को खोल दिया है. इससे वस्त्र, चमड़ा, समुद्री उत्पाद, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग और रसायन जैसे भारतीय उद्योगों को बड़ा लाभ मिलेगा, वहीं यूके के ऑटोमोबाइल, स्पिरिट्स, लाइफ साइंसेज और हेल्थकेयर क्षेत्रों को भी नए अवसर मिलेंगे. हमें विश्वास है कि यह समझौता व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को नई गति देगा. उम्मीद है कि CETA जल्द लागू होगा और वर्ष 2030 तक भारत-यूके द्विपक्षीय व्यापार करीब 120 अरब डॉलर तक पहुंचकर दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देगा.
विशेषज्ञों का मानना है कि CETA केवल टैरिफ घटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, तकनीक, सेवाओं और रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा. सरकार का लक्ष्य है कि इस समझौते के जरिए आने वाले वर्षों में भारत-ब्रिटेन द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो और भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजारों में अधिक प्रतिस्पर्धी बनने का अवसर मिले.
आंकड़ों के अनुसार, निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स अब तक करीब 17 फीसदी चढ़ चुका है, जो निफ्टी 50, निफ्टी बैंक और निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स तीनों से बेहतर है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
वित्त वर्ष 2027 में बैंकिंग सेक्टर की तस्वीर बदलती नजर आ रही है. निजी बैंकों के शेयरों ने सरकारी बैंकों के मुकाबले शानदार प्रदर्शन करते हुए निवेशकों को बेहतर रिटर्न दिया है. निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स अब तक करीब 17 फीसदी चढ़ चुका है, जो निफ्टी 50, निफ्टी बैंक और निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स तीनों से बेहतर है. विशेषज्ञों का मानना है कि RBI के नीतिगत कदम, मजबूत फंडिंग, बेहतर एसेट क्वालिटी और नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) में सुधार की उम्मीद ने निजी बैंकिंग शेयरों में नई जान फूंक दी है.
निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स ने सभी प्रमुख इंडेक्स को पछाड़ा
ऐस इक्विटी के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 में अब तक निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स में करीब 17 फीसदी की तेजी दर्ज की गई है. इसके मुकाबले निफ्टी 50 में 8.4 फीसदी, निफ्टी बैंक इंडेक्स में 15.6 फीसदी और निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स में केवल 7.5 फीसदी की बढ़त देखने को मिली. इससे साफ है कि इस वित्त वर्ष में निजी बैंक निवेशकों की पहली पसंद बनकर उभरे हैं.
RBI के फैसलों से मिला बड़ा सहारा
विश्लेषकों के मुताबिक, RBI की ओर से FCNR(B) जमा और External Commercial Borrowing (ECB) से जुड़े राहत उपायों ने निजी बैंकों के लिए फंडिंग आसान बनाई है. इससे बैंकों पर जमा जुटाने का दबाव कम होगा और फंडिंग की लागत घटेगी. साथ ही बेहतर एसेट क्वालिटी और ट्रेजरी से होने वाली आय भी निजी बैंकों के प्रदर्शन को मजबूती दे रही है.
क्यों निजी बैंकों पर बुलिश हैं ब्रोकरेज?
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज (KIE) का कहना है कि बड़े निजी बैंकों के लिए दो प्रमुख सकारात्मक कारक हैं. पहला, जमा जुटाने की प्रतिस्पर्धा कम होने से नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) पर दबाव घट सकता है. दूसरा, FCNR(B) जमा में बढ़ोतरी से पूरे बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी बढ़ेगी और फंडिंग लागत कम होगी. चूंकि निजी बैंकों की फंडिंग संरचना अधिक विविध है, इसलिए उन्हें इसका अपेक्षाकृत ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है.
सरकारी बैंकों पर बढ़ रही फंडिंग लागत
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी बैंक अब ऋण वृद्धि बनाए रखने के लिए अधिक ब्याज दर वाली सावधि जमा (Term Deposits) पर निर्भर हो रहे हैं. इससे उनकी फंडिंग लागत बढ़ सकती है और कम लागत वाली CASA जमा का फायदा धीरे-धीरे कम हो सकता है. यही वजह है कि फिलहाल निजी बैंक सरकारी बैंकों की तुलना में बेहतर स्थिति में दिखाई दे रहे हैं.
इन बैंकिंग शेयरों ने दिया सबसे ज्यादा रिटर्न
वित्त वर्ष 2027 में निजी क्षेत्र के बंधन बैंक, यस बैंक, IDFC First Bank, इंडसइंड बैंक और RBL बैंक के शेयरों में 50 फीसदी तक की तेजी देखने को मिली है. वहीं सरकारी बैंकों में बैंक ऑफ महाराष्ट्र, पंजाब एंड सिंध बैंक और यूको बैंक के शेयरों में अधिकतम 35 फीसदी तक की बढ़त दर्ज की गई.
FCNR(B) में बढ़ी विदेशी पूंजी की आवक
RBI ने 5 जून की मौद्रिक नीति समीक्षा में FCNR(B) जमा और पात्र ECB पर रियायती फॉरेक्स स्वैप सुविधा की घोषणा की थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसके बाद से बैंकिंग सिस्टम में करीब 8 अरब डॉलर की FCNR(B) जमा आ चुकी है. इनमें अकेले SBI ने 1.5 अरब डॉलर से अधिक जुटाए हैं, जबकि अधिकांश सरकारी बैंक इन जमाओं पर 6-6.5 फीसदी और छोटे निजी बैंक 7.5 फीसदी तक ब्याज दे रहे हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में बैंकिंग सेक्टर के मार्जिन पर कुछ दबाव दिख सकता है, लेकिन निजी बैंक यह संकेत देंगे कि नेट इंटरेस्ट मार्जिन का सबसे कमजोर दौर अब पीछे छूट चुका है. दूसरी तिमाही से फंडिंग लागत में सुधार और RBI की नीतियों का असर निजी बैंकों के प्रदर्शन को और मजबूत कर सकता है. वहीं, सरकारी बैंकों के लिए बेहतर नतीजे वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में देखने को मिल सकते हैं.