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मार्केटिंग के गैर पारंपरिक तरीकों के साथ सामने आ रही है चुनौती, कस्‍टमर संतोष सबसे जरूरी 

मार्केटिंग में आज वेबसाइट के साथ बॉट के जरिए भी ग्राहक तक पहुंचने की कोशिश हो रही है. लेकिन इन तरीकों की अपनी चुनौतियां सामने आ रही हैं. 

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

दिल्‍ली में हो रहे बिजनसेवर्ल्‍ड के BW Marketing Momentum में कई इस क्षेत्र के कई पेशेवर प्रोफेशनल ने भाग लिया. ऐसे ही एक सेशन में मार्केटिंग के पारंपरिक और गैर पारंपरिक तरीकों से मिल रहे फायदे और गैर पारंपरिक तरीकों की चुनौतियों को लेकर चर्चा हुई. इस सेशन में भाग ले रहे VLCC समूह के वाइस प्रेसीडेंट मार्केटिंग रजत तुली ने कहा कि किसी भी डील को ह्यूमन इंटरवेशन के बिना पूरा कर पाना मुश्किल है. वहीं, केतन ने भी इस मामले में अपनी सहमति जताई. 

कस्‍टमर कितना संतुष्‍ट होता है
VLCC समूह के वाइस प्रेसीडेंट मार्केटिंग रजत तुली ने इस मौके पर कहा कि Vlcc के मुख्‍य रूप से कुछ बिजनेस हैं जिसमें पहला क्लिनिकल बिजनेस है, यहां हम हर तरह की क्लिनिकल सर्विस प्रोवाइड करते हैं दूसरा कोर हमारा प्रोडक्‍ट बिजनेस है जिसमें हम अच्‍छा कर रहे हैं. हम प्रोडक्‍ट के कारोबार में कुछ चुनौतियां फेस कर रहे हैं. जब हम बॉट का इस्‍तेमाल कर रहे हैं तो उसमें कस्‍टमर असंतोष देखने को मिल रहा है. ऐसा इसलिए हो रहा है कि जब कोई टियर 2 या टियर 3 के शहरों वाला आदमी कॉल करता है तो क्‍या उसके लिए बॉट के साथ डील करना आसान है. क्षेत्रीय भाषाओं में विशेष तौर पर हमें चुनौतियां देखने को मिल रही हैं. 

इंसानी दखल के बिना डील पूरी नहीं हो सकती 
रजत बताते हैं कि WhatsApp और बॉट दोनों को ही इस्‍तेमाल कर रहे हैं. WhatsApp में किसी भी विषय को लेकर पूरी तरह से बात कर सकते हैं. जबकि जब कोई कस्‍टमर हमारे वीएलसीसी सेंटर में आता है और वो एक सेशन लेता है तो उससे आगे की डील को क्‍लोज करने में आसानी हो जाती है. रजत कहते हैं कि मुझे नहीं लगता कि WhatsApp या बॉट के जरिए आप  किसी डील को क्‍लोज कर सकते हैं. बॉट बिना किसी मानव दखल के किसी डील को जल्‍दी क्‍लोज करने के लिए नजदीक पहुंच सकते हैं लेकिन फाइनल नहीं कर सकते हैं. 

पारंपरिक मार्केटिंग को रिप्‍लेस कर पाना मुश्किल 
Good Glamm Group के ग्रुप ब्रैंड डॉयरेक्‍टर केतन भाटिया ने कहा कि जहां तक पारंपरिक तरह से चलाने की बात है वहां उसमें अगर देखें तो हम अपने पास की किराना शॉप पर जाया करते थे. हम दुकानदार से बात करते थे और दुकानदार हमसे बात करता था. ये जो बातचीत का सिलसिला ये अपने आप में काफी स्‍ट्रांग हैं. लेकिन आज कंपनियां WhatsApp से लेकर दूसरे प्‍लेटफॉर्म के जरिए अपने ग्राहक से संपर्क कर रहे हैं. लेकिन मुझे नहीं लगता ये उतना प्रभावी है. जब किसी कस्‍टमर को किसी तरह की परेशानी होती है तो ऐसे में आपके लिए ब्रैंड की वेबसाइट सबसे पहला तरीका होता है जिससे आप अपनी समस्‍या को सुलझा सकते हैं. अगर आपको WhatsApp पर किसी समस्‍या को सुलझाना है तो आपको बातचीत को शुरू करना होगा. जबकि वेबसाइट पर आकर आप उस समस्‍या को सुलझाने का स्‍वाभाविक तरीका पा सकते हैं. आज हम ये जानना चाहते हैं कि आखिर एक कस्‍टमर चाहता क्‍या है. आज किसी भी समस्‍या के जो समाधान हैं वो विकसित बाजारों में सबसे ज्‍यादा हैं. कंज्‍यूमर किस राज्‍य से आया है, वो कहां रहता है वो किस टियर सिटी से आया है. उसे बॉट कैसे सुलझा पाता है.

 


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