Puch AI एक स्टार्टअप है जो बड़े पैमाने पर सार्वजनिक उपयोग के लिए AI उपकरण विकसित करता है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
उत्तर प्रदेश सरकार ने बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप Puch AI के साथ किए गए 25,000 करोड़ रुपये के मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) को रद्द कर दिया है, क्योंकि वित्तीय विश्वसनीयता, क्षमता और गवर्नेंस के मानकों की जांच के दौरान गंभीर चिंताएं सामने आईं.
इस निवेश की घोषणा 23 मार्च को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की थी, जिन्होंने कहा था कि यह साझेदारी राज्य में एक प्रमुख आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इकोसिस्टम बनाने में मदद करेगी. योजना में AI पार्क, बड़े डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर, गवर्नेंस एप्लीकेशंस के लिए AI Commons प्लेटफॉर्म और युवाओं के कौशल विकास के लिए AI विश्वविद्यालय शामिल थे.
अधिकारियों ने बताया कि इस पहल के तहत लखनऊ एयरपोर्ट के पास एक 'AI सिटी' भी विकसित की जा सकती थी, और प्रौद्योगिकी अवसंरचना नोएडा, कानपुर, वाराणसी और प्रयागराज तक विस्तारित हो सकती थी. यह परियोजना राज्य की उभरती तकनीकों के हब बनने की महत्वाकांक्षा में एक प्रमुख कदम मानी जा रही थी.
वित्तीय और गवर्नेंस चिंताएं
Invest UP के आधिकारिक हैंडल से जारी पोस्ट के अनुसार, “आवश्यक विवरण SOP के अनुसार निवेशक से मांगे गए थे, लेकिन समय पर प्रदान नहीं किए गए. ड्यू डिलिजेंस में परियोजना के पैमाने के लिए नेट वर्थ और विश्वसनीय वित्तीय लिंक की कमी पाई गई. राज्य सरकार के निर्देश पर MoU आज से रद्द किया जाता है. अब किसी भी अधिकार या दायित्व का अस्तित्व नहीं है.”
Puch AI क्या है?
Puch AI एक स्टार्टअप है जो बड़े पैमाने पर सार्वजनिक उपयोग के लिए AI उपकरण विकसित करता है. कंपनी की स्थापना सिद्धार्थ भाटिया और अर्जित जैन ने की. कंपनी ने WhatsApp पर एक AI सेवा लॉन्च की है, जो कई भारतीय भाषाओं में वॉइस-आधारित इंटरैक्शन की सुविधा देती है. यह प्लेटफ़ॉर्म उपयोगकर्ताओं को अलग ऐप डाउनलोड किए बिना सीधे WhatsApp के माध्यम से AI उपकरणों से जुड़ने की अनुमति देता है.
सोशल मीडिया जांच और सवाल
घोषणा के तुरंत बाद ही तकनीकी विशेषज्ञ और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने सवाल उठाए कि क्या यह अपेक्षाकृत कम-ज्ञात स्टार्टअप इतनी बड़ी निवेश राशि जुटाने में सक्षम है. ऑनलाइन चर्चाओं में कंपनी के सीमित सार्वजनिक वित्तीय विवरण, मामूली परिचालन प्रभाव और बड़े संस्थागत निवेशकों की अनुपस्थिति पर ध्यान दिया गया. 23 मार्च को मुख्यमंत्री के पोस्ट पर जुड़े एक नोट में स्टार्टअप की परियोजना निष्पादन क्षमता पर संदेह व्यक्त किया गया.
पोस्ट में लिखा गया, “Puch AI केवल 1 साल पुराना स्टार्टअप है, जिसकी सालाना आय 50 लाख रुपये से कम है. उनके पास इस पैमाने का MoU निष्पादित करने की वास्तविक क्षमता नहीं है. संस्थापक वायरल विवादों पर जीवित रहते हैं; पहले उन्होंने Perplexity ($20 बिलियन मूल्य) खरीदने का प्रस्ताव रखा था.”
स्टार्टअप का बचाव
Puch AI के सह-संस्थापक Siddharth Bhatia ने कहा कि निवेश निजी निवेशकों से आएगा, न कि सार्वजनिक निधियों से. उन्होंने बताया कि यह परियोजना सार्वजनिक-निजी साझेदारी के रूप में डिजाइन की गई थी और इसे चरणबद्ध तरीके से बाहरी वित्तीय समर्थन के साथ लागू किया जाएगा. हालांकि, उद्योग विशेषज्ञों के बीच स्टार्टअप की ट्रैक रिकॉर्ड और अपेक्षित निवेश जुटाने की क्षमता पर संदेह बना रहा.
ड्यू डिलिजेंस और MoU रद्द
विवाद के बाद अधिकारियों ने मानक प्रोटोकॉल के तहत वित्तीय दस्तावेजों की समीक्षा शुरू की. राज्य सरकार के अनुसार, ड्यू डिलिजेंस प्रक्रिया में परियोजना के पैमाने के लिए पर्याप्त नेट वर्थ और विश्वसनीय वित्तीय लिंक की कमी पाई गई. कंपनी ने निर्धारित समय सीमा में सभी दस्तावेज प्रदान नहीं किए.
इसलिए सरकार ने 27 मार्च को MoU रद्द कर दिया, यह स्पष्ट करते हुए कि अब दोनों पक्षों के बीच कोई अधिकार या दायित्व शेष नहीं है. अधिकारियों ने कहा कि यह कदम पारदर्शिता बनाए रखने और निवेश प्रस्तावों का मूल्यांकन करते समय गवर्नेंस मानकों को बनाए रखने के लिए लिया गया.
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और नीतिगत सवाल
इस घटना पर तुरंत राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आईं. समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि सरकार बड़ी निवेश घोषणाओं का प्रचार-प्रसार के लिए इस्तेमाल कर रही है और प्रशासन द्वारा किए गए समान MoU की समीक्षा करने की मांग की.
राज्य सरकार ने तर्क दिया कि रद्द करना उनके ड्यू डिलिजेंस तंत्र की प्रभावशीलता को दर्शाता है, लेकिन विवाद ने यह सवाल भी खड़ा किया कि उच्च-मूल्य समझौतों की घोषणा निवेशकों की कठोर जांच से पहले क्यों की जाती है.
व्यवसाय और स्टार्टअप के लिए सबक
यह मामला तकनीकी क्षेत्र में एक व्यापक प्रवृत्ति को भी दर्शाता है, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बड़े निवेश दावों और महत्वाकांक्षी घोषणाओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है.
विशेषज्ञों का कहना है कि Puch AI की घटना यह सिखाती है कि वित्तीय सत्यापन, संस्थागत जांच और वास्तविक परियोजना मूल्यांकन महत्वपूर्ण हैं, खासकर सार्वजनिक-निजी साझेदारी के लिए.
स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए यह याद दिलाने वाला संदेश है कि बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के साझेदारियों को सुरक्षित करने के लिए विश्वसनीयता, पारदर्शिता और निष्पादन क्षमता अनिवार्य हैं, विशेषकर AI जैसे तेज़ी से विकसित होने वाले और उच्च-स्टेक सेक्टर में.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, चार बड़े ग्लोबल निवेशकों का एक समूह अडानी ग्रुप के एयरपोर्ट कारोबार में निवेश को लेकर बातचीत कर रहा है. इस निवेश की कुल वैल्यू करीब 1.3 बिलियन डॉलर यानी 12 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा बताई जा रही है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अडानी ग्रुप का एयरपोर्ट कारोबार एक बार फिर वैश्विक निवेशकों के रडार पर आ गया है. सिंगापुर की निवेश कंपनी टेमासेक और अल्फा वेव ग्लोबल समेत कई विदेशी निवेशक अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड (AAHL) में 12 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश करने की तैयारी में हैं. अगर यह डील पूरी होती है, तो अडानी ग्रुप के एयरपोर्ट बिजनेस का वैल्यूएशन करीब 18 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है. तेजी से बढ़ते हवाई यात्री ट्रैफिक और भारत के एविएशन सेक्टर की संभावनाओं ने विदेशी निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है.
एयरपोर्ट बिजनेस में बड़ी हिस्सेदारी चाहते हैं विदेशी निवेशक
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चार बड़े ग्लोबल निवेशकों का एक समूह अडानी ग्रुप के एयरपोर्ट कारोबार में निवेश को लेकर बातचीत कर रहा है. इस निवेश की कुल वैल्यू करीब 1.3 बिलियन डॉलर यानी 12 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा बताई जा रही है.
इन निवेशकों का मानना है कि भारत में आने वाले वर्षों में एयर ट्रैफिक तेजी से बढ़ेगा और निजी एयरपोर्ट ऑपरेटर्स को इसका बड़ा फायदा मिलेगा. अडानी ग्रुप फिलहाल देश का सबसे बड़ा प्राइवेट एयरपोर्ट ऑपरेटर बन चुका है और यही वजह है कि विदेशी फंड्स इस सेक्टर में बड़ी हिस्सेदारी चाहते हैं.
18 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है वैल्यूएशन
प्रस्तावित निवेश के बाद अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड का वैल्यूएशन करीब 18 बिलियन डॉलर यानी लगभग 1.51 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. यह वैल्यूएशन भारत के एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में अडानी ग्रुप की मजबूत स्थिति को दर्शाता है.
तुलना करें तो GMR Airports का मार्केट वैल्यूएशन हाल ही में करीब 1.02 लाख करोड़ रुपये रहा था. ऐसे में अडानी ग्रुप का एयरपोर्ट बिजनेस निवेशकों के लिए तेजी से उभरता हुआ बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेटफॉर्म माना जा रहा है.
प्रीमियम वैल्यूएशन पर अटकी है बातचीत
हालांकि अभी यह डील शुरुआती बातचीत के दौर में है और इसके सफल होने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. रिपोर्ट्स के अनुसार अडानी ग्रुप अपने एयरपोर्ट बिजनेस के लिए प्रीमियम वैल्यूएशन चाहता है, जिसे लेकर कुछ निवेशक सावधानी बरत रहे हैं.
बताया जा रहा है कि कुछ विदेशी निवेशकों ने निश्चित रिटर्न वाले स्ट्रक्चर्ड निवेश का प्रस्ताव रखा था, लेकिन ग्रुप ने उसे स्वीकार नहीं किया. यही वजह है कि डील को अंतिम रूप देने में अभी समय लग सकता है.
एयरपोर्ट विस्तार पर अडानी ग्रुप का बड़ा फोकस
अडानी ग्रुप आने वाले वर्षों में अपने एयरपोर्ट कारोबार पर बड़ा दांव लगाने की तैयारी में है. कंपनी ने FY27 के लिए करीब 40 हजार करोड़ रुपये के कैपेक्स प्लान की घोषणा की है, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा एयरपोर्ट बिजनेस के लिए रखा गया है.
ग्रुप मुंबई, नवी मुंबई, अहमदाबाद, लखनऊ और जयपुर एयरपोर्ट्स पर बड़े स्तर पर ‘सिटी-साइड डेवलपमेंट’ प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है. इसके अलावा 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले अहमदाबाद एयरपोर्ट पर नया टर्मिनल बनाने की तैयारी भी चल रही है.
नवी मुंबई एयरपोर्ट पर तेजी से चल रहा विकास कार्य
अडानी ग्रुप नवी मुंबई एयरपोर्ट के दूसरे फेज के विकास कार्य को भी तेजी से आगे बढ़ा रहा है. कंपनी का अनुमान है that मौजूदा क्षमता अगले 12 से 18 महीनों में पूरी तरह भर सकती है, क्योंकि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है.
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में एविएशन सेक्टर की ग्रोथ आने वाले वर्षों में दुनिया में सबसे तेज रहने वाली है, जिसका सीधा फायदा एयरपोर्ट ऑपरेटर्स को मिलेगा.
वित्तीय प्रदर्शन में भी दिखी मजबूती
कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन में भी सुधार देखने को मिला है. FY26 में ऑपरेशन्स से होने वाला रेवेन्यू पिछले साल के मुकाबले 34.4 फीसदी बढ़ा है. वहीं टैक्स के बाद मुनाफा दोगुने से ज्यादा बढ़कर 1,731 करोड़ रुपये तक पहुंच गया.
हालांकि कंपनी की कुल देनदारियां भी बढ़ी हैं. 31 मार्च तक कुल कर्ज करीब 65,976 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले साल के मुकाबले 37.7 फीसदी ज्यादा है. इसके बावजूद निवेशकों का भरोसा कंपनी की लंबी अवधि की ग्रोथ संभावनाओं पर बना हुआ है.
भारत के एविएशन सेक्टर पर बढ़ा वैश्विक भरोसा
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते एविएशन मार्केट्स में शामिल हो चुका है. बढ़ती आय, तेजी से बढ़ता मिडिल क्लास और घरेलू उड़ानों की मांग ने एयरपोर्ट सेक्टर को निवेशकों के लिए आकर्षक बना दिया है.
इसी वजह से टेमासेक और अल्फा वेव ग्लोबल जैसे बड़े विदेशी निवेशक अब भारत के एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में लंबी अवधि का दांव लगाने की तैयारी कर रहे हैं.
बैठक का सबसे बड़ा नतीजा यह रहा कि दोनों देशों ने अपने संबंधों को “रणनीतिक स्थिरता” के दायरे में बनाए रखने पर सहमति जताई. इसका मतलब है कि अब अमेरिका और चीन सीधे टकराव बढ़ाने के बजाय बातचीत और नियंत्रित प्रतिस्पर्धा की नीति अपनाएंगे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
बीजिंग में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच गुरुवार को हुई अहम बैठक को वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है. लंबे समय से व्यापार, ताइवान और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर तनाव झेल रहे दोनों देशों ने अब रिश्तों को स्थिर बनाने और संवाद बढ़ाने पर जोर दिया है. हालांकि कई संवेदनशील मुद्दों पर मतभेद अब भी कायम हैं, लेकिन इस बैठक से दुनिया को यह संकेत जरूर मिला है कि दोनों महाशक्तियां टकराव कम करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती हैं.
अमेरिका-चीन रिश्तों में ‘रणनीतिक स्थिरता’ पर जोर
बैठक का सबसे बड़ा नतीजा यह रहा कि दोनों देशों ने अपने संबंधों को “रणनीतिक स्थिरता” के दायरे में बनाए रखने पर सहमति जताई. इसका मतलब है कि अब अमेरिका और चीन सीधे टकराव बढ़ाने के बजाय बातचीत और नियंत्रित प्रतिस्पर्धा की नीति अपनाएंगे. दोनों देशों ने यह भी माना कि मौजूदा विवादों को तुरंत खत्म करना संभव नहीं है, लेकिन उन्हें बेहतर तरीके से संभालने और संवाद जारी रखने की जरूरत है.
व्यापार वार्ता में दिखे सकारात्मक संकेत
बैठक से पहले दोनों देशों के आर्थिक अधिकारियों के बीच हुई बातचीत को सकारात्मक बताया गया. अमेरिका की ओर से स्कॉट बेसेंट और चीन की तरफ से ही लीफेंग ने व्यापार वार्ता में हिस्सा लिया. चीन ने संकेत दिया कि वह अपने बाजार को विदेशी कंपनियों के लिए और ज्यादा खोल सकता है. वहीं अमेरिका ने भी दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध मजबूत करने पर जोर दिया. इससे वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल देखने को मिला.
कृषि, पर्यटन और निवेश पर भी बनी सहमति
इस शिखर सम्मेलन में सिर्फ व्यापार ही नहीं, बल्कि कृषि, पर्यटन और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई. अमेरिका ने चीन से कृषि उत्पादों की खरीद बढ़ाने की मांग की, जबकि दोनों देशों ने निवेश और बाजार पहुंच को आसान बनाने पर भी बातचीत की.
इसके अलावा अमेरिका ने चीन से फेंटानिल बनाने में इस्तेमाल होने वाले रसायनों की सप्लाई रोकने में सहयोग मांगा. यह मुद्दा लंबे समय से अमेरिका के लिए चिंता का कारण बना हुआ है.
ऊर्जा सुरक्षा और होर्मुज स्ट्रेट पर अहम चर्चा
बैठक में वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा भी बड़ा मुद्दा रही. दोनों देशों ने माना कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम है और इसे खुला रहना चाहिए. चीन ने इस क्षेत्र के सैन्यीकरण का विरोध किया और संकेत दिया कि वह ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अमेरिका से तेल आयात बढ़ा सकता है. साथ ही दोनों देशों ने इस बात पर भी सहमति जताई कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देना चाहिए.
ताइवान मुद्दे पर अब भी कायम है तनाव
रिश्तों में सुधार की कोशिशों के बावजूद ताइवान का मुद्दा दोनों देशों के बीच सबसे संवेदनशील बना हुआ है. शी जिनपिंग ने साफ कहा कि अगर इस मुद्दे को गलत तरीके से संभाला गया तो दोनों देशों के बीच गंभीर टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है.
चीन ताइवान को अपनी संप्रभुता का हिस्सा मानता है, जबकि अमेरिका इस मुद्दे पर संतुलित लेकिन सतर्क रुख अपनाता है. यही वजह है कि भविष्य में भी यह मुद्दा अमेरिका-चीन संबंधों में सबसे बड़ी चुनौती बना रह सकता है.
दुनिया की नजर अब अगले कदम पर
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप और शी जिनपिंग की यह बैठक फिलहाल तनाव कम करने की दिशा में सकारात्मक शुरुआत है. हालांकि व्यापार, तकनीक, सुरक्षा और ताइवान जैसे मुद्दों पर असली परीक्षा आने वाले महीनों में होगी.
फिलहाल वैश्विक बाजार और निवेशक इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि दोनों देशों के बीच हुई सहमति कितनी तेजी से जमीन पर उतरती है और इसका दुनिया की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ता है.
ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर अब महंगाई के आंकड़ों में भी दिखने लगा है. अप्रैल महीने में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और नेचुरल गैस की कीमतों में तेजी के कारण थोक महंगाई कई साल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब सीधे भारतीय आम आदमी की जेब पर दिखाई देने लगा है. कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के बाद अब पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी बड़ी बढ़ोतरी कर दी गई है. सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दामों में 3.29 रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा किया है. बढ़ती तेल कीमतों से न सिर्फ लोगों का यात्रा खर्च बढ़ेगा, बल्कि आने वाले दिनों में खाने-पीने और रोजमर्रा की चीजें भी महंगी हो सकती हैं.
दिल्ली से मुंबई तक बढ़े पेट्रोल के दाम
नई कीमतों के बाद राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये से बढ़कर 97.77 रुपये प्रति लीटर हो गया है. वहीं डीजल की कीमत 87.67 रुपये से बढ़कर 90.67 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है. इसके अलावा दिल्ली में सीएनजी भी 2 रुपये महंगी होकर 79.09 रुपये प्रति किलो हो गई है.
कोलकाता में पेट्रोल की कीमत में सबसे ज्यादा 3.29 रुपये की बढ़ोतरी हुई है, जिसके बाद वहां पेट्रोल 108.74 रुपये प्रति लीटर हो गया है. मुंबई में पेट्रोल 3.14 रुपये महंगा होकर 106.68 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया, जबकि चेन्नई में 2.83 रुपये की बढ़ोतरी के बाद कीमत 103.67 रुपये प्रति लीटर हो गई है.
डीजल की कीमतों में भी बड़ा इजाफा
डीजल की कीमतों में भी 3 रुपये से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. कोलकाता में डीजल 3.11 रुपये महंगा होकर 95.13 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है. मुंबई में भी डीजल की कीमत 93.14 रुपये प्रति लीटर हो गई है. वहीं चेन्नई में डीजल 2.86 रुपये बढ़कर 95.25 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन महंगा होने से ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ेगी, जिसका असर सब्जी, दूध, राशन और अन्य जरूरी सामानों की कीमतों पर भी देखने को मिलेगा.
क्यों बढ़ रहे हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?
तेल कंपनियों के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी आने से उनका मार्जिन बुरी तरह प्रभावित हुआ है. कंपनियों का दावा है कि उन्हें हर महीने करीब 30,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा था, जिसके बाद कीमतें बढ़ाने का फैसला लिया गया. दरअसल ईरान युद्ध के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल करीब 50 फीसदी तक महंगा हो चुका है. भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 फीसदी कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, जिसमें खाड़ी देशों की बड़ी हिस्सेदारी है.
होर्मुज स्ट्रेट संकट से बढ़ी मुश्किलें
विशेषज्ञों के अनुसार होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से दुनिया की करीब 20 फीसदी तेल सप्लाई प्रभावित हुई है. यही वजह है कि ब्रेंट क्रूड की कीमतें लगातार चढ़ रही हैं. फिलहाल ब्रेंट क्रूड 1.35 फीसदी की तेजी के साथ 107.2 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है.
जानकारों का कहना है कि अगर ईरान युद्ध जल्द खत्म भी हो जाए, तब भी सप्लाई चेन सामान्य होने में लंबा समय लग सकता है. ऐसे में आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है.
महंगाई के मोर्चे पर बढ़ सकती है चिंता
ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर अब महंगाई के आंकड़ों में भी दिखने लगा है. अप्रैल महीने में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और नेचुरल गैस की कीमतों में तेजी के कारण थोक महंगाई कई साल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई.
ताजा आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल में पेट्रोल महंगाई दर 32.4 फीसदी तक पहुंच गई, जो एक महीने पहले सिर्फ 2.50 फीसदी थी. वहीं हाई-स्पीड डीजल की महंगाई 3.62 फीसदी से बढ़कर 25.19 फीसदी हो गई है. इससे साफ है कि आने वाले समय में आम आदमी पर महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है.
गुरुवार को सेंसेक्स 789.74 अंक की बढ़त के साथ 75,398.72 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 277 अंक चढ़कर 23,689.60 के स्तर पर पहुंच गया था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
14 मई को घरेलू शेयर बाजार में शानदार तेजी देखने को मिली थी. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स करीब 790 अंक उछला, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी ने भी मजबूत बढ़त दर्ज की थी. वैश्विक संकेतों और अमेरिका-चीन संबंधों में सुधार की उम्मीद से बाजार में खरीदारी का माहौल बना रहा. हालांकि रुपये का ऑल टाइम लो पर पहुंचना चिंता का विषय रहा. अब 15 मई के कारोबारी सत्र में निवेशकों की नजर तिमाही नतीजों, वैश्विक बाजारों, कच्चे तेल की कीमतों और अडानी, एयरटेल, जियो फाइनेंशियल जैसे बड़े शेयरों पर रहने वाली है.
कल बाजार में क्यों आई थी तेजी?
गुरुवार को बीएसई सेंसेक्स 789.74 अंक की बढ़त के साथ 75,398.72 पर बंद हुआ था, जबकि एनएसई निफ्टी 277 अंक चढ़कर 23,689.60 के स्तर पर पहुंच गया था. बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और चीन के बीच बेहतर रिश्तों की उम्मीद रही. निवेशकों को डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग की संभावित बातचीत से सकारात्मक संकेत मिलने की उम्मीद है.
इसके अलावा फार्मा, हेल्थकेयर और मेटल सेक्टर में जोरदार खरीदारी देखने को मिली थी. भारती एयरटेल, एचडीएफसी बैंक, अडानी पोर्ट्स और बजाज फाइनेंस जैसे दिग्गज शेयरों में मजबूत तेजी दर्ज की गई थी.
रुपये की कमजोरी आज भी बढ़ा सकती है चिंता
शेयर बाजार में तेजी के बावजूद रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया था. कारोबार के दौरान रुपया 95.86 प्रति डॉलर तक फिसल गया था. विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और विदेशी निवेशकों की बिकवाली आज भी बाजार की चाल को प्रभावित कर सकती हैं.
आज इन शेयरों में रह सकती है सबसे ज्यादा हलचल
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार आज के कारोबार में Adani Enterprises, Bharti Airtel, Jio Financial Services, HCL Technologies और Kirloskar Oil Engines जैसे शेयर फोकस में रह सकते हैं. Adani Enterprises में बड़ी ब्लॉक डील हुई है, जबकि HCL Technologies ने Red Hat के साथ AI सेक्टर में रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की है. वहीं, Bharti Airtel के ARPU में गिरावट और Jio Financial Services में Morgan Stanley की हिस्सेदारी खरीद भी निवेशकों का ध्यान खींच सकती है. इसके अलावा Signature Global, Zaggle Prepaid Ocean Services और Davangere Sugar से जुड़ी खबरों का असर भी शेयरों पर देखने को मिल सकता है.
आज आएंगे कई बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजे
15 मई को Tata Steel, Power Grid, NHPC, Hindustan Copper, ITC Hotels, Symphony और Gland Pharma समेत कई बड़ी कंपनियां अपने चौथी तिमाही के नतीजे जारी करेंगी. इन कंपनियों के रिजल्ट्स के आधार पर आज बाजार में सेक्टरवार हलचल बढ़ सकती है और निवेशकों की रणनीति भी बदल सकती है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
भारत का डायरेक्ट सेलिंग उद्योग लगातार विस्तार की ओर है. बढ़ता कारोबार, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और मजबूत क्षेत्रीय नेटवर्क इस सेक्टर की मजबूती को दर्शाते हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत का डायरेक्ट सेलिंग उद्योग लगातार मजबूत रफ्तार से आगे बढ़ रहा है. वित्त वर्ष 2024-25 में इस सेक्टर का कारोबार ₹23,021 करोड़ तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष के ₹22,142 करोड़ की तुलना में लगभग 4% की वृद्धि दर्शाता है. आज नई दिल्ली में इंडियन डायरेक्ट सेलिंग एसोसिएशन (IDSA) की ‘डायरेक्ट सेलिंग इंडस्ट्री आउटलुक 2025’ की रिपोर्ट लॉन्च हुई, जिसमें बताया गया है कि यह उद्योग न केवल आर्थिक रूप से मजबूत हो रहा है, बल्कि रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर भी पैदा कर रहा है.
पिछले छह वर्षों में स्थिर वृद्धि
रिपोर्ट के अनुसार, डायरेक्ट सेलिंग उद्योग ने पिछले छह वर्षों में 6.5% की स्थिर वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) दर्ज की है. वित्त वर्ष 2019-20 में जहां इस उद्योग का आकार लगभग ₹16,800 करोड़ था, वहीं 2024-25 तक यह बढ़कर ₹23,021 करोड़ हो गया. यह वृद्धि बढ़ते उपभोक्ता भरोसे और विस्तारित सेल्स नेटवर्क को दर्शाती है.
महिलाओं की भागीदारी में लगातार बढ़ोतरी
इस उद्योग में महिलाओं की भागीदारी भी तेजी से बढ़ रही है. महिला डायरेक्ट सेलर्स की हिस्सेदारी 44% से बढ़कर 48% तक पहुंच गई है, जो इस क्षेत्र में बढ़ते महिला सशक्तिकरण का संकेत है. यह बदलाव बताता है कि डायरेक्ट सेलिंग अब महिलाओं के लिए आय और उद्यमिता का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनता जा रहा है.
क्षेत्रवार बिक्री में उत्तर भारत सबसे आगे
क्षेत्रवार आंकड़ों के अनुसार, कुल बिक्री में उत्तर भारत 27.6% हिस्सेदारी के साथ पहले स्थान पर है. इसके बाद पश्चिमी क्षेत्र 25.47% हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर रहा. पूर्वी क्षेत्र की हिस्सेदारी 22.47%, दक्षिणी क्षेत्र की 17.81% और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र की 6.67% रही.
किन उत्पादों की सबसे ज्यादा बिक्री
डायरेक्ट सेलिंग उद्योग में वेलनेस उत्पाद सबसे प्रमुख श्रेणी बने हुए हैं. इसके बाद कॉस्मेटिक्स और पर्सनल केयर उत्पाद दूसरे सबसे बड़े सेगमेंट के रूप में उभरे हैं. यह दर्शाता है कि स्वास्थ्य और व्यक्तिगत देखभाल से जुड़े उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है.
राज्यों में महाराष्ट्र सबसे आगे
राज्यवार प्रदर्शन में महाराष्ट्र ने शीर्ष स्थान हासिल किया है. राज्य की कुल बिक्री में हिस्सेदारी 15.3% रही, जो देश में सबसे अधिक है. यह राज्य डायरेक्ट सेलिंग नेटवर्क और उपभोक्ता आधार दोनों में मजबूत स्थिति बनाए हुए है.
उद्योग को लेकर विशेषज्ञ और नीति-निर्माताओं की राय
रिपोर्ट लॉन्च कार्यक्रम में सांसद और CAIT महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि भारत आर्थिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है और ऐसे उद्योग ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. उन्होंने डायरेक्ट सेलिंग को स्वरोजगार, उद्यमिता और आर्थिक भागीदारी बढ़ाने वाला मजबूत माध्यम बताया.
उन्होंने यह भी कहा कि यह उद्योग आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूती दे रहा है और लाखों लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध करा रहा है. साथ ही उन्होंने उद्योग से नैतिक व्यापार, उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद और मजबूत उपभोक्ता सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया.
भारत का डायरेक्ट सेलिंग उद्योग लगातार विस्तार की ओर है. बढ़ता कारोबार, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और मजबूत क्षेत्रीय नेटवर्क इस सेक्टर की मजबूती को दर्शाते हैं. आने वाले वर्षों में यह उद्योग रोजगार सृजन और आर्थिक विकास में और बड़ी भूमिका निभा सकता है.
अप्रैल में WPI में मासिक आधार पर भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो मार्च की तुलना में 3.86% अधिक रही. इसके मुकाबले मार्च में यह वृद्धि सिर्फ 1.52% थी, जिससे यह साफ होता है कि थोक बाजार में कीमतों का दबाव तेजी से बढ़ रहा है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश में थोक महंगाई ने अप्रैल 2026 में अचानक तेज रफ्तार पकड़ ली है. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई बढ़कर 8.3% पर पहुंच गई है, जबकि मार्च में यह सिर्फ 3.88% थी. करीब साढ़े तीन साल बाद यह स्तर सबसे ऊंचा माना जा रहा है. इस बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ा कारण ईंधन, ऊर्जा, कच्चे तेल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में आई तेज महंगाई है, जिसका सीधा असर उत्पादन लागत और बाजार कीमतों पर दिख रहा है.
ईंधन और ऊर्जा की कीमतों ने बढ़ाया सबसे ज्यादा दबाव
अप्रैल में महंगाई बढ़ने में सबसे बड़ी भूमिका फ्यूल एंड पावर सेक्टर की रही. इस श्रेणी की महंगाई मार्च के 1.05% से उछलकर अप्रैल में 24.71% तक पहुंच गई. इसी दौरान ऊर्जा से जुड़े इंडेक्स में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो 153.7 से बढ़कर 181.7 हो गया. यह स्पष्ट संकेत है कि ऊर्जा लागत में लगातार बढ़ोतरी हो रही है.
कच्चे तेल से लेकर पेट्रोल-डीजल तक महंगा हुआ ईंधन
ईंधन क्षेत्र में सबसे तेज उछाल कच्चे तेल और गैस की कीमतों में देखा गया. क्रूड पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की महंगाई दर 67.18% तक पहुंच गई, जबकि कच्चे तेल की महंगाई 88.06% दर्ज की गई. इसी अवधि में पेट्रोल की महंगाई 32.40% और डीजल (HSD) की 25.19% रही. एलपीजी की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखी गई, जिसकी महंगाई दर 10.92% दर्ज हुई.
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी बढ़ा लागत दबाव
अप्रैल में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की महंगाई बढ़कर 4.62% हो गई, जो मार्च में 3.39% थी. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 22 में से 21 मैन्युफैक्चरिंग समूहों में कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे यह साफ होता है कि उद्योगों में उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है.
किन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा
टेक्सटाइल सेक्टर में महंगाई बढ़कर 7.30% तक पहुंच गई, जबकि केमिकल्स और केमिकल प्रोडक्ट्स में यह 5.09% रही. बेसिक मेटल्स में महंगाई 7% दर्ज की गई. इसके अलावा फूड प्रोडक्ट्स और मशीनरी जैसे सेक्टरों में भी कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई, जिससे औद्योगिक लागत और तैयार उत्पादों की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है.
खाद्य महंगाई में हल्की बढ़ोतरी, लेकिन स्थिति नियंत्रण में
खाद्य वस्तुओं की कीमतों में अप्रैल के दौरान हल्की बढ़ोतरी देखी गई, लेकिन कुल मिलाकर स्थिति अभी भी नियंत्रण में बनी हुई है. WPI फूड इंडेक्स मार्च के 1.85% से बढ़कर अप्रैल में 2.31% पर पहुंच गया, जबकि खाद्य वस्तुओं की कुल महंगाई 1.98% दर्ज की गई. इस दौरान फल, दूध, अंडा, मांस, मछली और सब्जियों जैसी वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई, जिससे घरेलू बजट पर हल्का असर पड़ा है.
कुछ जरूरी चीजें अभी भी सस्ती
कुछ प्रमुख खाद्य वस्तुओं की कीमतों में गिरावट भी दर्ज की गई है, जिससे महंगाई का दबाव कुछ हद तक संतुलित रहा है. प्याज की कीमतों में भारी गिरावट देखी गई, जिसकी महंगाई दर -26.45% रही. आलू की कीमतें भी काफी कम हुईं और इसकी महंगाई दर -30.04% दर्ज की गई. दालों की कीमतों में भी कमी देखी गई, जहां महंगाई दर -4.03% रही.
महीने-दर-महीने भी तेज बढ़ोतरी
अप्रैल में WPI में मासिक आधार पर भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो मार्च की तुलना में 3.86% अधिक रही. इसके मुकाबले मार्च में यह वृद्धि सिर्फ 1.52% थी, जिससे यह साफ होता है कि थोक बाजार में कीमतों का दबाव तेजी से बढ़ रहा है.
विशेषज्ञों के अनुसार, अप्रैल में WPI का यह उछाल उम्मीदों से काफी ज्यादा रहा है. अनुमानित 5.50% के मुकाबले यह 8.30% तक पहुंच गया, जो अर्थव्यवस्था में बढ़ते लागत दबाव का संकेत है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस वृद्धि के पीछे कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, ईंधन और बिजली की लागत में इजाफा, आयातित महंगाई और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव प्रमुख कारण रहे हैं.
अप्रैल 2026 की WPI महंगाई यह दिखाती है कि थोक स्तर पर कीमतों का दबाव तेजी से बढ़ रहा है. ईंधन और ऊर्जा इसकी सबसे बड़ी वजह बने हुए हैं, जबकि मैन्युफैक्चरिंग और कच्चे माल की लागत भी लगातार महंगाई को बढ़ा रही है. अगर यही रुझान जारी रहता है, तो आने वाले महीनों में इसका असर खुदरा महंगाई और आम उपभोक्ताओं की जेब पर और अधिक देखने को मिल सकता है.
Ixigo का नया AI असिस्टेंट “तारा” यूजर की ट्रैवल हिस्ट्री, पसंद, फैमिली कॉन्टेक्स्ट और पुराने बुकिंग पैटर्न को समझकर पर्सनलाइज्ड सुझाव भी देगा.
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रितु राणा
भारत की प्रमुख ट्रैवल टेक कंपनी Ixigo ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित अपने नए प्लेटफॉर्म “Ixigo Next” की घोषणा की है. कंपनी का दावा है कि यह सिर्फ एक ट्रैवल बुकिंग प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि यात्रियों को भरोसा, सुविधा और रियल टाइम सहायता देने वाला स्मार्ट ट्रैवल इकोसिस्टम होगा.
लॉन्च इवेंट के दौरान कंपनी के को-फाउंडर रजनीश कुमार ने कहा कि यात्रा केवल टिकट बुकिंग तक सीमित नहीं होती, बल्कि इसके पीछे भावनाएं जुड़ी होती हैं. चाहे परिवार के साथ छुट्टियां हों, हनीमून, परीक्षा देने जा रहा छात्र या लंबे समय बाद घर लौटता कोई सदस्य, हर सफर अपने साथ भावनात्मक जुड़ाव लेकर आता है. ऐसे में यात्रियों को सिर्फ सस्ती टिकट नहीं, बल्कि भरोसेमंद सहायता और मानसिक शांति की जरूरत होती है.
2012 से AI और मशीन लर्निंग पर काम
कंपनी के मुताबिक, Ixigo ने 2012 में ही मशीन लर्निंग और AI पर काम शुरू कर दिया था, जब यह तकनीक शुरुआती दौर में थी. ट्रैवल इंडस्ट्री की जटिल समस्याओं को हल करने, अनिश्चितताओं को कम करने और यात्रियों को बेहतर अनुभव देने के लिए कंपनी लगातार AI आधारित सिस्टम विकसित कर रही है.
क्या है “Ixigo Next”?
Rajnish Kumar ने कहा कि दुनिया इस समय AI क्रांति के सबसे बड़े दौर से गुजर रही है और यह तकनीक सॉफ्टवेयर की प्रकृति को पूरी तरह बदल रही है. उनके मुताबिक, AI अब केवल सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह योजना बना सकता है, निर्णय ले सकता है और कई काम अपने आप कर सकता है.
कंपनी के अनुसार “Ixigo Next” चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है:
1. इंटेलिजेंट वॉइस मॉडल
2. यूजर बिहेवियर और ट्रैवल डेटा
3. रियल टाइम सप्लाई और बुकिंग डेटा
4. कंपनी का खुद का AI इंटेलिजेंस लेयर
“तारा” बनेगा स्मार्ट ट्रैवल साथी
Ixigo ने अपने नए मल्टीमॉडल AI असिस्टेंट “तारा” को ऐप का कन्वर्सेशन कोर बनाया है. यूजर्स हिंदी, अंग्रेजी और हिंग्लिश में वॉइस, टेक्स्ट या टैप के जरिए तारा से बातचीत कर सकेंगे. कंपनी का कहना है कि जल्द ही इसमें कई अन्य भारतीय भाषाओं का सपोर्ट भी जोड़ा जाएगा.
रजनीश ने बिजनेस वर्ल्ड हिंदी से बातचीत में बताया कि तारा केवल सामान्य सर्च तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जटिल और इंटेंट आधारित ट्रैवल रिक्वेस्ट को भी समझ सकेगा. उदाहरण के तौर पर कोई यूजर पूछ सकता है, “मुझे दुबई में ऐसा होटल दिखाओ जहां इन्फिनिटी पूल हो और बुर्ज खलीफा का व्यू मिलता हो.” AI सिस्टम यूजर की जरूरत को समझते हुए उसी के अनुसार सुझाव देगा. इसके अलावा यह AI असिस्टेंट यूजर की ट्रैवल हिस्ट्री, पसंद, फैमिली कॉन्टेक्स्ट और पुराने बुकिंग पैटर्न को समझकर पर्सनलाइज्ड सुझाव भी देगा. उन्होंने बताया कि तारा अभी केवल हिंदी, अंग्रेजी और हिंग्लिश भाषा को समझने में सक्षम हैं, लेकिन आगे चलकर इसमें और भी क्षेत्रीय भाषाओं को जोड़ा जाएगा.
यात्रा के दौरान भी मिलेगा रियल टाइम सपोर्ट
कंपनी के अनुसार तारा केवल यात्रा की योजना बनाने तक सीमित नहीं रहेगा. यह फ्लाइट शेड्यूल मॉनिटर करेगा, कैंसिलेशन और रिफंड मैनेज करेगा, साथ ही मौसम, टर्मिनल, गेट और अन्य जरूरी ट्रैवल अपडेट रियल टाइम में देगा.
AI सिस्टम एयरपोर्ट लाउंज, वैकल्पिक रूट और दूसरी ट्रैवल सुविधाओं के सुझाव भी देगा, जिससे यात्रियों को अधिक सहज अनुभव मिल सके. कंपनी का कहना है कि नया AI सिस्टम यात्रियों की पसंद, सर्च हिस्ट्री और यात्रा पैटर्न को समझकर हाइपर-पर्सनलाइज्ड अनुभव तैयार करेगा.
“ट्रिप मोड” देगा हर चरण में सहायता
Ixigo ने अपने नए ऐप में “ट्रिप मोड” फीचर भी जोड़ा है. यह एक बिल्ट-इन ट्रैवल साथी की तरह काम करेगा, जिसमें बोर्डिंग पास, गेट डिटेल्स, बैगेज बेल्ट अपडेट और अन्य रियल टाइम अलर्ट एक ही स्क्रीन पर उपलब्ध होंगे. यह फीचर यात्रा के हर चरण में यूजर की मदद करेगा. इसमें एयरपोर्ट के लिए सही समय पर निकलने के सुझाव, ट्रैफिक अपडेट और यात्रा से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारी भी शामिल होगी.
AI एजेंट संभालेंगे कई जरूरी काम
कंपनी ने “एजेंटिक ट्रैवल फ्लो” की भी शुरुआत की है. इसके तहत AI एजेंट बैकग्राउंड में कई जरूरी ट्रैवल टास्क अपने आप पूरा करेगा. AI एजेंट सीधे व्हाट्सऐप पर बोर्डिंग पास भेज सकेगा, Apple Wallet, और Google Wallet में सेव करने का विकल्प देगा और डिजीयात्रा इंटीग्रेशन के जरिए एयरपोर्ट अनुभव को आसान बनाएगा.
अगर फ्लाइट में देरी, बदलाव या कैंसिलेशन होता है, तो AI एजेंट तुरंत यूजर को अलर्ट करेगा और जरूरत पड़ने पर रिफंड प्रक्रिया भी मैनेज करेगा. कंपनी ने स्पष्ट किया कि इन फीचर्स में यूजर की अनुमति और प्राइवेसी का पूरा ध्यान रखा जाएगा.
“कंपनियों को खुद को खुद ही डिसरप्ट करना होगा”
रजनीश ने बताया कि केवल AI फीचर जोड़ना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरी कंपनी को AI-फ्रेंडली बनाना जरूरी है. इसके लिए Ixigo ने अलग टीम तैयार की है, जो कंपनी के डेटा, सिस्टम और वर्कफ्लो को AI-रीडेबल बना रही है. उन्होंने कहा, “अगर कंपनियां समय रहते खुद को नहीं बदलतीं, तो कोई नई और तेज कंपनी उन्हें पीछे छोड़ सकती है. इसलिए जरूरी है कि कंपनियां खुद को खुद ही डिसरप्ट करें.” उन्होंने यह भी कहा कि AI के दौर में केवल प्रोडक्ट नहीं, बल्कि पूरी संगठनात्मक संरचना को बदलना जरूरी हो गया है.
ट्रैवल सेक्टर में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा
Ixigo का दावा है कि उसके प्लेटफॉर्म पर लाखों यूजर्स की 4.8+ रेटिंग है और बड़ी संख्या में यात्री रिफंड प्रोटेक्शन जैसी सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं. कंपनी के अनुसार औसतन 3 घंटे के भीतर रिफंड प्रोसेस किया जाता है.
AI आधारित ट्रैवल प्लेटफॉर्म आने वाले वर्षों में ग्राहकों को ज्यादा स्मार्ट, तेज और व्यक्तिगत सेवाएं देंगे. ऐसे में Ixigo का यह कदम भारतीय ट्रैवल टेक सेक्टर में प्रतिस्पर्धा को और तेज कर सकता है.
सर्वे में यह भी सामने आया है कि एलपीजी सिलेंडर, आटा, खाद्य तेल, चीनी, दवाइयां और ईंधन जैसी वस्तुओं की खरीद सामान्य से करीब ढाई गुना तक बढ़ गई है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश में बढ़ती महंगाई और ईंधन की कीमतों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच शहरी भारतीय उपभोक्ता अब अपने घरेलू खर्चों में कटौती करने लगे हैं. एक नए सर्वे में सामने आया है कि लोग गैर-जरूरी खर्च टाल रहे हैं, जरूरी सामान का स्टॉक बढ़ा रहे हैं और तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर रुख कर रहे हैं. इप्सोस इंडिया के “कंज्यूमर पल्स सर्वे” के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और सप्लाई को लेकर अनिश्चितता ने उपभोक्ताओं के बीच आर्थिक चिंता बढ़ा दी है.
10 में से 9 उपभोक्ता खर्च घटाने को तैयार
सर्वे के अनुसार, लगभग 90 प्रतिशत शहरी उपभोक्ता महंगाई बढ़ने की स्थिति में अपने घरेलू बजट को और सख्त करने की तैयारी कर रहे हैं. अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ती चिंताओं ने लोगों को लंबे समय तक महंगाई बने रहने का संकेत दिया है. करीब दो-तिहाई लोगों ने कहा कि वे बड़े खर्च और महंगी खरीदारी फिलहाल टाल देंगे. वहीं, 60 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने यात्रा और छुट्टियों पर होने वाला खर्च कम करने की बात कही. इसके अलावा, आधे से ज्यादा लोगों ने बाहर खाना खाने, समारोहों और लाइफस्टाइल से जुड़े खर्चों में कटौती की योजना बनाई है.
जरूरी सामान का बढ़ा स्टॉक
सर्वे में यह भी सामने आया कि उपभोक्ता अब एहतियात के तौर पर जरूरी वस्तुओं का ज्यादा स्टॉक जमा कर रहे हैं. एलपीजी सिलेंडर, आटा, खाद्य तेल, चीनी, दवाइयां और ईंधन जैसी वस्तुओं की खरीद सामान्य से करीब ढाई गुना तक बढ़ गई है. लोग अब कम कीमत वाले विकल्प, छोटे पैक और डिस्काउंट ऑफर्स को प्राथमिकता दे रहे हैं. उपभोक्ताओं के बीच “वैल्यू फॉर मनी” सोच तेजी से बढ़ रही है.
पेट्रोल महंगा होने पर बढ़ेगी EV की मांग
ईंधन महंगाई का असर अब लोगों की वाहन खरीद पसंद पर भी दिखाई देने लगा है. सर्वे के मुताबिक, अगले छह महीनों में दोपहिया वाहन खरीदने की योजना बना रहे हर दो में से एक उपभोक्ता इलेक्ट्रिक मॉडल पर विचार कर रहा है. करीब दो-तिहाई संभावित खरीदारों ने कहा कि अगर पेट्रोल की कीमतों में 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी होती है, तो वे इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर खरीदना पसंद करेंगे. दिलचस्प बात यह है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमत 5,000 से 8,000 रुपये तक बढ़ने के बावजूद आधे से ज्यादा लोग EV खरीदने का फैसला नहीं बदलेंगे.
कंपनियों से कीमतें स्थिर रखने की उम्मीद
सर्वे में शामिल लगभग तीन-चौथाई उपभोक्ताओं का मानना है कि मौजूदा अनिश्चित माहौल में कंपनियों को कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी से बचना चाहिए. लोगों की अपेक्षा है कि कंपनियां जरूरी सामान की सप्लाई बनाए रखें और सस्ते विकल्प उपलब्ध कराएं. इप्सोस India के CEO सुरेश रामालिंगम ने कहा कि वैश्विक संघर्ष अब सीधे भारतीय उपभोक्ताओं की आर्थिक चिंताओं को प्रभावित कर रहे हैं. इससे महंगाई, आय सुरक्षा और रोजमर्रा के खर्चों को लेकर लोगों की सोच तेजी से बदल रही है. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कंपनियों को उपभोक्ताओं की बदलती प्राथमिकताओं और “किफायती खरीदारी” की बढ़ती मांग के अनुसार अपनी रणनीति बनानी होगी.
ब्यूटी और फिटनेस पर खर्च बरकरार
हालांकि, खर्च में कटौती के बीच कुछ लाइफस्टाइल श्रेणियां अब भी मजबूत बनी हुई हैं. सर्वे के अनुसार, ब्यूटी और पर्सनल केयर उत्पाद लोगों की पसंदीदा “सेल्फ-इंडल्जेंस” कैटेगरी बनी हुई है. इसके बाद कैफे बेवरेज, स्ट्रीमिंग सब्सक्रिप्शन और फिटनेस मेंबरशिप जैसी सेवाओं पर लोग अब भी खर्च कर रहे हैं.
रामालिंगम ने कहा कि फिलहाल सरकार द्वारा खुदरा ईंधन कीमतों को स्थिर रखने से उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिली है. हालांकि, कमर्शियल एलपीजी की बढ़ती कीमतें आने वाले महीनों में बाहर खाना खाने और फूड डिलीवरी को महंगा बना सकती हैं.
कंपनी के मुताबिक दूध उत्पादन को बनाए रखने और किसानों को बेहतर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है. इससे डेयरी सेक्टर में सप्लाई चेन को स्थिर बनाए रखने में भी मदद मिलेगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देशभर में दूध की कीमतों में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी है. अमूल के बाद अब मदर डेयरी ने भी दूध के दाम बढ़ाने का ऐलान कर दिया है. कंपनी ने विभिन्न श्रेणियों के दूध पर 2 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की है. नई कीमतें 14 मई 2026 से लागू हो गई हैं. कंपनी का कहना है कि किसानों से दूध खरीदने की लागत, पशु चारा, ईंधन और पैकेजिंग खर्च बढ़ने की वजह से यह फैसला लेना पड़ा.
किसानों से खरीद महंगी होने का असर
मदर डेयरी ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि पिछले एक साल में किसानों से दूध खरीदने की लागत करीब 6 प्रतिशत तक बढ़ गई है. कंपनी ने लंबे समय तक ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ नहीं डालने की कोशिश की, लेकिन लगातार बढ़ती लागत के चलते कीमतों में संशोधन जरूरी हो गया था.
कंपनी के मुताबिक दूध उत्पादन को बनाए रखने और किसानों को बेहतर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है. इससे डेयरी सेक्टर में सप्लाई चेन को स्थिर बनाए रखने में भी मदद मिलेगी.
अमूल ने भी बढ़ाए थे दाम
मदर डेयरी से पहले अमूल ने भी दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की घोषणा की थी. अमूल का कहना है कि दूध बिक्री से होने वाली आय का लगभग 75 से 80 प्रतिशत हिस्सा किसानों को भुगतान किया जाता है. ऐसे में किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए कीमतों में बदलाव किया गया है. कंपनी ने यह भी बताया कि पिछली बार दूध के दाम अप्रैल 2025 में बदले गए थे.
जानिए नई कीमतें
नई दरें लागू होने के बाद दिल्ली-एनसीआर में दूध की कीमतें इस प्रकार हो गई हैं.
1. खुला टोंड दूध, 56 रुपये से बढ़कर 58 रुपये प्रति लीटर
2. फुल क्रीम दूध, 72 रुपये प्रति लीटर
3. टोंड मिल्क, 58 रुपये से बढ़कर 60 रुपये प्रति लीटर
4. डबल टोंड दूध, 54 रुपये प्रति लीटर
5. गाय का दूध, 60 रुपये से बढ़कर 62 रुपये प्रति लीटर
इन नई कीमतों का सीधा असर आम उपभोक्ताओं के घरेलू बजट पर पड़ने वाला है, क्योंकि दूध रोजमर्रा की जरूरतों में शामिल है.
दिल्ली-एनसीआर में रोज 35 लाख लीटर दूध की बिक्री
मदर डेयरी दिल्ली-एनसीआर में प्रतिदिन करीब 35 लाख लीटर दूध की बिक्री करती है. कंपनी ने पिछले वित्त वर्ष में डेयरी उत्पादों और खाद्य तेलों की मजबूत मांग के चलते 17 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 20,300 करोड़ रुपये का कारोबार दर्ज किया.
उधर, डेयरी कंपनियों का कहना है कि किसानों को अधिक भुगतान करने से उत्पादन बनाए रखने और सप्लाई मजबूत करने में मदद मिलेगी. हालांकि, लगातार बढ़ती महंगाई के बीच दूध के दाम बढ़ने से आम लोगों की रसोई का बजट और प्रभावित हो सकता है.
यह फैसला सरकार की उस नीति को दर्शाता है जिसमें खाद्य महंगाई को नियंत्रित करना और घरेलू आपूर्ति को स्थिर रखना प्राथमिकता है. हालांकि इससे वैश्विक चीनी व्यापार और सप्लाई चेन पर बड़ा प्रभाव पड़ने की संभावना है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत सरकार ने तत्काल प्रभाव से चीनी (Sugar) के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है. यह रोक 30 सितंबर 2026 तक या अगले आदेश तक लागू रहेगी. सरकार का उद्देश्य घरेलू बाजार में बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करना और आपूर्ति को स्थिर बनाए रखना है.
DGFT ने जारी किया आदेश
विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT), वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत जारी आदेश में कच्ची, सफेद और रिफाइंड चीनी के निर्यात पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है. यह कदम नीति में बड़ा बदलाव है, जिसके तहत चीनी को “restricted” से हटाकर “prohibited” श्रेणी में डाल दिया गया है.
घरेलू उत्पादन में गिरावट बनी वजह
भारत, जो दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक और ब्राजील के बाद प्रमुख निर्यातक है, पहले 1.59 मिलियन मीट्रिक टन तक निर्यात की अनुमति दे चुका था. लेकिन अब लगातार दूसरे साल उत्पादन में गिरावट की आशंका जताई जा रही है, जिससे घरेलू मांग पूरी करना चुनौतीपूर्ण हो गया है.
मौसम और एल नीनो का असर
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में कमजोर उपज और आगामी मानसून पर एल नीनो के संभावित प्रभाव ने स्थिति और गंभीर कर दी है. इसी कारण सरकार ने घरेलू उपलब्धता को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है.
पहले से किए गए निर्यात सौदों पर आंशिक राहत
रिपोर्ट के अनुसार, करीब 8 लाख टन चीनी के निर्यात अनुबंध पहले ही किए जा चुके थे, जिनमें से 6 लाख टन से अधिक पहले ही भेजे जा चुके हैं. सरकार ने उन शिपमेंट्स को अनुमति दी है जो पहले से प्रक्रिया में थे या जहाज लोडिंग, पोर्ट पर आगमन या कस्टम क्लियरेंस की स्थिति में थे.
वैश्विक बाजार पर असर
भारत के इस फैसले से वैश्विक चीनी बाजार पर असर पड़ने की संभावना है. अब ब्राजील और थाईलैंड जैसे देश एशिया और अफ्रीका के बाजारों में अपनी आपूर्ति बढ़ा सकते हैं.
अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेज उछाल
घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमतों में तेजी देखी गई. न्यूयॉर्क में रॉ शुगर फ्यूचर्स 2% से अधिक बढ़े, जबकि लंदन में व्हाइट शुगर फ्यूचर्स लगभग 3% तक चढ़ गए.
घरेलू आपूर्ति और महंगाई नियंत्रण
यह फैसला सरकार की उस नीति को दर्शाता है जिसमें खाद्य महंगाई को नियंत्रित करना और घरेलू आपूर्ति को स्थिर रखना प्राथमिकता है. हालांकि इससे वैश्विक चीनी व्यापार और सप्लाई चेन पर बड़ा प्रभाव पड़ने की संभावना है.