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RBI के रेपो रेट बढ़ाने के फैसले पर क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स, जानें यहां
जैसी की संभावना जताई जा रही थी RBI ने रेपो रेट में इजाफा कर दिया है. इसके चलते अब कर्ज महंगा हो जाएगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने लगातार छठी बार ब्याज दरों (Repo rate) में इजाफा कर दिया है. इस बार रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की गई है, इसके साथ ही यह दर 6.50 फीसदी पर पहुंच गई है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की सोमवार से शुरू हुई मौद्रिक समीक्षा बैठक का आज अंतिम दिन है. इससे पहले RBI ने 2022 में पांच बार रेपो रेट में वृद्धि की थी. ये काफी हद तक पहले ही साफ हो गया था कि RBI लगातार छठी बार नीतिगत ब्याज दरों में इजाफा कर सकता है और हुआ भी वही.
Pre-Covid स्तर से पीछे हैं दरें
RBI के इस फैसले पर अपनी राय व्यक्त करते हुए LKP Securities के बैंकिंग एनालिस्ट Ajit Kabi ने कहा, 'आरबीआई ने रेपो रेट 25 बीपीएस बढ़ाकर 6.5% कर दी है. एमपीसी के 6 सदस्यों में से 4 ने दरों में बढ़ोतरी के पक्ष में मतदान किया. आरबीआई मुद्रास्फीति पर निगरानी जारी रखेगा. RBI गवर्नर के अनुसार, मुद्रास्फीति 4QFY23 के लिए 5.6% रहने की संभावना है और FY24 में 4% से ऊपर रह सकती है. नीतिगत दर अभी भी प्री-कोविड स्तर से पीछे हैं. दरों में मौजूदा बढ़ोतरी से फ्लोटिंग रेट लिंक्ड लोन के लिए EMI का बोझ बढ़ सकता है. हालांकि, EBLR से जुड़े लोन के बढ़ते अनुपात के कारण बैंक के NIMs के स्थिर रहने की संभावना है'.
बाजारों के लिए अच्छी खबर
वहीं, जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के चीफ इंवेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट वीके विजयाकुमार ने कहा - मौद्रिक नीति की घोषणा का मुख्य आकर्षण वित्त वर्ष 24 के लिए सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर में उम्मीद से बेहतर वृद्धि है, जो वित्त वर्ष की पहली तिमाही में तेजी से ऊपर की ओर संशोधन के साथ 6.4% और जी2 विकास दर क्रमशः 7.8% और 6.2% है. यह वर्तमान विकास गति को बनाए रखने वाली अर्थव्यवस्था में केंद्रीय बैंक के भरोसे का प्रतिबिंब है. RBI गवर्नर ने इस तथ्य पर जोर दिया कि जनवरी में अर्थव्यवस्था में ऋण वृद्धि 16.7% साल दर साल है. वित्त वर्ष 24 के सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि के बारे में आशावाद और सीपीआई मुद्रास्फीति को 5.3% पर रखना एफआईआई द्वारा असंतुलित बिक्री के संदर्भ में भी इक्विटी बाजारों के लिए अच्छी खबर है.
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