EPFO लगभग 27.73 करोड़ औपचारिक कर्मचारियों की वृद्धावस्था सेविंग्स को मैनेज करता है और 15% ETF (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स) में इन्वेस्ट करता है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
हिंडनबर्ग रिपोर्ट द्वारा मचाई गयी तबाही के बावजूद कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने अभी भी अडानी ग्रुप के दो स्टॉक्स में इन्वेस्टमेंट करना जारी रखा है. अगर इस हफ्ते होने वाली अपनी बैठक में भी EPFO अपनी इन्वेस्टमेंट के तरीकों में बदलाव नहीं करता है तो सितम्बर 2023 तक इस संस्था को अडानी पोर्ट्स और अडानी एंटरप्राइजेज में अपनी इन्वेस्टमेंट को जारी रखना पड़ेगा.
ETF में इतनी इन्वेस्टमेंट करता है EPFO
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो EPFO लगभग 27.73 करोड़ औपचारिक कर्मचारियों की वृद्धावस्था सेविंग्स को मैनेज करता है और अपने फंड में से 15% का इस्तेमाल NSE (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज) के निफ्टी 50 और BSE (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) के सेंसेक्स से जुड़े ETF (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स) में इन्वेस्ट करने के लिए करता है. मार्च 2022 तक EPFO, ETF में 1.57 लाख करोड़ रुपये इन्वेस्ट कर चुका है और वित्त वर्ष 23 में अतिरिक्त 8000 करोड़ रुपयों को इन्वेस्ट करेगा.
ट्रस्टीयों को भी नहीं पता थी ये इन्वेस्टमेंट
यह रिपोर्ट EPFO की 2 दिन की बैठक शुरू होने से पहले जारी की गयी है. दो दिनों तक चलने वाली इस बैठक में EPFO, ज्यादा सैलरी से जुड़ी पेंशन, वित्त वर्ष 23 के लिए इंटरेस्ट रेट्स और वार्षिक फाइनेंशियल अनुमानों के बारे में मुख्य रुप से बातचीत करता है. हिंडनबर्ग रिपोर्ट जारी होने के बाद अडानी ग्रुप में मची तबाही के बाद से एक्सपर्ट्स की मांग थी की EPFO अधिक पारदर्शिता के साथ काम करे. लेकिन EPFO के ट्रस्टीयों ने मीडिया को बताया कि उन्हें EPFO द्वारा अडानी ग्रुप में इन्वेस्टमेंट के बारे में नहीं पता था लेकिन डो दिनों तक चलने वाली इस अहम बैठक में इस मुद्दे पर भी बातचीत की जा सकती है.
विपक्षियों ने सरकार से किये सवाल
कांग्रेस नेता राहुल गांधी, जिनकी लोकसभा सदस्यता पिछले हफ्ते रद्द कर दी गयी थी, ने हिंदी में ट्विटर पर लिखा – LIC की पूंजी अडानी को, SBI की पूंजी अडानी को, EPFO की पूंजी भी अडानी को, ‘मोडानी’ के खुलासे के बाद भी जनता के रिटायरमेंट का पैसा अडानी की कंपनियों में निवेश क्यों किया जा रहा है? प्रधानमंत्री जी, न जांच, न जवाब! आखिर इतना डर क्यों? दूसरी तरफ शिवसेना की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी इस मुद्दे पर सवाल खड़े करते हुए एक ट्वीट किया और ट्वीट में लिखा - लगता है अडानी ग्रुप में मची तबाही के बाद जो प्रमुख इन्वेस्टर्स रह गए हैं वह राष्ट्रिय बैंक हैं, रिटायरमेंट फंड्स हैं, इंश्योरेंस फंड्स हैं, लोगों की मेहनत की कमाई है और मॉरिशस आधारित अविश्वसनीय कंपनियां हैं.
LIC की पूंजी, अडानी को!
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) March 27, 2023
SBI की पूंजी, अडानी को!
EPFO की पूंजी भी, अडानी को!
‘मोडानी’ के खुलासे के बाद भी, जनता के रिटायरमेंट का पैसा अडानी की कंपनियों में निवेश क्यों किया जा रहा है?
प्रधानमंत्री जी, न जांच, न जवाब! आख़िर इतना डर क्यों?
दो दिनों की बैठक है बहुत जरूरी
27 और 28 मार्च 2023 को होने वाली अपनी बैठक में EPFO, 2022-2023 के लिए कर्मचारियों के प्रोविडेंट फंड पर इंटरेस्ट रेट का खुलासा कर सकता है, वार्षिक अकाउंट्स के बारे में बातचीत कर सकता है और सुप्रीम कोर्ट द्वारा कर्मचारी पेंशन स्कीम 1995 के सब्सक्राइबरों को अधिक पेंशन का विकल्प चुनने के लिए 4 महीनों का अतिरिक्त समय देने के ऑर्डर के जवाब के बारे में विशेष रूप से बातचीत कर सकता है.
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कंपनी के निदेशक मंडल ने ₹1 के फेस वैल्यू वाले प्रत्येक शेयर पर ₹90.5 के फाइनल डिविडेंड की भी सिफारिश की है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
प्रमुख खाद्य उत्पाद (FMCG) कंपनी ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मजबूत प्रदर्शन किया है. कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 14.1% बढ़कर ₹593 करोड़ पहुंच गया. वहीं, कंसोलिडेटेड बिक्री 9.5% बढ़कर ₹4,964 करोड़ हो गई. कंपनी के मुताबिक, इनोवेशन, ब्रांड में बढ़ा निवेश और घरेलू मांग में सुधार से तिमाही प्रदर्शन को मजबूती मिली.
मुनाफे की रफ्तार बिक्री से ज्यादा
ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज ने 30 जून 2026 को समाप्त तिमाही के नतीजे गुरुवार को जारी किए. इस दौरान कंपनी का मुनाफा 14.1% बढ़ा, जबकि बिक्री में 9.5% की वृद्धि दर्ज की गई. स्टैंडअलोन आधार पर कंपनी की बिक्री करीब 10% बढ़ी, जो उसके विभिन्न प्रोडक्ट सेगमेंट में मांग मजबूत रहने का संकेत है. कंपनी के निदेशक मंडल ने ₹1 के फेस वैल्यू वाले प्रत्येक शेयर पर ₹90.5 के फाइनल डिविडेंड की भी सिफारिश की है.
मांग और ब्रांड निवेश से मिली मजबूती
ब्रिटानिया के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर रक्षित हरगेव ने कहा कि तिमाही की शुरुआत पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच हुई, जिससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारोबार में ईंधन और शिपमेंट लागत में तेज बढ़ोतरी हुई. इसके बावजूद कंपनी ने इन चुनौतियों के बीच बेहतर तरीके से कारोबार को संभाला और वॉल्यूम के साथ-साथ वैल्यू ग्रोथ भी दर्ज की. उन्होंने कहा कि पिछले साल की समान अवधि की तुलना में कंपनी के मुनाफे में डबल डिजिट ग्रोथ रही, जो टॉपलाइन ग्रोथ से आगे रही. कंपनी की ज्यादातर प्रमुख प्रोडक्ट कैटेगरी में तिमाही-दर-तिमाही मांग में सुधार देखने को मिला.
कंपनी ने बताया कि तिमाही के अंत तक रेवेन्यू ग्रोथ मिड-टीन्स में पहुंच गई थी. इसमें ई-कॉमर्स के तेजी से विस्तार, जनरल ट्रेड में मजबूत प्रदर्शन और विज्ञापन, इन्फ्लुएंसर तथा प्रमोशनल कैंपेन पर बढ़े खर्च की अहम भूमिका रही.
Marie Gold और NutriChoice जैसे ब्रांड पर फोकस
ब्रिटानिया ने अपने प्रमुख ब्रांड्स को मजबूत करने के लिए कई मार्केटिंग कैंपेन भी चलाए. Tea Day के दौरान Marie Gold, Health Day पर NutriChoice और Mother's Day के मौके पर Little Hearts को प्रमोट किया गया.
तमिलनाडु में Milk Bikis के Thirukkural कैंपेन जैसे क्षेत्रीय अभियानों के जरिए कंपनी ने स्थानीय उपभोक्ताओं के साथ जुड़ाव बढ़ाने की कोशिश की. इसके अलावा Dubai Kunafa Croissant जैसे नए प्रोडक्ट्स कंपनी की इनोवेशन-आधारित रणनीति का हिस्सा रहे.
इंटरनेशनल कारोबार में सुधार
ब्रिटानिया ने बताया कि तिमाही के आखिरी हिस्से में सप्लाई चेन से जुड़ी बाधाएं कम होने के साथ उसके अंतरराष्ट्रीय कारोबार में भी क्रमिक सुधार हुआ. हालांकि, कंपनी पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव पर करीबी नजर बनाए हुए है. कंपनी के मुताबिक, इन घटनाक्रमों का असर उसके विदेशी कारोबार के साथ-साथ घरेलू स्तर पर इनपुट कॉस्ट पर भी पड़ सकता है.
आगे इनोवेशन और कॉस्ट एफिशिएंसी पर जोर
ब्रिटानिया ने कहा कि घरेलू मांग के माहौल में सुधार के बीच उसका फोकस टिकाऊ रेवेन्यू ग्रोथ पर बना हुआ है. कंपनी नए प्रोडक्ट्स और इनोवेशन के जरिए ग्रोथ बढ़ाने के साथ ब्रांड में निवेश जारी रखेगी. इसके अलावा, मार्जिन को अनुशासित तरीके से मैनेज करने और कॉस्ट एफिशिएंसी बढ़ाने के लिए कंपनी की ओर से कई कदम उठाए जा रहे हैं.
इसका लक्ष्य कृषि अवशेष, पशुओं के गोबर, नगर निकायों के जैविक कचरे और अन्य बायोमास संसाधनों को स्वच्छ ईंधन और जैविक खाद में बदलकर कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) को भारत के ऊर्जा मिश्रण का प्रमुख हिस्सा बनाना है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
केंद्र सरकार ने देश में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 23,731 करोड़ रुपये की GOBARdhan (नेशनल सर्कुलर बायोएनर्जी) योजना को मंजूरी दे दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस योजना को स्वीकृति दी. इसका उद्देश्य कृषि अवशेष, गोबर, नगर निकायों के जैविक कचरे और अन्य बायोमास से कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) का उत्पादन बढ़ाना, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करना है. यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक लागू रहेगी.
स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा
इस योजना के तहत घरेलू CBG उत्पादन को लगभग 10 गुना तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है. इसके लिए सुनिश्चित मांग, स्थिर मूल्य, पूंजीगत सहायता, पाइपलाइन अवसंरचना, आसान ऋण और नई तकनीकों के विकास पर जोर दिया जाएगा. सरकार का मानना है कि इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटेगी और सर्कुलर बायोइकोनॉमी को बढ़ावा मिलेगा.
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय इस योजना को लागू करेगा. इसके तहत पहले से चल रही कई योजनाओं को एकीकृत किया गया है, जिनमें SATAT (सस्टेनेबल अल्टरनेटिव टुवर्ड्स अफोर्डेबल ट्रांसपोर्टेशन), जैविक खाद के लिए मार्केट डेवलपमेंट असिस्टेंस योजना, बायोमास एग्रीगेशन मशीनरी योजना, पाइपलाइन अवसंरचना विकास योजना और राष्ट्रीय बायोएनर्जी कार्यक्रम के तहत दी जाने वाली वित्तीय सहायता शामिल हैं. सरकार के अनुसार, पूर्व की योजनाओं के तहत 200 से अधिक CBG संयंत्र पहले ही शुरू किए जा चुके हैं.
योजना के छह प्रमुख घटक
योजना के तहत सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) कंपनियों के लिए CBG की खरीद सुनिश्चित की जाएगी ताकि वे अनिवार्य ब्लेंडिंग लक्ष्य पूरा कर सकें. सरकार ने CBG ब्लेंडिंग दायित्व वित्त वर्ष 2026-27 में 3%, 2027-28 में 4% और 2028-29 से 5% तय किया है. यह लक्ष्य परिवहन और घरेलू गैस दोनों क्षेत्रों पर लागू होगा.
सरकार ने CBG का प्रशासनिक मूल्य 2,110 रुपये प्रति MMBTU (मेट्रिक मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट) तय किया है, जिससे उत्पादकों को दीर्घकालिक राजस्व का भरोसा मिलेगा और निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा.
ग्रीनफील्ड परियोजनाओं को स्थापित CBG क्षमता के प्रति टन प्रतिदिन पर अधिकतम 2 करोड़ रुपये तक की पूंजीगत सहायता मिलेगी. क्षमता विस्तार करने वाली ब्राउनफील्ड परियोजनाओं को भी इस सहायता का लाभ मिलेगा. इसके अलावा फीडस्टॉक संग्रहण, जैविक खाद प्रसंस्करण और पाइपलाइन कनेक्टिविटी के लिए भी वित्तीय सहायता दी जाएगी. योजना के तहत क्लस्टर आधारित और स्वतंत्र पाइपलाइन नेटवर्क विकसित किए जाएंगे, जो CBG संयंत्रों को ट्रंक पाइपलाइन और सिटी गैस नेटवर्क से जोड़ेंगे.
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा सहारा
योजना में CBG उत्पादन से जुड़े सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए विशेष क्रेडिट गारंटी तंत्र का भी प्रावधान किया गया है. इससे छोटे डेवलपर्स, सहकारी समितियों और महिला उद्यमियों के लिए वित्त जुटाना आसान होगा.
इसके अलावा CBG इकोसिस्टम चैलेंज फंड बनाया जाएगा, जिसके जरिए फीडस्टॉक मैपिंग, जिला स्तरीय योजना, नई तकनीकों को अपनाने, जैविक खाद के मूल्यवर्धन, क्षमता निर्माण और जागरूकता कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाएगा.
सरकार का मानना है कि इस योजना से किसानों, फीडस्टॉक आपूर्तिकर्ताओं और ग्रामीण उद्यमियों के लिए आय के नए स्रोत तैयार होंगे. साथ ही वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी आएगी और जैविक खेती को भी मजबूती मिलेगी. सरकार को उम्मीद है कि एकीकृत नीति ढांचे और दीर्घकालिक प्रोत्साहनों के जरिए GOBARdhan योजना बायोएनर्जी क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ाएगी और भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन के साथ ग्रामीण आर्थिक विकास को नई गति देगी.
अगस्त में श्रीपद शेंदे अपने नेतृत्व के एक और वर्ष का जश्न मना रहे हैं. बैंकिंग, ब्रांडिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), बिजनेस एक्सीलेंस और कॉर्पोरेट स्ट्रैटेजी तक फैला उनका तीन दशकों का सफर भारत के वित्तीय सेवा उद्योग के उल्लेखनीय विकास को दर्शाता है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं और बीमा (BFSI) उद्योग में मार्केटिंग अब केवल ब्रांड कैंपेन और विज्ञापन तक सीमित नहीं रह गई है. आज यह ग्राहक अनुभव, तकनीक, डेटा, बिजनेस स्ट्रैटेजी और संगठनात्मक बदलाव के केंद्र में है. बहुत कम ऐसे नेता हैं जो इस बदलाव को श्रीपद शेंदे की तरह व्यापक रूप से प्रस्तुत करते हैं. श्रीपद शेंदे IDFC FIRST Bank में चीफ मार्केटिंग ऑफिसर (CMO) और बिजनेस एक्सीलेंस एवं कॉर्पोरेट स्ट्रैटेजी के प्रमुख हैं.
तीन दशकों से अधिक लंबे करियर में शेंदे ने एक ऐसा नेतृत्व विकसित किया है, जिसमें मार्केटिंग, कॉर्पोरेट स्ट्रैटेजी, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, बिजनेस एक्सीलेंस और वित्तीय समावेशन का अनूठा मेल देखने को मिलता है. ICICI Bank में प्रीमियम बैंकिंग सेवाओं को आकार देने से लेकर Nokia Mobile Payment Services में भारत के शुरुआती डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में योगदान देने और आज देश के सबसे तेजी से बढ़ते निजी बैंकों में से एक IDFC FIRST Bank में रणनीतिक बदलाव का नेतृत्व करने तक, उनका करियर भारत के वित्तीय सेवा उद्योग के बदलते स्वरूप का प्रतिबिंब है.
इस अगस्त के महीने में उनके नेतृत्व के एक और वर्ष का जश्न मनाते हुए यह कहना उचित होगा कि उनका पेशेवर सफर केवल पदों का नहीं, बल्कि निरंतर स्वयं को नए रूप में ढालने का रहा है. हर चरण में उन्होंने अपनी भूमिका का दायरा बढ़ाया है, मार्केटर से रणनीतिकार, संचार विशेषज्ञ से परिवर्तनकारी नेता और ब्रांड संरक्षक से संगठनात्मक उत्कृष्टता के वास्तुकार तक.
ब्रांड से आगे की सोच
श्रीपद शेंदे की सफलता पारंपरिक मार्केटिंग अधिकारियों की तरह नहीं रही. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत HDFC Bank और Tata AIG से की. इसके बाद उन्होंने ICICI Bank में एक दशक से अधिक समय बिताया, जहां उन्होंने प्रोडक्ट मैनेजमेंट, मार्केटिंग और प्रिविलेज बैंकिंग में कई नेतृत्वकारी भूमिकाएं निभाईं. उनकी जिम्मेदारियों में SME बिजनेस की मार्केटिंग का नेतृत्व करने से लेकर प्रिविलेज बैंकिंग ग्रुप के प्रोडक्ट और मार्केटिंग प्रमुख तक की भूमिकाएं शामिल रहीं. इससे उन्हें रिटेल बैंकिंग, संपन्न ग्राहकों, SME बैंकिंग और बड़े स्तर पर वित्तीय सेवाओं की मार्केटिंग का व्यापक अनुभव मिला.
Ashe MarCom के मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में उनके उद्यमशील अनुभव ने उनके दृष्टिकोण को और व्यापक बनाया. इसके बाद उन्होंने Nokia Mobile Payment Services में मार्केटिंग निदेशक के रूप में कार्य किया, उस समय जब भारत में मोबाइल आधारित वित्तीय सेवाओं का उदय हो रहा था. इस अनुभव ने उन्हें फिनटेक के मुख्यधारा में आने से पहले ही डिजिटल इकोसिस्टम की गहरी समझ प्रदान की.
जब उन्होंने 2018 में IDFC FIRST Bank जॉइन किया, तब IDFC Bank और Capital First के विलय के बाद संस्थान एक बड़े परिवर्तन के दौर से गुजर रहा था. केवल मार्केटिंग तक सीमित रहने के बजाय उन्होंने धीरे-धीरे बिजनेस एक्सीलेंस और कॉर्पोरेट स्ट्रैटेजी जैसी व्यापक जिम्मेदारियां संभालीं और बाद में बैंक के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर बनाए गए.
मार्केटिंग लीडर से ट्रांसफॉर्मेशन एग्जीक्यूटिव तक
श्रीपद शेंदे के नेतृत्व की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि उन्होंने केवल मार्केटिंग तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि पूरे संगठन के परिवर्तन का नेतृत्व किया. IDFC FIRST Bank में उनकी जिम्मेदारियां मार्केटिंग, कॉर्पोरेट स्ट्रैटेजी और बिजनेस एक्सीलेंस तक फैली हुई हैं. डिजिटल-फर्स्ट अर्थव्यवस्था में यही क्षेत्र तय करते हैं कि कोई वित्तीय संस्था किस तरह प्रतिस्पर्धा करेगी.
उनका काम इस व्यापक बदलाव को दर्शाता है कि आज केवल ग्राहक जोड़ना ही पर्याप्त नहीं है. प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त अब संगठनात्मक फुर्ती, प्रक्रिया उत्कृष्टता, तकनीक अपनाने और लगातार बेहतर ग्राहक अनुभव पर निर्भर करती है.
AI आधारित ग्राहक जुड़ाव, परिचालन उत्कृष्टता और रणनीतिक नवाचार पर बैंक का बढ़ता जोर भी इसी सोच को दर्शाता है. बिजनेस एक्सीलेंस और कॉर्पोरेट स्ट्रैटेजी में उनके नेतृत्व में कई पहलें तकनीक को ग्राहक-केंद्रित सोच के साथ जोड़ने पर केंद्रित रही हैं, न कि केवल डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन तक.
AI आधारित बैंकिंग के समर्थक
जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस दुनिया भर में वित्तीय सेवाओं को बदल रहा है, तब श्रीपद शेंदे उन बैंकिंग नेताओं में शामिल हैं जो केवल तकनीक के प्रदर्शन के बजाय AI के व्यावहारिक उपयोग की वकालत करते हैं.
इसका एक उदाहरण IDFC FIRST Bank द्वारा अमिताभ बच्चन के साथ भारत का पहला AI आधारित इंटरैक्टिव होलोग्राफिक बैंकिंग अनुभव शुरू करना है. इसका उद्देश्य बैंक शाखाओं में ग्राहकों को अधिक आकर्षक और आधुनिक अनुभव देना था. इस पहल के लॉन्च के दौरान शेंदे ने इसे नवाचार के जरिए बैंकिंग को "सरल, तेज और अधिक आकर्षक" बनाने का प्रयास बताया.
यह पहल इस व्यापक बदलाव को भी दर्शाती है कि अब ग्राहक अनुभव केवल शाखाओं या मोबाइल ऐप से तय नहीं होता, बल्कि इस बात से तय होता है कि तकनीक हर संपर्क बिंदु पर ग्राहकों को कितना व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकती है.
यही सोच IDFC FIRST Bank की ग्राहक-प्रथम रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है.
व्यवसाय से आगे वित्तीय समावेशन
तकनीक उनके पूरे करियर का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है, लेकिन श्रीपद शेंडे लगातार यह कहते रहे हैं कि वित्तीय नवाचार सभी के लिए सुलभ होना चाहिए. वह IDFC First Academy से भी जुड़े रहे हैं, जो बैंक की वित्तीय साक्षरता पहल है और जिसका उद्देश्य पूरे भारत में वित्तीय जागरूकता बढ़ाना है. विभिन्न साक्षात्कारों में उन्होंने देश में वित्तीय साक्षरता की बड़ी कमी की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा है कि वित्तीय शिक्षा केवल कुछ लोगों का विशेषाधिकार नहीं होनी चाहिए.
उन्होंने इस पहल के बारे में कहा था, "हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि वित्तीय साक्षरता केवल कुछ लोगों का विशेषाधिकार न होकर सभी का अधिकार बने." यह सोच उनके नेतृत्व का एक महत्वपूर्ण पहलू दर्शाती है कि बैंकिंग की वास्तविक सफलता तब होती है जब ग्राहक सही वित्तीय निर्णय लेने के लिए सक्षम बनें.
प्रभाव के आधार पर मिली पहचान
अपने करियर के शुरुआती दौर में भी श्रीपद शेंडे को ऐसी पहलों के लिए पहचान मिली, जिनमें व्यावसायिक विकास के साथ सामाजिक प्रभाव भी शामिल था. ICICI Bank की Emerging India पहल, जिससे वह जुड़े थे, को लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में स्थान मिला और बैंकिंग जगत के दिग्गज के. वी. कामथ ने इसकी सराहना की. इसके अलावा वित्तीय समावेशन की एक पहल, जिसके जरिए 10 लाख से अधिक लोगों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा गया, उसे भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर डॉ. सी. रंगराजन ने भी सराहा. ये उपलब्धियां उनके पूरे करियर में एक समान पैटर्न को दर्शाती हैं, व्यावसायिक लक्ष्यों के साथ व्यापक सामाजिक विकास को जोड़ना.
लगातार बदलते दौर में नेतृत्व
आधुनिक CMO की भूमिका अब पूरी तरह बदल चुकी है. आज मार्केटिंग लीडर्स से अपेक्षा की जाती है कि वे प्रोडक्ट स्ट्रैटेजी, ग्राहक अनुभव, तकनीक अपनाने, डेटा गवर्नेंस और संगठनात्मक परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में भी नेतृत्व करें.
श्रीपद शेंडे का करियर इसी बदलाव का उदाहरण है. उनका सफर पारंपरिक बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट, फिनटेक, कॉर्पोरेट स्ट्रैटेजी, AI आधारित नवाचार और संगठनात्मक उत्कृष्टता तक फैला है, ऐसे सभी क्षेत्र जो आज आधुनिक वित्तीय संस्थानों में एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं. उनका करियर यह दिखाता है कि मार्केटिंग नेतृत्व का भविष्य केवल ब्रांड बनाने में नहीं, बल्कि ऐसे संस्थान बनाने में है जो बदलाव के साथ खुद को ढाल सकें, नवाचार कर सकें और दीर्घकालिक मूल्य सृजित कर सकें.
रीमा भादुड़ी, BW रिपोर्टर्स
(लेखिका BW Businessworld में सीनियर एडिटोरियल लीड हैं. वह मुख्य रूप से मार्केटिंग, विज्ञापन, एक्सपीरिएंशियल मार्केटिंग और रिटेल पर लिखती हैं तथा BW Marketing World वर्टिकल को भी कवर करती हैं.)
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने आधिकारिक रूप से अपना नामांकन दाखिल कर दिया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के आगामी अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने गुरुवार को अपना नामांकन दाखिल किया. उनके नामांकन को देश के दिग्गज विधि विशेषज्ञों और पूर्व शीर्ष विधि अधिकारियों का समर्थन मिला है. पूर्व अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल, वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी और पूर्व सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने उनके नामांकन का प्रस्ताव और समर्थन किया.
गौरव भाटिया के नामांकन का प्रस्ताव भारत के पूर्व अटॉर्नी जनरल और वरिष्ठ अधिवक्ता के.के. वेणुगोपाल ने रखा, जिन्हें बार का 'भीष्म पितामह' भी माना जाता है. वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता और संवैधानिक कानून विशेषज्ञ राकेश द्विवेदी ने उनके नामांकन का समर्थन किया. गौरव भाटिया ने अपने करियर की शुरुआत में राकेश द्विवेदी के चैंबर में कार्य किया था. नामांकन पत्रों के एक अन्य सेट में भारत के पूर्व सॉलिसिटर जनरल और वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार ने भी उनके नामांकन का प्रस्ताव रखा.
चुनावी और प्रशासनिक अनुभव
गौरव भाटिया SCBA के चुनावों में पहले भी तीन बार उम्मीदवार रहे हैं और तीनों बार जीत दर्ज कर चुके हैं. उन्होंने वर्ष 2015-16 और 2016-17 में लगातार दो कार्यकाल तक एससीबीए के मानद सचिव (Honorary Secretary) के रूप में कार्य किया. इससे पहले वह वर्ष 2011-12 में संयुक्त सचिव (Joint Secretary) भी रह चुके हैं. बार के सदस्यों के बीच उनका कार्यकाल संस्थागत पारदर्शिता, सक्रिय नेतृत्व और सदस्यों के लिए आसान उपलब्धता के लिए जाना जाता है.
गौरव भाटिया की प्रमुख उपलब्धियां
गौरव भाटिया को वर्ष 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता (Senior Advocate) के रूप में नामित किया था. वह सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (Advocate-on-Record) भी रह चुके हैं और शीर्ष अदालत में लंबा अनुभव रखते हैं. वर्तमान में वह उत्तराखंड सरकार के वरिष्ठ अतिरिक्त महाधिवक्ता (Senior Additional Advocate General) हैं, जबकि इससे पहले उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त महाधिवक्ता (Additional Advocate General) की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं.
समर्थकों ने जताया भरोसा
नामांकन दाखिल करने के बाद उनके समर्थकों ने कहा कि गौरव भाटिया का नेतृत्व साहसिक रहा है और वह युवा व वरिष्ठ दोनों वर्ग के अधिवक्ताओं के लिए हमेशा सहज रूप से उपलब्ध रहे हैं. समर्थकों का कहना है कि यदि वह अध्यक्ष चुने जाते हैं तो सुप्रीम कोर्ट बार के सदस्यों के कल्याण, बुनियादी ढांचे के विकास और बार की आवाज को और मजबूत करने की दिशा में काम करेंगे.
गुरुवार को BSE सेंसेक्स 373.76 अंक (0.48%) चढ़कर 78,954.76 पर बंद हुआ, जबकि NSE निफ्टी 11.35 अंक (0.05%) की बढ़त के साथ 24,636 पर बंद हुआ.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में तेजी देखने को मिली. पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ. बैंकिंग, केमिकल और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे दिग्गज शेयरों में खरीदारी के दम पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 373.76 अंक (0.48%) चढ़कर 78,954.76 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 11.35 अंक (0.05%) की बढ़त के साथ 24,636 पर बंद हुआ. रिलायंस, SBI, BEL, ICICI बैंक और टाइटन सबसे बड़े गेनर्स रहे, जबकि पावर ग्रिड, TCS, इंडिगो, NTPC और मारुति जैसे शेयरों में दबाव देखने को मिला.
आज बाजार की शुरुआत कैसी रह सकती है?
शुक्रवार को बाजार की शुरुआत कमजोर रहने के संकेत मिल रहे हैं. GIFT Nifty करीब 90 अंक की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है, जिससे संकेत मिल रहा है कि घरेलू बाजार दबाव के साथ खुल सकते हैं. एशियाई बाजारों में भी कमजोरी है. जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी गिरावट में कारोबार कर रहे हैं. अमेरिकी बाजार भी गुरुवार को लाल निशान में बंद हुए, जिससे निवेशकों का सेंटीमेंट कुछ कमजोर हुआ है.
अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल पर नजर
बाजार की नजर एक बार फिर पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर रहेगी. ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने की आशंकाओं के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है. यदि तेल की कीमतों में बढ़ोतरी जारी रहती है तो इसका असर भारतीय बाजार की चाल पर भी देखने को मिल सकता है. सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से सोने और चांदी की कीमतों में भी मजबूती बनी हुई है.
आज आएंगे कई बड़ी कंपनियों के Q1 नतीजे
आज अप्रैल-जून तिमाही के नतीजे जारी करने वाली प्रमुख कंपनियों में SBI, Titan, Hindalco Industries, Godrej Consumer Products, PFC, Oil India, BEML, Inox Wind, Kaynes Technology, Lemon Tree Hotels, Raymond, Raymond Realty और Ramco Cements शामिल हैं. इन कंपनियों के नतीजों के आधार पर संबंधित शेयरों में तेज हलचल देखने को मिल सकती है.
IPO बाजार भी रहेगा एक्टिव
प्राइमरी मार्केट में भी आज गतिविधियां तेज रहेंगी. LEAP India और Technocraft Ventures के IPO आज खुल रहे हैं. इसके अलावा Optimystix Entertainment का IPO भी निवेशकों के लिए खुलेगा. वहीं LAPL Automotive IPO का दूसरा दिन रहेगा, जबकि Ardee Industries और Aegeus Technologies के IPO का अंतिम चरण होगा.
इन शेयरों पर रखें खास नजर
आज के कारोबार में Alkem Laboratories और Dabur India पर अमेरिकी FDA से जुड़े अपडेट का असर दिख सकता है. Kaveri Seeds टैक्स विवाद, ITC Hotels के घरेलू पर्यटन पर सकारात्मक आउटलुक, Anand Rathi Wealth में प्रमोटर समूह की हिस्सेदारी बिक्री, Grasim Industries द्वारा 750 करोड़ रुपये के कमर्शियल पेपर का भुगतान, Orient Electric में Nippon India Mutual Fund की हिस्सेदारी खरीद, KPIT Technologies में MIT की हिस्सेदारी बिक्री और Apollo Pipes में प्रमोटर की लगातार शेयर खरीद जैसे घटनाक्रम इन शेयरों को फोकस में रखेंगे. इसके अलावा SBI, Titan और Hindalco समेत जिन कंपनियों के तिमाही नतीजे आने हैं, उनके शेयरों पर भी निवेशकों की विशेष नजर रहेगी.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
कंपनी इस फंड का इस्तेमाल टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म को मजबूत करने, मार्केटिंग, कर्ज चुकाने और रणनीतिक अधिग्रहण के लिए करेगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
ई-कॉमर्स एनेबलमेंट प्लेटफॉर्म Shiprocket ने अपने बहुप्रतीक्षित आईपीओ का प्राइस बैंड ₹92-97 प्रति शेयर तय कर दिया है. ₹1,618 करोड़ का यह पब्लिक इश्यू 12 अगस्त को निवेशकों के लिए खुलेगा और 14 अगस्त को बंद होगा. वहीं, एंकर निवेशक 11 अगस्त को बोली लगा सकेंगे. कंपनी इस फंड का इस्तेमाल टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म को मजबूत करने, मार्केटिंग, कर्ज चुकाने और रणनीतिक अधिग्रहण के लिए करेगी.
फ्रेश इश्यू और OFS दोनों होंगे शामिल
Shiprocket का आईपीओ ₹1,100 करोड़ के फ्रेश इश्यू और ₹518 करोड़ के ऑफर फॉर सेल (OFS) का मिश्रण है. प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर पर कंपनी का वैल्यूएशन करीब ₹10,000 करोड़ आंका गया है. आईपीओ पूरा होने के बाद कंपनी के शेयर बीएसई (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर सूचीबद्ध होंगे.
जुटाई गई रकम का कहां होगा इस्तेमाल?
कंपनी फ्रेश इश्यू से मिलने वाली राशि का उपयोग अपने टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म को मजबूत करने, मुख्य और उभरते कारोबारों के लिए मार्केटिंग पर निवेश बढ़ाने, कुछ कर्ज चुकाने, रणनीतिक अधिग्रहण (Strategic Acquisitions) और सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों को पूरा करने में करेगी.
लॉजिस्टिक्स एग्रीगेटर से फुल-स्टैक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म तक का सफर
वर्ष 2012 में स्थापित Shiprocket ने लॉजिस्टिक्स एग्रीगेटर के रूप में शुरुआत की थी. आज कंपनी फुल-स्टैक ई-कॉमर्स एनेबलमेंट प्लेटफॉर्म बन चुकी है, जो शिपिंग, फुलफिलमेंट, पेमेंट्स, क्रॉस-बॉर्डर लॉजिस्टिक्स और टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस जैसी सेवाएं उपलब्ध कराती है. कंपनी के प्लेटफॉर्म का उपयोग लाखों विक्रेता, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSMEs) और डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) ब्रांड करते हैं. यह कारोबारियों को विभिन्न ऑनलाइन बिक्री चैनलों पर लॉजिस्टिक्स और ई-कॉमर्स संचालन को बेहतर ढंग से संचालित करने में मदद करता है.
निवेशकों की नजर रहेगी आईपीओ पर
भारत के प्राथमिक बाजार में लगातार सक्रियता के बीच Shiprocket का आईपीओ बाजार की प्रमुख पेशकशों में शामिल है. टेक्नोलॉजी और उपभोक्ता-केंद्रित कंपनियों के लगातार बाजार में आने के बीच निवेशकों की नजर इस इश्यू की मांग पर रहेगी. कंपनी को उम्मीद है कि भारत में तेजी से बढ़ते डिजिटल कॉमर्स और टेक्नोलॉजी आधारित लॉजिस्टिक्स सेवाओं की बढ़ती मांग का उसे फायदा मिलेगा.
वित्त वर्ष 2026-27 के पहले चार महीनों में कच्चे इस्पात का उत्पादन 2.6% बढ़कर 5.63 करोड़ टन पहुंचा, जबकि तैयार इस्पात की खपत 7.8% बढ़ी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
वित्त वर्ष 2026-27 के पहले चार महीनों (अप्रैल-जुलाई 2026) में भारत का स्टील उद्योग मजबूत वृद्धि के साथ आगे बढ़ा है. इस दौरान कच्चे इस्पात (Crude Steel) का उत्पादन सालाना आधार पर 2.6% बढ़कर 5.63 करोड़ टन (56.3 मिलियन टन) पहुंच गया. वहीं, तैयार स्टील (Finished Steel) की खपत में 7.8% की मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई. यह जानकारी इस्पात मंत्रालय द्वारा जारी अंतरिम आंकड़ों में सामने आई है.
उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी
अप्रैल-जुलाई 2026 के दौरान तैयार स्टील का उत्पादन 4% बढ़कर 5.43 करोड़ टन (54.3 मिलियन टन) हो गया, जबकि हॉट मेटल का उत्पादन 1.5% बढ़कर 3.16 करोड़ टन (31.6 मिलियन टन) रहा. केवल जुलाई 2026 की बात करें तो कच्चे इस्पात का उत्पादन 1.2% बढ़कर 1.43 करोड़ टन (14.3 मिलियन टन) पहुंच गया. इसी दौरान तैयार स्टील का उत्पादन 1.4% बढ़कर 1.37 करोड़ टन और हॉट मेटल उत्पादन 1.6% बढ़कर 81 लाख टन (8.1 मिलियन टन) दर्ज किया गया.
उत्पादन से तेज बढ़ी स्टील की मांग
घरेलू बाजार में स्टील की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है. अप्रैल-जुलाई 2026 के दौरान तैयार स्टील की खपत 7.8% बढ़कर 5.59 करोड़ टन (55.9 मिलियन टन) पहुंच गई. जुलाई 2026 में तैयार स्टील की खपत 1.44 करोड़ टन रही, जो पिछले साल जुलाई के 1.35 करोड़ टन की तुलना में 6.5% अधिक है. खपत की रफ्तार उत्पादन से अधिक रहने से साफ है कि वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत में घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है.
स्टील आयात में 36.6% की तेज बढ़ोतरी
अप्रैल-जुलाई 2026 के दौरान भारत का तैयार स्टील आयात 36.6% बढ़कर 27.7 लाख टन (2.77 मिलियन टन) हो गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 20.2 लाख टन था. मूल्य के लिहाज से आयात 43.1% बढ़कर 28,330.8 करोड़ रुपये पहुंच गया. वहीं, तैयार स्टील का निर्यात भी 35% बढ़कर 22.9 लाख टन (2.29 मिलियन टन) रहा. निर्यात का मूल्य 29.4% बढ़कर 18,105.4 करोड़ रुपये हो गया. हालांकि निर्यात बढ़ने के बावजूद अप्रैल-जुलाई 2026 के दौरान भारत तैयार स्टील के मामले में मात्रा के आधार पर शुद्ध आयातक (Net Importer) बना रहा.
जुलाई में स्टील की कीमतों में नरमी
जुलाई के दौरान घरेलू स्टील कीमतों में कुछ नरमी देखने को मिली, हालांकि अधिकांश प्रमुख उत्पादों के दाम पिछले साल की तुलना में अब भी ऊंचे रहे. 10 मिमी TMT बार की औसत कीमत जुलाई में 56,698 रुपये प्रति टन रही, जो जून के मुकाबले 5.6% कम, लेकिन पिछले साल जुलाई की तुलना में 3.7% अधिक थी. वहीं, हॉट रोल्ड (HR) कॉइल की औसत कीमत 69,828 रुपये प्रति टन रही. यह महीने-दर-महीने 0.4% कम रही, लेकिन सालाना आधार पर 13.3% अधिक थी.
SAIL और NMDC का शानदार प्रदर्शन
इस्पात मंत्रालय ने सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन पर भी प्रकाश डाला. SAIL ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 138% की वृद्धि के साथ 1,636 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया. कंपनी का परिचालन राजस्व 26,246 करोड़ रुपये रहा. इसके अलावा SAIL को DRDO की रक्षा धातुकर्म अनुसंधान प्रयोगशाला (DMRL) से नौसेना के युद्धपोतों और पनडुब्बियों के लिए DMR-249A, DMR-249B और DMR-249BK ग्रेड स्टील के निर्माण हेतु प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (Technology Transfer) का लाइसेंस भी मिला है.
वहीं, NMDC ने जुलाई में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 40.6 लाख टन (4.06 मिलियन टन) लौह अयस्क उत्पादन दर्ज किया, जो सालाना आधार पर 31% अधिक है. वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक कंपनी का कुल उत्पादन 19.16 मिलियन टन और बिक्री 15.15 मिलियन टन रही. कंपनी ने तांबा और अन्य रणनीतिक खनिजों में निवेश की संभावनाओं को लेकर अर्जेंटीना के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भी चर्चा की.
ग्रीन स्टील की दिशा में बढ़े कदम
स्टील उद्योग ने पर्यावरणीय स्थिरता की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रगति की है. SAIL ने जुलाई में राउरकेला स्टील प्लांट में अपनी पहली माइक्रो पेलेट प्लांट की शुरुआत की. 1.8 लाख टन वार्षिक क्षमता वाला यह संयंत्र स्टील निर्माण से निकलने वाले अपशिष्ट को उपयोगी माइक्रो पेलेट में बदलता है, जिससे कचरा कम होगा और कच्चे माल पर निर्भरता भी घटेगी.
इस हिस्सेदारी बिक्री के जरिए LIC ने मई 2027 की तय समयसीमा से काफी पहले 10% न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता की अनिवार्य शर्त भी पूरी कर ली.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
केंद्र सरकार ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) में अपनी हिस्सेदारी बेचकर करीब 3.3 अरब डॉलर (लगभग 31,500 करोड़ रुपये) जुटाए. इस ऑफर फॉर सेल (OFS) की सबसे खास बात इसकी बेहद तेज और गोपनीय तरीके से हुई प्रक्रिया रही. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस सौदे से जुड़े कुछ निवेश बैंकरों को भी अंतिम समय तक यह जानकारी नहीं थी कि हिस्सेदारी बिक्री का आकार कितना बड़ा होगा.
सरकार ने शुरुआत में LIC में 2.5% हिस्सेदारी बेचने की योजना बनाई थी, लेकिन संस्थागत निवेशकों की मजबूत मांग को देखते हुए इसे बढ़ाकर 6.5% कर दिया. इस तरह यह भारत के शेयर बाजार के जरिए किया गया अब तक का सबसे बड़ा सेकेंडरी शेयर सेल बन गया.
2027 की समयसीमा से पहले पूरी हुई अहम शर्त
इस हिस्सेदारी बिक्री के जरिए LIC ने मई 2027 की तय समयसीमा से काफी पहले 10% न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (Minimum Public Shareholding) की अनिवार्य शर्त भी पूरी कर ली. सरकार ने शेयरों का फ्लोर प्राइस 382 रुपये प्रति शेयर तय किया, जो पिछले कारोबारी सत्र के बंद भाव से करीब 11% कम था.
गोपनीयता बरतने के पीछे क्या थी वजह?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार ने सौदे के विस्तारित आकार की जानकारी बेहद सीमित दायरे में रखी. कुछ सलाहकारों और बैंकरों को भी अंतिम समय में ही इसकी जानकारी दी गई ताकि सूचना लीक होने से बचा जा सके और बाजार पर किसी तरह का नकारात्मक असर न पड़े. तेज निष्पादन के कारण बाजार में संभावित उतार-चढ़ाव का जोखिम भी कम रहा.
विनिवेश लक्ष्य पूरा करने की दिशा में बड़ा कदम
LIC की यह हिस्सेदारी बिक्री सरकार के वित्त वर्ष 2026-27 के 80,000 करोड़ रुपये के विनिवेश लक्ष्य का अहम हिस्सा है. बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों और सरकारी खर्च में इजाफे के कारण वित्तीय दबाव बढ़ने के बीच सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की सूचीबद्ध कंपनियों में हिस्सेदारी बिक्री की प्रक्रिया तेज कर रही है.
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया बाजार अस्थिरता के बावजूद इस OFS को संस्थागत निवेशकों से मिला मजबूत समर्थन यह दिखाता है कि बड़े सरकारी इश्यू के लिए निवेशकों की रुचि अभी भी बनी हुई है.
रिटेल निवेशकों की भागीदारी उम्मीद से कम
हालांकि संस्थागत निवेशकों की मजबूत मांग के चलते ग्रीनशू विकल्प पूरी तरह इस्तेमाल किया गया, लेकिन रिटेल निवेशकों की भागीदारी अपेक्षा से कम रही. व्यक्तिगत निवेशकों के लिए आरक्षित हिस्से में केवल लगभग 69% शेयरों के लिए ही बोलियां प्राप्त हुईं.
विशेषज्ञों का मानना है कि इस हिस्सेदारी बिक्री के बाद LIC के शेयरों में सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ने से उनकी लिक्विडिटी बेहतर होगी और भविष्य में कंपनी को अतिरिक्त वैश्विक इक्विटी इंडेक्स में शामिल होने का भी लाभ मिल सकता है.
इस साझेदारी के तहत हाई-टेक, मैन्युफैक्चरिंग और अंतरराष्ट्रीय कारोबार करने वाली भारतीय कंपनियों के लिए विशेष बीमा समाधान विकसित किए जाएंगे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
बजाज जनरल इंश्योरेंस (Bajaj) और वैश्विक बीमा कंपनी स्विस रे कॉर्पोरेट सॉल्यूशंस (Swiss Re Corporate Solutions) ने भारत में कमर्शियल इंश्योरेंस कारोबार को मजबूत करने के लिए साझेदारी की घोषणा की है. दोनों कंपनियों ने एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत हाई-टेक, मैन्युफैक्चरिंग और अंतरराष्ट्रीय कारोबार करने वाली भारतीय कंपनियों के लिए विशेष बीमा समाधान विकसित किए जाएंगे. यह साझेदारी आवश्यक नियामकीय मंजूरियों और अंतिम समझौतों के बाद लागू होगी.
भारतीय कंपनियों को मिलेगा वैश्विक बीमा समाधान
दोनों कंपनियां Swiss Re Corporate Solutions के इंटरनेशनल प्रोग्राम प्लेटफॉर्म का लाभ उठाते हुए भारतीय बाजार के लिए विशेष कमर्शियल इंश्योरेंस समाधान विकसित करेंगी. इसका फोकस हाई-टेक, मैन्युफैक्चरिंग और भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में अहम भूमिका निभाने वाले अन्य क्षेत्रों पर रहेगा. इसके अलावा, विदेशों में कारोबार करने वाली भारतीय कंपनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय बीमा कार्यक्रम भी उपलब्ध कराने की योजना है.
बहुराष्ट्रीय कंपनियों की जरूरतों पर रहेगा फोकस
Swiss Re Corporate Solutions के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) इवान गोंजालेज ने कहा कि आज बहुराष्ट्रीय कंपनियां ऐसे बीमा साझेदार चाहती हैं, जिनके पास स्थानीय बाजार की गहरी समझ के साथ वैश्विक स्तर की विशेषज्ञता और निर्बाध अंतरराष्ट्रीय सेवाएं उपलब्ध हों.
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता प्रमुख कमर्शियल इंश्योरेंस बाजार है और बजाज जनरल इंश्योरेंस के साथ मिलकर कंपनी कॉर्पोरेट ग्राहकों को बेहतर जोखिम प्रबंधन समाधान उपलब्ध कराने की दिशा में काम करेगी.
भारतीय कंपनियों को मिलेगा वैश्विक नेटवर्क का लाभ
बजाज जनरल इंश्योरेंस के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (MD & CEO) डॉ. तपन सिंघल ने कहा कि भारत की आर्थिक विकास यात्रा अब वैश्विक अर्थव्यवस्था से गहराई से जुड़ चुकी है. भारतीय कंपनियां तेजी से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार कर रही हैं, जबकि वैश्विक कंपनियां भी भारत में निवेश बढ़ा रही हैं.
उन्होंने कहा कि Swiss Re Corporate Solutions के साथ यह साझेदारी भारतीय कंपनियों को वैश्विक स्तर पर बेहतर बीमा सुरक्षा और जोखिम प्रबंधन समाधान उपलब्ध कराने में मदद करेगी. साथ ही, भारत में कारोबार कर रही बहुराष्ट्रीय कंपनियों को भी स्थानीय जोखिमों का बेहतर प्रबंधन करने में सहयोग मिलेगा.
इस समझौते के तहत भारत के अलावा बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, भूटान, अफगानिस्तान और मालदीव में भी इन प्रतिष्ठित फुटबॉल प्रतियोगिताओं का प्रसारण और डिजिटल स्ट्रीमिंग ZEE के पास होगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश की अग्रणी कंटेंट और टेक्नोलॉजी कंपनी जी एंटरटेन्मेंट (ZEE) ने भारतीय फुटबॉल प्रशंसकों के लिए बड़ी घोषणा की है. कंपनी ने इटली की प्रतिष्ठित फुटबॉल लीग Serie A के साथ-साथ Coppa Italia और Supercoppa Italiana के भारत और भारतीय उपमहाद्वीप के लिए एक्सक्लूसिव ब्रॉडकास्ट और डिजिटल मीडिया राइट्स हासिल कर लिए हैं. यह करार पांच वर्षों के लिए किया गया है और इसकी शुरुआत 22 अगस्त 2026 से होगी.
इन देशों में मिलेगा प्रसारण
इस समझौते के तहत भारत के अलावा बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, भूटान, अफगानिस्तान और मालदीव में भी इन प्रतिष्ठित फुटबॉल प्रतियोगिताओं का प्रसारण और डिजिटल स्ट्रीमिंग ZEE के पास होगी.
Zee5 और Unite8 Sports पर देख सकेंगे मुकाबले
कंपनी ने बताया कि Serie A, Coppa Italia और Supercoppa Italiana के मुकाबले Zee5 और Unite8 Sports चैनलों पर उपलब्ध होंगे. इससे भारतीय और दक्षिण एशियाई दर्शकों को यूरोप की सबसे लोकप्रिय फुटबॉल लीग्स का सीधा प्रसारण देखने का मौका मिलेगा.
फुटबॉल कंटेंट पोर्टफोलियो हुआ मजबूत
इस अधिग्रहण के साथ ZEE ने प्रीमियम अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल कंटेंट के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी और मजबूत कर ली है. कंपनी का कहना है कि उसका लक्ष्य भारत और उपमहाद्वीप में फुटबॉल प्रेमियों के लिए वैश्विक स्तर के खेल कंटेंट का प्रमुख मंच बनना है.
ZEE के मुताबिक, Serie A दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित और लोकप्रिय फुटबॉल लीग्स में शामिल है, जहां कई विश्वस्तरीय क्लब और स्टार खिलाड़ी खेलते हैं. इस साझेदारी के जरिए कंपनी अपने स्पोर्ट्स पोर्टफोलियो का विस्तार करेगी और दर्शकों को बेहतर देखने का अनुभव उपलब्ध कराएगी.