कंपनी इस फंड का इस्तेमाल टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म को मजबूत करने, मार्केटिंग, कर्ज चुकाने और रणनीतिक अधिग्रहण के लिए करेगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
ई-कॉमर्स एनेबलमेंट प्लेटफॉर्म Shiprocket ने अपने बहुप्रतीक्षित आईपीओ का प्राइस बैंड ₹92-97 प्रति शेयर तय कर दिया है. ₹1,618 करोड़ का यह पब्लिक इश्यू 12 अगस्त को निवेशकों के लिए खुलेगा और 14 अगस्त को बंद होगा. वहीं, एंकर निवेशक 11 अगस्त को बोली लगा सकेंगे. कंपनी इस फंड का इस्तेमाल टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म को मजबूत करने, मार्केटिंग, कर्ज चुकाने और रणनीतिक अधिग्रहण के लिए करेगी.
फ्रेश इश्यू और OFS दोनों होंगे शामिल
Shiprocket का आईपीओ ₹1,100 करोड़ के फ्रेश इश्यू और ₹518 करोड़ के ऑफर फॉर सेल (OFS) का मिश्रण है. प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर पर कंपनी का वैल्यूएशन करीब ₹10,000 करोड़ आंका गया है. आईपीओ पूरा होने के बाद कंपनी के शेयर बीएसई (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर सूचीबद्ध होंगे.
जुटाई गई रकम का कहां होगा इस्तेमाल?
कंपनी फ्रेश इश्यू से मिलने वाली राशि का उपयोग अपने टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म को मजबूत करने, मुख्य और उभरते कारोबारों के लिए मार्केटिंग पर निवेश बढ़ाने, कुछ कर्ज चुकाने, रणनीतिक अधिग्रहण (Strategic Acquisitions) और सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों को पूरा करने में करेगी.
लॉजिस्टिक्स एग्रीगेटर से फुल-स्टैक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म तक का सफर
वर्ष 2012 में स्थापित Shiprocket ने लॉजिस्टिक्स एग्रीगेटर के रूप में शुरुआत की थी. आज कंपनी फुल-स्टैक ई-कॉमर्स एनेबलमेंट प्लेटफॉर्म बन चुकी है, जो शिपिंग, फुलफिलमेंट, पेमेंट्स, क्रॉस-बॉर्डर लॉजिस्टिक्स और टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस जैसी सेवाएं उपलब्ध कराती है. कंपनी के प्लेटफॉर्म का उपयोग लाखों विक्रेता, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSMEs) और डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) ब्रांड करते हैं. यह कारोबारियों को विभिन्न ऑनलाइन बिक्री चैनलों पर लॉजिस्टिक्स और ई-कॉमर्स संचालन को बेहतर ढंग से संचालित करने में मदद करता है.
निवेशकों की नजर रहेगी आईपीओ पर
भारत के प्राथमिक बाजार में लगातार सक्रियता के बीच Shiprocket का आईपीओ बाजार की प्रमुख पेशकशों में शामिल है. टेक्नोलॉजी और उपभोक्ता-केंद्रित कंपनियों के लगातार बाजार में आने के बीच निवेशकों की नजर इस इश्यू की मांग पर रहेगी. कंपनी को उम्मीद है कि भारत में तेजी से बढ़ते डिजिटल कॉमर्स और टेक्नोलॉजी आधारित लॉजिस्टिक्स सेवाओं की बढ़ती मांग का उसे फायदा मिलेगा.
वित्त वर्ष 2026-27 के पहले चार महीनों में कच्चे इस्पात का उत्पादन 2.6% बढ़कर 5.63 करोड़ टन पहुंचा, जबकि तैयार इस्पात की खपत 7.8% बढ़ी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
वित्त वर्ष 2026-27 के पहले चार महीनों (अप्रैल-जुलाई 2026) में भारत का स्टील उद्योग मजबूत वृद्धि के साथ आगे बढ़ा है. इस दौरान कच्चे इस्पात (Crude Steel) का उत्पादन सालाना आधार पर 2.6% बढ़कर 5.63 करोड़ टन (56.3 मिलियन टन) पहुंच गया. वहीं, तैयार स्टील (Finished Steel) की खपत में 7.8% की मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई. यह जानकारी इस्पात मंत्रालय द्वारा जारी अंतरिम आंकड़ों में सामने आई है.
उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी
अप्रैल-जुलाई 2026 के दौरान तैयार स्टील का उत्पादन 4% बढ़कर 5.43 करोड़ टन (54.3 मिलियन टन) हो गया, जबकि हॉट मेटल का उत्पादन 1.5% बढ़कर 3.16 करोड़ टन (31.6 मिलियन टन) रहा. केवल जुलाई 2026 की बात करें तो कच्चे इस्पात का उत्पादन 1.2% बढ़कर 1.43 करोड़ टन (14.3 मिलियन टन) पहुंच गया. इसी दौरान तैयार स्टील का उत्पादन 1.4% बढ़कर 1.37 करोड़ टन और हॉट मेटल उत्पादन 1.6% बढ़कर 81 लाख टन (8.1 मिलियन टन) दर्ज किया गया.
उत्पादन से तेज बढ़ी स्टील की मांग
घरेलू बाजार में स्टील की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है. अप्रैल-जुलाई 2026 के दौरान तैयार स्टील की खपत 7.8% बढ़कर 5.59 करोड़ टन (55.9 मिलियन टन) पहुंच गई. जुलाई 2026 में तैयार स्टील की खपत 1.44 करोड़ टन रही, जो पिछले साल जुलाई के 1.35 करोड़ टन की तुलना में 6.5% अधिक है. खपत की रफ्तार उत्पादन से अधिक रहने से साफ है कि वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत में घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है.
स्टील आयात में 36.6% की तेज बढ़ोतरी
अप्रैल-जुलाई 2026 के दौरान भारत का तैयार स्टील आयात 36.6% बढ़कर 27.7 लाख टन (2.77 मिलियन टन) हो गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 20.2 लाख टन था. मूल्य के लिहाज से आयात 43.1% बढ़कर 28,330.8 करोड़ रुपये पहुंच गया. वहीं, तैयार स्टील का निर्यात भी 35% बढ़कर 22.9 लाख टन (2.29 मिलियन टन) रहा. निर्यात का मूल्य 29.4% बढ़कर 18,105.4 करोड़ रुपये हो गया. हालांकि निर्यात बढ़ने के बावजूद अप्रैल-जुलाई 2026 के दौरान भारत तैयार स्टील के मामले में मात्रा के आधार पर शुद्ध आयातक (Net Importer) बना रहा.
जुलाई में स्टील की कीमतों में नरमी
जुलाई के दौरान घरेलू स्टील कीमतों में कुछ नरमी देखने को मिली, हालांकि अधिकांश प्रमुख उत्पादों के दाम पिछले साल की तुलना में अब भी ऊंचे रहे. 10 मिमी TMT बार की औसत कीमत जुलाई में 56,698 रुपये प्रति टन रही, जो जून के मुकाबले 5.6% कम, लेकिन पिछले साल जुलाई की तुलना में 3.7% अधिक थी. वहीं, हॉट रोल्ड (HR) कॉइल की औसत कीमत 69,828 रुपये प्रति टन रही. यह महीने-दर-महीने 0.4% कम रही, लेकिन सालाना आधार पर 13.3% अधिक थी.
SAIL और NMDC का शानदार प्रदर्शन
इस्पात मंत्रालय ने सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन पर भी प्रकाश डाला. SAIL ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 138% की वृद्धि के साथ 1,636 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया. कंपनी का परिचालन राजस्व 26,246 करोड़ रुपये रहा. इसके अलावा SAIL को DRDO की रक्षा धातुकर्म अनुसंधान प्रयोगशाला (DMRL) से नौसेना के युद्धपोतों और पनडुब्बियों के लिए DMR-249A, DMR-249B और DMR-249BK ग्रेड स्टील के निर्माण हेतु प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (Technology Transfer) का लाइसेंस भी मिला है.
वहीं, NMDC ने जुलाई में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 40.6 लाख टन (4.06 मिलियन टन) लौह अयस्क उत्पादन दर्ज किया, जो सालाना आधार पर 31% अधिक है. वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक कंपनी का कुल उत्पादन 19.16 मिलियन टन और बिक्री 15.15 मिलियन टन रही. कंपनी ने तांबा और अन्य रणनीतिक खनिजों में निवेश की संभावनाओं को लेकर अर्जेंटीना के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भी चर्चा की.
ग्रीन स्टील की दिशा में बढ़े कदम
स्टील उद्योग ने पर्यावरणीय स्थिरता की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रगति की है. SAIL ने जुलाई में राउरकेला स्टील प्लांट में अपनी पहली माइक्रो पेलेट प्लांट की शुरुआत की. 1.8 लाख टन वार्षिक क्षमता वाला यह संयंत्र स्टील निर्माण से निकलने वाले अपशिष्ट को उपयोगी माइक्रो पेलेट में बदलता है, जिससे कचरा कम होगा और कच्चे माल पर निर्भरता भी घटेगी.
इस हिस्सेदारी बिक्री के जरिए LIC ने मई 2027 की तय समयसीमा से काफी पहले 10% न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता की अनिवार्य शर्त भी पूरी कर ली.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
केंद्र सरकार ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) में अपनी हिस्सेदारी बेचकर करीब 3.3 अरब डॉलर (लगभग 31,500 करोड़ रुपये) जुटाए. इस ऑफर फॉर सेल (OFS) की सबसे खास बात इसकी बेहद तेज और गोपनीय तरीके से हुई प्रक्रिया रही. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस सौदे से जुड़े कुछ निवेश बैंकरों को भी अंतिम समय तक यह जानकारी नहीं थी कि हिस्सेदारी बिक्री का आकार कितना बड़ा होगा.
सरकार ने शुरुआत में LIC में 2.5% हिस्सेदारी बेचने की योजना बनाई थी, लेकिन संस्थागत निवेशकों की मजबूत मांग को देखते हुए इसे बढ़ाकर 6.5% कर दिया. इस तरह यह भारत के शेयर बाजार के जरिए किया गया अब तक का सबसे बड़ा सेकेंडरी शेयर सेल बन गया.
2027 की समयसीमा से पहले पूरी हुई अहम शर्त
इस हिस्सेदारी बिक्री के जरिए LIC ने मई 2027 की तय समयसीमा से काफी पहले 10% न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (Minimum Public Shareholding) की अनिवार्य शर्त भी पूरी कर ली. सरकार ने शेयरों का फ्लोर प्राइस 382 रुपये प्रति शेयर तय किया, जो पिछले कारोबारी सत्र के बंद भाव से करीब 11% कम था.
गोपनीयता बरतने के पीछे क्या थी वजह?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार ने सौदे के विस्तारित आकार की जानकारी बेहद सीमित दायरे में रखी. कुछ सलाहकारों और बैंकरों को भी अंतिम समय में ही इसकी जानकारी दी गई ताकि सूचना लीक होने से बचा जा सके और बाजार पर किसी तरह का नकारात्मक असर न पड़े. तेज निष्पादन के कारण बाजार में संभावित उतार-चढ़ाव का जोखिम भी कम रहा.
विनिवेश लक्ष्य पूरा करने की दिशा में बड़ा कदम
LIC की यह हिस्सेदारी बिक्री सरकार के वित्त वर्ष 2026-27 के 80,000 करोड़ रुपये के विनिवेश लक्ष्य का अहम हिस्सा है. बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों और सरकारी खर्च में इजाफे के कारण वित्तीय दबाव बढ़ने के बीच सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की सूचीबद्ध कंपनियों में हिस्सेदारी बिक्री की प्रक्रिया तेज कर रही है.
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया बाजार अस्थिरता के बावजूद इस OFS को संस्थागत निवेशकों से मिला मजबूत समर्थन यह दिखाता है कि बड़े सरकारी इश्यू के लिए निवेशकों की रुचि अभी भी बनी हुई है.
रिटेल निवेशकों की भागीदारी उम्मीद से कम
हालांकि संस्थागत निवेशकों की मजबूत मांग के चलते ग्रीनशू विकल्प पूरी तरह इस्तेमाल किया गया, लेकिन रिटेल निवेशकों की भागीदारी अपेक्षा से कम रही. व्यक्तिगत निवेशकों के लिए आरक्षित हिस्से में केवल लगभग 69% शेयरों के लिए ही बोलियां प्राप्त हुईं.
विशेषज्ञों का मानना है कि इस हिस्सेदारी बिक्री के बाद LIC के शेयरों में सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ने से उनकी लिक्विडिटी बेहतर होगी और भविष्य में कंपनी को अतिरिक्त वैश्विक इक्विटी इंडेक्स में शामिल होने का भी लाभ मिल सकता है.
इस साझेदारी के तहत हाई-टेक, मैन्युफैक्चरिंग और अंतरराष्ट्रीय कारोबार करने वाली भारतीय कंपनियों के लिए विशेष बीमा समाधान विकसित किए जाएंगे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
बजाज जनरल इंश्योरेंस (Bajaj) और वैश्विक बीमा कंपनी स्विस रे कॉर्पोरेट सॉल्यूशंस (Swiss Re Corporate Solutions) ने भारत में कमर्शियल इंश्योरेंस कारोबार को मजबूत करने के लिए साझेदारी की घोषणा की है. दोनों कंपनियों ने एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत हाई-टेक, मैन्युफैक्चरिंग और अंतरराष्ट्रीय कारोबार करने वाली भारतीय कंपनियों के लिए विशेष बीमा समाधान विकसित किए जाएंगे. यह साझेदारी आवश्यक नियामकीय मंजूरियों और अंतिम समझौतों के बाद लागू होगी.
भारतीय कंपनियों को मिलेगा वैश्विक बीमा समाधान
दोनों कंपनियां Swiss Re Corporate Solutions के इंटरनेशनल प्रोग्राम प्लेटफॉर्म का लाभ उठाते हुए भारतीय बाजार के लिए विशेष कमर्शियल इंश्योरेंस समाधान विकसित करेंगी. इसका फोकस हाई-टेक, मैन्युफैक्चरिंग और भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में अहम भूमिका निभाने वाले अन्य क्षेत्रों पर रहेगा. इसके अलावा, विदेशों में कारोबार करने वाली भारतीय कंपनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय बीमा कार्यक्रम भी उपलब्ध कराने की योजना है.
बहुराष्ट्रीय कंपनियों की जरूरतों पर रहेगा फोकस
Swiss Re Corporate Solutions के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) इवान गोंजालेज ने कहा कि आज बहुराष्ट्रीय कंपनियां ऐसे बीमा साझेदार चाहती हैं, जिनके पास स्थानीय बाजार की गहरी समझ के साथ वैश्विक स्तर की विशेषज्ञता और निर्बाध अंतरराष्ट्रीय सेवाएं उपलब्ध हों.
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता प्रमुख कमर्शियल इंश्योरेंस बाजार है और बजाज जनरल इंश्योरेंस के साथ मिलकर कंपनी कॉर्पोरेट ग्राहकों को बेहतर जोखिम प्रबंधन समाधान उपलब्ध कराने की दिशा में काम करेगी.
भारतीय कंपनियों को मिलेगा वैश्विक नेटवर्क का लाभ
बजाज जनरल इंश्योरेंस के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (MD & CEO) डॉ. तपन सिंघल ने कहा कि भारत की आर्थिक विकास यात्रा अब वैश्विक अर्थव्यवस्था से गहराई से जुड़ चुकी है. भारतीय कंपनियां तेजी से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार कर रही हैं, जबकि वैश्विक कंपनियां भी भारत में निवेश बढ़ा रही हैं.
उन्होंने कहा कि Swiss Re Corporate Solutions के साथ यह साझेदारी भारतीय कंपनियों को वैश्विक स्तर पर बेहतर बीमा सुरक्षा और जोखिम प्रबंधन समाधान उपलब्ध कराने में मदद करेगी. साथ ही, भारत में कारोबार कर रही बहुराष्ट्रीय कंपनियों को भी स्थानीय जोखिमों का बेहतर प्रबंधन करने में सहयोग मिलेगा.
इस समझौते के तहत भारत के अलावा बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, भूटान, अफगानिस्तान और मालदीव में भी इन प्रतिष्ठित फुटबॉल प्रतियोगिताओं का प्रसारण और डिजिटल स्ट्रीमिंग ZEE के पास होगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश की अग्रणी कंटेंट और टेक्नोलॉजी कंपनी जी एंटरटेन्मेंट (ZEE) ने भारतीय फुटबॉल प्रशंसकों के लिए बड़ी घोषणा की है. कंपनी ने इटली की प्रतिष्ठित फुटबॉल लीग Serie A के साथ-साथ Coppa Italia और Supercoppa Italiana के भारत और भारतीय उपमहाद्वीप के लिए एक्सक्लूसिव ब्रॉडकास्ट और डिजिटल मीडिया राइट्स हासिल कर लिए हैं. यह करार पांच वर्षों के लिए किया गया है और इसकी शुरुआत 22 अगस्त 2026 से होगी.
इन देशों में मिलेगा प्रसारण
इस समझौते के तहत भारत के अलावा बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, भूटान, अफगानिस्तान और मालदीव में भी इन प्रतिष्ठित फुटबॉल प्रतियोगिताओं का प्रसारण और डिजिटल स्ट्रीमिंग ZEE के पास होगी.
Zee5 और Unite8 Sports पर देख सकेंगे मुकाबले
कंपनी ने बताया कि Serie A, Coppa Italia और Supercoppa Italiana के मुकाबले Zee5 और Unite8 Sports चैनलों पर उपलब्ध होंगे. इससे भारतीय और दक्षिण एशियाई दर्शकों को यूरोप की सबसे लोकप्रिय फुटबॉल लीग्स का सीधा प्रसारण देखने का मौका मिलेगा.
फुटबॉल कंटेंट पोर्टफोलियो हुआ मजबूत
इस अधिग्रहण के साथ ZEE ने प्रीमियम अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल कंटेंट के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी और मजबूत कर ली है. कंपनी का कहना है कि उसका लक्ष्य भारत और उपमहाद्वीप में फुटबॉल प्रेमियों के लिए वैश्विक स्तर के खेल कंटेंट का प्रमुख मंच बनना है.
ZEE के मुताबिक, Serie A दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित और लोकप्रिय फुटबॉल लीग्स में शामिल है, जहां कई विश्वस्तरीय क्लब और स्टार खिलाड़ी खेलते हैं. इस साझेदारी के जरिए कंपनी अपने स्पोर्ट्स पोर्टफोलियो का विस्तार करेगी और दर्शकों को बेहतर देखने का अनुभव उपलब्ध कराएगी.
कंपनी अब तक SoftBank, Tiger Global, Norwest Venture Partners, Z47, Alpha Wave और Falcon Edge Capital जैसे प्रमुख निवेशकों से करीब 900 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटा चुकी है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
B2B ई-कॉमर्स यूनिकॉर्न OfBusiness ने एक बार फिर अपने IPO प्लान को रफ्तार दे दी है. सॉफ्टबैंक समर्थित कंपनी नवंबर के मध्य तक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल कर सकती है. कंपनी इस पब्लिक इश्यू के जरिए 800 मिलियन डॉलर (करीब 6,700 करोड़ रुपये) तक जुटाने की तैयारी में है. IPO के लिए कंपनी ने Axis Capital, Morgan Stanley, JPMorgan Chase & Co. और Citigroup को सलाहकार नियुक्त किया है. रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी का लक्ष्य 5 से 6 अरब डॉलर का वैल्यूएशन हासिल करना है.
फ्रेश इश्यू और OFS दोनों होंगे शामिल
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रस्तावित IPO में करीब 200 मिलियन डॉलर का फ्रेश इश्यू शामिल होगा. बाकी राशि मौजूदा निवेशकों द्वारा ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए जुटाई जाएगी. इससे पहले कंपनी ने बाजार की कमजोर परिस्थितियों के चलते अपना IPO टाल दिया था. हालांकि, अब भारतीय IPO बाजार में निवेशकों की धारणा बेहतर होने के बाद कंपनी ने अपनी लिस्टिंग योजना को फिर से सक्रिय कर दिया है.
IPO बाजार में लौट रही तेजी
भारत के IPO बाजार में इस साल की पहली छमाही सुस्त रहने के बाद अब रिकवरी के संकेत मिल रहे हैं. ब्लूमबर्ग के मुताबिक, 2026 में अब तक कंपनियां IPO के जरिए करीब 6.8 अरब डॉलर जुटा चुकी हैं, जबकि 2025 में यह आंकड़ा रिकॉर्ड 22.4 अरब डॉलर था.
OfBusiness पिछले कुछ समय से शेयर बाजार में लिस्टिंग की तैयारी कर रही है. दिसंबर 2024 में कंपनी ने अपना नाम OFB Tech Private Limited से बदलकर OFB Tech Limited कर लिया था, ताकि सार्वजनिक कंपनी के रूप में लिस्टिंग की प्रक्रिया पूरी की जा सके.
FY26 में मुनाफे में 21% की बढ़ोतरी
वित्त वर्ष 2025-26 में OfBusiness का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 21 फीसदी बढ़कर 724 करोड़ रुपये हो गया. वहीं कंपनी का राजस्व लगभग स्थिर रहते हुए 20,645 करोड़ रुपये रहा. इस दौरान कंपनी का EBITDA 34 फीसदी बढ़कर 769 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि EBITDA मार्जिन पिछले वित्त वर्ष के 2.6 फीसदी से बढ़कर 4 फीसदी हो गया. कंपनी के मुताबिक, मैन्युफैक्चरिंग कारोबार के बेहतर एकीकरण और कम रिटर्न वाले बिजनेस से बाहर निकलने की रणनीति का फायदा उसके वित्तीय प्रदर्शन में देखने को मिला.
बड़े निवेशकों का मिला है समर्थन
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, OfBusiness अब तक SoftBank, Tiger Global, Norwest Venture Partners, Z47 (पूर्व में Matrix Partners India), Alpha Wave और Falcon Edge Capital जैसे प्रमुख निवेशकों से करीब 900 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटा चुकी है. हालांकि, IPO को लेकर विचार-विमर्श अभी जारी है और बाजार की परिस्थितियों के अनुसार इश्यू के समय, आकार और संरचना में बदलाव संभव है.
ब्रोकरेज का अनुमान है कि मौजूदा स्तर से सोने में 6-8 फीसदी की गिरावट आ सकती है. इसके बाद कीमतें पहले 4,800 डॉलर प्रति औंस और फिर 12-15 महीनों में 5,500 डॉलर प्रति औंस से ऊपर पहुंच सकती हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
सोने की कीमतों में निकट भविष्य में 6-8 फीसदी तक की गिरावट आ सकती है, लेकिन इसके बाद इसमें जोरदार तेजी देखने को मिल सकती है. ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (MOFSL) का अनुमान है कि अगले 12-15 महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 5,500 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है. ब्रोकरेज ने निवेशकों को एकमुश्त निवेश के बजाय गिरावट के दौरान चरणबद्ध तरीके से खरीदारी करने की सलाह दी है.
MOFSL ने निवेशकों को दी चरणबद्ध खरीदारी की सलाह
ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (MOFSL) ने अपनी H1 2026 प्रेशियस मेटल्स आउटलुक रिपोर्ट में कहा है कि सोने की कीमतों में निकट अवधि में 6-8 फीसदी का करेक्शन देखने को मिल सकता है. हालांकि, इसके बाद अगले 12-15 महीनों में सोना 5,500 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि निवेशकों को बाजार में निचला स्तर पकड़ने की कोशिश करने के बजाय कीमतों में गिरावट आने पर चरणबद्ध (Staggered) तरीके से निवेश करना चाहिए.
क्यों आ सकती है सोने में गिरावट?
MOFSL के मुताबिक, हाल के महीनों में सोने की कीमतों को प्रभावित करने वाले कारकों में बदलाव आया है. पहले भू-राजनीतिक तनाव से सोने में तेजी आती थी, लेकिन अब ऊंची महंगाई की आशंकाएं, वास्तविक ब्याज दरों (Real Interest Rates) में बढ़ोतरी और अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने सोने की सुरक्षित निवेश (Safe Haven) वाली मांग को कमजोर किया है. ब्रोकरेज का अनुमान है कि मौजूदा स्तर से सोने में 6-8 फीसदी की गिरावट आ सकती है. इसके बाद कीमतें पहले 4,800 डॉलर प्रति औंस और फिर 12-15 महीनों में 5,500 डॉलर प्रति औंस से ऊपर पहुंच सकती हैं.
भारतीय निवेशकों के लिए क्या है रणनीति?
रिपोर्ट के अनुसार, यदि डॉलर-रुपया विनिमय दर 95.5 रहती है, तो भारतीय निवेशकों के लिए 10 ग्राम सोने का 1.30 लाख से 1.33 लाख रुपये का स्तर खरीदारी के लिए उपयुक्त माना गया है. ब्रोकरेज ने मध्यम अवधि में 10 ग्राम सोने का लक्ष्य 1.68 लाख रुपये और इसके बाद 1.93 लाख रुपये तक रहने का अनुमान जताया है.
लंबी अवधि में क्यों मजबूत है सोने का आउटलुक?
MOFSL का मानना है कि अल्पकालिक कमजोरी के बावजूद सोने की लंबी अवधि की संभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, अगले एक साल में अमेरिकी महंगाई का रुख और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों से जुड़े फैसले सोने की कीमतों की दिशा तय करेंगे.
ब्रोकरेज का कहना है कि जब तक वास्तविक ब्याज दरों में उल्लेखनीय गिरावट नहीं आती, तब तक सोना सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है. हालांकि, केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी, विकसित देशों में बढ़ता राजकोषीय दबाव और मुद्रा के अवमूल्यन (Currency Debasement) के खिलाफ सुरक्षा के रूप में सोने की मांग लंबी अवधि में इसे मजबूती देती रहेगी.
चांदी को लेकर बरतें सतर्कता
रिपोर्ट में चांदी को लेकर निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है. MOFSL के अनुसार, चांदी में सोने के मुकाबले अधिक उतार-चढ़ाव रहता है क्योंकि इसकी कीमतें सुरक्षित निवेश की मांग के साथ-साथ औद्योगिक मांग, खासकर वैश्विक इलेक्ट्रिफिकेशन ट्रेंड, से भी प्रभावित होती हैं.
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के ब्लॉक डील डेटा के अनुसार, दोनों निवेशकों ने कुल 1.49 करोड़ (1,49,00,000) शेयर बेचे हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
डिजिटल पेमेंट कंपनी पेटीएम (Paytm) की पैरेंट कंपनी वन 97 कम्युनिकेशन्स (One 97 Communications) में बुधवार को 2,038 करोड़ रुपये की बड़ी ब्लॉक डील हुई. शुरुआती निवेशकों एसएआईएफ पार्टनर्स (SAIF Partners) और एलिवेशन कैपिटल (Elevation Capital) ने ओपन मार्केट के जरिए अपनी संयुक्त 2.33 फीसदी हिस्सेदारी बेच दी. इस सौदे में कई घरेलू म्यूचुअल फंड, पेंशन फंड और वैश्विक निवेशकों ने हिस्सेदारी खरीदी.
Paytm में ₹2,038 करोड़ की ब्लॉक डील
डिजिटल पेमेंट कंपनी Paytm की पैरेंट कंपनी One 97 Communications में 2,038 करोड़ रुपये की बड़ी ब्लॉक डील हुई है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एसएआईएफ पार्टनर्स और एलिवेशन कैपिटल ने ओपन मार्केट के जरिए कंपनी में अपनी संयुक्त 2.33 फीसदी हिस्सेदारी बेच दी. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के ब्लॉक डील डेटा के अनुसार, दोनों निवेशकों ने कुल 1.49 करोड़ (1,49,00,000) शेयर बेचे.
किसने कितने शेयर बेचे?
SAIF III Mauritius Company Ltd और SAIF Partners India IV Ltd के जरिए SAIF Partners ने 1,38,79,743 शेयर बेचे. वहीं, Elevation Capital V Ltd ने 10,20,257 शेयरों की बिक्री की. यह सौदा औसतन 1,367.80 रुपये प्रति शेयर के भाव पर हुआ. इस तरह ब्लॉक डील का कुल आकार 2,038.02 करोड़ रुपये रहा.
किन निवेशकों ने खरीदे शेयर?
इस ब्लॉक डील में कई बड़े घरेलू और विदेशी संस्थागत निवेशकों ने हिस्सेदारी खरीदी. घरेलू खरीदारों में नेशनल पेंशन सिस्टम ट्रस्ट (NPS Trust), सुंदरम म्यूचुअल फंड, महिंद्रा मैनुलाइफ म्यूचुअल फंड, कोटक महिंद्रा म्यूचुअल फंड, फ्रैंकलिन टेम्पलटन म्यूचुअल फंड और ICICI प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस शामिल रहे.
वहीं, विदेशी निवेशकों में गोल्डमैन सैक्स बैंक, घिसालो कैपिटल मैनेजमेंट, सोशल प्रोटेक्शन फंड, सोसाइटी जेनरल, BNP Paribas Financial Markets और Susquehanna International Group ने भी इस सौदे में हिस्सेदारी खरीदी.
शेयर पर क्या रहा असर?
इतनी बड़ी ब्लॉक डील के बाद One 97 Communications का शेयर NSE पर करीब 1 फीसदी की गिरावट के साथ 1,400 रुपये पर बंद हुआ था. वहीं आज शेयर में हल्की तेजी दिखाई दे रही है और यह 0.85 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,441.20 रुपये पर कारोबार कर रहा है. यह पहली बार नहीं है जब SAIF Partners ने Paytm में अपनी हिस्सेदारी घटाई है. इससे पहले नवंबर 2025 में भी निवेशक ने ओपन मार्केट के जरिए कंपनी की 1.86 फीसदी हिस्सेदारी 1,556 करोड़ रुपये में बेची थी.
ईरान और ओमान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए एक अस्थायी शिपिंग रूट पर सहमति बनाई है. यह व्यवस्था अगले दो से चार महीने तक लागू रह सकती है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
लगातार तीन दिनों की गिरावट के बाद गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी लौटी. ईरान और ओमान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही को लेकर हुए अस्थायी समझौते से सप्लाई को लेकर चिंताएं कुछ कम हुई हैं. इसके बाद ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड में भी आधे फीसदी से अधिक की बढ़त दर्ज की गई.
ब्रेंट और WTI दोनों में तेजी
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर 2026 डिलीवरी वाला ब्रेंट क्रूड 0.54 फीसदी यानी 0.43 डॉलर की बढ़त के साथ 79.88 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था. कारोबार के दौरान इसका उच्चतम स्तर 80.34 डॉलर और निचला स्तर 78.55 डॉलर प्रति बैरल रहा.
वहीं, सितंबर 2026 डिलीवरी वाला WTI क्रूड 0.52 फीसदी यानी 0.39 डॉलर की तेजी के साथ 75.61 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. दिन के कारोबार में इसकी कीमत 74.64 डॉलर से 76.02 डॉलर प्रति बैरल के बीच रही.
क्या है होर्मुज जलडमरूमध्य समझौता?
ईरान और ओमान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए एक अस्थायी शिपिंग रूट पर सहमति बनाई है. यह व्यवस्था अगले दो से चार महीने तक लागू रह सकती है. हालांकि, ईरान ने स्पष्ट किया है कि इसका मतलब यह नहीं है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खोल दिया गया है. इस बीच अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान के साथ व्यापक समझौते की संभावना बढ़ रही है. हालांकि, निवेशक अब भी स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं.
पश्चिम एशिया में तनाव बरकरार
सप्लाई को लेकर राहत की खबरों के बावजूद पश्चिम एशिया में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने अदन की खाड़ी में सऊदी अरब के एक तेल टैंकर को निशाना बनाने का दावा किया है. इसके अलावा लाल सागर से गुजरने वाले अन्य जहाजों को भी चेतावनी दी गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति और शिपिंग पर फिर दबाव बन सकता है.
बाजार की नजर इन ट्रिगर्स पर
आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े अस्थायी समझौते की अवधि, पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक हालात, OPEC+ के फैसलों और वैश्विक तेल मांग पर रहेगी. यही कारक आगे कच्चे तेल की कीमतों की दिशा तय करेंगे.
कंपनी को उम्मीद है कि नेटवर्क में निवेश, बेहतर ग्राहक अनुभव और मजबूत वित्तीय स्थिति के दम पर वह आने वाले वर्षों में अपनी प्रतिस्पर्धी स्थिति और बाजार हिस्सेदारी को मजबूत कर सकेगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
वोडाफोन-आइडिया (Vi) ने वित्त वर्ष 2027 के लिए अपनी ग्रोथ रणनीति स्पष्ट कर दी है. आदित्य बिड़ला समूह के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने कहा कि कंपनी अगले वित्त वर्ष में नेटवर्क विस्तार, ग्राहक अनुभव में सुधार और राजस्व बढ़ाने पर सबसे ज्यादा ध्यान देगी. उनका कहना है कि वित्त वर्ष 2026 चुनौतियों से उबरने का साल था, जबकि FY27 विकास योजनाओं को तेज़ी से लागू करने का वर्ष होगा.
वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 जारी करते हुए शेयरधारकों को संबोधित करते हुए बिड़ला ने कहा कि कंपनी के सामने मौजूद अधिकांश बड़ी चुनौतियां अब पीछे छूट चुकी हैं. उन्होंने कहा कि वोडाफोन-आइडिया को अपने प्रमोटर्स का पूरा समर्थन मिल रहा है, वित्तीय स्थिति पहले की तुलना में अधिक स्पष्ट है और कंपनी के पास निवेश करने की बेहतर क्षमता भी है. यही कारक आने वाले वर्षों में कंपनी की विकास यात्रा को गति देंगे.
नियमित टैरिफ बढ़ोतरी की वकालत
कुमार मंगलम बिड़ला ने दूरसंचार क्षेत्र में समय-समय पर टैरिफ बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया. उनके मुताबिक, नेटवर्क में निवेश बनाए रखने और अगली पीढ़ी की तकनीकों के विस्तार के लिए टेलीकॉम कंपनियों के पास पर्याप्त संसाधन होना जरूरी है. उन्होंने कहा कि मजबूत और विश्वसनीय संचार नेटवर्क भारत के 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य के लिए बेहद अहम होंगे.
AGR विवाद में मिली राहत
वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 वोडाफोन-आइडिया के लिए महत्वपूर्ण रहा. इस दौरान कंपनी ने समायोजित सकल राजस्व (AGR) से जुड़े कई लंबित मुद्दों पर प्रगति हासिल की. दूरसंचार विभाग (DoT) की समिति ने कंपनी का बकाया 64,046 करोड़ रुपये तय किया, जो पहले के अनुमान से कम है. साथ ही, इसके भुगतान के लिए दीर्घकालिक पुनर्भुगतान योजना भी तैयार की गई है.
FY26 में बढ़ा राजस्व और EBITDA
वित्त वर्ष 2026 में वोडाफोन-आइडिया का कुल राजस्व 3 फीसदी बढ़कर 44,873 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वर्ष 43,571 करोड़ रुपये था. वहीं EBITDA 4.8 फीसदी बढ़कर 19,003 करोड़ रुपये पहुंच गया. कंपनी का EBITDA मार्जिन भी 41.6 फीसदी से बढ़कर 43.1 फीसदी हो गया, जो बेहतर लागत प्रबंधन और स्थिर राजस्व वृद्धि का संकेत देता है.
कंपनी को उम्मीद है कि नेटवर्क में निवेश, बेहतर ग्राहक अनुभव और मजबूत वित्तीय स्थिति के दम पर वह आने वाले वर्षों में अपनी प्रतिस्पर्धी स्थिति और बाजार हिस्सेदारी को मजबूत कर सकेगी.
ग्लोबल बैंक HSBC ने भारत की रेटिंग को 'न्यूट्रल' किया है और घरेलू मांग पर आधारित उच्च गुणवत्ता वाली कंपनियों को प्राथमिकता दी है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय शेयर बाजार में लंबे समय से जारी विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली अब थमती दिखाई दे रही है. HSBC की रिपोर्ट के अनुसार, ग्लोबल फंड मैनेजर अब AI-प्रधान एशियाई बाजारों में बढ़ती अस्थिरता से निकलकर भारत जैसे मजबूत आर्थिक बुनियाद वाले बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, यदि ग्लोबल इमर्जिंग मार्केट फंड भारत में अपनी हिस्सेदारी को केवल 'न्यूट्रल' स्तर तक भी बढ़ाते हैं, तो भारतीय इक्विटी बाजार में करीब 25 अरब डॉलर (लगभग 2.38 लाख करोड़ रुपये) का निवेश आ सकता है.
80% से ज्यादा ग्लोबल फंड भारत में हैं अंडरवेट
HSBC के रणनीतिकार प्रेरणा गर्ग, हेराल्ड वैन डेर लिंडे और योगेश अग्रवाल के मुताबिक, 80 फीसदी से अधिक एक्टिव ग्लोबल इमर्जिंग मार्केट फंड फिलहाल भारत में 'अंडरवेट' यानी अपेक्षाकृत कम निवेश किए हुए हैं. उनका कहना है कि केवल इस स्थिति के सामान्य होने भर से भारतीय बाजार में 25 अरब डॉलर तक की नई विदेशी पूंजी आ सकती है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि AI थीम के चलते विदेशी निवेश का जो रोटेशन हुआ था, उसका बड़ा हिस्सा अब पूरा हो चुका है.
भारत क्यों बन रहा है विदेशी निवेशकों की पहली पसंद?
HSBC का मानना है कि AI आधारित बाजारों में तेजी से बढ़े वैल्यूएशन और अस्थिरता के कारण निवेशक अब अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाना चाहते हैं. ऐसे में भारत मजबूत आर्थिक वृद्धि, स्थिरता और बेहतर कॉरपोरेट प्रदर्शन के कारण आकर्षक विकल्प बनकर उभरा है. रिपोर्ट के अनुसार, जून के मध्य से विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 3.6 अरब डॉलर का निवेश किया है. इसी दौरान भारतीय शेयर बाजार में करीब 6 फीसदी की तेजी भी दर्ज की गई.
किन सेक्टर्स में सबसे ज्यादा आया निवेश?
15 जून से 15 जुलाई के बीच विदेशी निवेशकों ने सबसे ज्यादा निवेश फाइनेंशियल, कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी और हेल्थकेयर सेक्टर में किया. वहीं, दक्षिण कोरिया और ताइवान में पहले से भारी निवेश रखने वाले ग्लोबल फंड अब भारत और मुख्यभूमि चीन में भी अपना एक्सपोजर बढ़ाने लगे हैं.
HSBC का कहना है कि दक्षिण कोरिया और ताइवान के मुकाबले भारत का बाजार अपेक्षाकृत अधिक स्थिर है. इस साल दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार में भारत की तुलना में लगभग चार गुना अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिला.
घरेलू मांग और बेहतर नतीजों से मिल रहा सहारा
रिपोर्ट में कहा गया है कि मजबूत घरेलू मांग और म्यूचुअल फंड के जरिए लगातार हो रहा SIP निवेश भारतीय बाजार को मजबूती दे रहा है. जून में इक्विटी म्यूचुअल फंड में नेट निवेश भी बढ़ा, जिसमें मिडकैप और स्मॉलकैप फंडों का बड़ा योगदान रहा.
वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के नतीजे घोषित करने वाली करीब 73 फीसदी कंपनियों ने बाजार की उम्मीदों के बराबर या उससे बेहतर प्रदर्शन किया है. इससे कॉरपोरेट आय में सुधार के संकेत मिले हैं.
EPS ग्रोथ और वैल्यूएशन पर क्या है नजरिया?
HSBC के मुताबिक, जून में नॉन-फूड क्रेडिट ग्रोथ बढ़कर 18.3 फीसदी पहुंच गई, जबकि ऑटोमोबाइल सेक्टर की मांग भी उम्मीद से बेहतर बनी हुई है. बैंक ने कमोडिटी, फाइनेंशियल, इंडस्ट्रियल और कंज्यूमर स्टेपल्स सेक्टर के लिए आय के अनुमान बढ़ाए हैं.
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत का वैल्यूएशन अभी भी अन्य उभरते बाजारों के मुकाबले ऊंचा है, लेकिन ऐतिहासिक आधार पर यह अब अपने निचले दायरे के करीब पहुंच चुका है. खासकर फाइनेंशियल, रियल एस्टेट और आईटी सेक्टर के वैल्यूएशन पहले के मुकाबले अधिक आकर्षक हो गए हैं.
HSBC को किन सेक्टर्स और शेयरों पर भरोसा?
HSBC ने भारत की रेटिंग को 'न्यूट्रल' किया है और घरेलू मांग पर आधारित उच्च गुणवत्ता वाली कंपनियों को प्राथमिकता दी है. बैंक की पसंद में फाइनेंशियल, ऑटोमोबाइल, रिटेल, सर्विस, हॉस्पिटल, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रिफिकेशन और सेमीकंडक्टर से जुड़ी कंपनियां शामिल हैं.
HSBC के पसंदीदा शेयरों में ICICI बैंक, चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस, टाइटन, महिंद्रा एंड महिंद्रा, फीनिक्स मिल्स, फोर्टिस हेल्थकेयर, कमिंस इंडिया, सिरमा SGS टेक्नोलॉजी, अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन और हिंडाल्को इंडस्ट्रीज शामिल हैं.