महंगाई के दौर में लगेगा बिजली का जोरदार झटका! इतने % तक बढ़ सकती हैं दरें

महंगाई आंकड़ों में भले ही कम हुई हो, लेकिन हकीकत में हालात वैसे ही हैं. इस बीच, यूपी के लोगों का बिजली का बिल भी बढ़ सकता है.

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Tuesday, 10 January, 2023
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उत्तर प्रदेश में रहने वालों को बिजली का करंट लग सकता है. क्योंकि बिजली कंपनियां तीन साल बाद दरों में बढ़ोतरी की तैयारी कर रही हैं. इस हफ्ते बिजली कंपनियां दरों में 13 से 15 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव नियामक आयोग को सौंप सकती हैं. यदि प्रस्ताव मंजूर हो जाता है, तो महंगाई के दौर में यूपी वालों के लिए बिजली भी महंगी हो जाएगी. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बिजली कंपनियों ने घरेलू, ग्रामीण, कर्मशल सहित कई श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए बिजली महंगी करने की तैयारी की है.

परिषद ने कही ये बात
वहीं, राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद का कहना है कि कंपनियों को दरें बढ़ाने के बजाय कम करने पर विचार करना चाहिए. उपभोक्ता परिषद ने यह मांग भी उठाई है कि बिजली कंपनियों ने उपभोक्ताओं से जो 25133 करोड़ रुपए अधिक वसूले हैं, उसके आधार पर उपभोक्ताओं को राहत दी जाए. परिषद के अनुसार, यदि इस आधार पर उपभोक्ताओं को राहत दी जाए, तो पांच साल तक बिजली दरों में सात प्रतिशत की कमी आसानी से की जा सकती है. परिषद ने इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप की मांग की है. 

बढ़ोत्तरी का आधार  
मीडिया रिपोर्ट्स में राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा के हवाले से बताया गया है कि बिजली कंपनियां की लाइन हानियां ज्यादा हैं. इस आधार पर वह बिजली दरों को बढ़वाना चाहती हैं. आयोग ने 2020-21 में 11.08 प्रतिशत और 2022-23 में 10.67 प्रतिशत वितरण हानियों पर बिजली दर का निर्धारण किया था. इस बार पावर कॉरपोरेशन का प्रयास है कि आयोग से 2023-24 और 2024-25 के लिए आरडीएसएस में प्रस्तावित 13 से 15 फीसदी वितरण हानियों को स्वीकृत करवाकर उसी के आधार पर बिजली दर में बढ़ोतरी प्रस्ताव दिया जाए.


Raydean Enterprises ने जुटाए ₹200 करोड़, रिन्यूएबल एनर्जी और ट्रांसमिशन कारोबार को मिलेगा विस्तार

कंपनी के अनुसार, यह फंड जुटाव उसके इंटीग्रेटेड बिजनेस मॉडल, एग्री-सोलर माउंटिंग स्ट्रक्चर में विशेषज्ञता, EPC और ट्रांसमिशन कारोबार के विस्तार तथा भारत के लंबी अवधि के रिन्यूएबल एनर्जी और ग्रिड आधुनिकीकरण अभियान में उसकी भूमिका पर निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है.

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Thursday, 23 July, 2026
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जयपुर. रिन्यूएबल एनर्जी, ट्रांसमिशन और ऊर्जा दक्षता क्षेत्र में काम करने वाली Raydean Enterprises Limited ने इक्विटी और डेट के मिश्रण से ₹200 करोड़ की पूंजी जुटाई है. कंपनी ने बताया कि इस फंडिंग में संस्थागत निवेशकों, फैमिली ऑफिस और हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) ने इक्विटी के जरिए भागीदारी की, जबकि डेट फंडिंग प्रमुख राष्ट्रीयकृत बैंकों से जुटाई गई है.

कंपनी के अनुसार, यह फंड जुटाव उसके इंटीग्रेटेड बिजनेस मॉडल, एग्री-सोलर माउंटिंग स्ट्रक्चर में विशेषज्ञता, EPC और ट्रांसमिशन कारोबार के विस्तार तथा भारत के लंबी अवधि के रिन्यूएबल एनर्जी और ग्रिड आधुनिकीकरण अभियान में उसकी भूमिका पर निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है.

नए इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में होगा निवेश

Raydean Enterprises ने बताया कि जुटाई गई इक्विटी राशि का एक बड़ा हिस्सा नए पूरी तरह इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के विकास में लगाया जाएगा. इस प्लांट में माउंटिंग स्ट्रक्चर, सोलर ट्रैकर्स, ट्रांसमिशन टावर और अन्य फैब्रिकेशन उत्पादों को एक ही अत्याधुनिक परिसर में तैयार किया जाएगा.

इस सुविधा में इन-हाउस गैल्वनाइजेशन, ऑटोमेटेड फैब्रिकेशन लाइन और आधुनिक क्वालिटी कंट्रोल सिस्टम शामिल होंगे. कंपनी को उम्मीद है कि इससे लागत दक्षता बढ़ेगी, उत्पादन क्षमता में सुधार होगा और अधिक वैल्यू-एडेड सॉल्यूशंस उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी.

भारत के ऊर्जा बदलाव से बढ़ेंगे अवसर

कंपनी ने कहा कि भारत में रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहा है. सरकार की PM-KUSUM योजना, PM Surya Ghar रूफटॉप सोलर कार्यक्रम और ट्रांसमिशन व डिस्ट्रीब्यूशन इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ते निवेश से सोलर वैल्यू चेन में लंबे समय तक मांग बनी रहने की उम्मीद है.

इसके अलावा, सोलर ट्रैकर्स का बढ़ता इस्तेमाल और ग्रामीण व अर्ध-शहरी क्षेत्रों में ऊर्जा दक्ष उत्पादों की बढ़ती मांग भी कंपनी के लिए नए अवसर पैदा कर रही है. Raydean फिलहाल राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में परियोजनाओं पर काम कर रही है.

MD ने कहा- ऊर्जा बदलाव में निभाएंगे अहम भूमिका

Raydean Enterprises Limited के मैनेजिंग डायरेक्टर समर्थ दक्षिनी ने कहा, "यह फंड जुटाव Raydean की यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है. कंपनी एक स्ट्रक्चर मैन्युफैक्चरर से विकसित होकर अब भारत की रिन्यूएबल, ट्रांसमिशन और कंजम्पशन वैल्यू चेन को सपोर्ट करने वाली इंटीग्रेटेड एनर्जी इंजीनियरिंग प्लेटफॉर्म बन चुकी है."

उन्होंने कहा कि भारत ऊर्जा बदलाव और ग्रिड आधुनिकीकरण के कई दशकों के चक्र के शुरुआती दौर में है और Raydean अपनी मजबूत मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और नए समाधानों के जरिए इस अवसर का लाभ उठाने के लिए तैयार है. इस लेनदेन में Kumbhat Investment Banking ने Raydean Enterprises Limited के एक्सक्लूसिव फाइनेंशियल एडवाइजर के रूप में काम किया.
 

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चार महीने की बिकवाली के बाद भारतीय बाजार में लौटे विदेशी निवेशक, जुलाई में FPIs ने लगाए ₹17,227 करोड़

NSDL के सेक्टर आधारित आंकड़ों के अनुसार, जुलाई के पहले पखवाड़े में विदेशी निवेशकों ने सबसे ज्यादा निवेश कंज्यूमर सर्विसेज सेक्टर में किया. इस सेक्टर में ₹7,361 करोड़ का विदेशी निवेश आया.

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Thursday, 23 July, 2026
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विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय शेयर बाजार में एक बार फिर भरोसा दिखाया है. नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार में शुद्ध रूप से ₹17,227 करोड़ का निवेश किया है. इसके साथ ही FPIs की लगातार चार महीने से जारी बिकवाली का सिलसिला खत्म हो गया है.

22 जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में हुआ निवेश इस साल का केवल दूसरा महीना है, जब विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार में नेट खरीदार बने हैं. इससे पहले फरवरी में FPIs ने ₹22,615 करोड़ का निवेश किया था. हालांकि, जुलाई में खरीदारी के बावजूद साल 2026 में विदेशी निवेशक अब भी कुल मिलाकर शुद्ध विक्रेता बने हुए हैं. 22 जुलाई तक भारतीय इक्विटी बाजार से FPIs की कुल निकासी ₹2.57 लाख करोड़ रही है. साल की शुरुआत में भारी बिकवाली के कारण यह आंकड़ा अभी भी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है.

मार्च से जून तक जारी रही भारी बिकवाली

इससे पहले विदेशी निवेशकों ने लगातार चार महीनों तक भारतीय बाजार से पैसा निकाला था. आंकड़ों के मुताबिक, जून में FPIs ने ₹49,340 करोड़, मई में ₹32,963 करोड़, अप्रैल में ₹60,847 करोड़ और मार्च में ₹1.18 लाख करोड़ की निकासी की थी.

वहीं, जनवरी में विदेशी निवेशकों ने ₹35,962 करोड़ की बिकवाली की थी. इसके बाद फरवरी में वे नेट खरीदार बने थे, लेकिन मार्च से जून तक फिर से बिकवाली का दबाव देखने को मिला.

कंज्यूमर सर्विसेज और मेटल सेक्टर में सबसे ज्यादा निवेश

NSDL के सेक्टर आधारित आंकड़ों के अनुसार, जुलाई के पहले पखवाड़े में विदेशी निवेशकों ने सबसे ज्यादा निवेश कंज्यूमर सर्विसेज सेक्टर में किया. इस सेक्टर में ₹7,361 करोड़ का विदेशी निवेश आया.

इसके बाद मेटल्स और माइनिंग सेक्टर में ₹5,993 करोड़ और हेल्थकेयर सेक्टर में ₹4,101 करोड़ का निवेश हुआ. जुलाई के पहले दो हफ्तों में विदेशी निवेशक लगातार दूसरी पखवाड़े में नेट खरीदार रहे, जो फरवरी की शुरुआत के बाद सबसे मजबूत खरीदारी का दौर रहा. हालांकि, ऑटोमोबाइल, कैपिटल गुड्स और पावर सेक्टर में विदेशी निवेशकों की ओर से अब भी शुद्ध निकासी जारी रही.

विदेशी निवेश में सुधार के संकेत

जुलाई में FPIs की वापसी भारतीय इक्विटी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है. चार महीने की लगातार बिकवाली के बाद विदेशी निवेशकों की खरीदारी से बाजार में सेंटीमेंट को मजबूती मिली है. हालांकि, पूरे साल के आंकड़े अभी भी नकारात्मक बने हुए हैं और विदेशी निवेशकों की कुल हिस्सेदारी में सुधार आने में समय लग सकता है.
 


BitDelta India ने लॉन्च किया CrypTution, क्रिप्टो निवेशकों को मिलेगी लर्निंग, सिमुलेशन और सर्टिफिकेशन की सुविधा

कंपनी के अनुसार, देश के लगभग 40% क्रिप्टो यूजर्स टियर-2 और टियर-3 शहरों से आते हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए इस प्लेटफॉर्म को अलग-अलग भाषाओं और विभिन्न पृष्ठभूमि के लोगों के लिए सुलभ बनाया गया है.

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Thursday, 23 July, 2026
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वर्चुअल डिजिटल एसेट (VDA) ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म BitDelta India ने भारत में क्रिप्टो निवेशकों के लिए पहला स्ट्रक्चर्ड लर्निंग और सर्टिफिकेशन इकोसिस्टम 'CrypTution' लॉन्च किया है. यह प्लेटफॉर्म निवेशकों को क्रिप्टो बाजार में उतरने से पहले ब्लॉकचेन और डिजिटल एसेट्स की शिक्षा, वर्चुअल ट्रेडिंग का व्यावहारिक अनुभव और योग्यता आधारित सर्टिफिकेशन उपलब्ध कराएगा. इस पहल के लिए कंपनी ने अमेरिका एकेडमी ऑफ फाइनेंशियल  मैनेजमेंट (AAFM) के साथ साझेदारी की है.

कंपनी का कहना है कि आज क्रिप्टो से जुड़ी जानकारी इंटरनेट पर आसानी से उपलब्ध है, लेकिन संरचित और भरोसेमंद शिक्षा की कमी के कारण अधिकांश निवेशक अधूरी या बिखरी हुई जानकारी पर निर्भर रहते हैं. CrypTution इसी अंतर को भरने का प्रयास करेगा. इसमें निवेशकों को वास्तविक निवेश से पहले प्रशिक्षण, वर्चुअल मार्केट सिमुलेशन और योग्यता आधारित सर्टिफिकेशन की सुविधा मिलेगी.

जिम्मेदार और सुरक्षित निवेश संस्कृति विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सा

BitDelta India के मुताबिक, देश के लगभग 40% क्रिप्टो यूजर्स टियर-2 और टियर-3 शहरों से आते हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए इस प्लेटफॉर्म को अलग-अलग भाषाओं और विभिन्न पृष्ठभूमि के लोगों के लिए सुलभ बनाया गया है. BitDelta India के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) विकास एम. सचदेवा ने कहा कि जिस तरह म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार में निवेशक शिक्षा ने लोगों की भागीदारी बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई, उसी तरह क्रिप्टो सेक्टर को भी व्यवस्थित शिक्षा की जरूरत है. उन्होंने कहा कि फिलहाल भारत में VDA के प्रति जागरूकता 30% से कम है और हर पांच में से एक सक्रिय निवेशक मानता है कि वह अभी भी इस बाजार को समझने की प्रक्रिया में है. ऐसे में CrypTution जिम्मेदार और सुरक्षित निवेश संस्कृति विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा.

तीन चरणों में होगा प्रशिक्षण

CrypTution का लर्निंग मॉडल 'पढ़ो, सीखो और बढ़ो' के तीन चरणों पर आधारित है.

1. 'पढ़ो' चरण में ब्लॉकचेन, वर्चुअल डिजिटल एसेट्स, बाजार की बुनियादी समझ, सुरक्षा और जोखिम प्रबंधन की पढ़ाई कराई जाएगी.
2.'सीखो' चरण में प्रतिभागियों को बिना वास्तविक पैसा लगाए वर्चुअल मार्केट सिमुलेशन के जरिए ट्रेडिंग का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा.
3. 'बढ़ो' चरण में सफल प्रतिभागियों को BitDelta India के प्लेटफॉर्म पर लाइव मार्केट ट्रेडिंग की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा.

AAFM India के साथ साझेदारी

CrypTution के 'पढ़ो' मॉड्यूल को American Academy of Financial Management (AAFM) India के सहयोग से तैयार किया गया है. AAFM India इस पहल में नॉलेज और एजुकेशन पार्टनर की भूमिका निभाएगा. संस्था को BFSI शिक्षा क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का अनुभव है और वह एक लाख से ज्यादा वित्तीय पेशेवरों को प्रशिक्षण दे चुकी है.

तीन सर्टिफिकेशन कोर्स

CrypTution के तहत अलग-अलग जरूरतों के अनुसार तीन सर्टिफिकेशन कोर्स शुरू किए गए हैं. इनमें शुरुआती निवेशकों के लिए 'Certified Virtual Asset Investor', वित्तीय सलाहकारों के लिए 'Certified Virtual Asset Practitioner' और एडवांस ट्रेडिंग, मार्केट एनालिसिस तथा जोखिम प्रबंधन सीखने के इच्छुक लोगों के लिए 'Certified Virtual Asset Trader' शामिल हैं.

कंपनी के अनुसार, CrypTution केवल सर्टिफिकेट देने तक सीमित नहीं रहेगा. इस प्लेटफॉर्म पर शिक्षार्थियों को वर्चुअल मार्केट सिमुलेशन, मार्केट इंटेलिजेंस, वेबिनार, विशेषज्ञों की मेंटरशिप, परीक्षाएं और कम्युनिटी नेटवर्किंग जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी. कंपनी का लक्ष्य भारत में वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) के क्षेत्र में अधिक जागरूक, प्रशिक्षित और जिम्मेदार निवेशक तैयार करना है.
 


Suzlon और Waaree की बड़ी साझेदारी, आंध्र प्रदेश में बनेगा 201.6 MW का विंड पावर प्रोजेक्ट

कंपनी जमीन अधिग्रहण, टरबाइन की आपूर्ति, बैलेंस ऑफ प्लांट (BoP), इंजीनियरिंग, निर्माण, कमीशनिंग और लंबे समय तक संचालन एवं रखरखाव (O&M) सहित पूरी EPC सेवाएं प्रदान करेगी.

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Thursday, 23 July, 2026
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देश की सबसे बड़ी विंड एनर्जी कंपनी Suzlon Energy को Waaree Group की पहली विंड एनर्जी परियोजना के लिए 201.6 मेगावाट (MW) का बड़ा ऑर्डर मिला है. आंध्र प्रदेश में विकसित होने वाली इस परियोजना के तहत Suzlon अपने DevCo (डेवलपमेंट कंपनी) मॉडल पर जमीन अधिग्रहण, इंजीनियरिंग, खरीद, निर्माण (EPC), टरबाइन की स्थापना और संचालन एवं रखरखाव (O&M) तक की पूरी जिम्मेदारी संभालेगी. यह साझेदारी दोनों कंपनियों के लिए रिन्यूएबल एनर्जी क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम मानी जा रही है.

64 विंड टरबाइन लगाएगी Suzlon

इस परियोजना के तहत Suzlon अपनी S144 विंड टरबाइन जनरेटर (WTG) की 64 यूनिट लगाएगी. प्रत्येक टरबाइन की क्षमता 3.15 मेगावाट होगी. कंपनी जमीन अधिग्रहण, टरबाइन की आपूर्ति, बैलेंस ऑफ प्लांट (BoP), इंजीनियरिंग, निर्माण, कमीशनिंग और लंबे समय तक संचालन एवं रखरखाव (O&M) सहित पूरी EPC सेवाएं प्रदान करेगी.

DevCo मॉडल पर बढ़ रहा जोर

कंपनी के अनुसार, जैसे-जैसे रिन्यूएबल एनर्जी परियोजनाएं बड़ी और जटिल होती जा रही हैं, एंड-टू-एंड DevCo मॉडल की मांग भी बढ़ रही है. यह मॉडल परियोजनाओं के विकास से जुड़े जोखिम कम करने, समय पर निष्पादन और बड़े स्तर पर विस्तार में मदद करता है.

'दो अग्रणी कंपनियों का रणनीतिक गठजोड़'

Suzlon Group के वाइस चेयरमैन गिरीश तांती ने कहा कि यह साझेदारी रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे रिन्यूएबल एनर्जी क्षेत्र की दो प्रमुख कंपनियां एक साथ आई हैं. उनके मुताबिक, Waaree ने सोलर सेक्टर में और Suzlon ने विंड एनर्जी क्षेत्र में मजबूत पहचान बनाई है. अब दोनों कंपनियां ग्राहकों को एकीकृत (Integrated) रिन्यूएबल एनर्जी समाधान उपलब्ध कराने की दिशा में काम करेंगी, जहां अलग-अलग तकनीकों के बजाय समग्र समाधान की मांग बढ़ रही है.

Waaree ने विंड एनर्जी में रखा पहला कदम

Waaree Forever Energies के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पवन अग्रवाल ने कहा कि कंपनी सोलर एनर्जी से आगे बढ़कर विविधीकृत रिन्यूएबल एनर्जी पोर्टफोलियो तैयार कर रही है. उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश में 201.6 मेगावाट की यह विंड एनर्जी परियोजना कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और इससे भारत की बढ़ती स्वच्छ ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी.

Suzlon और Waaree की मजबूत मौजूदगी

करीब 33% बाजार हिस्सेदारी के साथ Suzlon भारत की सबसे बड़ी विंड एनर्जी कंपनी है. वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का राजस्व 1.75 अरब डॉलर से अधिक रहा और 1 जून 2026 तक उसका मार्केट कैप 7.5 अरब डॉलर के पार पहुंच चुका था. कंपनी अब तक 17 देशों में लगभग 21.7 गीगावाट विंड एनर्जी क्षमता स्थापित कर चुकी है.

वहीं, 1990 में स्थापित Waaree Energies भारत की प्रमुख रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियों में शामिल है. कंपनी की वैश्विक सोलर पीवी मॉड्यूल और सोलर सेल निर्माण क्षमता 22.77 गीगावाट है तथा उसका कारोबार भारत समेत 25 से अधिक देशों में फैला हुआ है.
 


ईरान संकट का असर: HPCL-BPCL को हजारों करोड़ का घाटा, पहली तिमाही में भारी नुकसान

वेस्ट एशिया तनाव और महंगे कच्चे तेल ने बिगाड़ा तेल कंपनियों का गणित, HPCL को ₹12,265 करोड़ और BPCL को ₹3,962 करोड़ का नुकसान

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Thursday, 23 July, 2026
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वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का असर अब भारतीय तेल कंपनियों के वित्तीय नतीजों पर दिखाई देने लगा है. सरकारी तेल कंपनियां हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) और भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भारी घाटा उठाना पड़ा है.

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद कंपनियों ने लंबे समय तक पेट्रोल, डीजल और LPG की कीमतों में बड़ा बदलाव नहीं किया, जिससे उन्हें लागत और बिक्री मूल्य के बीच भारी अंतर का सामना करना पड़ा. हालांकि, रिफाइनरी कारोबार से अच्छी कमाई हुई, लेकिन ईंधन बिक्री में हुए नुकसान ने पूरे मुनाफे को खत्म कर दिया.

HPCL को ₹12,265 करोड़ का घाटा

हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने जून तिमाही में 12,265 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा दर्ज किया है. पिछले साल इसी अवधि में कंपनी को 4,111 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था. कंपनी के मुख्य कारोबार (स्टैंडअलोन ऑपरेशंस) के आधार पर देखें तो HPCL को 11,526 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में कंपनी ने 4,371 करोड़ रुपये का लाभ कमाया था.

हालांकि, कंपनी की कुल आय में बढ़ोतरी दर्ज की गई. अप्रैल-जून तिमाही में HPCL की कुल आय बढ़कर 1.45 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 21 प्रतिशत ज्यादा है. लेकिन कच्चे तेल की महंगाई और ईंधन बिक्री में दबाव के कारण आय बढ़ने के बावजूद कंपनी मुनाफे में नहीं आ सकी.

BPCL को 15 तिमाहियों बाद हुआ नुकसान

भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) भी पहली तिमाही में घाटे में रही. कंपनी को अप्रैल-जून 2026 तिमाही में 3,962 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. यह BPCL का करीब 15 तिमाहियों के बाद पहला घाटा है. पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी ने 6,124 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था.

BPCL की कुल आय बढ़कर 1.59 लाख करोड़ रुपये हो गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 1.35 लाख करोड़ रुपये था. यानी कंपनी का कारोबार बढ़ा, लेकिन लागत बढ़ने और मार्जिन घटने के कारण मुनाफा घाटे में बदल गया.

क्यों हुआ इतना बड़ा नुकसान?

तेल कंपनियों के घाटे की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल रही. वेस्ट एशिया में तनाव और ईरान से जुड़े घटनाक्रमों के कारण कच्चे तेल के दामों में भारी तेजी आई.

आमतौर पर कच्चा तेल महंगा होने पर पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाई जाती हैं, ताकि कंपनियां बढ़ी हुई लागत की भरपाई कर सकें. लेकिन इस बार सरकारी तेल कंपनियों ने करीब ढाई महीने तक पेट्रोल और डीजल के दामों में बदलाव नहीं किया.

बाद में मई के दूसरे हिस्से में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 7.50 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा की बढ़ोतरी की गई. साथ ही घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में भी बदलाव हुआ, लेकिन तब तक कंपनियों को बड़ा नुकसान हो चुका था.

आगे भी बनी रह सकती है चुनौती

तेल कंपनियों के लिए आने वाली तिमाहियां भी चुनौतीपूर्ण रह सकती हैं, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है. अगर भू-राजनीतिक तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो ईंधन कीमतों, रिफाइनिंग मार्जिन और कंपनियों के मुनाफे पर इसका असर जारी रह सकता है.


अमेरिका-ईरान तनाव से कच्चे तेल में 2% उछाल, छह हफ्तों के उच्च स्तर पर पहुंची कीमतें

अमेरिकी हमलों और लाल सागर में टैंकरों पर खतरे से बढ़ी आपूर्ति बाधित होने की आशंका, ब्रेंट क्रूड 96 डॉलर प्रति बैरल के पार

Last Modified:
Thursday, 23 July, 2026
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अमेरिका द्वारा ईरान पर नए सिरे से हमले और लाल सागर में तेल टैंकरों को लेकर बढ़ते खतरे के बीच वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में गुरुवार को करीब 2% की तेजी दर्ज की गई. भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका गहरा गई है, जिसके चलते क्रूड ऑयल छह हफ्तों के उच्च स्तर पर पहुंच गया.

ब्रेंट क्रूड 96 डॉलर प्रति बैरल के पार

ब्रेंट क्रूड वायदा 1.93 डॉलर यानी करीब 2% बढ़कर 96 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. इससे पहले बुधवार को भी ब्रेंट क्रूड में 3 डॉलर से ज्यादा की तेजी आई थी. वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 1.44 डॉलर यानी 1.7% बढ़कर 88.27 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. बुधवार को WTI में करीब 3% की बढ़त दर्ज की गई थी.

अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी चिंता

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तेल बाजार में यह तेजी मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण आई है. अमेरिकी सेना ने ईरान पर लगातार 12वीं रात हमले किए. इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में किसी जहाज पर हमला करता है, तो अमेरिका ईरान के पुल या बिजली संयंत्रों को निशाना बनाएगा.

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के दक्षिणी हिस्से में एक तेल टैंकर में विस्फोट के बाद आग लग गई. गार्ड्स के मुताबिक, दो अन्य टैंकरों ने भी अपना रास्ता बदल लिया.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बढ़ा जोखिम

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने यह भी दावा किया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर उसका नियंत्रण है और अमेरिकी सैन्य कार्रवाई जारी रहने तक यह पूरी तरह बंद है. उसने चेतावनी दी कि ईरान के साथ समन्वय के बिना किसी भी तेल टैंकर को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का परिवहन होता है. इस मार्ग में किसी भी तरह की बाधा से वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है.

लाल सागर में भी बढ़ा खतरा

तेल आपूर्ति को लेकर चिंता उस समय और बढ़ गई जब ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी की घोषणा की और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सऊदी तेल टैंकरों को निशाना बनाने की धमकी दी.

हूतियों ने दावा किया कि चेतावनी के बाद करीब 10 जहाजों ने सऊदी बंदरगाहों की ओर अपनी यात्रा रोक दी है, हालांकि इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है.

अमेरिका में बढ़ा कच्चे तेल का भंडार

इस बीच, अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले सप्ताह अमेरिका में कच्चे तेल का भंडार 20 लाख बैरल बढ़ गया. रिफाइनरी गतिविधियों में कमी, निर्यात घटने और आयात बढ़ने के कारण स्टॉक में बढ़ोतरी दर्ज की गई.

 

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मजबूत घरेलू मांग से अर्थव्यवस्था को सहारा, Q1 में 6.6% तक रह सकती है भारत की GDP ग्रोथ: Icra

ऊर्जा लागत और सप्लाई से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद आर्थिक गतिविधियों में मजबूती, जून में 32 महीने के उच्च स्तर पर पहुंची रफ्तार

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Thursday, 23 July, 2026
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भारत की अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में 6.4% से 6.6% की दर से बढ़ने का अनुमान है. रेटिंग एजेंसी इक्रा (Icra) की रिपोर्ट के अनुसार, ऊर्जा लागत में बढ़ोतरी और सप्लाई से जुड़ी चुनौतियों के कारण कई क्षेत्रों के मार्जिन पर दबाव रहा, लेकिन मजबूत आर्थिक गतिविधियों ने विकास दर को सहारा दिया. हालांकि, यह अनुमान पिछली तिमाही (जनवरी-मार्च 2026) में दर्ज 7.8% की GDP वृद्धि से कम है. इससे संकेत मिलता है कि घरेलू अर्थव्यवस्था की रफ्तार मजबूत बने रहने के बावजूद पिछली तिमाही की तुलना में विकास की गति कुछ धीमी हो सकती है.

जून में आर्थिक गतिविधियां 32 महीने के उच्च स्तर पर

इक्रा के बिजनेस एक्टिविटी मॉनिटर के मुताबिक, जून 2026 में आर्थिक गतिविधियां 32 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गईं. जून में इस इंडेक्स में सालाना आधार पर 12% की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि मई में यह वृद्धि 9.4% रही थी. यह इंडेक्स आधिकारिक GDP आंकड़े जारी होने से पहले अर्थव्यवस्था की स्थिति का आकलन करने के लिए 16 प्रमुख संकेतकों को ट्रैक करता है.

13 संकेतकों में दिखा सुधार

रिपोर्ट के अनुसार, जून में बिजनेस एक्टिविटी में सुधार व्यापक स्तर पर देखने को मिला. 16 में से 13 संकेतकों में सालाना आधार पर वृद्धि की रफ्तार तेज हुई. इक्रा ने इसके पीछे कई कारण बताए हैं, जिनमें अमेरिका-ईरान के बीच अस्थायी युद्धविराम, जून में 40% कम बारिश के कारण निर्माण और खनन गतिविधियों के लिए कामकाजी अवधि बढ़ना और अनुकूल आधार प्रभाव शामिल हैं.

अप्रैल-जून तिमाही में बिजनेस एक्टिविटी मॉनिटर में सालाना आधार पर 10% की वृद्धि दर्ज की गई, जो पिछली तिमाही के 9.1% से अधिक है. इस दौरान गैर-कृषि क्षेत्र से जुड़े 17 संकेतकों में से 10 में सालाना आधार पर सुधार देखने को मिला.

औद्योगिक गतिविधियों में मिला-जुला रुख

इक्रा के अनुसार, संशोधित कोर इंडस्ट्रीज इंडेक्स में जून 2026 में सालाना आधार पर 5% की वृद्धि दर्ज की गई. इसके आधार पर एजेंसी ने अनुमान जताया है कि जून में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में 5-6% की वृद्धि हो सकती है.

जुलाई के शुरुआती आंकड़े भी आर्थिक गतिविधियों में मजबूती का संकेत दे रहे हैं. 1 जुलाई से 19 जुलाई के बीच बिजली की मांग में सालाना आधार पर 12.2% की वृद्धि दर्ज की गई, जो जून में रही 10.9% वृद्धि से अधिक है. इसका कारण अधिक तापमान और सामान्य से कम बारिश को माना गया है.

वाहन बिक्री की रफ्तार हुई धीमी

हालांकि, वाहन पंजीकरण में कुछ नरमी देखने को मिली. जुलाई की शुरुआती अवधि में वाहन रजिस्ट्रेशन में सालाना आधार पर 5% की वृद्धि हुई, जबकि जून में यह वृद्धि 23% रही थी. इक्रा के मुताबिक, खपत से जुड़े क्षेत्रों में अलग-अलग गति के कारण वाहन क्षेत्र की रफ्तार प्रभावित हुई है.

कुल मिलाकर, इक्रा का मानना है कि बाहरी चुनौतियों और लागत दबाव के बावजूद घरेलू मांग, औद्योगिक गतिविधियों और सेवा क्षेत्र की मजबूती के चलते भारतीय अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में स्थिर गति से आगे बढ़ने की स्थिति में है.
 


पेपर लीक पर मोदी सरकार का बड़ा फैसला, दोषियों को जल्द सजा दिलाने के लिए बनेंगे फास्ट-ट्रैक कोर्ट

प्रधानमंत्री ने कहा कि फास्ट-ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था लागू करने के लिए संबंधित विभागों और अधिकारियों को सभी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं, ताकि पेपर लीक जैसे मामलों का जल्द निपटारा हो सके.

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Thursday, 23 July, 2026
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देशभर में परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर बढ़ते विवाद के बीच केंद्र सरकार ने पेपर लीक मामलों पर सख्त रुख अपनाया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को पेपर लीक मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की घोषणा की. उन्होंने कहा कि इन अदालतों के जरिए ऐसे मामलों की तेजी से सुनवाई होगी और दोषियों को जल्द एवं कड़ी सजा दिलाई जाएगी. इसके साथ ही संबंधित मंत्रालयों और अधिकारियों को इस फैसले को जल्द लागू करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाने के निर्देश भी दिए गए हैं.

'युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को नहीं बख्शेंगे'

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "हमारे युवाओं का कल्याण और उनका भविष्य सर्वोच्च प्राथमिकता है. पेपर लीक में शामिल लोगों को त्वरित और कड़ी सजा दिलाने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित करने का फैसला किया गया है. यह छात्रों के हितों की रक्षा के लिए सरकार के लगातार प्रयासों का हिस्सा है. जो लोग हमारे युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करेंगे, उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा.

अधिकारियों को दिए जरूरी निर्देश

प्रधानमंत्री ने कहा कि फास्ट-ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था लागू करने के लिए संबंधित विभागों और अधिकारियों को सभी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं, ताकि पेपर लीक जैसे मामलों का जल्द निपटारा हो सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके.

विरोध प्रदर्शनों के बीच आया फैसला

प्रधानमंत्री की यह घोषणा ऐसे समय में आई है, जब नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन हो रहे हैं. इन विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के कई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है.
 


विदेशी निवेशकों का भारत पर फिर बढ़ा भरोसा, मजबूत मांग और FDI-FPI प्रवाह से अर्थव्यवस्था को मिला सहारा: RBI रिपोर्ट

आरबीआई की ताजा 'स्टेट ऑफ द इकोनॉमी' रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में निर्यात और आयात दोनों में तेज वृद्धि दर्ज की गई, जो भारत के बाह्य व्यापार की मजबूत रफ्तार को दर्शाती है.

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Thursday, 23 July, 2026
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ताजा अर्थव्यवस्था रिपोर्ट में देश की आर्थिक स्थिति को लेकर सकारात्मक तस्वीर सामने आई है. रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशी निवेशकों का भारत पर भरोसा फिर मजबूत हुआ है, जबकि घरेलू मांग, औद्योगिक गतिविधियों और सेवा क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन ने आर्थिक विकास को मजबूती दी है. साथ ही, निर्यात-आयात में तेजी और बढ़ते FDI-FPI प्रवाह से आने वाले महीनों में भी अर्थव्यवस्था की रफ्तार बनाए रहने की उम्मीद जताई गई है.

निर्यात-आयात में तेजी से मजबूत हुई आर्थिक रफ्तार

आरबीआई की ताजा 'स्टेट ऑफ द इकोनॉमी' रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में निर्यात और आयात दोनों में तेज वृद्धि दर्ज की गई, जो भारत के बाह्य व्यापार की मजबूत रफ्तार को दर्शाती है. आरबीआई का मानना है कि भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के लागू होने और अन्य द्विपक्षीय व्यापार समझौतों में प्रगति से आने वाले समय में व्यापार को और गति मिलेगी.

हालांकि, रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह अध्ययन आरबीआई के अधिकारियों ने डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता की देखरेख में तैयार किया है और इसमें व्यक्त विचार लेखकों के निजी हैं.

अप्रैल-मई में FDI में बड़ा उछाल

रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 के अप्रैल-मई के दौरान शुद्ध FDI बढ़कर 6.5 अरब डॉलर पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 2.47 अरब डॉलर था. अप्रैल 2026 में मजबूत इक्विटी निवेश और विदेशी निवेशकों की कम निकासी के कारण शुद्ध FDI 6.58 अरब डॉलर रहा, जबकि मई में केवल 7.4 करोड़ डॉलर की मामूली निकासी दर्ज की गई.

जून में FPI प्रवाह भी रहा मजबूत

आरबीआई के अनुसार, जून 2026 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) में भी शुद्ध निवेश दर्ज किया गया. इसकी प्रमुख वजह ऋण बाजार के लिए नीतिगत समर्थन और भू-राजनीतिक तनाव में कमी रही. 20 जुलाई तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने इक्विटी और डेट बाजार में कुल 3.1 अरब डॉलर का निवेश किया.

जापान, सिंगापुर और मॉरीशस से आया सबसे ज्यादा निवेश

रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल-मई 2026 के दौरान भारत में कुल इक्विटी FDI का लगभग 74% हिस्सा जापान, सिंगापुर और मॉरीशस से आया. सबसे अधिक निवेश वित्तीय सेवा क्षेत्र में हुआ, जबकि इसके बाद विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) और रिटेल सेक्टर का स्थान रहा.

वहीं, भारत से बाहर जाने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (ODI) का लगभग 74% हिस्सा अमेरिका, केमैन आइलैंड्स और नीदरलैंड गया. इसमें वित्तीय सेवाओं, बीमा और विनिर्माण क्षेत्रों की हिस्सेदारी 85% से अधिक रही.

विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत, जोखिम नियंत्रण में

रिपोर्ट में कहा गया है कि जून में आरबीआई द्वारा घोषित विशेष स्वैप सुविधा के बाद 8 जून से 17 जुलाई के बीच एफसीएनआर (बी) जमा में 17.4 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई. मार्च 2026 के अंत तक देश का विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत बना रहा और बाह्य क्षेत्र से जुड़े प्रमुख जोखिम नियंत्रण में रहे.

महंगाई पर सीमित असर, मांग बनी हुई मजबूत

आरबीआई का कहना है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून का वितरण भले ही सामान्य नहीं रहा हो, लेकिन पर्याप्त खाद्यान्न भंडार के कारण खाद्य महंगाई पर इसका बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है. जून में खाद्य और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी से खुदरा महंगाई में हल्की तेजी जरूर आई, लेकिन मजबूत घरेलू मांग और औद्योगिक एवं सेवा क्षेत्रों के बेहतर प्रदर्शन ने भारतीय अर्थव्यवस्था को बाहरी अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूती प्रदान की है.
 


सेंसेक्स-निफ्टी में बड़ी गिरावट के बाद आज इन शेयरों में रह सकती है हलचल, जानिए क्यों

बुधवार को बीएसई सेंसेक्स 715.06 अंक यानी 0.92% की गिरावट के साथ 76,755.05 अंक पर बंद हुआ. वहीं, एनएसई निफ्टी 191.45 अंक यानी 0.79% टूटकर 23,996.25 अंक पर बंद हुआ.

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Thursday, 23 July, 2026
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आयातित जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ लगाने के ऐलान से बुधवार को भारतीय शेयर बाजार लगातार तीसरे दिन गिरावट के साथ बंद हुआ. सेंसेक्स 715 अंक टूट गया और निफ्टी 24,000 के नीचे फिसल गया. अब गुरुवार के कारोबार में निवेशकों की नजर एचसीएल टेक के बड़े AI निवेश, कई कंपनियों के अधिग्रहण और इन्फोसिस, सिप्ला व इंडिगो समेत दिग्गज कंपनियों के जून तिमाही नतीजों पर रहेगी, जो बाजार की दिशा तय कर सकते हैं.

4 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति स्वाहा

कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 715.06 अंक यानी 0.92% की गिरावट के साथ 76,755.05 अंक पर बंद हुआ. वहीं, एनएसई निफ्टी 191.45 अंक यानी 0.79% टूटकर 23,996.25 अंक पर बंद हुआ. विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया भी डॉलर के मुकाबले 0.3% कमजोर होकर 96.5650 पर बंद हुआ. बाजार में आई इस गिरावट से बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब 4 लाख करोड़ रुपये घटकर 480 लाख करोड़ रुपये रह गया.

इन ब्लूचिप शेयरों में रही सबसे ज्यादा बिकवाली

सेंसेक्स के 30 में से 23 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए. इंडिगो में सबसे ज्यादा 3.68% की गिरावट रही. इसके अलावा एक्सिस बैंक, इन्फोसिस, एसबीआई, अल्ट्राटेक सीमेंट, आईसीआईसीआई बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, अडानी पोर्ट्स, टेक महिंद्रा और कोटक महिंद्रा बैंक के शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली. दूसरी ओर, इटरनल, हिंदुस्तान यूनिलीवर, पावरग्रिड, एनटीपीसी, टाइटन, एशियन पेंट्स, आईटीसी और ट्रेंट बढ़त के साथ बंद हुए.

अमेरिकी बाजार पर निर्भर फार्मा कंपनियों पर सबसे ज्यादा असर

ट्रंप के टैरिफ प्लान का सबसे अधिक असर उन भारतीय दवा कंपनियों पर पड़ा जिनकी आय का बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजार से आता है. सन फार्मा, डॉ. रेड्डीज लैब, अरबिंदो फार्मा और सिप्ला के शेयरों में 1% से 2% तक की गिरावट दर्ज की गई.

ब्रॉडर मार्केट में भी रही कमजोरी

निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 1.09% और स्मॉलकैप इंडेक्स 1.54% लुढ़क गए. सेक्टोरल इंडेक्स में पीएसयू बैंक और रियल्टी सबसे ज्यादा टूटे, जबकि एफएमसीजी और ऑटो सेक्टर में सीमित बढ़त देखने को मिली.

आज इन शेयरों पर रहेगी बाजार की नजर

गुरुवार के कारोबार में कई कॉरपोरेट घोषणाएं और जून तिमाही (Q1) के नतीजे बाजार की दिशा तय कर सकते हैं. एचसीएल टेक ने ओडिशा के भुवनेश्वर में करीब 730 करोड़ रुपये के निवेश से एआई आधारित डेटा सेंटर और ग्लोबल डेवलपमेंट सेंटर स्थापित करने की योजना पेश की है, जिससे उसका शेयर फोकस में रहेगा. टीवीएस मोटर ने वित्त वर्ष 2026-27 में अंतरराष्ट्रीय कारोबार में मजबूत वृद्धि का भरोसा जताया है. गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स ने अपनी सहायक कंपनी गोडरेज पेट केयर में 200 करोड़ रुपये का निवेश किया है. रुबिकॉन रिसर्च ने अमेरिका में एक मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का अधिग्रहण किया है, एमक्योर फार्मा ने Gennova में अतिरिक्त 12.05% हिस्सेदारी खरीदकर उसे पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी बना लिया है और आईनॉक्स ग्रीन एनर्जी सर्विसेज ने 600 करोड़ रुपये तक फंड जुटाने की मंजूरी दी है.

इन दिग्गज कंपनियों के Q1 नतीजों पर रहेगा फोकस

आज इन्फोसिस, इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो), सिप्ला, एमफैसिस, पीवीआर आईनॉक्स, इंडियन एनर्जी एक्सचेंज (IEX), मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज, चेन्नई पेट्रोलियम, साइएंट, महिंद्रा लाइफस्पेस, नोवार्टिस इंडिया, विशाल मेगा मार्ट, सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक और उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक समेत कई बड़ी कंपनियां जून तिमाही (Q1) के नतीजे जारी करेंगी. ऐसे में बुधवार की गिरावट के बाद गुरुवार के कारोबार में निवेशकों की नजर इन कंपनियों के नतीजों और कॉरपोरेट अपडेट्स पर रहेगी, जो बाजार की अगली दिशा तय कर सकते हैं. 

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)