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दूध महंगा, हाईवे का सफर महंगा, क्या अब पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगेगी आग?
लोकसभा चुनाव के खत्म होते ही जनता को महंगाई का तोहफा मिल गया है. दूध से लेकर टोल टैक्स तक महंगा हो गया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
चुनावी मौसम में जनता के ऊपर जिन राहतों की बरसात होती है, अक्सर इस मौसम के बीतने के बाद उनमें कटौती कर दी जाती है. दूध की कीमतों और और टोल टैक्स में इजाफे को इसके संकेत के रूप में देखा जा सकता है. भले ही सरकार ये कहे कि कीमतों पर उसका कोई नियंत्रण नहीं है, लेकिन चुनावी मौसम में दाम न बढ़ना और उसके तुरंत बाद ही मूल्यवृद्धि हो जाना असलियत बयां करने के लिए काफी है. अमूल दूध के दाम बढ़ाने के बाद मदर डेयरी ने भी झटका दे दिया है. वहीं, आज से देशभर में हाईवे का सफर भी महंगा हो गया है. ऐसे में यह सवाल लाजमी है कि क्या अगला नंबर पेट्रोल-डीजल का है?
...तो टूट जाएगी कमर
पेट्रोल-डीजल की कीमतें देश एक अधिकांश हिस्सों में शतक लगा रही हैं. डीजल भी अब कुछ खास सस्ता नहीं रहा है. मोदी सरकार के अब तक के कार्यकाल में तेल के दाम में बेतहाशा वृद्धि हुई है. डीजल का रिश्ता सीधे तौर पर महंगाई से जुड़ा है, ऐसे में जितनी तेजी से इसके दाम बढ़े, महंगाई का चक्का भी घूमता गया. अब यदि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में फिर से इजाफा होता है तो जनता की मुश्किलों में इजाफा हो जाएगा. आंकड़ों से इतर महंगाई ने मिडिल क्लास का पहले से ही तेल निकाल रखा है. अब तेल के दाम में एक और वृद्धि उसकी कमर तोड़ देगी.
मार्च में हुई थी कमी
पेट्रोल के दाम में आखिरी बार मार्च में बदलाव हुआ था. ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने करीब 22 महीने के इंतजार के बाद पेट्रोल-डीजल के दाम में 2 रुपए की कटौती की थी. हालांकि, माना जा रहा था कि कंपनियां कम से कम 10 रुपए की कमी करेंगी, क्योंकि वह जिस घाटे की दुहाई देती आ रहीं थीं वो अब मुनाफे में तब्दील हो गया है और ऊपर से मौसम भी चुनावी है. लेकिन दिल खोलकर आम आदमी की जेब काटने वालीं कंपनियों ने राहत देने में कंजूसी दिखाई. लगातार कीमतें बढ़ाने के बाद केवल 2 रुपए की कमी की गई.
इस वजह से बढ़ी टेंशन
इस साल मिडिल ईस्ट में तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है. साथ ही ओपेक+ देशों के उत्पादन में कटौती के निर्णय ने भी इसमें इजाफा किया है. रविवार को ओपेक+ (OPEC+) देशों की बैठक में कटौती को जारी रखने का निर्णय लिया गया है. इससे आने वाले समय में कच्चा तेल महंगा हो सकता है. यदि ऐसा होता है, तो देश में पेट्रोल-डीजल के फिर से महंगा होने की आशंका बनी रहेगी. मार्च में जेपी मॉर्गन ने अनुमान जताया था कि रूस (Russia) की तरफ से क्रूड ऑयल (Crude Oil) उत्पादन में की गई कटौती से सितंबर तक ग्लोबल बेंचमार्क क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच सकती हैं. फिलहाल, इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड 81.47 डॉलर प्रति बैरल है, जबकि WTI क्रूड 77.35 डॉलर प्रति बैरल पर बिल रहा है.
कंपनियों को मिलेगा फ्री हैंड
जानकारों का मानना है कि कच्चे तेल के दामों में थोड़े से इजाफे से भी भारत की तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इजाफे के लिए प्रेरित हो जाएंगी. अब चुनावी मौसम बीत चुका है, ऐसे में पूरी संभावना है कि सरकार भी इसके लिए उन्हें हरी झंडी दिखा दे. हालांकि, उनका यह भी कहना है कि लोकसभा चुनाव परिणाम के तुरंत बाद पेट्रोल-डीजल महंगा नहीं होगा. नई सरकार के गठन के कुछ दिन कंपनियों को फ्री हैंड दिया जा सकता है. उनके मुताबिक, सबकुछ इस पर निर्भर करेगा कि कच्चे तेल की कीमतों में कितना उछाल आता है.
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