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अनिल अंबानी ग्रुप से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में ED की बड़ी कार्रवाई, दो मामलों में चार्जशीट दाखिल
Reliance Infrastructure समेत कई कंपनियों और पूर्व अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई, शेल कंपनियों के जरिए फंड डायवर्जन और लेयरिंग का आरोप
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप (Reliance Group) से जुड़ी कंपनियों और पूर्व अधिकारियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के दो अलग-अलग मामलों में चार्जशीट दाखिल की है. एजेंसी ने फंड के डायवर्जन और शेल कंपनियों के जरिए पैसों की लेयरिंग का आरोप लगाया है. इनमें एक मामला रिलायंस इंफ्रा (Reliance Infrastructure Ltd) और दूसरा रिलायंस कम्यूनिकेशंस (RCOM), रिलायंस टेलीकॉम (RTL) और रिलायंस इंफ्राटेल (Reliance Infratel Ltd) से जुड़ा है.
रिलायंस इंफ्रा मामले में चार्जशीट दाखिल
ईडी ने शनिवार को द्वारका स्थित विशेष धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) अदालत में रिलायंस इंफ्रा, रिलायंस ग्रुप के पूर्व अधिकारी सतीश सेठ और अन्य के खिलाफ अभियोजन शिकायत यानी चार्जशीट दाखिल की. यह मामला मुंबई पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंसिस विंग (EOW) की जांच के बाद सामने आया. पुलिस की जांच में आरोप लगाया गया था कि फर्जी दस्तावेजों और बैंक खातों के जरिए शेल कंपनियां बनाई गईं. इन कंपनियों का इस्तेमाल कथित तौर पर फंड ट्रांसफर करने और विदेशों में पैसे भेजने के लिए किया गया. एजेंसी के मुताबिक, यह रकम बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए डायमंड एक्सपोर्ट से जुड़े फर्जी इनवॉइस के जरिए भेजी गई.
NHAI की चार सड़क परियोजनाओं से फंड डायवर्जन का आरोप
ईडी ने कहा कि उसकी जांच में NHAI की ओर से आवंटित चार टोल रोड परियोजनाओं से फंड डायवर्ट करने की एक संगठित योजना का पता चला है. इनमें Trichy-Karur, Trichy-Dindigul, Salem-Ulundurpet और Jaipur-Reengus परियोजनाएं शामिल हैं. एजेंसी के मुताबिक, इन परियोजनाओं को NHAI के अनुदान के साथ-साथ बैंकों और वित्तीय संस्थानों से मिले कर्ज के जरिए वित्तपोषित किया गया था.
शेल कंपनियों के जरिए पैसों की लेयरिंग का आरोप
ईडी के अनुसार, रिलायंस इंफ्रा, परियोजना-विशिष्ट स्पेशल पर्पज व्हीकल्स (SPV) या इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (EPC) ठेकेदारों से रकम निर्माण ठेकेदारों तक पहुंचाई गई. इसके बाद कथित तौर पर यह पैसा ऐसी शेल कंपनियों को ट्रांसफर किया गया, जिनका सड़क निर्माण से कोई संबंध नहीं था. एजेंसी का आरोप है कि बाद में इन लेनदेन को वास्तविक परियोजना खर्च दिखाने के लिए दस्तावेज तैयार किए गए. इसके बाद शेल कंपनियों और डायमंड कारोबारियों के जरिए रकम की लेयरिंग की गई.
सतीश सेठ न्यायिक हिरासत में
ईडी ने सतीश सेठ को जून में गिरफ्तार किया था और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं. सेठ ने 2025 में रिलायंस ग्रुप छोड़ दिया था. एजेंसी ने बताया कि उसने रिलायंस इंफ्रा के पास मौजूद रिलायंस पावर के इक्विटी शेयरों और अचल संपत्तियों के साथ Ksheeraabd Constructions की जमीन भी अटैच की है. इन संपत्तियों की कुल कीमत करीब 187 करोड़ रुपये बताई गई है. ईडी ने कहा कि मामले में अन्य लोगों की भूमिका की जांच अभी जारी है.
RCOM और अन्य कंपनियों से जुड़े मामले में भी सप्लीमेंट्री चार्जशीट
एक अलग मामले में ईडी ने शनिवार को नई दिल्ली के राउज एवेन्यू स्थित विशेष अदालत में रिलायंस कॉम (RCOM), रिलायंस टेलीकॉम (RTL) और रिलायंस इंफ्राटेल (Reliance Infratel) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की. यह कार्रवाई मार्च में दाखिल की गई ईडी की मुख्य चार्जशीट के बाद हुई है. यह मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के कई मामलों से जुड़ा है, जिनमें तीनों कंपनियों पर फंड आधारित और गैर-फंड आधारित क्रेडिट सुविधाओं के कथित डायवर्जन के आरोप हैं.
अमित दोषी और सतीश सेठ भी गिरफ्तार
ईडी के मुताबिक, RCOM मामले में रिलायंस ग्रुप के पूर्व अधिकारी अमित दोषी को जून में गिरफ्तार किया गया था, जबकि सतीश सेठ को जुलाई में गिरफ्तार किया गया. दोनों फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं. अमित दोषी ने 2020 में रिलायंस ग्रुप छोड़ दिया था. मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े इन मामलों में ईडी की जांच आगे भी जारी है और एजेंसी अन्य आरोपियों तथा कथित वित्तीय लेनदेन में शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रही है.
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