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मनीष प्रभात बने इस देश के राजनयिक, जिसके साथ ग्रीन एनर्जी पर भारत कर रहा है काम
मनीष प्रभात भारतीय विदेश सेवा के 1996 कैडर के अधिकारी हैं. वो इससे पहले मॉस्को, येरेवन, वाशिंगटन डी.सी., मिलान और पेरिस में भारत के मिशन की जिम्मेदारी को बखूबी निभाया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
केन्द्र सरकार के विदेश मंत्रालय ने 1996 बैच के आईएफएस अधिकारी मनीष प्रभात को अब डेनमार्क का राजदूत नियुक्त कर दिया है. मनीष अभी तक उजबेकिस्तान के राजदूत थे, लेकिन विदेश मंत्रालय ने अब उन्हें डेनमार्क की जिम्मेदारी दे दी है. मनीष ने 24 सितंबर 2020 को उज्बेकिस्तान में भारत के राजदूत के रूप में पदभार ग्रहण किया था. इससे पहले, वह नई दिल्ली स्थित विदेश मंत्रालय में यूरेशिया डिवीजन के प्रमुख थे.
उज्बेकिस्तान में हुआ था SCO समिट
जब मनीष प्रभात उज्बेकिस्तान में थे उसी समय वहां एससीओ समिट में हुआ था. 2022 में समरकंद में आयोजित हुए इस एससीओ समिट में भारत पहली बार उसका सदस्य बना था. सबसे दिलचस्प बात ये है कि खुद पीएम मोदी इस समिट में भाग लेने के लिए वहां गए थे. इस समिट की अहमियत के बारे में बताते हुए मनीष प्रभात ने कहा था कि भारत और उज्बेकिस्तान का संबंध उनकी सभ्यताओं से जुड़ा हुआ है. दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संबंध रहे हैं. दोनों सामरिक तौर पर जुड़े हुए हैं. उन्होंने कहा कि सामरिक रहते हुए भारत अपने संबंधों को कई मोर्चो पर आगे बढ़ा रहा है. मनीष के राजनयिक रहते ही पीएम मोदी की पहली बार उज्बेकिस्तान के समरकंद में यात्रा हुई थी.
इससे पहले इन देशों में कर चुके हैं काम
मनीष प्रभात लंबे समय से राजनयिक हैं. इससे पहले मॉस्को, येरेवन, वाशिंगटन डी.सी., मिलान और पेरिस में भारत के मिशन की जिम्मेदारी को बखूबी निभाया है. राजदूत मनीष प्रभात 1996 में भारतीय विदेश सेवा में शामिल हुए और उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में मास्टर डिग्री प्राप्त की है. वह हिंदी, अंग्रेजी और रूसी भाषा के जनकार हैं. वह शादीशुदा है और उसकी दो बेटियां हैं.
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