होम / बिजनेस / EU में भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स की मांग में उछाल, निर्यात 37% बढ़ा
EU में भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स की मांग में उछाल, निर्यात 37% बढ़ा
स्मार्टफोन की बढ़ती मांग और निर्यात में वृद्धि से भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री को नए अवसर मिल रहे हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 months ago
भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात ने वित्त वर्ष 2024-25 में एक बड़ी छलांग लगाई है. यूरोपीय यूनियम (EU) को होने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों के निर्यात में 37% की वृद्धि दर्ज की गई है, जो 11.79 अरब डॉलर तक पहुंच गया. इस बढ़ोतरी में स्मार्टफोन का योगदान सबसे बड़ा रहा और यह कुल निर्यात का 60% से अधिक हिस्सा रहा.
स्मार्टफोन की बढ़त, लेकिन iPhone निर्यात में बदलाव का असर
भारत से यूरोप को निर्यात में सबसे अधिक हिस्सेदारी स्मार्टफोन की रही, जबकि इंजीनियरिंग सामान और पेट्रोलियम उत्पाद इसके बाद शीर्ष निर्यात वस्तुओं में शामिल रहे. लेकिन iPhone के मामले में हाल में बड़ा बदलाव देखने को मिला. Apple को अमेरिका की तरह EU में भी शून्य आयात शुल्क का लाभ मिलता है, और पहले भारत में असेम्बल किए गए iPhone मुख्य रूप से नीदरलैंड भेजे जाते थे, जहां से उनका वितरण पूरे EU में होता था.
हालांकि, वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल से नवंबर के बीच Apple ने भारत से भेजे जाने वाले शिपमेंट का बड़ा हिस्सा अब अमेरिका से भेजना शुरू कर दिया. इस वजह से भारत से EU को iPhone निर्यात की मात्रा और मूल्य दोनों में गिरावट आई. वहीं, अमेरिका से iPhone का निर्यात उसी अवधि में तीन गुना बढ़कर 12.7 अरब डॉलर हो गया.
गिरावट के बावजूद कंपनियों ने बढ़ाई EU निर्यात योजना
iPhone निर्यात में कमी के बावजूद इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों ने EU में निर्यात बढ़ाने की महत्वाकांक्षी योजना बनाए रखी है. इंडियन सेलुलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (ICEA) के अध्यक्ष पंकज मोहिंद्रू का कहना है कि यह बदलाव भारत के घरेलू उत्पादन आधारित मॉडल से हटकर वैश्विक मूल्य श्रृंखला के साथ निर्यात-उन्मुख एकीकरण की दिशा में है.
2030-31 तक 50 अरब डॉलर की लक्ष्य रफ्तार
ICEA ने मोबाइल फोन, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और IT हार्डवेयर सहित सभी इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्रों के कारोबार को वर्तमान स्तर से बढ़ाकर वित्त वर्ष 2030-31 तक 50 अरब डॉलर से अधिक तक पहुंचाने की योजना तैयार की है. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का कुल इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 2030-31 तक 500 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंच सकता है, जिससे देश की इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती मिलेगी.
विशेषज्ञों के मुताबिक, EU में निर्यात बढ़ने से भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों को उत्पादन क्षमता बढ़ाने, रोजगार सृजन और टेक्नोलॉजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा. साथ ही, वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की हिस्सेदारी बढ़ेगी, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक लाभ होगा.
टैग्स