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दिल्ली मेट्रो मामला: DMRC की मुफ्त यात्रा का अंत?

Axis Bank व अन्य PSU बैंक DMRC से दिल्ली मेट्रो लाइन के लिए ट्रेनों की लागत की मांग करके एक बड़ा दांव चल सकते हैं, क्योंकि उन्होंने इस प्रोजेक्ट के लिए पैसा दिया था.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

आपने एक पुरानी अमेरिकी कहावत सुनी होगी: "मुफ्त भोजन जैसी कोई चीज नहीं होती" लेकिन दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) के लिए, ऐसा लगता है कि "मुफ्त ट्रेनें" हैं. अब भारतीय बैंकों का एक कंसोर्टियम DMRC द्वारा 2013 से "मुफ्त" उपयोग की जा रही ट्रेनें वापस लेने की योजना बना रहा है. ये बैंक जनवरी में सुप्रीम कोर्ट (SC) में अपनी याचिका दाखिल कर DMRC की मुफ्त यात्रा को रोकने का प्रयास कर सकते हैं, सूत्रों ने बिजनेसवर्ल्ड को बताया. यह मामला दिल्ली मेट्रो एयरपोर्ट लाइन से संबंधित है, जो नई दिल्ली रेलवे स्टेशन को इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से जोड़ता है और फिलहाल पूरी तरह से DMRC के नियंत्रण में है, जो इस लाइन से लगभग एक दशक से लाभ और रेवेन्यू कमा रहा है.

डीएमआरसी को करना है 600 करोड़ रुपये का भुगतान
कानूनी मामलों में बैंकों का प्रतिनिधित्व करने वालों का कहना है कि उन्होंने इस मामले पर भारतीय रिजर्व बैंक से परामर्श लिया है और वे कोर्ट को यह बताने के लिए तैयार हैं कि DMRC को अभी भी 600 करोड़ अतिरिक्त भुगतान करना है, जो पहले ही 2600 करोड़ चुका चुका है, जो ट्रेनों की लागत है. एक दशक से अधिक समय पहले, बैंकों के एक कंसोर्टियम ने दिल्ली मेट्रो एयरपोर्ट लाइन परियोजना के लिए वित्तपोषण किया था. राज्य सरकार के स्वामित्व वाले DMRC ने दिल्ली एयरपोर्ट मेट्रो एक्सप्रेस प्राइवेट लिमिटेड (DAMEPL), जो रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर का विशेष उद्देश्य वाहन है, से लाइन को 2038 तक चलाने और ट्रेनों की लागत और राजस्व की वसूली के लिए विशेष रूप से अनुबंध किया था, लेकिन जून 2013 में, DAMEPL ने सुरक्षा उपायों को लेकर विवाद के बाद मेट्रो लाइन और "ट्रेनें" DMRC को सौंप दीं, क्योंकि लाइन में ट्रेन चलाने के लिए आवश्यक उच्च गति को बनाए रखने के लिए कुछ दोष थे. आज तक, DAMEPL ने DMRC से उन ट्रेनों की लागत के लिए कोई पैसा प्राप्त नहीं किया है, जिन्हें उसने DMRC को सौंपा था और जो लाइन का संचालन कर रहा है और उससे रेवेन्यू कमा रहा है.

डीएमआरसी ने 2600 करोड़ रुपये वसूलने के लिए सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका
अगस्त 2013 में एक आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल का गठन किया गया, जिसने मई 2017 में DAMEPL के पक्ष में निर्णय दिया. इस निर्णय में 2,782.33 करोड़, ब्याज और अन्य खर्चों का भुगतान DAMEPL को किया गया, जिसे बैंकों के कंसोर्टियम द्वारा नियंत्रित एस्क्रो खाते में जमा किया गया. ट्रिब्यूनल के आदेश के बाद, DAMEPL ने दिल्ली हाई कोर्ट और SC में चार अन्य अपीलों में जीत हासिल की, जब तक DMRC को सर्वोच्च न्यायालय में एक दुर्लभ याचिका के जरिए राहत नहीं मिली, जो कि बहुत कम मामलों में होता है. सार्वजनिक हित का हवाला देते हुए, SC ने न केवल DMRC की याचिका को मंजूरी दी, बल्कि DAMEPL को मिलने वाली आर्बिट्रेशन अवार्ड के खिलाफ निर्णय भी दिया, जिसके तहत DAMEPL को लगभग 8000 करोड़ ट्रेनों की लागत और ब्याज के रूप में मिलना था.

अब डीएमआरसी ने क्यूरेटिव पिटीशन में अपने पक्ष में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए 2600 करोड़ रुपये वसूलने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक और याचिका दायर की है, लेकिन डीएएमईपीएल या रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर पर कोई देनदारी नहीं हो सकती क्योंकि डीएमआरसी जो पैसा मांग रही है वह बैंकों के संघ के पास है.

इस खेल में कैसे आया बैंक?
22017 से आज तक, डीएएमईपीएल को मध्यस्थता पुरस्कार जीतने के बाद समाप्ति राशि के हिस्से के रूप में जो पैसा मिला था, वह उन बैंकों के संघ के एस्क्रो खातों में रखा हुआ है, जिन्होंने परियोजना और ट्रेनों की लागत को वित्तपोषित किया था. सौदा यह है कि बैंक, जो सार्वजनिक धन के संरक्षक हैं, सबसे पहले डीएमआरसी से अपनी वित्तपोषण लागत वसूल करेंगे क्योंकि यह ट्रेनें चला रहा है और प्रॉफिट और रेवेन्यू उत्पन्न कर रहा है. 12 दिसंबर 2024 को स्टॉक एक्सचेंजों को एक नोटिस में, रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर ने अपने शेयरधारकों को सूचित किया कि DMRC द्वारा दायर अवमानना याचिका और SC के आदेश के परिणामस्वरूप उसे कोई देनदारी नहीं है.

DAMEPL के एमडी और एक्सिस बैंक के एमडी को कोर्ट ने भेजा नोटिस 
DMRC द्वारा दायर कार्यवाही में, SC ने DAMEPL के एमडी और एक्सिस बैंक के एमडी को नोटिस जारी किया है, जिसमें उनसे यह कारण पूछा गया है कि उनके खिलाफ कोर्ट के 10 अप्रैल 2024 के आदेश के उल्लंघन पर अवमानना कार्यवाही शुरू क्यों नहीं की जानी चाहिए? रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर ने एक्सचेंजों को एक नोटिस में कहा है कि रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर कार्यवाही का हिस्सा नहीं है. 10 अप्रैल 2024 का निर्णय रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर पर कोई देनदारी नहीं डालता क्योंकि उसे DMRC / DAMEPL से कोई पैसा प्राप्त नहीं हुआ है. SPV DAMEPL इस मामले में अपनी रुचि की रक्षा करने के लिए उचित कदम उठाएगी.

जनवरी में ये बैंक दायर करेंगे अपनी याचिकाएं
कंसोर्टियम में शामिल बैंक जोकि सार्वजनिक हित के एक बड़े मामले का प्रतिनिधित्व करते हैं, उनमें UCO बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, एक्सिस बैंक, पंजाब और सिंध बैंक, इंडियन बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, कर्नाटका बैंक और अन्य शामिल हैं. इस प्रकार, हाल ही में एक्सिस बैंक और उसके एमडी को जारी अवमानना नोटिस इसलिए दिया गया क्योंकि यह कंसोर्टियम का प्रमुख बैंक था और अन्य PSU बैंकों और ऋणदाताओं के साथ; और DAMEPL का एस्क्रो एजेंट था. जनवरी में, ये बैंक भी अपनी याचिकाएं दायर करेंगे, परियोजना वित्तपोषण की लागत वसूलने के लिए और DMRC को एक दशक से अधिक समय तक दी गई मुफ्त यात्रा पर सवाल उठाएंगे. यह जानकारी एक कानूनी अधिकारी ने बैंक पक्ष से बिजनेसवर्ल्ड को दी है. 

दस्तावेजों से पता चलता है कि DMRC ने दिनांक 10.04.2024 के क्यूरेटिव जजमेंट के बाद अपने संचार में एक्सिस बैंक को सभी उधारदाताओं द्वारा प्राप्त सभी धनराशि वापस करने के लिए लिखा था क्योंकि राशियां बैंकों के पास हैं और DAMEPL द्वारा कोई राशि विनियोजित/रखी नहीं गई थी. मेट्रो एक्सप्रेस लाइन की कीमत 8000 करोड़ रुपये यानी एक अरब डॉलर से ज्यादा है.


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