जीएसटी दर कटौती पर संदेह, उपभोक्ता मांग रहे एंटी-प्रॉफिटियरिंग व्यवस्था की वापसी

लोकलसर्कल्स सर्वे में 87% लोगों ने कहा– सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि कंपनियां जीएसटी राहत का फायदा कीमतों में कमी के रूप में उपभोक्ताओं तक पहुंचाएं

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Saturday, 13 September, 2025
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उपभोक्ताओं का एक बड़ा वर्ग मानता है कि जीएसटी दरों में कटौती का फायदा कंपनियां कीमतों में कमी के रूप में ग्राहकों तक नहीं पहुंचातीं. लोकलसर्कल्स के एक सर्वे के अनुसार, 87 प्रतिशत लोगों ने सरकार से एंटी-प्रॉफिटियरिंग व्यवस्था को फिर से सक्रिय करने की मांग की है ताकि दर कटौती का लाभ सुनिश्चित रूप से उपभोक्ताओं तक पहुंचे.

सर्वे में देशभर के 314 जिलों से 39 हजार से अधिक उपभोक्ताओं की राय शामिल हुई. इसमें करीब तीन-चौथाई उपभोक्ताओं ने कहा कि उन्हें संदेह है कि कंपनियां अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) घटाकर राहत देंगी. केवल 25 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने भरोसा जताया कि दर कटौती का लाभ मिलेगा. 42 प्रतिशत ने कहा कि वे आंशिक रूप से आश्वस्त हैं जबकि 33 प्रतिशत ने बिल्कुल भरोसा नहीं जताया.

जीएसटी प्रणाली में 22 सितंबर से लागू होने वाले बदलावों (जीएसटी 2.0) के तहत कई वस्तुएं और सेवाएं अब 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत स्लैब में लाई जाएंगी. केवल तथाकथित "सिन" या "डी-मेरिट" वस्तुओं पर 40 प्रतिशत दर लागू रहेगी. कई सामानों को 18 या 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत और कुछ को 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत स्लैब में डाला गया है.

एंटी-प्रॉफिटियरिंग तंत्र नवंबर 2017 में केंद्रीय जीएसटी अधिनियम की धारा 171 के तहत बनाया गया था ताकि दर कटौती और इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचे. हालांकि दिसंबर 2022 में इसे भंग कर इसकी जिम्मेदारी प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) को सौंप दी गई. रिपोर्टों के मुताबिक, सीसीआई को एंटी-प्रॉफिटियरिंग शिकायतों से निपटने में विशेषज्ञता और तालमेल की कमी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा.

अक्टूबर 2024 से नई शिकायतें जीएसटी अपीलीय अधिकरण (GSTAT) को भेजी जा रही हैं. लेकिन पुराने मामलों में बैकलॉग बना हुआ है और अप्रैल 2025 तक पुराने ढांचे में नई शिकायतें लेना बंद हो गया. इससे प्रवर्तन की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं.

लोकलसर्कल्स का कहना है कि उपभोक्ताओं का अविश्वास पिछले अनुभवों से जुड़ा है. दरअसल, पहले दौर की दर कटौतियों के बावजूद कई कंपनियों ने इनपुट लागत बढ़ने का हवाला देकर कीमतें कम नहीं कीं बल्कि कहीं-कहीं उन्हें बढ़ा भी दिया.

सर्वे में सामने आया है कि यह चिंता देशभर में समान रूप से मौजूद है, चाहे उपभोक्ता टियर-1 शहरों से हों या छोटे टियर-3 और टियर-4 जिलों से.

विशेषज्ञों का मानना है कि जीएसटी 2.0 के तहत यदि सरकार उपभोक्ताओं के हित में दो साल के लिए एक विशेष एंटी-प्रॉफिटियरिंग प्राधिकरण सक्रिय करती है तो शिकायतों का समाधान तेज होगा और अनुपालन भी बेहतर होगा. सरकार का फैसला यह तय करेगा कि जीएसटी 2.0 उपभोक्ताओं को वास्तविक राहत देगा या केवल दरों के फेरबदल तक ही सीमित रहेगा.

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राजस्थान में 1 लाख करोड़ का निवेश करेगी सेरेंटिका, औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन को मिलेगी रफ्तार

कंपनी का लक्ष्य हर साल 67 अरब यूनिट स्वच्छ बिजली की आपूर्ति करना है, जिससे लगभग 4.7 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी लाई जा सकेगी.

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Monday, 29 June, 2026
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राजस्थान देश के नवीकरणीय ऊर्जा हब के रूप में तेजी से उभर रहा है. इसी कड़ी में सेरेंटिका रिन्यूएबल्स ने राज्य में 1 लाख करोड़ रुपये निवेश करने की योजना की घोषणा की है. कंपनी इस निवेश के जरिए औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन, ऊर्जा भंडारण और चौबीसों घंटे स्वच्छ बिजली आपूर्ति के लिए बड़े पैमाने पर ग्रीन एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करेगी.

कंपनी अब तक राज्य में 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश कर चुकी है. कंपनी की कुल सौर ऊर्जा क्षमता का 50 फीसदी से अधिक हिस्सा राजस्थान में स्थापित है. बीकानेर और जैसलमेर इसके प्रमुख केंद्र हैं, जबकि अगले चरण में भड़ला तक विस्तार किया जाएगा.

27,000 मेगावाट की पाइपलाइन पर काम

कंपनी की प्रस्तावित 27,000 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा पाइपलाइन में राजस्थान की परियोजनाओं की अहम भूमिका है. वर्तमान में कंपनी के पास 2,500 मेगावाट से अधिक की परिचालन क्षमता है, जबकि 3,000 मेगावाट से ज्यादा की परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं. कंपनी का लक्ष्य हर साल 67 अरब यूनिट स्वच्छ बिजली की आपूर्ति करना है, जिससे लगभग 4.7 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी लाई जा सकेगी.

बीकानेर में बनेगी बड़ी बैटरी स्टोरेज परियोजना

सेरेंटिका बीकानेर में क्षेत्र की सबसे बड़ी बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) परियोजनाओं में से एक विकसित कर रही है. पहले चरण में 200 मेगावाट-घंटा क्षमता स्थापित की जाएगी. इसके बाद दूसरे चरण में 800 मेगावाट-घंटा क्षमता जोड़ी जाएगी, जिसके अगले तीन महीनों में चालू होने की उम्मीद है. यह परियोजना उद्योगों को चौबीसों घंटे निर्बाध स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराने में मदद करेगी.

फतेहगढ़ में बढ़ेगी सौर ऊर्जा क्षमता

वित्त वर्ष 2026-27 में कंपनी फतेहगढ़ स्थित अपने सौर ऊर्जा प्लेटफॉर्म का विस्तार करेगी. पहले चरण में 1,270 मेगावाट पीक क्षमता जोड़ी जाएगी. इसके बाद 500 मेगावाट अतिरिक्त सौर क्षमता और 2,500 मेगावाट-घंटा की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली स्थापित की जाएगी.

सीईओ ने क्या कहा?

सेरेंटिका रिन्यूएबल्स के मुख्य कार्यपालक अधिकारी अक्षय हीरानंदानी ने कहा कि राजस्थान कंपनी की विकास रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है और यह राज्य नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से अग्रणी बन रहा है. उन्होंने कहा कि उद्योगों को चौबीसों घंटे विश्वसनीय स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराना भारत के ऊर्जा परिवर्तन का अहम आधार है और बीकानेर की बैटरी स्टोरेज परियोजना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी.

सामाजिक विकास पर भी फोकस

बुनियादी ढांचे के विकास के साथ कंपनी सामाजिक क्षेत्र में भी निवेश कर रही है. एडइंडिया और 'विकास' कार्यक्रमों के माध्यम से कंपनी ने राजस्थान में शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण और स्थानीय बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 3.8 करोड़ रुपये से अधिक की प्रतिबद्धता जताई है.

औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन का नया केंद्र बनेगा राजस्थान

देश में औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्रों में बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है. ऐसे में नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण के एकीकृत मॉडल के जरिए सेरेंटिका राजस्थान को स्वच्छ, किफायती और विश्वसनीय ऊर्जा के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है.

इन निवेशों से न सिर्फ राज्य में ग्रीन एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा, बल्कि राजस्थान औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन के राष्ट्रीय मॉडल के रूप में भी उभर सकता है.

 


हाउसिंग मार्केट की रफ्तार पड़ी धीमी, दूसरी तिमाही में घरों की बिक्री 6% घटी: रिपोर्ट

ANAROCK रिसर्च के अनुसार, दूसरी तिमाही में देश के सात प्रमुख शहरों में करीब 90,715 आवासीय इकाइयों की बिक्री हुई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 96,285 यूनिट था.

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Monday, 29 June, 2026
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देश के शीर्ष सात शहरों में आवासीय बाजार की रफ्तार दूसरी तिमाही में कुछ धीमी पड़ती दिखाई दी है. ANAROCK की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल-जून 2026 तिमाही में घरों की बिक्री सालाना आधार पर 6 फीसदी घटकर 90,715 यूनिट रह गई. हालांकि, इस दौरान नए प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग में 7 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई. पश्चिम एशिया में जारी युद्ध, सप्लाई चेन में व्यवधान और आर्थिक अनिश्चितताओं का असर रियल एस्टेट बाजार पर देखने को मिला.

6 फीसदी घटी घरों की बिक्री

ANAROCK रिसर्च के अनुसार, दूसरी तिमाही में देश के सात प्रमुख शहरों में करीब 90,715 आवासीय इकाइयों की बिक्री हुई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 96,285 यूनिट था. तिमाही आधार पर भी बिक्री में 11 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) और बेंगलुरु ने कुल बिक्री में सबसे बड़ा योगदान दिया. दोनों शहरों में मिलाकर लगभग 43,995 घरों की बिक्री हुई, जो कुल बिक्री का करीब 48 फीसदी है.

सिर्फ तीन शहरों में बढ़ी बिक्री

सालाना आधार पर केवल कोलकाता, हैदराबाद और बेंगलुरु में ही घरों की बिक्री बढ़ी. कोलकाता में 10 फीसदी, हैदराबाद में 2 फीसदी और बेंगलुरु में 1 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई. वहीं पुणे में सबसे ज्यादा 15 फीसदी की गिरावट देखने को मिली. एनसीआर, मुंबई और चेन्नई में भी बिक्री में कमी दर्ज की गई.

नए प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग में बढ़ोतरी

बिक्री में नरमी के बावजूद नई आवासीय परियोजनाओं की लॉन्चिंग में तेजी बनी रही. दूसरी तिमाही में लगभग 1.06 लाख नई यूनिट्स लॉन्च की गईं, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 7 फीसदी अधिक हैं. हालांकि, तिमाही आधार पर नई सप्लाई में 16 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. विशेषज्ञों का मानना है कि खरीदारों की कमजोर होती धारणा और वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते डेवलपर्स ने नई परियोजनाओं की रफ्तार कुछ धीमी की है.

MMR और बेंगलुरु रहे सबसे आगे

नई सप्लाई के मामले में मुंबई महानगर क्षेत्र और बेंगलुरु सबसे आगे रहे. दोनों शहरों ने कुल नई सप्लाई में 53 फीसदी हिस्सेदारी दर्ज की. मुंबई में 34,555 नई यूनिट्स लॉन्च की गईं, जबकि बेंगलुरु में 21,670 यूनिट्स बाजार में आईं. हैदराबाद में नई लॉन्चिंग में सबसे ज्यादा 53 फीसदी की सालाना वृद्धि दर्ज की गई.

प्रीमियम और लग्जरी घरों की मांग मजबूत

रिपोर्ट के मुताबिक, 80 लाख रुपये से 1.5 करोड़ रुपये कीमत वाले घरों की सप्लाई सबसे ज्यादा 27 फीसदी रही. इसके बाद 1.5 करोड़ से 2.5 करोड़ रुपये के सेगमेंट की हिस्सेदारी 25 फीसदी रही. वहीं 2.5 करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाले लग्जरी घरों की हिस्सेदारी 22 फीसदी रही. किफायती आवास की हिस्सेदारी घटकर केवल 6 फीसदी रह गई है.

प्रॉपर्टी कीमतों में भी बढ़ोतरी

शीर्ष सात शहरों में औसत आवासीय कीमतों में सालाना आधार पर 7 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई. हालांकि, तिमाही आधार पर कीमतों में सिर्फ 1 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. एनसीआर में सबसे ज्यादा 13 फीसदी की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि बेंगलुरु में कीमतें 8 फीसदी बढ़ीं.

इन्वेंट्री बढ़ी, बेंगलुरु सबसे आगे

दूसरी तिमाही के अंत तक शीर्ष सात शहरों में उपलब्ध आवासीय इन्वेंट्री बढ़कर 6.16 लाख यूनिट से अधिक हो गई, जो पिछले साल के मुकाबले 10 फीसदी ज्यादा है. बेंगलुरु में सबसे अधिक 34 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि एनसीआर ऐसा एकमात्र शहर रहा जहां इन्वेंट्री लगभग स्थिर बनी रही.

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

ANAROCK ग्रुप के चेयरमैन अनुज पुरी के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी युद्ध, सप्लाई चेन में व्यवधान और आईटी क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी अनिश्चितताओं का असर खरीदारों के रुख पर पड़ा है. उन्होंने कहा कि अब बाजार पहले की तुलना में अधिक संतुलित दिखाई दे रहा है, जहां नई सप्लाई और मांग के बीच संतुलन बन रहा है. प्रीमियम हाउसिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर और रोजगार केंद्रों वाले शहरों में मांग अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है.
 


सेशेल्स में भी मिलेगी UPI से पेमेंट की सुविधा, 10 देशों तक पहुंचा भारतीय पेमेंट नेटवर्क

सेशेल्स में UPI सेवा शुरू होने से भारतीय पर्यटक बिना विदेशी मुद्रा की चिंता किए सीधे डिजिटल भुगतान कर सकेंगे. इससे भुगतान प्रक्रिया आसान, तेज और सुरक्षित बनेगी.

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Monday, 29 June, 2026
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भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) लगातार वैश्विक पहचान हासिल कर रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सेशेल्स यात्रा के दौरान हुए समझौते के बाद अब अफ्रीकी देश सेशेल्स में भी भारतीय UPI सेवा शुरू होगी. इसके साथ ही भारत की यह डिजिटल पेमेंट प्रणाली दुनिया के 10 देशों तक पहुंच गई है, जिससे भारतीय पर्यटकों और कारोबारियों को विदेशों में आसान और सुरक्षित भुगतान की सुविधा मिलेगी.

सेशेल्स में भी शुरू होगी UPI सेवा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया सेशेल्स यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए. इनमें सेशेल्स में UPI लागू करने का समझौता भी शामिल है. इस कदम से भारत और सेशेल्स के बीच डिजिटल भुगतान और फिनटेक सहयोग को नई मजबूती मिलेगी.

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी देते हुए कहा कि सेशेल्स यात्रा के दौरान कई अहम समझौते हुए हैं, जिनमें UPI और जन औषधि से जुड़े समझौते प्रमुख हैं. इसके अलावा दोनों देश जलवायु परिवर्तन, ग्रीन हाइड्रोजन, ऊर्जा और ब्लू इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाएंगे.

अब 10 देशों तक पहुंचा भारतीय UPI

भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली UPI तेजी से वैश्विक विस्तार कर रही है. सेशेल्स के जुड़ने के बाद अब भारतीय पर्यटक और उपभोक्ता कुल 10 देशों में UPI के जरिए भुगतान कर सकेंगे. इन देशों में सिंगापुर, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, मॉरीशस, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कतर, फ्रांस, कंबोडिया और अब सेशेल्स शामिल हैं.

भारतीय पर्यटकों को मिलेगा बड़ा फायदा

सेशेल्स हिंद महासागर में स्थित एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है, जो अपने खूबसूरत समुद्र तटों, समुद्री पर्यटन और लक्जरी रिसॉर्ट्स के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है. हर साल करीब 15 हजार भारतीय पर्यटक इस द्वीपीय देश की यात्रा करते हैं. UPI सेवा शुरू होने से भारतीय पर्यटक बिना विदेशी मुद्रा की चिंता किए सीधे डिजिटल भुगतान कर सकेंगे. इससे भुगतान प्रक्रिया आसान, तेज और सुरक्षित बनेगी.

भारतीयों के लिए वीजा-फ्री है सेशेल्स

भारतीय नागरिकों को सेशेल्स की यात्रा के लिए पहले से वीजा लेने की आवश्यकता नहीं होती. हालांकि पर्यटन के उद्देश्य से जाने वाले यात्रियों को हवाई अड्डे पर पहुंचने के बाद विजिटर परमिट लेना होता है. सेशेल्स की कुल आबादी में करीब 5 प्रतिशत लोग भारतीय मूल के हैं, जिससे दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध भी काफी मजबूत हैं.

व्यापारिक रिश्ते भी हो रहे मजबूत

भारत और सेशेल्स के बीच व्यापारिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं. भारत से चावल, दवाइयां, कपड़े, वाहन और उनके स्पेयर पार्ट्स, मशीनरी तथा प्लास्टिक उत्पादों का निर्यात सेशेल्स को किया जाता है. विशेषज्ञों का मानना है कि UPI की शुरुआत से दोनों देशों के बीच व्यापार, पर्यटन और डिजिटल अर्थव्यवस्था को और गति मिलेगी.
 


Kratikal Tech IPO: 39.7 करोड़ रुपये का इश्यू 30 जून से खुलेगा, जानें प्राइस बैंड और पूरी डिटेल

Kratikal Tech का SME IPO 30 जून 2026 को सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा और निवेशक 2 जुलाई तक इसमें बोली लगा सकेंगे. एंकर निवेशकों के लिए यह इश्यू 29 जून को ही खुल जाएगा.

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Monday, 29 June, 2026
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शेयर बाजार में निवेशकों के लिए एक और नया अवसर आने वाला है. एआई आधारित साइबर सुरक्षा कंपनी Kratikal Tech अपना 39.7 करोड़ रुपये का SME IPO 30 जून से खोलने जा रही है. कंपनी ने इश्यू का प्राइस बैंड 128 से 135 रुपये प्रति शेयर तय किया है. निवेशक 2 जुलाई तक इस आईपीओ में आवेदन कर सकते हैं. जुटाई गई रकम का इस्तेमाल कंपनी अपने विदेशी कारोबार के विस्तार, नए प्रोडक्ट्स और बिजनेस ग्रोथ पर करेगी.

30 जून से खुलेगा IPO, 2 जुलाई तक निवेश का मौका

Kratikal Tech का SME IPO 30 जून 2026 को सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा और निवेशक 2 जुलाई तक इसमें बोली लगा सकेंगे. एंकर निवेशकों के लिए यह इश्यू 29 जून को ही खुल जाएगा. कंपनी इस इश्यू के जरिए 29.4 लाख नए इक्विटी शेयर जारी करेगी. यह पूरी तरह फ्रेश इश्यू है, यानी इसमें कोई ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल नहीं है. इससे जुटाई गई पूरी राशि कंपनी के विस्तार और कारोबारी जरूरतों में इस्तेमाल की जाएगी.

7 जुलाई को हो सकती है लिस्टिंग

कंपनी के अनुसार, शेयरों का आवंटन पूरा होने के बाद Kratikal Tech के शेयरों की संभावित लिस्टिंग 7 जुलाई 2026 को BSE SME प्लेटफॉर्म पर हो सकती है. इस इश्यू का प्रबंधन Beeline Capital Advisors कर रही है.

विदेशी कारोबार बढ़ाने पर रहेगा फोकस

आईपीओ से जुटाई गई राशि का उपयोग कंपनी अपने अंतरराष्ट्रीय कारोबार को मजबूत करने में करेगी. कंपनी अपनी यूएई स्थित सहायक इकाई Threatcop FZ LLC और अमेरिका स्थित Threatcop AI Inc में निवेश की योजना बना रही है. इसके अलावा, कंपनी बिक्री और मार्केटिंग गतिविधियों को बढ़ाने, नई नियुक्तियां करने, नए उत्पाद विकसित करने और सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों को पूरा करने पर भी खर्च करेगी.

क्या करती है Kratikal Tech?

Kratikal Tech एआई आधारित साइबर सुरक्षा समाधान उपलब्ध कराने वाली SaaS कंपनी है. कंपनी अपने ‘Threatcop’ प्लेटफॉर्म के जरिए संस्थानों और कंपनियों को साइबर सुरक्षा से जुड़े आधुनिक समाधान प्रदान करती है. कंपनी अपने Kratikal ब्रांड के तहत विभिन्न साइबर सिक्योरिटी सेवाएं भी उपलब्ध कराती है. वर्तमान में कंपनी के पास 677 से अधिक ग्राहकों का मजबूत आधार मौजूद है.

वित्तीय प्रदर्शन भी मजबूत

वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का प्रदर्शन मजबूत रहा है. इस दौरान कंपनी ने 36.72 करोड़ रुपये का राजस्व दर्ज किया, जबकि शुद्ध लाभ 6.14 करोड़ रुपये रहा. साइबर सुरक्षा और एआई जैसे तेजी से बढ़ते सेक्टर में काम करने वाली इस कंपनी का आईपीओ निवेशकों के लिए एक नया अवसर माना जा रहा है. हालांकि, किसी भी आईपीओ में निवेश करने से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, जोखिम और वैल्यूएशन का आकलन करना जरूरी है.
 


PFC-REC विलय को मंजूरी, बनेगी देश की सबसे बड़ी पावर फाइनेंस कंपनी; शेयरों में हलचल

11 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की संयुक्त लोन बुक के साथ उभरेगा नया वित्तीय दिग्गज, शेयरधारकों को मिलेगा शेयर-स्वैप का लाभ

Last Modified:
Monday, 29 June, 2026
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सरकारी क्षेत्र की दो प्रमुख पावर फाइनेंस कंपनियां पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (PFC) और रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन (REC) के प्रस्तावित विलय की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. दोनों कंपनियों के बोर्ड ने मर्जर योजना को मंजूरी दे दी है. इस विलय के बाद 11 लाख करोड़ रुपये से अधिक की संयुक्त लोन बुक वाली देश की सबसे बड़ी पावर फाइनेंस कंपनी अस्तित्व में आएगी. सरकार के पुनर्गठन कार्यक्रम के तहत हो रहा यह विलय न केवल पावर सेक्टर के लिए अहम माना जा रहा है, बल्कि निवेशकों के लिए भी कई महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आएगा.

शेयर-स्वैप रेश्यो तय

मर्जर योजना के तहत REC का PFC में विलय किया जाएगा. इसके लिए शेयर-स्वैप रेश्यो भी तय कर दिया गया है. योजना के अनुसार REC के प्रत्येक 100 शेयरों (प्रत्येक मूल्य 10 रुपये) के बदले निवेशकों को PFC के 88 शेयर दिए जाएंगे. यदि किसी निवेशक के पास रिकॉर्ड डेट पर REC के 100 शेयर होंगे, तो विलय के बाद उसे PFC के 88 शेयर मिलेंगे और REC के उसके मौजूदा शेयर समाप्त हो जाएंगे.

सरकार और PFC की हिस्सेदारी

वर्तमान में PFC के पास REC में 52.63 प्रतिशत हिस्सेदारी है. वहीं केंद्र सरकार की PFC में 55.99 प्रतिशत हिस्सेदारी है. हालांकि REC में सरकार की कोई प्रत्यक्ष हिस्सेदारी नहीं है. सरकार ने केंद्रीय बजट 2026 के दौरान दोनों कंपनियों के पुनर्गठन का संकेत दिया था. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फरवरी में इस दिशा में कदम उठाने की घोषणा की थी.

अभी कई मंजूरियां मिलना बाकी

हालांकि बोर्ड की मंजूरी मिलने के बाद भी यह प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है. मर्जर योजना को लागू करने के लिए शेयरधारकों, स्टॉक एक्सचेंजों, सेबी, एनसीएलटी और अन्य नियामकीय संस्थाओं की मंजूरी आवश्यक होगी. इसके अलावा रिकॉर्ड डेट का भी अभी ऐलान नहीं किया गया है. इन सभी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही विलय प्रभावी होगा.

शेयर बाजार की प्रतिक्रिया

मर्जर की खबर के बाद शेयर बाजार में दोनों कंपनियों के शेयरों में अलग-अलग प्रतिक्रिया देखने को मिली. आज खबर लिखे जाने तक  PFC के शेयरों में 1.69 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि REC के शेयरों में 0.27 प्रतिशत की मामूली बढ़त देखने को मिली. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक फिलहाल मर्जर की शर्तों और भविष्य के प्रभावों का आकलन कर रहे हैं.

विशेषज्ञों के अनुसार, PFC अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में दिखाई देता है. वहीं REC फिलहाल मर्जर-आर्बिट्रेज की स्थिति में है, जहां इवेंट आधारित जोखिम अधिक बना हुआ है. उनका कहना है कि सार्वजनिक क्षेत्र की वित्तीय कंपनियों में केवल कमाई ही नहीं, बल्कि कंपनी की संरचना और दीर्घकालिक रणनीति भी निवेश निर्णयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.

पावर सेक्टर को मिल सकती है नई ताकत

विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों कंपनियों के विलय से पूंजी की लागत कम करने, परिचालन क्षमता बढ़ाने और वित्तीय संसाधनों के बेहतर उपयोग में मदद मिलेगी. इससे बिजली क्षेत्र की परियोजनाओं को वित्तपोषण देने की क्षमता भी मजबूत होगी. देश की सबसे बड़ी पावर फाइनेंस कंपनी बनने के बाद नई इकाई पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में अपनी भूमिका और प्रभाव को और मजबूत कर सकती है.
 


हिंद महासागर में भारत की बढ़ी ताकत, सेशेल्स के साथ 1,250 करोड़ रुपये की बड़ी डिफेंस-इन्फ्रा डील

रक्षा, समुद्री सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए भारत देगा वित्तीय सहायता, हिंद महासागर में चीन को संतुलित करने की दिशा में यह एक अहम कदम माना जा रहा है.

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Monday, 29 June, 2026
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हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी रणनीतिक मौजूदगी को और मजबूत करते हुए भारत ने सेशेल्स के साथ 1,250 करोड़ रुपये (150 मिलियन डॉलर) के ‘अंब्रेला लाइन ऑफ क्रेडिट’ समझौते को अंतिम रूप दिया है. इस समझौते के तहत भारत सेशेल्स को रक्षा, समुद्री सुरक्षा, बुनियादी ढांचे और सामाजिक-आर्थिक विकास से जुड़े विभिन्न प्रोजेक्ट्स के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएगा. विशेषज्ञ इसे भारत की ‘सागर’ और ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति के तहत एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक और रणनीतिक उपलब्धि मान रहे हैं.

क्या है अंब्रेला लाइन ऑफ क्रेडिट?

अंब्रेला लाइन ऑफ क्रेडिट एक ऐसा वित्तीय ढांचा है, जिसके तहत सेशेल्स किसी एक परियोजना के बजाय कई क्षेत्रों से जुड़े प्रोजेक्ट्स के लिए इस फंड का उपयोग कर सकेगा. इसमें रक्षा, समुद्री सुरक्षा, स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी परियोजनाएं शामिल हैं.

इस वित्तीय सहायता का प्रबंधन भारतीय निर्यात-आयात बैंक (EXIM Bank) के माध्यम से किया जाएगा. समझौते की एक महत्वपूर्ण शर्त यह भी है कि सेशेल्स इन परियोजनाओं के लिए आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं का एक बड़ा हिस्सा भारत से खरीदेगा, जिससे भारतीय कंपनियों और निर्यातकों को भी लाभ मिलेगा.

हिंद महासागर में क्यों अहम है यह समझौता?

हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों और उसकी ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ रणनीति के बीच भारत और सेशेल्स के बीच यह समझौता काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. सेशेल्स अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्गों के बेहद करीब स्थित है और यहां भारत की मजबूत मौजूदगी समुद्री सुरक्षा के लिहाज से अहम मानी जाती है.

विशेषज्ञों के मुताबिक, इससे समुद्री डकैती, नशीले पदार्थों की तस्करी और अन्य समुद्री अपराधों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी. इसके साथ ही सेशेल्स की तटीय सुरक्षा और सैन्य ढांचे को भी मजबूत किया जा सकेगा.

रक्षा सहयोग को मिलेगी नई मजबूती

भारत और सेशेल्स के बीच रक्षा सहयोग पहले से ही मजबूत रहा है. नए वित्तीय पैकेज के जरिए सेशेल्स की सैन्य और तटीय सुरक्षा क्षमताओं को आधुनिक बनाया जाएगा. इससे दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच समन्वय और सहयोग भी बेहतर होगा.

UPI और डिजिटल सहयोग को बढ़ावा

विदेश सचिव विक्रम मिस्री के अनुसार, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और सेशेल्स के केंद्रीय बैंक के बीच देश में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) लागू करने को लेकर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं.

इसके अलावा दोनों देशों ने प्रत्यर्पण संधि और शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए अंतरिक्ष अनुसंधान में सहयोग से जुड़े समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए हैं.

AI, साइबर सुरक्षा और हेलीकॉप्टर सहायता की मांग

सेशेल्स ने भारत से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और साइबर सुरक्षा केंद्र स्थापित करने में सहयोग मांगा है. इसके अलावा एक एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराने का अनुरोध भी किया गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन प्रस्तावों पर सकारात्मक विचार करने के संकेत दिए हैं.

द्विपक्षीय संबंधों में नया अध्याय

भारत और सेशेल्स के बीच लंबे समय से मजबूत व्यापारिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंध रहे हैं. नए वित्तीय समझौते के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल भुगतान और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है.

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ भारत की रणनीतिक स्थिति को भी नई मजबूती प्रदान करेगी.
 


Lava International OOH और OTT पर खर्च 30% बढ़ाएगी; चार साल में विज्ञापन बजट 5 गुना बढ़ा

लावा के एमडी सुनील रैना और मार्केटिंग प्रमुख पुरवंश मैत्रेय ने BW Marketing World से कंपनी की बदलती रणनीति, अंतरराष्ट्रीय महत्वाकांक्षाएं, मीडिया मिश्रण और 2026 तथा उसके बाद भरोसे को सबसे बड़ा अंतर पैदा करने वाला कारक मानने पर चर्चा की.

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Monday, 29 June, 2026
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17 साल बाद भी लावा इंटरनेशनल 2008-09 के दौर के उन भारतीय स्मार्टफोन ब्रांडों में शामिल है, जो अब भी बाजार में टिके हुए हैं. ऐसे समय में जब समग्र स्मार्टफोन बाजार लगभग स्थिर बना हुआ है, कंपनी का कहना है कि उसने पिछले चार वर्षों में ग्राहक अनुभव, सेवा और दीर्घकालिक ब्रांड निर्माण पर ध्यान केंद्रित करते हुए 50 प्रतिशत से अधिक की वार्षिक वृद्धि दर्ज की है.

गोवा में आयोजित ‘कम्युनिटी इनसाइडर्स मीट’ के दौरान BW Marketing World ने प्रबंध निदेशक सुनील रैना और मार्केटिंग प्रमुख पुरवंश मैत्रेय से विशेष बातचीत की. इस दौरान लावा की बदलती रणनीति, अंतरराष्ट्रीय योजनाओं, मीडिया मिश्रण और 2026 तथा उसके बाद भरोसे को सबसे बड़ा अंतर पैदा करने वाला कारक मानने पर चर्चा हुई.

लावा की लगातार वृद्धि

स्थिर स्मार्टफोन बाजार में लावा एक निरंतर वृद्धि की कहानी बनकर उभरी है. BW Marketing World से बातचीत में रैना ने कहा, "हमारी पूरी वृद्धि दूसरे ब्रांडों की गिरावट से आ रही है. जब आप एक स्थिर बाजार में बढ़ते हैं, तो आप दूसरों की हिस्सेदारी लेकर बढ़ते हैं. उद्योग खुद नहीं बढ़ रहा है. हर साल हम प्रतिस्पर्धियों से बाजार हिस्सेदारी हासिल कर रहे हैं."

उनके लिए यह केवल स्मार्टफोन का मामला नहीं है, बल्कि लोगों का मामला है. गोवा में आयोजित लावा इनसाइडर्स मीट में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए रैना ने कहा, "एक ब्रांड बनाना एक बच्चे को पालने जैसा है. हमारा उद्देश्य खुद का बचाव करना नहीं है. हमारा उद्देश्य खुद को बेहतर बनाना है."

उन्होंने कहा ''बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने की रणनीति सोची-समझी थी और इसे लंबे समय तक कम चर्चा में रखते हुए लागू किया गया. हमें एहसास हुआ कि यह बाजार कीमत और स्पेसिफिकेशन से बहुत अधिक संचालित होता है. मुझे आपको स्पेसिफिकेशन और कीमत में मात देनी है. यही खेल है. यह एक क्लासिक रेड ओशन है."

रैना ने उद्योग के कामकाज में एक मूलभूत कमी की ओर इशारा किया. उनके अनुसार, कंपनियां अपनी लगभग पूरी ऊर्जा दो से तीन महीने की बिक्री अवधि पर खर्च कर देती हैं और उसके बाद उन दो से चार वर्षों के दौरान लगभग मौन हो जाती हैं, जब ग्राहक वास्तव में उस उत्पाद का उपयोग करता है. लावा ने इसी अंतर को सबसे बड़े अवसर के रूप में देखा और खरीद के बाद के अनुभव को अपनी रणनीति का केंद्र बना दिया.

उनके अनुसार, "हमारी लगभग 70 से 80 प्रतिशत सफलता इस अलग रणनीति से आई है और शेष 20 प्रतिशत उन मूलभूत क्षमताओं से, जिन्हें हमने वर्षों में विकसित किया है, जिनमें विनिर्माण, डिजाइन, बिक्री और वितरण शामिल हैं."

सेवा को बनाया हथियार

खरीद के बाद की सेवा पर फोकस का सबसे स्पष्ट उदाहरण लावा की ‘सर्विस एट होम’ पहल है. यह एक डोरस्टेप रिपेयर मॉडल है, जिसकी शुरुआत करीब दो वर्ष पहले हुई थी. रैना ने कहा, "किसी भी ग्राहक को अनावश्यक रूप से सर्विस सेंटर नहीं जाना चाहिए. इसी कारण हमने सर्विस एट होम की शुरुआत की."

उन्होंने एक ऐसे ग्रामीण दैनिक मजदूर ग्राहक का उदाहरण दिया, जो 1,000 रुपये का फीचर फोन खरीदता है.

700 सर्विस सेंटरों के माध्यम से ग्राहकों को भेजने के बजाय, लावा ने अपने एक लाख रिटेलरों के नेटवर्क को त्वरित रिप्लेसमेंट केंद्रों में बदल दिया, जिससे 6.5 लाख गांवों में एक लाख सेवा केंद्र तैयार हो गए.

मैत्रेय ने कहा, "पिछले वर्ष अकेले हमने 70,000 होम सर्विस अनुरोध पूरे किए. हमारी सर्विस टीम ने 28 लाख किलोमीटर की यात्रा की. जिन समस्याओं को तुरंत ठीक किया जा सकता है, उनके लिए हम 24 से 48 घंटे के भीतर सेवा प्रदान करते हैं. 95 प्रतिशत समस्याओं का समाधान 24 से 48 घंटे के भीतर हो जाता है."

ब्लोटवेयर के खिलाफ रुख

यदि सर्विस एट होम लावा की परिचालन विशेषता है, तो ब्लोटवेयर विरोधी रुख उसकी वैचारिक पहचान है. मैत्रेय ने कहा, "ब्लोटवेयर कुछ और नहीं बल्कि अपच भोजन की तरह है. कुछ ऐसा जिसे आप पचा नहीं सकते. कंपनियां विशेष रूप से सस्ते सेगमेंट में अनचाहे ऐप इंस्टॉल करती हैं. कुछ कंपनियां दो साल पहले तक नोटिफिकेशन भी भेजती थीं. इसमें बहुत पैसा शामिल होता है."

लावा ने अपने Agni 2 डिवाइस से ब्लोटवेयर हटाने और इसे सार्वजनिक रूप से घोषित करने का फैसला किया, जिससे तकनीकी समुदाय में व्यापक चर्चा शुरू हो गई.

रैना ने कहा, "हम मानते हैं कि आपको उसी चीज के लिए भुगतान करना चाहिए, जिसे आपने खरीदा है. किसी और को आपसे लाभ कमाने के लिए आपको भुगतान नहीं करना चाहिए. इस ब्रांड के निर्माण में प्रामाणिकता हमारे लिए एक बहुत मजबूत आधार है."

बड़े निवेश की प्रतिबद्धता

दीर्घकालिक महत्वाकांक्षाओं को बड़े निवेश का समर्थन प्राप्त है. मैत्रेय ने कहा, "अनुसंधान एवं विकास (R&D) में हम पहले ही 1,100 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता कर चुके हैं. हमने 60 प्रतिशत से अधिक स्थानीयकरण के साथ एक चार्जर इकोसिस्टम स्थापित किया है और कंपोनेंट निर्माण में निवेश कर रहे हैं."

हाल ही में जुटाए गए 600 करोड़ रुपये के बारे में रैना ने कहा, "इसका बड़ा हिस्सा R&D में जाएगा, क्योंकि यह पूंजीगत संसाधन है. साथ ही हम स्वयं भी लाभ कमा रहे हैं और उस लाभ का उपयोग मार्केटिंग गतिविधियों के लिए भी किया जाएगा."

लावा का स्थानीयकरण स्तर 60 प्रतिशत से अधिक है, जो भारतीय स्मार्टफोन ब्रांडों में सबसे अधिक है.

रैना ने कहा, "कुछ तकनीकें अभी भी भारत में उपलब्ध नहीं हैं. भारत का पहला सेमीकंडक्टर संयंत्र शुरू हो चुका है, लेकिन वह 28 नैनोमीटर तकनीक के लिए है. स्मार्टफोन चिप तकनीक अभी उससे काफी आगे है."

अंतरराष्ट्रीय विस्तार की तैयारी

लावा की महत्वाकांक्षा अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक भी पहुंच रही है. कंपनी इस जुलाई में Agni सीरीज को यूनाइटेड किंगडम में Amazon के माध्यम से लॉन्च करने की तैयारी कर रही है.

मैत्रेय ने कहा, "कीमत लगभग 400 से 500 पाउंड के बीच होगी. वैश्विक कंपनियां इसी प्रोसेसर को कहीं अधिक कीमत पर पेश करती हैं. 50 प्रतिशत का अंतर बहुत बड़ा होता है. यही अंतर महत्वपूर्ण है."

तीन स्तंभों पर आधारित रणनीति

मार्केटिंग के मोर्चे पर रैना ने लावा की रणनीति को तीन स्तंभों विजिबिलिटी, क्रेडिबिलिटी और प्राइड में परिभाषित किया है.

उन्होंने कहा, "विजिबिलिटी इसलिए क्योंकि एक ब्रांड के रूप में हम पर्याप्त दिखाई नहीं देते. दूसरा स्तंभ है क्रेडिबिलिटी. भारतीय ब्रांडों की पिछली कमजोर गुणवत्ता की छवि के कारण भरोसे की कमी है. हमें उस विश्वसनीयता को फिर से बनाना होगा. तीसरा स्तंभ है प्राइड. जब मैं फोन खरीदूं, तो मुझे उसे लेकर गर्व महसूस होना चाहिए क्योंकि आज फोन यह भी बताता है कि आप कौन हैं."

विज्ञापन बजट में पांच गुना वृद्धि

कंपनी की महत्वाकांक्षाओं के साथ उसका मीडिया मिश्रण भी बदल रहा है. मैत्रेय ने खुलासा किया, "2022 की तुलना में 2026 तक हमारे बजट लगभग पांच गुना बढ़ चुके हैं. इस वर्ष कम से कम 30 प्रतिशत निवेश आउटडोर और OTT माध्यमों की ओर बढ़ाया जाएगा."

उन्होंने कहा कि विश्वसनीयता निर्माण के लिए कंपनी पारंपरिक विज्ञापनों के बजाय टेक क्रिएटर समुदाय पर अधिक ध्यान दे रही है.

रीमा भादुड़ी, BW रिपोर्टर्स

(लेखिका BW Businessworld में सीनियर एडिटोरियल लीड हैं. वह मुख्य रूप से मार्केटिंग, विज्ञापन, एक्सपीरिएंशियल मार्केटिंग और रिटेल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं और BW Marketing World के वर्टिकल पर विशेष नजर रखती हैं.)
 


तीन दशक से ब्रांड जगत को नई दिशा दे रहे अरिजीत रे, रणनीतिक नेतृत्व से दिलाई कंपनियों को नई पहचान

विज्ञापन और मार्केटिंग उद्योग के दिग्गज अरिजीत रे ने रणनीति, रचनात्मकता और उपभोक्ता समझ के दम पर कई बड़े ब्रांड्स को दी नई ऊंचाई

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Monday, 29 June, 2026
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भारत के विज्ञापन और मार्केटिंग जगत के अनुभवी पेशेवर अरिजीत रे ने तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में कई बड़े ब्रांड्स को नई दिशा देने और व्यवसायों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. वर्तमान में द अनलॉक कंपनी के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के रूप में वह रणनीतिक सोच, रचनात्मकता और उपभोक्ता व्यवहार की गहरी समझ के जरिए कंपनियों को विकास के नए अवसर उपलब्ध करा रहे हैं. आज यानी 29 जून को वह अपना जन्मदिन मना रहे हैं, तो आइए इस खास मौके पर हम उनके करियर की यात्रा पर एक नजर डालते हैं.

ऐसे हुई शुरुआत

अरिजीत रे ने अपने करियर की शुरुआत अल्फ्रेड एलन एडवरटाइजिंग से की थी. इसके बाद वर्ष 1992 में वह ट्राइटन कम्युनिकेशंस की स्टार्टअप टीम से जुड़े, जहां उन्होंने गीप बैटरियां, सलोरा और फ्लरीज जैसे ब्रांड्स पर काम किया.

वर्ष 1993 में उन्होंने रेडिफ्यूजन डीवाई एंड आर का रुख किया और गॉडफ्रे फिलिप्स, रोथमैन्स, यूनाइटेड एयरलाइंस, एरिक्सन, कैनन और सिंगर जैसे प्रतिष्ठित ब्रांड्स की जिम्मेदारी संभाली. मैककैन एरिक्सन में उन्होंने नेस्कैफे ब्रांड का नेतृत्व किया और उसके वैश्विक संचार मंच पर भी काम किया.

बाद में रेडिफ्यूजन में वापसी करते हुए वर्ष 2001 में उन्हें कोलकाता शाखा का प्रमुख बनाया गया. उनके नेतृत्व में कार्यालय ने टाटा स्टील, केओ कार्पिन और बिरला सीमेंट जैसे बड़े ग्राहकों के साथ एक मजबूत बहु-ग्राहक इकाई के रूप में पहचान बनाई.

ओगिल्वी से डेंट्सू तक निभाई अहम जिम्मेदारियां

मुंबई में ओगिल्वी के साथ उन्होंने एजेंसी के स्पेशलिस्ट ऑटो प्रैक्टिस ग्रुप का नेतृत्व किया और बजाज पल्सर, डिस्कवर तथा सीएट टायर्स जैसे प्रमुख ब्रांड्स के साथ काम किया. इसके बाद वह साची एंड साची में बिजनेस हेड बने और बाद में मुद्रा (अब डेंट्सू क्रिएटिव) में एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट एवं मुद्रा वेस्ट के प्रमुख के रूप में जुड़े. यहां उन्होंने पश्चिमी भारत में एजेंसी के विस्तार और कारोबार को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

वर्ष 2012 में अरिजीत रे को डेंट्सू कम्युनिकेशंस का मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया गया. इस दौरान उन्होंने कंपनी के व्यवसायिक बदलाव, ग्राहकों के विस्तार और टीम विकास का सफल नेतृत्व किया.

द अनलॉक कंपनी के जरिए दे रहे रणनीतिक समाधान

अपने लंबे अनुभव के आधार पर अरिजीत रे ने द अनलॉक कंपनी की स्थापना की, जो एक स्वतंत्र ब्रांड और बिजनेस कंसल्टिंग फर्म है. यह संस्था व्यवसाय और संचार से जुड़ी रणनीतिक चुनौतियों के समाधान पर काम करती है.

उनके नेतृत्व में यह कंपनी विभिन्न क्षेत्रों की संस्थाओं के साथ काम कर रही है और ब्रांड निर्माण, उपभोक्ता जुड़ाव तथा दीर्घकालिक व्यापारिक विकास में मदद कर रही है.

लोगों को प्राथमिकता देने वाली नेतृत्व शैली

अरिजीत रे अपनी नेतृत्व शैली में लोगों और प्रतिभा को प्राथमिकता देने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने हमेशा अल्पकालिक लाभ के बजाय दीर्घकालिक मूल्य सृजन और उद्देश्य आधारित ब्रांडिंग को बढ़ावा दिया है.

व्यावसायिक समझ और रचनात्मक सोच के संतुलन ने उन्हें ग्राहकों, सहयोगियों और उद्योग जगत के बीच एक विश्वसनीय नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित किया है.

आज उनका करियर अनुकूलन क्षमता, उद्यमशील सोच और प्रभावशाली ब्रांड निर्माण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का उदाहरण माना जाता है. उनके नेतृत्व की यात्रा यह दर्शाती है कि सही रणनीति और दूरदृष्टि के साथ व्यवसायों और ब्रांड्स को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है.
 


MTF में रिकॉर्ड तेजी: उधार लेकर निवेश का बढ़ा क्रेज, 1.33 लाख करोड़ रुपये पर पहुंचा आंकड़ा

रिपोर्ट के अनुसार, MTF सेगमेंट में एनएसई का दबदबा बरकरार है और इसकी बाजार हिस्सेदारी 96 फीसदी है. हालांकि बीएसई ने भी इस क्षेत्र में सालाना आधार पर अच्छी वृद्धि दर्ज की है.

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Monday, 29 June, 2026
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शेयर बाजार में सुधरते सेंटीमेंट, विदेशी निवेशकों की वापसी और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के बीच निवेशकों का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है. इसका असर मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी (MTF) पर भी साफ दिखाई दे रहा है. जून में MTF के तहत निवेश लगातार तीसरे महीने बढ़कर रिकॉर्ड 1.33 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है. यह दर्शाता है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशक उधार लेकर निवेश करने यानी लीवरेज ट्रेडिंग में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं.

लगातार तीसरे महीने बढ़ा MTF निवेश

24 जून तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जून में MTF बुक में मासिक आधार पर 5.9 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई. इससे पहले अप्रैल में 9.7 फीसदी और मई में 8.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी. हालांकि फरवरी में लगातार 10 महीनों की तेजी के बाद पहली बार इसमें गिरावट देखी गई थी. मार्च में बाजार में बढ़ती अस्थिरता और सतर्क निवेशकों के कारण MTF बुक घटकर 1.05 लाख करोड़ रुपये रह गई थी.

इसके बावजूद अक्टूबर 2025 से MTF का कुल आकार लगातार 1 लाख करोड़ रुपये से ऊपर बना हुआ है. ब्रोकरेज कंपनियों की ओर से इस सुविधा का विस्तार किए जाने से भी इसके उपयोग में तेजी आई है.

क्या है मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी

मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी के तहत निवेशकों को शेयर खरीदने के लिए पूरी रकम एक साथ नहीं चुकानी पड़ती. निवेशक केवल कुल निवेश राशि का एक हिस्सा जमा करते हैं, जबकि शेष रकम ब्रोकरेज कंपनियां ब्याज पर उपलब्ध कराती हैं. इससे निवेशकों को कम पूंजी में अधिक निवेश करने का मौका मिलता है.

सुधरते बाजार माहौल से बढ़ा उत्साह

ब्रोकर्स के अनुसार, पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से निवेशकों की धारणा में सुधार आया है. इसके चलते निवेशक अधिक जोखिम उठाने और लीवरेज के जरिए निवेश करने के लिए आगे आ रहे हैं. जून में प्रमुख शेयर सूचकांकों में भी मजबूती देखने को मिली है. 24 जून तक सेंसेक्स में 3.1 फीसदी और निफ्टी में 2.1 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई.

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा MTF, लेकिन जोखिम नियंत्रित

विशेषज्ञों के अनुसार, MTF का आकार रिकॉर्ड स्तर पर जरूर पहुंचा है, लेकिन कुल बाजार पूंजीकरण और दैनिक कारोबार के मुकाबले यह अब भी संतुलित स्थिति में है. उन्होंने कहा कि MTF निवेश कई शेयरों में बंटा हुआ है और किसी एक शेयर में अत्यधिक निवेश नहीं है. किसी एक शेयर में MTF एक्सपोजर करीब 2,200 करोड़ रुपये से अधिक नहीं है, जिससे जोखिम सीमित रहता है.

बढ़ी निवेशकों की भागीदारी

केयरएज रेटिंग्स की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, नकद बाजार में औसत दैनिक कारोबार में सुधार की बड़ी वजह निवेशकों की बढ़ती भागीदारी और MTF गतिविधियों में तेजी रही है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भू-राजनीतिक तनाव कम होने और बाजार में विश्वास बढ़ने से आने वाले समय में पूंजी बाजार की गतिविधियां मजबूत रह सकती हैं.

1 जुलाई से नए नियमों पर रहेगी नजर

हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा पूंजी बाजार में एक्सपोजर से जुड़े नए नियामकीय नियम लागू होने के बाद ट्रेडिंग वॉल्यूम और बाजार गतिविधियों पर असर पड़ सकता है. ये नियम पहले अप्रैल से लागू होने वाले थे, लेकिन बाद में इन्हें टाल दिया गया था. अब संशोधित नियम 1 जुलाई से प्रभावी होंगे.

रिपोर्ट के अनुसार, MTF सेगमेंट में एनएसई का दबदबा बरकरार है और इसकी बाजार हिस्सेदारी 96 फीसदी है. हालांकि बीएसई ने भी इस क्षेत्र में सालाना आधार पर अच्छी वृद्धि दर्ज की है.
 


तेल की कीमतों में गिरावट और FIIs की वापसी से बढ़ा भरोसा, जानिए आज कैसा रहेगा बाजार का माहौल

बीते कारोबारी सत्र में BSE सेंसेक्स 109.25 अंक चढ़कर 77,100.47 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि NSE एनएसई निफ्टी 34.35 अंक की बढ़त के साथ 24,056 पर पहुंच गया.

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Monday, 29 June, 2026
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पिछले कारोबारी सत्र यानी गुरुवार, 25 जून को भारतीय शेयर बाजार सीमित बढ़त के साथ बंद हुआ था. बॉम्बे स्टक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 109.25 अंक चढ़कर 77,100.47 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) एनएसई निफ्टी 34.35 अंक की बढ़त के साथ 24,056 पर पहुंच गया. शुक्रवार को मुहर्रम के अवसर पर बाजार बंद रहा. अब सोमवार को बाजार खुलने से पहले निवेशकों के बीच यह सवाल है कि आज का माहौल कैसा रहेगा. कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट, रुपये में मजबूती और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की चुनिंदा खरीदारी ने बाजार की धारणा को मजबूत किया है, जिससे नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत सकारात्मक रहने की उम्मीद जताई जा रही है.

FIIs के रुख में बदलाव के दो बड़े कारण

बाजार के आंकड़ों के अनुसार 15 जून से 25 जून के बीच नौ कारोबारी सत्रों में से पांच दिन विदेशी संस्थागत निवेशक कैश मार्केट में शुद्ध खरीदार रहे. हालांकि खरीदारी का स्तर अभी सीमित है, लेकिन इससे यह संकेत जरूर मिला है कि विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली का दौर धीरे-धीरे थमता दिखाई दे रहा है. विशेषज्ञों
के मुताबिक विदेशी निवेशकों की धारणा में बदलाव के पीछे दो प्रमुख वजहें हैं:

1. रुपये में मजबूती और स्थिरता

मई के मध्य में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा दबाव में थी, लेकिन हाल के दिनों में रुपये में मजबूती देखने को मिली है. मजबूत और स्थिर रुपया विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार को अधिक आकर्षक बनाता है, क्योंकि ऐसी स्थिति में उन्हें मुद्रा विनिमय से होने वाले नुकसान का जोखिम कम रहता है.

2. कोरिया और ताइवान के बाजारों में दबाव

दक्षिण कोरिया और ताइवान के शेयर बाजारों में बढ़ी अस्थिरता और मुनाफावसूली ने भी वैश्विक निवेशकों का ध्यान भारत की ओर मोड़ा है. दक्षिण कोरिया के बाजार में हाल में एक दिन में भारी गिरावट दर्ज की गई थी, जिससे निवेशकों ने अपेक्षाकृत स्थिर बाजारों की तलाश शुरू की. ऐसे में भारत एक बेहतर विकल्प के रूप में उभरता दिखाई दे रहा है.

कच्चे तेल में गिरावट से मिली राहत

भारत के लिए सबसे सकारात्मक संकेतों में से एक कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट है. ब्रेंट क्रूड 73 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आने से देश के आयात बिल पर दबाव कम होने की उम्मीद है. इससे चालू खाते और भुगतान संतुलन से जुड़ी चिंताएं भी कम हो सकती हैं. तेल कीमतों में नरमी का असर रुपये और बाजार दोनों के लिए सकारात्मक माना जा रहा है.

आज निवेशकों के लिए कैसा रहेगा माहौल

विश्लेषकों का मानना है कि सोमवार को बाजार की शुरुआत सकारात्मक रह सकती है. कच्चे तेल में नरमी, विदेशी निवेशकों की वापसी और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर बनी उम्मीदें निवेशकों के भरोसे को मजबूत कर रही हैं. हालांकि व्यापक खरीदारी का दौर शुरू होने में अभी कुछ समय लग सकता है और वैश्विक बाजारों के संकेतों पर भी निवेशकों की नजर बनी रहेगी. फिलहाल बाजार का रुख सतर्क आशावाद का है और निवेशकों के लिए चुनिंदा सेक्टरों और मजबूत बुनियादी कंपनियों पर नजर रखना बेहतर रणनीति हो सकती है.

इन शेयरों पर रखें नजर
आज के कारोबार में कई बड़े शेयर निवेशकों के रडार पर रहेंगे. आईटी कंपनी Persistent Systems ने जर्मनी की Nagarro SE के अधिग्रहण का ऐलान किया है, जबकि HDFC Bank ने पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती से जुड़े आरोपों की जांच में किसी भी तरह के सबूत न मिलने की जानकारी दी है. Kotak Mahindra Bank नए CEO की तलाश शुरू करने जा रहा है और IRFC के OFS को शानदार प्रतिक्रिया मिलने से सरकार ने करीब 2,084 करोड़ रुपये जुटाए हैं. Transrail Lighting को 459 करोड़ रुपये के नए विदेशी ऑर्डर मिले हैं, वहीं KEC International पर लगा प्रतिबंध हटने से कंपनी फिर से Power Grid के टेंडरों में हिस्सा ले सकेगी. Power Grid ने अपनी उधारी सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव मंजूर किया है, जबकि Adani Ports की क्रेडिट रेटिंग में सुधार हुआ है. फार्मा सेक्टर में Dr Reddy's Laboratories और Aurobindo Pharma के संयंत्रों का USFDA निरीक्षण पूरा हुआ है. Hexaware Technologies को Amazon Bedrock के लिए Anthropic का अधिकृत रीसेलर बनाया गया है. IIFL Finance ने 10,000 करोड़ रुपये तक जुटाने की मंजूरी दी है, Waaree Energies ने अमेरिकी जांच से जुड़े आरोपों पर सफाई दी है और Bajaj Healthcare को Cenobamate टैबलेट के निर्माण व बिक्री के लिए महत्वपूर्ण सिफारिश मिली है. इसके अलावा Puravankara ने अपनी सहायक कंपनी में हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया है, जबकि Rajesh Exports ने ED की तलाशी कार्रवाई की जानकारी दी है. इन सभी घटनाक्रमों के चलते सोमवार के कारोबार में इन शेयरों में अच्छी हलचल देखने को मिल सकती है. 

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)