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'सरोगेट विज्ञापन' पर शराब कंपनियों को सरकार का नोटिस, जानिये ये क्या होता है?

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने जून में सरोगेट या अप्रत्यक्ष विज्ञापन के खिलाफ दिशानिर्देश जारी किए थे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 years ago

नई दिल्ली: आपने टीवी पर पैकेज्ड वॉटर, नॉन एल्कोहॉलिक पेय पदार्थ, सोडा या म्यूजिक सीडी के नाम पर शराब कंपनियों का विज्ञापन देखा होगा, इसे सरोगेट विज्ञापन कहते हैं, मतलब सीधे सीधे नहीं दिखा सकते तो घुमा-फिराकर अपना विज्ञापन करना, क्योंकि देश में शराब का विज्ञापन प्रतिबंधित है. लेकिन मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने करीब आधा दर्जन शराब कंपनियों को नोटिस जारी किया है और इन सरोगेट विज्ञापनों को तुरंत बंद करने को कहा है. 

शराब कंपनियों का जवाब
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इन शराब कंपनियों को नोटिस का जवाब देने के लिये कुछ वक्त दिया गया है. Radico Khaitan के COO अमर सिन्हा का कहना है कि 
"हम पहले ही इन नोटिस का जवाब दे चुके हैं और सभी जरूरी विवरण दे चुके हैं. हमारे पास ऐसे ब्रांड एक्सटेंशन हैं जिनका रेवेन्यू मॉडल है. चूंकि ये एक्सटेंशन लॉन्च के अपने शुरुआती चरण में हैं, इसलिए इनको बढ़ने में कुछ समय लगेगा. हमें उम्मीद है कि आने वाले समय में ये ब्रांड एक्सटेंशन सफल स्टैंडअलोन ब्रांड के रूप में विकसित होंगे. 

इंटरनेशनल स्पिरिट्स एंड वाइंस एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ISWAI) की CEO नीता कपूर का कहना है कि ये सच है कि भारत में विज्ञापन करना बहुत चुनौतीपूर्ण है, खासतौर पर तब जब कोई नया ब्रांड या एक्सटेंशन लॉन्च करना हो. Rediffusion के मैनैजिंग डायरेक्टर संदीप गोयल कहा कहना है कि टॉप शराब ब्रांड अभी भी विज्ञापन कर रहे हैं, नियमों के बावजूद विपणक केवल कानून में खामियों को खोजने के लिए प्रोत्साहित करेंगे."

CCPA के नियम
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने जून में सरोगेट या अप्रत्यक्ष विज्ञापन के खिलाफ दिशानिर्देश जारी किए थे. उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय द्वारा अधिसूचित, ये तत्काल प्रभाव से लागू हो गए. अगस्त में, मंत्रालय ने उद्योग समूहों को कंप्लायंस सुनिश्चित करने का निर्देश दिया, जिसमें नाकाम रहने पर उन्हें "कड़ी कार्रवाई" की चेतावनी दी गई. समूह में ISWAI, इंडियन सोसाइटी ऑफ एडवरटाइजर्स, एडवरटाइजिंग स्टैंडर्ड काउंसिल शामिल थे. आपको बता दें कि 1995 से देश में शराब के विज्ञापन पर प्रतिबंध लगा हुआ है, लेकिन कंपनियां अक्सर दूसरे उत्पादों पर ब्रांड के नाम का इस्तेमाल करके अपना विज्ञापन करती हैं. 

VIDEO: लैपटॉप के बदले ग्राहक को मिला डिटर्जेंट साबुन


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